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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 Hadith

Hadith

Imam Malik : 1441

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ ابْنِ بُجَيْدٍ الْأَنْصَارِيِّ ثُمَّ الْحَارِثِيِّ عَنْ جَدَّتِهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ رُدُّوا الْمِسْكِينَ وَلَوْ بِظِلْفٍ مُحْرَقٍ

हमरा मलिक सँ [जैद बिन असलम] सँ [इब्नु बुजैद अल अंसारी अल हरित्सी] सँ [हुनकर दादी] सँ कहल गेल अछि जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'गरीब केँ दियौक, भले मात्र खुर सँ - बकरी केर टांग सँ - जे जरा देल गेल हो! ' .

Hadith

Imam Malik : 1442

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَأْكُلُ الْمُسْلِمُ فِي مِعًى وَاحِدٍ وَالْكَافِرُ يَأْكُلُ فِي سَبْعَةِ أَمْعَاءٍ

हमरा मलिक स [अबू अज़ जिनाद] स [अल अ'राज] स [अबू हुरैरा] स कहल गेल अछि जे 'अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे मुसलमान एक आंत स खाइत छथि जखन कि काफिर सात आंत स भोजन करैत छथि'।

Hadith

Imam Malik : 1443

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ضَافَهُ ضَيْفٌ كَافِرٌ فَأَمَرَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِشَاةٍ فَحُلِبَتْ فَشَرِبَ حِلَابَهَا ثُمَّ أُخْرَى فَشَرِبَهُ ثُمَّ أُخْرَى فَشَرِبَهُ حَتَّى شَرِبَ حِلَابَ سَبْعِ شِيَاهٍ ثُمَّ إِنَّهُ أَصْبَحَ فَأَسْلَمَ فَأَمَرَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِشَاةٍ فَحُلِبَتْ فَشَرِبَ حِلَابَهَا ثُمَّ أَمَرَ لَهُ بِأُخْرَى فَلَمْ يَسْتَتِمَّهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمُؤْمِنُ يَشْرَبُ فِي مِعًى وَاحِدٍ وَالْكَافِرُ يَشْرَبُ فِي سَبْعَةِ أَمْعَاءٍ

हमरा मलिक स [सुहैल बिन अबू सालिह] स [अपन पिता] स [अबू हुरैरा] स कहल गेल अछि जे कहने छलाह, ‘एकटा काफिर अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स भेंट करय लेल आयल छल। तेँ ओ बकरी के आदेश देलखिन जे एकटा बकरी दूध देबय लेल आनब, काफिर तखन ओकर दूध पीबि लेलक। तखन दोसर बकरी सँ दुहल गेल, आ ओ पीबि लेलक। तखन ओ ओकरा दोसर बकरी सँ दुहबैत रहलाह, आ फेर पीबि लेलनि, जाबत ओ सात टा बकरी सँ दूध समाप्त नहि क' लेलनि। दोसर दिन ओ आदमी इस्लाम अपना लेलक। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन बकरी के दुहय के आदेश देलखिन। दूध पीलनि, फेर फेर व्यक्त केलनि मुदा समाप्त नहि क' सकलाह. त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, ‘एक आंत सँ मुसलमान पीबैत अछि जखन कि काफिर सात आंत सँ पीबैत अछि’।

Hadith

Imam Malik : 1444

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الَّذِي يَشْرَبُ فِي آنِيَةِ الْفِضَّةِ إِنَّمَا يُجَرْجِرُ فِي بَطْنِهِ نَارَ جَهَنَّمَ

हमरा [नाफी’] स मालिक स [जैद बिन अब्दुल्लाह बिन उमर बिन खत्ताब] स [अब्दुल्लाह बिन अब्दुररहमान बिन अबू बकर अश शिधिक] स [उम्मू सलामा] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी स कहल गेल अछि जे अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क रसूलुल्लाह कहने छथि: ‘एक व्यक्ति जे चानी स पीबैत अछि पात्र, सत्ते पेट मे नरकक गर्जन सुनत'।

Hadith

Imam Malik : 1445

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَيُّوبَ بْنِ حَبِيبٍ مَوْلَى سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ عَنْ أَبِي الْمُثَنَّى الْجُهَنِيِّ أَنَّهُ قَالَكُنْتُ عِنْدَ مَرْوَانَ بْنِ الْحَكَمِ فَدَخَلَ عَلَيْهِ أَبُو سَعِيدٍ الْخُدْرِيُّ فَقَالَ لَهُ مَرْوَانُ بْنُ الْحَكَمِ أَسَمِعْتَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ نَهَى عَنْ النَّفْخِ فِي الشَّرَابِ فَقَالَ لَهُ أَبُو سَعِيدٍ نَعَمْ فَقَالَ لَهُ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي لَا أَرْوَى مِنْ نَفَسٍ وَاحِدٍ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَبِنْ الْقَدَحَ عَنْ فَاكَ ثُمَّ تَنَفَّسْ قَالَ فَإِنِّي أَرَى الْقَذَاةَ فِيهِ قَالَ فَأَهْرِقْهَا

हमरा मलिक स [अय्यूब बिन हबीब] पूर्व गुलाम साद बिन अबू वक्काश स कहने छल, [अबू अल मुत्सन्ना अल जुहानी] स कहलक, 'जखन हम मरवान बिन अल हकम क बगल मे छलहुं त अबू सैद अल खुदरी आबि गेलाह। मरवान बिन हकम हुनका सँ पूछलखिन जे अहाँ कहियो सुनने छी जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शराब पीबैत काल साँस लेबय पर रोक लगा देने छथि? [अबू सईद अल खुदरी] जवाब देलखिन, 'हाँ'। तखन एक आदमी हुनका सँ पुछलखिन, 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हम एक साँस सँ भरल नहि भ' सकैत छी! ' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि : 'गिलास मुँह सँ दूर राखू, तखन साँस लिअ ! '' ओ आदमी बाजल - देखैत छी एहि मे गंदगी अछि ! ' ओ उत्तर देलनि : 'उझलि दियौक ! ' .

Hadith

Imam Malik : 1446

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّ عَائِشَةَ أُمَّ الْمُؤْمِنِينَ وَسَعْدَ بْنَ أَبِي وَقَّاصٍكَانَا لَا يَرَيَانِ بِشُرْبِ الْإِنْسَانِ وَهُوَ قَائِمٌ بَأْسًا

मलिक हमरा [इब्न सिहाब] स बतेलथि जे [आइशा] उम्मूल मुक्मिनिम आ [सअद बिन वक्कास] क मत छल जे ठाढ़ भ कए शराब पीबय मे कोनो हर्ज नहि।

Hadith

Imam Malik : 1447

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي جَعْفَرٍ الْقَارِئِ أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَيَشْرَبُ قَائِمًا

हमरा ई बात कहलऽ गेलऽ छै कि [अबू जाफर अल कारी] केरऽ मलिक न॑ कहलकै कि हम्में [अब्दुल्लाह बिन उमर] क॑ खड़ा होय क॑ पीबैत॑ देखलियै’ ।

Hadith

Imam Malik : 1448

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَامِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ كَانَ يَشْرَبُ قَائِمًا

हमरा मलिक स [‘अमीर बिन अब्दुल्लाह बिन अज़ जुबैर] स [अपन पिता] स रिवायत भेल जे ओ ठाढ़ भ कए पीबैत छलाह’।

Hadith

Imam Malik : 1449

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُتِيَ بِلَبَنٍ قَدْ شِيبَ بِمَاءٍ مِنْ الْبِئْرِ وَعَنْ يَمِينِهِ أَعْرَابِيٌّ وَعَنْ يَسَارِهِ أَبُو بَكْرٍ الصِّدِّيقُ فَشَرِبَ ثُمَّ أَعْطَى الْأَعْرَابِيَّ وَقَالَ الْأَيْمَنَ فَالْأَيْمَنَ

हमरा कहल गेल अछि जे [इब्नु शिहाब] स मालिक [अनस बिन मलिक] स कहलथि जे एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कए दूध परोसल गेल छल जे इनार क पानि मे मिलाउल गेल छल। हुनकर दाहिना दिस एकटा बेदुइन छलाह जखन कि हुनकर बामा कात अबू बकर अस सिद्दीक छलाह । ओ पेय पीबि गेलाह तखन बेदुइन केँ देलनि आ कहलनि: 'सही, सही'।

Hadith

Imam Malik : 1450

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي حَازِمِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ الْأَنْصَارِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُتِيَ بِشَرَابٍ فَشَرِبَ مِنْهُ وَعَنْ يَمِينِهِ غُلَامٌ وَعَنْ يَسَارِهِ الْأَشْيَاخُ فَقَالَ لِلْغُلَامِ أَتَأْذَنُ لِي أَنْ أُعْطِيَ هَؤُلَاءِ فَقَالَ الْغُلَامُ لَا وَاللَّهِ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَا أُوثِرُ بِنَصِيبِي مِنْكَ أَحَدًا قَالَ فَتَلَّهَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي يَدِهِ

हमरा मलिक स [अबू हजम बिन दिनार] स [सहल बिन सअद अल अंसारी] स कहल गेल अछि जे कहने छलाह जे जखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कए पेय देल गेल त ओ पीबि लेलथि। हुनकर दहिना कात एकटा छोट बच्चा अछि, जखन कि हुनकर बामा कात कतेको बूढ़ लोक छथि । ओ बच्चासँ पुछलखिन: 'की अहाँ हमरा अनुमति देब, जँ हम पहिने ई पानि हुनका सभकेँ द' देब?' बच्चा जवाब देलक: ‘हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अल्लाह के कसम, नै! हम अहाँ स अपन हिस्सा के ककरो प्राथमिकता नहि देब'। सहल बिन साआद कहलनि; 'तँ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एकरा बच्चाक हाथ मे राखि देलनि।'

Hadith

Imam Malik : 1451

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ أَنَّهُ سَمِعَ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُقَالَ أَبُو طَلْحَةَ لِأُمِّ سُلَيْمٍ لَقَدْ سَمِعْتُ صَوْتَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ضَعِيفًا أَعْرِفُ فِيهِ الْجُوعَ فَهَلْ عِنْدَكِ مِنْ شَيْءٍ فَقَالَتْ نَعَمْ فَأَخْرَجَتْ أَقْرَاصًا مِنْ شَعِيرٍ ثُمَّ أَخَذَتْ خِمَارًا لَهَا فَلَفَّتْ الْخُبْزَ بِبَعْضِهِ ثُمَّ دَسَّتْهُ تَحْتَ يَدِي وَرَدَّتْنِي بِبَعْضِهِ ثُمَّ أَرْسَلَتْنِي إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَذَهَبْتُ بِهِ فَوَجَدْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَالِسًا فِي الْمَسْجِدِ وَمَعَهُ النَّاسُ فَقُمْتُ عَلَيْهِمْ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ آرْسَلَكَ أَبُو طَلْحَةَ قَالَ فَقُلْتُ نَعَمْ قَالَ لِلطَّعَامِ فَقُلْتُ نَعَمْ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِمَنْ مَعَهُ قُومُوا قَالَ فَانْطَلَقَ وَانْطَلَقْتُ بَيْنَ أَيْدِيهِمْ حَتَّى جِئْتُ أَبَا طَلْحَةَ فَأَخْبَرْتُهُ فَقَالَ أَبُو طَلْحَةَ يَا أُمَّ سُلَيْمٍ قَدْ جَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالنَّاسِ وَلَيْسَ عِنْدَنَا مِنْ الطَّعَامِ مَا نُطْعِمُهُمْ فَقَالَتْ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ فَانْطَلَقَ أَبُو طَلْحَةَ حَتَّى لَقِيَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَقْبَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبُو طَلْحَةَ مَعَهُ حَتَّى دَخَلَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَلُمِّي يَا أُمَّ سُلَيْمٍ مَا عِنْدَكِ فَأَتَتْ بِذَلِكَ الْخُبْزِ فَأَمَرَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَفُتَّ وَعَصَرَتْ عَلَيْهِ أُمُّ سُلَيْمٍ عُكَّةً لَهَا فَآدَمَتْهُ ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَقُولَ ثُمَّ قَالَ ائْذَنْ لِعَشَرَةٍ بِالدُّخُولِ فَأَذِنَ لَهُمْ فَأَكَلُوا حَتَّى شَبِعُوا ثُمَّ خَرَجُوا ثُمَّ قَالَ ائْذَنْ لِعَشَرَةٍ فَأَذِنَ لَهُمْ فَأَكَلُوا حَتَّى شَبِعُوا ثُمَّ خَرَجُوا ثُمَّ قَالَ ائْذَنْ لِعَشَرَةٍ فَأَذِنَ لَهُمْ فَأَكَلُوا حَتَّى شَبِعُوا ثُمَّ خَرَجُوا ثُمَّ قَالَ ائْذَنْ لِعَشَرَةٍ فَأَذِنَ لَهُمْ فَأَكَلُوا حَتَّى شَبِعُوا ثُمَّ خَرَجُوا ثُمَّ قَالَ ائْذَنْ لِعَشَرَةٍ حَتَّى أَكَلَ الْقَوْمُ كُلُّهُمْ وَشَبِعُوا وَالْقَوْمُ سَبْعُونَ رَجُلًا أَوْ ثَمَانُونَ رَجُلًا

हमरा मलिक स कहल गेल अछि जे [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तल्हाह] [अनस बिन मलिक] कए कहैत सुनने छलाह जे अबू तल्हाह उम्म सुलैम स कहलथि जे हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसलम क आवाज बहुत कमजोर आ नीचा सुनलहुं, हमरा बुझल छल जे ओ भूखल छथि। अहाँ लग किछु अछि की?' उम्म सुलैन जबाब देलकै, 'हँ'। तखन उम्म सुलैम अपन दुपट्टा पकड़ैत किछु सपाट गहूमक रोटी निकालि लेलक। उम्म सुलैम तखन रोटी एकटा घूंघट मे राखि हमर हाथक नीचा राखि देलक। तखन ओ हमरा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के भोजन पहुंचेबाक लेल पठौलनि। अनस बाजल; 'हम हुनका नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के देखय लेल ल गेलहुं। हम हुनका अपन संगी सभक संग मस्जिद मे बैसल पाबि गेलहुँ, तखन हम हुनका सभक सोझाँ ठाढ़ भ’ गेलहुँ । रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: 'की अबू तल्हा छलाह जे अहाँ के आदेश देने छलाह?' अनस कहलकै, 'हम जवाब देलियनि; 'हँ'। पुछलखिन: ‘अन्न आनय लेल? ' हम उत्तर देलियनि, 'हँ'। तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका संग रहनिहार लोक सभ सँ कहलनि जे, ठाढ़ रहू! अनस कहलकै, 'ओ चलि गेलै आरू हम्में ओकरा सिनी के सामने छेलियै, जबेॅ तलक कि हम्में अबू तल्हा सें नै मिललियै आरो ओकरा ई बात नै बतैलकै'। अबू तल्हा कहलनि, 'हे उम्म सुलैम, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लोकक संग आबि गेलाह, जखन कि हमरा सभ लग एतेक भोजन नहि छल जे ओकरा परोसल जा सकय! ' उम्म सुलैम जवाब देलखिन, 'अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह बेसी जनैत छथि'। अनस बाजल; अबू तल्हाह नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स भेंट केलनि। तखन ओ आ अबू तल्हा घर मे प्रवेश केलनि, रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: हे उम्म सुलैम, एतय आउ! अहाँ लग की अछि?' उम्म सुलैम तखन रोटी ल क आयल, तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आदेश देलखिन जे रोटी के कुचलल जाय। तेँ रोटी कुचलल गेल आ उम्म सुलैम ओहि पात्र पर घी ढारि देलक जा धरि ओ साइड डिश नहि बनि गेल । नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम किछु कहलखिन जेना अल्लाह के इच्छा छलनि। तकर बाद ओ कहलनि: 'दस गोटे केँ भीतर आबय दियौक।' अबू तलहा तखन दस गोटे के भीतर आबय लेल आमंत्रित केलनि, फेर ओ सब भीतर गेलाह आ जा धरि पेट नहि भरि गेलाह ता धरि भोजन केलनि, फेर बाहर निकलि गेलाह. ओ फेर बजलाह-दस गोटेकेँ भीतर आबय दियौक। अबू तलहा तखन दस गोटे के भीतर आबय लेल आमंत्रित केलनि, फेर ओ सब भीतर गेलाह आ जा धरि पेट नहि भरि गेलाह ता धरि भोजन केलनि, फेर बाहर निकलि गेलाह. ओ फेर बजलाह-दस गोटेकेँ भीतर आबय दियौक। अबू तलहा तखन दस गोटे के भीतर आबय लेल आमंत्रित केलनि, फेर ओ सब भीतर गेलाह आ जा धरि पेट नहि भरि गेलाह ता धरि भोजन केलनि, फेर बाहर निकलि गेलाह. ओ फेर कहलनि: 'दस गोटे केँ प्रवेश करबाक लेल आमंत्रित करू'। अबू तलहा तखन दस गोटे के प्रवेश के लेल आमंत्रित केलनि, फेर ओ सब भीतर घुसि गेलाह आ जा धरि पेट भरि नहि गेलाह ता धरि भोजन खा गेलाह, फेर चलि गेलाह. ओ फेर कहलनि: 'दस गोटे केँ प्रवेश करबाक लेल आमंत्रित करू'। जाहिसँ सभ लोक खाइत अछि आ पेट भरि जाइत अछि। सत्तरि वा अस्सी छल'।

Hadith

Imam Malik : 1452

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ طَعَامُ الْاثْنَيْنِ كَافِي الثَّلَاثَةِ وَطَعَامُ الثَّلَاثَةِ كَافِي الْأَرْبَعَةِ

हमरा मलिक स [अबू अज़ जिनाद] स [अल अ'राज] स [अबू हुरैरा] स कहल गेल अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे दू लोक क भोजन तीन लोक लेल काफी अछि, आ तीन लोक क भोजन चारि लोक क लेल काफी अछि।

Hadith

Imam Malik : 1453

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ الْمَكِّيِّ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَغْلِقُوا الْبَابَ وَأَوْكُوا السِّقَاءَ وَأَكْفِئُوا الْإِنَاءَ أَوْ خَمِّرُوا الْإِنَاءَ وَأَطْفِئُوا الْمِصْبَاحَ فَإِنَّ الشَّيْطَانَ لَا يَفْتَحُ غَلَقًا وَلَا يَحُلُّ وِكَاءً وَلَا يَكْشِفُ إِنَاءً وَإِنَّ الْفُوَيْسِقَةَ تُضْرِمُ عَلَى النَّاسِ بَيْتَهُمْ

हमरा [अबू जुबैर अल माकी] स मालिक स [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] स कहल गेल अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे दरबज्जा पर ताला लगाउ आ अपन पानिक बर्तन पर ढक्कन लगाउ, अपन बर्तन उल्टा करू या अपन बर्तन कए ढक दियौ। बत्ती बंद करू, कारण शैतान ताला लागल दरबज्जा नहि खोलि सकैत अछि, बान्ह नहि खोलि सकैत अछि, बर्तन नहि खोलि सकैत अछि। असल मे चूहा घर मे आगि लगा सकैत अछि - आगि लगा सकैत अछि - जाहि सं ओकरा नुकसान भ' सकैत अछि'.

Hadith

Imam Malik : 1454

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ أَبِي شُرَيْحٍ الْكَعْبِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلْيَقُلْ خَيْرًا أَوْ لِيَصْمُتْ وَمَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلْيُكْرِمْ جَارَهُ وَمَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلْيُكْرِمْ ضَيْفَهُ جَائِزَتُهُ يَوْمٌ وَلَيْلَةٌ وَضِيَافَتُهُ ثَلَاثَةُ أَيَّامٍ فَمَا كَانَ بَعْدَ ذَلِكَ فَهُوَ صَدَقَةٌ وَلَا يَحِلُّ لَهُ أَنْ يَثْوِيَ عِنْدَهُ حَتَّى يُحْرِجَهُ

हमरा [सैद बिन अबू सईद अल मकबुरी] स मलिक स [अबू स्यूरैह अल क'बी] स कहल गेल अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे जे कियो अल्लाह आ अंतिम दिन पर विश्वास करैत अछि ओकरा नीक बात कहबाक चाही या चुप रहबाक चाही। जे कियो अल्लाह आ अंतिम दिन पर विश्वास करैत अछि ओकरा अपन पड़ोसी के सम्मान करबाक चाही। जे कियो अल्लाह आ अंतिम दिन पर विश्वास करैत अछि, ओकरा अपन मेहमान के सम्मान करबाक चाही; जे अनिवार्य अछि से दिन-राति अछि, जखन कि घुमबाक अधिकार तीन दिनक अछि, जखन कि बाकीक लेल दक्षिणा अछि | -पाहुन- के मालिक के घर में रहना हलाल नै छै, मालिक के परेशानी के लेल'।

Hadith

Imam Malik : 1455

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سُمَيٍّ مَوْلَى أَبِي بَكْرٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ السَّمَّانِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ بَيْنَمَا رَجُلٌ يَمْشِي بِطَرِيقٍ إِذْ اشْتَدَّ عَلَيْهِ الْعَطَشُ فَوَجَدَ بِئْرًا فَنَزَلَ فِيهَا فَشَرِبَ وَخَرَجَ فَإِذَا كَلْبٌ يَلْهَثُ يَأْكُلُ الثَّرَى مِنْ الْعَطَشِ فَقَالَ الرَّجُلُ لَقَدْ بَلَغَ هَذَا الْكَلْبَ مِنْ الْعَطَشِ مِثْلُ الَّذِي بَلَغَ مِنِّي فَنَزَلَ الْبِئْرَ فَمَلَأَ خُفَّهُ ثُمَّ أَمْسَكَهُ بِفِيهِ حَتَّى رَقِيَ فَسَقَى الْكَلْبَ فَشَكَرَ اللَّهُ لَهُ فَغَفَرَ لَهُ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ وَإِنَّ لَنَا فِي الْبَهَائِمِ لَأَجْرًا فَقَالَ فِي كُلِّ ذِي كَبِدٍ رَطْبَةٍ أَجْرٌ

हमरा अबू बकर केरऽ पूर्व दास [सुमय्या] स॑ मलिक स॑, [अबू हुरैरा] स॑ [अबू शालिह अस समान] स॑ ई बात कहलऽ गेलऽ छै कि अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह (स.अ.व.) न॑ कहलकै कि एक बार, एक आदमी सड़क प॑ चलै छेलै । बहुत पियासल छलनि, तेँ इनार भेटि गेलनि। तखन ओ ओहि मे उतरि कऽ पानि पीबि लेलक। बाहर निकलला पर देखलक जे कुकुर जीह बाहर निकालि कए भीजल जमीन खा रहल छल, कारण ओकरा प्यास लागल छल। तखन ओ आदमी कहलक; ‘सत्ते ई कुकुर ओतबे प्यासल अछि जतेक हमरा प्यासल छल,’ तखन ओ फेर इनार दिस उतरि गेल। तखन ओ अपन जूता मे पानि भरि लेलक, मुँह सँ पकड़ि लेलक, जाबत ओ इनार सँ बाहर नहि निकलि गेल, तकर बाद कुकुर केँ पानि देलक। अल्लाह हुनका धन्यवाद देलनि आ माफ क' देलनि'। साथी सब पूछलकै: हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, कियाक त हम जानवर के किछु दैत छी त हमरा सब के इनाम भेटैत अछि? ओ कहलनि: 'जिनका जीवन छनि ताहि मे इनाम होइत छैक'।

Hadith

Imam Malik : 1456

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّهُ قَالَبَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْثًا قِبَلَ السَّاحِلِ فَأَمَّرَ عَلَيْهِمْ أَبَا عُبَيْدَةَ بْنَ الْجَرَّاحِ وَهُمْ ثَلَاثُ مِائَةٍ قَالَ وَأَنَا فِيهِمْ قَالَ فَخَرَجْنَا حَتَّى إِذَا كُنَّا بِبَعْضِ الطَّرِيقِ فَنِيَ الزَّادُ فَأَمَرَ أَبُو عُبَيْدَةَ بِأَزْوَادِ ذَلِكَ الْجَيْشِ فَجُمِعَ ذَلِكَ كُلُّهُ فَكَانَ مِزْوَدَيْ تَمْرٍ قَالَ فَكَانَ يُقَوِّتُنَاهُ كُلَّ يَوْمٍ قَلِيلًا قَلِيلًا حَتَّى فَنِيَ وَلَمْ تُصِبْنَا إِلَّا تَمْرَةٌ تَمْرَةٌ فَقُلْتُ وَمَا تُغْنِي تَمْرَةٌ فَقَالَ لَقَدْ وَجَدْنَا فَقْدَهَا حَيْثُ فَنِيَتْ قَالَ ثُمَّ انْتَهَيْنَا إِلَى الْبَحْرِ فَإِذَا حُوتٌ مِثْلُ الظَّرِبِ فَأَكَلَ مِنْهُ ذَلِكَ الْجَيْشُ ثَمَانِيَ عَشْرَةَ لَيْلَةً ثُمَّ أَمَرَ أَبُو عُبَيْدَةَ بِضِلْعَيْنِ مِنْ أَضْلَاعِهِ فَنُصِبَا ثُمَّ أَمَرَ بِرَاحِلَةٍ فَرُحِلَتْ ثُمَّ مَرَّتْ تَحْتَهُمَا وَلَمْ تُصِبْهُمَاقَالَ مَالِك الظَّرِبُ الْجُبَيْلُ

हमरा मलिक स [वहाब बिन कैसन] स [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] स कहल गेल अछि ओ कहला; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एकटा प्रतिनिधिमंडल समुद्र तट पर पठौलनि । ओ अबू उबैदा बिन जर्राह के सैनिक के नेता नियुक्त केलनि, जखन कि हुनकर संख्या तीन सौ लोक छल'. जाबिर बजलाह; 'आ हमहूँ ओहि मे सँ एक छी।' तखन हम सब विदा भ गेलहुं, जाबत कोनो सड़क पर पहुंचला पर हमरा सबहक सामान लगभग खतम भ गेल। अबू उबैदा शेष सैनिकक आपूर्ति जुटेबाक आदेश देलनि, आ आपूर्ति एकत्रित कयल गेल | एकत्रित प्रावधान दू झोरा खजूरक छल।' जाबिर बजलाह; '-ओ प्रावधान- हमरा लोकनिक सभ दिन मुख्य भोजन छल, तेँ धीरे-धीरे भोजन खतम भ' गेल । आ हमरा सभ के प्रति व्यक्ति एक तारीख छोड़ि आओर राशन नहि भेटल. हम पुछलियनि; 'खरीखक की अर्थ होइत छैक'। अबू उबैदा जबाब देलकै; 'हमरा सब के अपन खतम भ गेल आपूर्ति के जगह भेट गेल अछि'। जाबिर बजलाह; 'तखन हम सभ एकटा समुद्रक कछेर पर पहुँचलहुँ, आ पता चलल जे ओतय पहाड़ी जकाँ पैघ ह्वेल छल।' तेँ सैनिक सभ अठारह राति धरि खा गेल। अबू उबैदा हुनकर दू टा पसली ल क दांव पर लगाबय के आदेश देलखिन्ह. ओ एकटा सवार ऊँट आनबाक आदेश देलनि। पता चलल जे ऊँट माछक पसली नीचाँ गुजरि सकल आ ओकरासँ नहि टकरा सकल' । मालिक बजलाह; 'अझ झरब एकटा छोट पहाड़ अछि'।

Hadith

Imam Malik : 1457

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَمْرِو بْنِ سَعْدِ بْنِ مُعَاذٍ عَنْ جَدَّتِهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يَا نِسَاءَ الْمُؤْمِنَاتِ لَا تَحْقِرَنَّ إِحْدَاكُنَّ لِجَارَتِهَا وَلَوْ كُرَاعَ شَاةٍ مُحْرَقًا

हमरा मलिक स [जैद बिन असलम] स [अमर बिन सअद बिन मुअदज] स [अपन दादी] स कहल गेल अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे हे मुसलमान महिला, अहां मे स कियो अपन पड़ोसी कए सिर्फ जड़ल बकरी क बछड़ा क हड्डी तक देबा मे हीनता नहि बुझू’।

Hadith

Imam Malik : 1458

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ أَنَّهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَاتَلَ اللَّهُ الْيَهُودَ نُهُوا عَنْ أَكْلِ الشَّحْمِ فَبَاعُوهُ فَأَكَلُوا ثَمَنَهُ

हमरा मलिक स [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर] स कहल गेल अछि जे ओ कहलनि, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'अल्लाह यहूदी के गारि पढ़थि, हुनका सब के मोट खाय स मना अछि, मुदा ओ सब बेचैत छथि आ बेचनिहार के फल खाइत छथि'।

Hadith

Imam Malik : 1459

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِكَانَ يَأْكُلُ خُبْزًا بِسَمْنٍ فَدَعَا رَجُلًا مِنْ أَهْلِ الْبَادِيَةِ فَجَعَلَ يَأْكُلُ وَيَتَّبِعُ بِاللُّقْمَةِ وَضَرَ الصَّحْفَةِ فَقَالَ عُمَرُ كَأَنَّكَ مُقْفِرٌ فَقَالَ وَاللَّهِ مَا أَكَلْتُ سَمْنًا وَلَا لُكْتُ أَكْلًا بِهِ مُنْذُ كَذَا وَكَذَا فَقَالَ عُمَرُ لَا آكُلُ السَّمْنَ حَتَّى يَحْيَا النَّاسُ مِنْ أَوَّلِ مَا يَحْيَوْنَ

याह्या बिन सईद स मालिक स हमरा रिवायत भेल जे उमर इब्न अल खट्टब घी क संग रोटी खाइत छलाह, तखन ओ एकटा बेदूईन कए बजौलथि। उमर इब्न अल-खत्ताब भोजन करय लगलाह आ हुनका लेल एकटा पैघ थारी मे भोजन अनलनि | उमर कहलकै, "लागै छै तोरा खाना नै छै।" ओ जवाब देलखिन, "अल्लाह के कसम, हम बहुत दिन स घी नहि खा रहल छी आ फलां समय स एकरा संग नहि चबबैत छी।" तखन उमर बजलाह, "हम घी नहि खाएब जा धरि लोक अपन जीवनक शुरुआत सँ जीबय मे सक्षम नहि भ' जायत."

Hadith

Imam Malik : 1460

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِوَهُوَ يَوْمَئِذٍ أَمِيرُ الْمُؤْمِنِينَ يُطْرَحُ لَهُ صَاعٌ مِنْ تَمْرٍ فَيَأْكُلُهُ حَتَّى يَأْكُلَ حَشَفَهَا

हमरा मलिक स [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] स [अनास बिन मलिक] स कहल गेल अछि; 'हम [उमर बिन खत्ताब] के एक शा' तारीख देल गेल देखलहुं, ओहि समय ओ अमीरुल मुकमिनिन छलाह. उमर जाबे कुरूप खजूर नै खा गेलै ताबे तक खा गेलै।'