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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
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इमाम मलिक (الامام مالك) - 1594 हदीस

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अनुसार मासिक धर्म के खून से सने कपड़ों को कैसे साफ़ करें

इमाम मलिक : 121

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ الْمُنْذِرِ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ أَنَّهَا قَالَتْسَأَلَتْ امْرَأَةٌ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ أَرَأَيْتَ إِحْدَانَا إِذَا أَصَابَ ثَوْبَهَا الدَّمُ مِنْ الْحَيْضَةِ كَيْفَ تَصْنَعُ فِيهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَصَابَ ثَوْبَ إِحْدَاكُنَّ الدَّمُ مِنْ الْحَيْضَةِ فَلْتَقْرُصْهُ ثُمَّ لِتَنْضِحْهُ بِالْمَاءِ ثُمَّ لِتُصَلِّ فِيهِ

मुझे मलिक से [हिस्याम बिन उरवाह] से [उनके पिता] से [फातिमा बिन्त अल मुंदज़िर बिन अज़ ज़ुबैर] से [अस्मा बिन्त अबू बकर अस सिद्दीक] से बताया था, उन्होंने कहा; "एक औरत थी जिसने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा, उन्होंने कहा, "तुम क्या सोचते हो अगर हममें से किसी के कपड़ों पर पीरियड्स का खून लग जाए, तो उसे क्या करना चाहिए?" रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया; "अगर हममें से किसी के कपड़ों पर पीरियड्स का खून लग जाए, तो पहले उसे खुजला ले और उस पर पानी छिड़क दे, फिर वह उससे नमाज़ पढ़ सकती है।"

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फातिमा बिनती हुबैसी को नियमित रक्त और मासिक धर्म के बारे में समझाया

इमाम मलिक : 122

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْقَالَتْ فَاطِمَةُ بِنْتُ أَبِي حُبَيْشٍ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي لَا أَطْهُرُ أَفَأَدَعُ الصَّلَاةَ فَقَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّمَا ذَلِكِ عِرْقٌ وَلَيْسَتْ بِالْحَيْضَةِ فَإِذَا أَقْبَلَتْ الْحَيْضَةُ فَاتْرُكِي الصَّلَاةَ فَإِذَا ذَهَبَ قَدْرُهَا فَاغْسِلِي الدَّمَ عَنْكِ وَصَلِّي

मुझे याह्या के बारे में मलिक [हिस्याम बिन उरवाह] से [उनके पिता] से [ऐस्या] पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी से बताया गया है, उन्होंने कहा, "फातिमा बिन्त हुबैसी ने पूछा, "अल्लाह के रसूल, मैं अभी पवित्र नहीं हुई हूँ, क्या मैं नमाज़ छोड़ सकती हूँ?" पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'यह नॉर्मल खून है और पीरियड्स नहीं। अगर पीरियड्स आ गए हैं तो नमाज़ छोड़ दें। और अगर पीरियड्स खत्म हो गए हैं तो नमाज़ पढ़ें, अपने खून को साफ़ करें और नमाज़ पढ़ें।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने लगातार रक्तस्राव वाली महिलाओं के लिए मासिक धर्म के दिनों की गणना के बारे में फतवा दिया है

इमाम मलिक : 123

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّ امْرَأَةً كَانَتْ تُهَرَاقُ الدِّمَاءَ فِي عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاسْتَفْتَتْ لَهَا أُمُّ سَلَمَةَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ لِتَنْظُرْ إِلَى عَدَدِ اللَّيَالِي وَالْأَيَّامِ الَّتِي كَانَتْ تَحِيضُهُنَّ مِنْ الشَّهْرِ قَبْلَ أَنْ يُصِيبَهَا الَّذِي أَصَابَهَا فَلْتَتْرُكْ الصَّلَاةَ قَدْرَ ذَلِكَ مِنْ الشَّهْرِ فَإِذَا خَلَّفَتْ ذَلِكَ فَلْتَغْتَسِلْ ثُمَّ لِتَسْتَثْفِرْ بِثَوْبٍ ثُمَّ لِتُصَلِّي

मुझे मलिक (नफी) से (सुलेमान बिन यासर) से (उमु सलमा) पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पत्नी (उमु सलमा) से बताया गया है कि पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के समय में एक औरत थी जो लगातार खून बहाती थी। उम्म सलमा ने तब रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से फतवा मांगा, उन्होंने जवाब दिया: "उन्हें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उन्हें आमतौर पर एक महीने में कितने दिन पीरियड्स होते हैं, इससे पहले कि वह अभी जो महसूस कर रही हैं। उसे उस महीने में आमतौर पर जितने दिन पीरियड्स होते हैं, उतने दिन छोड़ देने चाहिए, उसके बाद उसे नहाना चाहिए, कपड़े बदलने चाहिए और नमाज़ पढ़नी चाहिए।"

ज़ैनब बिनती जहसी अभी भी प्रार्थना करती है, भले ही यह अनुभवी इस्तहादा है

इमाम मलिक : 124

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ زَيْنَبَ بِنْتِ أَبِي سَلَمَةَ أَنَّهَا رَأَتْ زَيْنَبَ بِنْتَ جَحْشٍ الَّتِي كَانَتْ تَحْتَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍوَكَانَتْ تُسْتَحَاضُ فَكَانَتْ تَغْتَسِلُ وَتُصَلِّي

मलिक ने मुझे [हिस्याम बिन उरवाह] से [अपने पिता] से [ज़ैनब बिन्त अबू सलामा] से बताया कि उसने [ज़ैनब बिन्त जहसी] को देखा था, जो अब्दुर्रहमान बिन औफ़ की पत्नी थी, जिसके खून बह रहा था और वह अभी भी नमाज़ पढ़ रही थी।"

महिलाएं कैसे हर नमाज़ के लिए स्टाफ़िंग और वुज़ू कर रही हैं

इमाम मलिक : 125

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سُمَيٍّ مَوْلَى أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ الْقَعْقَاعَ بْنَ حَكِيمٍ وَزَيْدَ بْنَ أَسْلَمَ أَرْسَلَاهُ إِلَى سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِيَسْأَلُهُ كَيْفَ تَغْتَسِلُ الْمُسْتَحَاضَةُ فَقَالَ تَغْتَسِلُ مِنْ طُهْرٍ إِلَى طُهْرٍ وَتَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ فَإِنْ غَلَبَهَا الدَّمُ اسْتَثْفَرَتْ

मुझे अबू बक्र बिन अब्दुर्रहमान के पुराने गुलाम [सुमैया] मलिक से बताया गया है कि अल क़ाक़ा बिन हकीम और ज़ैद बिन असलम ने उसे [सईद बिन मुसय्यब] के पास यह पूछने के लिए भेजा कि 'एक औरत कैसे नहाती है?' सईद बिन मुसय्यब ने जवाब दिया; "वह एक पवित्र जगह से दूसरी पवित्र जगह नहाता है, और हर नमाज़ के दौरान वुज़ू करता रहता है। अगर बहुत ज़्यादा खून निकले, तो उसे रोक दे।"

खून बंद होने के बाद महिलाओं के इस्तहादा और निफास के बारे में मलिक का स्पष्टीकरण

इमाम मलिक : 126

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَلَيْسَ عَلَى الْمُسْتَحَاضَةِ إِلَّا أَنْ تَغْتَسِلَ غُسْلًا وَاحِدًا ثُمَّ تَتَوَضَّأُ بَعْدَ ذَلِكَ لِكُلِّ صَلَاةٍقَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك الْأَمْرُ عِنْدَنَا أَنَّ الْمُسْتَحَاضَةَ إِذَا صَلَّتْ أَنَّ لِزَوْجِهَا أَنْ يُصِيبَهَا وَكَذَلِكَ النُّفَسَاءُ إِذَا بَلَغَتْ أَقْصَى مَا يُمْسِكُ النِّسَاءَ الدَّمُ فَإِنْ رَأَتْ الدَّمَ بَعْدَ ذَلِكَ فَإِنَّهُ يُصِيبُهَا زَوْجُهَا وَإِنَّمَا هِيَ بِمَنْزِلَةِ الْمُسْتَحَاضَةِ قَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك الْأَمْرُ عِنْدَنَا فِي الْمُسْتَحَاضَةِ عَلَى حَدِيثِ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ وَهُوَ أَحَبُّ مَا سَمِعْتُ إِلَيَّ فِي ذَلِكَ

मुझे मलिक [हिशाम बिन उरवाह] से [उनके पिता] ने बताया है कि: "एक औरत जो इस्तहादला करती है, उस पर सिर्फ़ एक बार नहाना ज़रूरी है, उसके बाद उसे हर नमाज़ के लिए वज़ू करना ज़रूरी है।" याह्या ने कहा; मलिक ने कहा, "हमारे हिसाब से, अगर कोई औरत जो इस्तहादला करती है, उसने नमाज़ पढ़ ली है, तो उसके पति के लिए उसके साथ संबंध बनाना जाइज़ है। इसी तरह, पोस्टपार्टम ब्लीडिंग वाली औरतों के साथ, अगर ब्लीडिंग उस पॉइंट तक पहुँच गई है जहाँ औरत का ब्लीडिंग बंद हो गया है, और उसके बाद खून निकलता है, तो उसके पति के लिए उसके साथ संबंध बनाना जाइज़ है। और हुक्म उस औरत जैसा है जो इस्तहादला करती है।" याह्या ने कहा; मलिक ने कहा, "इस्तहादला करने वाली औरतों के बारे में हमारा मत वैसा ही है जैसा हिशाम बिन उरवाह की हदीस में उनके पिता से बताया गया है। हमने जो सुना है, उसमें यह सबसे अच्छी है।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बच्चे का पेशाब अपने कपड़ों पर लपेट लिया

इमाम मलिक : 127

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْأُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِصَبِيٍّ فَبَالَ عَلَى ثَوْبِهِ فَدَعَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمَاءٍ فَأَتْبَعَهُ إِيَّاهُ

मुझे मलिक [हिसाम बिन उरवा] से [उनके पिता] से [आयशा] पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी से बताया गया है, उन्होंने कहा, "एक बच्चे को अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सौंपा गया था। फिर बच्चे ने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कपड़ों पर पेशाब कर दिया, फिर उन्होंने पानी से उसे पोंछने के लिए पानी मांगा।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने कपड़ों पर बच्चे का पेशाब फैलाया

इमाम मलिक : 128

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ أُمِّ قَيْسٍ بِنْتِ مِحْصَنٍأَنَّهَا أَتَتْ بِابْنٍ لَهَا صَغِيرٍ لَمْ يَأْكُلْ الطَّعَامَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَجْلَسَهُ فِي حَجْرِهِ فَبَالَ عَلَى ثَوْبِهِ فَدَعَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمَاءٍ فَنَضَحَهُ وَلَمْ يَغْسِلْهُ

मुझे मलिक [इब्न शिहाब] से [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] से [उम्मू क़ैस बिन्त मिहशान] ने बताया है कि वह एक बार अपने बच्चे के साथ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आया, जिसने कुछ भी नहीं खाया था। फिर उसने बच्चे को अपनी गोद में रख लिया, जिससे पेशाब उसके कपड़ों पर लग गया। फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पानी मांगा और बिना धोए उस पर छिड़क दिया।

इस्तेमाल किया हुआ मूत्र कैसे साफ़ करें

इमाम मलिक : 129

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَدَخَلَ أَعْرَابِيٌّ الْمَسْجِدَ فَكَشَفَ عَنْ فَرْجِهِ لِيَبُولَ فَصَاحَ النَّاسُ بِهِ حَتَّى عَلَا الصَّوْتُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اتْرُكُوهُ فَتَرَكُوهُ فَبَالَ ثُمَّ أَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِذَنُوبٍ مِنْ مَاءٍ فَصُبَّ عَلَى ذَلِكَ الْمَكَانِ

याह्या ने मुझे मलिक [याह्या बिन सईद] से बताया कि उन्होंने कहा: "एक बद्दू मस्जिद में घुसा, और उसने पेशाब करने के लिए अपनी पैंट खोली। इस पर, लोग गुस्से में चिल्लाने लगे जब तक कि शोर बहुत तेज़ नहीं हो गया, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "उसे अकेला छोड़ दो!" फिर साथियों ने उसे छोड़ दिया। उसके बाद, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने उन्हें आदेश दिया कि एक बाल्टी पानी लेकर उस जगह पर डालें जहाँ उसने पेशाब किया था।"

अब्दुल्ला बिन उमर खड़े होकर पेशाब करते हैं

इमाम मलिक : 130

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ أَنَّهُ قَالَرَأَيْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ يَبُولُ قَائِمًا

मलिक ने मुझे [अब्दुल्ला बिन दिनार] से बताया था कि उन्होंने कहा; "मैंने एक बार [अब्दुल्ला बिन उमर] को खड़े होकर पेशाब करते देखा था।"

पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने स्नान करने और शुक्रवार की नमाज़ के लिए तैयार होने का आदेश दिया

इमाम मलिक : 131

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ ابْنِ السَّبَّاقِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فِي جُمُعَةٍ مِنْ الْجُمَعِ يَا مَعْشَرَ الْمُسْلِمِينَ إِنَّ هَذَا يَوْمٌ جَعَلَهُ اللَّهُ عِيدًا فَاغْتَسِلُوا وَمَنْ كَانَ عِنْدَهُ طِيبٌ فَلَا يَضُرُّهُ أَنْ يَمَسَّ مِنْهُ وَعَلَيْكُمْ بِالسِّوَاكِ

मुझे याह्या ने मलिक से [इब्न शिहाब] से [इब्न अस सबाक] तक बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक शुक्रवार को कहा: "ऐ मुसलमानों! बेशक, अल्लाह ने इस दिन को छुट्टी का दिन बनाया है, इसलिए तुम्हें नहाना चाहिए। जिसके पास खुशबू हो, तो उसे लगाने में कोई हर्ज नहीं है। और तुम्हें सिवाक पहनना चाहिए।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का हुक्म है कि इसे ऐसे जलाया जाए जैसे कि यह जल नहीं रहा हो

इमाम मलिक : 132

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَوْلَا أَنْ أَشُقَّ عَلَى أُمَّتِي لَأَمَرْتُهُمْ بِالسِّوَاكِ

मुझे मालिक (अबू अज़ ज़िनद) से (अल अरज) से (अबू हुरैरा) से वर्णित किया गया है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: "यदि यह मेरे लोगों पर बोझ न होता, तो मैं वास्तव में उन्हें सिवाक पहनने का आदेश देता।"

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने लोगों से अपेक्षा की कि वे हर वुज़ू करें

इमाम मलिक : 133

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّهُ قَالَلَوْلَا أَنْ يَشُقَّ عَلَى أُمَّتِهِ لَأَمَرَهُمْ بِالسِّوَاكِ مَعَ كُلِّ وُضُوءٍ

मुझे मलिक से [इब्न शिहाब] से [हुमैद बिन अब्दुर्रहमान बिन औफ] से [अबू हुरैरा] से बताया गया है कि उन्होंने कहा; "अगर यह उनके लोगों पर बोझ नहीं होता, तो वह वास्तव में उन्हें हर बार वज़ू करते समय सिवाक करने का आदेश देते।"

अब्दुल्ला बिन ज़ैद ने अदज़ान के बारे में एक सपना देखा और फिर उन्हें रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम को बताया

इमाम मलिक : 134

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ أَرَادَ أَنْ يَتَّخِذَ خَشَبَتَيْنِ يُضْرَبُ بِهِمَا لِيَجْتَمِعَ النَّاسُ لِلصَّلَاةِ فَأُرِيَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدٍ الْأَنْصَارِيُّ ثُمَّ مِنْ بَنِي الْحَارِثِ بْنِ الْخَزْرَجِ خَشَبَتَيْنِ فِي النَّوْمِ فَقَالَ إِنَّ هَاتَيْنِ لَنَحْوٌ مِمَّا يُرِيدُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقِيلَ أَلَا تُؤَذِّنُونَ لِلصَّلَاةِ فَأَتَى رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ اسْتَيْقَظَ فَذَكَرَ لَهُ ذَلِكَ فَأَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالْأَذَانِ

याह्या ने मुझे मलिक से याह्या बिन सईद के बारे में बताया, जिन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) दो छड़ियां लेना चाहते थे जिनसे लोगों को नमाज़ के लिए बुलाया जा सके।" बानी अल हारिथ अल खज़राज के अब्दुल्लाह बिन ज़ैद अल अंसारी ने दो छड़ियां देखने का सपना देखा। उन्होंने कहा, "सच में, ये दो छड़ियां वही हैं जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) चाहते थे!" कहा गया, "क्या तुम नमाज़ के लिए नहीं बुलाते?" जागने के बाद, वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास गए और उन्हें बताया कि उन्होंने अपने सपने में क्या देखा था। फिर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने नमाज़ के लिए बुलाने का आदेश दिया।

अज़ान का उत्तर

इमाम मलिक : 135

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ اللَّيْثِيِّ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا سَمِعْتُمْ النِّدَاءَ فَقُولُوا مِثْلَ مَا يَقُولُ الْمُؤَذِّنُ

मुझे मलिक से बताया गया है [इब्नु शिहाब] से [अथा` बिन यज़ीद अल लैतसी] से [अबू सईद अल खुदरी] रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जब तुम नमाज़ की आवाज़ सुनो, तो इसे वैसे ही कहो जैसे मुअज़्ज़िन ने कहा था।"

रसूलुल्लाह शाल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अदजान और पहले शाफ के महान सवाब को बयान किया

इमाम मलिक : 136

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سُمَيٍّ مَوْلَى أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ السَّمَّانِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَوْ يَعْلَمُ النَّاسُ مَا فِي النِّدَاءِ وَالصَّفِّ الْأَوَّلِ ثُمَّ لَمْ يَجِدُوا إِلَّا أَنْ يَسْتَهِمُوا عَلَيْهِ لَاسْتَهَمُوا وَلَوْ يَعْلَمُونَ مَا فِي التَّهْجِيرِ لَاسْتَبَقُوا إِلَيْهِ وَلَوْ يَعْلَمُونَ مَا فِي الْعَتَمَةِ وَالصُّبْحِ لَأَتَوْهُمَا وَلَوْ حَبْوًا

मुझे मलिक से [सुमय्या] अबू बक्र बिन अब्दुर्रहमान के गुलाम [अबू शालीह अस सम्मन] से [अबू हुरैरा] रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "अगर लोगों को नमाज़ की अज़ान और पहली सफ़ में सवाब पता होता तो वे इसे बिना लॉटरी निकाले नहीं पा सकते थे, वे लॉटरी निकालते। अगर उन्हें (नमाज़ के लिए जल्दी आने का) सवाब पता होता, तो वे ज़रूर मुकाबला करते। अगर उन्हें पता होता कि शाम की नमाज़ और सुबह की नमाज़ में क्या है, तो वे उसमें आते, भले ही उन्हें रेंगना पड़े।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का आदेश है कि नमाज़ के लिए जाते समय शांत रहें

इमाम मलिक : 137

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَعْقُوبَ عَنْ أَبِيهِ وَإِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّهُمَا أَخْبَرَاهُ أَنَّهُمَا سَمِعَا أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا ثُوِّبَ بِالصَّلَاةِ فَلَا تَأْتُوهَا وَأَنْتُمْ تَسْعَوْنَ وَأْتُوهَا وَعَلَيْكُمْ السَّكِينَةُ فَمَا أَدْرَكْتُمْ فَصَلُّوا وَمَا فَاتَكُمْ فَأَتِمُّوا فَإِنَّ أَحَدَكُمْ فِي صَلَاةٍ مَا كَانَ يَعْمِدُ إِلَى الصَّلَاةِ

मुझे मलिक (अल 'अला` बिन अब्दुर्रहमान बिन याकूब) से [उनके पिता] और [इसहाक बिन अब्दुल्ला] दोनों ने बताया है, उन दोनों ने [अबू हुरैरा] को यह कहते हुए सुना था, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जब नमाज़ शुरू हो जाए, तो दौड़कर उसके पास मत जाओ। शांति से नमाज़ के लिए आओ। जो रकात मिले उसमें नमाज़ पढ़ो। और जो पीछे छोड़ दिया है उसे पूरा करो। क्योंकि तुम में से एक तब तक नमाज़ पढ़ता है जब तक वह नमाज़ पढ़ता है।"

खेतों और बकरियों में अज़ान का प्रचार करने वाले लोगों का इनाम

इमाम मलिक : 138

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي صَعْصَعَةَ الْأَنْصَارِيِّ ثُمَّ الْمَازِنِيِّ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا سَعِيدٍ الْخُدْرِيَّ قَالَ لَهُإِنِّي أَرَاكَ تُحِبُّ الْغَنَمَ وَالْبَادِيَةَ فَإِذَا كُنْتَ فِي غَنَمِكَ أَوْ بَادِيَتِكَ فَأَذَّنْتَ بِالصَّلَاةِ فَارْفَعْ صَوْتَكَ بِالنِّدَاءِ فَإِنَّهُ لَا يَسْمَعُ مَدَى صَوْتِ الْمُؤَذِّنِ جِنٌّ وَلَا إِنْسٌ وَلَا شَيْءٌ إِلَّا شَهِدَ لَهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ قَالَ أَبُو سَعِيدٍ سَمِعْتُهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

मलिक [अब्दुर्रहमान बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुर्रहमान बिन अबू शाहशाह अल अंसारी अल मजीनी] ने मुझे [अपने पिता] से बताया कि [अबू सईद अल खुदरी] ने एक बार उनसे कहा, "मैं तुम्हें बकरियों और चरागाह की तरह देखता हूँ। अगर तुम अपनी बकरियों या अपने चरागाह के बीच हो, तो नमाज़ के लिए अज़ान दो और अपनी आवाज़ ऊँची करो। क्योंकि कोई भी मुअज़्ज़िन की आवाज़ नहीं सुनता, चाहे वह जिन्न हो, इंसान हो या कोई और, लेकिन वे क़यामत के दिन उसके ख़िलाफ़ गवाही देंगे।" अबू सईद ने कहा, "मैंने इसे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना है।"

प्रार्थना की पुकार सुनकर शैतान भाग जाता है

इमाम मलिक : 139

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا نُودِيَ لِلصَّلَاةِ أَدْبَرَ الشَّيْطَانُ لَهُ ضُرَاطٌ حَتَّى لَا يَسْمَعَ النِّدَاءَ فَإِذَا قُضِيَ النِّدَاءُ أَقْبَلَ حَتَّى إِذَا ثُوِّبَ بِالصَّلَاةِ أَدْبَرَ حَتَّى إِذَا قُضِيَ التَّثْوِيبُ أَقْبَلَ حَتَّى يَخْطِرَ بَيْنَ الْمَرْءِ وَنَفْسِهِ يَقُولُ اذْكُرْ كَذَا اذْكُرْ كَذَا لِمَا لَمْ يَكُنْ يَذْكُرُ حَتَّى يَظَلَّ الرَّجُلُ إِنْ يَدْرِي كَمْ صَلَّى

मुझे मलिक ने [अबू अज़ ज़िनद] से [अल अराज] से [अबू हुरैरा] से बताया है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जब अज़ान दी जाती है, तो शैतान तब तक पादता हुआ भाग जाता है जब तक वह उसे सुन नहीं लेता। जब अज़ान दी जाती है, तो वह फिर से लौटता है। फिर जब इक़ामत गाई जाती है, तो वह भाग जाता है और इक़ामत कहे जाने के बाद फिर से वापस आता है। फिर वह किसी के दिल में फुसफुसाता है: 'यह याद रखो, वह याद रखो' कुछ ऐसा जिसके बारे में उसने पहले नहीं सोचा था ताकि नमाज़ पढ़ने वाले को पता न चले कि उसने कितनी रकात नमाज़ पढ़ी है।"

दो बार जब प्रार्थनाएँ सुनी गईं

इमाम मलिक : 140

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي حَازِمِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ السَّاعِدِيِّ أَنَّهُ قَالَسَاعَتَانِ يُفْتَحُ لَهُمَا أَبْوَابُ السَّمَاءِ وَقَلَّ دَاعٍ تُرَدُّ عَلَيْهِ دَعْوَتُهُ حَضْرَةُ النِّدَاءِ لِلصَّلَاةِ وَالصَّفُّ فِي سَبِيلِ اللَّهِ

मुझे मलिक (अबू हज़म बिन दीनार) से (सहल बिन सअद अस सईदी) रिवायत है कि उन्होंने कहा, "दो बार ऐसे होते हैं जब आसमान के दरवाज़े खुल जाते हैं, और बहुत कम लोगों की नमाज़ें रद्द होती हैं: नमाज़ के अज़ान के समय और अल्लाह के रास्ते में लड़ने के समय।"