Imam Malik : 1201
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ سَأَلَ سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَعَنْ كِرَاءِ الْمَزَارِعِ فَقَالَ لَا بَأْسَ بِهَا بِالذَّهَبِ وَالْوَرِقِ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ فَقُلْتُ لَهُ أَرَأَيْتَ الْحَدِيثَ الَّذِي يُذْكَرُ عَنْ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ فَقَالَ أَكْثَرَ رَافِعٌ وَلَوْ كَانَ لِي مَزْرَعَةٌ أَكْرَيْتُهَا
मलिक हमरा [इब्न शिहाब] स बतौलनि जे ओ [सलीम बिन अब्दुल्लाह बिन उमर] स गाछी किराया पर लेबाक बारे मे पूछलथि, आ ओ जवाब देलथि: 'सोना-चानी क उपयोग करबा मे कोनो नुकसान नहि।' इब्न शिहाब कहलनि: 'हम पुछलियनि: 'रफी' बिन खुदाईज सँ जे हदीस उल्लेख कयल गेल अछि ताहि पर अहाँक की विचार अछि?' ओ जबाब देलखिन: ‘रफी’ बेसी अछि। जँ हमरा लग गाछी रहैत तँ हम ओकरा किराया पर जरूर दितियैक।'
Imam Malik : 1202
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ كَانَ يُكْرِي أَرْضَهُ بِالذَّهَبِ وَالْوَرِقِ
मालिक हमरा [हिशाम बिन उर्वाह] स [अपन पिता] स बतेलथि जे ओ अपन जमीन सोना-चानी क उपयोग कए किराया पर देलथि।
Imam Malik : 1203
حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ وَعَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَضَى بِالشُّفْعَةِ فِيمَا لَمْ يُقْسَمْ بَيْنَ الشُّرَكَاءِ فَإِذَا وَقَعَتْ الْحُدُودُ بَيْنَهُمْ فَلَا شُفْعَةَ فِيهِ
हमरा सब के मलिक स [इब्न सिहाब] स [सैद बिन मुसैयब] स आ [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान बिन औफ] स रिवायत अछि जे अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) ओहि माल के शुफअत के फैसला केलखिन जे साझेदारी के सदस्य के बीच बंटल नै भेल छल, मुदा अगर हुनका सब के बीच के सीमा साफ छल त ओतय एहि मे कोनो शुफ'आ नहि छल।
Imam Malik : 1204
قَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عُمَارَةَ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ حَزْمٍ أَنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ قَالَإِذَا وَقَعَتْ الْحُدُودُ فِي الْأَرْضِ فَلَا شُفْعَةَ فِيهَا وَلَا شُفْعَةَ فِي بِئْرٍ وَلَا فِي فَحْلِ النَّخْلِقَالَ مَالِك وَعَلَى هَذَا الْأَمْرُ عِنْدَنَا
याह्या कहलकै मलिक कहलकै; [मुहम्मद बिन उमरह] स [अबू बकर बिन हज़म] स जे [उस्मान बिन अफ्फान] कहलनि; 'जँ जमीन पर सीमा लगाओल गेल अछि तखन कोनो स्यूफ'आह नहि।' इनार मे कोनो शुफ'आह नहि, ने खजूरक गाछ मे'। मालिक बजलाह; 'ई विचार हमर सभक विचार अछि'।
Imam Malik : 1205
حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ زَيْنَبَ بِنْتِ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّمَا أَنَا بَشَرٌ وَإِنَّكُمْ تَخْتَصِمُونَ إِلَيَّ فَلَعَلَّ بَعْضَكُمْ أَنْ يَكُونَ أَلْحَنَ بِحُجَّتِهِ مِنْ بَعْضٍ فَأَقْضِيَ لَهُ عَلَى نَحْوِ مَا أَسْمَعُ مِنْهُ فَمَنْ قَضَيْتُ لَهُ بِشَيْءٍ مِنْ حَقِّ أَخِيهِ فَلَا يَأْخُذَنَّ مِنْهُ شَيْئًا فَإِنَّمَا أَقْطَعُ لَهُ قِطْعَةً مِنْ النَّارِ
याह्या हमरा सब के मालिक स हिशाम इब्न उरवाह स अपन पिता स जैनब बिनत अबू सलामा स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी उम्म सलामा स बता देलखिन जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन: "हम एकटा इंसान छी, आ अहाँ सब अपन विवाद हमरा लग अनैत छी। आ शायद अहाँ सब में स किछु गोटे छी।" दोसर सँ बेसी बुद्धिमान, तेँ हम हुनका सभ सँ जे सुनैत छी ताहि पर निर्णय लैत छी तेँ जकरा लेल हम ओकर भाइक अधिकार छीनि क' निर्णय करी, ओ ओकरा नहि छीन लेत।
Imam Malik : 1206
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِاخْتَصَمَ إِلَيْهِ مُسْلِمٌ وَيَهُودِيٌّ فَرَأَى عُمَرُ أَنَّ الْحَقَّ لِلْيَهُودِيِّ فَقَضَى لَهُ فَقَالَ لَهُ الْيَهُودِيُّ وَاللَّهِ لَقَدْ قَضَيْتَ بِالْحَقِّ فَضَرَبَهُ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ بِالدِّرَّةِ ثُمَّ قَالَ وَمَا يُدْرِيكَ فَقَالَ لَهُ الْيَهُودِيُّ إِنَّا نَجِدُ أَنَّهُ لَيْسَ قَاضٍ يَقْضِي بِالْحَقِّ إِلَّا كَانَ عَنْ يَمِينِهِ مَلَكٌ وَعَنْ شِمَالِهِ مَلَكٌ يُسَدِّدَانِهِ وَيُوَفِّقَانِهِ لِلْحَقِّ مَا دَامَ مَعَ الْحَقِّ فَإِذَا تَرَكَ الْحَقَّ عَرَجَا وَتَرَكَاهُ
हमरा कहल गेल अछि जे [सैद बिन मुसैयब] स [याह्या बिन सईद] स मलिक कहलथि, ‘एकटा मुसलमान छल जेकरा एकटा यहूदी स विवाद भ रहल छल जे [उमर बिन खत्ताब] लग आयल छल, तखन उमर देखलक जे सच्चाई यहूदी क पक्ष मे अछि, ताहि लेल ओ यहूदी कए जीत लेलक। यहूदी हुनका कहलथिन; 'अल्लाह के कसम, अहाँ मामला के सही फैसला क लेलौं'। उमर बिन खट्टाब ओकरा लाठीसँ मारलकै, तखन कहलकै; 'अहाँकेँ की बुझल अछि ?' यहूदी उत्तर देलक। 'सत्ते हम सभ पाबि गेलहुँ जे कोनो एहन न्यायाधीश नहि होइत छथि जे कोनो केस केँ सही तरीका सँ निर्णय लैत छथि, जाबत धरि हुनकर दहिना-बामा दिस एहन स्वर्गदूत नहि होथि जे हुनका सदिखन सही ठहराओत आ हुनका सत्य दिस निर्देशित करताह, जाबत धरि ओ सत्यक संग रहताह।' जखन ओ ओकरा सभकेँ छोड़ि देलक तँ ओहो सभ ओकरा छोड़ि देलक'।
Imam Malik : 1207
حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عُثْمَانَ عَنْ أَبِي عَمْرَةَ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَلَا أُخْبِرُكُمْ بِخَيْرِ الشُّهَدَاءِ الَّذِي يَأْتِي بِشَهَادَتِهِ قَبْلَ أَنْ يُسْأَلَهَا أَوْ يُخْبِرُ بِشَهَادَتِهِ قَبْلَ أَنْ يُسْأَلَهَا
याह्या हमरा सब के मलिक स [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर बिन मुहम्मद बिन अमर बिन हज़म] स [अपन पिता] स [अब्दुल्लाह बिन अमर बिन उस्मान] स [अबू अम्राह अल अंसारी] स [जैद बिन खालिद अल जुहानी] स रिवायत केलथि जे अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व गवाह मे सबसँ नीक? ओ वैह होइत अछि जे गवाही देबय लेल कहला सँ पहिने अपन गवाही ल' क' अबैत अछि वा गवाही देबय सँ पहिने अपन गवाही रिपोर्ट करैत अछि।'
Imam Malik : 1208
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّهُ قَالَ قَدِمَ عَلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِرَجُلٌ مِنْ أَهْلِ الْعِرَاقِ فَقَالَ لَقَدْ جِئْتُكَ لِأَمْرٍ مَا لَهُ رَأْسٌ وَلَا ذَنَبٌ فَقَالَ عُمَرُ مَا هُوَ قَالَ شَهَادَاتُ الزُّورِ ظَهَرَتْ بِأَرْضِنَا فَقَالَ عُمَرُ أَوَ قَدْ كَانَ ذَلِكَ قَالَ نَعَمْ فَقَالَ عُمَرُ وَاللَّهِ لَا يُؤْسَرُ رَجُلٌ فِي الْإِسْلَامِ بِغَيْرِ الْعُدُولِو حَدَّثَنِي مَالِك أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَ لَا تَجُوزُ شَهَادَةُ خَصْمٍ وَلَا ظَنِينٍ
हमरा कहल गेल अछि जे [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] सँ मलिक कहलनि; 'इराक के एकटा निवासी उमर बिन खट्टाब स भेंट क हुनका कहलखिन; 'हम अहाँ लग एहन बात ल' क' अबैत छी जकर कोनो अंत नहि।' उमर पुछलकै; 'से की छै? ' ओ उत्तर देलनि; 'झूठ गवाही हमरा सबहक आबादी के परेशान केलक अछि'। उमर पुछलकै; 'से भेलै की ? ' ओ उत्तर देलनि; 'हँ'। त [उमर] कहलनि; 'अल्लाह के कसम, इस्लाम में बिना न्याय के ककरो संयम नै छै'। मलिक हमरा कहलनि जे हुनका लग खबरि आबि गेल छनि जे उमर बिन खट्टाब कहलनि; 'शत्रुतापूर्ण लोक या आरोपी लोक के कोनो गवाही के अनुमति नै छै'।
Imam Malik : 1209
قَالَ يَحْيَى عَنْ مَالِك أَنَّهُ بَلَغَهُ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ وَغَيْرِهِ أَنَّهُمْ سُئِلُواعَنْ رَجُلٍ جُلِدَ الْحَدَّ أَتَجُوزُ شَهَادَتُهُ فَقَالُوا نَعَمْ إِذَا ظَهَرَتْ مِنْهُ التَّوْبَةُو حَدَّثَنِي مَالِك أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ شِهَابٍ يُسْأَلُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ مِثْلَ مَا قَالَ سُلَيْمَانُ بْنُ يَسَارٍ قَالَ مَالِك وَذَلِكَ الْأَمْرُ عِنْدَنَا وَذَلِكَ لِقَوْلِ اللَّهِ تَبَارَكَ وَتَعَالَى{ وَالَّذِينَ يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ ثُمَّ لَمْ يَأْتُوا بِأَرْبَعَةِ شُهَدَاءَ فَاجْلِدُوهُمْ ثَمَانِينَ جَلْدَةً وَلَا تَقْبَلُوا لَهُمْ شَهَادَةً أَبَدًا وَأُولَئِكَ هُمْ الْفَاسِقُونَ إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا مِنْ بَعْدِ ذَلِكَ وَأَصْلَحُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَحِيمٌ }
याह्या कहलक; मालिक स जे ई हुनका लग पहुँचि गेल छल, [सुलेमान बिन यासर] आ [अन्य] स जे हुनका स कोड़ा मारल गेल व्यक्ति क गवाही क बारे मे पूछल गेल, की ओकर गवाही स्वीकार कैल गेल? ओ सभ उत्तर देलथिन; 'हँ, जँ अहाँ पश्चाताप केने छी'। मलिक हमरा कहलनि जे ओ [इब्नु शिहाब] स एहि बारे मे पूछल गेल सुनने छथि, ताहि लेल ओ सुलेमान बिन यासर कहला जेकां जवाब देलथि। मालिक बजलाह; 'हमर सभक विचार इएह अछि, जेना अल्लाह तबराका व त'ला कहने छथि; 'आ जे नीक स्त्रीगण पर व्यभिचारक आरोप लगाबैत अछि आ चारि गवाह नहि अनैत अछि, तखन जे ओकरा पर आरोप लगाबैत अछि, ओकरा अस्सी बेर मारल जायत आ ओकर गवाही सदाक लेल स्वीकार नहि करत।' आरू वू दुष्ट छै, सिवाय वू लोगऽ के जे बाद म॑ पश्चाताप करै छै आरू खुद क॑ सुधार करै छै, त॑ सचमुच अल्लाह क्षमाशील, दयालु छै-' -Qs. एक नूर : ४- ४.
Imam Malik : 1210
قَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَضَى بِالْيَمِينِ مَعَ الشَّاهِدِ
याह्या कहलक, मालिक कहलक; [जफर बिन मुहम्मद] स॑ [हुनकरऽ पिता] स॑ कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ एक बार गवाहऽ के साथ शपथ के साथ एगो मामला प॑ फैसला देलकै’ ।
Imam Malik : 1211
و عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِكَتَبَ إِلَى عَبْدِ الْحَمِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ زَيْدِ بْنِ الْخَطَّابِ وَهُوَ عَامِلٌ عَلَى الْكُوفَةِ أَنْ اقْضِ بِالْيَمِينِ مَعَ الشَّاهِدِ
आरू [अबू जिनाद] स॑ मलिक स॑ कि [उमर बिन अब्दुल अजीज] न॑ कुफा केरऽ एगो अधिकारी अब्दुल हामिद बिन अब्दुररहमान बिन जैद बिन खत्ताब क॑ चिट्ठी भेजलकै; 'गवाहक संग शपथ ग्रहण कए मामलाक निर्णय करू'।
Imam Malik : 1212
قَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك عَنْ جَمِيلِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْمُؤَذِّنِ أَنَّهُ كَانَ يَحْضُرُ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِوَهُوَ يَقْضِي بَيْنَ النَّاسِ فَإِذَا جَاءَهُ الرَّجُلُ يَدَّعِي عَلَى الرَّجُلِ حَقًّا نَظَرَ فَإِنْ كَانَتْ بَيْنَهُمَا مُخَالَطَةٌ أَوْ مُلَابَسَةٌ أَحْلَفَ الَّذِي ادُّعِيَ عَلَيْهِ وَإِنْ لَمْ يَكُنْ شَيْءٌ مِنْ ذَلِكَ لَمْ يُحَلِّفْهُ
याह्या कहलक; मालिक बजलाह; [जमील बिन अब्दुररहमान अल मुअज्जिन] स॑ कि एक बार लोगऽ के बीच फैसला दै के समय एगो परिषद [उमर बिन अब्दुल अजीज] म॑ शामिल होय गेलऽ छेलै । अचानक एकटा आदमी दोसर व्यक्ति स अपन अधिकार मांगि रहल छल। तें उमर जांच केलनि; जँ दुनूक बीच अस्पष्टता आ गलतफहमी अछि तँ मुकदमा करयवला व्यक्तिकेँ गारि पढ़य लेल कहल गेल छल | जँ कोनो द्वंद्व नहि अछि तखन कोनो शपथ नहि लेल जाइत अछि ।
Imam Malik : 1213
قَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الزُّبَيْرِكَانَ يَقْضِي بِشَهَادَةِ الصِّبْيَانِ فِيمَا بَيْنَهُمْ مِنْ الْجِرَاحِ
याह्या कहलकै मलिक कहलकै; [हिस्याम बिन उरवाह] स॑ कि [अब्दुल्लाह बिन अज जुबैर] न॑ विवाद के मामला म॑ नाबालिगऽ के गवाही स॑ मामला के फैसला करलकै जेकरऽ परिणामस्वरूप ओकरा बीच चोट लगलै’ ।
Imam Malik : 1214
قَالَ يَحْيَى حَدَّثَنَا مَالِك عَنْ هَاشِمِ بْنِ هَاشِمِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نِسْطَاسٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْأَنْصَارِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ حَلَفَ عَلَى مِنْبَرِي آثِمًا تَبَوَّأَ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ
याह्या कहलक; मलिक हमरा सब के [हसीम बिन हसीम बिन उतबाह बिन अबू वक्काश] स [अब्दुल्लाह बिन निस्तासी] स [जाबिर बिन अब्दुल्लाह अल अंसारी] स कहने छथि जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छथि: 'जे कियो हमर एहि मंच पर पाप के संबंध में कसम खाइत अछि, तखन ओ नरक में अपन जगह तैयार क लेने अछि'।
Imam Malik : 1215
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ مَعْبَدِ بْنِ كَعْبٍ السَّلَمِيِّ عَنْ أَخِيهِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ كَعْبِ بْنِ مَالِكٍ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ أَبِي أُمَامَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ اقْتَطَعَ حَقَّ امْرِئٍ مُسْلِمٍ بِيَمِينِهِ حَرَّمَ اللَّهُ عَلَيْهِ الْجَنَّةَ وَأَوْجَبَ لَهُ النَّارَ قَالُوا وَإِنْ كَانَ شَيْئًا يَسِيرًا يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ وَإِنْ كَانَ قَضِيبًا مِنْ أَرَاكٍ وَإِنْ كَانَ قَضِيبًا مِنْ أَرَاكٍ وَإِنْ كَانَ قَضِيبًا مِنْ أَرَاكٍ قَالَهَا ثَلَاثَ مَرَّاتٍ
मलिक हमरा [अल अला` बिन अब्दुररहमान] स [म’बाद बिन काअब अस सलामी] स अपन भाई [अब्दुल्लाह बिन काअब बिन मलिक अल अंसारी] स [अबू उमामा] स कहलथि जे अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे जे कियो मुसलमान स ओकर कसम स हक छीन लेत, अल्लाह ओकरा लेल स्वर्ग आ ओकरा लेल नरक मना क देने छथि ओ'। पुछै छै; 'भले ई छोट बात हो, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह?' ओ उत्तर देलथिन; 'भले ओ मात्र अरक लकड़ी सँ सिवाक हो, भले ओ मात्र अरक लकड़ी सँ सिवाक हो, भले ओ मात्र अरक लकड़ी सँ सिवाक हो'। तीन बेर कहलक।
Imam Malik : 1216
قَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك عَنْ دَاوُدَ بْنِ الْحُصَيْنِ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا غَطَفَانَ بْنَ طَرِيفٍ الْمُرِّيَّ يَقُولُ اخْتَصَمَ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ الْأَنْصَارِيُّ وَابْنُ مُطِيعٍفِي دَارٍ كَانَتْ بَيْنَهُمَا إِلَى مَرْوَانَ بْنِ الْحَكَمِ وَهُوَ أَمِيرٌ عَلَى الْمَدِينَةِ فَقَضَى مَرْوَانُ عَلَى زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ بِالْيَمِينِ عَلَى الْمِنْبَرِ فَقَالَ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ أَحْلِفُ لَهُ مَكَانِي قَالَ فَقَالَ مَرْوَانُ لَا وَاللَّهِ إِلَّا عِنْدَ مَقَاطِعِ الْحُقُوقِ قَالَ فَجَعَلَ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ يَحْلِفُ أَنَّ حَقَّهُ لَحَقٌّ وَيَأْبَى أَنْ يَحْلِفَ عَلَى الْمِنْبَرِ قَالَ فَجَعَلَ مَرْوَانُ بْنُ الْحَكَمِ يَعْجَبُ مِنْ ذَلِكَقَالَ مَالِك لَا أَرَى أَنْ يُحَلَّفَ أَحَدٌ عَلَى الْمِنْبَرِ عَلَى أَقَلَّ مِنْ رُبُعِ دِينَارٍ وَذَلِكَ ثَلَاثَةُ دَرَاهِمَ
याह्या कहलक; मालिक बजलाह; [दाउद बिन अल हुसैन] स जे ओ [अबू गताफान बिन तारिक अल मुरी] के कहैत सुनने छलाह; 'जैद बिन थाबिट अल अंसारी आ इब्न मुती' के एकटा घर के ल क विवाद भेल छल, फेर ओ सब मामला के मरवान बिन हकम के पास ल गेलखिन्ह जे तखन मदीना के गवर्नर छलाह. तखन ओ निर्णय देलनि जे जैद बिन थाबीत मंच पर शपथ लेथि, [जैद बिन थाबीत] कहलनि; 'हम अपन जगह पर शपथ खा लेब'। मरवान बिन अल हकम कहलनि; 'नहि! अल्लाह केरऽ कसम, सिवाय वू जगह केरऽ जहाँ अधिकार कटलऽ गेलऽ छेलै' । अबू गथाफान कहलकै, 'जैद बिन थाबीत भी शपथ लेलकै कि ओकरऽ अधिकार सही छै, आरू मंच पर शपथ लेबै स॑ मना करी देलकै' । जैद बिन थाबीत केरऽ रवैया मरवान बिन अल हकम क॑ आश्चर्यचकित करी देलकै' । मालिक बजलाह; 'हमरा सभक विचार मे एक चौथाई दिनार वा तीन दिरहम सँ कम पाइक आरोप मे कोनो व्यक्ति केँ मंच पर शपथ नहि देबय लेल कहल जाइत छैक'।
Imam Malik : 1217
قَالَ يَحْيَى حَدَّثَنَا مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَغْلَقُ الرَّهْنُقَالَ مَالِك وَتَفْسِيرُ ذَلِكَ فِيمَا نُرَى وَاللَّهُ أَعْلَمُ أَنْ يَرْهَنَ الرَّجُلُ الرَّهْنَ عِنْدَ الرَّجُلِ بِالشَّيْءِ وَفِي الرَّهْنِ فَضْلٌ عَمَّا رُهِنَ بِهِ فَيَقُولُ الرَّاهِنُ لِلْمُرْتَهِنِ إِنْ جِئْتُكَ بِحَقِّكَ إِلَى أَجَلٍ يُسَمِّيهِ لَهُ وَإِلَّا فَالرَّهْنُ لَكَ بِمَا رُهِنَ فِيهِ قَالَ فَهَذَا لَا يَصْلُحُ وَلَا يَحِلُّ وَهَذَا الَّذِي نُهِيَ عَنْهُ وَإِنْ جَاءَ صَاحِبُهُ بِالَّذِي رَهَنَ بِهِ بَعْدَ الْأَجَلِ فَهُوَ لَهُ وَأُرَى هَذَا الشَّرْطَ مُنْفَسِخًا
याह्या कहलक; मलिक हमरा [इब्नु शिहाब] स [सैद बिन मुसैयब] स कहलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे अहां कर्ज क जमानत नहि भ सकैत अछि। मालिक बजलाह; हुनकऽ शब्दऽ के व्याख्या - वा अल्लाह अलम - ई छै कि आदमी अपनऽ सामान दोसरऽ पक्ष के प्यादा करी दै छै, जबकि प्यादा में रखलऽ गेलऽ सामान के मूल्य कर्ज के राशि स॑ भी अधिक होय छै । तखन प्यादा रखनिहार प्यादा मे राखल व्यक्ति केँ कहलक जे निर्धारित समय धरि हम अहाँक अधिकार ल' क' आबि जायब, मुदा नहि त' गिरवी राखल वस्तु अहाँक भ' जाइत अछि'. मालिक बजलाह; 'ई ठीक नहि आ हलाल सेहो नहि, एहि तरहक प्रथा वर्जित अछि ।' अर्थात यदि वस्तु कें मालिक निर्धारित समय सं बेसि भ जायत छै त प्यादा मे राखल जा रहल वस्तु प्यादाधारी कें संपत्ति भ जायत छै. आ हम देखैत छी जे एहन शर्त अमान्य अछि'।
Imam Malik : 1218
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّ عَبْدَ الْمَلِكِ بْنَ مَرْوَانَقَضَى فِي امْرَأَةٍ أُصِيبَتْ مُسْتَكْرَهَةً بِصَدَاقِهَا عَلَى مَنْ فَعَلَ ذَلِكَ بِهَا
मलिक हमरा [इब्न सिहाब] स बतेलथि जे [अब्दुल मलिक बिन मरवान] फैसला केलथि जे अगर कोनो महिला स जबरदस्ती बलात्कार भ गेल त जे आदमी इ काज केलक ओकरा महर जरूर देब।
Imam Malik : 1219
حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ غَيَّرَ دِينَهُ فَاضْرِبُوا عُنُقَهُوَمَعْنَى قَوْلِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِيمَا نُرَى وَاللَّهُ أَعْلَمُ مَنْ غَيَّرَ دِينَهُ فَاضْرِبُوا عُنُقَهُ أَنَّهُ مَنْ خَرَجَ مِنْ الْإِسْلَامِ إِلَى غَيْرِهِ مِثْلُ الزَّنَادِقَةِ وَأَشْبَاهِهِمْ فَإِنَّ أُولَئِكَ إِذَا ظُهِرَ عَلَيْهِمْ قُتِلُوا وَلَمْ يُسْتَتَابُوا لِأَنَّهُ لَا تُعْرَفُ تَوْبَتُهُمْ وَأَنَّهُمْ كَانُوا يُسِرُّونَ الْكُفْرَ وَيُعْلِنُونَ الْإِسْلَامَ فَلَا أَرَى أَنْ يُسْتَتَابَ هَؤُلَاءِ وَلَا يُقْبَلُ مِنْهُمْ قَوْلُهُمْ وَأَمَّا مَنْ خَرَجَ مِنْ الْإِسْلَامِ إِلَى غَيْرِهِ وَأَظْهَرَ ذَلِكَ فَإِنَّهُ يُسْتَتَابُ فَإِنْ تَابَ وَإِلَّا قُتِلَ وَذَلِكَ لَوْ أَنَّ قَوْمًا كَانُوا عَلَى ذَلِكَ رَأَيْتُ أَنْ يُدْعَوْا إِلَى الْإِسْلَامِ وَيُسْتَتَابُوا فَإِنْ تَابُوا قُبِلَ ذَلِكَ مِنْهُمْ وَإِنْ لَمْ يَتُوبُوا قُتِلُوا وَلَمْ يَعْنِ بِذَلِكَ فِيمَا نُرَى وَاللَّهُ أَعْلَمُ مَنْ خَرَجَ مِنْ الْيَهُودِيَّةِ إِلَى النَّصْرَانِيَّةِ وَلَا مِنْ النَّصْرَانِيَّةِ إِلَى الْيَهُودِيَّةِ وَلَا مَنْ يُغَيِّرُ دِينَهُ مِنْ أَهْلِ الْأَدْيَانِ كُلِّهَا إِلَّا الْإِسْلَامَ فَمَنْ خَرَجَ مِنْ الْإِسْلَامِ إِلَى غَيْرِهِ وَأَظْهَرَ ذَلِكَ فَذَلِكَ الَّذِي عُنِيَ بِهِ وَاللَّهُ أَعْلَمُ
याह्या न॑ [जैद बिन असलम] स॑ मलिक स॑ बतैन॑ छै कि रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि जे भी अपनऽ धर्म बदलै छै - धर्मत्यागी -, ओकरा बाद ओकरऽ गर्दन काट॑’ । वल्लाहु अ'लाम, जे हमरा सब के पता छै, ओकरऽ अनुसार नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के शब्दऽ के मतलब छै: 'जे अपनऽ धर्म बदलै छै, ओकरऽ गर्दन काटै' वू व्यक्ति छै जे इस्लाम के धर्म छोड़ी क॑ दोसरऽ धर्म म॑ प्रवेश करी जाय छै, जेना कि जिन्दिक आरू ऐन्हऽ तरह के । जँ ओ सभ अपना केँ देखाबैत छथि तखन हुनका सभ केँ मारल जा सकैत अछि आ पश्चाताप माँगबाक कोनो आवश्यकता नहि। कारण हुनकर पश्चाताप के स्वीकार नै कयल गेल अछि, आ भ सकैत अछि जे ओ अपन कुफर के नुका सकैत छथि आ अपन इस्लाम के उजागर क सकैत छथि। तेँ हमरा सभक विचार मे एहन लोक केँ पश्चाताप करबाक अवसर नहि देबाक चाही, आ हुनकर बात केँ स्वीकार नहि करबाक चाही। रहल बात जे व्यक्ति इस्लाम छोड़ि दोसर धर्म मे आबि गेल आ फेर ओकरा देखा दैत अछि तखन ओकरा पश्चाताप करबाक लेल कहल जेबाक चाही, जँ पश्चाताप नहि करत तखन ओकरा मारल जायत। तखन जँ कोनो जनता एहन स्थिति मे अछि तखन हमरा हिसाबे ओकरा इस्लाम स्वीकार करबाक लेल आमंत्रित कयल जाइत छैक, जँ ओ स्वीकार नहि करैत छैक तखन ओकरा सँ लड़ल जाइत छैक | आरू ई हदीस के मतलब कोनो यहूदी के ईसाई या ईसाई के यहूदी धर्म में बदलना नै छै । वा, दोसर धर्मसँ दोसर धर्ममे नहि। इस्लाम के छोड़ी क॑, कैन्हेंकि ई हदीस के मतलब वू व्यक्ति छै जे इस्लाम छोड़ी क॑ दोसरऽ धर्म म॑ प्रवेश करी क॑ ओकरा देखाबै छै’ । वल्लाहु अ'लाम।
Imam Malik : 1220
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدٍ الْقَارِيِّ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَ قَدِمَ عَلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِرَجُلٌ مِنْ قِبَلِ أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّ فَسَأَلَهُ عَنْ النَّاسِ فَأَخْبَرَهُ ثُمَّ قَالَ لَهُ عُمَرُ هَلْ كَانَ فِيكُمْ مِنْ مُغَرِّبَةِ خَبَرٍ فَقَالَ نَعَمْ رَجُلٌ كَفَرَ بَعْدَ إِسْلَامِهِ قَالَ فَمَا فَعَلْتُمْ بِهِ قَالَ قَرَّبْنَاهُ فَضَرَبْنَا عُنُقَهُ فَقَالَ عُمَرُ أَفَلَا حَبَسْتُمُوهُ ثَلَاثًا وَأَطْعَمْتُمُوهُ كُلَّ يَوْمٍ رَغِيفًا وَاسْتَتَبْتُمُوهُ لَعَلَّهُ يَتُوبُ وَيُرَاجِعُ أَمْرَ اللَّهِ ثُمَّ قَالَ عُمَرُ اللَّهُمَّ إِنِّي لَمْ أَحْضُرْ وَلَمْ آمُرْ وَلَمْ أَرْضَ إِذْ بَلَغَنِي
मलिक हमरा [अब्दुररहमान बिन मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुलकारी] स [हुनकर पिता] स कहने छथि; 'अबू मूसा अल 'असी'री के तरफ के एक आदमी [उमर बिन खत्ताब] स॑ मिललै, तखनिये उमर ओकरा स॑ वू समय के मानवीय हालत के बारे म॑ पूछलकै, तखनिये जवाब देलकै । तकर बाद उमर हुनकासँ पुछलखिन; 'अहाँ सभ लेल कोनो नव खबरि अछि की? ' ओ आदमी उत्तर देलक, 'हँ।' इस्लाम के बाद एक धर्मत्यागी'। उमर फेर पुछलथिन्ह - तखन अहाँ हुनका की केलियैन्ह ? ' ओ आदमी उत्तर देलक, 'हम सभ ओकरा लग पहुँचलहुँ, तखन ओकर गरदनि काटि देलियैक' । उमर बजलाह; 'की अहाँ पहिने ओकरा तीन दिनक जेल मे नहि राखलहुँ, फेर ओकरा सभ दिन रति देलहुँ, फेर ओकरा सँ पश्चाताप करबाक लेल कहलहुँ जाबत धरि ओ सही मायने मे पश्चाताप नहि क' लेत, तकर बाद अहाँ ओकर काज अल्लाह पर छोड़ि दैत छी?' तखन उमर नमाज पढ़लनि, 'हे अल्लाह, सचमुच हम ओहि समय उपस्थित नहि छलहुँ, हम आदेश नहि देलहुँ आ जखन ई खबर हमरा धरि पहुँचल तखन हम तैयार नहि छलहुँ'।