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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 Hadith

Hadith

Imam Malik : 1341

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عِرَاكِ بْنِ مَالِكٍ وَسُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَجُلًا مِنْ بَنِي سَعْدِ بْنِ لَيْثٍ أَجْرَى فَرَسًا فَوَطِئَ عَلَى إِصْبَعِ رَجُلٍ مِنْ جُهَيْنَةَ فَنُزِيَ مِنْهَا فَمَاتَ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ لِلَّذِي ادُّعِيَ عَلَيْهِمْ أَتَحْلِفُونَ بِاللَّهِ خَمْسِينَ يَمِينًا مَا مَاتَ مِنْهَا فَأَبَوْا وَتَحَرَّجُوا وَقَالَ لِلْآخَرِينَ أَتَحْلِفُونَ أَنْتُمْ فَأَبَوْا فَقَضَى عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ بِشَطْرِ الدِّيَةِ عَلَى السَّعْدِيِّينَقَالَ مَالِك وَلَيْسَ الْعَمَلُ عَلَى هَذَا

याह्या हमरा [इराक बिन मलिक] स [इब्न शिहाब] स मालिक स आ [सुलेमान बिन यासर] स बतेलथि जे बनू सईद बिन लैथ क एकटा आदमी घोड़ा पर सवार भ जुहैना क एकटा आदमी क आँगुर पर ताबत धरि पैर रखलक जाबत तक ओ कटि नहि गेल आ ओ मरि गेल। तखन [उमर बिन खत्ताब] प्रतिवादी सब स कहलखिन: 'की अहाँ पचास बेर अल्लाह के कसम खाब जे ओ एहि कारणे नहि मरि गेलाह?' ओ सभ मना क देलक आ कठिन लागल। तखन उमर आन लोक सभसँ पुछलखिन: 'अहाँ सभ कसम खाएब?' ओ सभ मना क देलक। तखन उमर बिन खट्टाब बनू सईद के लोक के तरफ सं आधा दियात देबय के फैसला केलनि. मालिक बजलाह - ई हमर सभक विचार नहि अछि।'

Hadith

Imam Malik : 1342

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّ ابْنَ شِهَابٍ وَسُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍ وَرَبِيعَةَ بْنَ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ كَانُوا يَقُولُونَدِيَةُ الْخَطَإِ عِشْرُونَ بِنْتَ مَخَاضٍ وَعِشْرُونَ بِنْتَ لَبُونٍ وَعِشْرُونَ ابْنَ لَبُونٍ ذَكَرًا وَعِشْرُونَ حِقَّةً وَعِشْرُونَ جَذَعَةً

हमरा मलिक स कहल गेल अछि जे [इब्नु शिहाब] आ [सुलेमान बिन यासर] आ [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] ओ सब कहने छलाह जे गलत काज के लेल हत्या के दियात बीस बिन्तू मखडल, बीस बिन्तू लाबुन, बीस पुरुष इब्न लाबुन, बीस हिक्का आ बीस जद'आह अछि।

Hadith

Imam Malik : 1343

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُتُعَاقِلُ الْمَرْأَةُ الرَّجُلَ إِلَى ثُلُثِ الدِّيَةِ إِصْبَعُهَا كَإِصْبَعِهِ وَسِنُّهَا كَسِنِّهِ وَمُوضِحَتُهَا كَمُوضِحَتِهِ وَمُنَقِّلَتُهَا كَمُنَقِّلَتِهِو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ وَبَلَغَهُ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ أَنَّهُمَا كَانَا يَقُولَانِ مِثْلَ قَوْلِ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ فِي الْمَرْأَةِ أَنَّهَا تُعَاقِلُ الرَّجُلَ إِلَى ثُلُثِ دِيَةِ الرَّجُلِ فَإِذَا بَلَغَتْ ثُلُثَ دِيَةِ الرَّجُلِ كَانَتْ إِلَى النِّصْفِ مِنْ دِيَةِ الرَّجُلِ قَالَ مَالِك وَتَفْسِيرُ ذَلِكَ أَنَّهَا تُعَاقِلُهُ فِي الْمُوضِحَةِ وَالْمُنَقِّلَةِ وَمَا دُونَ الْمَأْمُومَةِ وَالْجَائِفَةِ وَأَشْبَاهِهِمَا مِمَّا يَكُونُ فِيهِ ثُلُثُ الدِّيَةِ فَصَاعِدًا فَإِذَا بَلَغَتْ ذَلِكَ كَانَ عَقْلُهَا فِي ذَلِكَ النِّصْفَ مِنْ عَقْلِ الرَّجُلِ

हमरा कहल गेल अछि जे मालिक सँ [यह्या बिन सईद] सँ [सैद बिन मुसैयब] सँ याह्या कहलनि; 'स्त्री पुरुष के दियात के एक तिहाई, आँगुर के बदला आँगुर, दाँत के बदला दाँत, घाव जे ओही घाव वाला हड्डी के उजागर करै छै, आ टूटल हड्डी के बदला टूटल हड्डी के बदला दै छै'। हमरा [इब्नु शिहाब] स मलिक कहलक जे ['उरवाह बिन अज़ जुबैर] स हुनका लग इ बात आयल छल जे दुनू गोटे क राय ओहिना छल जेना सैद बिन मुसैयब क राय छल जे महिला कए पुरुष पर दियात क एक तिहाई दियात देल जाइत अछि, जौं इ पुरुष क लेल दियात क एक तिहाई तक पहुंच जाइत अछि त इ आधा भ जाइत अछि। मालिक बजलाह; "एकर व्याख्या ई छै कि महिला हड्डी देखाबै वाला घाव के लेलऽ दियात दै छै, या हड्डी टूटै वाला घाव के लेलऽ दियात दै छै, या माथा या पेट के हड्डी में नै घुसै वाला घाव के लेलऽ, या ऐन्हऽ तरह के घाव के लेलऽ, तभियो दियात के एक तिहाई बेसी होय छै, अगर एकरा सें अधिक होय जाय छै त॑ वू आदमी के आधा दियात दै छै."

Hadith

Imam Malik : 1344

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ شِهَابٍ يَقُولُمَضَتْ السُّنَّةُ أَنَّ الرَّجُلَ إِذَا أَصَابَ امْرَأَتَهُ بِجُرْحٍ أَنَّ عَلَيْهِ عَقْلَ ذَلِكَ الْجُرْحِ وَلَا يُقَادُ مِنْهُ

मालिक सँ हमरा ई बात कहल गेल छल जे ओ [इब्न शिहाब] केँ कहैत सुनने छलाह; 'सुन्नत छै कि अगर आदमी अपनऽ पत्नी के चोट पहुँचै छै त॑ ओकरा चोट केरऽ रकम के लेलऽ दियात देना चाहियऽ, लेकिन ओकरा क़िसस के अधीन नै छै' ।

Hadith

Imam Malik : 1345

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ امْرَأَتَيْنِ مِنْ هُذَيْلٍ رَمَتْ إِحْدَاهُمَا الْأُخْرَى فَطَرَحَتْ جَنِينَهَا فَقَضَى فِيهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِغُرَّةٍ عَبْدٍ أَوْ وَلِيدَةٍ

यह्या हमरा मालिक स॑ [इब्न शिहाब] स॑ [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान बिन औफ] स॑ [अबू हुरैरा] स॑ बतैलकै जे कहलकै, ‘हुदैल केरऽ दू महिला एक-दूसरा प॑ पाथर फेंकलकै जब॑ तलक कि ओकरा म॑ स॑ एगो अपनऽ विरोधी के गर्भ म॑ भ्रूण क॑ नै मारलकै । तखन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम के फैसला छल जे भ्रूण के मारय वाला के एकटा एहन नर या महिला दास के मुक्त करबाक चाही जकर दाम दियात के दस गुना मूल्य के होयत-'.

Hadith

Imam Malik : 1346

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَضَى فِي الْجَنِينِ يُقْتَلُ فِي بَطْنِ أُمِّهِ بِغُرَّةٍ عَبْدٍ أَوْ وَلِيدَةٍ فَقَالَ الَّذِي قُضِيَ عَلَيْهِ كَيْفَ أَغْرَمُ مَا لَا شَرِبَ وَلَا أَكَلْ وَلَا نَطَقَ وَلَا اسْتَهَلْ وَمِثْلُ ذَلِكَ بَطَلْ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّمَا هَذَا مِنْ إِخْوَانِ الْكُهَّانِ

हमरा [इब्न शिहाब] स मलिक स [सैद बिन मुसैयब] स रिवायत भेल जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एकटा पुरुष या महिला दास कए मुक्त क अपन मां क पेट मे मारल गेल भ्रूण क मामला क फैसला केलथि। तखन आरोपी कहलक: 'जे जन्मक समय मे नहि खेने, नहि पीने, नहि बाजल, नहि कानने हो, ओकरा मारि देला पर हमरा पर जुर्माना कोना लगाओल जायत?' अल्लाह के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहलनि जे ई आदमी भविष्यवक्ता के दोस्त अछि।

Hadith

Imam Malik : 1347

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُالْغُرَّةُ تُقَوَّمُ خَمْسِينَ دِينَارًا أَوْ سِتَّ مِائَةِ دِرْهَمٍ وَدِيَةُ الْمَرْأَةِ الْحُرَّةِ الْمُسْلِمَةِ خَمْسُ مِائَةِ دِينَارٍ أَوْ سِتَّةُ آلَافِ دِرْهَمٍ

हमरा मलिक सँ रिवायत भेल जे [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] कहलनि; 'अल घुर्राह केरऽ कीमत पचास दिनार या छह सौ दिरहम के बीच होय छै, आरू मुक्त महिला केरऽ दियात पांच सौ दिनार या छह हजार दिरहम के बीच होय छै' ।

Hadith

Imam Malik : 1348

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُفِي الشَّفَتَيْنِ الدِّيَةُ كَامِلَةً فَإِذَا قُطِعَتْ السُّفْلَى فَفِيهَا ثُلُثَا الدِّيَةِ

याह्या हमरा [इब्न शिहाब] स मालिक स [सैद बिन मुसैयब] स कहलथि जे ओ दू ठोर वाला दियात क बारे मे कहने छलाह, ‘दियात एकदम सही दियात अछि, अगर अहां केवल नीचा काटि देब त दियात क एक तिहाई देब।

Hadith

Imam Malik : 1349

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍعَنْ الرَّجُلِ الْأَعْوَرِ يَفْقَأُ عَيْنَ الصَّحِيحِ فَقَالَ ابْنُ شِهَابٍ إِنْ أَحَبَّ الصَّحِيحُ أَنْ يَسْتَقِيدَ مِنْهُ فَلَهُ الْقَوَدُ وَإِنْ أَحَبَّ فَلَهُ الدِّيَةُ أَلْفُ دِينَارٍ أَوْ اثْنَا عَشَرَ أَلْفَ دِرْهَمٍ

याह्या हमरा मालिक स बतेलथि जे ओ [इब्न शिहाब] स एकटा आन्हर आदमी क बारे मे पूछलथि जे दोसर व्यक्ति क आँखि कए बाहर निकालि लेलक। इब्न शिहाब कहलनि: 'जेकरा गॉग आउट कयल गेल छल, ओ ओकरा चुकाबय चाहैत अछि त' ओकर अधिकार छैक।' जँ ओकरा दियात सँ भुगतान करय चाहैत अछि तखन दियात एक हजार दिनार वा बारह हजार दिरहम अछि।'

Hadith

Imam Malik : 1350

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّ زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍكَانَ يَقُولُ فِي الْعَيْنِ الْقَائِمَةِ إِذَا طَفِئَتْ مِائَةُ دِينَارٍ

याह्या हमरा [सुलेमान बिन यासर] स मालिक स [याह्या बिन सईद] स बतेलथि जे [जैद बिन थाबीत] एकटा एहन आंख क बारे मे कहने छलाह जे चोट लगलाक बाद नहि देख सकैत अछि, ‘इनाम सौ दिनार अछि’।

Hadith

Imam Malik : 1351

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ سَمِعَ سُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍ يَذْكُرُأَنَّ الْمُوضِحَةَ فِي الْوَجْهِ مِثْلُ الْمُوضِحَةِ فِي الرَّأْسِ إِلَّا أَنْ تَعِيبَ الْوَجْهَ فَيُزَادُ فِي عَقْلِهَا مَا بَيْنَهَا وَبَيْنَ عَقْلِ نِصْفِ الْمُوضِحَةِ فِي الرَّأْسِ فَيَكُونُ فِيهَا خَمْسَةٌ وَسَبْعُونَ دِينَارًا

यह्या हमरा [याह्या बिन सईद] स॑ मलिक स॑ बतैलकै कि हुनी [सुलेमान बिन यासर] क॑ ई कहतें सुनलकै कि, ‘सत्ते, चेहरा प॑ मुदलिहाह माथा प॑ मुदलीहा के समान छै, सिवाय ई के कि अगर ई एतना गंभीर होय छै कि चेहरा प॑ दाग लगै छै, त॑ माथा प॑ घाव लेली दियात लगभग आधा दियात बढ़ी जाय छै, त॑ दियात बनी जाय छै पचहत्तरि दिनार'।

Hadith

Imam Malik : 1352

وَقَدْ قَالَ ابْنُ شِهَابٍلَيْسَ فِي الْمَأْمُومَةِ قَوَدٌ

सचमुच [इब्न शिहाब] कहलनि जे, गहींर घाव के कोनो जवाब नै भेटैत अछि’।

Hadith

Imam Malik : 1353

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ قَالَكُلُّ نَافِذَةٍ فِي عُضْوٍ مِنْ الْأَعْضَاءِ فَفِيهَا ثُلُثُ عَقْلِ ذَلِكَ الْعُضْوِحَدَّثَنِي مَالِك كَانَ ابْنُ شِهَابٍ لَا يَرَى ذَلِكَ

हमरा कहल गेल अछि जे मालिक सँ [यह्या बिन सईद] सँ [सैद बिन मुसैयब] सँ याह्या कहलनि; 'शरीरक कोनो अंग पर हर घाव, घाव ओहि अंगक एक तिहाई होइत छैक' । हमरा कहल गेल अछि जे मालिक कहलनि जे, '[इब्न शिहाब] के एहन नहि लगैत छनि'।

Hadith

Imam Malik : 1354

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الزُّبَيْرِأَقَادَ مِنْ الْمُنَقِّلَةِ

याह्या हमरा [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] स मालिक स बतेलथि जे [अब्दुल्लाह बिन अज़ जुबैर] ओहि घाव क बदला लेलथि जाहि स हड्डी टूटि गेल।

Hadith

Imam Malik : 1355

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّهُ قَالَ سَأَلْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِكَمْ فِي إِصْبَعِ الْمَرْأَةِ فَقَالَ عَشْرٌ مِنْ الْإِبِلِ فَقُلْتُ كَمْ فِي إِصْبَعَيْنِ قَالَ عِشْرُونَ مِنْ الْإِبِلِ فَقُلْتُ كَمْ فِي ثَلَاثٍ فَقَالَ ثَلَاثُونَ مِنْ الْإِبِلِ فَقُلْتُ كَمْ فِي أَرْبَعٍ قَالَ عِشْرُونَ مِنْ الْإِبِلِ فَقُلْتُ حِينَ عَظُمَ جُرْحُهَا وَاشْتَدَّتْ مُصِيبَتُهَا نَقَصَ عَقْلُهَا فَقَالَ سَعِيدٌ أَعِرَاقِيٌّ أَنْتَ فَقُلْتُ بَلْ عَالِمٌ مُتَثَبِّتٌ أَوْ جَاهِلٌ مُتَعَلِّمٌ فَقَالَ سَعِيدٌ هِيَ السُّنَّةُ يَا ابْنَ أَخِي

हमरा कहल गेल अछि जे [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] सँ मलिक सँ याह्या कहलनि; 'हम [सैद बिन मुसैयब] सँ पुछलियनि; 'स्त्रीक आँगुर लेल कतेक दियात? ' ओ उत्तर देलनि; 'दस ऊँट'। हम फेर पुछलियनि; 'दू आँगुर लेल कतेक?' ओ उत्तर देलनि; 'बीस ऊँट'। हम फेर पुछलियनि; 'तीन आँगुर लेल कतेक ?' ओ उत्तर देलनि; 'तीस ऊँट'। हम पुछैत छी; 'चारि आँगुर लेल कतेक?' ओ उत्तर देलनि; 'बीस टा ऊँट ?' हम पुछलियनि; ‘जँ घाव जतेक पैघ आ दर्द ओतेक बेसी भ’ जायत त’ दीयात कम हेतैक त’ की हेतै,’ सईद पुछलकै; 'अहाँ इराकी छी ?' हम उत्तर देलियनि; 'नहि, मुदा हम त' बस एकटा पुण्यात्मा छी जे निश्चय ताक' चाहैत छी आ मूर्ख छी जे सीख' चाहैत अछि।' कहलक; 'से सुन्नत अछि हे हमर भाइ'।

Hadith

Imam Malik : 1356

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ مُسْلِمِ بْنِ جُنْدُبٍ عَنْ أَسْلَمَ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِقَضَى فِي الضِّرْسِ بِجَمَلٍ وَفِي التَّرْقُوَةِ بِجَمَلٍ وَفِي الضِّلَعِ بِجَمَلٍ

याह्या हमरा [जैद बिन असलम] स मालिक स [असलम] उमर बिन खट्टाब क पूर्व दास स [मुस्लिम बिन जुंदुब] स कहलथि, जे [उमर बिन खट्टाब] हुनकर दाढ़ ऊंट स काटि लेबाक फैसला केलथि, हुनकर हड्डी उंट स आ पसली उंट स काटल जाएत।

Hadith

Imam Malik : 1357

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ سَمِعَ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ يَقُولُ قَضَى عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِفِي الْأَضْرَاسِ بِبَعِيرٍ بَعِيرٍوَقَضَى مُعَاوِيَةُ بْنُ أَبِي سُفْيَانَ فِي الْأَضْرَاسِ بِخَمْسَةِ أَبْعِرَةٍ خَمْسَةِ أَبْعِرَةٍ قَالَ سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ فَالدِّيَةُ تَنْقُصُ فِي قَضَاءِ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ وَتَزِيدُ فِي قَضَاءِ مُعَاوِيَةَ فَلَوْ كُنْتُ أَنَا لَجَعَلْتُ فِي الْأَضْرَاسِ بَعِيرَيْنِ بَعِيرَيْنِ فَتِلْكَ الدِّيَةُ سَوَاءٌ وَكُلُّ مُجْتَهِدٍ مَأْجُورٌ

याह्या हमरा [याह्या बिन सईद] स मालिक स कहलथि जे ओ [सैद बिन मुसैयब] कए कहैत सुनने छलाह, ' [उमर बिन खत्ताब] एकटा ऊंट क संग मोलर दियात क मामला मे एकटा ऊंट क फैसला केलथि। एम्हर [मुअवियाह बिन अबू सुफियन] पाँच ऊँट, पाँच ऊँट'क संग निर्णय लेलनि | सईद बिन मुसैयाब कहलनि; 'उमर बिन खट्टाब के फैसला में दियात कम भ गेल आ मुअविया के फैसला में बढ़ि गेल, अगर हमहीं निर्णय लेब त हम दू टा ऊंट के दाढ़ के दांत दियात क देब। दियात एके अछि आ हर मुजतहिद के इनाम भेटत'।

Hadith

Imam Malik : 1358

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُإِذَا أُصِيبَتْ السِّنُّ فَاسْوَدَّتْ فَفِيهَا عَقْلُهَا تَامًّا فَإِنْ طُرِحَتْ بَعْدَ أَنْ اسْوَدَّتْ فَفِيهَا عَقْلُهَا أَيْضًا تَامًّا

हमरा मालिक सँ [यह्या बिन सईद] सँ [सैद बिन मुसैयब] सँ याह्या कहि ओ कहलनि; 'जँ सभ दाँत ता धरि प्रभावित होइत अछि जा धरि ओ कारी नहि भ' जाइत अछि तखन दियात एकदम सही, जँ दाँत कारी भेलाक बाद खसि पड़ैत अछि तखन दियात सेहो एकदम सही' ।

Hadith

Imam Malik : 1359

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ دَاوُدَ بْنِ الْحُصَيْنِ عَنْ أَبِي غَطَفَانَ بْنِ طَرِيفٍ الْمُرِّيِّ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ مَرْوَانَ بْنَ الْحَكَمِ بَعَثَهُ إِلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍيَسْأَلُهُ مَاذَا فِي الضِّرْسِ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبَّاسٍ فِيهِ خَمْسٌ مِنْ الْإِبِلِ قَالَ فَرَدَّنِي مَرْوَانُ إِلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ فَقَالَ أَتَجْعَلُ مُقَدَّمَ الْفَمِ مِثْلَ الْأَضْرَاسِ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبَّاسٍ لَوْ لَمْ تَعْتَبِرْ ذَلِكَ إِلَّا بِالْأَصَابِعِ عَقْلُهَا سَوَاءٌ

याह्या हमरा [दाउद बिन अल हुशैन] स मालिक स [अबू गथाफान बिन तारिफ अल मुरी] स बतेलथि जे ओ हुनका सूचित केलथि जे मरवान बिन हकम हुनका अब्दुल्ला बिन अब्बास लग पठा देलथि जे ओ दाढ़क दांत लेल दियात क बारे मे पूछथि। तखन [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] जवाब देलनि: ‘दियात पाँच ऊँट अछि’। अबू घथाफन कहलनि: 'तखन मरवान हमरा फेर अब्दुल्ला बिन अब्बास लग पठौलनि जे पूछल जाय: 'की अहाँ दाढ़क दाँत लेल मुँहक आगूक भाग दियातक बराबरी करैत छी?' अब्दुल्ला बिन अब्बास जवाब देलखिन: 'जँ अहाँ -तार्किक रूपेँ- तुलना अपन आँगुर छोड़ि किछु नहि करब त' दियात एके रंग अछि'.

Hadith

Imam Malik : 1360

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ كَانَ يُسَوِّي بَيْنَ الْأَسْنَانِ فِي الْعَقْلِ وَلَا يُفَضِّلُ بَعْضَهَا عَلَى بَعْضٍ

याह्या हमरा [हिशाम बिन उर्वाह] स मालिक स [अपन पिता] स कहलथि जे ओ दियात कए सब दांत लेल बराबर बनेलथि आ एक स बेसी दोसर कए नहि दैत छलाह।