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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
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इमाम मलिक (الامام مالك) - 1594 हदीस

वस्त्र पहने किन्तु नग्न स्त्रियों के स्वर्ग में प्रवेश पर प्रतिबन्ध

इमाम मलिक : 1421

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ مُسْلِمِ بْنِ أَبِي مَرْيَمَ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّهُ قَالَنِسَاءٌ كَاسِيَاتٌ عَارِيَاتٌ مَائِلَاتٌ مُمِيلَاتٌ لَا يَدْخُلْنَ الْجَنَّةَ وَلَا يَجِدْنَ رِيحَهَا وَرِيحُهَا يُوجَدُ مِنْ مَسِيرَةِ خَمْسِ مِائَةِ عَامٍ

मुझे मालिक (मुस्लिम बिन अबू मरियम) और (अबू सलेह) तथा (अबू हुरैरा) से वर्णित किया गया है कि उन्होंने कहा: "जो महिलाएं कपड़े पहने हों परंतु नग्न हों और आकर्षक चाल से चलें, वे स्वर्ग में प्रवेश नहीं करेंगी और न ही उसकी सुगंध सूंघेंगी, यद्यपि उसकी सुगंध पांच सौ वर्ष की दूरी से भी सूंघी जा सकती हो।"

कयामत के दिन नग्न महिलाओं पर रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम के विचार

इमाम मलिक : 1422

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَامَ مِنْ اللَّيْلِ فَنَظَرَ فِي أُفُقِ السَّمَاءِ فَقَالَ مَاذَا فُتِحَ اللَّيْلَةَ مِنْ الْخَزَائِنِ وَمَاذَا وَقَعَ مِنْ الْفِتَنِ كَمْ مِنْ كَاسِيَةٍ فِي الدُّنْيَا عَارِيَةٌ يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَيْقِظُوا صَوَاحِبَ الْحُجَرِ

मुझे मलिक [याह्या बिन सईद] से [इब्न शिहाब] ने बताया है कि, “एक रात अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उठे और आसमान की तरफ देखा, फिर कहा: “रात में कौन सा खज़ाना खोला गया, और कौन सी बदनामी हुई? दुनिया में कितनी औरतें कपड़े पहनती हैं, लेकिन क़यामत के दिन नंगी होती हैं, कमरे में रहने वालों को जगाओ।”

अहंकार के कारण कपड़े घसीटने पर प्रतिबंध

इमाम मलिक : 1423

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الَّذِي يَجُرُّ ثَوْبَهُ خُيَلَاءَ لَا يَنْظُرُ اللَّهُ إِلَيْهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ

मालिक (अब्दुल्ला बिन दीनार) से (अब्दुल्ला बिन उमर) ने मुझे बताया है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जो व्यक्ति घमंड की वजह से अपना कपड़ा फैलाएगा, तो क़यामत के दिन अल्लाह उसे नहीं देखेगा।"

जो लोग अहंकारपूर्वक कपड़े घसीटते हैं उनके लिए खतरा

इमाम मलिक : 1424

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَنْظُرُ اللَّهُ تَبَارَكَ وَتَعَالَى يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِلَى مَنْ يَجُرُّ إِزَارَهُ بَطَرًا

मुझे मालिक (अबू अज़ ज़िनद) और अल अरज (अबू हुरैरा) से वर्णित किया गया है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: "क़यामत के दिन, अल्लाह तबारक व तआला उस व्यक्ति को नहीं देखेंगे जो घमंड से अपने कपड़े बाहर निकालता है।"

अरेंज के साथ कपड़े पहनने पर प्रतिबंध

इमाम मलिक : 1425

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ وَزَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ كُلُّهُمْ يُخْبِرُهُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَنْظُرُ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِلَى مَنْ يَجُرُّ ثَوْبَهُ خُيَلَاءَ

मुझे मालिक (नफी) और अब्दुल्लाह बिन दीनार और ज़ैद बिन असलम (अब्दुल्ला बिन उमर) से बताया गया है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा, "क़यामत के दिन अल्लाह उस इंसान को नहीं देखेगा जो घमंड की वजह से अपने कपड़े फैलाएगा।"

मुकमिन के सारोंग की लंबाई पिंडली के आधे भाग तक होती है

इमाम मलिक : 1426

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَ سَأَلْتُ أَبَا سَعِيدٍ الْخُدْرِيَّعَنْ الْإِزَارِ فَقَالَ أَنَا أُخْبِرُكَ بِعِلْمٍ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِزْرَةُ الْمُؤْمِنِ إِلَى أَنْصَافِ سَاقَيْهِ لَا جُنَاحَ عَلَيْهِ فِيمَا بَيْنَهُ وَبَيْنَ الْكَعْبَيْنِ مَا أَسْفَلَ مِنْ ذَلِكَ فَفِي النَّارِ مَا أَسْفَلَ مِنْ ذَلِكَ فَفِي النَّارِ لَا يَنْظُرُ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِلَى مَنْ جَرَّ إِزَارَهُ بَطَرًا

मलिक ने मुझे बताया था कि [अल अला बिन अब्दुर्रहमान] ने [अपने पिता] से कहा; मैंने [अबू सईद अल खुदरी] से कपड़ों के बारे में पूछा। उन्होंने जवाब दिया; "मैं तुम्हें ज्ञान के आधार पर बताऊंगा। मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना: 'एक मोमिन के सरोंग की लंबाई उसकी पिंडली का आधा होती है, और अगर लंबाई पिंडली और दोनों टखनों के बीच हो तो इसमें कोई बुराई नहीं है। अगर यह उससे कम है तो वह जगह जहन्नम है, अगर यह उससे कम है तो वह जगह जहन्नम है। क़यामत के दिन अल्लाह किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं देखेगा जो घमंड से अपना सरोंग बाहर निकालता है।"

उमू सलामाह ने महिलाओं के लिए सारोंग की लंबाई के बारे में पूछा

इमाम मलिक : 1427

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ نَافِعٍ عَنْ أَبِيهِ نَافِعٍ مَوْلَى ابْنِ عُمَرَ عَنْ صَفِيَّةَ بِنْتِ أَبِي عُبَيْدٍ أَنَّهَا أَخْبَرَتْهُ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّهَا قَالَتْ حِينَ ذُكِرَ الْإِزَارُ فَالْمَرْأَةُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ تُرْخِيهِ شِبْرًا قَالَتْ أُمُّ سَلَمَةَ إِذًا يَنْكَشِفُ عَنْهَا قَالَ فَذِرَاعًا لَا تَزِيدُ عَلَيْهِ

मलिक ने मुझे [अबू बक्र बिन नफी] से उनके पिता [नफी] से, जो इब्न उमर के पहले गुलाम थे, [शफियाह बिन्त अबू उबैद] से बताया कि उन्होंने उन्हें बताया, [उम्मू सलमा] पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी से, जब उन्होंने सारोंग का ज़िक्र किया तो उन्होंने पूछा, "अल्लाह के रसूल, औरतों का क्या?" उन्होंने जवाब दिया: "इसे एक इंच और लंबा कर दो।" उम्म सलमा ने फिर पूछा; "क्या यह अभी भी खुला रह सकता है?" उन्होंने कहा: "एक हाथ लंबा कर दो और इसे और मत बढ़ाओ।"

एक चप्पल पहनकर चलने पर प्रतिबंध

इमाम मलिक : 1428

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَمْشِيَنَّ أَحَدُكُمْ فِي نَعْلٍ وَاحِدَةٍ لِيُنْعِلْهُمَا جَمِيعًا أَوْ لِيُحْفِهِمَا جَمِيعًا

मुझे मालिक (अबू अज़ ज़िनद) से (अल अरज) से (अबू हुरैरा) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: "तुम में से कोई भी एक चप्पल पहनकर न चले, उसे दोनों पहननी चाहिए या सभी उतार देनी चाहिए।"

सही तरीके से सैंडल पहनना शुरू करने की सलाह

इमाम मलिक : 1429

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا انْتَعَلَ أَحَدُكُمْ فَلْيَبْدَأْ بِالْيَمِينِ وَإِذَا نَزَعَ فَلْيَبْدَأْ بِالشِّمَالِ وَلْتَكُنْ الْيُمْنَى أَوَّلَهُمَا تُنْعَلُ وَآخِرَهُمَا تُنْزَعُ

मुझे मलिक (अबू अज़ ज़िनाद) और अल अराज (अबू हुरैरा) से वर्णित किया गया है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "जब तुम में से कोई अपने जूते पहने, तो उसे दाहिने से शुरू करना चाहिए। जब वह उन्हें उतारे, तो उसे बाएं से शुरू करना चाहिए। दाहिने जूते को सबसे पहले पहनें और सबसे आखिर में उतारें।"

पैगम्बर मूसा के जूतों पर काब अल अहबर का नज़रिया

इमाम मलिक : 1430

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَمِّهِ أَبِي سُهَيْلِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ كَعْبِ الْأَحْبَارِأَنَّ رَجُلًا نَزَعَ نَعْلَيْهِ فَقَالَ لِمَ خَلَعْتَ نَعْلَيْكَ لَعَلَّكَ تَأَوَّلْتَ هَذِهِ الْآيَةَ{ فَاخْلَعْ نَعْلَيْكَ إِنَّكَ بِالْوَادِ الْمُقَدَّسِ طُوًى }قَالَ ثُمَّ قَالَ كَعْبٌ لِلرَّجُلِ أَتَدْرِي مَا كَانَتْ نَعْلَا مُوسَى قَالَ مَالِك لَا أَدْرِي مَا أَجَابَهُ الرَّجُلُ فَقَالَ كَعْبٌ كَانَتَا مِنْ جِلْدِ حِمَارٍ مَيِّتٍ

मलिक ने मुझे अपने चाचा [अबू सुहैल बिन मलिक] से [अपने पिता] [काब अल अहबर] से बताया कि एक आदमी था जिसने अपनी सैंडल उतार दीं। काब ने तब पूछा; "तुमने अपनी सैंडल क्यों उतारीं? क्या तुम इस आयत का मतलब निकाल रहे हो: '(तो अपनी सैंडल उतार दो, क्योंकि तुम थुवा की पवित्र घाटी में हो)?'" (Qs. ताहा: 12) मलिक बिन अबू अमीर ने कहा; "काब ने तब उस आदमी से पूछा, "क्या तुम जानते हो कि मूसा की सैंडल कैसी थीं?" मलिक ने कहा; "मुझे नहीं पता कि उस आदमी ने क्या जवाब दिया।" काब ने कहा; "उसकी सैंडल मरे हुए गधे की खाल से बनी थीं।"

एक कपड़े से इहतिमा और मुलामासा में खरीद-बिक्री पर रोक

इमाम मलिक : 1431

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّهُ قَالَنَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ لِبْسَتَيْنِ وَعَنْ بَيْعَتَيْنِ عَنْ الْمُلَامَسَةِ وَعَنْ الْمُنَابَذَةِ وَعَنْ أَنْ يَحْتَبِيَ الرَّجُلُ فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ لَيْسَ عَلَى فَرْجِهِ مِنْهُ شَيْءٌ وَعَنْ أَنْ يَشْتَمِلَ الرَّجُلُ بِالثَّوْبِ الْوَاحِدِ عَلَى أَحَدِ شِقَّيْهِ

मुझे मलिक (अबू अज़ ज़िनाद) से (अल अराज) से (अबू हुरैरा) तक बताया गया है, उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने दो तरह के कपड़े और दो तरह की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई है: मुलामासा और मुनाबदज़ा। उन्होंने एक आदमी को सिर्फ़ एक कपड़ा पहनकर हिजरी करने से मना किया, ताकि उसके प्राइवेट पार्ट को कुछ भी न ढक सके। और उन्होंने एक आदमी को एक कपड़े में खुद को लपेटने से भी मना किया है।"

उमर बिन खत्ताब ने मस्जिद के सामने बिक्री के लिए आभूषण देखे

इमाम मलिक : 1432

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَأَى حُلَّةً سِيَرَاءَ تُبَاعُ عِنْدَ بَابِ الْمَسْجِدِ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَوْ اشْتَرَيْتَ هَذِهِ الْحُلَّةَ فَلَبِسْتَهَا يَوْمَ الْجُمُعَةِ وَلِلْوَفْدِ إِذَا قَدِمُوا عَلَيْكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّمَا يَلْبَسُ هَذِهِ مَنْ لَا خَلَاقَ لَهُ فِي الْآخِرَةِ ثُمَّ جَاءَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْهَا حُلَلٌ فَأَعْطَى عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ مِنْهَا حُلَّةً فَقَالَ عُمَرُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَكَسَوْتَنِيهَا وَقَدْ قُلْتَ فِي حُلَّةِ عُطَارِدٍ مَا قُلْتَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ أَكْسُكَهَا لِتَلْبَسَهَا فَكَسَاهَا عُمَرُ أَخًا لَهُ مُشْرِكًا بِمَكَّةَ

मुझे मलिक [नफी] से [अब्दुल्ला बिन उमर] ने बताया है कि उमर बिन खत्ताब ने मस्जिद के दरवाज़े पर रेशम से सजे गहने बिकते देखे। तब उमर ने कहा, "अल्लाह के रसूल, काश आप ये कपड़े खरीद लेते ताकि आप इन्हें शुक्रवार को पहन सकें और आने वाले रसूलों की मेहमान-नवाज़ी करते समय।" रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: "ये कपड़े सिर्फ़ वही पहनते हैं जिनका आख़िरत में कोई हिस्सा नहीं होता।" फिर कई तरह के कपड़े आए, फिर उन्होंने उमर बिन खत्ताब को एक कपड़ा दिया। उमर ने पूछा; "अल्लाह के रसूल, क्या आप मुझे ये कपड़े देंगे, भले ही आपने उथारिद के कपड़ों के बारे में जैसा कहा है!" रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मैंने ये तुम्हें पहनने के लिए नहीं दिए हैं।" तो उमर ने इसे मक्का में अपने मूर्तिपूजक भाई को दे दिया।"

उमर बिन खत्ताब ने अपने कपड़ों पर तीन पैच लगाए

इमाम मलिक : 1433

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ أَنَّهُ قَالَ قَالَ أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ رَأَيْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ وَهُوَ يَوْمَئِذٍ أَمِيرُ الْمَدِينَةِوَقَدْ رَقَعَ بَيْنَ كَتِفَيْهِ بِرِقَاعٍ ثَلَاثٍ لَبَّدَ بَعْضَهَا فَوْقَ بَعْضٍ

मलिक ने मुझे बताया कि [इसहाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] ने कहा; [अनस बिन मलिक] ने कहा; "मैंने [उमर बिन खत्ताब] को देखा जो उस समय मदीना के गवर्नर थे, अपनी कमीज़ के दोनों कंधों पर तीन पैच लगाते थे। वह एक टुकड़े को दूसरे के ऊपर लगाते थे।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की भौतिक विशेषताएं और उनकी उम्र

इमाम मलिक : 1434

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ سَمِعَهُ يَقُولُكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْسَ بِالطَّوِيلِ الْبَائِنِ وَلَا بِالْقَصِيرِ وَلَيْسَ بِالْأَبْيَضِ الْأَمْهَقِ وَلَا بِالْآدَمِ وَلَا بِالْجَعْدِ الْقَطَطِ وَلَا بِالسَّبِطِ بَعَثَهُ اللَّهُ عَلَى رَأْسِ أَرْبَعِينَ سَنَةً فَأَقَامَ بِمَكَّةَ عَشْرَ سِنِينَ وَبِالْمَدِينَةِ عَشْرَ سِنِينَ وَتَوَفَّاهُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ عَلَى رَأْسِ سِتِّينَ سَنَةً وَلَيْسَ فِي رَأْسِهِ وَلِحْيَتِهِ عِشْرُونَ شَعْرَةً بَيْضَاءَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

मुझे मलिक (रबीआह बिन अबू अब्दुर्रहमान) से [अनस बिन मलिक] ने बताया कि रबीआह बिन अबू अब्दुर्रहमान ने उन्हें यह कहते हुए सुना: "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) न तो बहुत लंबे थे और न ही बहुत छोटे। वह न तो हल्के सफेद थे और न ही गहरे भूरे। उनके बाल न तो घुंघराले थे और न ही सीधे। अल्लाह ने उन्हें चालीस साल की उम्र में भेजा। वह दस साल मक्का में और दस साल मदीना में रहे। अल्लाह अज़्ज़ा व जल्ला का निधन तब हुआ जब वह साठ साल के थे, उनके सिर और दाढ़ी पर बीस सफेद बालों के अलावा कुछ नहीं था।"

रसूलुल्लाह शाल्लाहु अलैहि वसल्लम का ख्वाब मसीह और दज्जाल के बारे में

इमाम मलिक : 1435

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَرَانِي اللَّيْلَةَ عِنْدَ الْكَعْبَةِ فَرَأَيْتُ رَجُلًا آدَمَ كَأَحْسَنِ مَا أَنْتَ رَاءٍ مِنْ أُدْمِ الرِّجَالِ لَهُ لِمَّةٌ كَأَحْسَنِ مَا أَنْتَ رَاءٍ مِنْ اللِّمَمِ قَدْ رَجَّلَهَا فَهِيَ تَقْطُرُ مَاءً مُتَّكِئًا عَلَى رَجُلَيْنِ أَوْ عَلَى عَوَاتِقِ رَجُلَيْنِ يَطُوفُ بِالْكَعْبَةِ فَسَأَلْتُ مَنْ هَذَا قِيلَ هَذَا الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ ثُمَّ إِذَا أَنَا بِرَجُلٍ جَعْدٍ قَطَطٍ أَعْوَرِ الْعَيْنِ الْيُمْنَى كَأَنَّهَا عِنَبَةٌ طَافِيَةٌ فَسَأَلْتُ مَنْ هَذَا فَقِيلَ لِي هَذَا الْمَسِيحُ الدَّجَّالُ

मलिक (नफी) से (अब्दुल्ला बिन उमर) ने मुझे बताया कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "एक रात मैंने काबा के पास एक सपना देखा। मैंने एक आदमी को देखा जिसकी चमड़ी भूरी थी, जैसे कि वह भूरी चमड़ी वाले लोगों में सबसे अच्छा हो। उसके बाल थे, जैसे कि वह उन लोगों में सबसे अच्छा हो जिनके बाल ऐसे होते हैं। उसने उन्हें नीचे किया और उससे पानी टपक रहा था। वह दो आदमियों पर झुका हुआ था, या "दो आदमियों के कंधों पर, वह काबा का चक्कर लगा रहा था, तो मैंने पूछा, वह कौन है? कहा गया कि वह अल मसीह बिन मरियम है। फिर मैंने एक आदमी को देखा जिसके बाल बहुत घुंघराले थे, वह अंधा था और उसकी दाहिनी आँख एक उबलते हुए अंगूर की तरह थी। मैंने पूछा: यह कौन है, मुझे बताया गया कि वह अल-मसीह दज्जाल है।"

नाखून, मूंछ, बगल के बाल काटना और दाढ़ी बनाना सुन्नत फ़ितरा है

इमाम मलिक : 1436

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَخَمْسٌ مِنْ الْفِطْرَةِ تَقْلِيمُ الْأَظْفَارِ وَقَصُّ الشَّارِبِ وَنَتْفُ الْإِبْطِ وَحَلْقُ الْعَانَةِ وَالْاخْتِتَانُ

मुझे मलिक [सईद बिन अबू सईद अल मकबूरी] से [उनके पिता] [अबू हुरैरा] से बताया गया है; "पांच तरह की सुन्नतें फ़ितरा: नाखून काटना, मूंछें छोटी करना, बगल के बाल उखाड़ना, प्यूबिक हेयर शेव करना और खतना करना।"

पैगम्बर इब्राहीम की सुन्नत

इमाम मलिक : 1437

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ قَالَكَانَ إِبْرَاهِيمُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوَّلَ النَّاسِ ضَيَّفَ الضَّيْفَ وَأَوَّلَ النَّاسِ اخْتَتَنَ وَأَوَّلَ النَّاسِ قَصَّ الشَّارِبَ وَأَوَّلَ النَّاسِ رَأَى الشَّيْبَ فَقَالَ يَا رَبِّ مَا هَذَا فَقَالَ اللَّهُ تَبَارَكَ وَتَعَالَى وَقَارٌ يَا إِبْرَاهِيمُ فَقَالَ يَا رَبِّ زِدْنِي وَقَارًاقَالَ يَحْيَى و سَمِعْت قَوْله تَعَالَى يَقُولُ يُؤْخَذُ مِنْ الشَّارِبِ حَتَّى يَبْدُوَ طَرَفُ الشَّفَةِ وَهُوَ الْإِطَارُ وَلَا يَجُزُّهُ فَيُمَثِّلُ بِنَفْسِهِ

मुझे मलिक से [याह्या बिन सईद] ने बताया है कि [सईद बिन मुसय्यब] ने कहा; "इब्राहिम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहले इंसान थे जिन्होंने किसी मेहमान का सम्मान किया। पहले इंसान जिनका खतना हुआ। पहले इंसान जिन्होंने अपनी मूंछें छोटी करवाईं और पहले इंसान जिनके बाल सफेद हुए। इब्राहिम ने पूछा, "ऐ मेरे रब, यह क्या है?" अल्लाह तबारक व तआला ने कहा: "ऐ इब्राहिम, यह अधिकार है।" इब्राहिम ने कहा, "ऐ रब, मुझमें अधिकार और बढ़ा दो!" याह्या ने कहा; "मैंने मलिक को कहते सुना; "मूंछें इस तरह रखी गईं कि होंठों का किनारा - यानी होंठ खुद - दिखाई दे रहे थे, और उन्होंने उन्हें नहीं काटा, इसलिए मूंछें अभी भी दिखाई दे रही थीं।"

अपने जननांगों को ढके बिना बाएं हाथ से और कंबल से भोजन करने पर प्रतिबंध

इमाम मलिक : 1438

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ السَّلَمِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى أَنْ يَأْكُلَ الرَّجُلُ بِشِمَالِهِ أَوْ يَمْشِيَ فِي نَعْلٍ وَاحِدَةٍ وَأَنْ يَشْتَمِلَ الصَّمَّاءَ وَأَنْ يَحْتَبِيَ فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ كَاشِفًا عَنْ فَرْجِهِ

मुझे मलिक (अबू अज़ ज़ुबैर) से (जाबिर बिन अब्दुल्लाह अस सुलामी) रिवायत है कि उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने किसी को बाएं हाथ से खाने या एक चप्पल पहनकर चलने से मना किया है। उन्होंने खुद को इस तरह ढकने से मना किया है कि शरीर का कोई हिस्सा खुला न रहे, और उन्होंने एक कपड़ा पहनकर बैठने से भी मना किया है, ताकि उसके प्राइवेट पार्ट खुले रहें।"

दाहिने हाथ से खाने-पीने की सिफ़ारिशें

इमाम मलिक : 1439

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا أَكَلَ أَحَدُكُمْ فَلْيَأْكُلْ بِيَمِينِهِ وَلْيَشْرَبْ بِيَمِينِهِ فَإِنَّ الشَّيْطَانَ يَأْكُلُ بِشِمَالِهِ وَيَشْرَبُ بِشِمَالِهِ

मलिक ने मुझे [इब्न शिहाब] से [अबू बक्र बिन उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उमर] से [अब्दुल्ला बिन उमर] से बताया कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: "जब तुम में से कोई खाए तो उसे अपने दाहिने हाथ से खाना चाहिए और अपने दाहिने हाथ से पीना चाहिए। वास्तव में, शैतान अपने बाएं हाथ से खाता और पीता है।"

गरीब लोगों की वास्तविक परिभाषा

इमाम मलिक : 1440

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَيْسَ الْمِسْكِينُ بِهَذَا الطَّوَّافِ الَّذِي يَطُوفُ عَلَى النَّاسِ فَتَرُدُّهُ اللُّقْمَةُ وَاللُّقْمَتَانِ وَالتَّمْرَةُ وَالتَّمْرَتَانِ قَالُوا فَمَا الْمِسْكِينُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ الَّذِي لَا يَجِدُ غِنًى يُغْنِيهِ وَلَا يَفْطُنُ النَّاسُ لَهُ فَيُتَصَدَّقَ عَلَيْهِ وَلَا يَقُومُ فَيَسْأَلَ النَّاسَ

मुझे मलिक (अबू अज़ ज़िनाद) से (अल अराज) से (अबू हुरैरा) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: "गरीब वह नहीं है जो लोगों के बीच घूमता है और एक-दो निवाला, एक-दो खजूर ले लेता है।" साथियों ने पूछा, "अल्लाह के रसूल, गरीब कौन है?" उन्होंने जवाब दिया: "वह वह है जिसके पास अपने लिए काफ़ी नहीं है, लेकिन लोग इसका एहसास नहीं करते और उसे दान देते हैं, और वह लोगों से भीख नहीं मांगता।"