Imam Malik : 1461
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَ سُئِلَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِعَنْ الْجَرَادِ فَقَالَ وَدِدْتُ أَنَّ عِنْدِي قَفْعَةً نَأْكُلُ مِنْهُ
हमरा ई मलिक सँ [अब्दुल्लाह बिन दिनार] सँ [अब्दुल्लाह बिन उमर] सँ रिवायत भेल जे कहलनि; '[उमर बिन खट्टाब] स टिड्डी क बारे मे पूछल गेल, ओ जवाब देलथि; 'काश, हमरा सभ लग टिड्डीक टोकरी रहैत जे खा सकितहुँ''।
Imam Malik : 1462
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَلْحَلَةَ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ مَالِكِ بْنِ خُثَيْمٍ أَنَّهُ قَالَ كُنْتُ جَالِسًا مَعَ أَبِي هُرَيْرَةَبِأَرْضِهِ بِالْعَقِيقِ فَأَتَاهُ قَوْمٌ مِنْ أَهْلِ الْمَدِينَةِ عَلَى دَوَابٍّ فَنَزَلُوا عِنْدَهُ قَالَ حُمَيْدٌ فَقَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ اذْهَبْ إِلَى أُمِّي فَقُلْ إِنَّ ابْنَكِ يُقْرِئُكِ السَّلَامَ وَيَقُولُ أَطْعِمِينَا شَيْئًا قَالَ فَوَضَعَتْ ثَلَاثَةَ أَقْرَاصٍ فِي صَحْفَةٍ وَشَيْئًا مِنْ زَيْتٍ وَمِلْحٍ ثُمَّ وَضَعَتْهَا عَلَى رَأْسِي وَحَمَلْتُهَا إِلَيْهِمْ فَلَمَّا وَضَعْتُهَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ كَبَّرَ أَبُو هُرَيْرَةَ وَقَالَ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَشْبَعَنَا مِنْ الْخُبْزِ بَعْدَ أَنْ لَمْ يَكُنْ طَعَامُنَا إِلَّا الْأَسْوَدَيْنِ الْمَاءَ وَالتَّمْرَ فَلَمْ يُصِبْ الْقَوْمُ مِنْ الطَّعَامِ شَيْئًا فَلَمَّا انْصَرَفُوا قَالَ يَا ابْنَ أَخِي أَحْسِنْ إِلَى غَنَمِكَ وَامْسَحْ الرُّعَامَ عَنْهَا وَأَطِبْ مُرَاحَهَا وَصَلِّ فِي نَاحِيَتِهَا فَإِنَّهَا مِنْ دَوَابِّ الْجَنَّةِ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَيُوشِكُ أَنْ يَأْتِيَ عَلَى النَّاسِ زَمَانٌ تَكُونُ الثُّلَّةُ مِنْ الْغَنَمِ أَحَبَّ إِلَى صَاحِبِهَا مِنْ دَارِ مَرْوَانَ
हमरा मलिक स [मुहम्मद बिन अमरू बिन हलाहला] स [हुमैद बिन हसीम बिन खुतसैम] स कहल गेल अछि कहल गेल अछि; 'हम अबू हुरैरा के संग हुनकर इलाका अर्थात अकीक मे बैसल छलहुं।' तखन मदीना के लोक स किछु लोक घोड़ा पर सवार भ' क' हुनका कात मे रुकि गेलाह'. हुमैद बाजल; [अबू हुरैरा] कहलनि; 'हमर माँ लग जाउ, आ कहू जे 'अहाँक बेटा नमस्कार पठबैत अछि''। ओ आदमी कहलक जे हमरा सभकेँ किछु भोजन दिअ’। हुमैद बिन हसीम कहलनि; 'ओकर माय एकटा पैघ थारी मे तीन टा चपटा रोटी आ किछु तेल-नून राखि देलक।' ओ हमर माथ पर राखि देलनि, हम तखन हुनका सभ लग लऽ गेलहुँ । जखन हम ओकरा सभक सोझाँ राखि देलियैक तऽ अबू हुरैरा तुरन्त तकबीर बना कऽ कहलक; 'अल्लाह के स्तुति जे हमरा सब के रोटी भरि देलखिन, जखन कि हमरा सब के अल असवदैन के अलावा किछु खाय के मौका नै भेटल छल; पानि आ खजूर'। आ ओ लोक सभ एकदम नहि खा चुकल अछि। जखन ओ सभ चलि गेलाह तखन ओ कहलनि; 'हे हमर भाइक बच्चा, अपन बकरी के भलाई करू, ओकर थूक पोछू, आ ओकर गंध सुंघू आ ओकर बगल मे प्रार्थना करू किएक त' ओ जानवर स्वर्गक जानवर मे सँ एक अछि।' जिनकर हाथ मे हमर आत्मा अछि, हुनका द्वारा मनुक्खक बीच लगभग एहन समय आबि जायत, जखन मरवानक घरक मालिक सँ बकरीक झुंड बेसी नीक होयत।
Imam Malik : 1463
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي نُعَيْمٍ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ قَالَأُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِطَعَامٍ وَمَعَهُ رَبِيبُهُ عُمَرُ بْنُ أَبِي سَلَمَةَ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَمِّ اللَّهَ وَكُلْ مِمَّا يَلِيكَ
हमरा मलिक स कहने छथि [अबू नुआइम वहब बिन कैसन] स कहने छथि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, ओ आ हुनकर सौतेला बेटा उमर बिन अबू सलामा के भोजन परोसल गेल छल। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन हुनका कहलखिन: 'अल्लाह के नाम पुकारू आ जे अहाँक नजदीक अछि से खाउ''।
Imam Malik : 1464
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ يَقُولُ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍفَقَالَ لَهُ إِنَّ لِي يَتِيمًا وَلَهُ إِبِلٌ أَفَأَشْرَبُ مِنْ لَبَنِ إِبِلِهِ فَقَالَ لَهُ ابْنُ عَبَّاسٍ إِنْ كُنْتَ تَبْغِي ضَالَّةَ إِبِلِهِ وَتَهْنَأُ جَرْبَاهَا وَتَلُطُّ حَوْضَهَا وَتَسْقِيهَا يَوْمَ وِرْدِهَا فَاشْرَبْ غَيْرَ مُضِرٍّ بِنَسْلٍ وَلَا نَاهِكٍ فِي الْحَلْبِ
हमरा [याह्या बिन सैइद] स मालिक स कहने छलाह जे ओ कहलनि, 'हम [अल कासिम बिन मुहम्मद] के कहैत सुनने रही; 'कियो अब्दुल्ला बिन अब्बास लग आयल, तखन ओकरा कहलक; 'हमरा अनाथ अछि, बच्चाक ऊँट अछि।' की हम ऊँटक दूध पीबि सकैत छी? ' [इब्न अब्बास] उत्तर देलनि; 'जँ ऊँट हेरा गेला पर खोजय चाहैत छी त' ओकर मंगे रंगि क' ओकरा माटि सँ झाँपि दियौक जाहि सँ ओ छेद झाँपि जाय आ ऊँट केँ प्यास भेला पर किछु पीबय दियौक।' तेँ दूध बिना नासल के नुकसान केने वा एक्सप्रेस करैत समाप्त केने पीबू' ।
Imam Malik : 1465
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ كَانَ لَا يُؤْتَى أَبَدًا بِطَعَامٍ وَلَا شَرَابٍ حَتَّى الدَّوَاءُ فَيَطْعَمَهُ أَوْ يَشْرَبَهُ إِلَّا قَالَ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي هَدَانَا وَأَطْعَمَنَا وَسَقَانَا وَنَعَّمَنَا اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُمَّ أَلْفَتْنَا نِعْمَتُكَ بِكُلِّ شَرٍّ فَأَصْبَحْنَا مِنْهَا وَأَمْسَيْنَا بِكُلِّ خَيْرٍ فَنَسْأَلُكَ تَمَامَهَا وَشُكْرَهَا لَا خَيْرَ إِلَّا خَيْرُكَ وَلَا إِلَهَ غَيْرُكَ إِلَهَ الصَّالِحِينَ وَرَبَّ الْعَالَمِينَ الْحَمْدُ لِلَّهِ وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ مَا شَاءَ اللَّهُ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ اللَّهُمَّ بَارِكْ لَنَا فِيمَا رَزَقْتَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
हमरा [हिस्यम बिन उर्वाह] स मालिक स [हुनकर पिता] स कहल गेल अछि जे हुनका कहियो भोजन, पेय या दवाई तक नहि परोसल जाइत अछि जे ओ खाइत छथि या पीबैत छथि जाबत ओ नहि पढ़ैत छथि; 'अल्लाह के स्तुति जे हमरा सब के हिदायत देलखिन, भोजन, पेय आ सब भोग देलखिन।' अल्लाह सबसँ पैघ छथि। हे अल्लाह, अहाँक बरकत हमरा सभ पर बुराई सँ भरल अबैत अछि, मुदा एहि कारणेँ हम सभ नीक हालत मे भोर-साँझ धरि जा सकैत छी। तेँ हम अहाँ सँ पूर्णता आ कृतज्ञता माँगैत छी, अहाँक छोड़ि कोनो नीक नहि। धर्मात्मा के भगवान आ लोक के प्रभु के अलावा अहाँ के अलावा कोनो देवता नै छैथ | अल्लाह के स्तुति हो आ अल्लाह के अलावा कोनो इबादत के लायक देवता नै छै, जे अल्लाह चाहै छै आ अल्लाह के अलावा कोनो शक्ति नै छै। हे अल्लाह, जे किछु अहाँ हमरा सभक लेल उपलब्ध करौने छी, ताहि सँ हमरा सभ केँ बरकत दिअ, आ हमरा सभ केँ नरकक आगि सँ बचाउ'।
Imam Malik : 1466
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَإِيَّاكُمْ وَاللَّحْمَ فَإِنَّ لَهُ ضَرَاوَةً كَضَرَاوَةِ الْخَمْرِ
हमरा मलिक सँ [याह्या बिन सईद] सँ रिवायत भेल जे [उमर बिन खत्ताब] कहलनि; 'मांस सँ सावधान रहू, सचमुच एकर शराब सन लत छैक।'
Imam Malik : 1467
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِأَدْرَكَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ وَمَعَهُ حِمَالُ لَحْمٍ فَقَالَ مَا هَذَا فَقَالَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ قَرِمْنَا إِلَى اللَّحْمِ فَاشْتَرَيْتُ بِدِرْهَمٍ لَحْمًا فَقَالَ عُمَرُ أَمَا يُرِيدُ أَحَدُكُمْ أَنْ يَطْوِيَ بَطْنَهُ عَنْ جَارِهِ أَوْ ابْنِ عَمِّهِ أَيْنَ تَذْهَبُ عَنْكُمْ هَذِهِ الْآيَةُ{ أَذْهَبْتُمْ طَيِّبَاتِكُمْ فِي حَيَاتِكُمْ الدُّنْيَا وَاسْتَمْتَعْتُمْ بِهَا }
हमरा मलिक स [याह्या बिन सईद] स कहल गेल जे [उमर बिन खत्ताब] क मुलाकात जाबिर बिन अब्दुल्ला स भेल जे मांस ल क जा रहल छलाह। तखन उमर पुछलखिन; 'इ कोन चीज छै?' जाबिर उत्तर देलखिन, 'हे मुसलमानक सेनापति, हमरा लोकनि मांसक लेल तरसैत छलहुँ, तेँ हम एक दिरहम मे कीनि लेलहुँ।' उमर पुछलकै; 'अहाँ सभ मे सँ कियो अपन पड़ोसी आ काकाक बेटा केँ उपेक्षा क' पेट भरैत अछि? तखन अहाँ अल्लाह केर एहि आयत सँ की करब : '-अहाँ अपन नीक काज केँ एहि दुनियाँक जीवन सँ दूर राखू जखन कि अहाँ एहि सँ मजा लैत छी-' -प्र.स. अल अहकाफ : 20- .
Imam Malik : 1468
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَلْبَسُ خَاتَمًا مِنْ ذَهَبٍ ثُمَّ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَبَذَهُ وَقَالَ لَا أَلْبَسُهُ أَبَدًا قَالَ فَنَبَذَ النَّاسُ بِخَوَاتِيمِهِمْ
हमरा मलिक स [अब्दुल्लाह बिन दिनार] स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स रिवायत भेल अछि जे कहने छलाह, ‘रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसलम सोनाक अंगूठी पहिरने छलाह, तखन रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम ठाढ़ भ कए उतारलथि। तकर बाद ओ कहलनि: 'हम आब कहियो नहि पहिरब'। अब्दुल्ला बिन उमर कहलनि; 'लोक सेहो अंगूठी उतारलक'।
Imam Malik : 1469
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ صَدَقَةَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّهُ قَالَ سَأَلْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِعَنْ لُبْسِ الْخَاتَمِ فَقَالَ الْبَسْهُ وَأَخْبِرْ النَّاسَ أَنِّي أَفْتَيْتُكَ بِذَلِكَ
हमरा मलिक सँ [शदकाह बिन यासर] सँ रिवायत कयल गेल अछि जे हम [सैद बिन मुसैयब] सँ अंगूठी पहिरबाक नियम के बारे मे पूछलहुँ, तखन ओ जवाब देलनि; 'अंगूठी पहिरि क' लोक केँ कहि दियौक जे हमरा एहन फतवा अछि।'
Imam Malik : 1470
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ عَنْ عَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ أَنَّ أَبَا بَشِيرٍ الْأَنْصَارِيَّ أَخْبَرَهُأَنَّهُ كَانَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي بَعْضِ أَسْفَارِهِ قَالَ فَأَرْسَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَسُولًا قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي بَكْرٍ حَسِبْتُ أَنَّهُ قَالَ وَالنَّاسُ فِي مَقِيلِهِمْ لَا تَبْقَيَنَّ فِي رَقَبَةِ بَعِيرٍ قِلَادَةٌ مِنْ وَتَرٍ أَوْ قِلَادَةٌ إِلَّا قُطِعَتْقَالَ يَحْيَى سَمِعْت قَوْله تَعَالَى يَقُولُ أَرَى ذَلِكَ مِنْ الْعَيْنِ
हमरा [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर] स मालिक स [अब्बद बिन तमीम] स रिवायत अछि जे [अबू बशीर अल अंसारी] हुनका सूचित केलथि जे ओ अल्लाह क रसूलुल्लाह (स.अ.व.) क संग यात्रा पर छथि। ओ - कथावाचक - कहलनि : 'अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) तखन एकटा दूत पठौलनि।' अब्दुल्लाह बिन अबू बकर कहलनि: 'हमरा लगैत अछि जे जखन लोक अपन विश्राम स्थल पर छल तखन ओ कहने छलाह: 'ऊँट के ठेहुन सं फाँसी, वा हार - कथाकार संदिग्ध छथि - नहि छोड़ू।' याह्या कहलकै: 'हम मालिक के कहै सुनलियै: 'हम देखै छियै कि ई 'आयन' के हिस्सा छै।'
Imam Malik : 1471
و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَاهُ يَقُولُاغْتَسَلَ أَبِي سَهْلُ بْنُ حُنَيْفٍ بِالْخَرَّارِ فَنَزَعَ جُبَّةً كَانَتْ عَلَيْهِ وَعَامِرُ بْنُ رَبِيعَةَ يَنْظُرُ قَالَ وَكَانَ سَهْلٌ رَجُلًا أَبْيَضَ حَسَنَ الْجِلْدِ قَالَ فَقَالَ لَهُ عَامِرُ بْنُ رَبِيعَةَ مَا رَأَيْتُ كَالْيَوْمِ وَلَا جِلْدَ عَذْرَاءَ قَالَ فَوُعِكَ سَهْلٌ مَكَانَهُ وَاشْتَدَّ وَعْكُهُ فَأُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأُخْبِرَ أَنَّ سَهْلًا وُعِكَ وَأَنَّهُ غَيْرُ رَائِحٍ مَعَكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَأَتَاهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخْبَرَهُ سَهْلٌ بِالَّذِي كَانَ مِنْ أَمْرِ عَامِرٍ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَامَ يَقْتُلُ أَحَدُكُمْ أَخَاهُ أَلَّا بَرَّكْتَ إِنَّ الْعَيْنَ حَقٌّ تَوَضَّأْ لَهُ فَتَوَضَّأَ لَهُ عَامِرٌ فَرَاحَ سَهْلٌ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْسَ بِهِ بَأْسٌ
याह्या हमरा मालिक स [मुहम्मद बिन अबू उमामा बिन सहल बिन हुनैफ] स कहने छथि जे ओ [अपन पिता] कहैत सुनने छलाह; 'अबू सहल बिन हुनैफ नदी मे नहा लेलक, तखन ओ जे वस्त्र पहिरने छल, ओकरा उतारलक, जखन कि 'अमीर बिन रबियाह देखैत रहल'। अस'अद बिन सहल कहलनि; 'सहल एकटा एहन युवक अछि जे गोर अछि आ ओकर त्वचा नीक अछि ।' अमीर बिन रबियाह ओकरा कहलकै; 'हम त' एतेक नीक त्वचा कहियो नहि देखलहुँ, लड़कीक त्वचा सेहो नहि।' तखने सहलकेँ बोखार लागि गेलै, आ बीमारी आओर बढ़ि गेलै। तखन रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दौरा कयल गेल आ हुनका ई सूचना भेटलनि जे सचमुच सहल बीमार छथि, ओ अहाँक संग नहि आबि सकैत छथि हे रसुलुल्लाह! ' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन हुनका सँ भेंट केलनि, तखन सहल हुनका अमीर हुनका संग की केने छलाह तकर बात बतौलनि । रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: ‘अहाँ सब मे स कियो अपन भाई के मारय के इच्छा कियैक करत? अहाँक लेल आशीर्वादक प्रार्थना करब उचित नहि। सचमुच, दुष्ट नजरि वास्तविक अछि। एकरा लेल वजूद करू!' तखन अमीर सहल के लेल वजूद केलनि। एकरऽ बाद सहल आरू अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स्वस्थ स्वस्थ होय क॑ विदा होय गेलै ।
Imam Malik : 1472
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ أَنَّهُ قَالَرَأَى عَامِرُ بْنُ رَبِيعَةَ سَهْلَ بْنَ حُنَيْفٍ يَغْتَسِلُ فَقَالَ مَا رَأَيْتُ كَالْيَوْمِ وَلَا جِلْدَ مُخْبَأَةٍ فَلُبِطَ سَهْلٌ فَأُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَلْ لَكَ فِي سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ وَاللَّهِ مَا يَرْفَعُ رَأْسَهُ فَقَالَ هَلْ تَتَّهِمُونَ لَهُ أَحَدًا قَالُوا نَتَّهِمُ عَامِرَ بْنَ رَبِيعَةَ قَالَ فَدَعَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَامِرًا فَتَغَيَّظَ عَلَيْهِ وَقَالَ عَلَامَ يَقْتُلُ أَحَدُكُمْ أَخَاهُ أَلَّا بَرَّكْتَ اغْتَسِلْ لَهُ فَغَسَلَ عَامِرٌ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ وَمِرْفَقَيْهِ وَرُكْبَتَيْهِ وَأَطْرَافَ رِجْلَيْهِ وَدَاخِلَةَ إِزَارِهِ فِي قَدَحٍ ثُمَّ صُبَّ عَلَيْهِ فَرَاحَ سَهْلٌ مَعَ النَّاسِ لَيْسَ بِهِ بَأْسٌ
मलिक हमरा [इब्न शिहाब] स [अबू उमामा बिन सहल बिन हुनैफ] स कहने छथिन कहने छथि; अमीर बिन रबीआ सहल बिन हुनाइफ के नहाइत देखलखिन तखन ओ कहलनि; 'आइ जे देखलहुँ से कहियो नहि देखलहुँ, एकांत मे कोनो लड़कीक चमड़ी तक नहि।' तखन सहल जमीन पर पड़ल छल, ताहि लेल ओकरा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने आनल गेल। तखन अल्लाह के रसूलुल्लाह कहलखिन जे हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की अहाँ के कोनो एहन बात पता अछि जे सहल बिन हुनाइफ के संग भेल छल? अल्लाह के कसम, ओ माथ नहि उठा सकैत अछि'। ओ पुछलखिन: ‘अहाँ केँ शंका अछि जे हुनका संग कियो एहन केने हो? ' ओ सभ उत्तर देलक , 'हम सभ अमीर बिन रबियाह पर आरोप लगाबैत छी जे ई काज केलक ।' अबू उमामा बिन सहल कहलनि; 'तखन ओ अमीर केँ बजा क' डाँटि देलक।' ओ पुछलखिन: ‘अहाँ मे सँ एक गोटे कोन आधार पर अपन भाय केँ मारि देलक। की अहाँ हुनका आशीर्वादक लेल प्रार्थना नहि करैत छी? हुनका लेल जल्दी अपना के साफ करू! 'तखन अमीर अपन मुँह आ दुनू हाथ कोहनी धरि धो लेलक, दुनू ठेहुन आ पैरक नोक, तखन जे एकटा बर्तन मे ओकर सरोंग मे छलैक।' तखन हुनक स्नानसँ बचल पानि सहलक देह पर ढारि देल गेलनि । तेँ तकर बाद सहल नीक स्वस्थ्य भ' क' लोकक संग चलि गेलाह।'
Imam Malik : 1473
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ حُمَيْدِ بْنِ قَيْسٍ الْمَكِّيِّ أَنَّهُ قَالَدُخِلَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِابْنَيْ جَعْفَرِ بْنِ أَبِي طَالِبٍ فَقَالَ لِحَاضِنَتِهِمَا مَا لِي أَرَاهُمَا ضَارِعَيْنِ فَقَالَتْ حَاضِنَتُهُمَا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّهُ تَسْرَعُ إِلَيْهِمَا الْعَيْنُ وَلَمْ يَمْنَعْنَا أَنْ نَسْتَرْقِيَ لَهُمَا إِلَّا أَنَّا لَا نَدْرِي مَا يُوَافِقُكَ مِنْ ذَلِكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْتَرْقُوا لَهُمَا فَإِنَّهُ لَوْ سَبَقَ شَيْءٌ الْقَدَرَ لَسَبَقَتْهُ الْعَيْنُ
हमरा मलिक स कहलक अछि [हुमैद बिन कैस अल मक्की] स कहलक; एक बेर जफर बिन अबू तालिब के दू टा बच्चा के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने लाओल गेल छल। ओ नर्ससँ पुछलखिन: 'हम दुनू गोटेकेँ एतेक दुब्बर किएक देखैत छी?' पहरेदार जवाब देलक जे हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, ऐन रोग दुनू पर जल्दी हमला क देलक अछि। हमरा सब के हुनका सब स रुकिया मांगय स कोनो रोक नै छै, बस एतबे जे हमरा सब के पता नै अछि जे अहाँ सब सहमत छी कि नै'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन कहलनि: 'रुक्याह हुनका सभ केँ, कारण वास्तव मे जँ कियो भाग्य सँ पहिने भ' सकैत अछि त' निश्चित रूप सँ ई 'ऐन'क रोग अछि जे एकरा सँ पहिने होयत'।
Imam Malik : 1474
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّ عُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِ حَدَّثَهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَخَلَ بَيْتَ أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَفِي الْبَيْتِ صَبِيٌّ يَبْكِي فَذَكَرُوا لَهُ أَنَّ بِهِ الْعَيْنَ قَالَ عُرْوَةُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَا تَسْتَرْقُونَ لَهُ مِنْ الْعَيْنِ
हमरा [याह्या बिन सईद] स मालिक स [सुलेमान बिन यासर] स कहल गेल छल जे [उरवाह बिन जुबैर] हुनका कहलथि, जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी उम्म सलामा क घर मे प्रवेश केलथि, जखन कि अंदर एकटा बच्चा कानि रहल छल। तखन ओ सभ हुनका कहलकनि जे बच्चा केँ ‘ऐन’ रोग अछि । उरवाह कहलक जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे की अहाँ ऐन के भगाबय लेल रुक्याह नहि क रहल छी? '' .
Imam Malik : 1475
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا مَرِضَ الْعَبْدُ بَعَثَ اللَّهُ تَعَالَى إِلَيْهِ مَلَكَيْنِ فَقَالَ انْظُرَا مَاذَا يَقُولُ لِعُوَّادِهِ فَإِنْ هُوَ إِذَا جَاءُوهُ حَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ رَفَعَا ذَلِكَ إِلَى اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ وَهُوَ أَعْلَمُ فَيَقُولُ لِعَبْدِي عَلَيَّ إِنْ تَوَفَّيْتُهُ أَنْ أُدْخِلَهُ الْجَنَّةَ وَإِنْ أَنَا شَفَيْتُهُ أَنْ أُبْدِلَ لَهُ لَحْمًا خَيْرًا مِنْ لَحْمِهِ وَدَمًا خَيْرًا مِنْ دَمِهِ وَأَنْ أُكَفِّرَ عَنْهُ سَيِّئَاتِهِ
हमरा मलिक स [जैद बिन असलम] स [अथा बिन यासर] स कहल गेल अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे अगर कोनो नौकर बीमार अछि त अल्लाह तआला ओकरा दूटा फरिश्ता पठबैत छथि जे कहैत छथि; 'देखू, ओ अपन आगंतुक लोकनि सँ की कहलनि, जँ ओ तहमद बनौने रहितथि आ अल्लाह केर स्तुति केने रहितथि,' तखन दुनू गोटे हुनका अल्लाह 'अज्जा वजल्ला'क सोझाँ पोसने रहितथि -आ ओ सर्वज्ञ छथि-, तखन अल्लाह कहलनि; 'हम अपन सेवक सँ वचन देलहुँ जे जँ हम ओकरा मारि देब त' ओकरा स्वर्ग मे राखि देब।' जँ हम ओकरा ठीक करब तँ ओकर बदला मे ओकर मांस सँ नीक मांस आ खून सँ नीक खून अवश्य राखब। आ ओकर अधलाह काज हम माफ क' देब'।
Imam Malik : 1476
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُصَيْفَةَ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ عَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يُصِيبُ الْمُؤْمِنَ مِنْ مُصِيبَةٍ حَتَّى الشَّوْكَةُ إِلَّا قُصَّ بِهَا أَوْ كُفِّرَ بِهَا مِنْ خَطَايَاهُلَا يَدْرِي يَزِيدُ أَيُّهُمَا قَالَ عُرْوَةُ
हमरा मलिक स [यजीद बिन खुशैफा] स [उर्वाह बिन जुबैर] स कहल गेल अछि ओ कहला, 'हम [ऐसह] नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी कए कहने सुनलहुं; "अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन: "कोनो मुसलमान के अपन दुर्भाग्य में एक काँट तक नै भोगैत अछि, जाबत तक ओकर पाप कम नै भ जायत, या ओकर गलती "ओकरा स दूर नै भ जायत।" यजीद के पता नै छेलै कि दोनों में से कोन उर्वाह' कहलकै।
Imam Malik : 1477
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي صَعْصَعَةَ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا الْحُبَابِ سَعِيدَ بْنَ يَسَارٍ يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ يُرِدْ اللَّهُ بِهِ خَيْرًا يُصِبْ مِنْهُ
मलिक हमरा [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अबू शा'शाअह] स कहलनि जे ओ कहलनि; हम सुनलहुँ [अबू हुबाब सईद बिन यासर] कहैत छथि; हम सुनलहुँ जे [अबू हुरैरा] कहैत छथि, 'अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन: 'जेकरा अल्लाह ओकरा लेल भलाई चाहत, ओ ओकरा दुर्भाग्य देत'।
Imam Malik : 1478
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍأَنَّ رَجُلًا جَاءَهُ الْمَوْتُ فِي زَمَانِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ رَجُلٌ هَنِيئًا لَهُ مَاتَ وَلَمْ يُبْتَلَ بِمَرَضٍ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَيْحَكَ وَمَا يُدْرِيكَ لَوْ أَنَّ اللَّهَ ابْتَلَاهُ بِمَرَضٍ يُكَفِّرُ بِهِ عَنْهُ مِنْ سَيِّئَاتِهِ
हमरा मलिक स [याह्या बिन सईद] स रिवायत भेल अछि जे कहने छलाह, 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय मे एकटा आदमी छल जिनका मृत्यु स भेंट भेल छल, तखन कियो कहलक; 'हुनका बधाई, बिना बीमारी के जांच केने हुनकर मृत्यु भ गेलनि'। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: ‘हाय अहाँ पर! की अहाँ के नै बुझल अछि, अगर अल्लाह हुनकर कोनो बीमारी के परीक्षण करताह त ओहि बीमारी स खराब चीज घुलि जायत ! ' .
Imam Malik : 1479
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُصَيْفَةَ أَنَّ عَمْرَو بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ كَعْبٍ السَّلَمِيَّ أَخْبَرَهُ أَنَّ نَافِعَ بْنَ جُبَيْرٍ أَخْبَرَهُ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ أَبِي الْعَاصِأَنَّهُ أَتَى رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ عُثْمَانُ وَبِي وَجَعٌ قَدْ كَادَ يُهْلِكُنِي قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ امْسَحْهُ بِيَمِينِكَ سَبْعَ مَرَّاتٍ وَقُلْ أَعُوذُ بِعِزَّةِ اللَّهِ وَقُدْرَتِهِ مِنْ شَرِّ مَا أَجِدُ قَالَ فَقُلْتُ ذَلِكَ فَأَذْهَبَ اللَّهُ مَا كَانَ بِي فَلَمْ أَزَلْ آمُرُ بِهَا أَهْلِي وَغَيْرَهُمْ
हमरा [यजीद बिन खुशैफा] स मलिक स रिवायत भेल जे [अमर बिन अब्दुल्लाह बिन कब अल असलमी] हुनका रिपोर्ट केलथि जे [नाफी बिन जुबैर] हुनका [उस्मान बिन अबू अल अश] स रिपोर्ट केलथि जे ओ अल्लाह क रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) स भेंट केलथि। उस्मान बजलाह - ओहि समय हम बीमार छलहुँ आ लगभग मरि गेल छलहुँ । उस्मान बिन अबू अल ऐश तखन कहलनि, 'एकरा अपन दहिना हाथ सँ सात बेर पोछू, आ पाठ करू: अ'उद्ज़ू बी इज़्ज़तिल्लाही वा कुदरातीही मिन सियरी मा अजीदु - हम अल्लाह केर महिमा आ ताकत मे शरण लैत छी जे हमरा पर आयल बुराई सँ - ''। उस्मान कहलनि, 'तखन हम ओहि बात केँ पढ़लहुँ, जाबत अल्लाह हमर बीमारी केँ दूर नहि क' देलनि।' तकर बाद हम सदिखन अपन परिवार आ आन लोक केँ सुझाव दैत छलहुँ जे सदिखन एकरा पढ़ू'।
Imam Malik : 1480
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا اشْتَكَى يَقْرَأُ عَلَى نَفْسِهِ بِالْمُعَوِّذَاتِ وَيَنْفِثُ قَالَتْ فَلَمَّا اشْتَدَّ وَجَعُهُ كُنْتُ أَنَا أَقْرَأُ عَلَيْهِ وَأَمْسَحُ عَلَيْهِ بِيَمِينِهِ رَجَاءَ بَرَكَتِهَا
मलिक हमरा [इब्न शिहाब] स ['उरवाह बिन जुबैर] स ['आइशा] स बतेलथि जे कहलथि जे जखन अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बीमार महसूस करैत छलाह त ओ अपना लेल रक्षा क दुआ पढ़ैत छलाह आ ओकरा उड़ा दैत छलाह। 'ऐशा बजलीह, 'जखन हुनकर बीमारी गंभीर भ' जाइत छलनि त' हम हुनका लेल ओ दुआ सभ पढ़ैत छलहुँ आ फेर ओकर दहिना हाथ पर पोछैत छलहुँ जाहि सँ आशीर्वाद भेटि जाइत छलनि।'