Imam Malik : 1241
حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ وَعَنْ مُحَمَّدِ بْنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ أَنَّهُمَا حَدَّثَاهُ عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ أَنَّهُ قَالَإِنَّ أَبَاهُ بَشِيرًا أَتَى بِهِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ إِنِّي نَحَلْتُ ابْنِي هَذَا غُلَامًا كَانَ لِي فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَكُلَّ وَلَدِكَ نَحَلْتَهُ مِثْلَ هَذَا فَقَالَ لَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَارْتَجِعْهُ
याह्या म्हानै मलिक सूं [इब्न शिहाब] सूं [हुमैद बिन अब्दुर्रहमान बिन औफ] सूं अर [मुहम्मद बिन नुमान बिन बसीर] सूं बतायो है कै वै दोनूं उणनै बतायो है, [नूमान बिन बसीर] सूं उण बतायो कै उणरा पिता, बसीर, खुद नै अल्लाह रै रसूल सल्लाहु अलैह नै देखण सारू ल्याया हा अर मैं कैयो कै म्हारो बेटो है नौकर'। रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम फेर पूछ्यो: 'कांई थै आपरा हरेक टाबर नै भी दे दियो है?' उण जवाब दियो; 'नीं'। रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कह्यो: 'फेर, दान पाछो ले लो'।
Imam Malik : 1242
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَكَانَ نَحَلَهَا جَادَّ عِشْرِينَ وَسْقًا مِنْ مَالِهِ بِالْغَابَةِ فَلَمَّا حَضَرَتْهُ الْوَفَاةُ قَالَ وَاللَّهِ يَا بُنَيَّةُ مَا مِنْ النَّاسِ أَحَدٌ أَحَبُّ إِلَيَّ غِنًى بَعْدِي مِنْكِ وَلَا أَعَزُّ عَلَيَّ فَقْرًا بَعْدِي مِنْكِ وَإِنِّي كُنْتُ نَحَلْتُكِ جَادَّ عِشْرِينَ وَسْقًا فَلَوْ كُنْتِ جَدَدْتِيهِ وَاحْتَزْتِيهِ كَانَ لَكِ وَإِنَّمَا هُوَ الْيَوْمَ مَالُ وَارِثٍ وَإِنَّمَا هُمَا أَخَوَاكِ وَأُخْتَاكِ فَاقْتَسِمُوهُ عَلَى كِتَابِ اللَّهِ قَالَتْ عَائِشَةُ فَقُلْتُ يَا أَبَتِ وَاللَّهِ لَوْ كَانَ كَذَا وَكَذَا لَتَرَكْتُهُ إِنَّمَا هِيَ أَسْمَاءُ فَمَنْ الْأُخْرَى فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ ذُو بَطْنِ بِنْتِ خَارِجَةَ أُرَاهَا جَارِيَةً
मलिक म्हनैं बतायो कै [इब्न शिहाब] सूं ['उर्वाह बिन अज जुबैर] सूं [ऐस्याह] सूं पैगम्बर सल्ला अल्लाह अलैहि व सल्लम री पत्नी, उण कैयो कै [अबू बकर अश शिद्दीक] नैं गबाह रै क्षेत्र में आपरी संपत्ति सूं बीस वसक -साठ शा'- दियो हो। जद अबू बकर आपरी मौत रै नेड़ै पूग्या हा, तो बां कैयो; 'ओ म्हारा बेटा! अल्लाह री कसम, थारै अलावा कोई और कोनी है जिणनै मैं अमीर बणणो चावूंला। म्हारै पछै थारै सूं गरीबी रो दुख भोगणियो कोई कोनी है। मैं थानै आपरै खजानै सूं बीस वसाक -खजूर- दी है, जे थै बांनै काट'र एकठ कर ली है तो वै थारी है। पण आज ओ खजानो विरासत में मिल्योड़ो खजानो बणग्यो है। आपरा दो भाई अर दो बहनां नै दे दो, बांनै अल्लाह री किताब रै आधार माथै बांट दो'। आयशा बोली; 'ओ म्हारा पिताजी! अल्लाह री कसम, जे ओ अर ओ हुवैला - थारी मौत - तो म्हैं साची-साची आपरी मालिकाना हक नै त्याग दूंला। म्हारो भाई आसमा है, तो म्हैं और किण माथै ध्यान देवूं।' अबू बकर कह्यो; "बिंत खरीजा रै पेट रै मांय जको गर्भ हो, म्हैं देख्यो कै वा एक दास ही - म्हारो आश्रित-''।
Imam Malik : 1243
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدٍ الْقَارِيِّ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَمَا بَالُ رِجَالٍ يَنْحَلُونَ أَبْنَاءَهُمْ نُحْلًا ثُمَّ يُمْسِكُونَهَا فَإِنْ مَاتَ ابْنُ أَحَدِهِمْ قَالَ مَا لِي بِيَدِي لَمْ أُعْطِهِ أَحَدًا وَإِنْ مَاتَ هُوَ قَالَ هُوَ لِابْنِي قَدْ كُنْتُ أَعْطَيْتُهُ إِيَّاهُ مَنْ نَحَلَ نِحْلَةً فَلَمْ يَحُزْهَا الَّذِي نُحِلَهَا حَتَّى يَكُونَ إِنْ مَاتَ لِوَرَثَتِهِ فَهِيَ بَاطِلٌ
मलिक म्हानै [इब्नू शिहाब] सूं ['उर्वाह बिन अज जुबैर] सूं [अब्दुर्रहमान बिन अब्दुलकरी] सूं बतायो है कै [उमर बिन खत्ताब] कह्यो है; 'अगर बां मांय सूं कोई मर जावै तो आदमी आपरै टाबरां नै कीं क्यूं देवै है अर पछै पाछो मांगै है?' बो बोल्यो, 'मैं आपरै हाथां मांय ओ खजानो कदैई किणी नै नीं दियो।' पण जद टाबर मरग्यो तो बो बोल्यो, 'संपत्ति म्हारै बेटै री है, म्हैं उणनै दे दी है'। सावधान रैवो - जो लोग ऐड़ो करै है -, जो कोई भी दान देवै है, अर दान प्राप्त करण आळा नै मर्यां तांई नीं मिल्यो है, तो संपत्ति रो विरासत बणणो मान्य कोनी है'।
Imam Malik : 1244
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ دَاوُدَ بْنِ الْحُصَيْنِ عَنْ أَبِي غَطَفَانَ بْنِ طَرِيفٍ الْمُرِّيِّ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَمَنْ وَهَبَ هِبَةً لِصِلَةِ رَحِمٍ أَوْ عَلَى وَجْهِ صَدَقَةٍ فَإِنَّهُ لَا يَرْجِعُ فِيهَا وَمَنْ وَهَبَ هِبَةً يَرَى أَنَّهُ إِنَّمَا أَرَادَ بِهَا الثَّوَابَ فَهُوَ عَلَى هِبَتِهِ يَرْجِعُ فِيهَا إِذَا لَمْ يُرْضَ مِنْهَا
मलिक नै [दाउद बिन अल हुशैन] सूं [अबू घटाफान बिन थरीफ अल मारी] सूं बतायो है कै [उमर बिन खत्ताब] कह्यो है; 'जो कोई भी दोस्ती नै मजबूत करण रै वास्तै या दान रै वास्तै कोई दान देवै है, उणनै पाछो नीं लेणो चाइजै। कोई भी कोई दान देवै है, इनाम री उम्मीद रै साथै, फेर वो दान सूं राजी नीं है तो वो उणनै पाछो ले सकै है।
Imam Malik : 1245
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْأَنْصَارِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَيُّمَا رَجُلٍ أُعْمِرَ عُمْرَى لَهُ وَلِعَقِبِهِ فَإِنَّهَا لِلَّذِي يُعْطَاهَا لَا تَرْجِعُ إِلَى الَّذِي أَعْطَاهَا أَبَدًالِأَنَّهُ أَعْطَى عَطَاءً وَقَعَتْ فِيهِ الْمَوَارِيثُ
मलिक [इब्नू शिहाब] सूं [अबू सलामा बिन अब्दुर्रहमान बिन औफ] सूं [जाबीर बिन अब्दुल्लाह अल अंसारी] सूं मलिक बतायो है कै अल्लाह रा रसूल सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम कह्यो है कै 'जिणनै खुद रै वास्तै या आपरै वंशज रै वास्तै रैवण री जगां दी जावै है, वो प्राप्तकर्ता री संपत्ति बण जावै है अर वो कदैई पाछो नीं आ सकै। क्यूंकै उण एक वरदान दियो है जिण मांय विरासत रो अधिकार है'।
Imam Malik : 1246
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ أَنَّهُ سَمِعَ مَكْحُولًا الدِّمَشْقِيَّ يَسْأَلُ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍعَنْ الْعُمْرَى وَمَا يَقُولُ النَّاسُ فِيهَا فَقَالَ الْقَاسِمُ بْنُ مُحَمَّدٍ مَا أَدْرَكْتُ النَّاسَ إِلَّا وَهُمْ عَلَى شُرُوطِهِمْ فِي أَمْوَالِهِمْ وَفِيمَا أُعْطُوا
मलिक म्हनैं [यह्या बिन सईद] सूं [अब्दुर्रहमान बिन अल कासिम] सूं बतायो कै उण मखुल अद दिमासीकी नैं [अल कासिम बिन मुहम्मद] सूं उमरा रै बारै में अर लोगां रै बारै में पूछता थका सुण्यो, फेर अल कासिम बिन मुहम्मद कह्यो; 'मैं वांरै अलावा किणी सूं भी कोनी मिल्यो, वांरै समझौते रै मांय संपत्ति अर वांनै कांई दियो है'।
Imam Malik : 1247
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَوَرِثَ مِنْ حَفْصَةَ بِنْتِ عُمَرَ دَارَهَا قَالَ وَكَانَتْ حَفْصَةُ قَدْ أَسْكَنَتْ بِنْتَ زَيْدِ بْنِ الْخَطَّابِ مَا عَاشَتْ فَلَمَّا تُوُفِّيَتْ بِنْتُ زَيْدٍ قَبَضَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ الْمَسْكَنَ وَرَأَى أَنَّهُ لَهُ
मलिक [नफी] सूं बतायो कै [अब्दुल्लाह बिन उमर] नै हफशाह बिन उमर रो घर विरासत में मिल्यो। नफी कह्यो; 'हफशाह जैद बिन खत्ताब री बेटी नै जद तांई जीवती है, बांनै प्लेसमेंट राइट्स दे दिया है। जद जैद री बेटी री मौत हुई तो अब्दुल्ला बिन उमर घर राख्यो अर उण तर्क दियो कै ओ घर उणरो है।
Imam Malik : 1248
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ يَزِيدَ مَوْلَى الْمُنْبَعِثِ عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّ أَنَّهُ قَالَجَاءَ رَجُلٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَأَلَهُ عَنْ اللُّقَطَةِ فَقَالَ اعْرِفْ عِفَاصَهَا وَوِكَاءَهَا ثُمَّ عَرِّفْهَا سَنَةً فَإِنْ جَاءَ صَاحِبُهَا وَإِلَّا فَشَأْنَكَ بِهَا قَالَ فَضَالَّةُ الْغَنَمِ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ هِيَ لَكَ أَوْ لِأَخِيكَ أَوْ لِلذِّئْبِ قَالَ فَضَالَّةُ الْإِبِلِ قَالَ مَا لَكَ وَلَهَا مَعَهَا سِقَاؤُهَا وَحِذَاؤُهَا تَرِدُ الْمَاءَ وَتَأْكُلُ الشَّجَرَ حَتَّى يَلْقَاهَا رَبُّهَا
मलिक म्हनैं [रबीअह बिन अबू अब्दुर्रहमान] सूं [यजीद] अल मुनबाइट्स रै दास सूं बतायो है, [जैद बिन खालिद अल जुहानी] सूं उण कैयो है; 'एक आदमी अल्लाह रै रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सूं मिल्यो अर लुकतह - मिल्योड़ी वस्तु - रै बारै में पूछ्यो, फेर बो बोल्यो: 'ढक्कण अर रस्सी नै जाणो, फेर एक साल तांई घोषणा करो। जे मालिक आवै तो बांनै दे दो अर जे नीं आवै तो ओ थारो है। आदमी फेर पूछ्यो, 'हे अल्लाह रा रसूल, आवारा बकरी रो कांई?' उण जवाब दियो: 'बकरी थारै वास्तै है, या थारै भाई रै वास्तै है, या भेड़िया रै वास्तै है'। आदमी फेरूं पूछ्यो; 'उण ऊंट रै बारै मांय कांई है जको खो गयो हो? ' बां जवाब दियो: 'थानै ऊंठ सूं कांई काम है, ओ पी सकै है अर बां रा पग है! वो आपरै मालिक सूं मिलबा तांई खुद रो पेय अर खाणो खुद ई ढूंढ लेसी।
Imam Malik : 1249
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَيُّوبَ بْنِ مُوسَى عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بَدْرٍ الْجُهَنِيِّ أَنَّ أَبَاهُ أَخْبَرَهُأَنَّهُ نَزَلَ مَنْزِلَ قَوْمٍ بِطَرِيقِ الشَّامِ فَوَجَدَ صُرَّةً فِيهَا ثَمَانُونَ دِينَارًا فَذَكَرَهَا لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ عَرِّفْهَا عَلَى أَبْوَابِ الْمَسَاجِدِ وَاذْكُرْهَا لِكُلِّ مَنْ يَأْتِي مِنْ الشَّأْمِ سَنَةً فَإِذَا مَضَتْ السَّنَةُ فَشَأْنَكَ بِهَا
मलिक म्हानै [अय्यूब बिन मूसा] सूं [मुआविया बिन अब्दुल्लाह बिन बदर अल जुहानी] सूं बतायो कै [उणरै पिता] उणनै बतायो कै वो सीरिया जांवता थकां एक लोगां रै कनै रुक्यो हो। फेर उणनै अस्सी दीनार रो एक थैलो मिल्यो, उणनै आ बात उमर बिन खत्ताब नै बताई। [उमर] फेर कह्यो, 'मस्जिद रै दरवाजा माथै इणनै घोषित करो अर साल रै मांय सीरिया सूं आवा वाळा नै बताओ। जे एक साल बीतग्यो है तो ओ थारी मर्जी है।
Imam Malik : 1250
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ رَجُلًا وَجَدَ لُقَطَةً فَجَاءَ إِلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَفَقَالَ لَهُ إِنِّي وَجَدْتُ لُقَطَةً فَمَاذَا تَرَى فِيهَا فَقَالَ لَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ عَرِّفْهَا قَالَ قَدْ فَعَلْتُ قَالَ زِدْ قَالَ قَدْ فَعَلْتُ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ لَا آمُرُكَ أَنْ تَأْكُلَهَا وَلَوْ شِئْتَ لَمْ تَأْخُذْهَا
मन्नै बतायो गयो है कै [नाफी] रा मलिक कह्यो, 'एक आदमी नै एक वस्तु मिली, फेर वो अब्दुल्ला बिन उमर कनै गयो अर बोल्यो; 'मनै एक चीज मिली, थारो कांई विचार है?' [अब्दुल्ला बिन उमर] जवाब दियो; 'घोषणा करो! ' आदमी बोल्यो; 'मैं तो कर चुक्यो हूं'। अब्दुल्ला बोल्यो, 'फेर सूं करो'। आदमी बोल्यो, 'मैं कर दियो'। अब्दुल्ला कह्यो; 'मैं थानै ओ कोनी कै रैयो हूं कै थै ओ खाओ, जे थै चावो हो तो मत लेवो'।
Imam Malik : 1251
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّ ثَابِتَ بْنَ الضَّحَّاكِ الْأَنْصَارِيَّ أَخْبَرَهُأَنَّهُ وَجَدَ بَعِيرًا بِالْحَرَّةِ فَعَقَلَهُ ثُمَّ ذَكَرَهُ لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَأَمَرَهُ عُمَرُ أَنْ يُعَرِّفَهُ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ فَقَالَ لَهُ ثَابِتٌ إِنَّهُ قَدْ شَغَلَنِي عَنْ ضَيْعَتِي فَقَالَ لَهُ عُمَرُ أَرْسِلْهُ حَيْثُ وَجَدْتَهُ
मलिक म्हानै [यह्या बिन सईद] सूं [सुलेमान बिन यासर] सूं बतायो कै [थाबित बिन दलाहक अल अंसारी] उणनै बतायो कै उणनै एक बार एक ऊंठ मिल्यो जिको कठैई भाग गयो हो, फेर उणनै बांध दियो अर [उमर बिन खत्ताब] नै सूचना दी। उमर फेर उणनै तीन बार घोषणा करण सारू कैयो। थाबिट कह्यो; 'इणसूं म्हैं इतरो व्यस्त रैयो हूं कै म्हैं आपरै खेतां री देखभाळ नीं कर सकूं'। उमर बोल्यो, 'ऊंट नै जठै सूं लायो हो, बठै जावण दो! '
Imam Malik : 1252
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَ وَهُوَ مُسْنِدٌ ظَهْرَهُ إِلَى الْكَعْبَةِمَنْ أَخَذَ ضَالَّةً فَهُوَ ضَالٌّ
मलिक म्हनैं [यह्या बिन सईद] सूं [सईद बिन मुसैयब] सूं बतायो कै [उमर बिन खत्ताब] काबा रै खिलाफ आपरी पीठ टेकता थका कह्यो, 'जो भी आवारा जानवर नै लेवै है वो भटक गयो है'।
Imam Malik : 1253
و حَدَّثَنِي مَالِك أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ شِهَابٍ يَقُولُكَانَتْ ضَوَالُّ الْإِبِلِ فِي زَمَانِ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ إِبِلًا مُؤَبَّلَةً تَنَاتَجُ لَا يَمَسُّهَا أَحَدٌ حَتَّى إِذَا كَانَ زَمَانُ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ أَمَرَ بِتَعْرِيفِهَا ثُمَّ تُبَاعُ فَإِذَا جَاءَ صَاحِبُهَا أُعْطِيَ ثَمَنَهَا
म्हनैं मलिक बतायो हो कै उण [इब्न शिहाब] नैं कैता सुण्यो हो; 'उमर बिन खत्ताब रै बगत इतरा ऊंठ भटकग्या हा, बां री नस्ल भी हुयगी अर बांनै कोई नीं लेग्यो। इण बीच, [उथमान बिन अफ्फान], इणरी विशेषतावां नै पहचाण्यां पछै, उणनै बेचण रो हुकम दियो, जे मालिक आवैला तो बिक्री सूं मिलण आळा पइसा उणनै दे दिया जावैला।'
Imam Malik : 1254
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ سَعِيدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ شُرَحْبِيلَ بْنِ سَعِيدِ بْنِ سَعْدِ بْنِ عُبَادَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ أَنَّهُ قَالَخَرَجَ سَعْدُ بْنُ عُبَادَةَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي بَعْضِ مَغَازِيهِ فَحَضَرَتْ أُمَّهُ الْوَفَاةُ بِالْمَدِينَةِ فَقِيلَ لَهَا أَوْصِي فَقَالَتْ فِيمَ أُوصِي إِنَّمَا الْمَالُ مَالُ سَعْدٍ فَتُوُفِّيَتْ قَبْلَ أَنْ يَقْدَمَ سَعْدٌ فَلَمَّا قَدِمَ سَعْدُ بْنُ عُبَادَةَ ذُكِرَ ذَلِكَ لَهُ فَقَالَ سَعْدٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَلْ يَنْفَعُهَا أَنْ أَتَصَدَّقَ عَنْهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَعَمْ فَقَالَ سَعْدٌ حَائِطُ كَذَا وَكَذَا صَدَقَةٌ عَنْهَا لِحَائِطٍ سَمَّاهُ
मलिक म्हनैं बतायो है [सैद बिन अमरू बिन सुरहबिल बिन सईद बिन साद बिन उबदह] सूं [उणरै पिता] सूं [उणरै दादा] सूं कैयो है; साद बिन उबदाह कई युद्धां रै मांय रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम रै साथै निकल्या। जद बांरी मां, जकी मदीना मांय ही, आपरी मौत रै नेड़ै ही, बां बांनै कैयो, 'व्यवहार करो'। उणरी मां पछै कैयो; 'वास्तव में ओ खजानो स'द रो है'। फेर सद मदीना पूगबा सूं पैली ही वो मरग्यो। जद सद बिन उबदाह पूग्या तो बांनै आ बात बताई गई। सअद कह्यो, 'हे अल्लाह रा रसूल, जे मैं आपरी मां नै दान करूंला तो कांई इणसूं म्हारी मां नै फायदो हुवैला?' रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दियो: 'हां'। साद फेर बोल्यो; 'ओ बाग अर आ म्हारी मां रै नाम माथै भिक्षा है'।
Imam Malik : 1255
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّ رَجُلًا قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ أُمِّي افْتُلِتَتْ نَفْسُهَا وَأُرَاهَا لَوْ تَكَلَّمَتْ تَصَدَّقَتْ أَفَأَتَصَدَّقُ عَنْهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَعَمْ
मलिक नै [हिस्याम बिन उर्वाह] सूं [उणरै पिता] सूं [आइशा] पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम री पत्नी सूं बतायो हो, उण कैयो, 'एक आदमी रसूल अल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम सूं कह्यो; 'म्हारी मां अचाणचक मरगी, म्हैं सोच्यो कै जे बां नै बात करण रो फुरसत हुवै तो बां कीं दे देसी। कांई मैं उणनै दान कर सकूं?' रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दियो: 'हां'।
Imam Malik : 1256
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَا حَقُّ امْرِئٍ مُسْلِمٍ لَهُ شَيْءٌ يُوصَى فِيهِ يَبِيتُ لَيْلَتَيْنِ إِلَّا وَوَصِيَّتُهُ عِنْدَهُ مَكْتُوبَةٌ
[नाफी] रा मलिक [अब्दुल्लाह बिन उमर] सूं म्हनैं बतायो कै रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि व सल्लम कह्यो है कै 'एक मुसलमान रै वास्तै वसीयत करण सारू कोई चीज है अर पछै दो रातां तांई छोड़ देवै, जद तांई कै उणरी वसीयत पैली नीं लिखी जावै, ओ ठीक कोनी है।'
Imam Malik : 1257
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ حَزْمٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ عَمْرَو بْنَ سُلَيْمٍ الزُّرَقِيَّ أَخْبَرَهُأَنَّهُ قِيلَ لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ إِنَّ هَاهُنَا غُلَامًا يَفَاعًا لَمْ يَحْتَلِمْ مِنْ غَسَّانَ وَوَارِثُهُ بِالشَّامِ وَهُوَ ذُو مَالٍ وَلَيْسَ لَهُ هَاهُنَا إِلَّا ابْنَةُ عَمٍّ لَهُ قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَلْيُوصِ لَهَا قَالَ فَأَوْصَى لَهَا بِمَالٍ يُقَالُ لَهُ بِئْرُ جُشَمٍ قَالَ عَمْرُو بْنُ سُلَيْمٍ فَبِيعَ ذَلِكَ الْمَالُ بِثَلَاثِينَ أَلْفَ دِرْهَمٍ وَابْنَةُ عَمِّهِ الَّتِي أَوْصَى لَهَا هِيَ أُمُّ عَمْرِو بْنِ سُلَيْمٍ الزُّرَقِيِّو حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ حَزْمٍ أَنَّ غُلَامًا مِنْ غَسَّانَ حَضَرَتْهُ الْوَفَاةُ بِالْمَدِينَةِ وَوَارِثُهُ بِالشَّامِ فَذُكِرَ ذَلِكَ لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَقِيلَ لَهُ إِنَّ فُلَانًا يَمُوتُ أَفَيُوصِي قَالَ فَلْيُوصِ قَالَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ قَالَ أَبُو بَكْرٍ وَكَانَ الْغُلَامُ ابْنَ عَشْرِ سِنِينَ أَوْ اثْنَتَيْ عَشَرَةَ سَنَةً قَالَ فَأَوْصَى بِبِئْرِ جُشَمٍ فَبَاعَهَا أَهْلُهَا بِثَلَاثِينَ أَلْفَ دِرْهَمٍ
मलिक म्हनैं [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर बिन हजम] सूं [उणरै पिता] सूं बतायो है कै ['अमरू बिन सुलेम अज जुराकी] उणनैं बतायो है कै उणनैं उमर बिन खत्ताब नैं कैयो गयो हो; 'साची, एक बेटो हो जिको गस्सन सूं यौवन तांई नीं पूग्यो हो, जदकै उणरो वारिस शाम रो एक मिनख हो। ओ टाबर एक अमीर टाबर हो पण उणरै कनै आपरै काकै री बेटी रै अलावा कोई नीं हो। [उमर बिन खत्ताब] जवाब दियो; 'उणनै आपरै काकै रै बेटै नै वसीयत करणी चाइजै'। अमरू बिन सुलैम कह्यो; 'छोरा नै आपरै काकै री बेटी री वसीयत जुस्याम कुवै नाम री संपत्ति रै साथै विरासत में मिली'। अमरू बिन सुलैम कह्यो; 'तो वा संपत्ति तीस हजार दिरहम में बेची गई अर वसीयत दी गई काकै री बेटी रो नाम 'अमरू बिन सुलैम अज जुराकी' हो। मलिक म्हनैं [यह्या बिन सईद] सूं [अबू बकर बिन हजम] सूं बतायो कै मदीना मांय गस्सान रो एक बेटो हो जिको आपरी मौत रै नेड़ै हो, जदकै उणरो वारिस सीरिया मांय हो। फेर उण आ बात उमर बिन खत्ताब तांई पूगाई। उणनै कैयो गयो हो; 'कोई मरग्यो है, कांई उणरै कनै कोई वसीयत है?' [उमर] कह्यो; 'उणनै एक वसीयत बणाणी चाइजै'। याह्या बिन सईद कह्यो; अबू बकर कह्यो; 'बाळक दस-बारह बरस रो हो, फेर उण जुस्याम रै कुवै सूं वसीयत करी, फेर उणरै घरवाळां नै कुवै तीस हजार दिरहम में बेच दियो'।
Imam Malik : 1258
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَامِرِ بْنِ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَجَاءَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعُودُنِي عَامَ حَجَّةِ الْوَدَاعِ مِنْ وَجَعٍ اشْتَدَّ بِي فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَدْ بَلَغَ بِي مِنْ الْوَجَعِ مَا تَرَى وَأَنَا ذُو مَالٍ وَلَا يَرِثُنِي إِلَّا ابْنَةٌ لِي أَفَأَتَصَدَّقُ بِثُلُثَيْ مَالِي قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا فَقُلْتُ فَالشَّطْرُ قَالَ لَا ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الثُّلُثُ وَالثُّلُثُ كَثِيرٌ إِنَّكَ أَنْ تَذَرَ وَرَثَتَكَ أَغْنِيَاءَ خَيْرٌ مِنْ أَنْ تَذَرَهُمْ عَالَةً يَتَكَفَّفُونَ النَّاسَ وَإِنَّكَ لَنْ تُنْفِقَ نَفَقَةً تَبْتَغِي بِهَا وَجْهَ اللَّهِ إِلَّا أُجِرْتَ حَتَّى مَا تَجْعَلُ فِي فِي امْرَأَتِكَ قَالَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَأُخَلَّفُ بَعْدَ أَصْحَابِي فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّكَ لَنْ تُخَلَّفَ فَتَعْمَلَ عَمَلًا صَالِحًا إِلَّا ازْدَدْتَ بِهِ دَرَجَةً وَرِفْعَةً وَلَعَلَّكَ أَنْ تُخَلَّفَ حَتَّى يَنْتَفِعَ بِكَ أَقْوَامٌ وَيُضَرَّ بِكَ آخَرُونَ اللَّهُمَّ أَمْضِ لِأَصْحَابِي هِجْرَتَهُمْ وَلَا تَرُدَّهُمْ عَلَى أَعْقَابِهِمْ لَكِنْ الْبَائِسُ سَعْدُ بْنُ خَوْلَةَ يَرْثِي لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ مَاتَ بِمَكَّةَ
मन्नै बतायो गयो है कै [इब्न शिहाब] सूं ['अमीर बिन सद बिन अबू वक्कास] सूं [उणरै पिता] सूं मलिक कह्यो; रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम हज वाड़ा कार्यक्रम रै दौरान म्हारै सूं मिलण आया, क्यूंकै उण बगत म्हैं घणो बीमार हो। म्हैं कैयो; 'हे अल्लाह रा रसूल, अबार म्हैं गंभीर रूप सूं बीमार हूं अर म्हारै कनै घणी धन-दौलत है, पण म्हारी बेटी रै अलावा कोई भी म्हारो वारिस कोनी है, कांई म्हैं आपरी धन-दौलत रै दो तिहाई हिस्सै सूं दान करूं? ' रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कह्यो; 'मत करो,' म्हैं पूछ्यो; 'या आधा? ' उण कह्यो: 'नीं,' फेर रसूलल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कह्यो: 'एक तिहाई। एक तिहाई घणो है। थारै वास्तै थारा वारिस नै गरीब अर भीख मांगता छोड़बा सूं बेसी अमीर छोडणो भलो है। आपरी धन-दौलत नै अल्लाह री मंजूरी री उम्मीद में मत खर्च करो जद तांई कै थनै आपरी घरआळी रै मुंडै में घालण रै बराबर रो इनाम नीं मिल जावैला'। सद बिन अबू वक्कास कह्यो, 'मैं कह्यो; 'हे अल्लाह रा रसूल, कांई मैं म्हारा दोस्तां रै जावण रै बाद मक्का मांय रैय सकूं?' रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब दियो: 'भले ही थै मक्का रै मांय रैवो अर भला काम करो, पण थारी शान अर आदर निस्संदेह बढ़ैला। ओ हो सकै है कै जे थै इण मांय रैवोला तो इणसूं एक समूह नै फायदो हुवैला अर दूजा समूहां नै नुकसान हुवैला। हे अल्लाह, म्हारा दोस्तां री हिजरा री यात्रा नै सुचारू बणाओ, बां रो उत्साह मत कम करो।' पण सद बिन खौला रै सागै एक दुखद किस्मत आई, बांनै मक्का रै मांय मौत हुयगी। रसूलुल्लाह सल्लाहु 'अलेहि व सल्लम उणरै वास्तै दया अर माफी मांगी'।
Imam Malik : 1259
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّ مُخَنَّثًا كَانَ عِنْدَ أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي أُمَيَّةَ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْمَعُ يَا عَبْدَ اللَّهِ إِنْ فَتَحَ اللَّهُ عَلَيْكُمْ الطَّائِفَ غَدًا فَأَنَا أَدُلُّكَ عَلَى ابْنَةِ غَيْلَانَ فَإِنَّهَا تُقْبِلُ بِأَرْبَعٍ وَتُدْبِرُ بِثَمَانٍ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَدْخُلَنَّ هَؤُلَاءِ عَلَيْكُمْ
[हिस्याम बिन उर्वाह] रै मलिक नै [उणरै पिता] सूं बतायो कै उम्म सलामा रै कनै एक किन्नर हो, जो पैगम्बर सल्लाहु अलैहि वसल्लम री पत्नी ही, उण अब्दुल्लाह बिन अबू उमयाह नै कैयो अर रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम सुणी; 'ओ अब्दुल्ला, जे एक दिन अल्लाह थारै वास्तै ताइफ खोल दे तो मैं थानै घैलान री बेटी दिखा दूंला। साची में वो आगे च्यार सूं अर पाछै आठ सूं देख्यो जावेला'। फेर रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम बोल्या: 'कदैई बांनै थानै देखबा रै वास्तै मांय मत आण दे'।
Imam Malik : 1260
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ يَقُولُكَانَتْ عِنْدَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ امْرَأَةٌ مِنْ الْأَنْصَارِ فَوَلَدَتْ لَهُ عَاصِمَ بْنَ عُمَرَ ثُمَّ إِنَّهُ فَارَقَهَا فَجَاءَ عُمَرُ قُبَاءً فَوَجَدَ ابْنَهُ عَاصِمًا يَلْعَبُ بِفِنَاءِ الْمَسْجِدِ فَأَخَذَ بِعَضُدِهِ فَوَضَعَهُ بَيْنَ يَدَيْهِ عَلَى الدَّابَّةِ فَأَدْرَكَتْهُ جَدَّةُ الْغُلَامِ فَنَازَعَتْهُ إِيَّاهُ حَتَّى أَتَيَا أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَ فَقَالَ عُمَرُ ابْنِي وَقَالَتْ الْمَرْأَةُ ابْنِي فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ خَلِّ بَيْنَهَا وَبَيْنَهُ قَالَ فَمَا رَاجَعَهُ عُمَرُ الْكَلَامَقَالَ و سَمِعْت قَوْله تَعَالَى يَقُولُ وَهَذَا الْأَمْرُ الَّذِي آخُذُ بِهِ فِي ذَلِكَ
मलिक म्हनैं [यह्या बिन सईद] सूं बतायो कै उण कैयो; मैं [अल कासिम बिन मुहम्मद] नै कैता सुण्यो; उमर बिन खत्ताब एक अंसार री लुगाई सूं ब्याव कर लियो, फेर बां रो एक टाबर होयो जिणरौ नांव अशिम बिन उमर हो, फेर उमर उणसूं तलाक ले दियो। जद उमर कुबा आयो तो उणनै आपरा टाबर मस्जिद री छत माथै खेलता देख्या। सो उमर आपरै बेटै री बांह पकड़ी अर उणनै आपरी गोदी मांय, आपरी गाडी रै ऊपर राख दियो। पण, छोरा री दादी- अशिम, उमर रो बेटो- आ बात देख ली, सो वै दोनूं अबू बकर ऐश शैद्दीक रै कनै आया। उमर फेर बोल्यो, 'यो म्हारो बेटो है'। अर दादी बोली, 'लुगाई - टाबर री मां - म्हारी बेटी है'। [अबू बकर अस सिद्दीक] फेर कह्यो; 'बाळक नै आपरी दादी रै सागै रैवण दो'। अल कासिम - कथावाचक - कह्यो; 'इणरै बाद, उमर और कीं नीं बोल्यो'। याह्या कह्यो; 'मैं मलिक नै कैता सुण्यो; "इण मामला मांय म्हारी आ ई राय है।"