Imam Malik : 1321
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ السَّائِبِ بْنِ يَزِيدَأَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَمْرِو بْنِ الْحَضْرَمِيِّ جَاءَ بِغُلَامٍ لَهُ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَقَالَ لَهُ اقْطَعْ يَدَ غُلَامِي هَذَا فَإِنَّهُ سَرَقَ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ مَاذَا سَرَقَ فَقَالَ سَرَقَ مِرْآةً لِامْرَأَتِي ثَمَنُهَا سِتُّونَ دِرْهَمًا فَقَالَ عُمَرُ أَرْسِلْهُ فَلَيْسَ عَلَيْهِ قَطْعٌ خَادِمُكُمْ سَرَقَ مَتَاعَكُمْ
हमरा [इब्न शिहाब] स मालिक स [अस स`इब बिन यजीद] स कहल गेल छल जे अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन अल हदलरामी अपन नौकर क संग उमर बिन खत्ताब लग आबि कहलथि: 'हमर नौकर क हाथ काटि दिअ, ओ चोरी क लेलक!' उमर पुछलखिन: 'की चोरा लेलक?' ओ उत्तर देलनि: 'ओ हमर पत्नीक ऐना चोरा लेलक जेकर कीमत साठि दिरहम छल।' [उमर] कहलनि: 'ओकरा छोड़ि दियौक, कारण जे अहाँक नौकर अहाँक हाथ सँ चोरी करैत अछि, ओकर हाथ कोनो काटि नहि।'
Imam Malik : 1322
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍأَنَّ مَرْوَانَ بْنَ الْحَكَمِ أُتِيَ بِإِنْسَانٍ قَدْ اخْتَلَسَ مَتَاعًا فَأَرَادَ قَطْعَ يَدِهِ فَأَرْسَلَ إِلَى زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ يَسْأَلُهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ لَيْسَ فِي الْخُلْسَةِ قَطْعٌ
हमरा [इब्न शिहाब] स मालिक स रिवायत भेल जे मरवान बिन अल हकम क सामने एकटा जेब चोर आनल गेल छल, ताहि लेल मरवान हुनकर हाथ काटि देबाक इच्छा छल। मुदा तखन ओ जैद बिन थाबीत केँ चिट्ठी पठौलनि जे एहि विषय मे पूछलनि, तखन [जैद बिन थाबीत] उत्तर देलनि: 'जेब चोरीक मामला मे हाथ नहि काटि सकैत अछि।'
Imam Malik : 1323
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍأَنَّهُ أَخَذَ نَبَطِيًّا قَدْ سَرَقَ خَوَاتِمَ مِنْ حَدِيدٍ فَحَبَسَهُ لِيَقْطَعَ يَدَهُ فَأَرْسَلَتْ إِلَيْهِ عَمْرَةُ بِنْتُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ مَوْلَاةً لَهَا يُقَالُ لَهَا أُمَيَّةُ قَالَ أَبُو بَكْرٍ فَجَاءَتْنِي وَأَنَا بَيْنَ ظَهْرَانَيْ النَّاسِ فَقَالَتْ تَقُولُ لَكَ خَالَتُكَ عَمْرَةُ يَا ابْنَ أُخْتِي أَخَذْتَ نَبَطِيًّا فِي شَيْءٍ يَسِيرٍ ذُكِرَ لِي فَأَرَدْتَ قَطْعَ يَدِهِ قُلْتُ نَعَمْ قَالَتْ فَإِنَّ عَمْرَةَ تَقُولُ لَكَ لَا قَطْعَ إِلَّا فِي رُبُعِ دِينَارٍ فَصَاعِدًا قَالَ أَبُو بَكْرٍ فَأَرْسَلْتُ النَّبَطِيَّ
हमरा मालिक स [याह्या बिन सईद] स कहने छल कहने छल; हमरा [अबू बकर बिन मुहम्मद बिन अमरू बिन हज़म] के सूचित केने छथि जे ओ एकटा गैर-अरब किसान के पकड़ने छल जे कतेको लोहा के अंगूठी चोरा लेने छल, फेर ओकरा हाथ काटि लेबाक लेल ताला लगा देलक। 'अमराह बिन अब्दुररहमान अपन पूर्व दास [उमय्याह] के हुनका स भेंट करय लेल पठौलनि। अबू बकर कहलनि; 'हम भीड़क संग रहैत दासी आबि गेलीह, ओ तखन बजलीह; ' [अमरा], अहाँक मौसी अहाँ केँ संदेश पठौलनि, 'हे हमर भाइक बेटा, अहाँ एकटा एहन किसान पकड़ि लेने छी जे सस्ता चीज चोरा लेलक आ ओकर हाथ काटि देबय चाहैत छल? ' हम उत्तर देलियनि; 'सही'। महिला दास कहलकै, 'अमराह तोरा कहलकै, 'अमराह तोरा आदेश दै छै कि एक चौथाई दिनार या ओकरा सें अधिक के अलावा हाथ काटना नै होतै''। अबू बकर कहलनि; 'त' हम किसान केँ मुक्त क' देलियैक।'
Imam Malik : 1324
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ السَّائِبِ بْنِ يَزِيدَ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِخَرَجَ عَلَيْهِمْ فَقَالَ إِنِّي وَجَدْتُ مِنْ فُلَانٍ رِيحَ شَرَابٍ فَزَعَمَ أَنَّهُ شَرَابُ الطِّلَاءِ وَأَنَا سَائِلٌ عَمَّا شَرِبَ فَإِنْ كَانَ يُسْكِرُ جَلَدْتُهُ فَجَلَدَهُ عُمَرُ الْحَدَّ تَامًّا
मलिक हमरा [इब्न शिहाब] स [स`इब बिन यजीद] स बतेलथि जे [उमर बिन खत्ताब] अपन लोक लग निकलि गेलाह आ कहलथि, 'हमरा फल्लाँ स शराब क गंध सुंघैत अछि।' तखन ओ स्वीकार केलक जे ओ अथ थिला` पीने छल। स`इब बिन यजीद हुनका स पूछलखिन जे अहाँ की पीने छी, आ जौं मादकता अछि त हम हुनका लात मारब। तखन उमर ओहि आदमी पर पूरा तरहेँ लाठी मारि देलक।'
Imam Malik : 1325
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ثَوْرِ بْنِ زَيْدٍ الدِّيلِيِّ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِاسْتَشَارَ فِي الْخَمْرِ يَشْرَبُهَا الرَّجُلُ فَقَالَ لَهُ عَلِيُّ بْنُ أَبِي طَالِبٍ نَرَى أَنْ تَجْلِدَهُ ثَمَانِينَ فَإِنَّهُ إِذَا شَرِبَ سَكِرَ وَإِذَا سَكِرَ هَذَى وَإِذَا هَذَى افْتَرَى أَوْ كَمَا قَالَ فَجَلَدَ عُمَرُ فِي الْخَمْرِ ثَمَانِينَ
हमरा [त्सौर इब्न जैद अद दिली] स मालिक स कहल गेल छल जे [उमर इब्न खत्ताब] एकटा एहन आदमी क बारे मे परामर्श केलथि जे शराब पीबैत छलाह। [अली बिन अबू तालिब] हुनका कहलथिन्ह : हमरा लगैत अछि जे अहाँ हुनका अस्सी बेर कोड़ा मारबाक चाही, कारण जँ ओ शराब पीबथि त’ ओ नशा मे धुत्त भ’ जेताह। नशा मे धुत्त भ' जेतै त' खूब नींदक गप्प करत। जँ खूब नींदक गप्प करत तँ खूब झूठ बाजत,’ वा जेना कहने छल, ‘उमर सेहो शराब पीनिहार पर अस्सी कोड़ा मारलक।’
Imam Malik : 1326
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ سُئِلَ عَنْ حَدِّ الْعَبْدِ فِي الْخَمْرِ فَقَالَ بَلَغَنِي أَنَّ عَلَيْهِ نِصْفَ حَدِّ الْحُرِّ فِي الْخَمْرِ وَأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ وَعُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ وَعَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَدْ جَلَدُوا عَبِيدَهُمْ نِصْفَ حَدِّ الْحُرِّ فِي الْخَمْرِ
मलिक हमरा [इब्न शिहाब] स कहलथि जे एक बेर हुनका स खमेर पीबय वाला दास के सजा के बारे मे पूछल गेल छल। ओ उत्तर देलथिन; 'हमरा मोन मे आबि गेल अछि जे दासक सजा मुक्त व्यक्तिक आधा होइत छैक ।' [उमर बिन खत्ताब] आ [उस्मान बिन अफान] आ [अब्दुल्लाह बिन उमर] अपन दास सब के शराब पीबय के लेल मुक्त लोक के आधा सजा के सजा देलखिन।
Imam Malik : 1327
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ سَمِعَ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ يَقُولُمَا مِنْ شَيْءٍ إِلَّا اللَّهُ يُحِبُّ أَنْ يُعْفَى عَنْهُ مَا لَمْ يَكُنْ حَدًّا
हमरा मालिक स कहल गेल अछि जे [याह्या बिन सईद] [सैद बिन मुसैयब] के कहैत सुनने छलाह; 'उल्लंघन केरऽ सब काम, अल्लाह क॑ अपराधी द्वारा माफ करना पसंद छै जब॑ तलक कि ई हद्द केरऽ सजा नै छै' ।
Imam Malik : 1328
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَطَبَ النَّاسَ فِي بَعْضِ مَغَازِيهِ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ فَأَقْبَلْتُ نَحْوَهُ فَانْصَرَفَ قَبْلَ أَنْ أَبْلُغَهُ فَسَأَلْتُ مَاذَا قَالَ فَقِيلَ لِي نَهَى أَنْ يُنْبَذَ فِي الدُّبَّاءِ وَالْمُزَفَّتِ
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [नाफी’] स॑ मालिक स॑ यह्या [अब्दुल्लाह बिन उमर] स॑ कहलकै, ‘रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ अपनऽ एगो लड़ाई म॑ लोगऽ क॑ उपदेश देलकै । अब्दुल्ला बिन उमर कहलनि; 'हम तखन हुनका लग पहुँचलहुँ, मुदा हमरासँ भेंट करबासँ पहिने ओ चलि गेलाह ।' तखन हम पुछलियनि जे एखनहि की कहलनि, तखन कियो कहलक जे दुबा आ मुजफ्त पर बचत करब मना क' देलनि'।
Imam Malik : 1329
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَعْقُوبَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى أَنْ يُنْبَذَ فِي الدُّبَّاءِ وَالْمُزَفَّتِ
हमरा मलिक स [अल अला` बिन अब्दुररहमान बिन याकूब] स [अपन पिता] स [अबू हुरैरा] स रिवायत अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दुबा आ मुजफ्त मे बचत करबा स मना केलथि।
Imam Malik : 1330
و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى أَنْ يُنْبَذَ الْبُسْرُ وَالرُّطَبُ جَمِيعًا وَالتَّمْرُ وَالزَّبِيبُ جَمِيعًا
यह्या हमरा [जैद बिन असलम] स॑ मालिक स॑ [अथा बिन यासर] स॑ बतैलकै कि अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह (स.अ.व.) न॑ बसर आरू रूथब - गीला खजूर - के रस क॑ एक मिश्रण म॑, खजूर आरू किशमिश क॑ एक मिश्रण म॑ बनाबै स॑ मना करी देलकै ।
Imam Malik : 1331
و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْسُئِلَ رَسُولُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الْبِتْعِ فَقَالَ كُلُّ شَرَابٍ أَسْكَرَ فَهُوَ حَرَامٌ
हमरा कहल गेल अछि जे मालिक सँ [इब्न शिहाब] सँ [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान] सँ [ऐसिया] सँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केर पत्नी सँ याह्या कहलनि; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स अल बिट के बारे में पूछल गेल छल, तखन ओ जवाब देलखिन: 'हर पेय पदार्थ जे मादक अछि ओ हरम अछि'।
Imam Malik : 1332
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُئِلَ عَنْ الْغُبَيْرَاءِ فَقَالَ لَا خَيْرَ فِيهَا وَنَهَى عَنْهَاقَالَ مَالِك فَسَأَلْتُ زَيْدَ بْنَ أَسْلَمَ مَا الْغُبَيْرَاءُ فَقَالَ هِيَ الْأُسْكَرْكَةُ
हमरा मलिक स [जैद बिन असलम] स [अथा बिन यासर] स कहल गेल अछि जे एक बेर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स गुबैरा -मकई या चावल क दबाव- क बारे मे पूछल गेल छल, ओ जवाब देलथि: 'एहि मे कोनो भलाई नहि अछि'। आ मना क देलखिन। मालिक बजलाह; 'हम जैद बिन असलम सँ पुछलियनि, अल घुबैरा की होइत छैक? तेँ ओ उत्तर देलथिन। 'से अल उस्करकाह -धानक भाव-'।
Imam Malik : 1333
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ شَرِبَ الْخَمْرَ فِي الدُّنْيَا ثُمَّ لَمْ يَتُبْ مِنْهَا حُرِمَهَا فِي الْآخِرَةِ
हमरा [नाफी’] स मालिक स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स कहल गेल अछि जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे जे कियो एहि दुनिया मे शराब पीत आ फेर पश्चाताप नहि करत, ओकरा परलोक मे शराब पीबय स मना क देल जाएत।
Imam Malik : 1334
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ ابْنِ وَعْلَةَ الْمِصْرِيِّأَنَّهُ سَأَلَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ عَمَّا يُعْصَرُ مِنْ الْعِنَبِ فَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ أَهْدَى رَجُلٌ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَاوِيَةَ خَمْرٍ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَا عَلِمْتَ أَنَّ اللَّهَ حَرَّمَهَا قَالَ لَا فَسَارَّهُ رَجُلٌ إِلَى جَنْبِهِ فَقَالَ لَهُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمَ سَارَرْتَهُ فَقَالَ أَمَرْتُهُ أَنْ يَبِيعَهَا فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ الَّذِي حَرَّمَ شُرْبَهَا حَرَّمَ بَيْعَهَا فَفَتَحَ الرَّجُلُ الْمَزَادَتَيْنِ حَتَّى ذَهَبَ مَا فِيهِمَا
याह्या हमरा [जैद बिन असलम] स मालिक स [इब्न वअलाह अल मिश्री] स कहलथि जे ओ अब्दुल्ला बिन अब्बास स अंगूर दबाबय क बारे मे पूछलथि। [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] उत्तर देलनि; 'एक बेर एकटा युवक रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्ल्लम के एक गिलास शराब उपहार में देलखिन, तखन रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन; 'की अहाँ के ई नै बुझल अछि जे अल्लाह एकरा मना क देने छथि'। ओ उत्तर देलथिन; 'नहि'। तखन ओ आदमी ओहि पात्र केँ बगल मे नुका लेलक। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: 'अहाँ एकरा किएक नुका देलहुं?' ओ उत्तर देलथिन; 'हम कहलियनि जे बेचि दियौक'। तखन रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: ‘सत्ते, जे पीबय सं मना अछि ओकरा बेचब मना अछि,’ तखन युवक दुनू पात्र खोलि ओहि मे जे छल से फेकि देलक।
Imam Malik : 1335
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ قَالَكُنْتُ أَسْقِي أَبَا عُبَيْدَةَ بْنَ الْجَرَّاحِ وَأَبَا طَلْحَةَ الْأَنْصَارِيَّ وَأُبَيَّ بْنَ كَعْبٍ شَرَابًا مِنْ فَضِيخٍ وَتَمْرٍ قَالَ فَجَاءَهُمْ آتٍ فَقَالَ إِنَّ الْخَمْرَ قَدْ حُرِّمَتْ فَقَالَ أَبُو طَلْحَةَ يَا أَنَسُ قُمْ إِلَى هَذِهِ الْجِرَارِ فَاكْسِرْهَا قَالَ فَقُمْتُ إِلَى مِهْرَاسٍ لَنَا فَضَرَبْتُهَا بِأَسْفَلِهِ حَتَّى تَكَسَّرَتْ
हमरा मलिक स [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] स [अनास बिन मलिक] स कहल गेल अछि; 'हम अबू उबैदा बिन अल जर्राह, अबू तल्हाह अल अंसारी आ उबै बिन काब के जवान आ पाकल खजूर के रस सं पीबय के पानि परोसलहुं'. अनस बाजल; 'तखन कियो आबि क' कहलक जे शराब मना अछि, अबू तलहा कहलनि; 'हे अनस, ठाढ़ भ' क' एहि पात्र सभ केँ नष्ट करू'। अनस बाजल; 'त' हम अपन बैरल लग ठाढ़ भ' क' नीचाँ सँ मारि देलियैक जा धरि ओ टूटि नहि गेलै।'
Imam Malik : 1336
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ دَاوُدَ بْنِ الْحُصَيْنِ عَنْ وَاقِدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ سَعْدِ بْنِ مُعَاذٍ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ عَنْ مَحْمُودِ بْنِ لَبِيدٍ الْأَنْصَارِيِّ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِحِينَ قَدِمَ الشَّامَ شَكَا إِلَيْهِ أَهْلُ الشَّامِ وَبَاءَ الْأَرْضِ وَثِقَلَهَا وَقَالُوا لَا يُصْلِحُنَا إِلَّا هَذَا الشَّرَابُ فَقَالَ عُمَرُ اشْرَبُوا هَذَا الْعَسَلَ قَالُوا لَا يُصْلِحُنَا الْعَسَلُ فَقَالَ رَجُلٌ مِنْ أَهْلِ الْأَرْضِ هَلْ لَكَ أَنْ نَجْعَلَ لَكَ مِنْ هَذَا الشَّرَابِ شَيْئًا لَا يُسْكِرُ قَالَ نَعَمْ فَطَبَخُوهُ حَتَّى ذَهَبَ مِنْهُ الثُّلُثَانِ وَبَقِيَ الثُّلُثُ فَأَتَوْا بِهِ عُمَرَ فَأَدْخَلَ فِيهِ عُمَرُ إِصْبَعَهُ ثُمَّ رَفَعَ يَدَهُ فَتَبِعَهَا يَتَمَطَّطُ فَقَالَ هَذَا الطِّلَاءُ هَذَا مِثْلُ طِلَاءِ الْإِبِلِ فَأَمَرَهُمْ عُمَرُ أَنْ يَشْرَبُوهُ فَقَالَ لَهُ عُبَادَةُ بْنُ الصَّامِتِ أَحْلَلْتَهَا وَاللَّهِ فَقَالَ عُمَرُ كَلَّا وَاللَّهِ اللَّهُمَّ إِنِّي لَا أُحِلُّ لَهُمْ شَيْئًا حَرَّمْتَهُ عَلَيْهِمْ وَلَا أُحَرِّمُ عَلَيْهِمْ شَيْئًا أَحْلَلْتَهُ لَهُمْ
हमरा मलिक स॑ [दाउद बिन अल हुशैन] स॑ [वाकिद बिन अमरू बिन स’अद बिन मुअदज] स॑ कहलऽ गेलऽ छै कि हुनी हुनका रिपोर्ट करलकै, [महमूद बिन लबीद अल अंसारी] स॑ कि जब॑ [उमर बिन खट्टाब] सीरिया पहुँचलै त॑ सीरिया केरऽ लोगऽ न॑ हुनका स॑ ई महामारी के शिकायत करलकै जे आरू खराब होय रहलऽ छेलै । ओ सभ कहलक; 'एहि पानि पीबाक अतिरिक्त किछुओ हमरा सभकेँ ठीक नहि करैत अछि' । उमर बजलाह; 'ई मधु पीबू'। ओ सभ उत्तर देलथिन; 'ई मधु प्रभावी नहि अछि'। तखन कियो जे प्लेग संक्रमित छल से कहलक; 'की हम सभ एहि पेय सँ किछु एहन बना सकैत छी जे मादक नहि हो?' उमर बिन खट्टाब उत्तर देलनि; 'हँ'। दू तिहाई समाप्त आ एक तिहाई रहि गेल ता धरि पकाबैत रहलाह, तखन उमर लग ल' गेलाह । उमर अपन आँगुर घुसा कऽ हाथ उठौलक आ ओकर बाद एकटा नल। तखन ओ कहलनि; 'ई शराब ऊँटक तेल जकाँ अछि'। तेँ उमर हुनका सभकेँ कहलखिन जे एकरा पीबि लिअ'। उबादा बिन शमित ओकरा कहलकै; 'अल्लाह के कसम, अहाँ एकरा जायज बना देलियैक'। उमर जबाब देलकै; 'एकदम नहि। अल्लाह केरऽ कसम, हे अल्लाह, हम्में ओकरा सिनी लेली वू चीज क॑ जायज नै बनैल॑ छेलियै जेकरा तोहें नाजायज करी देल॑ छेलियै आरू ओकरा सिनी लेली ओकरा गैरकानूनी नै बनैल॑ छेलियै ।'
Imam Malik : 1337
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رِجَالًا مِنْ أَهْلِ الْعِرَاقِ قَالُوا لَهُ يَا أَبَا عَبْدِ الرَّحْمَنِ إِنَّا نَبْتَاعُ مِنْ ثَمَرِ النَّخْلِ وَالْعِنَبِ فَنَعْصِرُهُ خَمْرًا فَنَبِيعُهَا فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ إِنِّي أُشْهِدُ اللَّهَ عَلَيْكُمْ وَمَلَائِكَتَهُ وَمَنْ سَمِعَ مِنْ الْجِنِّ وَالْإِنْسِ أَنِّي لَا آمُرُكُمْ أَنْ تَبِيعُوهَا وَلَا تَبْتَاعُوهَا وَلَا تَعْصِرُوهَا وَلَا تَشْرَبُوهَا وَلَا تَسْقُوهَا فَإِنَّهَا رِجْسٌ مِنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ
हमरा मलिक सं [नाफी’] सं [अब्दुल्लाह बिन उमर] सं कहल गेल अछि जे इराकी आबादी सं किछु लोक हुनका कहलनि; 'हे अबू अब्दुररहमान, हम खजूर आ अंगूर कीनलहुँ तखन ओकरा एक तरहक शराब मे दबा क' बेचि देलियैक'। अब्दुल्ला बिन उमर कहलनि; 'हम अहाँक गवाही अल्लाह, हुनकर स्वर्गदूत आ जे कियो जिन्न आ मनुक्ख मे सँ सुनैत अछि।' असल मे हम कहियो नहि कहलहुँ जे एकरा बेचू, वा कीनि लिअ, वा रंगदारी करू, वा पीबि लिअ, आ ने दोसर लोकक सेवा करू, कारण से शैतानक अशुद्ध काज अछि'।
Imam Malik : 1338
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّ فِي الْكِتَابِ الَّذِي كَتَبَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِعَمْرِو بْنِ حَزْمٍ فِي الْعُقُولِ أَنَّ فِي النَّفْسِ مِائَةً مِنْ الْإِبِلِ وَفِي الْأَنْفِ إِذَا أُوعِيَ جَدْعًا مِائَةٌ مِنْ الْإِبِلِ وَفِي الْمَأْمُومَةِ ثُلُثُ الدِّيَةِ وَفِي الْجَائِفَةِ مِثْلُهَا وَفِي الْعَيْنِ خَمْسُونَ وَفِي الْيَدِ خَمْسُونَ وَفِي الرِّجْلِ خَمْسُونَ وَفِي كُلِّ أُصْبُعٍ مِمَّا هُنَالِكَ عَشْرٌ مِنْ الْإِبِلِ وَفِي السِّنِّ خَمْسٌ وَفِي الْمُوضِحَةِ خَمْسٌ
यह्या हमरा [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर बिन मुहम्मद बिन अमरू बिन हज़म] स॑ [अपनऽ पिता] स॑ मलिक स॑ बतैलकै कि अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह (स.अ.व.) न॑ दियात के संबंध म॑ अम्रू बिन हज़म क॑ जे चिट्ठी लिखलकै, वू कि: हर एक सौ ऊंट लेली, एक नाक लेली अगर ओकरा दरार या काटलऽ जाय छै, त॑ डायत सौ होय छै ऊँट, माथक घावक लेल तखन दियातक एक तिहाई, आ भीतरक घावक लेल सेहो एक तिहाई, आँखिक घाव लेल पचास, हाथक लेल पचास आ एक पैरक लेल सेहो पचास। एक-एकटा आँगुरक लेल दस टा ऊँट, एकटा दाँत आ एकटा घावक लेल जतय हड्डी देखाइत अछि, पाँच-पाँच ऊँट।
Imam Malik : 1339
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك أَنَّ ابْنَ شِهَابٍكَانَ يَقُولُ فِي دِيَةِ الْعَمْدِ إِذَا قُبِلَتْ خَمْسٌ وَعِشْرُونَ بِنْتَ مَخَاضٍ وَخَمْسٌ وَعِشْرُونَ بِنْتَ لَبُونٍ وَخَمْسٌ وَعِشْرُونَ حِقَّةً وَخَمْسٌ وَعِشْرُونَ جَذَعَةً
याह्या हमरा मालिक सँ कहलनि जे [इब्न शिहाब] कहलनि; जानि-बुझि कए हत्याक दियातक संबंध मे, 'जँ मारल गेल तखन पच्चीस बिन्तु मखादल, पच्चीस बिन्तू लबून, पच्चीस हिक्का आ पच्चीस जद'।
Imam Malik : 1340
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ مَرْوَانَ بْنَ الْحَكَمِ كَتَبَ إِلَى مُعَاوِيَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَأَنَّهُ أُتِيَ بِمَجْنُونٍ قَتَلَ رَجُلًا فَكَتَبَ إِلَيْهِ مُعَاوِيَةُ أَنْ اعْقِلْهُ وَلَا تُقِدْ مِنْهُ فَإِنَّهُ لَيْسَ عَلَى مَجْنُونٍ قَوَدٌ
मलिक हमरा [याह्या बिन सईद] स॑ कहलकै कि मरवान बिन अल हकम न॑ [मुअविया बिन अबू सुफियन] क॑ चिट्ठी लिखलकै, कि ओकरऽ सामना एगो पागल स॑ होय गेलऽ छै जे ककरो हत्या करी चुकलऽ छै । तेँ मुअविया उत्तर देलनि; 'ओकरा बान्हि दियौक आ ओकर प्रतिकार नहि करू, कारण पागल किशा नहि भ' सकैत अछि'।