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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
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इमाम मलिक (الامام مالك) - 1594 हदीस

उन लोगों के लिए तस्मित जो रसूलल्लाह शल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत के अनुसार नोट करते हैं

इमाम मलिक : 1521

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنْ عَطَسَ فَشَمِّتْهُ ثُمَّ إِنْ عَطَسَ فَشَمِّتْهُ ثُمَّ إِنْ عَطَسَ فَشَمِّتْهُ ثُمَّ إِنْ عَطَسَ فَقُلْ إِنَّكَ مَضْنُوكٌقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي بَكْرٍ لَا أَدْرِي أَبَعْدَ الثَّالِثَةِ أَوْ الرَّابِعَةِ

मलिक ने मुझे [अब्दुल्ला बिन अबू बक्र] से [उनके पिता] से बताया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अगर कोई छींकता है, तो तस्सिमित्ला करे। अगर वे फिर से छींकते हैं तो तस्सिमित्ला करें, फिर अगर वे फिर से छींकते हैं तो तस्सिमित्ला करें। अगर वे अभी भी छींक रहे हैं तो कहें; 'तुम्हें सर्दी लग गई है'।" अब्दुल्ला बिन अबू बक्र ने कहा; "मुझे नहीं पता कि तीसरे या चौथे के बाद (कहूँ)।"

अब्दुल्लाह बिन उमर ने उन लोगों की दुआओं का जवाब दिया जो

इमाम मलिक : 1522

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ إِذَا عَطَسَ فَقِيلَ لَهُ يَرْحَمُكَ اللَّهُ قَالَ يَرْحَمُنَا اللَّهُ وَإِيَّاكُمْ وَيَغْفِرُ لَنَا وَلَكُمْ

मुझे बताया गया है कि मलिक (नफी) ने कहा, "जब अब्दुल्लाह बिन उमर छींके, तो किसी ने उनसे दुआ की; "यरहामुकल्लाह (अल्लाह आप पर रहम करे)" तो उन्होंने जवाब दिया; "यरहामुना अल्लाहु वा इय्याकुम वा यघफिरु लाना वा लकुम (अल्लाह मुझ पर और आप पर रहम करे और मेरे और आपके गुनाहों को माफ करे)।"

घर में तस्वीरें लगाने पर प्रतिबंध

इमाम मलिक : 1523

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ أَنَّ رَافِعَ بْنَ إِسْحَقَ مَوْلَى الشِّفَاءِ أَخْبَرَهُ قَالَدَخَلْتُ أَنَا وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي طَلْحَةَ عَلَى أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ نَعُودُهُ فَقَالَ لَنَا أَبُو سَعِيدٍ أَخْبَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ الْمَلَائِكَةَ لَا تَدْخُلُ بَيْتًا فِيهِ تَمَاثِيلُ أَوْ تَصَاوِيرُشَكَّ إِسْحَقُ لَا يَدْرِي أَيَّتَهُمَا قَالَ أَبُو سَعِيدٍ

मलिक ने मुझे [इस्हाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तल्हाह] से बताया कि [रफ़ी बिन इस्हाक], जो अश सयफ़ा का पुराना गुलाम था, ने उसे बताया, उसने कहा, "मैं अब्दुल्लाह बिन अबू तल्हाह के साथ अबू सईद अल खुदरी के घर उनसे मिलने गया था।" तो [अबू सईद] ने हमसे कहा; "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझे बताया कि फ़रिश्ते उस घर में नहीं जाएँगे जिसमें कोई मूर्ति या तस्वीर हो।" इस्हाक को पक्का नहीं पता था कि अबू सईद ने दोनों में से क्या कहा।"

साहल बिन हुनैफ़ ने रसूलल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम के आदेश के अनुसार छवियों के बिना चटाई का उपयोग किया

इमाम मलिक : 1524

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي النَّضْرِ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ أَنَّهُ دَخَلَ عَلَى أَبِي طَلْحَةَ الْأَنْصَارِيِّيَعُودُهُ قَالَ فَوَجَدَ عِنْدَهُ سَهْلَ بْنَ حُنَيْفٍ فَدَعَا أَبُو طَلْحَةَ إِنْسَانًا فَنَزَعَ نَمَطًا مِنْ تَحْتِهِ فَقَالَ لَهُ سَهْلُ بْنُ حُنَيْفٍ لِمَ تَنْزِعُهُ قَالَ لِأَنَّ فِيهِ تَصَاوِيرَ وَقَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِيهَا مَا قَدْ عَلِمْتَ فَقَالَ سَهْلٌ أَلَمْ يَقُلْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَّا مَا كَانَ رَقْمًا فِي ثَوْبٍ قَالَ بَلَى وَلَكِنَّهُ أَطْيَبُ لِنَفْسِي

मलिक ने मुझे [अबू नदलर] से ['उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन 'उतबाह बिन मसूद] से बताया कि वह [अबू तल्हा अल अंसारी] से मिलना चाहता है। अबू अन नदलर ने कहा; "फिर उसने [साहल बिन हुनैफ] को पहले से ही अपने पास पाया। अबू तल्हा ने फिर किसी को बुलाया ताकि वह उसके नीचे रखी चटाई हटा दे। साहल बिन हुनैफ ने पूछा; "तुमने इसे क्यों खींचा?" उसने जवाब दिया; "क्योंकि इसमें एक तस्वीर है, भले ही रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है जैसा कि तुम जानते हो।" फिर साहल ने कहा: "क्या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कपड़े पर लिखी बात के अलावा कुछ नहीं कहा?" उसने कहा: "सच है, लेकिन यह मेरी रूह को ज़्यादा सुकून देता है।"

चित्र बनाने और प्रदर्शित करने पर प्रतिबन्ध

इमाम मलिक : 1525

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّهَا اشْتَرَتْ نُمْرُقَةً فِيهَا تَصَاوِيرُ فَلَمَّا رَآهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَامَ عَلَى الْبَابِ فَلَمْ يَدْخُلْ فَعَرَفَتْ فِي وَجْهِهِ الْكَرَاهِيَةَ وَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَتُوبُ إِلَى اللَّهِ وَإِلَى رَسُولِهِ فَمَاذَا أَذْنَبْتُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَا بَالُ هَذِهِ النُّمْرُقَةِ قَالَتْ اشْتَرَيْتُهَا لَكَ تَقْعُدُ عَلَيْهَا وَتَوَسَّدُهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ أَصْحَابَ هَذِهِ الصُّوَرِ يُعَذَّبُونَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يُقَالُ لَهُمْ أَحْيُوا مَا خَلَقْتُمْ ثُمَّ قَالَ إِنَّ الْبَيْتَ الَّذِي فِيهِ الصُّوَرُ لَا تَدْخُلُهُ الْمَلَائِكَةُ

मलिक ने मुझे [नफी] से [अल कासिम बिन मुहम्मद] से [ऐस्या] पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी से बताया कि उन्होंने एक तस्वीर वाला नुमरुक़ा खरीदा था। जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन्हें देखा, तो वे दरवाज़े के सामने खड़े हो गए और घर के अंदर नहीं गए। ऐस्या ने देखा कि उनके चेहरे पर नफ़रत थी, तो उन्होंने पूछा; "अल्लाह के रसूल, मैं अल्लाह और उनके रसूल से तौबा करती हूँ, मैंने कौन सा गुनाह किया है?" रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "इस तकिये में क्या खराबी है?" उन्होंने जवाब दिया; "मैंने इसे आपके बैठने या तकिये की तरह इस्तेमाल करने के लिए खरीदा है।" फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: “बेशक, जो लोग यह तस्वीर बनाते हैं, उन्हें क़यामत के दिन यातना दी जाएगी। उनसे कहा जाएगा; ‘जो तुमने बनाया है, उसी पर जियो,’ फिर उन्होंने कहा: “बेशक, फ़रिश्ते उस घर में नहीं जाएँगे जिस पर तस्वीर हो।”

रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने लिगावान खाने का हुक्म दिया और दूध से इनकार कर दिया

इमाम मलिक : 1526

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي صَعْصَعَةَ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّهُ قَالَدَخَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْتَ مَيْمُونَةَ بِنْتِ الْحَارِثِ فَإِذَا ضِبَابٌ فِيهَا بَيْضٌ وَمَعَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبَّاسٍ وَخَالِدُ بْنُ الْوَلِيدِ فَقَالَ مِنْ أَيْنَ لَكُمْ هَذَا فَقَالَتْ أَهْدَتْهُ لِي أُخْتِي هُزَيْلَةُ بِنْتُ الْحَارِثِ فَقَالَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ وَخَالِدِ بْنِ الْوَلِيدِ كُلَا فَقَالَا أَوَلَا تَأْكُلُ أَنْتَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَالَ إِنِّي تَحْضُرُنِي مِنْ اللَّهِ حَاضِرَةٌ قَالَتْ مَيْمُونَةُ أَنَسْقِيكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مِنْ لَبَنٍ عِنْدَنَا فَقَالَ نَعَمْ فَلَمَّا شَرِبَ قَالَ مِنْ أَيْنَ لَكُمْ هَذَا فَقَالَتْ أَهْدَتْهُ لِي أُخْتِي هُزَيْلَةُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرَأَيْتِكِ جَارِيَتَكِ الَّتِي كُنْتِ اسْتَأْمَرْتِينِي فِي عِتْقِهَا أَعْطِيهَا أُخْتَكِ وَصِلِي بِهَا رَحِمَكِ تَرْعَى عَلَيْهَا فَإِنَّهُ خَيْرٌ لَكِ

मुझे बताया गया है कि [अब्दुर्रहमान बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुर्रहमान बिन अबू शा'शाह] से [सुलेमान बिन यासर] के मलिक ने कहा "रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मैमूना बिन्त अल हारिस के घर में दाखिल हुए, जाहिर तौर पर अंदर कई मॉनिटर छिपकलियाँ अपने अंडों के साथ थीं। वह अब्दुल्लाह बिन अब्बास और खालिद बिन वालिद के साथ थे। उन्होंने पूछा: "ये कहाँ से हैं?" मैमूना ने उत्तर दिया, "मेरी बहन, हुदज़ैला बिन्त अल हरीथ ने मुझे यह दिया था।" उन्होंने अब्दुल्लाह बिन अब्बास और खालिद बिन वालिद से कहा: "तुम दोनों इसे खाओ।" उन्होंने पूछा; "अल्लाह के रसूल, आप इसे क्यों नहीं खाते?" ' उन्होंने उत्तर दिया: "वास्तव में, अल्लाह की ओर से एक भोजन आया है।" मैमूना ने पूछा; "क्या आप चाहेंगे कि हम आपको दूध दें?" उन्होंने उत्तर दिया: "हाँ।" "मेरी बहन, हुदज़ैला ने मुझे एक तोहफ़ा दिया।" रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तुम अपनी उस दासी के बारे में क्या सोचते हो जिसे तुमने एक बार मुझसे आज़ाद करने के लिए कहा था? उसे अपनी बहन को दे दो (वापस कर दो) और दोस्ती जारी रखो ताकि वह उसका ध्यान रखे क्योंकि यह तुम्हारे लिए बेहतर है।'"

मॉनिटर वाल्व मांस खाने पर कानून

इमाम मलिक : 1527

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ عَنْ خَالِدِ بْنِ الْوَلِيدِ بْنِ الْمُغِيرَةِأَنَّهُ دَخَلَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْتَ مَيْمُونَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأُتِيَ بِضَبٍّ مَحْنُوذٍ فَأَهْوَى إِلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِيَدِهِ فَقَالَ بَعْضُ النِّسْوَةِ اللَّاتِي فِي بَيْتِ مَيْمُونَةَ أَخْبِرُوا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمَا يُرِيدُ أَنْ يَأْكُلَ مِنْهُ فَقِيلَ هُوَ ضَبٌّ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَرَفَعَ يَدَهُ فَقُلْتُ أَحَرَامٌ هُوَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَالَ لَا وَلَكِنَّهُ لَمْ يَكُنْ بِأَرْضِ قَوْمِي فَأَجِدُنِي أَعَافُهُ قَالَ خَالِدٌ فَاجْتَرَرْتُهُ فَأَكَلْتُهُ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَنْظُرُ

मलिक ने मुझे [इब्न शिहाब] से [अबू उमामा बिन सहल बिन हुनैफ] से [अब्दुल्ला बिन अब्बास] से [खालिद बिन वालिद बिन अल मुगीरा] से बताया है कि वह और पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी मैमूना के घर में दाखिल हुए। फिर उन्हें ग्रिल्ड मॉनिटर लिज़र्ड का मांस परोसा गया, फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसे लेने के लिए अपना हाथ बढ़ाया, लेकिन वहां मौजूद महिलाओं ने कहा; "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को बताओ कि वह क्या खाना चाहते हैं!" तो उनसे कहा गया; "यह मॉनिटर लिज़र्ड का मांस है, हे अल्लाह के रसूल।" तो उन्होंने फिर से अपना हाथ उठाया। खालिद बिन वालिद ने पूछा; "क्या यह हराम है, हे अल्लाह के रसूल?" "फिर मैंने उसे काटा और खाया, जबकि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम देख रहे थे।"

मॉनिटर वाल्व मांस खाने पर कानून

इमाम मलिक : 1528

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَجُلًا نَادَى رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا تَرَى فِي الضَّبِّ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَسْتُ بِآكِلِهِ وَلَا بِمُحَرِّمِهِ

मलिक ने मुझे [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [अब्दुल्ला बिन उमर] बताया कि एक आदमी ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पुकारा; “अल्लाह के रसूल, आप छिपकली के मांस के बारे में क्या सोचते हैं?” रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: “मैं इसे नहीं खाता और इसे हराम नहीं करता।”

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बिना वजह कुत्ता पालने पर रोक लगा दी है

इमाम मलिक : 1529

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُصَيْفَةَ أَنَّ السَّائِبَ بْنَ يَزِيدَ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ سَمِعَ سُفْيَانَ بْنَ أَبِي زُهَيْرٍ وَهُوَ رَجُلٌ مِنْ أَزْدِ شَنُوءَةَ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يُحَدِّثُ نَاسًا مَعَهُ عِنْدَ بَابِ الْمَسْجِدِ فَقَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ اقْتَنَى كَلْبًا لَا يُغْنِي عَنْهُ زَرْعًا وَلَا ضَرْعًا نَقَصَ مِنْ عَمَلِهِ كُلَّ يَوْمٍ قِيرَاطٌ قَالَ أَنْتَ سَمِعْتَ هَذَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ إِي وَرَبِّ هَذَا الْمَسْجِدِ

मलिक ने मुझे [यज़ीद बिन हुशैफ़ा] से बताया कि [जैसा कि सायब बिन यज़ीद] ने कहा कि उन्होंने उनसे कहा था कि उन्होंने [सुफ़यान बिन अबू ज़ुहैर] को सुना - वह एक आदमी था जो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का दोस्त था, अज़दी स्यानुआ से आया था, वह मस्जिद के दरवाज़े पर लोगों को हदीस सुना रहा था - उसने कहा "मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: 'जो कोई भी ऐसा कुत्ता पालता है जो फ़सलों या जानवरों की रखवाली के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है, तो उसका दान हर दिन एक किरथ कम हो जाएगा।" जैसा कि सायब बिन यज़ीद ने पूछा; "क्या आपने यह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना?" उन्होंने जवाब दिया; "हाँ, इस मस्जिद के रब के लिए।"

प्रशिक्षित कुत्तों के अलावा अन्य कुत्तों को प्रशिक्षित करने वालों के लिए पुरस्कार कम कर दिए गए हैं

इमाम मलिक : 1530

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ اقْتَنَى كَلْبًا إِلَّا كَلْبًا ضَارِيًا أَوْ كَلْبَ مَاشِيَةٍ نَقَصَ مِنْ عَمَلِهِ كُلَّ يَوْمٍ قِيرَاطَانِ

मलिक (नफी) ने मुझे (अब्दुल्ला बिन उमर) बताया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जो कोई ट्रेंड कुत्ते या जानवरों की रखवाली के लिए कुत्ते के अलावा कोई और कुत्ता पालता है, उसकी आदत हर दिन दो किरथ कम हो जाएगी।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कुत्ते को मारने का आदेश दिया

इमाम मलिक : 1531

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَرَ بِقَتْلِ الْكِلَابِ

मलिक (नफी) ने मुझे (अब्दुल्ला बिन उमर) बताया कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कुत्तों को मारने का हुक्म दिया है।

क्षेत्र के आधार पर जनसंख्या की विशेषताएँ

इमाम मलिक : 1532

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ رَأْسُ الْكُفْرِ نَحْوَ الْمَشْرِقِ وَالْفَخْرُ وَالْخُيَلَاءُ فِي أَهْلِ الْخَيْلِ وَالْإِبِلِ وَالْفَدَّادِينَ أَهْلِ الْوَبَرِ وَالسَّكِينَةُ فِي أَهْلِ الْغَنَمِ

मुझे मलिक (अबू अज़ ज़िनाद) ने (अल अराज) से (अबू हुरैरा) बताया है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "कुफ़्र की जड़ पूरब से है, जबकि घमंड और अहंकार घोड़ों और ऊँटों के मालिकों में पाया जाता है। जहाँ तक फ़दाद की बात है, वह बद्दूओं में पाया जाता है और शांति बकरियों के मालिकों में पाई जाती है।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि बकरियां मुसलमानों के लिए सबसे अच्छा खजाना हैं

इमाम मलिक : 1533

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي صَعْصَعَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ أَنَّهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُوشِكُ أَنْ يَكُونَ خَيْرَ مَالِ الْمُسْلِمِ غَنَمٌ يَتْبَعُ بِهَا شَعَفَ الْجِبَالِ وَمَوَاقِعَ الْقَطْرِ يَفِرُّ بِدِينِهِ مِنْ الْفِتَنِ

मुझे बताया गया है कि मलिक (अब्दुर्रहमान बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुर्रहमान बिन अबू शाहशाह) ने (अपने पिता) अबू सईद अल खुदरी से कहा, "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "एक मुसलमान के लिए सबसे अच्छी दौलत बकरियां हैं; बकरी के साथ वह पहाड़ों की चोटियों और उन जगहों पर गए जहां बारिश हुई, और अपने धर्म को कई तरह की बदनामी से बचाया।"

मालिक की अनुमति के बिना मवेशियों का दूध निकालने पर प्रतिबंध

इमाम मलिक : 1534

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَحْتَلِبَنَّ أَحَدٌ مَاشِيَةَ أَحَدٍ بِغَيْرِ إِذْنِهِ أَيُحِبُّ أَحَدُكُمْ أَنْ تُؤْتَى مَشْرُبَتُهُ فَتُكْسَرَ خِزَانَتُهُ فَيُنْتَقَلَ طَعَامُهُ وَإِنَّمَا تَخْزُنُ لَهُمْ ضُرُوعُ مَوَاشِيهِمْ أَطْعِمَاتِهِمْ فَلَا يَحْتَلِبَنَّ أَحَدٌ مَاشِيَةَ أَحَدٍ إِلَّا بِإِذْنِهِ

मलिक (नफी) ने मुझे (इब्न उमर) बताया कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "किसी को भी मालिक की इजाज़त के बिना किसी दूसरे के जानवर का दूध न निकालने दो। क्या तुम चाहोगे कि उसके कमरे में जाकर, अलमारी तोड़ दी जाए और खाना निकाल दिया जाए? सिर्फ़ जानवरों के दूध के थैले ही वह जगह हैं जहाँ उनका खाना रखा जाता है, इसलिए कोई भी किसी दूसरे के जानवर का दूध उसकी इजाज़त के बिना न निकाले।"

कलीसियाओं में प्रार्थना करने की अपेक्षा भोजन को प्राथमिकता दें

इमाम मलिक : 1535

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ ابْنَ عُمَرَكَانَ يُقَرَّبُ إِلَيْهِ عَشَاؤُهُ فَيَسْمَعُ قِرَاءَةَ الْإِمَامِ وَهُوَ فِي بَيْتِهِ فَلَا يَعْجَلُ عَنْ طَعَامِهِ حَتَّى يَقْضِيَ حَاجَتَهُ مِنْهُ

मलिक ने मुझे [नफी] से बताया कि जब [इब्न उमर] का खाना तैयार हो गया, तो उन्होंने इमाम को नमाज़ पढ़ते हुए सुना, जबकि वह अभी भी अपने घर में थे। इसलिए उन्होंने अपना खाना तब तक जल्दी नहीं किया जब तक वह खत्म नहीं कर लेते।

तेल में गिरने वाले चूहों के संबंध में रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम का फतवा

इमाम मलिक : 1536

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ عَنْ مَيْمُونَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُئِلَ عَنْ الْفَأْرَةِ تَقَعُ فِي السَّمْنِ فَقَالَ انْزِعُوهَا وَمَا حَوْلَهَا فَاطْرَحُوهُ

मुझे बताया गया है कि मलिक [इब्न शिहाब] से [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] से [अब्दुल्ला बिन अब्बास] से [मैमुना] पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक बार घी में गिरे चूहे के बारे में पूछा गया था। तो उन्होंने जवाब दिया: "(चूहे) को ले लो, और उसके आस-पास जो कुछ भी है उसे फेंक दो।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने घोड़ों, महिलाओं और घरों का डर बताया

इमाम मलिक : 1537

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي حَازِمِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ السَّاعِدِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنْ كَانَ فَفِي الْفَرَسِ وَالْمَرْأَةِ وَالْمَسْكَنِ يَعْنِي الشُّؤْمَ

मलिक ने मुझे [अबू हाज़िम बिन दीनार] से [साहल बिन साद अस सईदी] के हवाले से बताया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अगर कुछ है, तो वह घोड़ों, औरतों और घरों में है।" इसका मतलब है नेगेटिव (निराशावादी) विश्वास।

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने औरतों, घरों और घोड़ों को सबसे बुरा बताया है

इमाम मलिक : 1538

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ حَمْزَةَ وَسَالِمٍ ابْنَيْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الشُّؤْمُ فِي الدَّارِ وَالْمَرْأَةِ وَالْفَرَسِ

मलिक ने मुझे [इब्न शिहाब] से [हमज़ा] और [सलीम] से अब्दुल्लाह बिन उमर के बेटे, [अब्दुल्ला बिन उमर] से बताया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यह विश्वास कि कुछ बुरी किस्मत का कारण बन सकता है, घरों, महिलाओं और घोड़ों में है।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का हुक्म है कि बेपनाह घर छोड़ दो

इमाम मलिक : 1539

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَجَاءَتْ امْرَأَةٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ دَارٌ سَكَنَّاهَا وَالْعَدَدُ كَثِيرٌ وَالْمَالُ وَافِرٌ فَقَلَّ الْعَدَدُ وَذَهَبَ الْمَالُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَعُوهَا ذَمِيمَةً

मलिक (याह्या बिन सईद) ने मुझसे कहा; "एक औरत रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास आई और कहा: 'ऐ रसूलल्लाह, हम एक घर में रहते थे, उसमें रहने वालों की संख्या ज़्यादा थी, और दौलत भी बहुत थी। फिर जब रहने वालों की संख्या कम हो गई और दौलत खत्म हो गई, तो रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: "घर की बेइज्ज़ती हो।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दूध पिलाने के लिए अच्छे नाम वाले लोगों को चुना

इमाम मलिक : 1540

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لِلَقْحَةٍ تُحْلَبُ مَنْ يَحْلُبُ هَذِهِ فَقَامَ رَجُلٌ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا اسْمُكَ فَقَالَ لَهُ الرَّجُلُ مُرَّةُ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اجْلِسْ ثُمَّ قَالَ مَنْ يَحْلُبُ هَذِهِ فَقَامَ رَجُلٌ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا اسْمُكَ فَقَالَ حَرْبٌ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اجْلِسْ ثُمَّ قَالَ مَنْ يَحْلُبُ هَذِهِ فَقَامَ رَجُلٌ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا اسْمُكَ فَقَالَ يَعِيشُ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ احْلُبْ

मलिक ने मुझे [याह्या बिन सईद] से बताया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक ऊँट के बारे में कहा जो बच्चा देने वाली थी और फिर उसका दूध निकाला: "इसका दूध कौन दुहेगा?" फिर एक आदमी खड़ा हुआ, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा: "तुम्हारा नाम क्या है?" उस आदमी ने जवाब दिया; "मैं मुर्रा हूँ।" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "बैठ जाओ!" उन्होंने फिर पूछा: "इसका दूध कौन दुहेगा?" वहाँ एक आदमी खड़ा था। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा: "तुम्हारा नाम क्या है?" उस आदमी ने जवाब दिया, "मैं हरब हूँ।" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "बैठ जाओ!" उन्होंने फिर पूछा: "इसका दूध कौन दुहेगा?" फिर एक आदमी खड़ा हुआ। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा: "तुम्हारा नाम क्या है?" उस आदमी ने जवाब दिया; "हाँ।" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उससे कहा: "इसका दूध निकालो!"