Imam Malik : 1301
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَزَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُئِلَ عَنْ الْأَمَةِ إِذَا زَنَتْ وَلَمْ تُحْصِنْ فَقَالَ إِنْ زَنَتْ فَاجْلِدُوهَا ثُمَّ إِنْ زَنَتْ فَاجْلِدُوهَا ثُمَّ إِنْ زَنَتْ فَاجْلِدُوهَا ثُمَّ بِيعُوهَا وَلَوْ بِضَفِيرٍقَالَ ابْنُ شِهَابٍ لَا أَدْرِي أَبَعْدَ الثَّالِثَةِ أَوْ الرَّابِعَةِ قَالَ يَحْيَى سَمِعْت قَوْله تَعَالَى يَقُولُ وَالضَّفِيرُ الْحَبْلُ
हमरा [इब्न शिहाब] स॑ मलिक न॑ [अबू हुरैरा] स॑ [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] स॑ आरू [जैद बिन खालिद अल जुहानी] स॑ कहल॑ छै कि रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वस्लाम स॑ एगो महिला दास के बारे म॑ पूछलऽ गेलऽ छेलै जे व्यभिचार करलकै आरू अभी तलक शादी नै करलकै । ओ उत्तर देलथिन: ‘जँ ओ व्यभिचार करत तखन ओकरा बान्हि दियौक, जँ फेर व्यभिचार करत तखन ओकरा बान्हि दियौक, जँ फेर व्यभिचार करत तखन ओकरा बान्हि दियौक।’ तखन ओकरा द्लाफिर -केशक टाई-' मे सेहो बेचि दियौक। इब्न शिहाब कहलनि; 'पता नहि तेसर व्यभिचारक बाद वा चारिम' । याह्या कहलक; 'मलिक कहैत सुनने छी जे द्लाफिर रस्सी थिक'।
Imam Malik : 1302
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّعَبْدًا كَانَ يَقُومُ عَلَى رَقِيقِ الْخُمُسِ وَأَنَّهُ اسْتَكْرَهَ جَارِيَةً مِنْ ذَلِكَ الرَّقِيقِ فَوَقَعَ بِهَا فَجَلَدَهُ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ وَنَفَاهُ وَلَمْ يَجْلِدْ الْوَلِيدَةَ لِأَنَّهُ اسْتَكْرَهَهَا
[नाफी'] स मालिक हमरा कहलक जे कियो एक पांचवा भाग स दास मांगलक, फेर ओ एक पांचवा हिस्सा स एकटा महिला दास कए जबरदस्ती ल लेलक आ फेर ओकरा संग यौन शोषण केलक। तखन [उमर बिन खट्टाब] ओकरा बान्हि क' निर्वासित क' देलक, जखन कि महिला दासी दबाव मे रहबाक कारणेँ बान्हल नहि छलैक।'
Imam Malik : 1303
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ سُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَيَّاشِ بْنِ أَبِي رَبِيعَةَ الْمَخْزُومِيَّ قَالَ أَمَرَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِفِي فِتْيَةٍ مِنْ قُرَيْشٍ فَجَلَدْنَا وَلَائِدَ مِنْ وَلَائِدِ الْإِمَارَةِ خَمْسِينَ خَمْسِينَ فِي الزِّنَا
मलिक हमरा [याह्या बिन सईद] स बतेलथि जे [सुलेमान बिन यासर] हुनका रिपोर्ट केलथि जे [अब्दुल्लाह बिन अय्यासी बिन अबू रबियाह अल मखज़ूमी] कहलनि; 'हमरा [उमर बिन खत्ताब] के आदेश छल जे कुरैश के एकटा युवक के फांसी देल जाय, तखन हम सब सरकारी गुलाम स किछु महिला दास के जिना के मामला में पचास बाई पचास बान्हि देलियैक'।
Imam Malik : 1304
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ أَنَّهُ قَالَ جَلَدَ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَبْدًا فِي فِرْيَةٍ ثَمَانِينَ قَالَ أَبُو الزِّنَادِ فَسَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَامِرِ بْنِ رَبِيعَةَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ أَدْرَكْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ وَعُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ وَالْخُلَفَاءَ هَلُمَّ جَرًّا فَمَا رَأَيْتُ أَحَدًا جَلَدَ عَبْدًا فِي فِرْيَةٍ أَكْثَرَ مِنْ أَرْبَعِينَ
हमरा कहने छल मलिक [अबू अज जिनाद] स कहलक; उमर बिन अब्दुल अजीस एकटा पुरुष दास के जे बिना गवाह के व्यभिचार के निंदा फैलाबैत छल ओकरा अस्सी कोड़ा स सजा देलखिन'। अबू जिनाद कहलनि; 'हम तखन [अब्दुल्लाह बिन अमीर बिन रबियाह] सँ पूछलहुँ, ओ उत्तर देलनि; "हम [उमर बिन खत्ताब], [उस्मान बिन अफ्फान] आरू अन्य खलीफा के साथ रहतें छेलियै, हमरा ओकरा सिनी में से कोय भी नै मिललै जे गवाह के रूप में चालीस सें अधिक डेरा के साथ-साथ व्यभिचार के निंदा फैलाबै वाला गुलाम के पीटै छेलै।"
Imam Malik : 1305
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زُرَيْقِ بْنِ حَكِيمٍ الْأَيْلِيِّأَنَّ رَجُلًا يُقَالُ لَهُ مِصْبَاحٌ اسْتَعَانَ ابْنًا لَهُ فَكَأَنَّهُ اسْتَبْطَأَهُ فَلَمَّا جَاءَهُ قَالَ لَهُ يَا زَانٍ قَالَ زُرَيْقٌ فَاسْتَعْدَانِي عَلَيْهِ فَلَمَّا أَرَدْتُ أَنْ أَجْلِدَهُ قَالَ ابْنُهُ وَاللَّهِ لَئِنْ جَلَدْتَهُ لَأَبُوءَنَّ عَلَى نَفْسِي بِالزِّنَا فَلَمَّا قَالَ ذَلِكَ أَشْكَلَ عَلَيَّ أَمْرُهُ فَكَتَبْتُ فِيهِ إِلَى عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ وَهُوَ الْوَالِي يَوْمَئِذٍ أَذْكُرُ لَهُ ذَلِكَ فَكَتَبَ إِلَيَّ عُمَرُ أَنْ أَجِزْ عَفْوَهُقَالَ زُرَيْقٌ وَكَتَبْتُ إِلَى عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ أَيْضًا أَرَأَيْتَ رَجُلًا افْتُرِيَ عَلَيْهِ أَوْ عَلَى أَبَوَيْهِ وَقَدْ هَلَكَا أَوْ أَحَدُهُمَا قَالَ فَكَتَبَ إِلَيَّ عُمَرُ إِنْ عَفَا فَأَجِزْ عَفْوَهُ فِي نَفْسِهِ وَإِنْ افْتُرِيَ عَلَى أَبَوَيْهِ وَقَدْ هَلَكَا أَوْ أَحَدُهُمَا فَخُذْ لَهُ بِكِتَابِ اللَّهِ إِلَّا أَنْ يُرِيدَ سِتْرًا
मलिक हमरा [जुरैक बिन हकीम अल ऐली] स बतौलनि जे मिसबाह नामक एकटा आदमी अपन बेटा स मदद मंगलक, मुदा जेना ओकर बेटा देरी क रहल अछि। बेटा आबि गेलै तऽ कहलकै, ‘हे व्यभिचारी!’ ज़ुरैक - कथाकार - कहलनि; 'तखन हुनकर बेटा हमरासँ मददि मंगलक - पिताक आरोपक संबंधमे - . जखन हम हुनकर पिता के लात मारय जा रहल छलहुं त हुनकर बेटा कहलक: 'अल्लाह के कसम, जौं अहाँ हुनका लात मारब त हम व्यभिचार के बात कबूल क लेब।' जखन ओ ई बात कहलनि तखन हमरा लेल मामला आओर कठिन भ गेल। तखन हम उमर बिन अब्दुल अजीज के चिट्ठी लिखलहुं जे तखन खलीफा छलाह. तखन [उमर बिन अब्दुल अजीज] हमरा वापस लिखि क' कहलक जे हुनकर बेटाक माफी हुनकर पिता केँ दियौक।' ज़ुरैक कहलकै; 'हम तखन फेर ओकरा लिखलहुँ, 'अहाँक की विचार अछि जे कोनो आदमी वा ओकर दुनू माता-पिता पर व्यभिचारक आरोप लागल हो, जखन कि ओकर दुनू वा ओकर दुनू माता-पिता मे सँ एक गोटे मरि गेल छथि?' ज़ुरैक कहलकै; 'त' उमर जबाब देलखिन; 'जँ ओ आदमी - आरोपी - आरोपक माफ क' दैत अछि त' ओकर देल क्षमा स्वीकार करू।' आरू अगर आरोपी दोनों माता-पिता छै, आरू दोनों या एक के मौत होय गेलऽ छै, त॑ अल्लाह केरऽ किताब के अनुसार फैसला करलऽ जाय, जब॑ तलक कि वू एकरा गुप्त नै रखना चाहै छै' ।
Imam Malik : 1306
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ قَالَ فِي رَجُلٍ قَذَفَ قَوْمًا جَمَاعَةً أَنَّهُ لَيْسَ عَلَيْهِ إِلَّا حَدٌّ وَاحِدٌقَالَ مَالِك وَإِنْ تَفَرَّقُوا فَلَيْسَ عَلَيْهِ إِلَّا حَدٌّ وَاحِدٌ
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [हुनकरऽ पिता] स॑ [हिस्यम बिन उर्वाह] स॑ मलिक न॑ एक आदमी के बारे म॑ कहलकै जे लोगऽ के एगो समूह प॑ व्यभिचार करै के आरोप लगैलकै, त॑ ओकरा प॑ कोय सजा नै देलऽ गेलै लेकिन एक आदमी क॑ ही छेलै' । मालिक बजलाह; 'प्रतिवादी अलग-अलग रहितो एखनो मात्र एकटा वाक्यक अधीन छथि'।
Imam Malik : 1307
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الرِّجَالِ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَارِثَةَ بْنِ النُّعْمَانِ الْأَنْصَارِيِّ ثُمَّ مِنْ بَنِي النَّجَّارِ عَنْ أُمِّهِ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِأَنَّ رَجُلَيْنِ اسْتَبَّا فِي زَمَانِ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَقَالَ أَحَدُهُمَا لِلْآخَرِ وَاللَّهِ مَا أَبِي بِزَانٍ وَلَا أُمِّي بِزَانِيَةٍ فَاسْتَشَارَ فِي ذَلِكَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَقَالَ قَائِلٌ مَدَحَ أَبَاهُ وَأُمَّهُ وَقَالَ آخَرُونَ قَدْ كَانَ لِأَبِيهِ وَأُمِّهِ مَدْحٌ غَيْرُ هَذَا نَرَى أَنْ تَجْلِدَهُ الْحَدَّ فَجَلَدَهُ عُمَرُ الْحَدَّ ثَمَانِينَ
मलिक हमरा [अबू अल रिजाल मुहम्मद बिन अब्दुररहमान बिन हरिथह बिन अन नु'मान अल अंसारी] स - ओ बनी अन नज्जर स छथि - अपन माँ ['अमर बिन अब्दुररहमान] स बतेलथि जे उमर बिन खट्टाब क शासनकाल मे दूटा आदमी छल जे एक दोसर क आलोचना क रहल छल। एक गोटे दोसरकेँ कहलकनि - अल्लाहक कसम हमर बाबूजी आ माँ व्यभिचारी नहि छथि । तखन [उमर बिन खट्टाब] एहि विषय मे परामर्श केलनि। एक आदमी तखन कहलक: 'वास्तव मे ओ अपन पिता आ मायक प्रशंसा करैत अछि!' जखन कि दोसर कहलक: 'ओहि सँ बेसी ओकर पिता-माँ प्रशंसाक पात्र छथि।' तेँ हमरा सभकेँ लगैत अछि जे अहाँकेँ ओहि आदमीकेँ सजा देबाक चाही।' तकर बाद उमर अस्सी कोड़ासँ मारि देलकैक।'
Imam Malik : 1308
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِقَالَ لِرَجُلٍ خَرَجَ بِجَارِيَةٍ لِامْرَأَتِهِ مَعَهُ فِي سَفَرٍ فَأَصَابَهَا فَغَارَتْ امْرَأَتُهُ فَذَكَرَتْ ذَلِكَ لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَسَأَلَهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ وَهَبَتْهَا لِي فَقَالَ عُمَرُ لَتَأْتِينِي بِالْبَيِّنَةِ أَوْ لَأَرْمِيَنَّكَ بِالْحِجَارَةِ قَالَ فَاعْتَرَفَتْ امْرَأَتُهُ أَنَّهَا وَهَبَتْهَا لَهُ
मलिक हमरा [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] स कहलथि जे [उमर बिन खत्ताब] एक बेर एकटा आदमी स कहने छलाह जे अपन पत्नी क महिला दास क संग यात्रा पर छल जे फेर ओ हुनका संग सेक्स केलक। तखन हुनकर पत्नी केँ ईर्ष्या भेलनि आ ओ उमर बिन खट्टाब केँ एकर सूचना देलनि। उमर बिन खट्टाब तखन ओहि आदमी स पूछलखिन जे ओ महिला दास के संग यौन संबंध के बारे मे छल, ओ आदमी जवाब देलक, 'ओ हमरा द देने अछि! ' उमर कहलकै -अपन पत्नी सँ-; 'अहाँ प्रमाण दियौक आकि हम अहाँ पर पाथर फेकि देब?' रबिया कहलक; 'तखन पत्नी स्वीकार केलनि जे ओ हुनका द' देने छलीह'।
Imam Malik : 1309
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَطَعَ فِي مِجَنٍّ ثَمَنُهُ ثَلَاثَةُ دَرَاهِمَ
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] स॑ [नफी’] स॑ मलिक न॑ कहलकै, ‘अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ हाथ एक बार तीन दिरहम केरऽ ढाल के वजह स॑ काटलऽ गेलऽ छेलै’ ।
Imam Malik : 1310
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي حُسَيْنٍ الْمَكِّيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا قَطْعَ فِي ثَمَرٍ مُعَلَّقٍ وَلَا فِي حَرِيسَةِ جَبَلٍ فَإِذَا آوَاهُ الْمُرَاحُ أَوْ الْجَرِينُ فَالْقَطْعُ فِيمَا يَبْلُغُ ثَمَنَ الْمِجَنِّ
हमरा मलिक सँ [अब्दुल्लाह बिन अब्दुररहमान बिन अबू हुसैन अल मकी] सँ रिवायत कयल गेल अछि जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहलनि: "जे फल एखनो लटकल अछि वा जे पहाड़ मे बाड़ि सँ सुरक्षित अछि ओकर हाथ काटि देबाक कोनो कानून नहि अछि। जँ पशुधनक आश्रय वा चाउर कुटबाक स्थान अछि।" संरक्षित, तखन हाथ काटि देबाक सजा ता धरि लागू होइत छैक जाबत धरि चोरीक सामान ढाल केर मूल्य धरि पहुँचि जाइत छैक |"
Imam Malik : 1311
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِأَنَّ سَارِقًا سَرَقَ فِي زَمَانِ عُثْمَانَ أُتْرُجَّةً فَأَمَرَ بِهَا عُثْمَانُ بْنُ عَفَّانَ أَنْ تُقَوَّمَ فَقُوِّمَتْ بِثَلَاثَةِ دَرَاهِمَ مِنْ صَرْفِ اثْنَيْ عَشَرَ دِرْهَمًا بِدِينَارٍ فَقَطَعَ عُثْمَانُ يَدَهُ
हमरा [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर] स मालिक स [अपन पिता] स [अमरा बिंत अब्दुररहमान] स कहल गेल छल जे उस्मान क समय मे एकटा चोर एकटा उत्रुजा फल - एकदम खट्टा फल - चोरा लेलक। तखन [उस्मान] एकर दाम गणना करबाक आदेश देलनि। फल के दाम एक दिनार के बारह दिरहम के दर पर तीन दिरहम छल, फेर 'उस्मान हुनकर हाथ काटि देलखिन्ह'.
Imam Malik : 1312
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْمَا طَالَ عَلَيَّ وَمَا نَسِيتُ الْقَطْعُ فِي رُبُعِ دِينَارٍ فَصَاعِدًا
ई हमरा मलिक स॑ [याह्या बिन सईद] स॑ [‘अमरा बिन अब्दुररहमान] स॑ [’अमरा बिन अब्दुररहमान] स॑ [’आइशा] स॑ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ पत्नी स॑ कहलऽ गेलऽ छेलै, हुनी कहलकै: ‘हमरा देखै के बहुत दिन नै होय गेलऽ छै आरू ई अभी तलक हमरऽ याद स॑ फीका नै होय गेलऽ छै कि चोर के हाथ काटना एक चौथाई दिनार या ओकरा स॑ भी अधिक के लेलऽ छै ।’
Imam Malik : 1313
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ حَزْمٍ عَنْ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّهَا قَالَتْخَرَجَتْ عَائِشَةُ زَوْجُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى مَكَّةَ وَمَعَهَا مَوْلَاتَانِ لَهَا وَمَعَهَا غُلَامٌ لِبَنِي عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ فَبَعَثَتْ مَعَ الْمَوْلَاتَيْنِ بِبُرْدٍ مُرَجَّلٍ قَدْ خِيطَ عَلَيْهِ خِرْقَةٌ خَضْرَاءُ قَالَتْ فَأَخَذَ الْغُلَامُ الْبُرْدَ فَفَتَقَ عَنْهُ فَاسْتَخْرَجَهُ وَجَعَلَ مَكَانَهُ لِبْدًا أَوْ فَرْوَةً وَخَاطَ عَلَيْهِ فَلَمَّا قَدِمَتْ الْمَوْلَاتَانِ الْمَدِينَةَ دَفَعَتَا ذَلِكَ إِلَى أَهْلِهِ فَلَمَّا فَتَقُوا عَنْهُ وَجَدُوا فِيهِ اللِّبْدَ وَلَمْ يَجِدُوا الْبُرْدَ فَكَلَّمُوا الْمَرْأَتَيْنِ فَكَلَّمَتَا عَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ كَتَبَتَا إِلَيْهَا وَاتَّهَمَتَا الْعَبْدَ فَسُئِلَ الْعَبْدُ عَنْ ذَلِكَ فَاعْتَرَفَ فَأَمَرَتْ بِهِ عَائِشَةُ زَوْجُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُطِعَتْ يَدُهُ وَقَالَتْ عَائِشَةُ الْقَطْعُ فِي رُبُعِ دِينَارٍ فَصَاعِدًا
हमरा मलिक सँ [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर बिन हजम] सँ [अमरा बिंत अब्दुररहमान] सँ रिवायत कयल गेल अछि जे कहलनि: '[ऐशा], नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम केर पत्नी अपन दू टा दासी आ अब्दुल्लाह बिन अबू बकर अस सिद्दीक कबीला सँ एकटा पुरुष नौकरक संग मक्का गेलीह। तखन आइशा अपन दुनू गुलामक माध्यमे, हरियर कपड़ाक टुकड़ीसँ सिलल चित्रक संग एकटा कम्बल पठौलनि। अम्रा बिन्त अब्दुररहमान कहलनि: 'जे पुरुष नौकर हुनका संग छल, ओ कम्बल ल' क' सिलाई फाड़ि क' सामग्री निकालि लेलक, दास तखन ओकरा बदलि काठीक कपड़ा वा एक तरहक चमड़ाक लाइनबला वस्त्र लगा देलक, तखन ओकरा सिय लेलक।' दुनू दासी मदीना पहुँचला पर आइशाक परिवार केँ सौंप देलक। आ जखन खोललनि तऽ अल लैबद भेटलनि आ कोनो कम्बल नहि। तखन दुनू दासीसँ पूछताछ केलक, आ अंततः नबीक पत्नी ऐशा (स.अ.व.) केँ एहि बातक सूचना देलक, वा दुनू गोटे ओकरा चिट्ठी पठौलक। दुनू दासीकेँ शंका भेलैक जे पुरुष दास ई काज केने अछि । तखन पुरुष दास सँ पूछताछ कयल गेल, आ ओ स्वीकार केलक। नबी केरऽ पत्नी (स.अ.व.) ऐशा न॑ हुनकऽ हाथ काटै के आदेश देलकै, ई कहतें हुअ॑ कि, "हाथ एक चौथाई दिनार या ओकरा स॑ भी अधिक होय जाय छै त॑ ओकरा काटलऽ जाय छै।"
Imam Malik : 1314
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدًا لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَسَرَقَ وَهُوَ آبِقٌ فَأَرْسَلَ بِهِ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ إِلَى سَعِيدِ بْنِ الْعَاصِ وَهُوَ أَمِيرُ الْمَدِينَةِ لِيَقْطَعَ يَدَهُ فَأَبَى سَعِيدٌ أَنْ يَقْطَعَ يَدَهُ وَقَالَ لَا تُقْطَعُ يَدُ الْآبِقِ السَّارِقِ إِذَا سَرَقَ فَقَالَ لَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ فِي أَيِّ كِتَابِ اللَّهِ وَجَدْتَ هَذَا ثُمَّ أَمَرَ بِهِ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ فَقُطِعَتْ يَدُهُ
हमरा [नाफी'] स मालिक स इ बात कहल गेल जे गुलाम अब्दुल्ला बिन उमर चोरा लेलक आ फेर भागि गेल, फेर अब्दुल्ला बिन उमर एहि मामला कए मदीना क गवर्नर सईद बिन अल ऐश कए ओकर हाथ काटि देबा लेल सौंप देलथि। सईद मना क देलखिन आ कहलखिन- भागै वाला चोर के हाथ नै काटल जाय छै। [अब्दुल्लाह बिन उमर] पुछलखिन: 'अहाँ के ई अल्लाह के कोन किताब में भेटैत अछि?' तखन अब्दुल्ला बिन उमर आदेश देलनि जे हुनकर हाथ काटि देल जाय।'
Imam Malik : 1315
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زُرَيْقِ بْنِ حَكِيمٍ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ أَخَذَ عَبْدًا آبِقًا قَدْ سَرَقَ قَالَ فَأَشْكَلَ عَلَيَّ أَمْرُهُ قَالَ فَكَتَبْتُ فِيهِ إِلَى عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِأَسْأَلُهُ عَنْ ذَلِكَ وَهُوَ الْوَالِي يَوْمَئِذٍ قَالَ فَأَخْبَرْتُهُ أَنَّنِي كُنْتُ أَسْمَعُ أَنَّ الْعَبْدَ الْآبِقَ إِذَا سَرَقَ وَهُوَ آبِقٌ لَمْ تُقْطَعْ يَدُهُ قَالَ فَكَتَبَ إِلَيَّ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ نَقِيضَ كِتَابِي يَقُولُ كَتَبْتَ إِلَيَّ أَنَّكَ كُنْتَ تَسْمَعُ أَنَّ الْعَبْدَ الْآبِقَ إِذَا سَرَقَ لَمْ تُقْطَعْ يَدُهُ وَإِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى يَقُولُ فِي كِتَابِهِ{ وَالسَّارِقُ وَالسَّارِقَةُ فَاقْطَعُوا أَيْدِيَهُمَا جَزَاءً بِمَا كَسَبَا نَكَالًا مِنْ اللَّهِ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ }فَإِنْ بَلَغَتْ سَرِقَتُهُ رُبُعَ دِينَارٍ فَصَاعِدًا فَاقْطَعْ يَدَهُو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ وَسَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ وَعُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِ كَانُوا يَقُولُونَ إِذَا سَرَقَ الْعَبْدُ الْآبِقُ مَا يَجِبُ فِيهِ الْقَطْعُ قُطِعَ قَالَ مَالِك وَذَلِكَ الْأَمْرُ الَّذِي لَا اخْتِلَافَ فِيهِ عِنْدَنَا أَنَّ الْعَبْدَ الْآبِقَ إِذَا سَرَقَ مَا يَجِبُ فِيهِ الْقَطْعُ قُطِعَ
मलिक सँ हमरा ई बात कहल गेल अछि जे [जुरैक बिन हकीम] हुनका सूचित केलनि, जे हुनका एकटा गुलाम भेटलनि जे चोरी क' क' भागि गेलनि। ज़ुरैक आगू बढ़ल; 'ई हमरा लेल परेशानी आमंत्रित करैत अछि।' अस्तु, हम उमर बिन अब्दुल अजीज जे तत्कालीन गवर्नर छलाह, हुनका चिट्ठी लिखलहुं, एहि बारे में पूछय लेल. हम हुनका सूचित केलियनि जे सुनने छी जे दास जे चोरा क' भागि जाइत अछि आ भागि जाइत अछि तखन ओकर हाथ नहि काटल जाइत छैक'। ज़ुरैक आगू बजलाह, ' [उमर बिन अब्दुल अजीज] तखन हमरा वापस लिखलनि आ कहलनि: 'अहाँ हमरा लिखने छी जे अहाँ सुनने छी, जँ कोनो दास जे भागैत अछि, चोरा क' भागि जाइत अछि, तखन ओकर हाथ नहि काटल जाइत अछि, जखन कि अल्लाह तबराका व त'ला अपन किताब मे कहैत छथि: 'चोर चाहे ओ नर हो वा मादा, तखन ओकर हाथ काटि क' ओकर काजक प्रतिफल आ अल्लाह सँ सजा, आ अल्लाह परम उदात्त आ बुद्धिमान छथि- ' -Qs. अल मैदाह : 38- जँ चोरीक सामान एक चौथाई दिनार वा ओहि सँ बेसी भ' जाय त' ओकर हाथ काटि दियौक'। मलिक स॑ हमरा स॑ ई बात कहलऽ गेलऽ छेलै कि हुनका ई बात पहुँचलै कि अल कासिम बिन मुहम्मद आरू सलीम बिन अब्दुल्ला आरू उरवाह बिन जुबैर न॑ कहलकै: "जदि कोनो भागलऽ दास कुछ ऐसनऽ चीज चोरा लै छै जेकरा ओकरऽ हाथ काटै के फर्ज छै, त॑ ओकरऽ हाथ काटना चाहियऽ।" मालिक बजलाह: "ओ एहन बात अछि जाहि पर हमरा सभक बीच कोनो मतभेद नहि अछि, अर्थात जँ कोनो भागल दास एहन चीज चोरा लैत अछि जे ओकर हाथ काटि देब अनिवार्य अछि, तखन ओकर हाथ काटि देल जाय |"
Imam Malik : 1316
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَفْوَانَأَنَّ صَفْوَانَ بْنَ أُمَيَّةَ قِيلَ لَهُ إِنَّهُ مَنْ لَمْ يُهَاجِرْ هَلَكَ فَقَدِمَ صَفْوَانُ بْنُ أُمَيَّةَ الْمَدِينَةَ فَنَامَ فِي الْمَسْجِدِ وَتَوَسَّدَ رِدَاءَهُ فَجَاءَ سَارِقٌ فَأَخَذَ رِدَاءَهُ فَأَخَذَ صَفْوَانُ السَّارِقَ فَجَاءَ بِهِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَمَرَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ تُقْطَعَ يَدُهُ فَقَالَ لَهُ صَفْوَانُ إِنِّي لَمْ أُرِدْ هَذَا يَا رَسُولَ اللَّهِ هُوَ عَلَيْهِ صَدَقَةٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَهَلَّا قَبْلَ أَنْ تَأْتِيَنِي بِهِ
हमरा मलिक स [इब्नु शिहाब] स [शफवान बिन अब्दुल्लाह बिन शफवान] स कहल गेल अछि जे शफवान बिन उमय्याह स कहल गेल छल; 'जे पलायन नहि करत से नाश भ' जायत'। शफवान बिन उमय्याह जखन मदीना पहुँचलाह तखन ओ अपन शाल के तकिया के रूप में उपयोग क मस्जिद में सुतल छलाह | तखन एकटा चोर ओकर शाल ल लेलक, शफवान तुरंत ओकरा पकड़ि लेलक आ ओकरा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लग अनलक। तखन ओ हाथ काटि देबाक आदेश देलनि, मुदा शफवान कहलनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमर मतलब ई नहि छल।' हम एहि कपड़ा सभ केँ हुनका लेल दान मानैत छी'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन कहलनि: 'अहाँ हुनका हमरा लग अनबा सँ पहिने हमरा किएक नहि कहलहुँ?'
Imam Malik : 1317
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ الزُّبَيْرَ بْنَ الْعَوَّامِلَقِيَ رَجُلًا قَدْ أَخَذَ سَارِقًا وَهُوَ يُرِيدُ أَنْ يَذْهَبَ بِهِ إِلَى السُّلْطَانِ فَشَفَعَ لَهُ الزُّبَيْرُ لِيُرْسِلَهُ فَقَالَ لَا حَتَّى أَبْلُغَ بِهِ السُّلْطَانَ فَقَالَ الزُّبَيْرُ إِذَا بَلَغْتَ بِهِ السُّلْطَانَ فَلَعَنَ اللَّهُ الشَّافِعَ وَالْمُشَفِّعَ
मलिक हमरा [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] स कहलनि जे [जुबैर बिन अल अववाम] के एक बेर एकटा एहन आदमी स भेंट भेल छल जे एकटा चोर के पकड़ि लेने छल आ ओकरा अधिकारि के पास ल जेबाक इच्छा रखैत छल। तखन जुबैर कहलखिन जे चोर के माफ क देल जाय आ ओकरा छोड़ि देल जाय। मुदा ओ आदमी कहलक; 'जाबे तक हम ओकरा अधिकारि लग नहि ल' जाइब ताबे नहि'। जुबैर कहलनि; 'जखन अहाँ अधिकारि के पास पहुँचब तखन अल्लाह माफ करय वाला आ माफ करय वाला के गारि देत'।
Imam Malik : 1318
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ رَجُلًا مِنْ أَهْلِ الْيَمَنِ أَقْطَعَ الْيَدِ وَالرِّجْلِ قَدِمَ فَنَزَلَ عَلَى أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِفَشَكَا إِلَيْهِ أَنَّ عَامِلَ الْيَمَنِ قَدْ ظَلَمَهُ فَكَانَ يُصَلِّ مِنْ اللَّيْلِ فَيَقُولُ أَبُو بَكْرٍ وَأَبِيكَ مَا لَيْلُكَ بِلَيْلِ سَارِقٍ ثُمَّ إِنَّهُمْ فَقَدُوا عِقْدًا لِأَسْمَاءَ بِنْتِ عُمَيْسٍ امْرَأَةِ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ فَجَعَلَ الرَّجُلُ يَطُوفُ مَعَهُمْ وَيَقُولُ اللَّهُمَّ عَلَيْكَ بِمَنْ بَيَّتَ أَهْلَ هَذَا الْبَيْتِ الصَّالِحِ فَوَجَدُوا الْحُلِيَّ عِنْدَ صَائِغٍ زَعَمَ أَنَّ الْأَقْطَعَ جَاءَهُ بِهِ فَاعْتَرَفَ بِهِ الْأَقْطَعُ أَوْ شُهِدَ عَلَيْهِ بِهِ فَأَمَرَ بِهِ أَبُو بَكْرٍ الصِّدِّيقُ فَقُطِعَتْ يَدُهُ الْيُسْرَى وَقَالَ أَبُو بَكْرٍ وَاللَّهِ لَدُعَاؤُهُ عَلَى نَفْسِهِ أَشَدُّ عِنْدِي عَلَيْهِ مِنْ سَرِقَتِهِ
याह्या हमरा [अब्दुररहमान बिन अल कासिम] स॑ मलिक स॑ [हुनकरऽ पिता] स॑ कहलकै कि एगो यमन केरऽ आदमी जेकरऽ टांग आरू हाथ काटलऽ गेलऽ छेलै, वू पहुँची क॑ अबू बकर अस सिद्दीक केरऽ जगह प॑ रुकी गेलै । हुनकऽ शिकायत छेलै कि रात म॑ नमाज पढ़ै के दौरान यमन केरऽ एगो अधिकारी न॑ हुनका प॑ हमला करलकै । [अबू बकर] पुछलखिन; 'अहाँक पिताक द्वारा, चोरक संग अहाँक राति केहन रहल'। तखन ओ सभ अबू बकर अस सिद्दीक केर पत्नी असमा` बिंत उमैस केर अंगूठी गमा लेलक आ ओ आदमी - चोर - नमाज पढ़ैत काल हुनका लोकनिक संग खोज मे शामिल भ गेल; 'हे अल्लाह, जे व्यक्ति आइ राति चोरी केने अछि, ओकरा एहि घरक धर्मी मालिक पर सजा दिअ'। एकटा सोनारसँ गहना भेटलनि। आ सोनार कहलक जे ओ आदमी छल जकर हाथ काटि लेल गेल छलैक जे ओकरा अनने छलैक। आ जकर हाथ काटि लेल गेल छलैक से स्वीकार कयलक, वा कतेको गवाह ओकरा सोझाँ आबि गेलैक। त अबू बकर अस सिद्दीक हुनकर बामा हाथ काटि देबाक आदेश देलनि, फेर कहलखिन, 'अल्लाह के कसम, हुनका लेल हुनकर दुआ हमरा लेल हुनकर चोरी के काज स सचमुच पैघ अछि'।
Imam Malik : 1319
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّ أَبَا الزِّنَادِ أَخْبَرَهُ أَنَّ عَامِلًا لِعُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِأَخَذَ نَاسًا فِي حِرَابَةٍ وَلَمْ يَقْتُلُوا أَحَدًا فَأَرَادَ أَنْ يَقْطَعَ أَيْدِيَهُمْ أَوْ يَقْتُلَ فَكَتَبَ إِلَى عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ فِي ذَلِكَ فَكَتَبَ إِلَيْهِ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ لَوْ أَخَذْتَ بِأَيْسَرِ ذَلِكَ
मलिक स हमरा इ बात कहल गेल जे [अबू जिनाद] हुनका सूचित केलथि जे उमर बिन अब्दुल अजीज क मजदूर कईटा डकैत कए पकड़ि लेलक आ ककरो नहि मारलक। आ ओकरा सभक त्यांगन काटि देब वा मारय चाहैत छल, तेँ ओहि मामला पर उमर बिन अब्दुल अजीज केँ चिट्ठी लिखलक। [उमर बिन अब्दुल अजीज] जवाब देलनि; 'जँ अहाँकेँ ओहिसँ हल्लुक किछु सजा भेटैत' ।
Imam Malik : 1320
و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَأَنَّ عَبْدًا سَرَقَ وَدِيًّا مِنْ حَائِطِ رَجُلٍ فَغَرَسَهُ فِي حَائِطِ سَيِّدِهِ فَخَرَجَ صَاحِبُ الْوَدِيِّ يَلْتَمِسُ وَدِيَّهُ فَوَجَدَهُ فَاسْتَعْدَى عَلَى الْعَبْدِ مَرْوَانَ بْنَ الْحَكَمِ فَسَجَنَ مَرْوَانُ الْعَبْدَ وَأَرَادَ قَطْعَ يَدِهِ فَانْطَلَقَ سَيِّدُ الْعَبْدِ إِلَى رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ فَسَأَلَهُ عَنْ ذَلِكَ فَأَخْبَرَهُ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا قَطْعَ فِي ثَمَرٍ وَلَا كَثَرٍ وَالْكَثَرُ الْجُمَّارُ فَقَالَ الرَّجُلُ فَإِنَّ مَرْوَانَ بْنَ الْحَكَمِ أَخَذَ غُلَامًا لِي وَهُوَ يُرِيدُ قَطْعَهُ وَأَنَا أُحِبُّ أَنْ تَمْشِيَ مَعِيَ إِلَيْهِ فَتُخْبِرَهُ بِالَّذِي سَمِعْتَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَشَى مَعَهُ رَافِعٌ إِلَى مَرْوَانَ بْنِ الْحَكَمِ فَقَالَ أَخَذْتَ غُلَامًا لِهَذَا فَقَالَ نَعَمْ فَقَالَ فَمَا أَنْتَ صَانِعٌ بِهِ قَالَ أَرَدْتُ قَطْعَ يَدِهِ فَقَالَ لَهُ رَافِعٌ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا قَطْعَ فِي ثَمَرٍ وَلَا كَثَرٍ فَأَمَرَ مَرْوَانُ بِالْعَبْدِ فَأُرْسِلَ
याह्या हमरा मलिक सँ [मुहम्मद बिन याह्या बिन हब्बन] सँ बतौलनि जे एकटा गुलाम लड़का ककरो गाछी सँ खजूरक छोट-छोट गाछ चोरा क' अपन मालिकक गाछी मे लगा देलक। गाछक मालिक अपन खजूरक गाछ तकैत बाहर निकललाह आ पाबि गेलाह । ओ गुलाम केरऽ हरकत के शिकायत मरवान इब्न अल हकम स॑ करलकै । मरवान दास के जेल में बंद क देलक आ ओकर हाथ काटि देबय चाहैत छल। तखन गुलामक मालिक रफी’ बिन खदीज लग गेलाह आ हुनकासँ एहि विषयमे पुछलनि । तखन [रफी'] हुनका सूचित केलनि जे ओ अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) केँ कहैत सुनने छथि: 'खजूर आ कथर मे हाथक कोनो कटौती नहि होइत छैक, आ कथर खजूरक गाछक म्यानक बर्तन थिक।' ओ आदमी कहलक: ‘मरवान बिन अल हकम हमर नौकर के पकड़ि लेलक आ ओकर हाथ काटि देबय चाहैत छल। त हमरा आशा अछि जे जौं अहाँ हमरा संग जेबाक लेल तैयार छी त हुनका स भेंट करय लेल, ताकि अहाँ जे किछु नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम स सुनने छी ओकरा संप्रेषित क सकब। अस्तु रफी' हुनका संग मरवान बिन अल हकम लग गेलाह, तखन ओ मरवान सँ पूछलनि; 'अहाँ एहि आदमीक गुलाम केँ पकड़ि लेने छी?' ओ उत्तर देलनि; 'हँ'। रफी' फेर पुछलकै; 'अहाँ ओकरा की करबौ?' ओ उत्तर देलथिन; 'हम ओकर हाथ काटि देबय चाहैत छी'। तखन रफी' बजलाह; ओकरा लेल; 'हम रसुलुल्लाह सल्लाह अलैहि व सल्लम के कहैत सुनने छी जे खजूर आ कत्सर में हाथ काटब नहिं होइत छैक'। तखन ओ दास केँ मुक्त करबाक आदेश देलनि, आ दास केँ मुक्त कयल गेल।