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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 Hadith

Hadith

Imam Malik : 1381

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ حِمَاسٍ عَنْ عَمِّهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَتُتْرَكَنَّ الْمَدِينَةُ عَلَى أَحْسَنِ مَا كَانَتْ حَتَّى يَدْخُلَ الْكَلْبُ أَوْ الذِّئْبُ فَيُغَذِّي عَلَى بَعْضِ سَوَارِي الْمَسْجِدِ أَوْ عَلَى الْمِنْبَرِ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ فَلِمَنْ تَكُونُ الثِّمَارُ ذَلِكَ الزَّمَانَ قَالَ لِلْعَوَافِي الطَّيْرِ وَالسِّبَاعِ

याह्या हमरा इब्न हिमास सँ मालिक सँ अबू हुरैरा सँ अपन चाचा सँ बतौलनि जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहलनि: "सत्ते मदीना अपन सब नीक चीजक संग ताबत धरि रहि जायत जाबत धरि कुकुर वा भेड़िया ओहि मे प्रवेश नहि क' मस्जिद वा ओकर मंच केर किछु खंभा पर पेशाब नहि करत." सहाबा पुछलखिन: "हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, ओहि समय फल केकरा लेल होयत?" ओ कहलनि: "चिड़ै-चुनमुनी आ जंगली जानवरक लेल।"

Hadith

Imam Malik : 1382

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَمْرٍو مَوْلَى الْمُطَّلِبِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ طَلَعَ لَهُ أُحُدٌ فَقَالَ هَذَا جَبَلٌ يُحِبُّنَا وَنُحِبُّهُ اللَّهُمَّ إِنَّ إِبْرَاهِيمَ حَرَّمَ مَكَّةَ وَأَنَا أُحَرِّمُ مَا بَيْنَ لَابَتَيْهَا

हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि मालिक स॑ याह्या स॑ [अमरू] स॑ अल मुथल्लिब केरऽ पूर्व दास, [अनस बिन मलिक] स॑ कहलकै, ‘जब॑ उहुद पर्वत क॑ अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ रसूलुल्लाह स॑ देखलऽ गेलै त॑ हुनी कहलकै कि ई पहाड़ छै, जेकरा स॑ वू हमरा स॑ प्रेम करै छै आरू हम्में ओकरा स॑ प्रेम करै छियै । हे अल्लाह, सचमुच इब्राहीम मक्का के मना क देने छैथ, तें हम ओकर दूनू पहाड़ - मदीना - के बीच जे छै ओकरा मना क देलहुं छै.

Hadith

Imam Malik : 1383

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ لَوْ رَأَيْتُ الظِّبَاءَ بِالْمَدِينَةِ تَرْتَعُ مَا ذَعَرْتُهَاقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا بَيْنَ لَابَتَيْهَا حَرَامٌ

हमरा कहल गेल अछि जे [इब्न शिहाब] सँ मलिक [सैद बिन मुसैयब] सँ [अबू हुरैरा] सँ कहलनि; 'जँ हम कोनो हिरण केँ - घासक मैदान मे - मदीना मे भोजन तकैत देखितहुँ त' ओकरा भागि नहि देब, कारण अल्लाह केर रसूलुल्लाह कहने छलाह: 'जे ओकर दुनू पहाड़क बीच अछि से हरम'।'

Hadith

Imam Malik : 1384

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يُونُسَ بْنِ يُوسُفَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ الْأَنْصَارِيِّأَنَّهُ وَجَدَ غِلْمَانًا قَدْ أَلْجَئُوا ثَعْلَبًا إِلَى زَاوِيَةٍ فَطَرَدَهُمْ عَنْهُقَالَ مَالِك لَا أَعْلَمُ إِلَّا أَنَّهُ قَالَ أَفِي حَرَمِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصْنَعُ هَذَا

मलिक हमरा [यूनुस बिन यूसुफ] स [‘अथा बिन यासर] स [अबू अयूब अल अंसारी] स कहलथि जे एक बेर हुनका किछु बच्चा कए भेड़िया कए चरबाह आ भगाबैत भेटल। मलिक कहलनि: 'हमरा सिवाय एहि बातक पता नहि जे अबू हुरैरा कहलनि: की ई अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केर पवित्र क्षेत्र - मदीना मे कयल गेल छल?'

Hadith

Imam Malik : 1385

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ أَنَّهَا قَالَتْلَمَّا قَدِمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَدِينَةَ وُعِكَ أَبُو بَكْرٍ وَبِلَالٌ قَالَتْ فَدَخَلْتُ عَلَيْهِمَا فَقُلْتُ يَا أَبَتِ كَيْفَ تَجِدُكَ وَيَا بِلَالُ كَيْفَ تَجِدُكَ قَالَتْ فَكَانَ أَبُو بَكْرٍ إِذَا أَخَذَتْهُ الْحُمَّى يَقُولُ كُلُّ امْرِئٍ مُصَبَّحٌ فِي أَهْلِهِوَالْمَوْتُ أَدْنَى مِنْ شِرَاكِ نَعْلِهِوَكَانَ بِلَالٌ إِذَا أُقْلِعَ عَنْهُ يَرْفَعُ عَقِيرَتَهُ فَيَقُولُ أَلَا لَيْتَ شِعْرِي هَلْ أَبِيتَنَّ لَيْلَةًبِوَادٍ وَحَوْلِي إِذْخِرٌ وَجَلِيلُوَهَلْ أَرِدَنْ يَوْمًا مِيَاهَ مَجِنَّةٍوَهَلْ يَبْدُوَنْ لِي شَامَةٌ وَطَفِيلُقَالَتْ عَائِشَةُ فَجِئْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخْبَرْتُهُ فَقَالَ اللَّهُمَّ حَبِّبْ إِلَيْنَا الْمَدِينَةَ كَحُبِّنَا مَكَّةَ أَوْ أَشَدَّ وَصَحِّحْهَا وَبَارِكْ لَنَا فِي صَاعِهَا وَمُدِّهَا وَانْقُلْ حُمَّاهَا فَاجْعَلْهَا بِالْجُحْفَةِقَالَ مَالِك و حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ أَنَّ عَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ وَكَانَ عَامِرُ بْنُ فُهَيْرَةَ يَقُولُ قَدْ رَأَيْتُ الْمَوْتَ قَبْلَ ذَوْقِهِإِنَّ الْجَبَانَ حَتْفُهُ مِنْ فَوْقِهِ

ई हमरा मलिक सं [हिशाम बिन उर्वाह] सं [अपन पिता] सं [आइशा] उम्मूल मुमिनिन सं कहल गेल अछि, ओ बजलीह; 'जखन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम मदीना पहुंचलाह त अबू बकर आ बिलाल के बोखार भ गेलनि'। ऐशा बजलीह; 'तखन हम हुनका सभ लग गेलहुँ।' हम कहलियनि: ‘हे हमर पिता, अहाँ केहन छी? हे बिलाल केहन छी ?' ओ जोड़लीह; 'जखन अबू बकर पर बोखार लागल छल तखन ओ कहैत छलाह: 'हर आत्मा भोरे-भोर अपन परिवारक सोझाँ जागि जाइत अछि, भले ओकर चप्पल केर पट्टा सँ मृत्यु बेसी नजदीक हो।' रहल बात बिलाल के जखन बोखार स उबरला पर ओ आवाज उठौलनि आ बजलाह: ‘हे, जँ कियो हमर कविता सुनत त’ की हम आइ राति ओहि घाटी मे रहब जाहि मे चारू कात इदखीर गाछ आ जलील गाछ हो? आ की हम एक दिन मजिन्नाक पानि लग आबि जायब आकि शमाह आ थाफिल हमरा प्रकट हेताह?' ऐशा बजलीह; 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास जा क हुनका सूचित केलियैन।' तखन ओ प्रार्थना केलनि जे हे अल्लाह, हमरा सभ केँ मदीना सँ ओतबे प्रेम करू जतेक मक्का सँ प्रेम करैत छी, वा एहि सँ प्रेम केँ बेसी बनाउ। हमरा सभक शा' आ थाल मे आशीर्वाद दिअ, आ बोखार केँ जुहफा दिस बढ़ाउ,' मलिक बाजल; याह्या बिन सैद हमरा कहलनि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी आइशा कहलनि; अमीर बिन फुहैराह कहलनि; 'हम मृत्युक स्वाद लेबासँ पहिने देखलहुँ, सचमुच कायरक मृत्यु ओकर ऊपरसँ होइत छैक' ।

Hadith

Imam Malik : 1386

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نُعَيْمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْمُجْمِرِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى أَنْقَابِ الْمَدِينَةِ مَلَائِكَةٌ لَا يَدْخُلُهَا الطَّاعُونُ وَلَا الدَّجَّالُ

हमरा मलिक स [नुआइम बिन अब्दुल्लाह अल मुजमीर] स [अबू हुरैरा] स कहल गेल अछि कहल गेल अछि; 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: मदीना के हर गली में फरिश्ता छथि जाहि सं थाउन के बीमारी नहिं घुसि सकैत अछि, आ ने दज्जाल'.

Hadith

Imam Malik : 1387

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أَبِي حَكِيمٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِ يَقُولُكَانَ مِنْ آخِرِ مَا تَكَلَّمَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ قَالَ قَاتَلَ اللَّهُ الْيَهُودَ وَالنَّصَارَى اتَّخَذُوا قُبُورَ أَنْبِيَائِهِمْ مَسَاجِدَ لَا يَبْقَيَنَّ دِينَانِ بِأَرْضِ الْعَرَبِ

मलिक हमरा [इस्माइल बिन अबू हकीम] स कहलनि जे ओ एक बेर [उमर बिन अब्दुल अजीज] के कहैत सुनने छलाह, ‘नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अंतिम कहावत मे स एकटा छल: ‘अल्लाह यहूदी आ ईसाई के नाश करथि। अपन पैगम्बर के कब्र के मस्जिद बना देलखिन। अरब मे दू टा धर्म नहि होयत'।

Hadith

Imam Malik : 1388

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَجْتَمِعُ دِينَانِ فِي جَزِيرَةِ الْعَرَبِقَالَ مَالِك قَالَ ابْنُ شِهَابٍ فَفَحَصَ عَنْ ذَلِكَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ حَتَّى أَتَاهُ الثَّلْجُ وَالْيَقِينُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَجْتَمِعُ دِينَانِ فِي جَزِيرَةِ الْعَرَبِ فَأَجْلَى يَهُودَ خَيْبَرَ

हमरा मलिक स [इब्न शिहाब] स कहल गेल अछि जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे अरब प्रायद्वीप मे दूटा शिक्षा एक संग नहि आओत। मालिक बजलाह; [इब्न शिहाब] कहलनि; ' [उमर बिन खत्ताब] न॑ एकरा बारे म॑ जांच करलकै जब॑ तलक कि ओकरा पक्का नै होय गेलै कि अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै: 'अरब प्रायद्वीप म॑ दू शिक्षा एक साथ नै आबै वाला छै'' । तखन ओ खैबर सँ यहूदी सभ केँ भगा देलनि।

Hadith

Imam Malik : 1389

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ طَلَعَ لَهُ أُحُدٌ فَقَالَ هَذَا جَبَلٌ يُحِبُّنَا وَنُحِبُّهُ

ई हमरा मलिक स॑ [हिस्याम बिन उर्वाह] स॑ [हुनकरऽ पिता] स॑ बतैलऽ गेलऽ छै जे कहलकै कि जब॑ उहुद पर्वत क॑ अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ देखल॑ छेलै त॑ हुनी कहलकै कि ई एगो पहाड़ छै जे हमरा स॑ प्रेम करै छै आरू हम्में एकरा स॑ प्रेम करै छियै’ ।

Hadith

Imam Malik : 1390

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ أَنَّ أَسْلَمَ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ أَخْبَرَهُأَنَّهُ زَارَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَيَّاشٍ الْمَخْزُومِيَّ فَرَأَى عِنْدَهُ نَبِيذًا وَهُوَ بِطَرِيقِ مَكَّةَ فَقَالَ لَهُ أَسْلَمُ إِنَّ هَذَا الشَّرَابَ يُحِبُّهُ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَحَمَلَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَيَّاشٍ قَدَحًا عَظِيمًا فَجَاءَ بِهِ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَوَضَعَهُ فِي يَدَيْهِ فَقَرَّبَهُ عُمَرُ إِلَى فِيهِ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ فَقَالَ عُمَرُ إِنَّ هَذَا لَشَرَابٌ طَيِّبٌ فَشَرِبَ مِنْهُ ثُمَّ نَاوَلَهُ رَجُلًا عَنْ يَمِينِهِ فَلَمَّا أَدْبَرَ عَبْدُ اللَّهِ نَادَاهُ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَقَالَ أَأَنْتَ الْقَائِلُ لَمَكَّةُ خَيْرٌ مِنْ الْمَدِينَةِ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ فَقُلْتُ هِيَ حَرَمُ اللَّهِ وَأَمْنُهُ وَفِيهَا بَيْتُهُ فَقَالَ عُمَرُ لَا أَقُولُ فِي بَيْتِ اللَّهِ وَلَا فِي حَرَمِهِ شَيْئًا ثُمَّ قَالَ عُمَرُ أَأَنْتَ الْقَائِلُ لَمَكَّةُ خَيْرٌ مِنْ الْمَدِينَةِ قَالَ فَقُلْتُ هِيَ حَرَمُ اللَّهِ وَأَمْنُهُ وَفِيهَا بَيْتُهُ فَقَالَ عُمَرُ لَا أَقُولُ فِي حَرَمِ اللَّهِ وَلَا فِي بَيْتِهِ شَيْئًا ثُمَّ انْصَرَفَ

हमरा अब्दुररहमान बिन अल कासिम स याह्या बिन सैद स मालिक स इ बात कहल गेल जे उमर बिन खट्टाब क पूर्व गुलाम असलम हुनका कहलथि जे ओ अब्दुल्लाह बिन अयासी अल मखजुमी क दौरा केलथि। जखन ओ मक्काक सड़क पर छलाह तखन हुनका नबी सभक रस ल' क' चलैत देखलनि। तखन असलम हुनका कहलथिन्ह : 'ई एकटा एहन पेय अछि जे उमर बिन खट्टब केँ नीक लगैत छनि।' तेँ अब्दुल्ला बिन अयासी एकटा पैघ गिलास लऽ कऽ उमर बिन खट्टाब लग अनलनि । उमर तखन हाथ मे राखि मुँह मे आनि लेलक, फेर माथ उठौलक आ कहलक जे ई सचमुच स्वादिष्ट पेय अछि। उमर तखन पीबि एकटा आदमी के द देलखिन जे हुनकर दहिना कात छल। अब्दुल्ला जखन जा रहल छलाह तखन उमर बिन खट्टाब हुनका बजा क पुछलखिन: 'की अहाँ ओ छी जे कहने रही जे मक्का मदीना स नीक अछि?' [अब्दुल्लाह] कहलनि: 'त हम जवाब देलियनि: 'ई अल्लाह केर पवित्र भूमि थिक, जे एकर सुरक्षाक गारंटी दैत छथि, आ एहि मे हुनकर घर छनि।' उमर कहलनि: 'हम ई नहि कहैत छी जे अल्लाह के घर आ हुनकर पवित्र भूमि में कोनो -महिमा-'. तखन उमर पुछलखिन; 'अहाँ ओ छी जे कहने रही जे मक्का मदीना सँ नीक अछि? ' तेँ हम उत्तर देलियनि; 'ई अल्लाह केरऽ पवित्र भूमि छै, जे एकरऽ सुरक्षा के गारंटी दै छै, आरू ओकरा में ओकरऽ घर छै' । उमर तखन फेर कहलनि; 'हम ई नहि कहैत छी जे अल्लाहक घर आ हुनक पवित्र भूमि मे कोनो -महिमा-'। तकर बाद ओ चलि गेलाह'।

Hadith

Imam Malik : 1391

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَبْدِ الْحَمِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ زَيْدِ بْنِ الْخَطَّابِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ نَوْفَلٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ خَرَجَ إِلَى الشَّامِ حَتَّى إِذَا كَانَ بِسَرْغَ لَقِيَهُ أُمَرَاءُ الْأَجْنَادِ أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِ وَأَصْحَابُهُ فَأَخْبَرُوهُ أَنَّ الْوَبَأَ قَدْ وَقَعَ بِأَرْضِ الشَّامِ قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ ادْعُ لِي الْمُهَاجِرِينَ الْأَوَّلِينَ فَدَعَاهُمْ فَاسْتَشَارَهُمْ وَأَخْبَرَهُمْ أَنَّ الْوَبَأَ قَدْ وَقَعَ بِالشَّامِ فَاخْتَلَفُوا فَقَالَ بَعْضُهُمْ قَدْ خَرَجْتَ لِأَمْرٍ وَلَا نَرَى أَنْ تَرْجِعَ عَنْهُ وَقَالَ بَعْضُهُمْ مَعَكَ بَقِيَّةُ النَّاسِ وَأَصْحَابُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَا نَرَى أَنْ تُقْدِمَهُمْ عَلَى هَذَا الْوَبَإِ فَقَالَ عُمَرُ ارْتَفِعُوا عَنِّي ثُمَّ قَالَ ادْعُ لِي الْأَنْصَارَ فَدَعَوْتُهُمْ فَاسْتَشَارَهُمْ فَسَلَكُوا سَبِيلَ الْمُهَاجِرِينَ وَاخْتَلَفُوا كَاخْتِلَافِهِمْ فَقَالَ ارْتَفِعُوا عَنِّي ثُمَّ قَالَ ادْعُ لِي مَنْ كَانَ هَاهُنَا مِنْ مَشْيَخَةِ قُرَيْشٍ مِنْ مُهَاجِرَةِ الْفَتْحِ فَدَعَوْتُهُمْ فَلَمْ يَخْتَلِفْ عَلَيْهِ مِنْهُمُ رَجُلَانِ فَقَالُوا نَرَى أَنْ تَرْجِعَ بِالنَّاسِ وَلَا تُقْدِمَهُمْ عَلَى هَذَا الْوَبَإِ فَنَادَى عُمَرُ فِي النَّاسِ إِنِّي مُصْبِحٌ عَلَى ظَهْرٍ فَأَصْبِحُوا عَلَيْهِ فَقَالَ أَبُو عُبَيْدَةَ أَفِرَارًا مِنْ قَدَرِ اللَّهِ فَقَالَ عُمَرُ لَوْ غَيْرُكَ قَالَهَا يَا أَبَا عُبَيْدَةَ نَعَمْ نَفِرُّ مِنْ قَدَرِ اللَّهِ إِلَى قَدَرِ اللَّهِ أَرَأَيْتَ لَوْ كَانَ لَكَ إِبِلٌ فَهَبَطَتْ وَادِيًا لَهُ عُدْوَتَانِ إِحْدَاهُمَا خَصِبَةٌ وَالْأُخْرَى جَدْبَةٌ أَلَيْسَ إِنْ رَعَيْتَ الْخَصِبَةَ رَعَيْتَهَا بِقَدَرِ اللَّهِ وَإِنْ رَعَيْتَ الْجَدْبَةَ رَعَيْتَهَا بِقَدَرِ اللَّهِفَجَاءَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ وَكَانَ غَائِبًا فِي بَعْضِ حَاجَتِهِ فَقَالَ إِنَّ عِنْدِي مِنْ هَذَا عِلْمًا سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِذَا سَمِعْتُمْ بِهِ بِأَرْضٍ فَلَا تَقْدَمُوا عَلَيْهِ وَإِذَا وَقَعَ بِأَرْضٍ وَأَنْتُمْ بِهَا فَلَا تَخْرُجُوا فِرَارًا مِنْهُ قَالَ فَحَمِدَ اللَّهَ عُمَرُ ثُمَّ انْصَرَفَ

ई हमरा स॑ मलिक स॑ [इब्न सिहाब] स॑ [अब्दुल हामिद बिन अब्दुररहमान बिन जैद बिन अल खत्ताब] स॑ [अब्दुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन अल हरिथ बिन नौफल] स॑ [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] स॑ बतैलकै, ‘उमर बिन खत्ताब सीरिया लेली निकललै, फेरू जब॑ सरघा नाम केरऽ क्षेत्र म॑ पहुँचलै त॑ सैनिकऽ के सेनापति अबू उबैदा बिन जर्राह आरू साथी सिनी, ओकरा स॑ मिललै आरू ओकरा सूचित करलकै कि सीरिया केरऽ इलाका वहाब बीमारी स॑ संक्रमित छै । इब्न अब्बास कहलनि; 'तखन [उमर बिन खट्टाब] कहलनि; 'प्रवासी मे पहिल हमरा बजाउ।' तखन साथी सब के बजाओल गेलै, तखन उमर स परामर्श क जानकारी देलखिन जे सीरिया के क्षेत्र महामारी स संक्रमित भ गेल छै। दुनूक मतभेद सेहो छल, किछु गोटे कहलनि; 'अहाँ कोनो आवश्यकताक लेल बाहर गेल छी, हमरा सभकेँ लगैत अछि जे अहाँकेँ वापसी करबाक आवश्यकता नहि अछि ।' आ किछु आन लोक कहलनि; 'अहाँ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के किछु लोक आ किछु सहाबा के संग छी।' हमरा सभकेँ लगैत अछि जे अहाँ सभ हुनका सभकेँ एहि प्लेगक सामना नहि करबाक चाही।' उमर बजलाह - बाहर जाउ, ओ कहलनि: 'हमरा अंसार बजाउ।' हम हुनका सभकेँ फोन केलियनि, आ ओ हुनका सभसँ परामर्श केलनि, जखन कि दुनू गोटे मुहाजिरीन जकाँ बहस करैत छलाह आ हुनका सभ जकाँ मतभेद करैत छलाह । उमर बजलाह: 'बाहर जाउ,' ओ कहलनि: 'हमरा एतय जे कियो कुरैशक बुजुर्ग छल आ जे मक्का पर विजयक समय प्रवास केने हो, ओकरा बजाउ।' हम हुनका फोन केलियनि आ दू गोटे के छोड़ि कियो मे मतभेद नहि भेलनि। ओ सभ कहलक: 'हमरा सभकेँ लगैत अछि जे अहाँ सभ लोकक संग घुरि जाउ आ ओकरा एहि प्लेगक सामना नहि करू।' उमर लोक सभ केँ आवाज देलनि: 'सत्ते, हम भोरे काठी पर उठब, भोरे ओहि पर उठब।' अबू उबैदा पुछलखिन: 'की अहाँ अल्लाह के फरमान स भागि रहल छी?' उमर जवाब देलखिन: ‘जँ अहाँ नहि रहितहुँ जे ई बात कहने रहितहुँ, हे अबू उबैदा! हँ, हम सब अल्लाह के किस्मत स भागि क अल्लाह के दोसर किस्मत में जा रहल छी। अहाँ के की लगैत अछि, जँ अहाँ लग एकटा ऊँट अछि आ अहाँ कोनो एहन घाटी मे आबि गेल छी जाहि मे दू टा इलाका हो, एकटा उपजाऊ आ दोसर सूखल, त की अहाँ केँ बुझल अछि जे जँ अहाँ ओकरा उपजाऊ स्थान पर ल' जायब त' अहाँ ओकरा अल्लाह केर भाग्यक संग अनने छी। जँ अहाँ एकरा शुष्क स्थान पर ल' जाउ तखन अहाँ एकरा अल्लाह केर नियति सेहो ल' क' अनने छी।' तखन [अब्दुररहमान बिन औफ] आबि गेलाह, कोनो बातक कारणेँ अनुपस्थित छलाह | ओ कहलनि; 'हमरा एहि बातक खबरि अल्लाह केर रसूलुल्लाह शल्लाह अलैहि वसल्लम सँ भेटल अछि ओ कहलनि: 'जँ अहाँ कोनो भूमि पर महामारी सँ त्रस्त होयबाक बात सुनैत छी, तखन ओहि ठाम नहि जाउ, मुदा जँ अहाँ ओहि मे रहैत कोनो जमीन पर प्रहार करैत अछि, तखन ओकरा छोड़ि नहि जाउ आ ओहि सँ भागू।' - इब्न अब्बास र.अ.- कहलनि; 'तखन उमर अल्लाहक स्तुति क' क' चलि गेलाह।'

Hadith

Imam Malik : 1392

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ وَعَنْ سَالِمٍ أَبِي النَّضْرِ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ عَامِرِ بْنِ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ سَمِعَهُ يَسْأَلُ أُسَامَةَ بْنَ زَيْدٍمَا سَمِعْتَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الطَّاعُونِ فَقَالَ أُسَامَةُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الطَّاعُونُ رِجْزٌ أُرْسِلَ عَلَى طَائِفَةٍ مِنْ بَنِي إِسْرَائِيلَ أَوْ عَلَى مَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ فَإِذَا سَمِعْتُمْ بِهِ بِأَرْضٍ فَلَا تَدْخُلُوا عَلَيْهِ وَإِذَا وَقَعَ بِأَرْضٍ وَأَنْتُمْ بِهَا فَلَا تَخْرُجُوا فِرَارًا مِنْهُقَالَ مَالِك قَالَ أَبُو النَّضْرِ لَا يُخْرِجُكُمْ إِلَّا فِرَارٌ مِنْهُ

हमरा मलिक स [मुहम्मद बिन अल मुनकदीर] स आ उमर बिन उबैदुल्लाह के पूर्व दास [अमीर बिन अबू वक्कास] स [सलीम अबू नदलर] स हुनकर पिता स कहल गेल अछि, जे ओ अपन पिता स उसामाह बिन जैद स पूछैत सुनलथि जे ‘अहाँ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स थाऊन क बारे मे की सुनलहुं रोग?' [उसामाह] जवाब देलकै, 'रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलकै: 'थ'उन एगो ऐसनऽ यातना छै जे अल्लाह बनी इस्राइल के लोगऽ के समूह के पास भेजलकै, या तोरा स॑ पहलऽ के लोगऽ क॑ । जँ सुनब जे कोनो देश मे अछि तखन ओहि मे प्रवेश नहि करू। आ जँ रोग ओहि भूमि मे अछि जतय अहाँ रहैत छी तखन बाहर जा कए ओकरा सँ भागि नहि जाउ'। मालिक बजलाह; अबू नडलर कहलनि; 'अहाँकेँ कियो बाहर नहि निकाललक सिवाय -कियैक जे अहाँ चाहैत छलहुँ- एहिसँ भागब' ।

Hadith

Imam Malik : 1393

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَامِرِ بْنِ رَبِيعَةَأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ خَرَجَ إِلَى الشَّامِ فَلَمَّا جَاءَ سَرْغَ بَلَغَهُ أَنَّ الْوَبَأَ قَدْ وَقَعَ بِالشَّامِ فَأَخْبَرَهُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا سَمِعْتُمْ بِهِ بِأَرْضٍ فَلَا تَقْدَمُوا عَلَيْهِ وَإِذَا وَقَعَ بِأَرْضٍ وَأَنْتُمْ بِهَا فَلَا تَخْرُجُوا فِرَارًا مِنْهُ فَرَجَعَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ مِنْ سَرْغَو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ إِنَّمَا رَجَعَ بِالنَّاسِ مِنْ سَرْغَ عَنْ حَدِيثِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ

हमरा [इब्न शिहाब] स मालिक स [अब्दुल्लाह बिन अमीर बिन रबियाह] स कहल गेल छल जे उमर बिन खत्ताब सीरिया निकलल छलाह, आ जखन सरघा पहुंचलाह त सीरिया मे महामारी क खबर पसरि गेल छल। तखन [अब्दुररहमान बिन औफ] हुनका सूचित केलनि जे अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहलनि: ‘जँ अहाँ कोनो देश मे महामारी के खबरि सुनब त’ ओहि मे प्रवेश नहि करू। जँ कोनो देश मे अछि आ अहाँ ओहि मे छी तँ ओहि सँ नहि भागू।' तखन उमर बिन खट्टब सरघा छोड़ि देलनि। हमरा [इब्न शिहाब] स मालिक स [सलीम बिन अब्दुल्लाह] स कहल गेल जे उमर बिन खट्टाब जनता क संग वापस आबि गेलाह आ अब्दुररहमान बिन औफ क कहला क कारण सरघा छोड़ि देलथि।

Hadith

Imam Malik : 1394

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تَحَاجَّ آدَمُ وَمُوسَى فَحَجَّ آدَمُ مُوسَى قَالَ لَهُ مُوسَى أَنْتَ آدَمُ الَّذِي أَغْوَيْتَ النَّاسَ وَأَخْرَجْتَهُمْ مِنْ الْجَنَّةِ فَقَالَ لَهُ آدَمُ أَنْتَ مُوسَى الَّذِي أَعْطَاهُ اللَّهُ عِلْمَ كُلِّ شَيْءٍ وَاصْطَفَاهُ عَلَى النَّاسِ بِرِسَالَتِهِ قَالَ نَعَمْ قَالَ أَفَتَلُومُنِي عَلَى أَمْرٍ قَدْ قُدِّرَ عَلَيَّ قَبْلَ أَنْ أُخْلَقَ

हमरा मलिक स [अबू अज़ जिनाद] स [अल अ'राज] स [अबू हुरैरा] स कहल गेल अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे आदम आ मूसा एक दोसर स बहस केलथि, फेर आदम मूसा कए हरा देलथि। मूसा हुनका कहलथिन; 'अहाँ आदम छी, जे मनुष्य केँ भटका देलक आ ओकरा जन्नत सँ भगा देलियैक! ' तखन आदम मूसा सँ पुछलखिन; 'अहाँ मूसा छी, जेकरा अल्लाह सब चीज के ज्ञान देलखिन, आ अपन संदेश के संग मनुक्ख पर चुनल गेल आदमी छी? ' मूसा उत्तर देलथिन; 'सही'। आदम तखन कहलनि; "की अहाँ हमरा ओहि बात पर डाँटय जा रहल छी जे हमर भाग्य मे लिखल छल, हमर सृष्टि सँ पहिने?"

Hadith

Imam Malik : 1395

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَبِي أُنَيْسَةَ عَنْ عَبْدِ الْحَمِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ زَيْدِ بْنِ الْخَطَّابِ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ عَنْ مُسْلِمِ بْنِ يَسَارٍ الْجُهَنِيِّ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِسُئِلَ عَنْ هَذِهِ الْآيَةِ{ وَإِذْ أَخَذَ رَبُّكَ مِنْ بَنِي آدَمَ مِنْ ظُهُورِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَأَشْهَدَهُمْ عَلَى أَنْفُسِهِمْ أَلَسْتُ بِرَبِّكُمْ قَالُوا بَلَى شَهِدْنَا أَنْ تَقُولُوا يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِنَّا كُنَّا عَنْ هَذَا غَافِلِينَ }فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُسْأَلُ عَنْهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى خَلَقَ آدَمَ ثُمَّ مَسَحَ ظَهْرَهُ بِيَمِينِهِ فَاسْتَخْرَجَ مِنْهُ ذُرِّيَّةً فَقَالَ خَلَقْتُ هَؤُلَاءِ لِلْجَنَّةِ وَبِعَمَلِ أَهْلِ الْجَنَّةِ يَعْمَلُونَ ثُمَّ مَسَحَ ظَهْرَهُ فَاسْتَخْرَجَ مِنْهُ ذُرِّيَّةً فَقَالَ خَلَقْتُ هَؤُلَاءِ لِلنَّارِ وَبِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ يَعْمَلُونَ فَقَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَفِيمَ الْعَمَلُ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ إِذَا خَلَقَ الْعَبْدَ لِلْجَنَّةِ اسْتَعْمَلَهُ بِعَمَلِ أَهْلِ الْجَنَّةِ حَتَّى يَمُوتَ عَلَى عَمَلٍ مِنْ أَعْمَالِ أَهْلِ الْجَنَّةِ فَيُدْخِلُهُ رَبُّهُ الْجَنَّةَ وَإِذَا خَلَقَ الْعَبْدَ لِلنَّارِ اسْتَعْمَلَهُ بِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ حَتَّى يَمُوتَ عَلَى عَمَلٍ مِنْ أَعْمَالِ أَهْلِ النَّارِ فَيُدْخِلُهُ رَبُّهُ النَّارَو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تَرَكْتُ فِيكُمْ أَمْرَيْنِ لَنْ تَضِلُّوا مَا تَمَسَّكْتُمْ بِهِمَا كِتَابَ اللَّهِ وَسُنَّةَ نَبِيِّهِ

याह्या हमरा मलिक स [जैद बिन अबू उनैसा] स [अब्दुल हामिद बिन अब्दुररहमान बिन जैद बिन अल खत्ताब] स कहने छथि जे ओ हुनका रिपोर्ट केलथि अछि, [मुस्लिम बिन यासर अल जुहानी] स जे [उमर बिन खत्ताब] स इ आयत पूछल गेल छल: '-आ -याद राखू-, जखन अहाँक प्रभु आदम क बेटा क संतान कए ओकर मांस स पैदा केलथि आ अल्लाह क लेलथि हुनका लोकनिक आत्माक गवाही -कहैत-: 'की हम अहाँक प्रभु नहि छी?' ओ सभ उत्तर देलक: 'हँ -अहाँ हमर सभक प्रभु छी-, हम सभ गवाह छी'। -हम सभ ई करैत छी- ताकि कयामतक दिन अहाँ ई नहि कहब: 'सत्ते, हम सभ -आदमक संतान- सभ छलहुँ जे एहि -परमेश् वरक एकता- सँ लापरवाह छलहुँ-' -प्र. अल अ'रफ : 172- उमर कहलनि, 'हम सुनने रही जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एहि आयत के बारे मे पूछलखिन्ह, त ओ जवाब देलखिन्ह; 'सत्ते अल्लाह तबराका व त'ला आदम के रचना केलनि आ फेर ओकर दहिना हाथ सँ ओकर पीठ रगड़लनि, अल्लाह हुनका सँ कतेको वंशज निकालि देलनि।' तखन ओ कहलनि; 'हम स्वर्गक लेल बनौने छी आ स्वर्गक विशेषज्ञक कर्म सँ नीक काज करैत छथि' । तखन अल्लाह फेर आदम के पीठ रगड़लक आ ओकरा सं संतान पैदा केलक। तखन अल्लाह कहलनि; 'हम नरकक लेल बनौने छी, आ ओ सभ नरकक विशेषज्ञक कर्मसँ नीक काज करैत छथि' । एक आदमी तखन पुछलकै, 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, तखन हम सब दान-पुण्य कियैक करैत छी?' रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: ‘जँ अल्लाह स्वर्गक लोक सँ कोनो नौकर बनौलनि त’ ओकरा स्वर्गक लोकक कर्म मे रोजगार देलनि, जाहि सँ ओ स्वर्गक लोकक कर्म पर मरि गेलाह, आ तखन हुनकर रब्ब ओकरा स्वर्ग मे राखि देलनि। आ जँ ओ नरकक विशेषज्ञ सेवकक निर्माण करैत छथि तँ ओकरा नरकक विशेषज्ञक कर्मसँ ताबत धरि रोजगार दैत छथि जाबत धरि ओ नरकक विशेषज्ञक कर्मसँ मरि नहि जाइत छथि | तखन ओकर प्रभु ओकरा नरक मे फेकि देलकैक'। हमरा मलिक सँ कहल गेल अछि जे हुनका लग ई बात आयल अछि जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे हम अहाँ सभक लेल दू टा बात छोड़ि देने छी जे जा धरि अहाँ सभ ओकरा पकड़ने रहब ता धरि अहाँ सभ भटकब नहि; अल्लाह की किताब और उनके नबी की सुन्नत'।

Hadith

Imam Malik : 1396

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زِيَادِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُسْلِمٍ عَنْ طَاوُسٍ الْيَمَانِيِّ أَنَّهُ قَالَ أَدْرَكْتُ نَاسًا مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُونَ كُلُّ شَيْءٍ بِقَدَرٍ قَالَ طَاوُسٌ وَسَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كُلُّ شَيْءٍ بِقَدَرٍ حَتَّى الْعَجْزِ وَالْكَيْسِ أَوْ الْكَيْسِ وَالْعَجْزِ

हमरा मलिक स याह्या [जियाद बिन सअद] स ['अमर बिन मुस्लिम] स [थाउस अल यमानी] स कहलक अछि; 'हमरा रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के किछु साथी भेटलनि जे कहैत छथि; 'सब किछु भाग्य सँ होइत छैक'। थावस बाजल; 'आ हम [अब्दुल्लाह बिन उमर] के इहो कहैत सुनने रही जे 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: सब किछु कमजोरी आ बुद्धि, या बुद्धि आ कमजोरी धरि भाग्य सँ होइत अछि'।

Hadith

Imam Malik : 1397

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زِيَادِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الزُّبَيْرِ يَقُولُ فِي خُطْبَتِهِإِنَّ اللَّهَ هُوَ الْهَادِي وَالْفَاتِنُ

हमरा [जियाद बिन सअद] स मालिक [अमरू बिन दिनार] स कहलक छल; 'हम [अब्दुल्ला बिन जुबैर] के अपन प्रवचन में कहैत सुनने रही; 'अल्लाह सबसँ बेसी मार्गदर्शक आ सबसँ बेसी मानहानि देबय वाला छथि'।

Hadith

Imam Malik : 1398

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَمِّهِ أَبِي سُهَيْلِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ قَالَ كُنْتُ أَسِيرُ مَعَ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِفَقَالَ مَا رَأْيُكَ فِي هَؤُلَاءِ الْقَدَرِيَّةِ فَقُلْتُ رَأْيِي أَنْ تَسْتَتِيبَهُمْ فَإِنْ تَابُوا وَإِلَّا عَرَضْتَهُمْ عَلَى السَّيْفِ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ وَذَلِكَ رَأْيِيقَالَ مَالِك وَذَلِكَ رَأْيِي

हमरा मालिक सँ अपन काका [अबू सुहैल बिन मलिक] सँ कहने छलाह जे कहलनि; 'हम उमर बिन अब्दुल अजीज के संग घुमि रहल छलहुं, तखन ओ पुछलखिन्ह, 'कदरिया लोक के बारे मे अहां के की विचार अछि?' हम उत्तर देलियनि, 'हमर विचारे अहाँ हुनका सभ केँ पश्चाताप करबाक लेल कहब, जँ ओ सभ नहि चाहैत छथि -अहाँ सभ स्वीकार करब-, मुदा जँ नहि तखन अहाँ हुनका सभक लेल अपन तलवार निकालब'। [उमर बिन अब्दुल अजीज] कहलनि; 'हमर सेहो इएह विचार अछि'। मालिक बजलाह; 'हमर सेहो इएह विचार अछि'।

Hadith

Imam Malik : 1399

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَسْأَلْ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا لِتَسْتَفْرِغَ صَحْفَتَهَا وَلِتَنْكِحَ فَإِنَّمَا لَهَا مَا قُدِّرَ لَهَا

हमरा [अबू अज़ जिनाद] स मालिक स [अबू हुरैरा] स [अल अ'राज] स रिवायत अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे महिला कए अपन बहिन स तलाक नहि मांगबाक चाही ताकि ओ ‘अपन थाली खाली क’ क विवाह क सकथि, किया कि ओकरा लेल ओ अछि जे ओकरा लेल किस्मत मे लिखल गेल अछि’।

Hadith

Imam Malik : 1400

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ زِيَادٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ كَعْبٍ الْقُرَظِيِّ قَالَ قَالَ مُعَاوِيَةُ بْنُ أَبِي سُفْيَانَ وَهُوَ عَلَى الْمِنْبَرِأَيُّهَا النَّاسُ إِنَّهُ لَا مَانِعَ لِمَا أَعْطَى اللَّهُ وَلَا مُعْطِيَ لِمَا مَنَعَ اللَّهُ وَلَا يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْهُ الْجَدُّ مَنْ يُرِدْ اللَّهُ بِهِ خَيْرًا يُفَقِّهْهُ فِي الدِّينِ ثُمَّ قَالَ مُعَاوِيَةُ سَمِعْتُ هَؤُلَاءِ الْكَلِمَاتِ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى هَذِهِ الْأَعْوَادِ

हमरा मलिक स [यजीद बिन जियाद] स [मुहम्मद बिन कब अल कुरजी] स कहल गेल अछि जे, ' [मुअवियाह बिन अबू सुफियन] मंच पर कहलनि; 'हे मनुष्य।' सचमुच अल्लाह जे देलनि अछि ताहि मे कोनो बाधा नहि भ सकैत अछि। जे अल्लाह मना केने छथि से कियो नहि द सकैत अछि। धन-सम्पत्ति रखनिहारक धन मे कोनो प्रयोजन नहि। जेकरा अल्लाह भलाई प्राप्त करय चाहैत छथि, अल्लाह ओकरा लेल धार्मिक बात अवश्य बुझताह'। तखन मुअविया कहलनि जे एहि ठामक ऊपर रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ ई बात सुनलहुँ।