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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
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इमाम मलिक (الامام مالك) - 1594 हदीस

सात समूह जिन्हें परमेश्‍वर का भाग मिलेगा

इमाम मलिक : 1501

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ خُبَيْبِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ أَوْ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَبْعَةٌ يُظِلُّهُمْ اللَّهُ فِي ظِلِّهِ يَوْمَ لَا ظِلَّ إِلَّا ظِلُّهُ إِمَامٌ عَادِلٌ وَشَابٌّ نَشَأَ فِي عِبَادَةِ اللَّهِ وَرَجُلٌ قَلْبُهُ مُعَلَّقٌ بِالْمَسْجِدِ إِذَا خَرَجَ مِنْهُ حَتَّى يَعُودَ إِلَيْهِ وَرَجُلَانِ تَحَابَّا فِي اللَّهِ اجْتَمَعَا عَلَى ذَلِكَ وَتَفَرَّقَا وَرَجُلٌ ذَكَرَ اللَّهَ خَالِيًا فَفَاضَتْ عَيْنَاهُ وَرَجُلٌ دَعَتْهُ ذَاتُ حَسَبٍ وَجَمَالٍ فَقَالَ إِنِّي أَخَافُ اللَّهَ وَرَجُلٌ تَصَدَّقَ بِصَدَقَةٍ فَأَخْفَاهَا حَتَّى لَا تَعْلَمَ شِمَالُهُ مَا تُنْفِقُ يَمِينُهُ

मुझे मालिक से [खुबैब बिन अब्दुर्रहमान अल-अंसारी] से [हफ़्श बिन अशिम] से [अबू सईद अल खुदरी] या [अबू हुरैरा] से वर्णित किया गया है कि उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "लोगों के सात समूह उस दिन अल्लाह की छाया प्राप्त करेंगे, जब उसकी छाया के अलावा कोई छाया नहीं होगी; एक न्यायप्रिय पुजारी। एक युवक जो अल्लाह की इबादत में बड़ा हुआ। एक युवक जिसका दिल मस्जिद से जुड़ा हुआ है। दो युवक जो अल्लाह के कारण एक-दूसरे से प्यार करते थे, वे उसी के कारण मिले और अलग हो गए। एक व्यक्ति जो एकांत में अल्लाह को ज़िक्र करता है फिर आंसू बहाता है। एक युवक को एक प्रतिष्ठित और सुंदर महिला ने व्यभिचार करने के लिए आमंत्रित किया और उसने कहा; 'वास्तव में मैं अल्लाह से डरता हूं।' और एक आदमी जो दान करता है, फिर वह उसे छिपाता है ताकि उसका बायां हाथ यह न जान सके कि उसका दाहिना हाथ क्या दे रहा है।

जिब्रील अपने सेवक से प्यार करता है क्योंकि अल्लाह उससे प्यार करता है

इमाम मलिक : 1502

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا أَحَبَّ اللَّهُ الْعَبْدَ قَالَ لِجِبْرِيلَ قَدْ أَحْبَبْتُ فُلَانًا فَأَحِبَّهُ فَيُحِبُّهُ جِبْرِيلُ ثُمَّ يُنَادِي فِي أَهْلِ السَّمَاءِ إِنَّ اللَّهَ قَدْ أَحَبَّ فُلَانًا فَأَحِبُّوهُ فَيُحِبُّهُ أَهْلُ السَّمَاءِ ثُمَّ يُوضَعُ لَهُ الْقَبُولُ فِي الْأَرْضِ وَإِذَا أَبْغَضَ اللَّهُ الْعَبْدَقَالَ مَالِك لَا أَحْسِبُهُ إِلَّا أَنَّهُ قَالَ فِي الْبُغْضِ مِثْلَ ذَلِكَ

मलिक ने मुझे [सुहैल बिन अबू सलीह] से [उनके पिता] से [अबू हुरैरा] तक बताया कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "जब अल्लाह किसी बंदे से प्यार करता है, तो वह गेब्रियल से कहता है: 'मैं फलां से प्यार करता हूं, तो तुम भी उससे प्यार करो।' गेब्रियल उससे प्यार करता है, फिर वह आसमान वालों को बुलाता है: 'बेशक, अल्लाह फलां से प्यार करता है, तो तुम भी उससे प्यार करो!' तो आसमान वाले उससे प्यार करते हैं। फिर उसे दुनिया में स्वागत की जगह दी जाती है। जब अल्लाह किसी बंदे से नफ़रत करता है," मलिक ने कहा: "हमारे अंदाज़े के मुताबिक, वह फिर उसी तरह से बंदे के लिए अल्लाह की नफ़रत की बात बताता है जैसे पहले करता था।"

परमेश्वर का प्रेम उन लोगों के प्रति है जो एक दूसरे से प्रेम करते हैं

इमाम मलिक : 1503

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي حَازِمِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلَانِيِّ أَنَّهُ قَالَدَخَلْتُ مَسْجِدَ دِمَشْقَ فَإِذَا فَتًى شَابٌّ بَرَّاقُ الثَّنَايَا وَإِذَا النَّاسُ مَعَهُ إِذَا اخْتَلَفُوا فِي شَيْءٍ أَسْنَدُوا إِلَيْهِ وَصَدَرُوا عَنْ قَوْلِهِ فَسَأَلْتُ عَنْهُ فَقِيلَ هَذَا مُعَاذُ بْنُ جَبَلٍ فَلَمَّا كَانَ الْغَدُ هَجَّرْتُ فَوَجَدْتُهُ قَدْ سَبَقَنِي بِالتَّهْجِيرِ وَوَجَدْتُهُ يُصَلِّي قَالَ فَانْتَظَرْتُهُ حَتَّى قَضَى صَلَاتَهُ ثُمَّ جِئْتُهُ مِنْ قِبَلِ وَجْهِهِ فَسَلَّمْتُ عَلَيْهِ ثُمَّ قُلْتُ وَاللَّهِ إِنِّي لَأُحِبُّكَ لِلَّهِ فَقَالَ أَاللَّهِ فَقُلْتُ أَاللَّهِ فَقَالَ أَاللَّهِ فَقُلْتُ أَاللَّهِ فَقَالَ أَاللَّهِ فَقُلْتُ أَاللَّهِ قَالَ فَأَخَذَ بِحُبْوَةِ رِدَائِي فَجَبَذَنِي إِلَيْهِ وَقَالَ أَبْشِرْ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ قَالَ اللَّهُ تَبَارَكَ وَتَعَالَى وَجَبَتْ مَحَبَّتِي لِلْمُتَحَابِّينَ فِيَّ وَالْمُتَجَالِسِينَ فِيَّ وَالْمُتَزَاوِرِينَ فِيَّ وَالْمُتَبَاذِلِينَ فِيَّو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ بَلَغَهُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ الْقَصْدُ وَالتُّؤَدَةُ وَحُسْنُ السَّمْتِ جُزْءٌ مِنْ خَمْسَةٍ وَعِشْرِينَ جُزْءًا مِنْ النُّبُوَّةِ

मुझे मलिक [अबू हाज़िम बिन दिनार] से [अबू इदरीस अल ख़ौलानी] ने बताया, “मैं दमिश्क की मस्जिद में गया। पता चला कि अंदर एक नौजवान था जिसके दांत चमक रहे थे। जब उसके साथ के लोगों का किसी बात पर मतभेद हुआ, तो उन्होंने उस नौजवान को लौटा दिया और उसकी राय मान ली। फिर मैंने उसके बारे में पूछा, तो किसी ने जवाब दिया कि वह [मुअज़ बिन जबल] है। अगले दिन, मैं सुबह-सुबह मस्जिद पहुँचा, लेकिन मैंने देखा कि वह मुझसे पहले ही निकल गया था। मैंने उसे नमाज़ पढ़ते हुए पाया, इसलिए मैंने उसके नमाज़ खत्म करने तक इंतज़ार किया। फिर मैं उससे सामने से मिला और नमस्ते करते हुए उससे कहा; 'अल्लाह की कसम, मैं तुमसे अल्लाह की वजह से सच में प्यार करता हूँ।' उसने पूछा; 'क्या यह अल्लाह की वजह से है?' मैंने जवाब दिया; 'अल्लाह की वजह से।' उसने फिर पूछा; 'क्या यह अल्लाह की वजह से है?' मैंने जवाब दिया; 'अल्लाह की वजह से।' उसने पूछा; 'क्या यह अल्लाह की वजह से है?' मैंने जवाब दिया; 'अल्लाह की वजह से।' उसने पूछा; 'क्या यह अल्लाह की वजह से है?' मैंने जवाब दिया; 'अल्लाह की वजह से।' अबू इदरीस ने कहा; "उसने मेरी पगड़ी का कोना खींचा और मुझे अपनी ओर खींचा और कहा: खुश हो जाओ! मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को यह कहते सुना है: "अल्लाह, जो सबसे रहम करने वाला है, कहता है: 'मेरा प्यार उन पर ज़रूर उतरेगा जो मेरे लिए एक-दूसरे से प्यार करते हैं। जो मेरे लिए इकट्ठा होते हैं, और मेरे लिए एक-दूसरे से मिलते हैं। जो मेरे लिए एक-दूसरे के लिए कोशिश करते हैं।'" मलिक ने मुझे बताया है कि अब्दुल्लाह बिन अब्बास से उन्हें खबर मिली है कि उन्होंने कहा: "किसी मामले में नरमी (निष्पक्षता), नरमी और अच्छा स्वागत नबी के बीस हिस्सों में से हैं।"

अच्छे सपने भविष्यवाणी का हिस्सा हैं

इमाम मलिक : 1504

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الرُّؤْيَا الْحَسَنَةُ مِنْ الرَّجُلِ الصَّالِحِ جُزْءٌ مِنْ سِتَّةٍ وَأَرْبَعِينَ جُزْءًا مِنْ النُّبُوَّةِو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِ ذَلِكَ

मुझे मलिक से [इस्हाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू थलहा अल-अंसारी] से [अनस बिन मलिक] से वर्णित किया गया है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "एक नेक आदमी का एक अच्छा सपना छियालीस नबियों में से एक है," मुझे मलिक से [अबू अज़ ज़िनाद] से [अल अरज] से [अबू हुरैरा] से वर्णित किया गया है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ऊपर जैसा कहा।

पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा कि अच्छे सपने भविष्यवाणी का हिस्सा हैं

इमाम मलिक : 1505

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ زُفَرَ بْنِ صَعْصَعَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا انْصَرَفَ مِنْ صَلَاةِ الْغَدَاةِ يَقُولُ هَلْ رَأَى أَحَدٌ مِنْكُمْ اللَّيْلَةَ رُؤْيَا وَيَقُولُ لَيْسَ يَبْقَى بَعْدِي مِنْ النُّبُوَّةِ إِلَّا الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ

मुझे मलिक (इसहाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा) से (ज़ुफ़र बिन शाहशाह) से (उनके पिता) से (अबू हुरैरा) तक बताया गया है कि जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सुबह की नमाज़ खत्म करते थे, तो पूछते थे: "क्या तुममें से किसी ने कल रात कोई सपना देखा?" और वह कहते थे: "मेरे बाद अच्छे सपनों के अलावा कोई नबी नहीं होगा।"

अच्छे सपने अच्छी खबर के रूप में

इमाम मलिक : 1506

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَنْ يَبْقَى بَعْدِي مِنْ النُّبُوَّةِ إِلَّا الْمُبَشِّرَاتُ فَقَالُوا وَمَا الْمُبَشِّرَاتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ يَرَاهَا الرَّجُلُ الصَّالِحُ أَوْ تُرَى لَهُ جُزْءٌ مِنْ سِتَّةٍ وَأَرْبَعِينَ جُزْءًا مِنْ النُّبُوَّةِ

मुझे मालिक [ज़ैद बिन असलम] से [अता बिन यासर] ने बताया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मेरे बाद नबी की कोई चीज़ नहीं बचेगी सिवाय अल मुबसीरत के।" साथियों ने पूछा; "अल मुबसीरत क्या है, ऐ अल्लाह के रसूल?" उन्होंने जवाब दिया: "एक अच्छा सपना जो एक नेक आदमी देखता है," या, "जो उसे दिखाया जाता है। (सपना) नबी की छियालीस खूबियों में से एक है।"

बुरे सपने आने पर शिष्टाचार

इमाम मलिक : 1507

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا قَتَادَةَ بْنَ رِبْعِيٍّ يَقُولُسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ مِنْ اللَّهِ وَالْحُلْمُ مِنْ الشَّيْطَانِ فَإِذَا رَأَى أَحَدُكُمْ الشَّيْءَ يَكْرَهُهُ فَلْيَنْفُثْ عَنْ يَسَارِهِ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ إِذَا اسْتَيْقَظَ وَلْيَتَعَوَّذْ بِاللَّهِ مِنْ شَرِّهَا فَإِنَّهَا لَنْ تَضُرَّهُ إِنْ شَاءَ اللَّهُقَالَ أَبُو سَلَمَةَ إِنْ كُنْتُ لَأَرَى الرُّؤْيَا هِيَ أَثْقَلُ عَلَيَّ مِنْ الْجَبَلِ فَلَمَّا سَمِعْتُ هَذَا الْحَدِيثَ فَمَا كُنْتُ أُبَالِيهَا

मुझे मलिक [याह्या बिन सईद] से [अबू सलामा बिन अब्दुर्रहमान] ने बताया है; मैंने [अबू क़तादाह बिन रिबी] को कहते सुना है, "मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना: "अच्छे सपने अल्लाह की तरफ़ से आते हैं जबकि बुरे सपने शैतान की तरफ़ से आते हैं। अगर तुम में से कोई ऐसी चीज़ का सपना देखता है जिससे उसे नफ़रत है, तो उसे जागने पर अपनी बाईं तरफ़ तीन बार थूकना चाहिए, और अल्लाह से उसकी बुराई से बचाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। क्योंकि इससे उसे कोई नुकसान नहीं होगा, अल्लाह ने चाहा।" अबू सलामा ने कहा; "अगर मैं किसी ऐसी चीज़ का सपना देखता हूँ जो मेरे लिए पहाड़ से भी भारी है, तो जब मैं यह हदीस सुनता हूँ तो मुझे उसकी कोई परवाह नहीं रहती।"

खुशखबरी की व्याख्या

इमाम मलिक : 1508

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ كَانَ يَقُولُ فِي هَذِهِ الْآيَةِ{ لَهُمْ الْبُشْرَى فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الْآخِرَةِ }قَالَ هِيَ الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ يَرَاهَا الرَّجُلُ الصَّالِحُ أَوْ تُرَى لَهُ

यह मुझे मालिक [हिशाम बिन उरवाह] से [उनके पिता] से आयत की व्याख्या करते हुए वर्णित किया गया था: '(उनके लिए इस दुनिया और आख़िरत के जीवन में अच्छी ख़बर है)' (क़ुरआन यूनुस: 64) "वह एक अच्छा सपना है जो एक नेक व्यक्ति देखता है या उसे दिखाया जाता है।"

पासा खेलने पर रोक है क्योंकि यह अल्लाह और उसके पैगम्बर के प्रति अवज्ञा है

इमाम मलिक : 1509

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ مُوسَى بْنِ مَيْسَرَةَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي هِنْدٍ عَنْ أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ لَعِبَ بِالنَّرْدِ فَقَدْ عَصَى اللَّهَ وَرَسُولَهُ

मुझे मालिक से [मूसा बिन मैसरा] से [सईद बिन अबू हिंद] से [अबू मूसा अल असीरी] से वर्णित किया गया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जिसने पासा खेला, उसने अल्लाह और उसके रसूल की अवज्ञा की।"

आइशिया ने गांव के निवासियों को पासा रखने से मना किया

इमाम मलिक : 1510

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ أَبِي عَلْقَمَةَ عَنْ أُمِّهِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ بَلَغَهَاأَنَّ أَهْلَ بَيْتٍ فِي دَارِهَا كَانُوا سُكَّانًا فِيهَا وَعِنْدَهُمْ نَرْدٌ فَأَرْسَلَتْ إِلَيْهِمْ لَئِنْ لَمْ تُخْرِجُوهَا لَأُخْرِجَنَّكُمْ مِنْ دَارِي وَأَنْكَرَتْ ذَلِكَ عَلَيْهِمْ

मलिक ने मुझे बताया है कि [अलकमा बिन अबू अलकमा] की माँ ने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी [आइस्या] से खबर दी है कि उनके गाँव के एक घर में रहने वाले के पास पासा है। तो आइस्या ने उनके पास एक संदेशवाहक भेजा कि "अगर तुम इसे नहीं निकालोगे, तो मैं तुम्हें अपने गाँव से ज़रूर निकाल दूँगी।" और आइस्या ने भी उन्हें मना कर दिया।

अब्दुल्लाह बिन उमर ने पासा खेल रहे एक परिवार पर हमला कर उसे तोड़ दिया

इमाम मलिक : 1511

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّهُ كَانَ إِذَا وَجَدَ أَحَدًا مِنْ أَهْلِهِ يَلْعَبُ بِالنَّرْدِ ضَرَبَهُ وَكَسَرَهَاقَالَ يَحْيَى و سَمِعْت قَوْله تَعَالَى يَقُولُ لَا خَيْرَ فِي الشَّطْرَنْجِ وَكَرِهَهَا وَسَمِعْتُهُ يَكْرَهُ اللَّعِبَ بِهَا وَبِغَيْرِهَا مِنْ الْبَاطِلِ وَيَتْلُو هَذِهِ الْآيَةَ{ فَمَاذَا بَعْدَ الْحَقِّ إِلَّا الضَّلَالُ }

मलिक ने मुझे [नफी] से [अब्दुल्ला इब्न उमर] तक बताया कि अगर वह अपने परिवार में किसी को पासा खेलते हुए पाते, तो वह उसे मारते और पासा तोड़ देते। याह्या ने कहा: "मैंने मलिक को यह कहते सुना: 'पासे में कोई अच्छाई नहीं है,' वह इससे नफरत करता था, और मैंने यह भी सुना कि वह पासा या किसी भी ऐसी चीज़ से नफरत करता था जिसे झूठ माना जाता है, फिर उसने यह आयत पढ़ी: '(फिर सच के बाद गलती के अलावा कुछ नहीं है)' (सूरह यूनुस; 32)

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सवारी करने वाले लोगों के लिए सलाम का हुक्म दिया

इमाम मलिक : 1512

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يُسَلِّمُ الرَّاكِبُ عَلَى الْمَاشِي وَإِذَا سَلَّمَ مِنْ الْقَوْمِ وَاحِدٌ أَجْزَأَ عَنْهُمْ

मुझे मलिक [ज़ैद बिन असलम] से वर्णित किया गया था कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "जो सवारी करता है वह चलने वाले को सलाम करता है। यदि लोगों में से एक दूसरे को सलाम करता है, तो यह उनके लिए पर्याप्त है।"

इब्नु अब्बास ने अभिवादन में अतिरिक्त वाक्यों के बारे में बात की

इमाम मलिक : 1513

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَطَاءٍ أَنَّهُ قَالَ كُنْتُ جَالِسًا عِنْدَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍفَدَخَلَ عَلَيْهِ رَجُلٌ مِنْ أَهْلِ الْيَمَنِ فَقَالَ السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ ثُمَّ زَادَ شَيْئًا مَعَ ذَلِكَ أَيْضًا قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ وَهُوَ يَوْمَئِذٍ قَدْ ذَهَبَ بَصَرُهُ مَنْ هَذَا قَالُوا هَذَا الْيَمَانِي الَّذِي يَغْشَاكَ فَعَرَّفُوهُ إِيَّاهُ قَالَ فَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ إِنَّ السَّلَامَ انْتَهَى إِلَى الْبَرَكَةِ

मलिक [वहाब बिन कैसन] से [मुहम्मद बिन अम्र बिन अथा] ने मुझे बताया कि उन्होंने कहा; "मैं अब्दुल्लाह बिन अब्बास के पास बैठा था, तभी एक यमनी आदमी उनसे मिला और कहा; 'अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाहि वा बराकातुहू (अल्लाह की शांति, रहमत और आशीर्वाद आप पर हो),' फिर उसने कुछ और कहा।" इब्न अब्बास, जो उस समय अंधे थे, ने पूछा; "वह आदमी कौन है?" उन्होंने जवाब दिया; "यह एक यमनी आदमी है जो आपसे मिलने आ रहा है।" फिर उन्होंने उसका परिचय कराया। मुहम्मद बिन अम्रु ने कहा: "[इब्न अब्बास] ने कहा, 'सलाम अल बराकाह शब्द के साथ खत्म होता है।'"

यहूदी अभिवादन का उत्तर कैसे दें

इमाम मलिक : 1514

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ الْيَهُودَ إِذَا سَلَّمَ عَلَيْكُمْ أَحَدُهُمْ فَإِنَّمَا يَقُولُ السَّامُ عَلَيْكُمْ فَقُلْ عَلَيْكَقَالَ يَحْيَى و سُئِلَ مَالِك عَمَّنْ سَلَّمَ عَلَى الْيَهُودِيِّ أَوْ النَّصْرَانِيِّ هَلْ يَسْتَقِيلُهُ ذَلِكَ فَقَالَ لَا

मलिक से [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [अब्दुल्ला बिन उमर] ने मुझे बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अगर यहूदियों में से कोई तुम्हें सलाम करे, तो वे सिर्फ़ यही कहें: अस्साम अलैकुम (तुम पर तबाही हो) फिर जवाब दो; अलैका (तुम पर भी)।" याह्या ने कहा; "मलिक से पूछा गया कि जो कोई यहूदियों या ईसाइयों को सलाम करता है, क्या उसे अपनी बात वापस ले लेनी चाहिए? उन्होंने जवाब दिया, "ज़रूरत नहीं है।"

पैगंबर की सभा में आराध्य

इमाम मलिक : 1515

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَبِي مُرَّةَ مَوْلَى عَقِيلِ بْنِ أَبِي طَالِبٍ عَنْ أَبِي وَاقِدٍ اللَّيْثِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَمَا هُوَ جَالِسٌ فِي الْمَسْجِدِ وَالنَّاسُ مَعَهُ إِذْ أَقْبَلَ نَفَرٌ ثَلَاثَةٌ فَأَقْبَلَ اثْنَانِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَذَهَبَ وَاحِدٌ فَلَمَّا وَقَفَا عَلَى مَجْلِسِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَلَّمَا فَأَمَّا أَحَدُهُمَا فَرَأَى فُرْجَةً فِي الْحَلْقَةِ فَجَلَسَ فِيهَا وَأَمَّا الْآخَرُ فَجَلَسَ خَلْفَهُمْ وَأَمَّا الثَّالِثُ فَأَدْبَرَ ذَاهِبًا فَلَمَّا فَرَغَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَلَا أُخْبِرُكُمْ عَنْ النَّفَرِ الثَّلَاثَةِ أَمَّا أَحَدُهُمْ فَأَوَى إِلَى اللَّهِ فَآوَاهُ اللَّهُ وَأَمَّا الْآخَرُ فَاسْتَحْيَا فَاسْتَحْيَا اللَّهُ مِنْهُ وَأَمَّا الْآخَرُ فَأَعْرَضَ فَأَعْرَضَ اللَّهُ عَنْهُ

मुझे मलिक [इस्हाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तल्हा] से [अबू मुर्रा] के पूर्व गुलाम अकील बिन अबू तालिब, [अबू वाकिद अल लैतसी] से बताया गया है कि जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लोगों के साथ मस्जिद में बैठे थे। तीन लोग आए, उनमें से दो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ओर गए और एक बाहर आया। जब वे दोनों रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सभा में खड़े हुए, तो उन्होंने सलाम किया। उनमें से एक ने लोगों के समूह में एक खाली जगह देखी और उसे ले लिया। दूसरा व्यक्ति उनके पीछे बैठ गया, जबकि तीसरा पीछे हट गया और चला गया। समाप्त करने के बाद, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: "मैं आपको इन तीन लोगों के बारे में बताता हूं; पहले व्यक्ति ने अल्लाह की शरण ली थी, इसलिए अल्लाह ने उसे सुरक्षित रखा। दूसरा व्यक्ति, वह शर्मिंदा हुआ, फिर अल्लाह उससे शर्मिंदा हुआ, जबकि तीसरा, उसने मुंह मोड़ लिया और अल्लाह ने उससे मुंह मोड़ लिया।"

उमर बिन खत्ताब ने एक दोस्त का हाल पूछा और अल्लाह की तारीफ़ की

इमाम मलिक : 1516

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِوَسَلَّمَ عَلَيْهِ رَجُلٌ فَرَدَّ عَلَيْهِ السَّلَامَ ثُمَّ سَأَلَ عُمَرُ الرَّجُلَ كَيْفَ أَنْتَ فَقَالَ أَحْمَدُ إِلَيْكَ اللَّهَ فَقَالَ عُمَرُ ذَلِكَ الَّذِي أَرَدْتُ مِنْكَ

मुझे मलिक [इसहाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] से [अनस बिन मलिक] ने बताया कि उन्होंने एक आदमी को उमर बिन खत्ताब को सलाम करते सुना, तो उन्होंने जवाब दिया। फिर उमर ने उस आदमी से पूछा; "तुम कैसे हो?" उस आदमी ने जवाब दिया; "मैं तुम्हारी (दुआओं) के लिए अल्लाह की तारीफ़ करता हूँ।" फिर [उमर] ने कहा; "मैं तुमसे यही चाहता हूँ।"

अब्दुल्लाह बिन उमर की कहानी जो हमेशा बाज़ार में शुभकामनाएँ देते हैं

इमाम मलिक : 1517

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ أَنَّ الطُّفَيْلَ بْنَ أُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ أَخْبَرَهُأَنَّهُ كَانَ يَأْتِي عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ فَيَغْدُو مَعَهُ إِلَى السُّوقِ قَالَ فَإِذَا غَدَوْنَا إِلَى السُّوقِ لَمْ يَمُرَّ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ عَلَى سَقَاطٍ وَلَا صَاحِبِ بِيعَةٍ وَلَا مِسْكِينٍ وَلَا أَحَدٍ إِلَّا سَلَّمَ عَلَيْهِ قَالَ الطُّفَيْلُ فَجِئْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ يَوْمًا فَاسْتَتْبَعَنِي إِلَى السُّوقِ فَقُلْتُ لَهُ وَمَا تَصْنَعُ فِي السُّوقِ وَأَنْتَ لَا تَقِفُ عَلَى الْبَيِّعِ وَلَا تَسْأَلُ عَنْ السِّلَعِ وَلَا تَسُومُ بِهَا وَلَا تَجْلِسُ فِي مَجَالِسِ السُّوقِ قَالَ وَأَقُولُ اجْلِسْ بِنَا هَاهُنَا نَتَحَدَّثُ قَالَ فَقَالَ لِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ يَا أَبَا بَطْنٍ وَكَانَ الطُّفَيْلُ ذَا بَطْنٍ إِنَّمَا نَغْدُو مِنْ أَجْلِ السَّلَامِ نُسَلِّمُ عَلَى مَنْ لَقِيَنَا

मलिक ने मुझे [इस्हाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] से बताया कि [थुफैल बिन उबै बिन का'ब] ने उनसे कहा कि वह [अब्दुल्ला बिन उमर] से मिलने गए थे और वह उनके साथ बाज़ार गए। थुफैल बिन उबै ने कहा; "जब हम बाज़ार गए, तो अब्दुल्लाह बिन उमर आम लोगों, या विक्रेताओं या गरीब लोगों या किसी के पास से तब तक नहीं गुज़रे जब तक वह उन्हें सलाम न कर लें।" थुफैल ने कहा; "एक दिन मैं अब्दुल्लाह बिन उमर से मिला, फिर उन्होंने मुझे बाज़ार चलने के लिए कहा, मैंने उनसे पूछा, "आप बाज़ार में क्या कर रहे हैं जब आप किसी दुकान पर नहीं रुकते, या सामान नहीं मांगते, किसी चीज़ के लिए मोलभाव नहीं करते, या किसी सेल की जगह पर नहीं बैठते?" उन्होंने जवाब दिया, "मैंने कहा, "यहाँ बैठो और कुछ बात करो।" तब अब्दुल्लाह बिन उमर ने मुझसे कहा, "ओ अबू बथन (बड़ा पेट)! -क्योंकि उस समय थुफैल का पेट बड़ा था-, हम बाज़ार सिर्फ़ इसलिए जाते थे ताकि हम किसी से भी नमस्ते कर सकें।"

अब्दुल्लाह बिन उमर ने उन लोगों की सिफारिश की जो अभिवादन में लंबे वाक्य जोड़ते हैं

इमाम मलिक : 1518

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ رَجُلًا سَلَّمَ عَلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَفَقَالَ السَّلَامُ عَلَيْكَ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ وَالْغَادِيَاتُ وَالرَّائِحَاتُ فَقَالَ لَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ وَعَلَيْكَ أَلْفًا ثُمَّ كَأَنَّهُ كَرِهَ ذَلِكَ

मुझे मलिक [याह्या बिन सईद] से बताया गया है कि उन्होंने कहा, "एक आदमी ने अब्दुल्लाह बिन उमर को नमस्ते कहा, उन्होंने कहा, "अस्सलामु अलैका वा रहमतुल्लाह वा बराकातुहु वलघादियातु वरराइहत (अल्लाह की सलामती, रहमत और दुआएं आप पर और सुबह और शाम आने वालों पर हों)।" [अब्दुल्ला बिन उमर] ने जवाब दिया; "व'अलैका अल्फ़ान (और आप पर हज़ार बार)," जैसे कि उन्हें इससे नफ़रत हो।

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम का मां से इजाज़त मांगने का फ़रमान

इमाम मलिक : 1519

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَأَلَهُ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَسْتَأْذِنُ عَلَى أُمِّي فَقَالَ نَعَمْ قَالَ الرَّجُلُ إِنِّي مَعَهَا فِي الْبَيْتِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْتَأْذِنْ عَلَيْهَا فَقَالَ الرَّجُلُ إِنِّي خَادِمُهَا فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْتَأْذِنْ عَلَيْهَا أَتُحِبُّ أَنْ تَرَاهَا عُرْيَانَةً قَالَ لَا قَالَ فَاسْتَأْذِنْ عَلَيْهَا

मुझे बताया गया है कि मलिक (शफ़वान बिन सुलेमान) ने (अथा बिन यासर) कहा, "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) से एक आदमी ने पूछा, "ऐ रसूल, क्या मुझे अपनी माँ से (उनके कमरे में जाने की) इजाज़त लेनी चाहिए?" उन्होंने जवाब दिया: "हाँ।" उस आदमी ने फिर पूछा, "मैं उनके साथ उसी घर में रहता हूँ?" तब रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "उनसे इजाज़त माँग लो।" उस आदमी ने फिर पूछा, "मैं भी उनका नौकर हूँ।" तो रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने उससे कहा: "उनसे इजाज़त माँग लो, क्या तुम उन्हें बिना कपड़ों के देखना चाहोगे?" उसने जवाब दिया; "नहीं।" उन्होंने कहा: "तो इजाज़त माँग लो!"

किसी घर में प्रवेश करने के लिए अनुमति मांगने की नैतिकता

इमाम मलिक : 1520

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ عُلَمَائِهِمْ أَنَّ أَبَا مُوسَى الْأَشْعَرِيَّجَاءَ يَسْتَأْذِنُ عَلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَاسْتَأْذَنَ ثَلَاثًا ثُمَّ رَجَعَ فَأَرْسَلَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فِي أَثَرِهِ فَقَالَ مَا لَكَ لَمْ تَدْخُلْ فَقَالَ أَبُو مُوسَى سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الْاسْتِئْذَانُ ثَلَاثٌ فَإِنْ أُذِنَ لَكَ فَادْخُلْ وَإِلَّا فَارْجِعْ فَقَالَ عُمَرُ وَمَنْ يَعْلَمُ هَذَا لَئِنْ لَمْ تَأْتِنِي بِمَنْ يَعْلَمُ ذَلِكَ لَأَفْعَلَنَّ بِكَ كَذَا وَكَذَا فَخَرَجَ أَبُو مُوسَى حَتَّى جَاءَ مَجْلِسًا فِي الْمَسْجِدِ يُقَالُ لَهُ مَجْلِسُ الْأَنْصَارِ فَقَالَ إِنِّي أَخْبَرْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الْاسْتِئْذَانُ ثَلَاثٌ فَإِنْ أُذِنَ لَكَ فَادْخُلْ وَإِلَّا فَارْجِعْ فَقَالَ لَئِنْ لَمْ تَأْتِنِي بِمَنْ يَعْلَمُ هَذَا لَأَفْعَلَنَّ بِكَ كَذَا وَكَذَا فَإِنْ كَانَ سَمِعَ ذَلِكَ أَحَدٌ مِنْكُمْ فَلْيَقُمْ مَعِي فَقَالُوا لِأَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قُمْ مَعَهُ وَكَانَ أَبُو سَعِيدٍ أَصْغَرَهُمْ فَقَامَ مَعَهُ فَأَخْبَرَ بِذَلِكَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ لِأَبِي مُوسَى أَمَا إِنِّي لَمْ أَتَّهِمْكَ وَلَكِنْ خَشِيتُ أَنْ يَتَقَوَّلَ النَّاسُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

मलिक ने मुझे [रबीआ बिन अबू अब्दुर्रहमान] से [उनके एक से अधिक विद्वानों] से बताया कि [अबू मूसा अल अशरी] उमर बिन खत्ताब से अनुमति मांगने आए, फिर उन्होंने उन्हें तीन बार सलाम किया, जिसके बाद वे घर लौट आए। उमर बिन खत्ताब ने उनके पीछे किसी को भेजा। उमर ने पूछा; "तुम अंदर क्यों नहीं जाते?" अबू मूसा अल अशरी ने उत्तर दिया; "मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना है: 'तीन बार अनुमति मांगो। अगर तुम्हें अनुमति है, तो प्रवेश करें। यदि नहीं, तो घर जाओ'!" तब उमर बिन खत्ताब ने कहा; "आपके अलावा, इस हदीस के बारे में कौन जानता है? यदि आप इसे मेरे पास नहीं लाएंगे, तो मैं आपके साथ ऐसा-ऐसा करूंगा।" फिर अबू मूसा बाहर निकले जब तक कि उन्हें मस्जिद में अंसार सभा नामक एक सभा नहीं मिली। उन्होंने कहा; "मैंने उमर बिन खत्ताब को बताया कि मैंने रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए सुना: 'तीन बार इजाज़त मांगो, अगर इजाज़त हो तो अंदर आओ, लेकिन अगर नहीं तो घर जाओ।' तब उमर ने कहा: 'अगर तुम मेरे पास किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं लाते जो इसके बारे में जानता हो, तो मैं यह और वह करूँगा। इसलिए अगर तुम में से किसी ने सुना है, तो मेरे साथ आओ।" तब लोगों ने [अबू सईद अल खुदरी] से कहा; "उसके साथ आओ!" उस समय अबू सईद अल खुदरी उनमें सबसे छोटे थे, इसलिए वह अबू मूसा के साथ गए और उमर बिन खत्ताब को गवाही दी। तब उमर बिन खत्ताब ने अबू मूसा से कहा; "मुझे तुम पर शक नहीं है, बस मुझे चिंता है कि कहीं लोग पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए शब्द न बना लें।"