Imam Malik : 1481
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَدَخَلَ عَلَى عَائِشَةَ وَهِيَ تَشْتَكِي وَيَهُودِيَّةٌ تَرْقِيهَا فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ ارْقِيهَا بِكِتَابِ اللَّهِ
मलिक हमरा [अमरा बिन अब्दुररहमान] स [याह्या बिन सईद] स कहलथि जे [अबू बकर अस सिद्दिक] एक बेर ऐसिया स भेंट केलथि जे ओहि समय बीमार छलीह, जखन कि हुनकर कात मे एकटा यहूदी महिला अपन रुकिया क रहल छलीह। तखन अबू बकर कहलनि; 'अल्लाह के किताब के साथ उसे रूकियाह'।
Imam Malik : 1482
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَأَنَّ رَجُلًا فِي زَمَانِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَصَابَهُ جُرْحٌ فَاحْتَقَنَ الْجُرْحُ الدَّمَ وَأَنَّ الرَّجُلَ دَعَا رَجُلَيْنِ مِنْ بَنِي أَنْمَارٍ فَنَظَرَا إِلَيْهِ فَزَعَمَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَهُمَا أَيُّكُمَا أَطَبُّ فَقَالَا أَوَ فِي الطِّبِّ خَيْرٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَزَعَمَ زَيْدٌ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَنْزَلَ الدَّوَاءَ الَّذِي أَنْزَلَ الْأَدْوَاءَ
हमरा मलिक स [जैद बिन असलम] स कहल गेल छल जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क समय मे एकटा एहन आदमी छल जे घाव स पीड़ित छल जे खून बहैत छल। तखन ओ बनी अनमार सँ दू गोटे केँ बजौलनि, दुनू गोटे हुनका लग आबि कहलनि जे रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) दुनू गोटे सँ पूछने छथि जे अहाँ मे सँ के चंगाई मे माहिर अछि? ओ सब पुछलखिन, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की इलाज में कोनो भलाई छै? जैद के लगै छै कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि ‘दवाई उतारै वाला वू बीमारी उतारै छै’ ।
Imam Malik : 1483
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ قَالَ بَلَغَنِيأَنَّ سَعْدَ بْنَ زُرَارَةَ اكْتَوَى فِي زَمَانِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ الذُّبْحَةِ فَمَاتَ
मलिक स॑ हमरा ई बात कहलऽ गेलऽ छेलै कि [याह्या बिन सईद] न॑ कहलकै कि हम्में सुनल॑ छियै कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के समय म॑ स’द बिन ज़ुरारा क॑ गला म॑ खराश के कारण काय स॑ इलाज करलऽ गेलऽ छेलै आरू ओकरा बाद ओकरऽ मौत होय गेलऽ छेलै ।’
Imam Malik : 1484
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَاكْتَوَى مِنْ اللَّقْوَةِ وَرُقِيَ مِنْ الْعَقْرَبِ
हमरा [नाफी’] स मालिक स रिवायत भेल जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] के चेहरा में दर्द के कारण काय के इलाज कायल गेल छल, आ बिच्छू के डंक के लेल रुकिया के इलाज सेहो भेल छल |
Imam Malik : 1485
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ الْمُنْذِرِ أَنَّ أَسْمَاءَ بِنْتَ أَبِي بَكْرٍ كَانَتْ إِذَا أُتِيَتْ بِالْمَرْأَةِ وَقَدْ حُمَّتْ تَدْعُو لَهَا أَخَذَتْ الْمَاءَ فَصَبَّتْهُ بَيْنَهَا وَبَيْنَ جَيْبِهَاوَقَالَتْ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَأْمُرُنَا أَنْ نُبْرِدَهَا بِالْمَاءِ
ई हमरा मलिक सँ [हिस्याम बिन उर्वाह] सँ [फातिमा बिंत मुंडिर] सँ कहल गेल अछि जे कहने छलाह, ‘जँ कोनो महिला केँ बोखार सँ [अस्मा बिन्त अबू बकर] केर समक्ष आनल जाइत छैक, तखन ओ ओकरा पानि लेबाक आदेश दैत छैक आ ओकर शरीर आ ओकर कॉलर केर बीच छिड़कि दैत छैक। तखन ओ कहलनि; 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा सब के पानि स ठंडा करबाक आदेश देलखिन'।
Imam Malik : 1486
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الْحُمَّى مِنْ فَيْحِ جَهَنَّمَ فَابْرُدُوهَا بِالْمَاءِ
हमरा [हिशाम बिन उर्वाह] स मालिक स [हुनकर पिता] स रिवायत अछि जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: बुखार नरक के आगि स होइत अछि, ताहि लेल एकरा पानि स ठंडा करू!
Imam Malik : 1487
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْحُمَّى مِنْ فَيْحِ جَهَنَّمَ فَأَطْفِئُوهَا بِالْمَاءِ
मलिक हमरा [इब्न उमर] स [नफी’] स बतेलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे बुखार नरक क उफान स होइत अछि, ताहि लेल एकरा पानि स बुझाउ।
Imam Malik : 1488
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ نَافِعٍ عَنْ أَبِيهِ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَرَ بِإِحْفَاءِ الشَّوَارِبِ وَإِعْفَاءِ اللِّحَى
हमरा मलिक सँ [अबू बकर बिन नाफी’] सँ [हुनकर पिता नफी’] सँ [अब्दुल्लाह बिन उमर] सँ रिवायत कयल गेल अछि जे कहलनि जे, ‘अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मूंछ छोट करबाक आ दाढ़ी बढ़ेबाक आदेश देलनि।
Imam Malik : 1489
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ أَنَّهُ سَمِعَ مُعَاوِيَةَ بْنَ أَبِي سُفْيَانَ عَامَ حَجَّ وَهُوَ عَلَى الْمِنْبَرِ وَتَنَاوَلَ قُصَّةً مِنْ شَعَرٍ كَانَتْ فِي يَدِ حَرَسِيٍّ يَقُولُيَا أَهْلَ الْمَدِينَةِ أَيْنَ عُلَمَاؤُكُمْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَنْهَى عَنْ مِثْلِ هَذِهِ وَيَقُولُ إِنَّمَا هَلَكَتْ بَنُو إِسْرَائِيلَ حِينَ اتَّخَذَ هَذِهِ نِسَاؤُهُمْ
मलिक हमरा [इब्न शिहाब] स [हुमैद बिन अब्दुररहमान बिन औफ] स कहलथि जे ओ हज क मौसम मे [मुअवियाह बिन अबू सुफियन] कए मंच पर उपदेश दैत सुनने छलाह, जखन कि एकटा केश क टुकड़ा जे एकटा पहरेदार क हाथ मे छल, ल कए कहलथि, ‘हे मदीना क लोक, अहां क विद्वान कतय छथि? सुनलौं जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एहि तरहक बात स मना क देने छथि। ओ कहलनि: 'बनी इस्राइल तखन नष्ट भ गेल जखन ओकर महिला एहि वस्तु केँ ल' लेलक''।
Imam Malik : 1490
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زِيَادِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ سَمِعَهُ يَقُولُسَدَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَاصِيَتَهُ مَا شَاءَ اللَّهُ ثُمَّ فَرَقَ بَعْدَ ذَلِكَقَالَ مَالِك لَيْسَ عَلَى الرَّجُلِ يَنْظُرُ إِلَى شَعَرِ امْرَأَةِ ابْنِهِ أَوْ شَعَرِ أُمِّ امْرَأَتِهِ بَأْسٌ
हमरा मालिक स [जियाद बिन सअद] स [इब्न शिहाब] स कहने छथि जे ओ हुनका कहैत सुनने छलाह; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन केश के कपार तक छोड़ि देलखिन, अल्लाह के इच्छा स तखन ओ अपन केश अलग क देलखिन।' मालिक बजलाह; 'पुरुष अपन पुतहुक केश आ सासुक केश दिस तकला मे कोनो हर्ज नहि'।
Imam Malik : 1491
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّهُ كَانَ يَكْرَهُ الْإِخْصَاءَ وَيَقُولُ فِيهِ تَمَامُ الْخَلْقِ
हमरा [नाफी'] स मालिक स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स इ कहल गेल छल जे हुनका क्षय-क्षय स घृणा छल, ओ कहला; 'ओहि मे सृष्टिक सिद्धि अछि'।
Imam Malik : 1492
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ أَنَّهُ بَلَغَهُأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَنَا وَكَافِلُ الْيَتِيمِ لَهُ أَوْ لِغَيْرِهِ فِي الْجَنَّةِ كَهَاتَيْنِ إِذَا اتَّقَى وَأَشَارَ بِإِصْبُعَيْهِ الْوُسْطَى وَالَّتِي تَلِي الْإِبْهَامَ
हमरा मलिक स [शफवान बिन सुलैम] स कहल गेल अछि जे इ हुनका लग पहुंच गेल अछि, जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे हम आ जे अनाथ बच्चा क देखभाल करैत अछि, ओकरा लेल या अन्य लेल एहि तरहक जन्नत मे, अगर ओ धर्मात्मा अछि’। तखन ओ अपन बीचक आँगुर आ तर्जनीसँ इशारा केलनि ।
Imam Malik : 1493
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍأَنَّ أَبَا قَتَادَةَ الْأَنْصَارِيَّ قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ لِي جُمَّةً أَفَأُرَجِّلُهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَعَمْ وَأَكْرِمْهَا فَكَانَ أَبُو قَتَادَةَ رُبَّمَا دَهَنَهَا فِي الْيَوْمِ مَرَّتَيْنِ لِمَا قَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَعَمْ وَأَكْرِمْهَا
हमरा [याह्या बिन सईद] स मालिक स कहल गेल अछि जे अबू कतादाह अल अंसारी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलथि; 'हमर केश नमहर अछि जे कान्ह धरि पहुँचि जाइत अछि, की हम एकरा स्टाइल क' सकैत छी?' रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन जवाब देलनि: 'हँ, आ एकर महिमामंडन करू'। अबू कतादा कखनो-कखनो एकरा दिन मे दू बेर तेल लगा दैत छलाह, ई ओहि बात पर आधारित छल जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'हँ! आ एकर महिमामंडन करू'।
Imam Malik : 1494
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ أَنَّ عَطَاءَ بْنَ يَسَارٍ أَخْبَرَهُ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الْمَسْجِدِ فَدَخَلَ رَجُلٌ ثَائِرَ الرَّأْسِ وَاللِّحْيَةِ فَأَشَارَ إِلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِيَدِهِ أَنْ اخْرُجْ كَأَنَّهُ يَعْنِي إِصْلَاحَ شَعَرِ رَأْسِهِ وَلِحْيَتِهِ فَفَعَلَ الرَّجُلُ ثُمَّ رَجَعَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَيْسَ هَذَا خَيْرًا مِنْ أَنْ يَأْتِيَ أَحَدُكُمْ ثَائِرَ الرَّأْسِ كَأَنَّهُ شَيْطَانٌ
हमरा मलिक स [जैद बिन असलम] स कहल गेल अछि जे [अथा बिन यासर] हुनका रिपोर्ट केलथि, ओ कहलथि जे जखन अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मस्जिद मे छलाह त एकटा आदमी बिखरल केश आ बेढंगा दाढ़ी ल कए प्रवेश केलक। तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हाथ सँ ओहि आदमी के बाहर आबय के इशारा केलनि, जेना ओ कहि रहल होथि जे 'ओकरा केश आ दाढ़ी छंटनी करबाक चाही'। तखन ओ आदमी एना केलक आ फेर वापस आबि गेल, तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'की ई अहाँ मे सँ एक गोटे शैतान जकाँ गन्दा केश ल' क' आबय सँ नीक नहि अछि'।
Imam Malik : 1495
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ قَالَ أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيُّ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ الْأَسْوَدِ بْنِ عَبْدِ يَغُوثَ قَالَ وَكَانَ جَلِيسًا لَهُمْ وَكَانَ أَبْيَضَ اللِّحْيَةِ وَالرَّأْسِقَالَ فَغَدَا عَلَيْهِمْ ذَاتَ يَوْمٍ وَقَدْ حَمَّرَهُمَا قَالَ فَقَالَ لَهُ الْقَوْمُ هَذَا أَحْسَنُ فَقَالَ إِنَّ أُمِّي عَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرْسَلَتْ إِلَيَّ الْبَارِحَةَ جَارِيَتَهَا نُخَيْلَةَ فَأَقْسَمَتْ عَلَيَّ لَأَصْبُغَنَّوَأَخْبَرَتْنِي أَنَّ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَ كَانَ يَصْبُغُ
हमरा मलिक सँ रिवायत भेल जे [याह्या बिन सईद] कहलनि; [मुहम्मद बिन इब्राहिम अत तैमी] हमरा [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान] स रिपोर्ट केलनि जे [अब्दुररहमान बिन अल असवद बिन अब्दु यघुत] धूसर केश आ दाढ़ी वाला लोक के संग बैसल किछु कहलनि। फेर दोसर दिन लाल रंगक केश आ दाढ़ी बला लोक सभसँ भेंट करय लेल निकललाह । कथावाचक कहलखिन, 'लोक तखन हुनका कहलकनि, 'ई नीक! ' 'अब्दुररहमान बिन अल असवद कहलनि, 'काल्हि राति हमर माँ, ['आइशा] नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केर पत्नी अपन नुखैला नामक गुलाम हमरा लग पठौलनि।' ओ हमरा पर अल्लाह के शपथ खयलीह, 'सत्ते हम अपन केश रंगब।' तखन ओ हमरा सूचित केलनि जे [अबू बकर अस सिद्दीक] सेहो हुनकर केश रंगलनि।'
Imam Malik : 1496
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ قَالَ بَلَغَنِيأَنَّ خَالِدَ بْنَ الْوَلِيدِ قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي أُرَوَّعُ فِي مَنَامِي فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قُلْ أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ غَضَبِهِ وَعِقَابِهِ وَشَرِّ عِبَادِهِ وَمِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاطِينِ وَأَنْ يَحْضُرُونِ
हमरा मलिक सँ रिवायत भेल जे [याह्या बिन सैद] कहलनि जे, हमरा लग पहुँचि गेल अछि जे खालिद बिन वलीद अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ कहलनि; 'हमरा एकटा खराब सपना आयल अछि! ' अल्लाह के रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन कहलनि: 'पढ़ू: अ'उद्ज़ू बिकालीमतिल्लाही तअम्माती मिन गद्लाबिहि वा 'इकाबिहि वा स्यारी 'इबादीहि वा मिन हमजातिसी स्यायैतथिन वा आन यहदुरून - हम अल्लाह के पूर्ण वचन में हुनकर क्रोध, हुनकर सजा स शरण लैत छी, ओकर सेवक सभक बुराई सँ आ शैतानक फुसफुसाहटि सँ आ जखन ओ सभ उपस्थित रहैत छथि-'।
Imam Malik : 1497
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَأُسْرِيَ بِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَرَأَى عِفْرِيتًا مِنْ الْجِنِّ يَطْلُبُهُ بِشُعْلَةٍ مِنْ نَارٍ كُلَّمَا الْتَفَتَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَآهُ فَقَالَ لَهُ جِبْرِيلُ أَفَلَا أُعَلِّمُكَ كَلِمَاتٍ تَقُولُهُنَّ إِذَا قُلْتَهُنَّ طَفِئَتْ شُعْلَتُهُ وَخَرَّ لِفِيهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَلَى فَقَالَ جِبْرِيلُ فَقُلْ أَعُوذُ بِوَجْهِ اللَّهِ الْكَرِيمِ وَبِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ اللَّاتِي لَا يُجَاوِزُهُنَّ بَرٌّ وَلَا فَاجِرٌ مِنْ شَرِّ مَا يَنْزِلُ مِنْ السَّمَاءِ وَشَرِّ مَا يَعْرُجُ فِيهَا وَشَرِّ مَا ذَرَأَ فِي الْأَرْضِ وَشَرِّ مَا يَخْرُجُ مِنْهَا وَمِنْ فِتَنِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَمِنْ طَوَارِقِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ إِلَّا طَارِقًا يَطْرُقُ بِخَيْرٍ يَا رَحْمَنُ
हमरा [याह्या बिन सईद] स मालिक स कहल गेल अछि जे ओ कहने छलाह जे जखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन इस्राम बना रहल छलाह तखन हुनका पाछु आबय वाला जिन्न स इफ्रीत देखलनि जे ओ जरैत मशाल ल क चलैत छलाह। हर बेर जखन ओ माथ घुमाबैत छलाह तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका देखैत छलाह | तेँ जिब्राईल कहलथिन; 'की हम अहाँकेँ किछु शब्द सिखाबी जे पढ़ब तँ आगि आबि जाएत आ मुँह पर मुँह पर खसि पड़त?' रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'हाँ'। तेँ जिब्रिल कहलक; 'पढ़ू: ' हम अल्लाह, परम कृपालु के सामने आ हुनकर सिद्ध वचन में शरण लैत छी, जेकरा कोनो धर्मी आ ने पापी, आकाश स उतरय वाला बुराई आ ओकरा दिस उठय वाला बुराई स, आ ओहि बुराई स जे धरती में रोपल गेल अछि आ जे ओहि स निकलैत अछि। राति-दिनक परीक्षा सँ आ राति-दिनक विपत्ति सँ सिवाय भलाईक विपत्ति सँ हे दयालु।
Imam Malik : 1498
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَجُلًا مِنْ أَسْلَمَ قَالَ مَا نِمْتُ هَذِهِ اللَّيْلَةَ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ أَيِّ شَيْءٍ فَقَالَ لَدَغَتْنِي عَقْرَبٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَا إِنَّكَ لَوْ قُلْتَ حِينَ أَمْسَيْتَ أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ لَمْ تَضُرَّكَ
मलिक हमरा [सुहैल बिन अबू सालिह] स [अपन पिता] स [अबू हुरैरा] स कहलथि जे असलम क एकटा आदमी कहलक; 'काल्हि राति मे नींद नहि आबि रहल छल?' रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: 'की बात छै?' ओ उत्तर देलथिन; 'हमरा बिच्छू डंक मारि देलक'। अतः रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'जँ अहाँ दुपहर मे पढ़ब: 'अ'उद्ज़ू बिकालिमातिल्लाही अत्तममती मिन सियरी खालक -हम अल्लाह केर पूर्ण वचन मे शरण लैत छी, जे ओ बुराई बनौने छथि-', त' निश्चित रूप सँ अहाँ केँ कोनो नुकसान नहि होयत'।
Imam Malik : 1499
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سُمَيٍّ مَوْلَى أَبِي بَكْرٍ عَنْ الْقَعْقَاعِ بْنِ حَكِيمٍ أَنَّ كَعْبَ الْأَحْبَارِ قَالَلَوْلَا كَلِمَاتٌ أَقُولُهُنَّ لَجَعَلَتْنِي يَهُودُ حِمَارًا فَقِيلَ لَهُ وَمَا هُنَّ فَقَالَ أَعُوذُ بِوَجْهِ اللَّهِ الْعَظِيمِ الَّذِي لَيْسَ شَيْءٌ أَعْظَمَ مِنْهُ وَبِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ الَّتِي لَا يُجَاوِزُهُنَّ بَرٌّ وَلَا فَاجِرٌ وَبِأَسْمَاءِ اللَّهِ الْحُسْنَى كُلِّهَا مَا عَلِمْتُ مِنْهَا وَمَا لَمْ أَعْلَمْ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ وَبَرَأَ وَذَرَأَ
हमरा ई बात अबू बकर के पूर्व गुलाम [सुमय्या] स मालिक स, [अल क'का बिन हकीम] स कहल गेल अछि जे [काब अल अहबर] कहलनि; 'हम जे शब्द पढ़लहुँ से नहि रहैत त' यहूदी सभ हमरा गदहा जकाँ बना दैत।' तखन हुनका सँ पूछल गेलनि जे ओ शब्द की अछि ? ओ उत्तर देलनि : 'अ'उद्ज़ू बी वझिल्लाही अल अझिमी अल्लादज़ी लैसा स्याउन अ'झामा मिन्हू वा बी कालिमातिल्लाह तम्मती ल्लाती ला युजाविजुहुन्ना बररुण वाला फजीरुण वा बी असमा`इल्लाहिल हुस्ना कुलीहा, माँ 'अलीमतु मैनहुआ वामा लम अ'लम मिन शर्री मा खालका वा बारा`आ वा ज़ारा`आ' - हम अल्लाह, परम महान के सामने शरण लैत छी, जिनका स पैघ किछु नहि अछि। आरू अल्लाह केरऽ सिद्ध वचनऽ के साथ जेकरा नै त॑ धर्मी आरू नै पापी पार करी सकै छै, आरू -हम शरण लेबै छियै- ओकरऽ सब अच्छा नामऽ के साथ, चाहे हम्में ओकरा जानबै या नै जानबै, वू सब बुराई स॑ जे वू बनैल॑ छै आरू बनैल॑ छै या बनैल॑ छै-' ।
Imam Malik : 1500
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ مَعْمَرٍ عَنْ أَبِي الْحُبَابِ سَعِيدِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى يَقُولُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَيْنَ الْمُتَحَابُّونَ لِجَلَالِي الْيَوْمَ أُظِلُّهُمْ فِي ظِلِّي يَوْمَ لَا ظِلَّ إِلَّا ظِلِّي
हमरा मलिक स [अब्दुल्लाह बिन अब्दुररहमान बिन मा'मर] स [अबू अल हुबाब सैद बिन यासर] स [अबू हुरैरा] स कहल गेल अछि, 'रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला: 'अल्लाह तबराका व त'ला क़यामत के दिन कहलनि; 'आइ हमर महिमा के चाहनिहार लोक कतय अछि।' हम ओहि दिन छाहरि देब जखन हुनकर छाहरि छोड़ि कोनो छाहरि नहि रहत' ।