Imam Malik : 1181
حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَطْلُ الْغَنِيِّ ظُلْمٌ وَإِذَا أُتْبِعَ أَحَدُكُمْ عَلَى مَلِيءٍ فَلْيَتْبَعْ
यह्या हमरा [अबू अज़ जिनाद] स॑ मालिक स॑ [अबू हुरैरा] स॑ [अल अ’राज] स॑ बतैलकै कि अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) न॑ कहलकै कि ‘एक धनी व्यक्ति के लेलऽ कर्ज चुकाबै म॑ देरी करना अन्याय छै, आरू अगर आपने म॑ स॑ कोय अपनऽ कर्ज क॑ कोनो धनी व्यक्ति क॑ हस्तांतरित करी दै छै - आरू वू एकरऽ चुकाबै के जिम्मेदारी ओकरा स्वीकार करै ई।'
Imam Malik : 1182
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ مُوسَى بْنِ مَيْسَرَةَ أَنَّهُ سَمِعَ رَجُلًا يَسْأَلُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِفَقَالَ إِنِّي رَجُلٌ أَبِيعُ بِالدَّيْنِ فَقَالَ سَعِيدٌ لَا تَبِعْ إِلَّا مَا آوَيْتَ إِلَى رَحْلِكَ
मलिक हमरा [मूसा बिन मैसारह] स कहलथि जे ओ एकटा आदमी कए [सईद बिन मुसैयब] स पूछैत सुनलथि; 'हम एहन व्यक्ति छी जे प्रायः साख पर बेचैत छी'। सईद जवाब देलक; 'अपन घर मे जे अनैत छी ओकरा छोड़ि किछु नहि बेचू'।
Imam Malik : 1183
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ هِشَامٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَيُّمَا رَجُلٍ بَاعَ مَتَاعًا فَأَفْلَسَ الَّذِي ابْتَاعَهُ مِنْهُ وَلَمْ يَقْبِضْ الَّذِي بَاعَهُ مِنْ ثَمَنِهِ شَيْئًا فَوَجَدَهُ بِعَيْنِهِ فَهُوَ أَحَقُّ بِهِ وَإِنْ مَاتَ الَّذِي ابْتَاعَهُ فَصَاحِبُ الْمَتَاعِ فِيهِ أُسْوَةُ الْغُرَمَاءِ
याह्या हमरा [इब्न शिहाब] स मालिक स [अबू बकर इब्न अब्दुररहमान इब्न अल हरिथ इब्न हिशाम] स बतेलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलथि जे जे कियो माल बेचैत अछि आ खरीददार बिना ओकर भुगतान केने दिवालिया भ जाइत अछि, जँ ओकरा भेटि जाइत छैक त ओकरा ओकरा पर बेसी अधिकार छैक। खरीदार मरि गेल त सामानक मालिक कर्ज मे पड़ल लोकक लेल आदर्श अछि।'
Imam Malik : 1184
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ عَنْ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ هِشَامٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَيُّمَا رَجُلٍ أَفْلَسَ فَأَدْرَكَ الرَّجُلُ مَالَهُ بِعَيْنِهِ فَهُوَ أَحَقُّ بِهِ مِنْ غَيْرِهِ
मलिक हमरा [याह्या बिन सईद] स [अबू बकर बिन मुहम्मद बिन अम्र बिन हज़म] स [उमर बिन अब्दुल अजीज] स [अबू बकर बिन अब्दुररहमान बिन अल हरिथ बिन हिशाम] स [अबू हुरैरा] स बतेलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहने छलाह: 'जे कियो दिवालिया भ जाइत अछि आ कोनो उधारदाता कए संपत्ति भेटैत अछि दिवालिया व्यक्तिक, ओकरा एहि पर ककरो सँ बेसी अधिकार छैक।'
Imam Malik : 1185
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي رَافِعٍ مَوْلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَاسْتَسْلَفَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَكْرًا فَجَاءَتْهُ إِبِلٌ مِنْ الصَّدَقَةِ قَالَ أَبُو رَافِعٍ فَأَمَرَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ أَقْضِيَ الرَّجُلَ بَكْرَهُ فَقُلْتُ لَمْ أَجِدْ فِي الْإِبِلِ إِلَّا جَمَلًا خِيَارًا رَبَاعِيًا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَعْطِهِ إِيَّاهُ فَإِنَّ خِيَارَ النَّاسِ أَحْسَنُهُمْ قَضَاءً
हमरा मलिक स याह्या [जैद बिन असलम] स [‘अथा बिन यासर] स [अबू रफी’] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पूर्व गुलाम कहलक अछि, ओ कहलक; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह एक बेर ककरो सं बछड़ा उधार ल' लेने छलाह.' तकर बाद हुनका ऊँटक झुंडक रूप मे भिक्षा भेटलनि | अबू रफी' कहलनि; 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन हमरा कहलनि जे जे व्यक्ति उधार देने छल ओकरा बछड़ा के रूप मे कर्ज चुकाउ।' हमहूँ कहलियनि; 'हमरा सात सालक नीक ऊँट छोड़ि किछु नहि भेटल अछि।' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन कहलनि: 'ओकरा द' दियौक, सबसँ नीक व्यक्ति ओ अछि जे नीक सँ कर्ज चुकाबैत अछि'।
Imam Malik : 1186
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ حُمَيْدِ بْنِ قَيْسٍ الْمَكِّيِّ عَنْ مُجَاهِدٍ أَنَّهُ قَالَ اسْتَسْلَفَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَمِنْ رَجُلٍ دَرَاهِمَ ثُمَّ قَضَاهُ دَرَاهِمَ خَيْرًا مِنْهَا فَقَالَ الرَّجُلُ يَا أَبَا عَبْدِ الرَّحْمَنِ هَذِهِ خَيْرٌ مِنْ دَرَاهِمِي الَّتِي أَسْلَفْتُكَ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ قَدْ عَلِمْتُ وَلَكِنْ نَفْسِي بِذَلِكَ طَيِّبَةٌ
हमरा [मुजाहिद] स [हुमैद बिन कैस अल माकी] स मलिक कहने छल ओ कहलक; अब्दुल्लाह बिन उमर एक बेर एकटा आदमी सँ कतेको दिरहम उधार लेलक, तखन ओ ओकरा नीक दिरहम सँ चुका देलक। तखन ओ आदमी कहलक जे हे अबू अब्दुररहमान, हम जे दिरहम अहाँ केँ उधार देने रही ताहि सँ नीक ई की? अस्तु [अब्दुल्लाह बिन उमर] उत्तर देलनि; 'हमरा बुझल अछि, मुदा एहि तरहेँ हमर आत्मा बेसी सहज भ' जाइत अछि'।
Imam Malik : 1187
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّهُ سَمِعَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ يَقُولُمَنْ أَسْلَفَ سَلَفًا فَلَا يَشْتَرِطْ إِلَّا قَضَاءَهُ
[नफी’] स मालिक हमरा कहलनि जे ओ [अब्दुल्लाह बिन उमर] के कहैत सुनने छथि; 'जे कर्जा उधार दैत अछि, ओकरा चुकताक अतिरिक्त कोनो शर्त नहि निर्धारित करबाक चाही'।
Imam Malik : 1188
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَبِعْ بَعْضُكُمْ عَلَى بَيْعِ بَعْضٍ
याह्या हमरा [नाफी’] स मालिक स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स बतेलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लाह अलैहि वसल्लम कहला जे अहां सब मे स किछु एहन सामान नहि बेचय दिअ जाहि पर दोसर बोली लगा रहल अछि।
Imam Malik : 1189
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَلَقَّوْا الرُّكْبَانَ لِلْبَيْعِ وَلَا يَبِعْ بَعْضُكُمْ عَلَى بَيْعِ بَعْضٍ وَلَا تَنَاجَشُوا وَلَا يَبِعْ حَاضِرٌ لِبَادٍ وَلَا تُصَرُّوا الْإِبِلَ وَالْغَنَمَ فَمَنْ ابْتَاعَهَا بَعْدَ ذَلِكَ فَهُوَ بِخَيْرِ النَّظَرَيْنِ بَعْدَ أَنْ يَحْلُبَهَا إِنْ رَضِيَهَا أَمْسَكَهَا وَإِنْ سَخِطَهَا رَدَّهَا وَصَاعًا مِنْ تَمْرٍ
मलिक हमरा [अबू अज़ जिनाद] स [अबू हुरैरा] स [अल अ'राज] स बतेलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहला जे बाजार मे पहुंचबा स पहिने बपारी कए रोकब नहि। जे सामान दोसर बोली लगा रहल अछि ओकरा नहि बेचू। बोली मे प्रतिस्पर्धा नहि करू। शहरक लोक केँ गामक लोक केँ माल बेचय नहि दियौक। ऊँट-बकरीक दूध ओकर झोरा मे नहि राखू - जाबत धरि ओ बेचला पर पैघ नहि देखायत - .. जे कियो पहिने सँ कीनि क' दुहने अछि तखन ओकरा दू टा विकल्प छैक : जँ ओकरा प्रसन्नता हो त' राखि सकैत अछि, जँ नहि त' खजूरक सा' ल' क' वापस क' सकैत अछि'.
Imam Malik : 1190
قَالَ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ النَّجْشِقَالَ مَالِك وَالنَّجْشُ أَنْ تُعْطِيَهُ بِسِلْعَتِهِ أَكْثَرَ مِنْ ثَمَنِهَا وَلَيْسَ فِي نَفْسِكَ اشْتِرَاؤُهَا فَيَقْتَدِي بِكَ غَيْرُكَ
मालिक बजलाह; [नाफी’] स॑ [अब्दुल्लाह बिन उमर] स॑ कहलकै, ‘अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ नजासी तरीका स॑ बेचै स॑ मना करी देलकै’ । मालिक बजलाह; 'नजासी ई जे अहाँ बेसी दाम पर माल कीनैत छी, बिना खरीदबाक इरादा केने; जाबे तक लोक अहाँक पाछाँ नहि पड़ैत अछि'।
Imam Malik : 1191
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَجُلًا ذَكَرَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ يُخْدَعُ فِي الْبُيُوعِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا بَايَعْتَ فَقُلْ لَا خِلَابَةَ قَالَ فَكَانَ الرَّجُلُ إِذَا بَايَعَ يَقُولُ لَا خِلَابَةَ
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [अब्दुल्लाह बिन दिनार] स॑ मालिक स॑ यह्या [अब्दुल्लाह बिन उमर] स॑ कहलकै, ‘एक आदमी न॑ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ शिकायत करलकै कि ओकरा खरीद-बिक्री के लेनदेन म॑ धोखा करलऽ गेलऽ छै । रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन कहलनि: ‘जँ अहाँ व्यापार करब तखन कहब; 'धोखाधड़ीक कोनो तत्व नहि हेबाक चाही'। तहिया सँ व्यापार करबा काल सदिखन कहैत छलाह; 'कोनो धोखाधड़ी नहि'।
Imam Malik : 1192
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ سَمِعَ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ يَقُولُإِذَا جِئْتَ أَرْضًا يُوفُونَ الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ فَأَطِلْ الْمُقَامَ بِهَا وَإِذَا جِئْتَ أَرْضًا يُنَقِّصُونَ الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ فَأَقْلِلْ الْمُقَامَ بِهَا
मालिक हमरा [याह्या बिन सईद] स कहलनि जे ओ [सैद बिन मुसैयब] के कहैत सुनने छलाह; 'जँ अहाँ एहन भूमि पर आबि जायब जकर लोक नाप-जोखक दृष्टिएँ ईमानदार हो, तखन ओतहि बेसी दिन रहब।' मुदा जँ अहाँ एहन देश मे अबैत छी जकर लोक केँ माप आ तराजू कम करब नीक लगैत छैक तखन ओतय रहब कम करू।'
Imam Malik : 1193
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ سَمِعَ مُحَمَّدَ بْنَ الْمُنْكَدِرِ يَقُولُأَحَبَّ اللَّهُ عَبْدًا سَمْحًا إِنْ بَاعَ سَمْحًا إِنْ ابْتَاعَ سَمْحًا إِنْ قَضَى سَمْحًا إِنْ اقْتَضَى
मलिक हमरा [याह्या बिन सईद] स बतेलथि जे ओ [मुहम्मद बिन अल मुनकदीर] कए कहैत सुनने छलाह; 'अल्लाह एकटा एहन नौकर सँ प्रेम करैत छथि जे बेचबा काल उदार होइत अछि; खरीदबा काल उदार; -कर्ज- चुकबैत काल उदार; आ कर्ज चुकाबय लेल कहबा काल उदार'।
Imam Malik : 1194
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍأَنَّهُ سَأَلَهُ عَنْ الرَّجُلِ يَتَكَارَى الدَّابَّةَ ثُمَّ يُكْرِيهَا بِأَكْثَرَ مِمَّا تَكَارَاهَا بِهِ فَقَالَ لَا بَأْسَ بِذَلِكَ
मलिक हमरा [इब्न शिहाब] स कहलथि जे एक बेर हुनका स एकटा एहन आदमी क बारे मे पूछल गेल छल जे ओ अपन सवारी पर सवार जानवर कए किराया पर लैत छल, फेर ओ ओहि जानवर कए किराया क दाम स बेसी दाम पर दोसर व्यक्ति कए किराया पर द देलक। इब्न शिहाब उत्तर देलनि; 'कोनो बात नहि'।
Imam Malik : 1195
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَخَرَجَ عَبْدُ اللَّهِ وَعُبَيْدُ اللَّهِ ابْنَا عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فِي جَيْشٍ إِلَى الْعِرَاقِ فَلَمَّا قَفَلَا مَرَّا عَلَى أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّ وَهُوَ أَمِيرُ الْبَصْرَةِ فَرَحَّبَ بِهِمَا وَسَهَّلَ ثُمَّ قَالَ لَوْ أَقْدِرُ لَكُمَا عَلَى أَمْرٍ أَنْفَعُكُمَا بِهِ لَفَعَلْتُ ثُمَّ قَالَ بَلَى هَاهُنَا مَالٌ مِنْ مَالِ اللَّهِ أُرِيدُ أَنْ أَبْعَثَ بِهِ إِلَى أَمِيرِ الْمُؤْمِنِينَ فَأُسْلِفُكُمَاهُ فَتَبْتَاعَانِ بِهِ مَتَاعًا مِنْ مَتَاعِ الْعِرَاقِ ثُمَّ تَبِيعَانِهِ بِالْمَدِينَةِ فَتُؤَدِّيَانِ رَأْسَ الْمَالِ إِلَى أَمِيرِ الْمُؤْمِنِينَ وَيَكُونُ الرِّبْحُ لَكُمَا فَقَالَا وَدِدْنَا ذَلِكَ فَفَعَلَ وَكَتَبَ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ أَنْ يَأْخُذَ مِنْهُمَا الْمَالَ فَلَمَّا قَدِمَا بَاعَا فَأُرْبِحَا فَلَمَّا دَفَعَا ذَلِكَ إِلَى عُمَرَ قَالَ أَكُلُّ الْجَيْشِ أَسْلَفَهُ مِثْلَ مَا أَسْلَفَكُمَا قَالَا لَا فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ ابْنَا أَمِيرِ الْمُؤْمِنِينَ فَأَسْلَفَكُمَا أَدِّيَا الْمَالَ وَرِبْحَهُ فَأَمَّا عَبْدُ اللَّهِ فَسَكَتَ وَأَمَّا عُبَيْدُ اللَّهِ فَقَالَ مَا يَنْبَغِي لَكَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ هَذَا لَوْ نَقَصَ هَذَا الْمَالُ أَوْ هَلَكَ لَضَمِنَّاهُ فَقَالَ عُمَرُ أَدِّيَاهُ فَسَكَتَ عَبْدُ اللَّهِ وَرَاجَعَهُ عُبَيْدُ اللَّهِ فَقَالَ رَجُلٌ مِنْ جُلَسَاءِ عُمَرَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ لَوْ جَعَلْتَهُ قِرَاضًا فَقَالَ عُمَرُ قَدْ جَعَلْتُهُ قِرَاضًا فَأَخَذَ عُمَرُ رَأْسَ الْمَالِ وَنِصْفَ رِبْحِهِ وَأَخَذَ عَبْدُ اللَّهِ وَعُبَيْدُ اللَّهِ ابْنَا عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ نِصْفَ رِبْحِ الْمَالِ
हमरा [जैद बिन असलम] स मालिक [अपन पिता] स कहने छल ओ कहलक; उमर बिन खट्टाब केरऽ दोनों बेटा अब्दुल्ला आरू उबैदुल्लाह एक बार इराक के तरफ जाय वाला सेना म॑ शामिल होय गेलऽ छेलै । घुरला पर दुनू गोटे अबू मूसा अल अस्यारी के पास स गुजरल जे ओहि समय बसरा के गवर्नर छलाह | तखन अबू मूसा दुनू गोटेक खुशी-खुशी स्वागत केलनि आ कहलनि; 'जँ हम अहाँ केँ किछु एहन द' सकब जे भविष्य मे अहाँक उपयोगी होयत त' हम निश्चित रूप सँ करब'। [अबू मूसा] फेर बजलाह, ‘ओह हँ, ई अल्लाहक खजाना सँ खजाना अछि, हम एकरा अमीरुल मुकमिनिन केँ सौंपय चाहैत छी, हम ई खजाना अहाँ दुनू गोटे केँ उधार द’ रहल छी जाहि सँ अहाँ सब इराक मे माल-जालक खरीदारी क’ सकब आ मदीना पहुँचला पर फेर बेचि सकब। बाद मे राजधानी अमीरुल मुकिमिनिन के सौंप दियौक, त मुनाफा अहाँ दुनू गोटे के भेटत। दुनू गोटे बजलाह; 'हम सभ एहि बातसँ खुश छी'। अस्तु अबू मूसा एना केलनि आ अमीरुल मुकमिनिन के मैसेज लिखि क' कहलनि जे हुनका सं ओ संपत्ति ल' ली जे हुनकर दुनू बच्चा के सौंपल गेल छल. दुनू गोटे मदीना पहुँचला पर अपन माल बेचि मुनाफा कमा लेलक। मुदा, जखन ओ सभ संपत्ति उमर के सौंपय बला छल त उमर पुछलखिन्ह, “की अबू मूसा एक-एकटा सैनिक के ओहिना उधार देलखिन्ह जेना अहाँ दुनू गोटे के उधार देने छलाह?” दुनू गोटे उत्तर देलथिन, “नहि।” [उमर बिन खत्ताब] कहलनि, “त’ ई एहि लेल जे अहाँ अमीरुल मुकमिनिन के बेटा छी जे ओ अहाँ दुनू गोटे के उधार द’ देलनि?!सब संपत्ति आ मुनाफा सौंप दियौक!” ई सुनि अब्दुल्ला चुप रहलाह। एम्हर उबैदुल्लाह बजलाह, “अहाँ केँ एहन काज नहि करबाक चाही हे अमीरुल मुकमिनिन, जँ सम्पत्ति कम भ’ जायत वा हेरा गेल त’ लागत हमरा सभ केँ उठाबय पड़त?” उमर अडिग रहलाह, “ सौंप दियौक।” अब्दुल्ला चुप रहलाह, जखन कि उबैदुल्ला हुनका दबाबैत रहलाह। तखन सभा मे एकटा आदमी हस्तक्षेप करबाक प्रयास केलक आ कहलक, “हे अमीरुल मुकमिनिन, जँ अहाँ दुनू गोटे केँ सम्पत्ति उधार द’ देब त’ की हेतै?” उमर बिन खट्टाब जबाब देलकै, “हम दुनू गोटे केँ उधार द’ देने छी।” तखन उमर संपत्ति प्लस आधा मुनाफा ल' लेलनि, जखन कि अब्दुल्ला आ उबैदुल्लाह केँ सेहो आधा मुनाफा भेटलनि।'
Imam Malik : 1196
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ أَنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَأَعْطَاهُ مَالًا قِرَاضًا يَعْمَلُ فِيهِ عَلَى أَنَّ الرِّبْحَ بَيْنَهُمَا
मलिक हमरा [अल ‘अला` बिन अब्दुररहमान] स [हुनकर पिता] स [हुनकर दादा] स बतेलथि जे [उस्मान बिन अफान] एक बेर हुनका व्यापार लेल पैसा क उधार देलथि एहि शर्त पर जे मुनाफा दुनू गोटे क बीच बांटल जाए।
Imam Malik : 1197
حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لِيَهُودِ خَيْبَرَ يَوْمَ افْتَتَحَ خَيْبَرَ أُقِرُّكُمْ فِيهَا مَا أَقَرَّكُمْ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ عَلَى أَنَّ الثَّمَرَ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ قَالَ فَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَبْعَثُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ رَوَاحَةَ فَيَخْرُصُ بَيْنَهُ وَبَيْنَهُمْ ثُمَّ يَقُولُ إِنْ شِئْتُمْ فَلَكُمْ وَإِنْ شِئْتُمْ فَلِيَ فَكَانُوا يَأْخُذُونَهُ
हमरा सब के मलिक स [इब्न शिहाब] स [सैद बिन मुसैयब] स रिवायत भेल अछि जे कहने छलाह, 'रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसलम खैबर के जीत के समय खैबर के यहूदी सब स कहने छलाह: 'हम अहाँ सब लेल ओ फरमान देब जे अल्लाह अज्जा व जल्ला के फैसला केने छथि, जे खजूर के हमरा सब आ अहाँ सब के बीच बंटल जेबाक चाही'। सईद बिन मुसैयाब कहलनि; 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन अब्दुल्लाह बिन रवाहाह केँ पठौलनि जे ओ हुनका आ हुनका लोकनिक बीचक कीमतक अनुमान लगाबथि, तखन ओ कहलनि जे जँ अहाँ चाहैत छी तखन ई अहाँक लेल अछि, आ जँ अहाँ चाहैत छी तखन ई हमरा लेल अछि'। अंततः ओ सभ ल' लेलक'।
Imam Malik : 1198
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَبْعَثُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ رَوَاحَةَ إِلَى خَيْبَرَ فَيَخْرُصُ بَيْنَهُ وَبَيْنَ يَهُودِ خَيْبَرَ قَالَ فَجَمَعُوا لَهُ حَلْيًا مِنْ حَلْيِ نِسَائِهِمْ فَقَالُوا لَهُ هَذَا لَكَ وَخَفِّفْ عَنَّا وَتَجَاوَزْ فِي الْقَسْمِ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ رَوَاحَةَ يَا مَعْشَرَ الْيَهُودِ وَاللَّهِ إِنَّكُمْ لَمِنْ أَبْغَضِ خَلْقِ اللَّهِ إِلَيَّ وَمَا ذَاكَ بِحَامِلِي عَلَى أَنْ أَحِيفَ عَلَيْكُمْ فَأَمَّا مَا عَرَضْتُمْ مِنْ الرَّشْوَةِ فَإِنَّهَا سُحْتٌ وَإِنَّا لَا نَأْكُلُهَا فَقَالُوا بِهَذَا قَامَتْ السَّمَوَاتُ وَالْأَرْضُ
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [इब्न शिहाब] स॑ मलिक [सुलेमान बिन यासर] स॑ कहलकै, ‘रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ अब्दुल्लाह बिन रवाहाह क॑ खैबर भेजलकै, वू हुनका आरू खैबर के यहूदी सिनी के बीच के बंटवारा तय करलकै । सुलेमान बिन यासर कहलनि; 'ओ सभ अपन पत्नीक गहना जमा केलक, तखन अब्दुल्ला बिन रवाहाह केँ कहलक; 'ई सबटा गहना अहाँक लेल अछि, मुदा हमरा सभकेँ राहत दिअ आ अतिरिक्त दिअ'। अब्दुल्ला बिन रवाहाह जबाब देलकै; 'हे यहूदी सभ! अल्लाह केरऽ कसम, तोहें अल्लाह केरऽ वू प्राणी छियै जेकरा स॑ हमरा सबसें जादा घृणा छै, तथापि, ई हमरा लेली तोरा प्रति अत्याचारी व्यवहार करै के कोय कारण नै छै । रहल बात जतेक गहना अहाँ हमरा घूस मे देलहुँ, ओ हरम अछि, हम सभ कहियो नहि खाएब'। ओहो सभ कहलक; 'एहि सत्य सँ स्वर्ग-पृथ्वी स्थापित करू'।
Imam Malik : 1199
حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ حَنْظَلَةَ بْنِ قَيْسٍ الزُّرَقِيِّ عَنْ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ كِرَاءِ الْمَزَارِعِقَالَ حَنْظَلَةُ فَسَأَلْتُ رَافِعَ بْنَ خَدِيجٍ بِالذَّهَبِ وَالْوَرِقِ فَقَالَ أَمَّا بِالذَّهَبِ وَالْوَرِقِ فَلَا بَأْسَ بِهِ
हमरा सब के कहलऽ गेलऽ छै कि मालिक स॑ [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] स॑ [रफी’ बिन खदीज] स॑ [हंझाला बिन कैस अज़ ज़ुरकी] स॑ यह्या न॑ कहलकै, ‘रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वस्लाम न॑ बगीचा किराया प॑ लेबै स॑ मना करी देलकै’ । हन्झाला कहलक; 'हम तखन रफी 'बिन खदीज सँ पूछलियैन जे सोना-चानी मे किराया पर अछि की नहि, तें ओ जवाब देलनि; "रहल बात सोना-चानीक त' कोनो फर्क नहि पड़ैत छैक।"
Imam Malik : 1200
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ قَالَ سَأَلْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِعَنْ كِرَاءِ الْأَرْضِ بِالذَّهَبِ وَالْوَرِقِ فَقَالَ لَا بَأْسَ بِهِ
हमरा कहने छल मलिक [इब्न शिहाब] स कहलक; 'हम एक बेर [सैद बिन मुसैयब] सं सोना वा चानीक उपयोग क' जमीन किराया पर लेबाक बारे मे पूछने रही, तें ओ जवाब देलनि; 'ठीक अछि''।