इमाम मलिक : 1461
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَ سُئِلَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِعَنْ الْجَرَادِ فَقَالَ وَدِدْتُ أَنَّ عِنْدِي قَفْعَةً نَأْكُلُ مِنْهُ
मुझे मलिक (अब्दुल्ला बिन दीनार) से [अब्दुल्ला बिन उमर] ने बताया कि; "[उमर बिन खत्ताब] से टिड्डियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया; 'काश मेरे पास टिड्डियों की एक टोकरी होती जिसे हम खा सकते।'"
इमाम मलिक : 1462
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَلْحَلَةَ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ مَالِكِ بْنِ خُثَيْمٍ أَنَّهُ قَالَ كُنْتُ جَالِسًا مَعَ أَبِي هُرَيْرَةَبِأَرْضِهِ بِالْعَقِيقِ فَأَتَاهُ قَوْمٌ مِنْ أَهْلِ الْمَدِينَةِ عَلَى دَوَابٍّ فَنَزَلُوا عِنْدَهُ قَالَ حُمَيْدٌ فَقَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ اذْهَبْ إِلَى أُمِّي فَقُلْ إِنَّ ابْنَكِ يُقْرِئُكِ السَّلَامَ وَيَقُولُ أَطْعِمِينَا شَيْئًا قَالَ فَوَضَعَتْ ثَلَاثَةَ أَقْرَاصٍ فِي صَحْفَةٍ وَشَيْئًا مِنْ زَيْتٍ وَمِلْحٍ ثُمَّ وَضَعَتْهَا عَلَى رَأْسِي وَحَمَلْتُهَا إِلَيْهِمْ فَلَمَّا وَضَعْتُهَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ كَبَّرَ أَبُو هُرَيْرَةَ وَقَالَ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَشْبَعَنَا مِنْ الْخُبْزِ بَعْدَ أَنْ لَمْ يَكُنْ طَعَامُنَا إِلَّا الْأَسْوَدَيْنِ الْمَاءَ وَالتَّمْرَ فَلَمْ يُصِبْ الْقَوْمُ مِنْ الطَّعَامِ شَيْئًا فَلَمَّا انْصَرَفُوا قَالَ يَا ابْنَ أَخِي أَحْسِنْ إِلَى غَنَمِكَ وَامْسَحْ الرُّعَامَ عَنْهَا وَأَطِبْ مُرَاحَهَا وَصَلِّ فِي نَاحِيَتِهَا فَإِنَّهَا مِنْ دَوَابِّ الْجَنَّةِ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَيُوشِكُ أَنْ يَأْتِيَ عَلَى النَّاسِ زَمَانٌ تَكُونُ الثُّلَّةُ مِنْ الْغَنَمِ أَحَبَّ إِلَى صَاحِبِهَا مِنْ دَارِ مَرْوَانَ
मुझे मलिक [मुहम्मद बिन अमरू बिन हलहलाह] से [हुमैद बिन हसीम बिन खुत्सैम] ने बताया है कि मैं अबू हुरैरा के साथ उनके क्षेत्र अर्थात् अकीक में बैठा था। तब मदीना के कई लोग घोड़े पर सवार होकर आए और उनके पास रुक गए। हुमैद ने कहा; [अबू हुरैरा] ने कहा; "मेरी माँ के पास जाओ, और कहो 'आपका बेटा सलाम भेजता है'।" उस आदमी ने कहा, "हमें कुछ खाना दो।" हुमैद बिन हसीम ने कहा; "उसकी माँ ने एक बड़ी प्लेट में रोटी के तीन टुकड़े और थोड़ा तेल और नमक रखा। उसने इसे मेरे सिर पर रखा, फिर मैं इसे उनके पास ले गया। जब मैंने इसे उनके सामने रखा, तो अबू हुरैरा ने तुरंत एक तकबीर की और कहा: 'अल्लाह की प्रशंसा हो जिसने हमें रोटी से भर दिया, जबकि हमने अल असवादैन; पानी और खजूर के अलावा कुछ नहीं खाया था। "ऐ मेरे भाई के बेटे, अपनी बकरी का भला करो, उसका नाक पोंछो, उसकी खुशबू सूंघो और उसके पास प्रार्थना करो क्योंकि यह जानवर स्वर्ग के जानवरों में से एक है। जिसके हाथों में मेरी आत्मा है, उसकी कसम, इंसानों के लिए लगभग एक समय आएगा, जब बकरियों का एक झुंड अपने मालिक के लिए मारवान के घर से ज़्यादा बेहतर होगा।"
इमाम मलिक : 1463
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي نُعَيْمٍ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ قَالَأُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِطَعَامٍ وَمَعَهُ رَبِيبُهُ عُمَرُ بْنُ أَبِي سَلَمَةَ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَمِّ اللَّهَ وَكُلْ مِمَّا يَلِيكَ
मलिक [अबू नुआइम वहब बिन कैसन] ने मुझे बताया; "रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को खाना परोसा गया, वह और उनके सौतेले बेटे उमर बिन अबू सलमा। रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे कहा: 'अल्लाह का नाम लो और जो तुम्हारे पास है वही खाओ'।"
इमाम मलिक : 1464
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ يَقُولُ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍفَقَالَ لَهُ إِنَّ لِي يَتِيمًا وَلَهُ إِبِلٌ أَفَأَشْرَبُ مِنْ لَبَنِ إِبِلِهِ فَقَالَ لَهُ ابْنُ عَبَّاسٍ إِنْ كُنْتَ تَبْغِي ضَالَّةَ إِبِلِهِ وَتَهْنَأُ جَرْبَاهَا وَتَلُطُّ حَوْضَهَا وَتَسْقِيهَا يَوْمَ وِرْدِهَا فَاشْرَبْ غَيْرَ مُضِرٍّ بِنَسْلٍ وَلَا نَاهِكٍ فِي الْحَلْبِ
मलिक ने मुझे [याह्या बिन सईद] से बताया था कि, "मैंने [अल कासिम बिन मुहम्मद] को यह कहते सुना; "कोई अब्दुल्लाह बिन अब्बास के पास आया, तो उन्होंने उससे कहा; 'मेरा एक अनाथ है, बच्चे के पास एक ऊँट है। क्या मैं ऊँट का दूध पी सकता हूँ?' [इब्न अब्बास] ने जवाब दिया; 'अगर तुम ऊँट के खो जाने पर उसे ढूँढना चाहते हो, तो उसके खाँसी पर रंग लगाओ और उसे मिट्टी से ढक दो ताकि वह छेद को ढक दे और जब ऊँट प्यासा हो तो उसे कुछ पिलाओ। तो दूध को अपनी नाक को नुकसान पहुँचाए बिना या जब तुम उसे निकालो तो उसे खत्म किए बिना पियो।"
इमाम मलिक : 1465
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ كَانَ لَا يُؤْتَى أَبَدًا بِطَعَامٍ وَلَا شَرَابٍ حَتَّى الدَّوَاءُ فَيَطْعَمَهُ أَوْ يَشْرَبَهُ إِلَّا قَالَ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي هَدَانَا وَأَطْعَمَنَا وَسَقَانَا وَنَعَّمَنَا اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُمَّ أَلْفَتْنَا نِعْمَتُكَ بِكُلِّ شَرٍّ فَأَصْبَحْنَا مِنْهَا وَأَمْسَيْنَا بِكُلِّ خَيْرٍ فَنَسْأَلُكَ تَمَامَهَا وَشُكْرَهَا لَا خَيْرَ إِلَّا خَيْرُكَ وَلَا إِلَهَ غَيْرُكَ إِلَهَ الصَّالِحِينَ وَرَبَّ الْعَالَمِينَ الْحَمْدُ لِلَّهِ وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ مَا شَاءَ اللَّهُ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ اللَّهُمَّ بَارِكْ لَنَا فِيمَا رَزَقْتَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
मुझे मलिक [हिस्याम बिन उरवाह] से [उनके पिता] ने बताया है कि उन्हें कभी भी खाना, पानी या दवा नहीं दी जाती है, वह तब तक खाते या पीते हैं जब तक वह यह न पढ़ लें; "प्रशंसा अल्लाह के लिए है जिसने हमें मार्गदर्शन दिया, हमें खाना, पानी और सभी सुख दिए। अल्लाह सबसे बड़ा है। ऐ अल्लाह, आपकी दुआएं हमारे पास बुराइयों से भरी हुई आती हैं, लेकिन इस वजह से हम सुबह और शाम अच्छी हालत में जा सकते हैं। इसलिए हम आपसे पूर्णता और शुक्रगुजार होने के लिए कहते हैं, आपके अलावा कोई अच्छाई नहीं है। आपके अलावा कोई भगवान नहीं है, नेक लोगों का भगवान और दुनिया का पालनहार। सारी तारीफ अल्लाह के लिए है और अल्लाह के अलावा कोई पूजा के लायक नहीं है, जो अल्लाह चाहता है और अल्लाह के अलावा कोई शक्ति नहीं है, हमें उस चीज़ से आशीर्वाद दें जो आपने हमारे लिए दी है, और हमें नरक की आग से बचाएं।"
इमाम मलिक : 1466
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَإِيَّاكُمْ وَاللَّحْمَ فَإِنَّ لَهُ ضَرَاوَةً كَضَرَاوَةِ الْخَمْرِ
मुझे मालिक [याह्या बिन सईद] से रिवायत है कि [उमर बिन खत्ताब] ने कहा; "मांस से सावधान रहो, क्योंकि इसकी लत शराब की तरह है।"
इमाम मलिक : 1467
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِأَدْرَكَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ وَمَعَهُ حِمَالُ لَحْمٍ فَقَالَ مَا هَذَا فَقَالَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ قَرِمْنَا إِلَى اللَّحْمِ فَاشْتَرَيْتُ بِدِرْهَمٍ لَحْمًا فَقَالَ عُمَرُ أَمَا يُرِيدُ أَحَدُكُمْ أَنْ يَطْوِيَ بَطْنَهُ عَنْ جَارِهِ أَوْ ابْنِ عَمِّهِ أَيْنَ تَذْهَبُ عَنْكُمْ هَذِهِ الْآيَةُ{ أَذْهَبْتُمْ طَيِّبَاتِكُمْ فِي حَيَاتِكُمْ الدُّنْيَا وَاسْتَمْتَعْتُمْ بِهَا }
मुझे मालिक [याह्या बिन सईद] से यह बात पता चली कि [उमर बिन खत्ताब] जाबिर बिन अब्दुल्ला से मिले जो मीट ले जा रहे थे। तब उमर ने पूछा; "यह क्या है?" जाबिर ने जवाब दिया, "ऐ ईमान वालों के सरदार, हमें मीट की तलब लगी थी, इसलिए मैंने इसे एक दिरहम में खरीद लिया।" उमर ने पूछा; 'क्या तुम में से कोई अपने पड़ोसी या अपने चाचा के बेटे को नज़रअंदाज़ करके अपना पेट भरता है? तो फिर तुम अल्लाह की इस आयत का क्या करोगे: '(तुम अपने अच्छे कामों को दुनिया की ज़िंदगी से दूर रखो जबकि तुम इसका मज़ा ले रहे हो)' (क़ुरआन अल अहकाफ़: 20)।
इमाम मलिक : 1468
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَلْبَسُ خَاتَمًا مِنْ ذَهَبٍ ثُمَّ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَبَذَهُ وَقَالَ لَا أَلْبَسُهُ أَبَدًا قَالَ فَنَبَذَ النَّاسُ بِخَوَاتِيمِهِمْ
मुझे मालिक [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [अब्दुल्ला बिन उमर] ने बताया है कि उन्होंने कहा, "रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सोने की अंगूठी पहनी, फिर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खड़े हुए और उसे उतार दिया। उसके बाद उन्होंने कहा: "मैं इसे फिर कभी नहीं पहनूंगा।" अब्दुल्ला बिन उमर ने कहा; "लोग अपनी अंगूठियां भी उतार देते हैं।"
इमाम मलिक : 1469
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ صَدَقَةَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّهُ قَالَ سَأَلْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِعَنْ لُبْسِ الْخَاتَمِ فَقَالَ الْبَسْهُ وَأَخْبِرْ النَّاسَ أَنِّي أَفْتَيْتُكَ بِذَلِكَ
मुझे मलिक [शदाकाह बिन यासर] से रिवायत है कि उन्होंने कहा, "मैंने [सईद बिन मुसय्यब] से अंगूठी पहनने के हुक्म के बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया; "अंगूठी पहनो और लोगों से कहो कि मेरे पास ऐसा फतवा है।"
इमाम मलिक : 1470
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ عَنْ عَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ أَنَّ أَبَا بَشِيرٍ الْأَنْصَارِيَّ أَخْبَرَهُأَنَّهُ كَانَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي بَعْضِ أَسْفَارِهِ قَالَ فَأَرْسَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَسُولًا قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي بَكْرٍ حَسِبْتُ أَنَّهُ قَالَ وَالنَّاسُ فِي مَقِيلِهِمْ لَا تَبْقَيَنَّ فِي رَقَبَةِ بَعِيرٍ قِلَادَةٌ مِنْ وَتَرٍ أَوْ قِلَادَةٌ إِلَّا قُطِعَتْقَالَ يَحْيَى سَمِعْت قَوْله تَعَالَى يَقُولُ أَرَى ذَلِكَ مِنْ الْعَيْنِ
मलिक ने मुझे [अब्दुल्ला इब्न अबू बक्र] से [अब्बाद इब्न तमीम] तक बताया कि [अबू बशीर अल अंसारी] ने उन्हें बताया कि वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ एक सफ़र पर थे। उन्होंने (कहानी सुनाने वाले ने) कहा: "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फिर एक रसूल भेजा।" अब्दुल्ला इब्न अबू बक्र ने कहा: "मुझे लगता है कि जब लोग अपनी आराम की जगहों पर थे, तो उन्होंने कहा: 'ऊँटों के घुटनों से लटकने वाले कपड़े, या हार - कहानी सुनाने वाले को शक है - जब तक कि वे काट न दिए जाएं, मत छोड़ो।" याह्या ने कहा: "मैंने मलिक को यह कहते सुना: 'मुझे लगता है कि यह 'आयन' का हिस्सा है।'"
इमाम मलिक : 1471
و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَاهُ يَقُولُاغْتَسَلَ أَبِي سَهْلُ بْنُ حُنَيْفٍ بِالْخَرَّارِ فَنَزَعَ جُبَّةً كَانَتْ عَلَيْهِ وَعَامِرُ بْنُ رَبِيعَةَ يَنْظُرُ قَالَ وَكَانَ سَهْلٌ رَجُلًا أَبْيَضَ حَسَنَ الْجِلْدِ قَالَ فَقَالَ لَهُ عَامِرُ بْنُ رَبِيعَةَ مَا رَأَيْتُ كَالْيَوْمِ وَلَا جِلْدَ عَذْرَاءَ قَالَ فَوُعِكَ سَهْلٌ مَكَانَهُ وَاشْتَدَّ وَعْكُهُ فَأُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأُخْبِرَ أَنَّ سَهْلًا وُعِكَ وَأَنَّهُ غَيْرُ رَائِحٍ مَعَكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَأَتَاهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخْبَرَهُ سَهْلٌ بِالَّذِي كَانَ مِنْ أَمْرِ عَامِرٍ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَامَ يَقْتُلُ أَحَدُكُمْ أَخَاهُ أَلَّا بَرَّكْتَ إِنَّ الْعَيْنَ حَقٌّ تَوَضَّأْ لَهُ فَتَوَضَّأَ لَهُ عَامِرٌ فَرَاحَ سَهْلٌ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْسَ بِهِ بَأْسٌ
याह्या ने मुझे मलिक [मुहम्मद बिन अबू उमामा बिन सहल बिन हुनैफ] से बताया कि उसने [अपने पिता] को यह कहते सुना; "अबू सहल बिन हुनैफ नदी में नहाए, फिर उन्होंने अपना लबादा उतारा, जबकि 'अमीर बिन रबीआ' ने उन्हें देखा।" असद बिन सहल ने कहा; "सहल एक नौजवान था जिसकी चमड़ी गोरी और रंगत सुंदर थी। अमीर बिन रबीआ' ने उससे कहा: "मैंने इतनी सुंदर चमड़ी कभी नहीं देखी, किसी लड़की की चमड़ी भी नहीं।" फिर सहल को बुखार हो गया, और उसकी बीमारी और बिगड़ गई। फिर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) आए और उनसे कहा, 'सहल बीमार है, वह आपके साथ नहीं आ सकता, ऐ अल्लाह के रसूल!' फिर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उसके पास गए, और साहल ने उसे बताया कि आमिर ने उसके साथ क्या किया है। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पूछा: 'तुम में से कोई अपने भाई को क्यों मारना चाहेगा? तुम्हें दुआ नहीं मांगनी चाहिए। सच में, बुरी नज़र सच है। उसके लिए वज़ू करो!' फिर आमिर ने साहल के लिए वज़ू किया। उसके बाद, साहल और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अच्छी सेहत के साथ चले गए।
इमाम मलिक : 1472
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ أَنَّهُ قَالَرَأَى عَامِرُ بْنُ رَبِيعَةَ سَهْلَ بْنَ حُنَيْفٍ يَغْتَسِلُ فَقَالَ مَا رَأَيْتُ كَالْيَوْمِ وَلَا جِلْدَ مُخْبَأَةٍ فَلُبِطَ سَهْلٌ فَأُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَلْ لَكَ فِي سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ وَاللَّهِ مَا يَرْفَعُ رَأْسَهُ فَقَالَ هَلْ تَتَّهِمُونَ لَهُ أَحَدًا قَالُوا نَتَّهِمُ عَامِرَ بْنَ رَبِيعَةَ قَالَ فَدَعَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَامِرًا فَتَغَيَّظَ عَلَيْهِ وَقَالَ عَلَامَ يَقْتُلُ أَحَدُكُمْ أَخَاهُ أَلَّا بَرَّكْتَ اغْتَسِلْ لَهُ فَغَسَلَ عَامِرٌ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ وَمِرْفَقَيْهِ وَرُكْبَتَيْهِ وَأَطْرَافَ رِجْلَيْهِ وَدَاخِلَةَ إِزَارِهِ فِي قَدَحٍ ثُمَّ صُبَّ عَلَيْهِ فَرَاحَ سَهْلٌ مَعَ النَّاسِ لَيْسَ بِهِ بَأْسٌ
मलिक ने मुझे [इब्न शिहाब] से [अबू उमामा बिन साहल बिन हुनैफ] के हवाले से बताया; "अमीर बिन रबीआ ने साहल बिन हुनैफ को नहाते हुए देखा और कहा: 'मैंने आज जैसा कुछ नहीं देखा, यहाँ तक कि अकेले में किसी लड़की की स्किन भी नहीं।' फिर साहल ज़मीन पर लेट गया, तो उसे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने लाया गया। फिर अल्लाह के रसूल ने कहा, "अल्लाह के रसूल, क्या आप जानते हैं कि साहल बिन हुनैफ को क्या हुआ? अल्लाह की कसम, वह अपना सिर नहीं उठा सकता।" उन्होंने पूछा: 'क्या आपको शक है कि किसी ने उसके साथ ऐसा किया है?' उन्होंने पूछा: "तुम में से कोई अपने भाई को किस बिनाह पर मार सकता है? क्या आप उसके लिए दुआ नहीं करते कि उसे बरकत मिले? उसके लिए तुरंत खुद को साफ़ करो!" फिर अमीर ने अपना चेहरा और दोनों हाथ कोहनी तक धोए, दोनों घुटने और पैरों के सिरे धोए, फिर अपने सारोंग में जो कुछ था उसे एक बर्तन में डाला। फिर उसने नहाने का बचा हुआ पानी साहल के शरीर पर डाल दिया। तो उसके बाद, साहल ठीक-ठाक लोगों के साथ चला गया।
इमाम मलिक : 1473
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ حُمَيْدِ بْنِ قَيْسٍ الْمَكِّيِّ أَنَّهُ قَالَدُخِلَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِابْنَيْ جَعْفَرِ بْنِ أَبِي طَالِبٍ فَقَالَ لِحَاضِنَتِهِمَا مَا لِي أَرَاهُمَا ضَارِعَيْنِ فَقَالَتْ حَاضِنَتُهُمَا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّهُ تَسْرَعُ إِلَيْهِمَا الْعَيْنُ وَلَمْ يَمْنَعْنَا أَنْ نَسْتَرْقِيَ لَهُمَا إِلَّا أَنَّا لَا نَدْرِي مَا يُوَافِقُكَ مِنْ ذَلِكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْتَرْقُوا لَهُمَا فَإِنَّهُ لَوْ سَبَقَ شَيْءٌ الْقَدَرَ لَسَبَقَتْهُ الْعَيْنُ
हुमैद बिन कैस अल मक्की के मालिक ने मुझे बताया था; "एक बार जाफ़र बिन अबू तालिब के दो बच्चों को रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने लाया गया। उन्होंने नर्स से पूछा: "मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि वे दोनों बहुत पतले हैं?" गार्ड ने जवाब दिया, "ऐ रसूलुल्लाह, ऐन की बीमारी ने उन दोनों पर तेज़ी से हमला कर दिया है। ऐसा कुछ भी नहीं है जो हमें उनसे रुक़्याह मांगने से रोके, बस हमें नहीं पता कि आप इसके लिए राज़ी हैं या नहीं।" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तब कहा: 'उन्हें रुक़्याह दो, क्योंकि अगर कोई किस्मत से पहले आ सकता है, तो ज़रूर ऐन की बीमारी उससे पहले आएगी।"
इमाम मलिक : 1474
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّ عُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِ حَدَّثَهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَخَلَ بَيْتَ أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَفِي الْبَيْتِ صَبِيٌّ يَبْكِي فَذَكَرُوا لَهُ أَنَّ بِهِ الْعَيْنَ قَالَ عُرْوَةُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَا تَسْتَرْقُونَ لَهُ مِنْ الْعَيْنِ
मलिक [याह्या बिन सईद] से [सुलेमान बिन यासर] ने मुझे बताया कि [उरवाह बिन ज़ुबैर] ने उनसे कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी उम्म सलमा के घर में दाखिल हुए, जबकि अंदर एक बच्चा रो रहा था। फिर उन्होंने कहा कि बच्चे को 'ऐन' हो गया है। 'उरवाह ने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "क्या तुमने 'ऐन' को दूर भगाने के लिए रुक़्याहन्या नहीं किया?"
इमाम मलिक : 1475
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا مَرِضَ الْعَبْدُ بَعَثَ اللَّهُ تَعَالَى إِلَيْهِ مَلَكَيْنِ فَقَالَ انْظُرَا مَاذَا يَقُولُ لِعُوَّادِهِ فَإِنْ هُوَ إِذَا جَاءُوهُ حَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ رَفَعَا ذَلِكَ إِلَى اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ وَهُوَ أَعْلَمُ فَيَقُولُ لِعَبْدِي عَلَيَّ إِنْ تَوَفَّيْتُهُ أَنْ أُدْخِلَهُ الْجَنَّةَ وَإِنْ أَنَا شَفَيْتُهُ أَنْ أُبْدِلَ لَهُ لَحْمًا خَيْرًا مِنْ لَحْمِهِ وَدَمًا خَيْرًا مِنْ دَمِهِ وَأَنْ أُكَفِّرَ عَنْهُ سَيِّئَاتِهِ
मुझे मालिक [ज़ैद बिन असलम] से [अथा बिन यासर] तक यह बताया गया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अगर कोई बंदा बीमार हो, तो अल्लाह तआला उसके पास दो फ़रिश्ते भेजते हैं और कहते हैं: 'देखो वह अपने मेहमानों से क्या कहता है, अगर वह तहमीद करता है और अल्लाह की तारीफ़ करता है,' तो वे दोनों उसे अल्लाह अज़्ज़ा वजल्ला के सामने उठाएँगे - और वह सब जानने वाला है-, फिर अल्लाह ने कहा; 'मैंने अपने बंदे से वादा किया था, अगर मैं उसे मार डालूँगा, तो मैं उसे जन्नत में दाखिल करूँगा। अगर मैं उसे ठीक कर दूँ, तो मैं ज़रूर उसके बदले में उसके मांस से बेहतर मांस और उसके खून से बेहतर खून लाऊँगा।
इमाम मलिक : 1476
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُصَيْفَةَ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ عَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يُصِيبُ الْمُؤْمِنَ مِنْ مُصِيبَةٍ حَتَّى الشَّوْكَةُ إِلَّا قُصَّ بِهَا أَوْ كُفِّرَ بِهَا مِنْ خَطَايَاهُلَا يَدْرِي يَزِيدُ أَيُّهُمَا قَالَ عُرْوَةُ
मुझे मलिक [यज़ीद बिन ख़ुशैफ़ा] से [उरवाह बिन ज़ुबैर] ने बताया कि उन्होंने कहा, "मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी [ऐस्या] को यह कहते सुना; "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'ईमान वालों में से किसी को भी कांटे के बराबर भी कोई परेशानी नहीं होती, जब तक कि उसके गुनाह कम न हो जाएं, या उसकी गलतियाँ उससे मिट न जाएं।'" यज़ीद को नहीं पता था कि दोनों में से उरवाह ने कहाँ कहा था।
इमाम मलिक : 1477
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي صَعْصَعَةَ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا الْحُبَابِ سَعِيدَ بْنَ يَسَارٍ يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ يُرِدْ اللَّهُ بِهِ خَيْرًا يُصِبْ مِنْهُ
मलिक ने मुझे [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अबू शाह'ह] से बताया कि उन्होंने कहा; मैंने [अबू हुबाब सईद बिन यासर] को कहते सुना; मैंने [अबू हुरैरा] को कहते सुना, "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "जिसके लिए अल्लाह अच्छा चाहता है, वह उसे मुसीबत देगा।"
इमाम मलिक : 1478
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍأَنَّ رَجُلًا جَاءَهُ الْمَوْتُ فِي زَمَانِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ رَجُلٌ هَنِيئًا لَهُ مَاتَ وَلَمْ يُبْتَلَ بِمَرَضٍ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَيْحَكَ وَمَا يُدْرِيكَ لَوْ أَنَّ اللَّهَ ابْتَلَاهُ بِمَرَضٍ يُكَفِّرُ بِهِ عَنْهُ مِنْ سَيِّئَاتِهِ
मुझे बताया गया है कि मलिक (याह्या बिन सईद) ने कहा, "रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के ज़माने में एक आदमी था जिसके पास मौत आई, तो किसी ने कहा: "उसे मुबारक हो, वह बिना बीमारी के ही मर गया।" रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: "हाय! क्या तुम नहीं जानते, अगर अल्लाह उसे बीमारी से आज़माए, तो उस बीमारी से बुरी चीज़ें खत्म हो जाएंगी!"
इमाम मलिक : 1479
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُصَيْفَةَ أَنَّ عَمْرَو بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ كَعْبٍ السَّلَمِيَّ أَخْبَرَهُ أَنَّ نَافِعَ بْنَ جُبَيْرٍ أَخْبَرَهُ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ أَبِي الْعَاصِأَنَّهُ أَتَى رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ عُثْمَانُ وَبِي وَجَعٌ قَدْ كَادَ يُهْلِكُنِي قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ امْسَحْهُ بِيَمِينِكَ سَبْعَ مَرَّاتٍ وَقُلْ أَعُوذُ بِعِزَّةِ اللَّهِ وَقُدْرَتِهِ مِنْ شَرِّ مَا أَجِدُ قَالَ فَقُلْتُ ذَلِكَ فَأَذْهَبَ اللَّهُ مَا كَانَ بِي فَلَمْ أَزَلْ آمُرُ بِهَا أَهْلِي وَغَيْرَهُمْ
मुझे मलिक [यज़ीद बिन ख़ुशैफ़ा] से बताया गया है कि [अमरू बिन अब्दुल्लाह बिन काब अल असलमी] ने उनसे कहा, कि [नफ़ी बिन जुबैर] ने उनसे कहा, [उथमान बिन अबू अल अश] से कि वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिले थे। उस्मान ने कहा, "उस समय मैं बीमार था जिससे मैं लगभग मरने वाला था।" उस्मान बिन अबू अल अश ने फिर कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर कहा: 'इसे अपने दाहिने हाथ से सात बार पोंछो, और पढ़ो; A'UUDZU BI IZZATILLAHI WA QUDRATIHI MIN SYARRI MA AJIDU (मैं अल्लाह की शान और उसकी ताकत की पनाह लेता हूँ उस बदतमीज़ी से जो मुझे मिलती है)'।" उस्मान ने कहा, "फिर मैंने इसे पढ़ा, जब तक अल्लाह ने मेरी बीमारी दूर नहीं कर दी। उसके बाद, मैंने हमेशा अपने परिवार और दूसरों को इसे हमेशा पढ़ने की सलाह दी।"
इमाम मलिक : 1480
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا اشْتَكَى يَقْرَأُ عَلَى نَفْسِهِ بِالْمُعَوِّذَاتِ وَيَنْفِثُ قَالَتْ فَلَمَّا اشْتَدَّ وَجَعُهُ كُنْتُ أَنَا أَقْرَأُ عَلَيْهِ وَأَمْسَحُ عَلَيْهِ بِيَمِينِهِ رَجَاءَ بَرَكَتِهَا
मलिक ने मुझे [इब्न सैहाब] से [उरवाह बिन जुबैर] से [आयशा] के बारे में बताया, जिन्होंने कहा, "जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बीमार महसूस करते थे, तो वह अपने लिए सुरक्षा की दुआ पढ़ते थे और उसे फूँकते थे। आयशा ने कहा: "जब उनकी बीमारी बढ़ जाती थी, तो मैं उनके लिए वे दुआएँ पढ़ती थी और फिर उन्हें उनके दाहिने हाथ पर फूँकती थी ताकि उससे दुआ मिले।"