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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 Hadith

Hadith

Imam Malik : 1301

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَزَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُئِلَ عَنْ الْأَمَةِ إِذَا زَنَتْ وَلَمْ تُحْصِنْ فَقَالَ إِنْ زَنَتْ فَاجْلِدُوهَا ثُمَّ إِنْ زَنَتْ فَاجْلِدُوهَا ثُمَّ إِنْ زَنَتْ فَاجْلِدُوهَا ثُمَّ بِيعُوهَا وَلَوْ بِضَفِيرٍقَالَ ابْنُ شِهَابٍ لَا أَدْرِي أَبَعْدَ الثَّالِثَةِ أَوْ الرَّابِعَةِ قَالَ يَحْيَى سَمِعْت قَوْله تَعَالَى يَقُولُ وَالضَّفِيرُ الْحَبْلُ

[इब्न शिहाब] सूं [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] सूं [अबू हुरैरा] अर [जैद बिन खालिद अल जुहानी] सूं मलिक म्हानै बतायो है कै रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम सूं एक दास रै बारै में पूछ्यो गयो हो जिण व्यभिचार करियो हो अर अजै तांई ब्याव नीं करियो हो। उण जवाब दियो, 'अगर वो व्यभिचार करै है तो उणनै बांधो, जे वो दूजी बार व्यभिचार करै है तो उणनै बांधो, जे वो दूजी बार व्यभिचार करै है तो उणनै बांधो। फेर बांनै एक डलाफिर रै वास्तै भी बेच दो - एक हेयर टाई-'। इब्न शिहाब कह्यो; 'मन्नै ठा कोनी कै व्यभिचार री तीजी क्रिया रै पछै है कै चौथी रै पछै'। याह्या कह्यो; 'मैं मलिक नै कैता सुण्यो है कै डलाफिर एक रस्सी है'।

Hadith

Imam Malik : 1302

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّعَبْدًا كَانَ يَقُومُ عَلَى رَقِيقِ الْخُمُسِ وَأَنَّهُ اسْتَكْرَهَ جَارِيَةً مِنْ ذَلِكَ الرَّقِيقِ فَوَقَعَ بِهَا فَجَلَدَهُ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ وَنَفَاهُ وَلَمْ يَجْلِدْ الْوَلِيدَةَ لِأَنَّهُ اسْتَكْرَهَهَا

[नफी'] रा मलिक बतायो कै किणी पांचवां हिस्सै सूं दास मांगी, फेर उण पांचवां हिस्सै सूं जबरदस्ती दास ले ली अर पछै उणरै साथै यौन उत्पीड़न कर दियो। फेर [उमर बिन खत्ताब] बांनै बांध दियो अर देश निकाला कर दियो, जदकै दासी दासी नै बांधी कोनी ही क्यूंकै बां माथै दबाव हो।'

Hadith

Imam Malik : 1303

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ سُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَيَّاشِ بْنِ أَبِي رَبِيعَةَ الْمَخْزُومِيَّ قَالَ أَمَرَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِفِي فِتْيَةٍ مِنْ قُرَيْشٍ فَجَلَدْنَا وَلَائِدَ مِنْ وَلَائِدِ الْإِمَارَةِ خَمْسِينَ خَمْسِينَ فِي الزِّنَا

मलिक [यह्या बिन सईद] सूं बतायो कै [सुलेमान बिन यासर] उणनै बतायो कै [अब्दुल्ला बिन अय्यासी बिन अबू रबीअह अल मखजुमी] कह्यो; 'म्हानै [उमर बिन खत्ताब] एक कुरैश युवा नै फांसी देबा रो हुकम दियो हो, फेर म्हे पचास-पचास सरकारी दासों मांय सूं कई दासियां ​​नै व्यभिचार रै वास्तै बांध दियो'।

Hadith

Imam Malik : 1304

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ أَنَّهُ قَالَ جَلَدَ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَبْدًا فِي فِرْيَةٍ ثَمَانِينَ قَالَ أَبُو الزِّنَادِ فَسَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَامِرِ بْنِ رَبِيعَةَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ أَدْرَكْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ وَعُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ وَالْخُلَفَاءَ هَلُمَّ جَرًّا فَمَا رَأَيْتُ أَحَدًا جَلَدَ عَبْدًا فِي فِرْيَةٍ أَكْثَرَ مِنْ أَرْبَعِينَ

मन्नै बतायो हो कै [अबू अज जिनाद] सूं मलिक कह्यो; उमर बिन अब्दुल अजीस बिना गवाह रै व्यभिचार री बदनामी फैलाबा आळा एक दास नै अस्सी कोड़ा सूं सजा दी। अबू जिनाद कह्यो; 'मैं फेर [अब्दुल्ला बिन अमीर बिन रबीअह] सूं पूछ्यो, उण जवाब दियो; "मैं [उमर बिन खत्ताब], [उथमान बिन अफ्फान] अर दूजा खलीफा रै सागै रैवतो हो, म्हनैं बां मांय सूं कोई भी नीं मिल्यो जिको व्यभिचार री बदनामी फैलाबा आळा गुलामां नैं पीटतो हो, बिना चालीस सूं बेसी डेरा गवाह रै रूप मांय लेय'र।"

Hadith

Imam Malik : 1305

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زُرَيْقِ بْنِ حَكِيمٍ الْأَيْلِيِّأَنَّ رَجُلًا يُقَالُ لَهُ مِصْبَاحٌ اسْتَعَانَ ابْنًا لَهُ فَكَأَنَّهُ اسْتَبْطَأَهُ فَلَمَّا جَاءَهُ قَالَ لَهُ يَا زَانٍ قَالَ زُرَيْقٌ فَاسْتَعْدَانِي عَلَيْهِ فَلَمَّا أَرَدْتُ أَنْ أَجْلِدَهُ قَالَ ابْنُهُ وَاللَّهِ لَئِنْ جَلَدْتَهُ لَأَبُوءَنَّ عَلَى نَفْسِي بِالزِّنَا فَلَمَّا قَالَ ذَلِكَ أَشْكَلَ عَلَيَّ أَمْرُهُ فَكَتَبْتُ فِيهِ إِلَى عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ وَهُوَ الْوَالِي يَوْمَئِذٍ أَذْكُرُ لَهُ ذَلِكَ فَكَتَبَ إِلَيَّ عُمَرُ أَنْ أَجِزْ عَفْوَهُقَالَ زُرَيْقٌ وَكَتَبْتُ إِلَى عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ أَيْضًا أَرَأَيْتَ رَجُلًا افْتُرِيَ عَلَيْهِ أَوْ عَلَى أَبَوَيْهِ وَقَدْ هَلَكَا أَوْ أَحَدُهُمَا قَالَ فَكَتَبَ إِلَيَّ عُمَرُ إِنْ عَفَا فَأَجِزْ عَفْوَهُ فِي نَفْسِهِ وَإِنْ افْتُرِيَ عَلَى أَبَوَيْهِ وَقَدْ هَلَكَا أَوْ أَحَدُهُمَا فَخُذْ لَهُ بِكِتَابِ اللَّهِ إِلَّا أَنْ يُرِيدَ سِتْرًا

मलिक म्हनैं [जुरैक बिन हकीम अल ऐली] सूं बतायो कै मिसबाह नाम रो एक आदमी आपरै बेटै सूं मदद मांगी, पण लाग्यो जाणै उणरो बेटो खुद नैं धीमो कर रैयो है। जद उणरो बेटो आयो तो बो बोल्यो, 'थे व्यभिचारी! ' जुरैक -कथावाचक- कह्यो; 'बेटा फेर म्हारै सूं मदद मांगी - आपरै पिता रै आरोपां रै बाबत -। जद मैं पिता नै मारबा नै त्यार हो, तो बेटो बोल्यो; 'अल्लाह री कसम, जे थै बांनै ताड़ना देवोला तो म्हैं व्यभिचार करणो मानूंला'। जद बो आ बात कैयी, तो म्हारै वास्तै हालात और भी कठिन होग्या। फेर म्हैं उमर बिन अब्दुल अजीस नै एक चिट्ठी लिखी जका उण बगत खलीफा हा। [उमर बिन अब्दुल अजीज] फेर एक जवाब लिख्यो कै म्हनै उणरै बेटै री माफी उणरै पिता नै देणी चाइजै'। जुरैक कह्यो; 'मैं फेर उणनै लिख्यो, 'थे कांई सोचो हो कै किणी आदमी या उणरै दोनूं माता-पिता माथै व्यभिचार रो आरोप लगायो जावै, जदकै माता-पिता दोनूं या एक मर चुक्या है? ' जुरैक बोल्यो; 'तो उमर जवाब दियो; 'अगर आदमी - आरोपी - आरोपी नै माफ कर देवै है तो उणरी माफी नै स्वीकार कर ल्यो। अर जे आरोपी दोनूं माता-पिता है, अर दोनूं या बां मांय सूं कोई एक मरग्यो है, तो अल्लाह री किताब रै मुजब फैसलो करो, जद तांई कै वो इणनै गुप्त नीं राखणो चावै।

Hadith

Imam Malik : 1306

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ قَالَ فِي رَجُلٍ قَذَفَ قَوْمًا جَمَاعَةً أَنَّهُ لَيْسَ عَلَيْهِ إِلَّا حَدٌّ وَاحِدٌقَالَ مَالِك وَإِنْ تَفَرَّقُوا فَلَيْسَ عَلَيْهِ إِلَّا حَدٌّ وَاحِدٌ

मन्नै बतायो गयो है कै [हिस्याम बिन 'उर्वाह] सूं [उणरै पिता] सूं मलिक एक आदमी रै बारै में कैयो हो जिणनै लोगां रै एक समूह माथै व्यभिचार रो आरोप लगायो हो, फेर उण माथै कोई सजा नीं दी गई पण फगत एक ई सजा दी गई ही। मलिक बोल्यो; 'भलांई प्रतिवादी न्यारा-न्यारा है, पण बांनै अजै ई फगत एक ई सजा है'।

Hadith

Imam Malik : 1307

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الرِّجَالِ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَارِثَةَ بْنِ النُّعْمَانِ الْأَنْصَارِيِّ ثُمَّ مِنْ بَنِي النَّجَّارِ عَنْ أُمِّهِ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِأَنَّ رَجُلَيْنِ اسْتَبَّا فِي زَمَانِ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَقَالَ أَحَدُهُمَا لِلْآخَرِ وَاللَّهِ مَا أَبِي بِزَانٍ وَلَا أُمِّي بِزَانِيَةٍ فَاسْتَشَارَ فِي ذَلِكَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَقَالَ قَائِلٌ مَدَحَ أَبَاهُ وَأُمَّهُ وَقَالَ آخَرُونَ قَدْ كَانَ لِأَبِيهِ وَأُمِّهِ مَدْحٌ غَيْرُ هَذَا نَرَى أَنْ تَجْلِدَهُ الْحَدَّ فَجَلَدَهُ عُمَرُ الْحَدَّ ثَمَانِينَ

मन्नै बतायो गयो है कै मलिक [अबू अल रिजल मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान बिन हरितसाह बिन अन नूमान अल अंशारी] सूं - वो बानी अन नज्जर सूं है - आपरी मां ['अमराह बिन अब्दुर्रहमान] सूं उमर बिन खत्ताब रै शासनकाल रै दौरान दो आदमी हा जिका एक दूजा रो अपमान करता हा। बां मांय सूं एक दूजै नै कैयो; 'अल्लाह री कसम, म्हारा पिता अर मां व्यभिचारी कोनी है'। ['उमर बिन खत्ताब] फेर इण मामला माथै चर्चा करी। एक आदमी फेर बोल्यो; 'असल में, बो आपरै पिता अर माता री तारीफ करतो हो! ' जदकै दूजा लोगां कैयो; 'इणरै अलावा उणरै पिता अर मां नै श्रेय मिलणो चाइजै। तो म्हारो मानणो है कै थनै इण आदमी नै सजा देणी चाइजै'। इणरै बाद, उमर उणनै अस्सी कोड़ा मार्या'।

Hadith

Imam Malik : 1308

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِقَالَ لِرَجُلٍ خَرَجَ بِجَارِيَةٍ لِامْرَأَتِهِ مَعَهُ فِي سَفَرٍ فَأَصَابَهَا فَغَارَتْ امْرَأَتُهُ فَذَكَرَتْ ذَلِكَ لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَسَأَلَهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ وَهَبَتْهَا لِي فَقَالَ عُمَرُ لَتَأْتِينِي بِالْبَيِّنَةِ أَوْ لَأَرْمِيَنَّكَ بِالْحِجَارَةِ قَالَ فَاعْتَرَفَتْ امْرَأَتُهُ أَنَّهَا وَهَبَتْهَا لَهُ

मलिक म्हनैं [रबीअह बिन अबू अब्दुर्रहमान] सूं बतायो कै [उमर बिन खत्ताब] एक बार एक आदमी नैं कैयो हो जिको आपरी घरआळी री दास रै साथै सफर कर रैयो हो कै उणरै साथै उणरै साथै सेक्स करियो। इणरै बाद उणरी घरआळी नै ईर्ष्या हुई अर बां उमर बिन खत्ताब नै सूचना दी। 'उमर बिन खत्ताब फेर उण आदमी सूं दासी रै साथै यौन सम्बन्ध रै बारै में पूछ्यो, उण आदमी जवाब दियो, 'उणनै म्हारै कनै दे दियो है! ' उमर बोल्यो -आपरी घरआळी सूं-; 'थै सबूत देवो नींतर म्हैं थारै माथै पत्थर फेंकूंला?' रबिया कह्यो; 'फेर उणरी घरआळी मान लीनी कै वा उणनै दे दियो है'।

Hadith

Imam Malik : 1309

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَطَعَ فِي مِجَنٍّ ثَمَنُهُ ثَلَاثَةُ دَرَاهِمَ

मन्नै बतायो गयो है कै [नफी'] सूं [अब्दुल्लाह बिन उमर] सूं मलिक कह्यो, 'अल्लाह रै रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) रो हाथ एक बार तीन दिरहम री ढाल रै कारण काट दियो गयो हो'।

Hadith

Imam Malik : 1310

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي حُسَيْنٍ الْمَكِّيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا قَطْعَ فِي ثَمَرٍ مُعَلَّقٍ وَلَا فِي حَرِيسَةِ جَبَلٍ فَإِذَا آوَاهُ الْمُرَاحُ أَوْ الْجَرِينُ فَالْقَطْعُ فِيمَا يَبْلُغُ ثَمَنَ الْمِجَنِّ

मलिक सूं [अब्दुल्लाह बिन अब्दुर्रहमान बिन अबू हुसैन अल माकी] सूं मन्नै बतायो गयो है कै अल्लाह रा रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कह्यो है कै 'फळ रो हाथ काटण रो कोई नियम कोनी है जिको अजै तांई लटक्योड़ो है या जिणनै पहाड़ां रै मांय बाड़ रै मांय राख्यो गयो है। जे पशुधन री आश्रय या चावळ री कटाई री जगां री रक्षा करी जावै तो हाथ काटण री सजा तद तांई लागू हुवै जद तांई चोरी रो सामान ढाल रै मूल्य तांई नीं पूगै।

Hadith

Imam Malik : 1311

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِأَنَّ سَارِقًا سَرَقَ فِي زَمَانِ عُثْمَانَ أُتْرُجَّةً فَأَمَرَ بِهَا عُثْمَانُ بْنُ عَفَّانَ أَنْ تُقَوَّمَ فَقُوِّمَتْ بِثَلَاثَةِ دَرَاهِمَ مِنْ صَرْفِ اثْنَيْ عَشَرَ دِرْهَمًا بِدِينَارٍ فَقَطَعَ عُثْمَانُ يَدَهُ

मलिक म्हनैं [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर] सूं [उणरै पिता] सूं ['अमराह बिन्त अब्दुर्रहमान] सूं बतायो कै उथमान रै बगत एक चोर उत्रुजा फल चोरी कर लियो हो - एक फल जिणरो स्वाद थोड़ो खट्टो हो। [उथमान] फेर कीमत री गणना करण रो हुकम दियो। फल री कीमत एक दीनार रै बारा दिरहम री दर सूं तीन दिरहम री ही, फेर 'उथमान आपरो हाथ काट दियो'।

Hadith

Imam Malik : 1312

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْمَا طَالَ عَلَيَّ وَمَا نَسِيتُ الْقَطْعُ فِي رُبُعِ دِينَارٍ فَصَاعِدًا

मलिक सूं [यह्या बिन सईद] सूं ['अमराह बिन्त अब्दुर्रहमान] सूं ['ऐस्याह] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम री पत्नी सूं बतायो हो, उण कैयो; 'म्हारै वास्तै ओ घणो बगत पैली कोनी हो अर अजै तांई म्हारी याददास्त सूं फीको नीं पड़्यो है कै चोरां रै हाथां नै एक चौथाई दीनार या इणसूं बेसी माथै काटणो'।

Hadith

Imam Malik : 1313

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ حَزْمٍ عَنْ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّهَا قَالَتْخَرَجَتْ عَائِشَةُ زَوْجُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى مَكَّةَ وَمَعَهَا مَوْلَاتَانِ لَهَا وَمَعَهَا غُلَامٌ لِبَنِي عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ فَبَعَثَتْ مَعَ الْمَوْلَاتَيْنِ بِبُرْدٍ مُرَجَّلٍ قَدْ خِيطَ عَلَيْهِ خِرْقَةٌ خَضْرَاءُ قَالَتْ فَأَخَذَ الْغُلَامُ الْبُرْدَ فَفَتَقَ عَنْهُ فَاسْتَخْرَجَهُ وَجَعَلَ مَكَانَهُ لِبْدًا أَوْ فَرْوَةً وَخَاطَ عَلَيْهِ فَلَمَّا قَدِمَتْ الْمَوْلَاتَانِ الْمَدِينَةَ دَفَعَتَا ذَلِكَ إِلَى أَهْلِهِ فَلَمَّا فَتَقُوا عَنْهُ وَجَدُوا فِيهِ اللِّبْدَ وَلَمْ يَجِدُوا الْبُرْدَ فَكَلَّمُوا الْمَرْأَتَيْنِ فَكَلَّمَتَا عَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ كَتَبَتَا إِلَيْهَا وَاتَّهَمَتَا الْعَبْدَ فَسُئِلَ الْعَبْدُ عَنْ ذَلِكَ فَاعْتَرَفَ فَأَمَرَتْ بِهِ عَائِشَةُ زَوْجُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُطِعَتْ يَدُهُ وَقَالَتْ عَائِشَةُ الْقَطْعُ فِي رُبُعِ دِينَارٍ فَصَاعِدًا

मलिक सूं [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर बिन हजम] सूं [अमराह बिन अब्दुर्रहमान] सूं बतायो गयो है; ' [ऐस्याह], पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम री पत्नी आपरी दो दासियां ​​रै साथै-साथै बनी अब्दुल्लाह बिन अबू बकर अस सिद्दीक रै एक नौकर रै साथै मक्का गई। फेर ऐस्या आपरी दो दासियां ​​रै जरिया एक चद्दर भेजी जिण माथै एक तस्वीर ही जिणनै हरी कपड़ा रै टुकड़ां सूं सिल दियो गयो हो। अमराह बिंत अब्दुर्रहमान कह्यो; 'उणरै सागै नौकर चादर चद्दर लेय'र सीवां नै तोड़'र बां री चीजां नै काढ ली, दास दास उणरी जगां काठी रो कपड़ो या चमड़ा सूं ढक्योड़ो कोई चोगो लगायो, पछै बो उणनै सिल दियो। जद दोई दासियां ​​मदीना पूगी तो बांनै ऐसिया रै परिवार नै सौंप दी। अर जद बांनै ओ खोल्यो तो बांनै अल लाबड मिल्यो अर बांनै कोई कंबल कोनी मिल्यो। इणरै बाद बां दोनूं दासियां ​​सूं इण बाबत पूछ्यो, जद तांई कै आखिरकार बां दोनूं ई आ बात पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम री पत्नी ऐसिया नै नीं बता दी, या फेर बां दोनूं ई बां नै चिट्ठियां भेजी। दो दासियां ​​नै शक होयो कै ओ काम दास ही कर्यो है। तो नर दास सूं पूछ्यो गयो अर बो मान लियो। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम री पत्नी आयशा बांका हाथ काटबा रो हुकम दियो अर कैयो; 'हाथ नै काटणो तद कर दियो जावै है जद बो एक चौथाई दीनार या इणसूं बेसी तांई पूग जावै है'।

Hadith

Imam Malik : 1314

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدًا لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَسَرَقَ وَهُوَ آبِقٌ فَأَرْسَلَ بِهِ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ إِلَى سَعِيدِ بْنِ الْعَاصِ وَهُوَ أَمِيرُ الْمَدِينَةِ لِيَقْطَعَ يَدَهُ فَأَبَى سَعِيدٌ أَنْ يَقْطَعَ يَدَهُ وَقَالَ لَا تُقْطَعُ يَدُ الْآبِقِ السَّارِقِ إِذَا سَرَقَ فَقَالَ لَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ فِي أَيِّ كِتَابِ اللَّهِ وَجَدْتَ هَذَا ثُمَّ أَمَرَ بِهِ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ فَقُطِعَتْ يَدُهُ

मन्नै [नफी'] सूं मलिक सूं बतायो गयो हो कै अब्दुल्ला बिन उमर रो दास चोरी कर भागग्यो, फेर अब्दुल्ला बिन उमर - ओ मामला - सईद बिन अल ऐश नै सौंप दियो जिको मदीना रो गवर्नर हो कै वो उणरो हाथ काट देवै। सईद इणनै खारिज कर दियो अर बोल्यो; 'भागता चोर रो हाथ, बिना काटे'। [अब्दुल्ला बिन उमर] पूछ्यो; 'थनै यो अल्लाह री किण किताब मांय मिल्यो?' इणरै बाद अब्दुल्ला बिन उमर उणरो हाथ काटबा रो हुकम दियो।

Hadith

Imam Malik : 1315

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زُرَيْقِ بْنِ حَكِيمٍ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ أَخَذَ عَبْدًا آبِقًا قَدْ سَرَقَ قَالَ فَأَشْكَلَ عَلَيَّ أَمْرُهُ قَالَ فَكَتَبْتُ فِيهِ إِلَى عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِأَسْأَلُهُ عَنْ ذَلِكَ وَهُوَ الْوَالِي يَوْمَئِذٍ قَالَ فَأَخْبَرْتُهُ أَنَّنِي كُنْتُ أَسْمَعُ أَنَّ الْعَبْدَ الْآبِقَ إِذَا سَرَقَ وَهُوَ آبِقٌ لَمْ تُقْطَعْ يَدُهُ قَالَ فَكَتَبَ إِلَيَّ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ نَقِيضَ كِتَابِي يَقُولُ كَتَبْتَ إِلَيَّ أَنَّكَ كُنْتَ تَسْمَعُ أَنَّ الْعَبْدَ الْآبِقَ إِذَا سَرَقَ لَمْ تُقْطَعْ يَدُهُ وَإِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى يَقُولُ فِي كِتَابِهِ{ وَالسَّارِقُ وَالسَّارِقَةُ فَاقْطَعُوا أَيْدِيَهُمَا جَزَاءً بِمَا كَسَبَا نَكَالًا مِنْ اللَّهِ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ }فَإِنْ بَلَغَتْ سَرِقَتُهُ رُبُعَ دِينَارٍ فَصَاعِدًا فَاقْطَعْ يَدَهُو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ وَسَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ وَعُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِ كَانُوا يَقُولُونَ إِذَا سَرَقَ الْعَبْدُ الْآبِقُ مَا يَجِبُ فِيهِ الْقَطْعُ قُطِعَ قَالَ مَالِك وَذَلِكَ الْأَمْرُ الَّذِي لَا اخْتِلَافَ فِيهِ عِنْدَنَا أَنَّ الْعَبْدَ الْآبِقَ إِذَا سَرَقَ مَا يَجِبُ فِيهِ الْقَطْعُ قُطِعَ

मलिक म्हनैं बतायो कै [जुरैक बिन हकीम] उणनैं बतायो कै उणनैं एक दास मिल्यो है जिको चोरी कर भागग्यो हो। जुरैक जारी राख्यो; 'यो म्हारै वास्तै मुसीबत रो न्योतो दे रियो है। तो म्हैं उमर बिन अब्दुल अजीज नै एक चिट्ठी लिखी, जका उण बगत गवर्नर हा, इण बाबत पूछबा रै वास्तै। म्हैं उण नै बतायो कै म्हैं सुण्यो है कै एक नौकर भागग्यो जे बो चोरी कर’र भागग्यो तो उण रा हाथ नीं काटेला।' जुरैक आगै कैयो, '[उमर बिन अब्दुल अजीज] फेर म्हारै चिट्ठी रो जवाब दियो अर कैयो; 'थै म्हनै लिख्यो हो कै थै सुण्यो है, जे कोई दास भाग जावै है तो चोरी कर भाग जावै है तो उणरो हाथ नीं काटै है, जदकै अल्लाह तबराका वा ताआला आपरी किताब मांय कैवै है; 'चोर चाहे वो नर हो या नारी, अल्लाह सूं आपरै कामां रै इनाम अर सजा रै रूप में आपरो हाथ काटणो चाइजै, अर अल्लाह सबसूं आदरणीय अर सबसूं ज्ञानी है-' -प्रश्न। अल मैदाह: 38- जे चोरी रो सामान एक चौथाई दीनार या इणसूं बेसी है तो उणरो हाथ काट दियो जावै। मलिक सूं मन्नै बतायो गयो है कै ओ उणरै कनै पूगग्यो है, कै अल कासिम बिन मुहम्मद अर सलीम बिन अब्दुल्ला अर उर्वाह बिन जुबैर बां कैयो; 'अगर कोई भगोड़ा दास कोई चीज चोरी कर लेवै जिणनै काटबा री बाध्यता तांई पूग जावै तो उणरो हाथ काट दियो जावै'। मलिक बोल्यो; 'ओ एक असो मामला है जिण माथै आपां रै बीच कोई मतभेद कोनी है, यानी कै जे कोई नौकर भाग जावै है तो कोई वस्तु चोरी कर लेवै है जिणरै हाथ काटण री जिम्मेदारी पूग जावै है तो उणरो हाथ काटणो ई पड़सी'।

Hadith

Imam Malik : 1316

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَفْوَانَأَنَّ صَفْوَانَ بْنَ أُمَيَّةَ قِيلَ لَهُ إِنَّهُ مَنْ لَمْ يُهَاجِرْ هَلَكَ فَقَدِمَ صَفْوَانُ بْنُ أُمَيَّةَ الْمَدِينَةَ فَنَامَ فِي الْمَسْجِدِ وَتَوَسَّدَ رِدَاءَهُ فَجَاءَ سَارِقٌ فَأَخَذَ رِدَاءَهُ فَأَخَذَ صَفْوَانُ السَّارِقَ فَجَاءَ بِهِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَمَرَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ تُقْطَعَ يَدُهُ فَقَالَ لَهُ صَفْوَانُ إِنِّي لَمْ أُرِدْ هَذَا يَا رَسُولَ اللَّهِ هُوَ عَلَيْهِ صَدَقَةٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَهَلَّا قَبْلَ أَنْ تَأْتِيَنِي بِهِ

मलिक सूं [इब्नू शिहाब] सूं [शफवान बिन अब्दुल्लाह बिन शफवान] सूं यो बतायो गयो है कै यो शफवान बिन उमय्या नै कैयो गयो हो; 'जो कोई प्रवास कोनी करेला वो नास हो जावेला'। जद शफवान बिन उमय्याह मदीना पूग्या, तो वै आपरी शाल नै तकिया रै रूप मांय लेर मस्जिद मांय सोया। फेर एक चोर उणरी शाल ले ली, शफवान उणनै तुरंत पकड़ लियो अर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रै कनै लेग्यो। इणरै बाद उण आपरो हाथ काटबा रो हुकम दियो, पण शफवान कह्यो; 'हे अल्लाह रा रसूल, म्हारो ओ मतलब कोनी हो। मैं आं कपड़ां नै बां रै वास्तै दान मानूं। रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम फेर बोल्या: 'थै उणनै म्हारै कनै ल्याबा सूं पैली म्हनै क्यूं कोनी बतायो?'

Hadith

Imam Malik : 1317

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ الزُّبَيْرَ بْنَ الْعَوَّامِلَقِيَ رَجُلًا قَدْ أَخَذَ سَارِقًا وَهُوَ يُرِيدُ أَنْ يَذْهَبَ بِهِ إِلَى السُّلْطَانِ فَشَفَعَ لَهُ الزُّبَيْرُ لِيُرْسِلَهُ فَقَالَ لَا حَتَّى أَبْلُغَ بِهِ السُّلْطَانَ فَقَالَ الزُّبَيْرُ إِذَا بَلَغْتَ بِهِ السُّلْطَانَ فَلَعَنَ اللَّهُ الشَّافِعَ وَالْمُشَفِّعَ

मलिक [रबीअह बिन अबू अब्दुर्रहमान] सूं बतायो कै [जुबैर बिन अल अव्वाम] एक बार एक आदमी सूं मिल्यो जिणनै एक चोर पकड़ लियो हो अर उणनै अधिकारियां रै कनै ले जाणो चावतो हो। फेर जुबैर चोर नै माफ कर दियो जावै अर उणनै जावण दियो जावै। पण बो आदमी बोल्यो; 'जद तांई म्हैं उणनै अधिकारियां कनै नीं ले जाऊं'। जुबैर कह्यो; 'जद थै अधिकारियां कनै पूग जावोला, तो अल्लाह माफ करण आळा नै अर माफ करण आळा नै सराप देसी'।

Hadith

Imam Malik : 1318

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ رَجُلًا مِنْ أَهْلِ الْيَمَنِ أَقْطَعَ الْيَدِ وَالرِّجْلِ قَدِمَ فَنَزَلَ عَلَى أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِفَشَكَا إِلَيْهِ أَنَّ عَامِلَ الْيَمَنِ قَدْ ظَلَمَهُ فَكَانَ يُصَلِّ مِنْ اللَّيْلِ فَيَقُولُ أَبُو بَكْرٍ وَأَبِيكَ مَا لَيْلُكَ بِلَيْلِ سَارِقٍ ثُمَّ إِنَّهُمْ فَقَدُوا عِقْدًا لِأَسْمَاءَ بِنْتِ عُمَيْسٍ امْرَأَةِ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ فَجَعَلَ الرَّجُلُ يَطُوفُ مَعَهُمْ وَيَقُولُ اللَّهُمَّ عَلَيْكَ بِمَنْ بَيَّتَ أَهْلَ هَذَا الْبَيْتِ الصَّالِحِ فَوَجَدُوا الْحُلِيَّ عِنْدَ صَائِغٍ زَعَمَ أَنَّ الْأَقْطَعَ جَاءَهُ بِهِ فَاعْتَرَفَ بِهِ الْأَقْطَعُ أَوْ شُهِدَ عَلَيْهِ بِهِ فَأَمَرَ بِهِ أَبُو بَكْرٍ الصِّدِّيقُ فَقُطِعَتْ يَدُهُ الْيُسْرَى وَقَالَ أَبُو بَكْرٍ وَاللَّهِ لَدُعَاؤُهُ عَلَى نَفْسِهِ أَشَدُّ عِنْدِي عَلَيْهِ مِنْ سَرِقَتِهِ

याह्या मन्नै मलिक सूं [अब्दुर्रहमान बिन अल कासिम] सूं [उणरै पिता] सूं बतायो कै एक यमन आदमी जिणरा पग अर बांह काट दिया गया हा, वो अबू बकर अस सिद्दीक रै स्थान माथै पूग्यो अर रुकग्यो। उण शिकायत करी कै रात नै नमाज पढ़ता बगत एक यमन अधिकारी उण माथै हमलो कर दियो। [अबू बकर] पूछ्यो; 'थारै पिताजी री कसम, चोर रै साथै थारी रात कियां बीतगी'। फेर वे अबू बकर अस सिद्दीक री घरआळी असमा बिन्त उमैस री अंगूठी खो दी अर वो आदमी - चोर - प्रार्थना करता थका बां रै सागै तलाशी लेबा में शामिल होग्यो; 'हे अल्लाह, आज रात नै इण घर रै धर्मी मालिक रै खिलाफ चोरी करण आळा नै सजा दो'। बां गहणा एक सुनार सूं लिया। अर सुनार बोल्यो कै ओ बो आदमी है जिणरो हाथ कटग्यो हो अर वो ई ल्यायो हो। अर जिण आदमी रो हाथ काट दियो गयो हो बो इण बात नै स्वीकार कर लियो, या फेर उणरै साम्हीं कई गवाह पेश कर दिया गया। तो अबू बकर अस सिद्दीक आपरो बांयो हाथ काटबा रो हुकम दियो, फेर कह्यो, 'अल्लाह री कसम, बां री दुआ म्हारै वास्तै बां री चोरी री हरकत सूं भी बडी है'।

Hadith

Imam Malik : 1319

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّ أَبَا الزِّنَادِ أَخْبَرَهُ أَنَّ عَامِلًا لِعُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِأَخَذَ نَاسًا فِي حِرَابَةٍ وَلَمْ يَقْتُلُوا أَحَدًا فَأَرَادَ أَنْ يَقْطَعَ أَيْدِيَهُمْ أَوْ يَقْتُلَ فَكَتَبَ إِلَى عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ فِي ذَلِكَ فَكَتَبَ إِلَيْهِ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ لَوْ أَخَذْتَ بِأَيْسَرِ ذَلِكَ

मलिक सूं म्हारै सूं संबंधित हो कै [अबू जिनाद] उणनै बतायो कै उमर बिन अब्दुल अजीज रा मजदूर कई लुटेरां नै पकड़ लिया अर किणी नै नीं मारिया। अर वो बांका त्यांगन नै काटणो चावै हो या बांनै मारणो चावै हो, सो वो उण मामला रै बारै में उमर बिन अब्दुल अजीज नै एक चिट्ठी लिखी। [उमर बिन अब्दुल अजीज] जवाब दियो; 'अगर थनै इणसूं भी हळकी चीज री सजा दी जावै'।

Hadith

Imam Malik : 1320

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَأَنَّ عَبْدًا سَرَقَ وَدِيًّا مِنْ حَائِطِ رَجُلٍ فَغَرَسَهُ فِي حَائِطِ سَيِّدِهِ فَخَرَجَ صَاحِبُ الْوَدِيِّ يَلْتَمِسُ وَدِيَّهُ فَوَجَدَهُ فَاسْتَعْدَى عَلَى الْعَبْدِ مَرْوَانَ بْنَ الْحَكَمِ فَسَجَنَ مَرْوَانُ الْعَبْدَ وَأَرَادَ قَطْعَ يَدِهِ فَانْطَلَقَ سَيِّدُ الْعَبْدِ إِلَى رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ فَسَأَلَهُ عَنْ ذَلِكَ فَأَخْبَرَهُ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا قَطْعَ فِي ثَمَرٍ وَلَا كَثَرٍ وَالْكَثَرُ الْجُمَّارُ فَقَالَ الرَّجُلُ فَإِنَّ مَرْوَانَ بْنَ الْحَكَمِ أَخَذَ غُلَامًا لِي وَهُوَ يُرِيدُ قَطْعَهُ وَأَنَا أُحِبُّ أَنْ تَمْشِيَ مَعِيَ إِلَيْهِ فَتُخْبِرَهُ بِالَّذِي سَمِعْتَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَشَى مَعَهُ رَافِعٌ إِلَى مَرْوَانَ بْنِ الْحَكَمِ فَقَالَ أَخَذْتَ غُلَامًا لِهَذَا فَقَالَ نَعَمْ فَقَالَ فَمَا أَنْتَ صَانِعٌ بِهِ قَالَ أَرَدْتُ قَطْعَ يَدِهِ فَقَالَ لَهُ رَافِعٌ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا قَطْعَ فِي ثَمَرٍ وَلَا كَثَرٍ فَأَمَرَ مَرْوَانُ بِالْعَبْدِ فَأُرْسِلَ

याह्या मन्नै मलिक सूं [यह्या बिन सईद] सूं [मुहम्मद बिन यह्या बिन हब्बान] सूं बतायो कै एक दास छोरो किणी रै बगीचै सूं एक छोटो सो खजूर रो पेड़ चोरी कर लियो, फेर उणनै आपरै स्वामी रै बगीचै मांय लगायो। पेड़ का मालिक अपणी खजूर का पेड़ ढूंढण नै निकल्या अर पा लिया। इणरै बाद उण दास री हरकतां री शिकायत मारवान बिन अल हकाम सूं करी। तो मरवान दास नै कैद कर दियो, अर उणरो हाथ काटणो चावतो हो। इणरै बाद दास रो स्वामी रफी बिन खदीज कनै गयो अर समस्या पूछी। [रफी'] फेर उणनै बतायो कै उणनै रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम नै कैता सुण्यो है: 'खजूर अर कटसर में हाथ काटणो कोनी है, अर कटसर मयांग -खजूर रै पेड़ां रो एक बर्तन है-'। बो आदमी बोल्यो; 'मरवान बिन अल हाकम म्हारा नौकर नै पकड़ लियो अर वो उणरो हाथ काटणो चावै हो। तो म्हनै आशा है कै जे थैं म्हारै सागै उणसूं मिलबा नै जावण नै त्यार हो तो थैं पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सूं सुणी बातां नै पूगा सको। तो रफी उणरै साथै मरवान बिन अल हकाम रै कनै गयो, फेर उण मरवान सूं पूछ्यो; 'कांई थै इण आदमी रो गुलाम पकड़ लियो है?' उण जवाब दियो; 'हां'। रफी' फेरूं पूछ्यो; 'थै उणरै साथै कांई करोला?' उण जवाब दियो; 'मैं उणरो हाथ काटणो चावूं हूं'। फेर रफी बोल्यो; बांनै; 'मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहता सुण्यो है: 'खजूर अर कटसर में हाथ काटणो कोनी होवै'। फेर उण दास नै आजाद करण रो हुकम दियो अर दास नै आजाद कर दियो गयो।