Imam Malik : 1501
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ خُبَيْبِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ أَوْ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَبْعَةٌ يُظِلُّهُمْ اللَّهُ فِي ظِلِّهِ يَوْمَ لَا ظِلَّ إِلَّا ظِلُّهُ إِمَامٌ عَادِلٌ وَشَابٌّ نَشَأَ فِي عِبَادَةِ اللَّهِ وَرَجُلٌ قَلْبُهُ مُعَلَّقٌ بِالْمَسْجِدِ إِذَا خَرَجَ مِنْهُ حَتَّى يَعُودَ إِلَيْهِ وَرَجُلَانِ تَحَابَّا فِي اللَّهِ اجْتَمَعَا عَلَى ذَلِكَ وَتَفَرَّقَا وَرَجُلٌ ذَكَرَ اللَّهَ خَالِيًا فَفَاضَتْ عَيْنَاهُ وَرَجُلٌ دَعَتْهُ ذَاتُ حَسَبٍ وَجَمَالٍ فَقَالَ إِنِّي أَخَافُ اللَّهَ وَرَجُلٌ تَصَدَّقَ بِصَدَقَةٍ فَأَخْفَاهَا حَتَّى لَا تَعْلَمَ شِمَالُهُ مَا تُنْفِقُ يَمِينُهُ
हमरा मलिक स [खुबैब बिन अब्दुररहमान अल-अंसारी] स [हफश बिन अशिम] स [अबू सईद अल खुदरी] स कहल गेल अछि, या [अबू हुरैरा] स ओ कहला अछि, 'अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे ओहि दिन सात समूह क लोक कए अल्लाह क छाया भेटत जखन हुनकर छाया कए छोड़ि कोनो छाया नहि होएत; एकटा न्यायी पुजारी। अल्लाह के इबादत में पलल बढ़ल युवक। एकटा एहन युवक जकर दिल मस्जिद स जुड़ल अछि। दू गोट युवक जे अल्लाह के कारण एक दोसरा स प्रेम करैत छल, हुनकर कारण स भेंट आ अलग भ गेल। जे व्यक्ति एकांत में अल्लाह के ज़िकर करै छै ओकरा तखन नोर बहाय छै। एकटा युवक केँ व्यभिचार करबाक लेल एकटा पद आ सुन्दर महिला द्वारा आमंत्रित कयल गेल छल आ ओ कहलनि; 'सत्ते हम अल्लाह सँ डरैत छी'। आ जे आदमी दक्षिणा दैत अछि, तखन ओकरा नुका लैत अछि जाहि सँ ओकर बामा हाथ नहि बुझि जाय जे ओकर दहिना हाथ की द' रहल अछि'।
Imam Malik : 1502
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا أَحَبَّ اللَّهُ الْعَبْدَ قَالَ لِجِبْرِيلَ قَدْ أَحْبَبْتُ فُلَانًا فَأَحِبَّهُ فَيُحِبُّهُ جِبْرِيلُ ثُمَّ يُنَادِي فِي أَهْلِ السَّمَاءِ إِنَّ اللَّهَ قَدْ أَحَبَّ فُلَانًا فَأَحِبُّوهُ فَيُحِبُّهُ أَهْلُ السَّمَاءِ ثُمَّ يُوضَعُ لَهُ الْقَبُولُ فِي الْأَرْضِ وَإِذَا أَبْغَضَ اللَّهُ الْعَبْدَقَالَ مَالِك لَا أَحْسِبُهُ إِلَّا أَنَّهُ قَالَ فِي الْبُغْضِ مِثْلَ ذَلِكَ
हमरा [सुहैल बिन अबू सालिह] स मालिक स [अपन पिता] स [अबू हुरैरा] स रिवायत अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलथि: “जखन अल्लाह कोनो नौकर स प्रेम करैत छथि त ओ जिब्राईल स कहैत छथि: ‘हम फल्लाँ स प्रेम करैत छी, त ओकरा स प्रेम करैत छी।’ जिब्राईल ओकरा स प्रेम करैत अछि, तखन ओ आकाश क निवासी कए आवाज दैत अछि: ‘सत्ते, अल्लाह फल्लाँ सँ प्रेम करै छै, तेँ ओकरा सँ प्रेम करै छै!’ तखन आकाश के निवासी ओकरा सँ प्रेम करै छै, तखन ओकरा एहि दुनिया मे स्वागत के जगह देल जाय छै, जखन अल्लाह कोनो सेवक सँ घृणा करै छै,’ मलिक कहलकै: ‘हमरौ अनुमान के अनुसार, तखन ओ अल्लाह के कोनो नौकर के प्रति घृणा के संदेश पहिने के तरह संप्रेषित करै छै।’
Imam Malik : 1503
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي حَازِمِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلَانِيِّ أَنَّهُ قَالَدَخَلْتُ مَسْجِدَ دِمَشْقَ فَإِذَا فَتًى شَابٌّ بَرَّاقُ الثَّنَايَا وَإِذَا النَّاسُ مَعَهُ إِذَا اخْتَلَفُوا فِي شَيْءٍ أَسْنَدُوا إِلَيْهِ وَصَدَرُوا عَنْ قَوْلِهِ فَسَأَلْتُ عَنْهُ فَقِيلَ هَذَا مُعَاذُ بْنُ جَبَلٍ فَلَمَّا كَانَ الْغَدُ هَجَّرْتُ فَوَجَدْتُهُ قَدْ سَبَقَنِي بِالتَّهْجِيرِ وَوَجَدْتُهُ يُصَلِّي قَالَ فَانْتَظَرْتُهُ حَتَّى قَضَى صَلَاتَهُ ثُمَّ جِئْتُهُ مِنْ قِبَلِ وَجْهِهِ فَسَلَّمْتُ عَلَيْهِ ثُمَّ قُلْتُ وَاللَّهِ إِنِّي لَأُحِبُّكَ لِلَّهِ فَقَالَ أَاللَّهِ فَقُلْتُ أَاللَّهِ فَقَالَ أَاللَّهِ فَقُلْتُ أَاللَّهِ فَقَالَ أَاللَّهِ فَقُلْتُ أَاللَّهِ قَالَ فَأَخَذَ بِحُبْوَةِ رِدَائِي فَجَبَذَنِي إِلَيْهِ وَقَالَ أَبْشِرْ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ قَالَ اللَّهُ تَبَارَكَ وَتَعَالَى وَجَبَتْ مَحَبَّتِي لِلْمُتَحَابِّينَ فِيَّ وَالْمُتَجَالِسِينَ فِيَّ وَالْمُتَزَاوِرِينَ فِيَّ وَالْمُتَبَاذِلِينَ فِيَّو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ بَلَغَهُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ الْقَصْدُ وَالتُّؤَدَةُ وَحُسْنُ السَّمْتِ جُزْءٌ مِنْ خَمْسَةٍ وَعِشْرِينَ جُزْءًا مِنْ النُّبُوَّةِ
हमरा मलिक स [अबू हाजिम बिन दिनार] स [अबू इदरीश अल खौलानी] स कहल गेल अछि जे हम दमिश्क मस्जिद मे प्रवेश केलहुं। पता चलल जे भीतर एकटा युवक छल जेकर दाँत चमचमाइत उज्जर छल । जँ हुनका संग लोकक मतभेद होइत छलनि तँ ओ युवककेँ घुरा दैत छलाह आ हुनकर विचार स्वीकार करैत छलाह | तखन हम हुनका बारे मे पुछलियनि, तखन कियो जवाब देलक जे ओ [मुअज बिन जबल] छथि | दोसर दिन हम बहुत भोरे मस्जिद दिस दौड़लहुँ, मुदा देखलहुँ जे ओ हमरासँ पहिने आबि गेल छलाह । हम हुनका प्रार्थना करैत पाबि गेलहुँ, तेँ हम ताबत धरि प्रतीक्षा केलहुँ जा धरि ओ प्रार्थना समाप्त नहि क' लेताह। तखन नमस्कार करैत आगूसँ भेंट भेल, कहलियनि; 'अल्लाह के कसम, हम अल्लाह के कारण अहाँ स सचमुच प्रेम करैत छी'। ओ पुछलकै; 'की अल्लाहक कारणेँ अछि ? ' हम उत्तर देलियनि; 'अल्लाह के कारण'। ओ फेर पुछलखिन; 'की अल्लाहक कारणेँ अछि ? ' हम उत्तर देलियनि; 'अल्लाह के कारण'। ओ पुछलकै; 'की अल्लाहक कारणेँ अछि ? ' हम उत्तर देलियनि; "अल्लाह के कारण"। अबू इदरीस कहलनि; 'ओ हमर पागक किनार पकड़ि हमरा अपना दिस खींचलक आ कहलक; आनन्दित होउ! हम अल्लाह के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के कहैत सुनलहुं: "अल्लाह, परमात्मा कहैत छथि: 'हमर प्रेम ओहि पर उतरैत अछि जे हमर लेल एक दोसरा सं प्रेम करैत अछि, जे हमर लेल जमा होइत अछि, आ हमर लेल एक दोसरा के दौरा करैत अछि, आ जे हमर लेल एक दोसरा के लेल प्रयास करैत अछि.'" मलिक हमरा कहलनि जे अब्दुल्लाह इब्न अब्बास कहलनि: 'में संयम रहब।' एकटा बात - निष्पक्षता -, सौम्य आ स्वागत करय बला रहब भविष्यवक्ताताक बीस भाग मे सँ एक अछि |'
Imam Malik : 1504
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الرُّؤْيَا الْحَسَنَةُ مِنْ الرَّجُلِ الصَّالِحِ جُزْءٌ مِنْ سِتَّةٍ وَأَرْبَعِينَ جُزْءًا مِنْ النُّبُوَّةِو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِ ذَلِكَ
हमरा मलिक स [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू थल्हाह अल-अंसारी] स [अनस बिन मलिक] स कहल गेल अछि जे रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला अछि: ‘एकटा धर्मी आदमी क नीक सपना छियालीस नबी मे स एक अछि,’ इ हमरा स मालिक स [अबू अज़ जिनाद] स [अल अ’राज] स कहल गेल अछि [अबू हुरैरा] रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स ऊपर के तरह कहलनि।
Imam Malik : 1505
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ زُفَرَ بْنِ صَعْصَعَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا انْصَرَفَ مِنْ صَلَاةِ الْغَدَاةِ يَقُولُ هَلْ رَأَى أَحَدٌ مِنْكُمْ اللَّيْلَةَ رُؤْيَا وَيَقُولُ لَيْسَ يَبْقَى بَعْدِي مِنْ النُّبُوَّةِ إِلَّا الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ
हमरा मलिक सँ [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहह] सँ [जुफर बिन शा'शाअह] सँ [हुनकर पिता] सँ [अबू हुरैरा] सँ रिवायत भेल जे जखन अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) सुबह केर नमाज समाप्त क' लैत छलाह त' ओ पूछैत छलाह: 'की अहाँ मे सँ कियो काल्हि राति सपना देखलहुँ?' आ जोड़ैत छलाह: 'हमर बाद नीक सपना छोड़ि कोनो भविष्यवक्ता नहि होयत।'
Imam Malik : 1506
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَنْ يَبْقَى بَعْدِي مِنْ النُّبُوَّةِ إِلَّا الْمُبَشِّرَاتُ فَقَالُوا وَمَا الْمُبَشِّرَاتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ يَرَاهَا الرَّجُلُ الصَّالِحُ أَوْ تُرَى لَهُ جُزْءٌ مِنْ سِتَّةٍ وَأَرْبَعِينَ جُزْءًا مِنْ النُّبُوَّةِ
हमरा [जैद बिन असलम] स मालिक स [अता बिन यासर] स कहल गेल छल जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'हमरा बाद नबी के किछु नहि रहत सिवाय अल मुबसीरात।' सहाबा पुछलखिन : हे अल्लाह के रसूलुल्लाह अल मुबसीरात की अछि ? ओ उत्तर देलथिन: ‘नीक सपना जे धर्मात्मा देखैत अछि, वा जे ओकरा देखाओल जाइत छैक। -से सपना छै- भविष्यवक्ता केरऽ छियालीस गुणऽ में से एक ।'
Imam Malik : 1507
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا قَتَادَةَ بْنَ رِبْعِيٍّ يَقُولُسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ مِنْ اللَّهِ وَالْحُلْمُ مِنْ الشَّيْطَانِ فَإِذَا رَأَى أَحَدُكُمْ الشَّيْءَ يَكْرَهُهُ فَلْيَنْفُثْ عَنْ يَسَارِهِ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ إِذَا اسْتَيْقَظَ وَلْيَتَعَوَّذْ بِاللَّهِ مِنْ شَرِّهَا فَإِنَّهَا لَنْ تَضُرَّهُ إِنْ شَاءَ اللَّهُقَالَ أَبُو سَلَمَةَ إِنْ كُنْتُ لَأَرَى الرُّؤْيَا هِيَ أَثْقَلُ عَلَيَّ مِنْ الْجَبَلِ فَلَمَّا سَمِعْتُ هَذَا الْحَدِيثَ فَمَا كُنْتُ أُبَالِيهَا
हमरा मलिक स [याह्या बिन सईद] स [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान] स कहल गेल अछि कहल गेल अछि; हम [अबू कतादा बिन रिबई] के कहैत सुनने छी जे हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छी जे नीक सपना अल्लाह स होइत अछि जखन कि बुरा सपना शैतान स होइत अछि। जँ अहाँ सभ मे सँ कियो एहन चीजक सपना देखैत अछि जकरा सँ ओकरा घृणा होइत छैक तखन ओकरा जागला पर तीन बेर बामा कात थूकबाक चाही, आ ओकर बुराई सँ अल्लाह सँ रक्षा माँगबाक चाही। कारण, भगवान चाहथि, कोनो नुकसान नहि होयत'। अबू सलामाह कहलनि; 'जँ हम सपना देखैत छी जे हमरा लेल पहाड़ सँ भारी अछि, तखन जखन ई हदीस सुनैत छी त' आब हमरा एकर कोनो परवाह नहि'।
Imam Malik : 1508
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ كَانَ يَقُولُ فِي هَذِهِ الْآيَةِ{ لَهُمْ الْبُشْرَى فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الْآخِرَةِ }قَالَ هِيَ الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ يَرَاهَا الرَّجُلُ الصَّالِحُ أَوْ تُرَى لَهُ
ई हमरा मलिक सँ [हिशाम बिन उर्वाह] सँ [हुनकर पिता] सँ आयत के व्याख्या करय सँ कहल गेल छल: '-कारण हुनका सभक लेल एहि संसार आ परलोकक जीवन मे नीक खबरि अछि-' -Qs. युनुस : 64- 'ई नीक सपना अछि जकरा धर्मात्मा देखैत अछि वा ओकरा देखाओल जाइत अछि'।
Imam Malik : 1509
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ مُوسَى بْنِ مَيْسَرَةَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي هِنْدٍ عَنْ أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ لَعِبَ بِالنَّرْدِ فَقَدْ عَصَى اللَّهَ وَرَسُولَهُ
हमरा मलिक स [मूसा बिन मैसारह] स [सैद बिन अबू हिंद] स [अबू मूसा अल अस्यारी] स कहल गेल अछि जे अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे जे पासा खेलाइत अछि, ओ अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह क आज्ञा नहि मानलक अछि।
Imam Malik : 1510
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ أَبِي عَلْقَمَةَ عَنْ أُمِّهِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ بَلَغَهَاأَنَّ أَهْلَ بَيْتٍ فِي دَارِهَا كَانُوا سُكَّانًا فِيهَا وَعِنْدَهُمْ نَرْدٌ فَأَرْسَلَتْ إِلَيْهِمْ لَئِنْ لَمْ تُخْرِجُوهَا لَأُخْرِجَنَّكُمْ مِنْ دَارِي وَأَنْكَرَتْ ذَلِكَ عَلَيْهِمْ
हमरा ई बात मलिक द्वारा [अलकामाह बिन अबू अलकामाह] स [अपन माँ] स [ऐसिया] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी स कहल गेल अछि, हुनका लग खबर आबि गेल अछि जे हुनकर गाम के एकटा घर के निवासी के पासा अछि। तेँ 'ऐस्याह हुनका सभ लग एकटा दूत पठौलनि जे हुनका सभ केँ संदेश पहुँचा देलनि जे जँ अहाँ सभ हुनका बाहर नहि निकालब तँ हम अहाँ सभ केँ अपन गाम सँ अवश्य भगा देब' । आ 'आइशा सेहो हुनका सभकेँ नकारलनि'।
Imam Malik : 1511
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّهُ كَانَ إِذَا وَجَدَ أَحَدًا مِنْ أَهْلِهِ يَلْعَبُ بِالنَّرْدِ ضَرَبَهُ وَكَسَرَهَاقَالَ يَحْيَى و سَمِعْت قَوْله تَعَالَى يَقُولُ لَا خَيْرَ فِي الشَّطْرَنْجِ وَكَرِهَهَا وَسَمِعْتُهُ يَكْرَهُ اللَّعِبَ بِهَا وَبِغَيْرِهَا مِنْ الْبَاطِلِ وَيَتْلُو هَذِهِ الْآيَةَ{ فَمَاذَا بَعْدَ الْحَقِّ إِلَّا الضَّلَالُ }
हमरा [नाफी’] स मालिक स [अब्दुल्लाह इब्न उमर] स इ बात कहल गेल छल जे अगर हुनका अपन परिवार क कियो पासा खेलैत भेटथि त ओ हुनका मारि कए पासा तोड़ि देताह। याह्या कहलक; 'हम मालिक केँ कहैत सुनलहुँ: 'पासा मे कोनो नीक नहि', ओकरा एहि सँ घृणा छलैक, आ हम इहो सुनलहुँ जे ओकरा पासा वा कोनो एहन चीज जे झूठ मानल जाइत छैक, ओकरा खेलबा सँ घृणा छलैक, तखन ओ ई श्लोक सुना देलक: 'तखन सत्यक बाद गलतीक अतिरिक्त किछु नहि होइत छैक।' -सूरह यूनुस; ३२- २.
Imam Malik : 1512
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يُسَلِّمُ الرَّاكِبُ عَلَى الْمَاشِي وَإِذَا سَلَّمَ مِنْ الْقَوْمِ وَاحِدٌ أَجْزَأَ عَنْهُمْ
हमरा [जैद बिन असलम] स मालिक स रिवायत भेल जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन: "सवार जे चलैत अछि, ओ चलय वाला के नमस्कार करैत अछि। जौं लोक मे स एक दोसर के नमस्कार करैत अछि त ओ हुनका लेल काफी अछि।"
Imam Malik : 1513
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَطَاءٍ أَنَّهُ قَالَ كُنْتُ جَالِسًا عِنْدَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍفَدَخَلَ عَلَيْهِ رَجُلٌ مِنْ أَهْلِ الْيَمَنِ فَقَالَ السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ ثُمَّ زَادَ شَيْئًا مَعَ ذَلِكَ أَيْضًا قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ وَهُوَ يَوْمَئِذٍ قَدْ ذَهَبَ بَصَرُهُ مَنْ هَذَا قَالُوا هَذَا الْيَمَانِي الَّذِي يَغْشَاكَ فَعَرَّفُوهُ إِيَّاهُ قَالَ فَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ إِنَّ السَّلَامَ انْتَهَى إِلَى الْبَرَكَةِ
हमरा ई मलिक सँ [वहाब बिन कैसन] सँ [मुहम्मद बिन अम्र बिन अथा] सँ रिवायत भेल जे कहलनि; 'हम अब्दुल्ला बिन अब्बास के बगल में बैसल छलहुं, तखन एकटा यमन के व्यक्ति हुनका सं भेंट केलनि आ कहलनि; 'अस्सलामू 'अलाईकुम वरहमतुल्लाही वा बरकातुहु - अल्लाह के शांति, दया आ बरकत अहाँ पर हो -,' तखन ओ किछु जोड़लनि'। इब्न अब्बास जे ओहि समय आन्हर छलाह, पुछलनि; 'ओ व्यक्ति के अछि ?' ओ सभ उत्तर देलक; 'ई यमन के व्यक्ति छै जे तोरा देखै लेली आबी रहलऽ छै' । तखन हुनकर परिचय करौलनि। मुहम्मद बिन अमरू कहलनि: ' [इब्न अब्बास] कहलनि 'नमस्कार के अंत अल बरकाह शब्द सं होइत अछि'।
Imam Malik : 1514
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ الْيَهُودَ إِذَا سَلَّمَ عَلَيْكُمْ أَحَدُهُمْ فَإِنَّمَا يَقُولُ السَّامُ عَلَيْكُمْ فَقُلْ عَلَيْكَقَالَ يَحْيَى و سُئِلَ مَالِك عَمَّنْ سَلَّمَ عَلَى الْيَهُودِيِّ أَوْ النَّصْرَانِيِّ هَلْ يَسْتَقِيلُهُ ذَلِكَ فَقَالَ لَا
हमरा [अब्दुल्लाह बिन दिनार] स मालिक स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स रिवायत अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे अगर कोनो यहूदी अहां कए नमस्कार करैत अछि त ओ केवल कहैत अछि; अस्सामु 'अलाईकुम - तोरा पर विनाश - तखन उत्तर दियौक; 'अलाइका -अहाँक ऊपर सेहो-'। याह्या कहलक; 'मलिक सँ पूछल गेलै कि यहूदी या ईसाई के अभिवादन करै वाला के बारे में, की ओकरा अपनऽ बात वापस लेबै के चाही? ओ उत्तर देलनि, 'कोनो जरूरत नहि'।
Imam Malik : 1515
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَبِي مُرَّةَ مَوْلَى عَقِيلِ بْنِ أَبِي طَالِبٍ عَنْ أَبِي وَاقِدٍ اللَّيْثِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَمَا هُوَ جَالِسٌ فِي الْمَسْجِدِ وَالنَّاسُ مَعَهُ إِذْ أَقْبَلَ نَفَرٌ ثَلَاثَةٌ فَأَقْبَلَ اثْنَانِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَذَهَبَ وَاحِدٌ فَلَمَّا وَقَفَا عَلَى مَجْلِسِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَلَّمَا فَأَمَّا أَحَدُهُمَا فَرَأَى فُرْجَةً فِي الْحَلْقَةِ فَجَلَسَ فِيهَا وَأَمَّا الْآخَرُ فَجَلَسَ خَلْفَهُمْ وَأَمَّا الثَّالِثُ فَأَدْبَرَ ذَاهِبًا فَلَمَّا فَرَغَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَلَا أُخْبِرُكُمْ عَنْ النَّفَرِ الثَّلَاثَةِ أَمَّا أَحَدُهُمْ فَأَوَى إِلَى اللَّهِ فَآوَاهُ اللَّهُ وَأَمَّا الْآخَرُ فَاسْتَحْيَا فَاسْتَحْيَا اللَّهُ مِنْهُ وَأَمَّا الْآخَرُ فَأَعْرَضَ فَأَعْرَضَ اللَّهُ عَنْهُ
हमरा मलिक स [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] स [अबू मुर्राह] पूर्व गुलाम अकील बिन अबू तालिब स, [अबू वाकिद अल लैत्सी] स कहल गेल अछि जे जखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसलम लोक क संग मस्जिद मे बैसल छलाह। तीन गोटे आबि गेलाह, दू गोटे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दिस गेलाह आ एकटा बाहर आबि गेलाह। जखन दुनू गोटे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सभा मे ठाढ़ भेलाह त नमस्कार केलनि। एक गोटे लोकक समूह मे खाली जगह देखि ल' लेलक। दोसर व्यक्ति पाछू बैसल, जखन कि तेसर पाछू हटि क' चलि गेल। समाप्त करला के बाद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन: हम अहाँ के तीनू लोक के बारे में सूचित करैत छी; पहिल बात जे ओ अल्लाह के शरण लेलक अछि, तखन अल्लाह ओकर रक्षा करताह। दोसर व्यक्ति, ओकरा लाज लागल, तखन अल्लाह ओकरा पर लाज भेल, जखन कि तेसर, ओ मुँह घुमा लेलक आ अल्लाह ओकरा सँ मुँह घुमा लेलक'।
Imam Malik : 1516
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِوَسَلَّمَ عَلَيْهِ رَجُلٌ فَرَدَّ عَلَيْهِ السَّلَامَ ثُمَّ سَأَلَ عُمَرُ الرَّجُلَ كَيْفَ أَنْتَ فَقَالَ أَحْمَدُ إِلَيْكَ اللَّهَ فَقَالَ عُمَرُ ذَلِكَ الَّذِي أَرَدْتُ مِنْكَ
हमरा मलिक स [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] स [अनस बिन मलिक] स कहल गेल जे ओ एकटा आदमी कए उमर बिन खत्ताब कए नमस्कार करैत सुनने छथि, तखन ओ हुनका जवाब देलथि। तखन उमर ओहि आदमी सँ पुछलखिन; 'अहांक कोना छी?' ओ आदमी उत्तर देलक। 'हम अहाँक -बराहट के लेल अल्लाह के स्तुति करैत छी'। तखन [उमर] कहलनि; 'हमरा अहाँसँ से चाही'।
Imam Malik : 1517
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ أَنَّ الطُّفَيْلَ بْنَ أُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ أَخْبَرَهُأَنَّهُ كَانَ يَأْتِي عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ فَيَغْدُو مَعَهُ إِلَى السُّوقِ قَالَ فَإِذَا غَدَوْنَا إِلَى السُّوقِ لَمْ يَمُرَّ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ عَلَى سَقَاطٍ وَلَا صَاحِبِ بِيعَةٍ وَلَا مِسْكِينٍ وَلَا أَحَدٍ إِلَّا سَلَّمَ عَلَيْهِ قَالَ الطُّفَيْلُ فَجِئْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ يَوْمًا فَاسْتَتْبَعَنِي إِلَى السُّوقِ فَقُلْتُ لَهُ وَمَا تَصْنَعُ فِي السُّوقِ وَأَنْتَ لَا تَقِفُ عَلَى الْبَيِّعِ وَلَا تَسْأَلُ عَنْ السِّلَعِ وَلَا تَسُومُ بِهَا وَلَا تَجْلِسُ فِي مَجَالِسِ السُّوقِ قَالَ وَأَقُولُ اجْلِسْ بِنَا هَاهُنَا نَتَحَدَّثُ قَالَ فَقَالَ لِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ يَا أَبَا بَطْنٍ وَكَانَ الطُّفَيْلُ ذَا بَطْنٍ إِنَّمَا نَغْدُو مِنْ أَجْلِ السَّلَامِ نُسَلِّمُ عَلَى مَنْ لَقِيَنَا
मलिक हमरा [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] स कहलथि जे [थुफैल बिन उबै बिन क'ब] हुनका कहलथि जे ओ [अब्दुल्लाह बिन उमर] क दौरा केलथि आ ओ हुनका संग बाजार गेलाह। थुफैल बिन उबाय कहलनि; 'जखन हम सब बाजार मे गेलहुं त अब्दुल्ला बिन उमर आम लोक, या बेचनिहार या गरीब या ककरो लग स नहि गुजरैत छलाह, जाबत तक ओ हुनका नमस्कार नहि करैत छलाह'। थुफैल बाजल; 'एक दिन अब्दुल्ला बिन उमर सँ भेंट भेल, तखन ओ हमरा बजार जेबाक लेल कहलनि, हम हुनका सँ पुछलियनि, 'जखन अहाँ कोनो दोकान पर नहि रुकैत छी, वा सामान नहि मांगैत छी, कोनो चीजक मोल-मोल नहि करैत छी, वा बिक्री स्थल पर बैसैत छी तखन बजार मे की क' रहल छी?' ओ उत्तर देलनि, 'हम कहलियनि, एतय बैसू, किछु गप्प करब'। तखन अब्दुल्ला बिन उमर हमरा कहलनि, 'हे अबू बथन -बड़का पेट-! -किएक त' ओहि समय थुफाइल के पेट पैघ छलैक-, हम सब बाजार मे बस जे कियो भेंट भेल ओकरा नमस्कार करय लेल जाइत छलहुँ."
Imam Malik : 1518
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ رَجُلًا سَلَّمَ عَلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَفَقَالَ السَّلَامُ عَلَيْكَ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ وَالْغَادِيَاتُ وَالرَّائِحَاتُ فَقَالَ لَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ وَعَلَيْكَ أَلْفًا ثُمَّ كَأَنَّهُ كَرِهَ ذَلِكَ
हमरा [याह्या बिन सईद] स मालिक स कहल गेल अछि जे कहने छल, 'एक आदमी अब्दुल्ला बिन उमर कए नमस्कार केलक, ओ कहलक, 'असलामू अलैका वा रहमतुल्लाह वा बरकातुहु वालघादीयातु वाररा`इहत -अल्लाह क सुरक्षा, रमत आ बरकत अहाँ पर, आ जे सब भोर आ साँझ आबैत छथि-'। [अब्दुल्लाह बिन उमर] तखन जवाब देलनि; 'वा'अलाइका अल्फान -आ अहाँ पर हजार बेर-,' जेना ओकरा एहि सँ घृणा हो।
Imam Malik : 1519
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَأَلَهُ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَسْتَأْذِنُ عَلَى أُمِّي فَقَالَ نَعَمْ قَالَ الرَّجُلُ إِنِّي مَعَهَا فِي الْبَيْتِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْتَأْذِنْ عَلَيْهَا فَقَالَ الرَّجُلُ إِنِّي خَادِمُهَا فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْتَأْذِنْ عَلَيْهَا أَتُحِبُّ أَنْ تَرَاهَا عُرْيَانَةً قَالَ لَا قَالَ فَاسْتَأْذِنْ عَلَيْهَا
हमरा कहल गेल अछि जे [अथा बिन यासर] सँ [शफवान बिन सुलैम] सँ मलिक कहलनि, 'अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ एक बेर एकटा आदमी पूछने छलाह, 'हे अल्लाह केर रसूलुल्लाह, की हम अपन माँ सँ अनुमति माँगब -जँ हम हुनकर कोठली मे प्रवेश करब-?' ओ उत्तर देलनि: 'हँ'। ओ आदमी फेर पुछलकै, 'हम हुनका संग ओही घर मे रहैत छी?' तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे हुनका सँ अनुमति माँगू। ओ आदमी फेर पुछलकै, ‘हमहूँ ओकर नोकर छी’। त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका स कहलखिन: ‘हुनका स अनुमति माँगू, की अहाँ हुनका नंगटे भेटय चाहब ! ' ओ उत्तर देलनि; 'नहि'। ओ बजलाह: 'तखन अनुमति माँगू! ' .
Imam Malik : 1520
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ عُلَمَائِهِمْ أَنَّ أَبَا مُوسَى الْأَشْعَرِيَّجَاءَ يَسْتَأْذِنُ عَلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَاسْتَأْذَنَ ثَلَاثًا ثُمَّ رَجَعَ فَأَرْسَلَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فِي أَثَرِهِ فَقَالَ مَا لَكَ لَمْ تَدْخُلْ فَقَالَ أَبُو مُوسَى سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الْاسْتِئْذَانُ ثَلَاثٌ فَإِنْ أُذِنَ لَكَ فَادْخُلْ وَإِلَّا فَارْجِعْ فَقَالَ عُمَرُ وَمَنْ يَعْلَمُ هَذَا لَئِنْ لَمْ تَأْتِنِي بِمَنْ يَعْلَمُ ذَلِكَ لَأَفْعَلَنَّ بِكَ كَذَا وَكَذَا فَخَرَجَ أَبُو مُوسَى حَتَّى جَاءَ مَجْلِسًا فِي الْمَسْجِدِ يُقَالُ لَهُ مَجْلِسُ الْأَنْصَارِ فَقَالَ إِنِّي أَخْبَرْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الْاسْتِئْذَانُ ثَلَاثٌ فَإِنْ أُذِنَ لَكَ فَادْخُلْ وَإِلَّا فَارْجِعْ فَقَالَ لَئِنْ لَمْ تَأْتِنِي بِمَنْ يَعْلَمُ هَذَا لَأَفْعَلَنَّ بِكَ كَذَا وَكَذَا فَإِنْ كَانَ سَمِعَ ذَلِكَ أَحَدٌ مِنْكُمْ فَلْيَقُمْ مَعِي فَقَالُوا لِأَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قُمْ مَعَهُ وَكَانَ أَبُو سَعِيدٍ أَصْغَرَهُمْ فَقَامَ مَعَهُ فَأَخْبَرَ بِذَلِكَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ لِأَبِي مُوسَى أَمَا إِنِّي لَمْ أَتَّهِمْكَ وَلَكِنْ خَشِيتُ أَنْ يَتَقَوَّلَ النَّاسُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
मलिक हमरा [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] स [हुनकर एक स बेसी विद्वान] स बतेलथि जे [अबू मूसा अल अश'री] उमर बिन खत्ताब स अनुमति मांगबा लेल आयल छलाह, फेर ओ तीन बेर हुनका अभिवादन केलथि, तकर बाद ओ घर वापस आबि गेलाह। उमर बिन खट्टाब हुनका पाछाँ ककरो पठौलनि। उमर पुछलकै; 'अहाँ किएक नहि भीतर जाइत छी ?' अबू मूसा अल अश'री जबाब देलकै; 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छी जे तीन बेर अनुमति मांगू। जँ अहाँकेँ अनुमति अछि तँ प्रवेश करू। जँ नहि तँ घर जाउ!' तखन उमर बिन खट्टाब कहलनि; 'अहाँक अतिरिक्त एहि हदीसक बारे मे के जनैत अछि? जँ अहाँ हमरा लग नहि आनब तखन हम अहाँक संग फल्लाँ करब।' तखन अबू मूसा बाहर निकललाह जाबत धरि मस्जिद मे एकटा जमघट नहि भेटलनि जकरा अंसार सभा कहल जाइत छैक | ओ कहलनि; 'हम उमर बिन खत्ताब के सूचित केने छी जे हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छी जे तीन बेर अनुमति मांगू, जौं अनुमति अछि त अंदर आबि जाउ, मुदा नहि त घर जाउ'। तखन उमर बजलाह; 'अहाँ जँ हमरा लेल एहि बातक जनैत ककरो नहि अनब तखन हम ई-ओहि करब।' तेँ जँ अहाँ सभ मे सँ कियो सुनने होयब तऽ हमरा संग आऊ'। तखन लोक सभ [अबू सईद अल खुदरी] केँ कहलक; 'ओकरा संग आऊ! ' ओहि समय अबू सैद अल खुदरी हुनका सभ मे सबसँ छोट छलाह, तेँ ओ अबू मूसाक संग गेलाह आ उमर बिन खत्ताब केँ गवाही देलनि | तखन उमर बिन खट्टाब अबू मूसा केँ कहलखिन; 'हमरा अहाँ पर कोनो शक नहि अछि, बस एतबे जे हमरा चिंता अछि जे लोक शब्द बनाबय - जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के श्रेय देल जाइत अछि'।