Imam Malik : 1281
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ حَزْمٍ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَبُوهُأَنَّهُ كَانَ جَالِسًا عِنْدَ أَبَانَ بْنِ عُثْمَانَ فَاخْتَصَمَ إِلَيْهِ نَفَرٌ مِنْ جُهَيْنَةَ وَنَفَرٌ مِنْ بَنِي الْحَارِثِ بْنِ الْخَزْرَجِ وَكَانَتْ امْرَأَةٌ مِنْ جُهَيْنَةَ عِنْدَ رَجُلٍ مِنْ بَنِي الْحَارِثِ بْنِ الْخَزْرَجِ يُقَالُ لَهُ إِبْرَاهِيمُ بْنُ كُلَيْبٍ فَمَاتَتْ الْمَرْأَةُ وَتَرَكَتْ مَالًا وَمَوَالِيَ فَوَرِثَهَا ابْنُهَا وَزَوْجُهَا ثُمَّ مَاتَ ابْنُهَا فَقَالَ وَرَثَتُهُ لَنَا وَلَاءُ الْمَوَالِي قَدْ كَانَ ابْنُهَا أَحْرَزَهُ فَقَالَ الْجُهَنِيُّونَ لَيْسَ كَذَلِكَ إِنَّمَا هُمْ مَوَالِي صَاحِبَتِنَا فَإِذَا مَاتَ وَلَدُهَا فَلَنَا وَلَاؤُهُمْ وَنَحْنُ نَرِثُهُمْ فَقَضَى أَبَانُ بْنُ عُثْمَانَ لِلْجُهَنِيِّينَ بِوَلَاءِ الْمَوَالِي
मलिक हमरा [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर बिन हजम] सँ कहलनि जे [हुनकर पिता] हुनका कहलनि जे ओ एक बेर अबन बिन उस्मान के बगल मे बैसल छलाह | तखन जुहैना के कतेको लोक आ बानी हरिथ बिन अल खजराज के कतेको लोक हुनका लग कानूनी फैसला लेबय लेल आयल छलाह. जुहैना के एकटा महिला छल जे बानू हरिथ के एकटा आदमी के संग व्यवहार करैत छल जेकर नाम इब्राहिम बिन कुलैब छल, फेर ओ महिला संपत्ति आ गुलाम छोड़ि मरि गेल। तेँ हुनक संतान आ पति केँ हुनक विरासत उत्तराधिकार मे भेटलनि, तकर बाद हुनकर बच्चा सभ सेहो मरि गेलनि | बच्चाक उत्तराधिकारी कहलक; 'दासक अभिभावकत्वक अधिकार - जे बच्चा अपन मायसँ प्राप्त केलक - हमरा सभकेँ' । अल जुहैना के लोक कहलक; "एना नहि, असल मे ओ सभ हमर सभक संगी सभक गुलाम अछि, तेँ जखन ओकर बच्चा मरि जाइत छैक त' भरोसा हमरा सभक भ' जाइत छैक, आओर हम सभ ओकरा विरासत मे भेटैत छी." अतः [अबन बिन उस्मान] निर्णय लेलनि जे एहि गुलाम सभक संरक्षण अधिकार अल जुहैना के लोकक अछि' |
Imam Malik : 1282
و حَدَّثَنِي مَالِك أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍعَنْ السَّائِبَةِ قَالَ يُوَالِي مَنْ شَاءَ فَإِنْ مَاتَ وَلَمْ يُوَالِي أَحَدًا فَمِيرَاثُهُ لِلْمُسْلِمِينَ وَعَقْلُهُ عَلَيْهِمْ
मालिक हमरा सूचित केलनि जे एक बेर ओ [इब्न सिहाब] सँ साई`बाह के बारे मे पूछने छलाह | इब्न सिहाब जवाब देलखिन: 'ओकरा जे चाहै पर रक्षकता छैक, आ जँ ओ बिना रक्षक के मरि जाय त ओकर उत्तराधिकार मुसलमानक लेल छैक आ ओकर दियात ओकर फर्ज छैक।'
Imam Malik : 1283
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ كَانَ يَقُولُالْمُكَاتَبُ عَبْدٌ مَا بَقِيَ عَلَيْهِ مِنْ كِتَابَتِهِ شَيْءٌ
मलिक हमरा [नाफी'] सँ बतौलनि जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] कहलनि; 'अल मुकाताब गुलाम बनल रहैत अछि, जाबत धरि ओकर रिहाईक कर्जक शेष राशि एखनो अछि जे ओकरा चुकाबय पड़त'।
Imam Malik : 1284
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ حُمَيْدِ بْنِ قَيْسٍ الْمَكِّيِّ أَنَّ مُكَاتَبًا كَانَ لِابْنِ الْمُتَوَكِّلِ هَلَكَ بِمَكَّةَ وَتَرَكَ عَلَيْهِ بَقِيَّةً مِنْ كِتَابَتِهِ وَدُيُونًا لِلنَّاسِ وَتَرَكَ ابْنَتَهُ فَأَشْكَلَ عَلَى عَامِلِ مَكَّةَ الْقَضَاءُ فِيهِ فَكَتَبَ إِلَى عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ مَرْوَانَيَسْأَلُهُ عَنْ ذَلِكَ فَكَتَبَ إِلَيْهِ عَبْدُ الْمَلِكِ أَنْ ابْدَأْ بِدُيُونِ النَّاسِ ثُمَّ اقْضِ مَا بَقِيَ مِنْ كِتَابَتِهِ ثُمَّ اقْسِمْ مَا بَقِيَ مِنْ مَالِهِ بَيْنَ ابْنَتِهِ وَمَوْلَاهُ
हमरा कहलऽ गेलै कि [हुमैद बिन कैस अल मक्की] केरऽ मलिक न॑ कहलकै, ‘इब्न मुतावक्किल केरऽ एगो मुकातब गुलाम मक्का म॑ मरी गेलै, वू अपनऽ रिहाई केरऽ कुछ बची गेलऽ भुगतान, कई लोगऽ के कर्जा आरू एगो बेटी छोड़ी गेलै । मक्का मे सरकारी अधिकारी कए एहि मामला क समाधान करबा मे दिक्कत भेल। तेँ ओ अब्दुल मलिक बिन मरवान केँ चिट्ठी लिखि एहि विषय मे पूछलनि। [अब्दुल मलिक बिन मरवान] तखन जवाब देलनि; 'पहिने लोकक कर्जक निपटारा करू, फेर रिहाई सँ शेष मामलाक निपटारा करू आ तकर बाद शेष संपत्ति केँ बँटि क' बेटी आ अपन मालिक केँ द' दियौक'।
Imam Malik : 1285
حَدَّثَنِي مَالِك أَنَّهُ سَمِعَ رَبِيعَةَ بْنَ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَغَيْرَهُ يَذْكُرُونَأَنَّ مُكَاتَبًا كَانَ لِلْفُرَافِصَةِ بْنِ عُمَيْرٍ الْحَنَفِيِّ وَأَنَّهُ عَرَضَ عَلَيْهِ أَنْ يَدْفَعَ إِلَيْهِ جَمِيعَ مَا عَلَيْهِ مِنْ كِتَابَتِهِ فَأَبَى الْفُرَافِصَةُ فَأَتَى الْمُكَاتَبُ مَرْوَانَ بْنَ الْحَكَمِ وَهُوَ أَمِيرُ الْمَدِينَةِ فَذَكَرَ ذَلِكَ لَهُ فَدَعَا مَرْوَانُ الْفُرَافِصَةَ فَقَالَ لَهُ ذَلِكَ فَأَبَى فَأَمَرَ مَرْوَانُ بِذَلِكَ الْمَالِ أَنْ يُقْبَضَ مِنْ الْمُكَاتَبِ فَيُوضَعَ فِي بَيْتِ الْمَالِ وَقَالَ لِلْمُكَاتَبِ اذْهَبْ فَقَدْ عَتَقْتَ فَلَمَّا رَأَى ذَلِكَ الْفُرَافِصَةُ قَبَضَ الْمَالَ
मलिक हमरा कहलनि जे ओ [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] आ [अन्य] लोकनिक उल्लेख सुनने छलाह जे फुराफिशाह बिन उमैर अल हनाफीक मुकाताब हुनकर रिहाईक लेल जे किछु बकाया छल से पूरा देबाक प्रस्ताव रखलक, मुदा फुराफिशाह मना क देलक। तखन मुकातब दास मदीना के गवर्नर [मरवान इब्न हकम] के पास एहि बात के संप्रेषित करय लेल गेलाह | तखन मरवान फुराफिशाह केँ बजा क' ओकरा धरि बात पहुँचा देलक, मुदा ओ तइयो मना क' देलक। अंततः मरवान आदेश देलखिन जे मुकातब दास के संपत्ति सार्वजनिक खजाना में राखल जाय, आ ओकरा मरवान कहलखिन, 'जाउ, अहाँ स्वतंत्र छी।' फुराफिशाह जखन ई देखलनि तऽ सम्पत्ति लऽ लेलनि ।
Imam Malik : 1286
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَدَبَّرَ جَارِيَتَيْنِ لَهُ فَكَانَ يَطَؤُهُمَا وَهُمَا مُدَبَّرَتَانِ
मलिक हमरा [नाफी’] सँ कहलनि जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] वादा केने छलाह जे जँ हुनकर मृत्यु भ’ गेलनि त’ दू टा दासी केँ मुक्त क’ देताह, आ गुलाम मुदब्बरा रहितो हुनका सभक संग संभोग करैत रहलाह।
Imam Malik : 1287
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ كَانَ يَقُولُإِذَا دَبَّرَ الرَّجُلُ جَارِيَتَهُ فَإِنَّ لَهُ أَنْ يَطَأَهَا وَلَيْسَ لَهُ أَنْ يَبِيعَهَا وَلَا يَهَبَهَا وَوَلَدُهَا بِمَنْزِلَتِهَا
मलिक हमरा [याह्या बिन सईद] स कहलनि जे [सैद बिन मुसैयब] कहलनि; 'जँ कोनो मालिक अपन स्त्री दास केँ ओकर मृत्युक बाद स्वतंत्रताक वादा करथि तखन ओकर विवाह क' सकैत अछि मुदा ओकरा बेच' वा नहि द' सकैत अछि - ककरो आन केँ -।' आ बच्चा - दास - ओकर मायक समान स्थिति मे अछि'।
Imam Malik : 1288
حَدَّثَنَا مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَجَاءَتْ الْيَهُودُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرُوا لَهُ أَنَّ رَجُلًا مِنْهُمْ وَامْرَأَةً زَنَيَا فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا تَجِدُونَ فِي التَّوْرَاةِ فِي شَأْنِ الرَّجْمِ فَقَالُوا نَفْضَحُهُمْ وَيُجْلَدُونَ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَلَامٍ كَذَبْتُمْ إِنَّ فِيهَا الرَّجْمَ فَأَتَوْا بِالتَّوْرَاةِ فَنَشَرُوهَا فَوَضَعَ أَحَدُهُمْ يَدَهُ عَلَى آيَةِ الرَّجْمِ ثُمَّ قَرَأَ مَا قَبْلَهَا وَمَا بَعْدَهَا فَقَالَ لَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَلَامٍ ارْفَعْ يَدَكَ فَرَفَعَ يَدَهُ فَإِذَا فِيهَا آيَةُ الرَّجْمِ فَقَالُوا صَدَقَ يَا مُحَمَّدُ فِيهَا آيَةُ الرَّجْمِ فَأَمَرَ بِهِمَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَرُجِمَافَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ فَرَأَيْتُ الرَّجُلَ يَحْنِي عَلَى الْمَرْأَةِ يَقِيهَا الْحِجَارَةَ قَالَ مَالِك يَعْنِي يَحْنِي يُكِبُّ عَلَيْهَا حَتَّى تَقَعَ الْحِجَارَةُ عَلَيْهِ
हमरा सब के कहल गेल अछि जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] स [नफी'] स मलिक कहलनि; 'यहूदी सब अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स भेंट केलक आ उल्लेख केलक जे ओहि मे स एकटा पुरुष आ एकटा महिला व्यभिचार केने छल। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन जे पत्थरबाजी के संबंध में तोराह में की भेटैत अछि? ' ओ सभ उत्तर देलक, 'हम सभ ओकर लाज उजागर करब आ ओकरा सभ केँ बान्हि देब'। अब्दुल्ला बिन सलाम सेहो कहलनि; 'अहाँ झूठ बाजि रहल छी! सचमुच, एहि मे पाथर मारबाक नियम छैक'। तेँ ओ सभ तोराहक किताब अनलनि आ खोललनि, मुदा एक गोटे पाथरक श्लोक पर हाथ राखि देलनि। कमुइदन ओ पूर्व आ बादक श्लोक पढ़लनि। अब्दुल्ला बिन सलाम तखन ओहि आदमी सँ कहलनि, 'हाथ उठाउ! ' तखन यहूदी हाथ उठौलक आ पता चलल जे ओहि मे पाथर मारबाक श्लोक अछि | ओ सभ कहलक; 'हे मुहम्मद, ओ सही कहैत छथि।' तोराह मे पाथर मारबाक एकटा श्लोक अछि। तखन अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) आदेश देलखिन जे दुनू गोटे के पत्थर मारल जाय। अब्दुल्ला बिन उमर कहलनि जे, हम देखलहुं जे ओहि आदमी के ओहि महिला पर झुकि क' पाथर सं बचाओल गेल छल. मालिक बजलाह, "ओ आदमी अपन देह सँ ओहि महिला केँ ताबत धरि रक्षा केलक जाबत धरि पाथर ओकरा पर नहि लागि गेलै।"
Imam Malik : 1289
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ رَجُلًا مِنْ أَسْلَمَ جَاءَ إِلَى أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ فَقَالَ لَهُ إِنَّ الْأَخِرَ زَنَى فَقَالَ لَهُ أَبُو بَكْرٍ هَلْ ذَكَرْتَ هَذَا لِأَحَدٍ غَيْرِي فَقَالَ لَا فَقَالَ لَهُ أَبُو بَكْرٍ فَتُبْ إِلَى اللَّهِ وَاسْتَتِرْ بِسِتْرِ اللَّهِ فَإِنَّ اللَّهَ يَقْبَلُ التَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِ فَلَمْ تُقْرِرْهُ نَفْسُهُ حَتَّى أَتَى عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ فَقَالَ لَهُ مِثْلَ مَا قَالَ لِأَبِي بَكْرٍ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ مِثْلَ مَا قَالَ لَهُ أَبُو بَكْرٍ فَلَمْ تُقْرِرْهُ نَفْسُهُ حَتَّى جَاءَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ لَهُ إِنَّ الْأَخِرَ زَنَى فَقَالَ سَعِيدٌ فَأَعْرَضَ عَنْهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ كُلُّ ذَلِكَ يُعْرِضُ عَنْهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى إِذَا أَكْثَرَ عَلَيْهِ بَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى أَهْلِهِ فَقَالَ أَيَشْتَكِي أَمْ بِهِ جِنَّةٌ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ وَاللَّهِ إِنَّهُ لَصَحِيحٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبِكْرٌ أَمْ ثَيِّبٌ فَقَالُوا بَلْ ثَيِّبٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَأَمَرَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَرُجِمَ
मलिक हमरा [सैद बिन मुसैयब] स [याह्या बिन सईद] स कहलथि जे असलम क एकटा युवक अबू बकर अस सिद्दीक स भेंट केलथि। ओ कहैत छथि; 'सत्ते अल अखीर व्यभिचार केने अछि'। अबू बकर पुछलखिन; 'हमरा छोड़ि ककरो सँ एहन बात कहने छी?' ओ उत्तर देलनि; 'नहि'। अबू बकर हुनका कहलखिन; 'अल्लाह के पास पश्चाताप करू आ अल्लाह के रक्षा स ढक दियौ।' अल्लाह अपन सेवक के पश्चाताप स्वीकार करैत छथि'। मुदा जा धरि उमर बिन खट्टाबसँ भेंट नहि भेलनि ता धरि हुनकर मोन तृप्त नहि भेलनि , तखन ओ अबू बकरसँ जे कहलनि से कहलनि , आ ओ अबू बकरक कहला जकाँ उत्तर देलनि । ओ आदमी के दिल एखनो तक तृप्त नै छल जाबे तक ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास नै आबि गेल छल। ओ बजलाह - अल अखीर व्यभिचार केलक ! ' सईद फेर कहलक; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तीन बेर हुनका सँ मुँह घुमा लेलनि। जखन-जखन किछु कहैत छलाह, हुनका सँ मुँह घुमा लैत छलाह, कतेको बेर। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन अपन परिवार के पास पठा क पूछलखिन: 'की हुनका शिकायत करब नीक लगैत छनि या ओ बताह छथि?' ओ सब कहलक: 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अल्लाह के कसम ओ एकटा स्वस्थ व्यक्ति छथि'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'की ओ एखनो अविवाहित छथि वा विवाहित छथि?' ओ सभ उत्तर देलक। 'अहाँक विवाह भ' गेल अछि, हे अल्लाह केर रसूलुल्लाह'। तेँ ओ हुनका पाथर मारबाक आदेश देलनि'।
Imam Malik : 1290
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ قَالَ بَلَغَنِيأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لِرَجُلٍ مِنْ أَسْلَمَ يُقَالُ لَهُ هَزَّالٌ يَا هَزَّالُ لَوْ سَتَرْتَهُ بِرِدَائِكَ لَكَانَ خَيْرًا لَكَقَالَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ فَحَدَّثْتُ بِهَذَا الْحَدِيثِ فِي مَجْلِسٍ فِيهِ يَزِيدُ بْنُ نُعَيْمِ بْنِ هَزَّالٍ الْأَسْلَمِيِّ فَقَالَ يَزِيدُ هَزَّالٌ جَدِّي وَهَذَا الْحَدِيثُ حَقٌّ
हमरा कहल गेल अछि जे [सैद बिन मुसैयब] सँ [याह्या बिन सईद] सँ मलिक कहलनि; हमरा लग खबर आबि गेल अछि जे रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हज्जल नामक एकटा युवा असलम सँ कहलनि जे हे हज्जल, जँ अहाँ एकरा अपन शाल सँ झाँपि देब तऽ अहाँक लेल नीक होयत’। याह्या बिन सईद कहलनि; 'हम ई हदीस एकटा सभा मे कहलियनि जतय [यजीद बिन नु'आइम बिन हज्जल अल असलमी] उपस्थित छलाह, तखन यजीद कहलनि; 'हज्जल हमर दादा छथि आ ई हदीस सत्य अछि''।
Imam Malik : 1291
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ أَخْبَرَهُأَنَّ رَجُلًا اعْتَرَفَ عَلَى نَفْسِهِ بِالزِّنَا عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَشَهِدَ عَلَى نَفْسِهِ أَرْبَعَ مَرَّاتٍ فَأَمَرَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَرُجِمَقَالَ ابْنُ شِهَابٍ فَمِنْ أَجْلِ ذَلِكَ يُؤْخَذُ الرَّجُلُ بِاعْتِرَافِهِ عَلَى نَفْسِهِ
मलिक हमरा [इब्न शिहाब] स बतेलथि जे ओ हुनका सूचित केलथि जे एकटा एहन आदमी छल जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क समय मे व्यभिचार करबाक बात स्वीकार केलक, आ ओ चारि बेर अपना स कसम खा लेलक। तखन अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) आदेश देलखिन जे हुनका पत्थर मारल जाय। इब्न शिहाब कहलनि, "अतः कोनो आदमी के ओकर कबूलनामा के आधार पर सजा देल जा सकैत अछि."
Imam Malik : 1292
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَعْقُوبَ بْنِ زَيْدِ بْنِ طَلْحَةَ عَنْ أَبِيهِ زَيْدِ بْنِ طَلْحَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ أَنَّهُ أَخْبَرَهُأَنَّ امْرَأَةً جَاءَتْ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخْبَرَتْهُ أَنَّهَا زَنَتْ وَهِيَ حَامِلٌ فَقَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اذْهَبِي حَتَّى تَضَعِي فَلَمَّا وَضَعَتْ جَاءَتْهُ فَقَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اذْهَبِي حَتَّى تُرْضِعِيهِ فَلَمَّا أَرْضَعَتْهُ جَاءَتْهُ فَقَالَ اذْهَبِي فَاسْتَوْدِعِيهِ قَالَ فَاسْتَوْدَعَتْهُ ثُمَّ جَاءَتْ فَأَمَرَ بِهَا فَرُجِمَتْ
मलिक हमरा [या'कुब बिन जैद बिन थल्हाह] स अपन पिता [ज़ैद बिन थल्हाह] स [अब्दुल्लाह बिन अबू अवालकाह] स कहलथि जे ओ हुनका कहलथि जे एकटा महिला छथि जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स भेंट केलथि आ हुनका कहलथि जे ओ व्यभिचार केने छथि आ गर्भवती छथि। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन कहलनि: जाबत धरि अहाँ बच्चा नहि करब! ' जखन ओ बच्चाक जन्म देलनि तखन ओ हुनका लग वापस आबि गेलीह । तखन ओ कहलनि: 'जाबत धरि अहाँ ओकरा स्तनपान नहि करब ता धरि जाउ'। जखन ओ स्तनपान करा लेलक तखन फेर ओकरा देखय लेल आबि गेलीह। ओ इहो कहलनि: 'जाउ आ बच्चा केँ सौंप दियौक'। तखन ओ महिला अपन बच्चा के सौंप देलक, तकर बाद ओ अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गेलीह, फेर ओ ओकरा पत्थर मारय के आदेश देलखिन आ ओकरा पत्थर मारल गेलैन।
Imam Malik : 1293
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَزَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّ أَنَّهُمَا أَخْبَرَاهُأَنَّ رَجُلَيْنِ اخْتَصَمَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَحَدُهُمَا يَا رَسُولَ اللَّهِ اقْضِ بَيْنَنَا بِكِتَابِ اللَّهِ وَقَالَ الْآخَرُ وَهُوَ أَفْقَهُهُمَا أَجَلْ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَاقْضِ بَيْنَنَا بِكِتَابِ اللَّهِ وَأْذَنْ لِي فِي أَنْ أَتَكَلَّمَ قَالَ تَكَلَّمْ فَقَالَ إِنَّ ابْنِي كَانَ عَسِيفًا عَلَى هَذَا فَزَنَى بِامْرَأَتِهِ فَأَخْبَرَنِي أَنَّ عَلَى ابْنِي الرَّجْمَ فَافْتَدَيْتُ مِنْهُ بِمِائَةِ شَاةٍ وَبِجَارِيَةٍ لِي ثُمَّ إِنِّي سَأَلْتُ أَهْلَ الْعِلْمِ فَأَخْبَرُونِي أَنَّ مَا عَلَى ابْنِي جَلْدُ مِائَةٍ وَتَغْرِيبُ عَامٍ وَأَخْبَرُونِي أَنَّمَا الرَّجْمُ عَلَى امْرَأَتِهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَا وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَأَقْضِيَنَّ بَيْنَكُمَا بِكِتَابِ اللَّهِ أَمَّا غَنَمُكَ وَجَارِيَتُكَ فَرَدٌّ عَلَيْكَ وَجَلَدَ ابْنَهُ مِائَةً وَغَرَّبَهُ عَامًا وَأَمَرَ أُنَيْسًا الْأَسْلَمِيَّ أَنْ يَأْتِيَ امْرَأَةَ الْآخَرِ فَإِنْ اعْتَرَفَتْ رَجَمَهَا فَاعْتَرَفَتْ فَرَجَمَهَاقَالَ مَالِك وَالْعَسِيفُ الْأَجِيرُ
मलिक हमरा [इब्न शिहाब] स [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] स [अबू हुरैरा] स आ [जैद बिन खालिद अल जुहानी] स कहलथि जे ओ दुनू गोटे रिपोर्ट केलथि, जे दू गोटे एहन छलाह जे अपन मामला क शिकायत अल्लाह क रसूलुल्लाह शल्ला अल्लाहु अलैहि वसल्लम स केलथि। एक गोटे कहलकै: ‘हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अल्लाह के किताब के अनुसार हमर सबहक मामला के फैसला करू,’ जखन कि दोसर - आ ओ बेसी जानकार छल - कहलक: ‘हँ, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह! अल्लाह के किताब के अनुसार हमर सबहक मामला तय करू, मुदा हमरा बजबाक अनुमति दियौ।' ओ कहलनि: 'बाजू।' तखन ओ आदमी कहलक: ‘सत्ते हमर बेटा मजदूर छल जे एहि आदमीक लेल काज करैत छल, तखन ओ अपन पत्नीक संग व्यभिचार केलक। तखन ओ हमरा सूचित केलनि जे हमर बेटा के पाथर मारल जाय। तेँ हम तुरन्त ओकरा सय बकरी सँ मुक्ति दऽ देलियैक आ अपन दास केँ मुक्त कऽ देलियैक। तकर बाद हम एहि विषय मे कतेको विशेषज्ञ सँ पूछलहुँ, ओ लोकनि कहलनि जे हमर बेटा केँ सौ बेर मारि-पीटि एक साल धरि निर्वासित कयल जाय, जखन कि महिला केँ पाथर मारल जाय'। रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, जिनकर हाथ मे हमर आत्मा अछि, हम सही मायने मे अल्लाह केर किताब सँ अहाँक मामलाक फैसला करब। अहाँक बकरी आ दास वापस भ' जायत'। तखन ओ ओहि आदमीक बच्चा केँ सौ बेर कोड़ा मारि एक साल धरि निर्वासित क' देलक। तखन ओ उनैस अल असलमी के आदेश देलखिन जे पत्नी के आनब, अगर ओ स्वीकार करतीह त ओकरा पाथर मारल जायत। तखन ओ महिला एकरा स्वीकार केलक, तेँ उनाइस ओकरा पाथर मारि देलक। मालिक बजलाह; ''आसिफ मजदूर अछि'।
Imam Malik : 1294
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ سَعْدَ بْنَ عُبَادَةَ قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرَأَيْتَ لَوْ أَنِّي وَجَدْتُ مَعَ امْرَأَتِي رَجُلًا أَأُمْهِلُهُ حَتَّى آتِيَ بِأَرْبَعَةِ شُهَدَاءَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَعَمْ
मलिक हमरा [सुहैल बिन अबू सालिह] स [अपन पिता] स [अबू हुरैरा] स कहलथि जे सअद बिन उबादा अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछलथि; 'अहाँक की विचार अछि, जँ हमरा अपन पत्नी केँ दोसर पुरुषक संग भेटि जाय त' की हम ताबत धरि प्रतीक्षा करी जाबत धरि हम चारि गवाह नहि आनब?' रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'हाँ'।
Imam Malik : 1295
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ يَقُولُالرَّجْمُ فِي كِتَابِ اللَّهِ حَقٌّ عَلَى مَنْ زَنَى مِنْ الرِّجَالِ وَالنِّسَاءِ إِذَا أُحْصِنَ إِذَا قَامَتْ الْبَيِّنَةُ أَوْ كَانَ الْحَبَلُ أَوْ الْاعْتِرَافُ
मलिक हमरा [इब्न सिहाब] स [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] स [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] स बतेलथि ओ कहलथि, 'हम [उमर बिन खत्ताब] कए कहैत सुनलहुं; 'अल्लाह केरऽ किताब म॑ पत्थरबाजी एगो ऐन्हऽ चीज छै जे सही छै, यानी व्यभिचार करै वाला पुरुष या महिला लेली; जँ विवाहित छथि; जँ प्रमाण अछि तँ; वा जँ स्त्री गर्भवती अछि; वा कोनो स्वीकारोक्ति अछि'।
Imam Malik : 1296
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي وَاقِدٍ اللَّيْثِيِّ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِأَتَاهُ رَجُلٌ وَهُوَ بِالشَّامِ فَذَكَرَ لَهُ أَنَّهُ وَجَدَ مَعَ امْرَأَتِهِ رَجُلًا فَبَعَثَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ أَبَا وَاقِدٍ اللَّيْثِيَّ إِلَى امْرَأَتِهِ يَسْأَلُهَا عَنْ ذَلِكَ فَأَتَاهَا وَعِنْدَهَا نِسْوَةٌ حَوْلَهَا فَذَكَرَ لَهَا الَّذِي قَالَ زَوْجُهَا لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ وَأَخْبَرَهَا أَنَّهَا لَا تُؤْخَذُ بِقَوْلِهِ وَجَعَلَ يُلَقِّنُهَا أَشْبَاهَ ذَلِكَ لِتَنْزِعَ فَأَبَتْ أَنْ تَنْزِعَ وَتَمَّتْ عَلَى الْاعْتِرَافِ فَأَمَرَ بِهَا عُمَرُ فَرُجِمَتْ
मलिक हमरा अबू वाकिद अल लैथसी स सुलेमान बिन यासर स याह्या बिन सईद स बतेलथि जे सीरिया मे रहला पर एकटा आदमी उमर बिन खत्ताब लग आयल छल। ओ आदमी ओकरा कहलक जे ओकरा अपन पत्नी दोसर पुरुषक संग भेटि गेलै। तखन उमर बिन खट्टाब अबू वाकिद अल लैथसी के ओहि आदमी के पत्नी के पास भेजलखिन्ह जे ओ एहि बारे मे पूछय. एकरऽ बाद अबू वाकिद केरऽ मुलाकात वू महिला स॑ भेलै जब॑ वू कुछ महिला सिनी के साथ छेलै । तखन अबू वाकिद अपन पति द्वारा कहल गेल सब बात उमर बिन खत्ताब केँ बतौलनि, आ जे हुनका मात्र पतिक बात सँ सजा नहि भेटतनि | तखन अबू वाकिद महिला के अपन बचाव के लेल किछु कहलखिन्ह, मुदा ओ मना क देलखिन्ह. असल मे ओ अंततः अपन काज स्वीकार क लेलथि। तखन उमर हुनका पाथर मारबाक आदेश देलनि, आ हुनका पाथर मारल गेलनि।
Imam Malik : 1297
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ سَمِعَهُ يَقُولُ لَمَّا صَدَرَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِمِنْ مِنًى أَنَاخَ بِالْأَبْطَحِ ثُمَّ كَوَّمَ كَوْمَةً بَطْحَاءَ ثُمَّ طَرَحَ عَلَيْهَا رِدَاءَهُ وَاسْتَلْقَى ثُمَّ مَدَّ يَدَيْهِ إِلَى السَّمَاءِ فَقَالَ اللَّهُمَّ كَبِرَتْ سِنِّي وَضَعُفَتْ قُوَّتِي وَانْتَشَرَتْ رَعِيَّتِي فَاقْبِضْنِي إِلَيْكَ غَيْرَ مُضَيِّعٍ وَلَا مُفَرِّطٍ ثُمَّ قَدِمَ الْمَدِينَةَ فَخَطَبَ النَّاسَ فَقَالَ أَيُّهَا النَّاسُ قَدْ سُنَّتْ لَكُمْ السُّنَنُ وَفُرِضَتْ لَكُمْ الْفَرَائِضُ وَتُرِكْتُمْ عَلَى الْوَاضِحَةِ إِلَّا أَنْ تَضِلُّوا بِالنَّاسِ يَمِينًا وَشِمَالًا وَضَرَبَ بِإِحْدَى يَدَيْهِ عَلَى الْأُخْرَى ثُمَّ قَالَ إِيَّاكُمْ أَنْ تَهْلِكُوا عَنْ آيَةِ الرَّجْمِ أَنْ يَقُولَ قَائِلٌ لَا نَجِدُ حَدَّيْنِ فِي كِتَابِ اللَّهِ فَقَدْ رَجَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَجَمْنَا وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَوْلَا أَنْ يَقُولَ النَّاسُ زَادَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فِي كِتَابِ اللَّهِ تَعَالَى لَكَتَبْتُهَا الشَّيْخُ وَالشَّيْخَةُ فَارْجُمُوهُمَا أَلْبَتَّةَ فَإِنَّا قَدْ قَرَأْنَاهَاقَالَ مَالِك قَالَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ قَالَ سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ فَمَا انْسَلَخَ ذُو الْحِجَّةِ حَتَّى قُتِلَ عُمَرُ رَحِمَهُ اللَّهُ قَالَ يَحْيَى سَمِعْت قَوْله تَعَالَى يَقُولُ قَوْلُهُ الشَّيْخُ وَالشَّيْخَةُ يَعْنِي الثَّيِّبَ وَالثَّيِّبَةَ فَارْجُمُوهُمَا أَلْبَتَّةَ
मालिक हमरा [सैद बिन मुसैयब] स [याह्या बिन सईद] स कहलथि जे ओ हुनका कहैत सुनलथि; 'जखन [उमर बिन खत्ताब] मीना सँ पहुँचलाह तखन ओ अपन ऊँट केँ अबतह मे भगा देलनि।' उमर तखन कंकड़ जमा क' ढेर क' देलक। तखन ओ कंकड़ सभ केँ अपन वस्त्र सँ झाँपि देलनि, ओ अपन हाथ आकाश दिस पसारि देलनि आ कहलनि; 'हे अल्लाह, हमर उम्र बढ़ि गेल अछि, हमर ताकत कमजोर भ' गेल अछि, आ हमर लोक छिड़ियाब' लागल अछि, तें हमरा बिना बर्बादी वा अतिशयोक्ति केने अपन सान्निध्य मे आमंत्रित करू'। तखन ओ मदीना गेलाह आ लोकक समक्ष प्रवचन केलनि, कहलनि, ‘हे लोक, सत्ते विद्यमान नियम अहाँ पर लागू भेल अछि आ अहाँ पर दायित्व सेहो देल गेल अछि जे पूरा करय पड़त। अहाँ स्पष्ट नियम सँ ऊपर रहि गेल छी, जाबत अहाँ लोक केँ बामा-दहिना भटका नहि दैत छी'। -जखन कि उमर एक हाथ पर ताली बजा क' एकर प्रदर्शन केलनि-- जखन कि कहैत छलाह, 'पत्थर मारबाक आयत छोड़ि क' अहाँ नष्ट नहि भ' जाउ, अर्थात कियो कहलक; अल्लाह के किताब में हमरा सब के दू टा सजा नै भेटैत अछि'। रसुलुल्लाह सल्लाह अल्लाहु अलैहि व सल्लम पत्थरबाजी केने छथि, आ हम सब सेहो केने छी। जिनकर आत्मा हुनक हाथ मे छनि, हुनकर द्वारा, जँ लोक ई नहि कहितथि जे उमर बिन खत्ताब अल्लाह तआला केर किताब मे किछु जोड़ि देलनि त' हम ओकरा -कुरान मे- लिखि लेने रहितहुँ; 'बूढ़-बुढ़िया - जँ व्यभिचार करैत छथि - तखन दुनू गोटे केँ एके बेर मे पाथर मारि दियौक, 'किएक त' हम सभ पढ़ि लेने छी'।' मालिक बजलाह; याह्या बिन सईद कहलनि; सईद बिन मुसैयाब कहलनि; 'जुलहिज्जा के महीना एखन धरि नहि बीतल छल, उमर बिन खट्टाब के मारल गेल छल'. याह्या कहलक; 'हम अल्लाह तआला के वचन सुनलौं - स्त्री-पुरुष जे विवाहित छथि, तखन हुनका पाथर मारि दियौन - ' ।
Imam Malik : 1298
حَدَّثَنِي مَالِك أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍعَنْ الَّذِي يَعْمَلُ عَمَلَ قَوْمِ لُوطٍ فَقَالَ ابْنُ شِهَابٍ عَلَيْهِ الرَّجْمُ أَحْصَنَ أَوْ لَمْ يُحْصِنْ
मालिक हमरा कहलनि जे एक बेर ओ [इब्न शिहाब] सं एकटा एहन व्यक्ति के बारे में पूछने छलाह जे पैगम्बर लूत के लोक के कर्म करैत छथि, ओ जवाब देलखिन: 'ओकरा विवाहित हो या नहि हो, ओकरा पत्थर मारल जेबाक चाही'।
Imam Malik : 1299
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَأَنَّ رَجُلًا اعْتَرَفَ عَلَى نَفْسِهِ بِالزِّنَا عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَدَعَا لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِسَوْطٍ فَأُتِيَ بِسَوْطٍ مَكْسُورٍ فَقَالَ فَوْقَ هَذَا فَأُتِيَ بِسَوْطٍ جَدِيدٍ لَمْ تُقْطَعْ ثَمَرَتُهُ فَقَالَ دُونَ هَذَا فَأُتِيَ بِسَوْطٍ قَدْ رُكِبَ بِهِ وَلَانَ فَأَمَرَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجُلِدَ ثُمَّ قَالَ أَيُّهَا النَّاسُ قَدْ آنَ لَكُمْ أَنْ تَنْتَهُوا عَنْ حُدُودِ اللَّهِ مَنْ أَصَابَ مِنْ هَذِهِ الْقَاذُورَاتِ شَيْئًا فَلْيَسْتَتِرْ بِسِتْرِ اللَّهِ فَإِنَّهُ مَنْ يُبْدِي لَنَا صَفْحَتَهُ نُقِمْ عَلَيْهِ كِتَابَ اللَّهِ
मालिक हमरा [जैद बिन असलम] स बतेलथि जे कहने छलाह, 'रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के समय मे एक आदमी व्यभिचार के बात कबूल केलक।' अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) एकटा चाबुक मंगलनि, आ एकटा टूटल चाबुक हुनका लग आनल गेल। ओ कहलनि: 'एहि सँ पैघ।' तखन हुनका एकटा चाबुक देल गेलनि जे एखनो नीक छल आ नहि काटल गेल छल । ओ कहलनि: 'एहि सँ हल्लुक।' तखन ओकरा एकटा चाबुक देल गेलै जे एक दोसरा सँ बान्हल छलैक आ किछु कोमल छलैक । तखन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका बान्हय के आदेश देलखिन, आ ओ आदमी बान्हल गेल। तकर बाद ओ कहलनि: हे लोक, समय आबि गेल अछि जे अहाँ अल्लाह के मनाही के उल्लंघन बंद करी। जे कियो एहि गंदा काज मे पड़य ओकरा अल्लाह केर रक्षा सँ झाँपि देबाक चाही। जे कियो हमरा सब के ओकर काज के जानकारी देत, हम सब ओकरा पर अल्लाह के नियम लागू करब।'
Imam Malik : 1300
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ صَفِيَّةَ بِنْتَ أَبِي عُبَيْدٍ أَخْبَرَتْهُ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَأُتِيَ بِرَجُلٍ قَدْ وَقَعَ عَلَى جَارِيَةٍ بِكْرٍ فَأَحْبَلَهَا ثُمَّ اعْتَرَفَ عَلَى نَفْسِهِ بِالزِّنَا وَلَمْ يَكُنْ أَحْصَنَ فَأَمَرَ بِهِ أَبُو بَكْرٍ فَجُلِدَ الْحَدَّ ثُمَّ نُفِيَ إِلَى فَدَكَ
[नाफी’] स मालिक हमरा कहलनि जे [शफियाह बिंत उबैद] हुनका कहलनि जे एक बेर जखन [अबू बकर अस सिद्दिक] के सामना एकटा एहन पुरुष सं भेल छल जे एकटा महिला दास के संग सेक्स केलक जे गर्भवती हेबा तक एखन धरि कुमारि छल, तखन ओ आदमी अपन हरकत स्वीकार केलक, भले ओकर विवाह नहि भेल छल। तखन अबू बकर हुनका बान्हबाक आ फेर फदक निर्वासित करबाक आदेश देलनि' |