इमाम मलिक : 1401
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْمَا خُيِّرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي أَمْرَيْنِ قَطُّ إِلَّا أَخَذَ أَيْسَرَهُمَا مَا لَمْ يَكُنْ إِثْمًا فَإِنْ كَانَ إِثْمًا كَانَ أَبْعَدَ النَّاسِ مِنْهُ وَمَا انْتَقَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِنَفْسِهِ إِلَّا أَنْ تُنْتَهَكَ حُرْمَةُ اللَّهِ فَيَنْتَقِمُ لِلَّهِ بِهَا
मलिक ने मुझे [इब्न शिहाब] से [उरवाह बिन ज़ुबैर] से [आयशा] पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी से बताया, उन्होंने कहा; "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को दो चीज़ों में से कोई एक चुनने का मौका नहीं दिया गया था, सिवाय इसके कि वह दोनों में से हल्का वाला चुनेंगे, जब तक कि वह गुनाह न हो। अगर वह गुनाह था, तो वह उससे सबसे दूर रहने वाले इंसान थे। और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अपना बदला नहीं लेंगे, सिवाय इसके कि अगर अल्लाह की इज़्ज़त का अपमान हुआ तो वह अल्लाह की वजह से उसका बदला लेंगे।"
इमाम मलिक : 1402
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَلِيِّ بْنِ حُسَيْنِ بْنِ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مِنْ حُسْنِ إِسْلَامِ الْمَرْءِ تَرْكُهُ مَا لَا يَعْنِيهِ
मलिक ने मुझे [इब्न सैहाब] से [अली बिन हुसैन बिन अली बिन अबू तालिब] से बताया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "किसी व्यक्ति के अच्छे इस्लाम के संकेतों में से उन चीजों को छोड़ देना है जो उसके लिए फायदेमंद नहीं हैं।"
इमाम मलिक : 1403
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَمِّهِ أَبِي سُهَيْلِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ كَعْبِ الْأَحْبَارِ أَنَّهُ قَالَإِذَا أَحْبَبْتُمْ أَنْ تَعْلَمُوا مَا لِلْعَبْدِ عِنْدَ رَبِّهِ فَانْظُرُوا مَاذَا يَتْبَعُهُ مِنْ حُسْنِ الثَّنَاءِ
मलिक ने मुझे अपने चाचा [अबू सुहैल बिन मलिक] से [अपने पिता] से [कब अल अहबारी] तक बताया, जिन्होंने कहा; "अगर तुम जानना चाहते हो कि एक बंदे को अपने रब से क्या मिलता है, तो उसके साथ मिलने वाली अच्छी तारीफ़ को देखो।"
इमाम मलिक : 1404
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَ بَلَغَنِيأَنَّ الْمَرْءَ لَيُدْرِكُ بِحُسْنِ خُلُقِهِ دَرَجَةَ الْقَائِمِ بِاللَّيْلِ الظَّامِي بِالْهَوَاجِرِ
मुझे मलिक से रिवायत है कि [याह्या बिन सईद] ने कहा; "मुझ तक यह बात पहुँची है कि अच्छे आचार वाला इंसान रात में नमाज़ पढ़ने वाले और दिन में प्यासे रहने वाले (रोज़ा रखने वाले) इंसान के बराबर होगा।"
इमाम मलिक : 1405
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ يَقُولُأَلَا أُخْبِرُكُمْ بِخَيْرٍ مِنْ كَثِيرٍ مِنْ الصَّلَاةِ وَالصَّدَقَةِ قَالُوا بَلَى قَالَ إِصْلَاحُ ذَاتِ الْبَيْنِ وَإِيَّاكُمْ وَالْبِغْضَةَ فَإِنَّهَا هِيَ الْحَالِقَةُ
उन्होंने कहा, "मैंने [सईद बिन मुसय्यब] को यह कहते सुना, 'क्या तुम चाहते हो कि मैं तुम्हें नमाज़ और ज़कात से ज़्यादा अच्छी कोई चीज़ बताऊँ?' उन्होंने जवाब दिया, "ज़रूर।" सईद ने कहा, "लोगों के बीच रिश्ते बेहतर करो और गुस्से से दूर रहो क्योंकि यह धर्म को खत्म करने वाला है।"
इमाम मलिक : 1406
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سَلَمَةَ بْنِ صَفْوَانَ بْنِ سَلَمَةَ الزُّرَقِيِّ عَنْ زَيْدِ بْنِ طَلْحَةَ بْنِ رُكَانَةَ يَرْفَعُهُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِكُلِّ دِينٍ خُلُقٌ وَخُلُقُ الْإِسْلَامِ الْحَيَاءُ
मुझे मालिक [सलमा बिन शफवान बिन सलमा अज़ ज़ुराकी] से [ज़ैद बिन थलहा बिन रुकना] से वर्णित है कि उन्होंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा, उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "हर धर्म में नैतिकता होती है, और इस्लामी नैतिकता शर्मनाक है।"
इमाम मलिक : 1407
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَرَّ عَلَى رَجُلٍ وَهُوَ يَعِظُ أَخَاهُ فِي الْحَيَاءِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَعْهُ فَإِنَّ الْحَيَاءَ مِنْ الْإِيمَانِ
मलिक ने मुझे [इब्न शिहाब] से [सलीम बिन अब्दुल्लाह] से [अब्दुल्ला बिन उमर] तक बताया कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) एक ऐसे आदमी के पास से गुज़रे जो अपने शर्मीले भाई को सलाह दे रहा था। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने तब कहा: "उसे अकेला छोड़ दो, क्योंकि शर्मीलापन ईमान का हिस्सा है।"
इमाम मलिक : 1408
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍأَنَّ رَجُلًا أَتَى إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ عَلِّمْنِي كَلِمَاتٍ أَعِيشُ بِهِنَّ وَلَا تُكْثِرْ عَلَيَّ فَأَنْسَى فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَغْضَبْ
मलिक ने मुझे [इब्न सैहाब] से [हुमैद बिन अब्दुर्रहमान बिन औफ] के बारे में बताया, जिन्होंने कहा, "एक आदमी अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया और कहा: "ऐ अल्लाह के रसूल, मुझे कुछ शब्द सिखाइए जिन्हें मैं ज़िंदगी में गाइड के तौर पर इस्तेमाल कर सकूं, लेकिन इतने ज़्यादा नहीं कि मैं उन्हें भूल जाऊं!" तब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा: "गुस्सा मत करो।"
इमाम मलिक : 1409
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَيْسَ الشَّدِيدُ بِالصُّرَعَةِ إِنَّمَا الشَّدِيدُ الَّذِي يَمْلِكُ نَفْسَهُ عِنْدَ الْغَضَبِ
मुझे बताया गया है कि मलिक (अबू हुरैरा) (सईद बिन मुसय्यब) ने कहा, "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "एक मजबूत व्यक्ति लड़ाई में मजबूत नहीं होता है। लेकिन एक मजबूत व्यक्ति वह है जो गुस्से में अपनी आत्मा को नियंत्रित कर सकता है।"
इमाम मलिक : 1410
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ اللَّيْثِيِّ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ الْأَنْصَارِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَحِلُّ لِمُسْلِمٍ أَنْ يُهَاجِرَ أَخَاهُ فَوْقَ ثَلَاثِ لَيَالٍ يَلْتَقِيَانِ فَيُعْرِضُ هَذَا وَيُعْرِضُ هَذَا وَخَيْرُهُمَا الَّذِي يَبْدَأُ بِالسَّلَامِ
मुझे बताया गया है कि मलिक (इब्न शिहाब) से (अथा बिन यज़ीद अल लैतसी) से (अबू अय्यूब अल अंसारी) ने कहा, "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "एक मुसलमान के लिए अपने भाई को तीन रातों से ज़्यादा अकेला छोड़ना जायज़ नहीं है। वे मिले, फिर दोनों ने नज़रें फेर लीं। दोनों में सबसे अच्छा वह है जो सलाम शुरू करे।"
इमाम मलिक : 1411
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَبَاغَضُوا وَلَا تَحَاسَدُوا وَلَا تَدَابَرُوا وَكُونُوا عِبَادَ اللَّهِ إِخْوَانًا وَلَا يَحِلُّ لِمُسْلِمٍ أَنْ يُهَاجِرَ أَخَاهُ فَوْقَ ثَلَاثِ لَيَالٍقَالَ مَالِك لَا أَحْسِبُ التَّدَابُرَ إِلَّا الْإِعْرَاضَ عَنْ أَخِيكَ الْمُسْلِمِ فَتُدْبِرَ عَنْهُ بِوَجْهِكَ
मलिक ने मुझे [इब्न शिहाब] से [अनस बिन मलिक] से बताया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "एक दूसरे से नफ़रत मत करो, एक दूसरे से जलन मत रखो, एक दूसरे से दुश्मनी मत करो, बल्कि अल्लाह के बंदे बनो जो भाई हो। एक मुसलमान के लिए अपने भाई को तीन रातों से ज़्यादा चुप कराना जायज़ नहीं है।" मलिक ने कहा; "मैं तदबुर को किसी को उसके मुसलमान भाई से दूर करने और फिर उससे अपना मुँह मोड़ने के अलावा और कुछ नहीं मानता।"
इमाम मलिक : 1412
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِيَّاكُمْ وَالظَّنَّ فَإِنَّ الظَّنَّ أَكْذَبُ الْحَدِيثِ وَلَا تَجَسَّسُوا وَلَا تَحَسَّسُوا وَلَا تَنَافَسُوا وَلَا تَحَاسَدُوا وَلَا تَبَاغَضُوا وَلَا تَدَابَرُوا وَكُونُوا عِبَادَ اللَّهِ إِخْوَانًا
मुझे मलिक (अबू अज़ ज़िनाद) और अल अराज (अबू हुरैरा) से वर्णित किया गया है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "शक से बचो, क्योंकि शक सबसे बड़ा झूठ है। एक दूसरे की जासूसी मत करो, दूसरों की गलतियाँ मत ढूंढो, सांसारिक विलासिता की तलाश में एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा मत करो, एक दूसरे से ईर्ष्या मत करो, एक दूसरे से दुश्मनी मत करो और एक दूसरे को काट दो। अल्लाह के बंदे भाई बनो।"
इमाम मलिक : 1413
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَطَاءِ بْنِ أَبِي مُسْلِمٍ عَبْدِ اللَّهِ الْخُرَاسَانِيِّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَصَافَحُوا يَذْهَبْ الْغِلُّ وَتَهَادَوْا تَحَابُّوا وَتَذْهَبْ الشَّحْنَاءُ
मुझे बताया गया है कि मलिक ['अथा बिन अबू मुस्लिम अब्दुल्ला अल खुरासानी] ने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "तुम एक दूसरे से हाथ मिलाओ, फिर जलन खत्म हो जाएगी। तुम एक दूसरे को तोहफ़े दो, तुम एक दूसरे से प्यार करोगे और दुश्मनी खत्म हो जाएगी।"
इमाम मलिक : 1414
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تُفْتَحُ أَبْوَابُ الْجَنَّةِ يَوْمَ الْاثْنَيْنِ وَيَوْمَ الْخَمِيسِ فَيُغْفَرُ لِكُلِّ عَبْدٍ مُسْلِمٍ لَا يُشْرِكُ بِاللَّهِ شَيْئًا إِلَّا رَجُلًا كَانَتْ بَيْنَهُ وَبَيْنَ أَخِيهِ شَحْنَاءُ فَيُقَالُ أَنْظِرُوا هَذَيْنِ حَتَّى يَصْطَلِحَا أَنْظِرُوا هَذَيْنِ حَتَّى يَصْطَلِحَا
मुझे मलिक [सुहैल बिन अबू सलीह] से [उनके पिता] से [अबू हुरैरा] से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "स्वर्ग के दरवाजे सोमवार और गुरुवार को खोले जाते हैं, इसलिए प्रत्येक मुसलमान सेवक जो अल्लाह के साथ साझीदार नहीं बनाता है, उसे क्षमा कर दिया जाएगा, सिवाय उस व्यक्ति के जो अपने भाई से दुश्मनी रखता हो। फिर कहा गया: 'इसे दोनों के लिए स्थगित कर दो जब तक वे शांति से न हो जाएं, इसे दोनों के लिए स्थगित कर दो जब तक वे शांति से न हो जाएं'।"
इमाम मलिक : 1415
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ مُسْلِمِ بْنِ أَبِي مَرْيَمَ عَنْ أَبِي صَالِحٍ السَّمَّانِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّهُ قَالَتُعْرَضُ أَعْمَالُ النَّاسِ كُلَّ جُمُعَةٍ مَرَّتَيْنِ يَوْمَ الْاثْنَيْنِ وَيَوْمَ الْخَمِيسِ فَيُغْفَرُ لِكُلِّ عَبْدٍ مُؤْمِنٍ إِلَّا عَبْدًا كَانَتْ بَيْنَهُ وَبَيْنَ أَخِيهِ شَحْنَاءُ فَيُقَالُ اتْرُكُوا هَذَيْنِ حَتَّى يَفِيئَا أَوِ ارْكُوا هَذَيْنِ حَتَّى يَفِيئَا
मुझे मालिक (मुस्लिम बिन अबू मरियम) से (अबू सलीह अस समन) से (अबू हुरैरा) तक वर्णित किया गया, उन्होंने कहा: "लोगों के कर्म सप्ताह में दो बार दिखाए जाएंगे: सोमवार और गुरुवार को। फिर प्रत्येक मोमिन के पाप क्षमा कर दिए जाएंगे, सिवाय उस सेवक के जो अपने भाई से शत्रुता रखता हो, तब कहा जाता है: 'उन दोनों को छोड़ दो जब तक वे लौट न आएं' या 'उन दोनों को छोड़ दो जब तक वे लौट न आएं'।"
इमाम मलिक : 1416
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْأَنْصَارِيِّ أَنَّهُ قَالَخَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي غَزْوَةِ بَنِي أَنْمَارٍ قَالَ جَابِرٌ فَبَيْنَا أَنَا نَازِلٌ تَحْتَ شَجَرَةٍ إِذَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَقْبَلَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَلُمَّ إِلَى الظِّلِّ قَالَ فَنَزَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُمْتُ إِلَى غِرَارَةٍ لَنَا فَالْتَمَسْتُ فِيهَا شَيْئًا فَوَجَدْتُ فِيهَا جِرْوَ قِثَّاءٍ فَكَسَرْتُهُ ثُمَّ قَرَّبْتُهُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ مِنْ أَيْنَ لَكُمْ هَذَا قَالَ فَقُلْتُ خَرَجْنَا بِهِ يَا رَسُولَ اللَّهِ مِنْ الْمَدِينَةِ قَالَ جَابِرٌ وَعِنْدَنَا صَاحِبٌ لَنَا نُجَهِّزُهُ يَذْهَبُ يَرْعَى ظَهْرَنَا قَالَ فَجَهَّزْتُهُ ثُمَّ أَدْبَرَ يَذْهَبُ فِي الظَّهْرِ وَعَلَيْهِ بُرْدَانِ لَهُ قَدْ خَلَقَا قَالَ فَنَظَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَيْهِ فَقَالَ أَمَا لَهُ ثَوْبَانِ غَيْرُ هَذَيْنِ فَقُلْتُ بَلَى يَا رَسُولَ اللَّهِ لَهُ ثَوْبَانِ فِي الْعَيْبَةِ كَسَوْتُهُ إِيَّاهُمَا قَالَ فَادْعُهُ فَمُرْهُ فَلْيَلْبَسْهُمَا قَالَ فَدَعَوْتُهُ فَلَبِسَهُمَا ثُمَّ وَلَّى يَذْهَبُ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا لَهُ ضَرَبَ اللَّهُ عُنُقَهُ أَلَيْسَ هَذَا خَيْرًا لَهُ قَالَ فَسَمِعَهُ الرَّجُلُ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ قَالَ فَقُتِلَ الرَّجُلُ فِي سَبِيلِ اللَّهِو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَ إِنِّي لَأُحِبُّ أَنْ أَنْظُرَ إِلَى الْقَارِئِ أَبْيَضَ الثِّيَابِ
मुझे मलिक [ज़ैद बिन असलम] से [जाबिर बिन अब्दुल्ला अल अंसारी] ने बताया है; "हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ बनी अनमार युद्ध में गए थे।" जाबिर ने कहा; "जब मैं पेड़ के नीचे बैठा था, तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आए। तब मैंने कहा: 'ऐ रसूलुल्लाह, यहाँ आओ और पेड़ के नीचे पनाह लो।' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फिर नीचे आए, जबकि मैं उठा और अपने बोरे के पास गया। मैंने उसमें हाथ डाला, और मुझे एक छोटा खीरा मिला। फिर मैंने उसे काटकर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को दे दिया। "अल्लाह के रसूल, हम उसे मदीना से लाए हैं।" जाबिर ने आगे कहा, "हमारा एक दोस्त था, और हमने उसके लिए खाने-पीने का सामान तैयार किया था ताकि वह हमारे जानवरों की देखभाल करते समय ला सके।" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर उसे देखा और पूछा: 'क्या उसके पास इनके अलावा दो और कपड़े हैं?' मैंने जवाब दिया; "हाँ, अल्लाह के रसूल! उसके बैग में दो कपड़े थे जो मैंने उसे दिए थे।" उसने कहा: 'उसे बुलाओ और कहो कि वह इसे पहन ले।" फिर मैंने उसे बुलाया और उसे कपड़ा पहनने को कहा। मेरा दोस्त फिर मुड़ा और चला गया।" जाबिर ने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अल्लाह उसकी गर्दन काट दे। क्या यह उसके लिए बेहतर नहीं है?" मेरे दोस्त ने अल्लाह के रसूल की बातें सुनीं, फिर उसने कहा, "ऐ अल्लाह के रसूल, क्या यह अल्लाह के रास्ते में है?" उन्होंने जवाब दिया: "अल्लाह के रास्ते में।" जाबिर ने कहा; "तो मेरा दोस्त अल्लाह के रास्ते में मारा गया।" मलिक ने मुझे बताया कि उसके पास खबर आई थी कि उमर बिन खत्ताब ने कहा; "सच में मैं एक कारी को सफेद कपड़े पहने देखना पसंद करूंगा।"
इमाम मलिक : 1417
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَيُّوبَ بْنِ أَبِي تَمِيمَةَ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ قَالَ قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِإِذَا أَوْسَعَ اللَّهُ عَلَيْكُمْ فَأَوْسِعُوا عَلَى أَنْفُسِكُمْ جَمَعَ رَجُلٌ عَلَيْهِ ثِيَابَهُ
मुझे मालिक (अय्यूब बिन अबू तमिमा) से (इब्न सिरीन) रिवायत है कि उन्होंने कहा; (उमर बिन खत्ताब) ने कहा; "अगर अल्लाह तुम्हें भरपूर रिज़्क दे, तो उसे अपने लिए इस्तेमाल करो। एक आदमी अपने लिए कपड़े इकट्ठा करता है (यानी नमाज़ में)।"
इमाम मलिक : 1418
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ يَلْبَسُ الثَّوْبَ الْمَصْبُوغَ بِالْمِشْقِ وَالْمَصْبُوغَ بِالزَّعْفَرَانِ
मुझे मालिक (नफी) से वर्णित है कि अब्दुल्लाह बिन उमर (अब्दुल्ला बिन उमर) मिश्क और ज़ाफरान से रंगे हुए कपड़े पहनते थे।
इमाम मलिक : 1419
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّهَا كَسَتْ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الزُّبَيْرِ مِطْرَفَ خَزٍّ كَانَتْ عَائِشَةُ تَلْبَسُهُ
मुझे मलिक [हिस्याम बिन उरवाह] ने [उनके पिता] से [ऐस्या] पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी से बताया है कि उन्होंने एक बार अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर को रेशम और सूती कपड़े से बना एक कपड़ा पहनाया था। और वह कपड़ा आमतौर पर ऐस्या ही पहनती हैं।
इमाम मलिक : 1420
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ أَبِي عَلْقَمَةَ عَنْ أُمِّهِ أَنَّهَا قَالَتْ دَخَلَتْ حَفْصَةُ بِنْتُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَلَى عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَوَعَلَى حَفْصَةَ خِمَارٌ رَقِيقٌ فَشَقَّتْهُ عَائِشَةُ وَكَسَتْهَا خِمَارًا كَثِيفًا
मलिक ने मुझे [अलकामा बिन अबू अलकामा] से [उनकी माँ] के बारे में बताया था; उन्होंने कहा; "हफ़सा बिन्त अब्दुर्रहमान पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी ऐश्या से मिले, जो एक पतला पर्दा पहने हुए थीं, ['ऐश्या] ने फिर उसे फाड़ दिया और उनके लिए एक मोटा पर्दा डाल दिया।"