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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 Hadith

Hadith

Imam Malik : 101

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ زُيَيْدِ بْنِ الصَّلْتِ أَنَّهُ قَالَ خَرَجْتُ مَعَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِإِلَى الْجُرُفِ فَنَظَرَ فَإِذَا هُوَ قَدْ احْتَلَمَ وَصَلَّى وَلَمْ يَغْتَسِلْ فَقَالَ وَاللَّهِ مَا أَرَانِي إِلَّا احْتَلَمْتُ وَمَا شَعَرْتُ وَصَلَّيْتُ وَمَا اغْتَسَلْتُ قَالَ فَاغْتَسَلَ وَغَسَلَ مَا رَأَى فِي ثَوْبِهِ وَنَضَحَ مَا لَمْ يَرَ وَأَذَّنَ أَوْ أَقَامَ ثُمَّ صَلَّى بَعْدَ ارْتِفَاعِ الضُّحَى مُتَمَكِّنًا

हमरा मलिक स [हिशाम बिन उर्वाह] स [हुनकर पिता] स [जुबैद बिन अस शाल्त] स कहल गेल अछि जे हम [उमर बिन कट्ठाब] क संग जुरफ गेलहुं’। अचानक ओकरा बुझायल जे ओकरा भीजल सपना देखलक आ बिना नहाने प्रार्थना क' रहल अछि। तखन ओ कहलनि, 'अल्लाहक कसम, हमरा ई नहि बुझल छल जे हमरा भीजल सपना आयल अछि, मुदा हमरा होश नहि छल, तें हम नमाज केलहुं आ नहाएलहुं'. कथावाचक बजलाह-तखन ओ नहा कऽ कपड़ा पर जे देखाइ पड़ैत छल से धो देलनि आ जे नहि देखाइत छल ताहि पर छिड़कि देलनि । तकर बाद नमाज या इकमात के आह्वान करैत छथि, फेर द्लुहा के समय में नमाज पढ़ैत छथि |

Hadith

Imam Malik : 102

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أَبِي حَكِيمٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ غَدَا إِلَى أَرْضِهِ بِالْجُرُفِ فَوَجَدَ فِي ثَوْبِهِ احْتِلَامًا فَقَالَ لَقَدْ ابْتُلِيتُ بِالْاحْتِلَامِ مُنْذُ وُلِّيتُ أَمْرَ النَّاسِ فَاغْتَسَلَ وَغَسَلَ مَا رَأَى فِي ثَوْبِهِ مِنْ الْاحْتِلَامِ ثُمَّ صَلَّى بَعْدَ أَنْ طَلَعَتْ الشَّمْسُ

हमरा [इस्माइल बिन अबू हकीम] स मलिक स [सुलेमान बिन यासर] स कहल गेल छल जे [उमर बिन खत्ताब] भोरे जुरूफ क्षेत्र मे अपन खेत मे गेल छलाह। तखने कपड़ा पर भीजल सपना के निशान भेटलनि, तेँ ओ कहलनि जे, जहिया सँ नेतृत्व सम्हारलहुँ तहिया सँ भीजल सपना सँ परीक्षा भेल अछि।' तखन स्नान कए अपन कपड़ा पर भीजल सपनाक निशान जे देखाइ पड़ैत छल से धो लेलनि, फेर सूर्योदय के बाद प्रार्थना केलनि।

Hadith

Imam Malik : 103

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ صَلَّى بِالنَّاسِ الصُّبْحَ ثُمَّ غَدَا إِلَى أَرْضِهِ بِالْجُرُفِ فَوَجَدَ فِي ثَوْبِهِ احْتِلَامًا فَقَالَ إِنَّا لَمَّا أَصَبْنَا الْوَدَكَ لَانَتْ الْعُرُوقُ فَاغْتَسَلَ وَغَسَلَ الْاحْتِلَامَ مِنْ ثَوْبِهِ وَعَادَ لِصَلَاتِهِ

हमरा [सुलेमान बिन यासर] स मालिक स [याह्या बिन सईद] स कहल गेल छल जे [उमर बिन खत्ताब] एक बेर अपन साथी सब क संग भोर क नमाज पढ़ने छलाह, फेर भोरे दुपहर क दिस ओ जुरूफ इलाका मे अपन खेत मे गेलाह, फेर हुनका कपड़ा पर भीजल सपना क निशान भेटल। तेँ ओ कहलनि: 'जखन मोट भ' जायब तखन सहजहि पसीना आबि जायत।' उमर तखन स्नान कए अपन कपड़ा पर भीजल सपना के निशान धो लेलक, तकर बाद ओ अपन नमाज दोहरौलक।'

Hadith

Imam Malik : 104

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَاطِبٍ أَنَّهُ اعْتَمَرَ مَعَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِفِي رَكْبٍ فِيهِمْ عَمْرُو بْنُ الْعَاصِ وَأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ عَرَّسَ بِبَعْضِ الطَّرِيقِ قَرِيبًا مِنْ بَعْضِ الْمِيَاهِ فَاحْتَلَمَ عُمَرُ وَقَدْ كَادَ أَنْ يُصْبِحَ فَلَمْ يَجِدْ مَعَ الرَّكْبِ مَاءً فَرَكِبَ حَتَّى جَاءَ الْمَاءَ فَجَعَلَ يَغْسِلُ مَا رَأَى مِنْ ذَلِكَ الْاحْتِلَامِ حَتَّى أَسْفَرَ فَقَالَ لَهُ عَمْرُو بْنُ الْعَاصِ أَصْبَحْتَ وَمَعَنَا ثِيَابٌ فَدَعْ ثَوْبَكَ يُغْسَلُ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ وَاعَجَبًا لَكَ يَا عَمْرُو بْنَ الْعَاصِ لَئِنْ كُنْتَ تَجِدُ ثِيَابًا أَفَكُلُّ النَّاسِ يَجِدُ ثِيَابًا وَاللَّهِ لَوْ فَعَلْتُهَا لَكَانَتْ سُنَّةً بَلْ أَغْسِلُ مَا رَأَيْتُ وَأَنْضِحُ مَا لَمْ أَرَ

हमरा [हिशाम बिन उर्वाह] स मालिक स [हुनकर पिता] स [याह्या बिन अब्दुररहमान बिन हथिब] स इ कहल गेल छल जे एक बेर ओ [उमर बिन अल खत्ताब] क संग एकटा काफिला मे उमरा केने छलाह, जाहि मे अमरू बिन अल 'अस मौजूद छलाह। उमर एकटा झील लग एकटा सड़क पर आराम करय लेल रुकि गेलाह। एकटा भीजल सपना देखलनि। जखन भोर भ गेल छल तखन हुनका आ हुनकर काफिला के पानि नहि भेटलनि। जाबे तक पानि नै भेट गेलै ताबे तक चलैत रहलै, फेर भीजल सपना के दृश्यमान निशान के धोबैत रहलै जाबे तक ओ गायब नै भ गेलै। अमरू बिन अल 'अस कहलनि: 'अहाँ एतेक जल्दी चलि गेलहुँ, जखन कि हमरा सभ लग एखनो कपड़ा स्टॉक मे अछि।' हमरा सभकेँ धोबय लेल अपन कपड़ा उतारि दिअ।' उमर बिन अल खट्टाब कहलनि: 'अहाँ कतेक अजीब छी, हे अमरू बिन अल 'अस। जँ अहाँ बहुत कपड़ा ल' क' चलैत छी त' अहाँ सन दोसरो अछि? अल्लाह के कसम, अगर हम से करितौं त सुन्नत भ जायत। मुदा हमरा लेल एतबे काफी अछि जे जे देखाइ पड़ैत अछि ओकरा धोबी आ जे अदृश्य अछि ओकरा छिड़कब।'

Hadith

Imam Malik : 105

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِأَنَّ أُمَّ سُلَيْمٍ قَالَتْ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَرْأَةُ تَرَى فِي الْمَنَامِ مِثْلَ مَا يَرَى الرَّجُلُ أَتَغْتَسِلُ فَقَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَعَمْ فَلْتَغْتَسِلْ فَقَالَتْ لَهَا عَائِشَةُ أُفٍّ لَكِ وَهَلْ تَرَى ذَلِكَ الْمَرْأَةُ فَقَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَرِبَتْ يَمِينُكِ وَمِنْ أَيْنَ يَكُونُ الشَّبَهُ

ई हमरा मलिक स॑ [इब्नु शिहाब] स॑ [उरवाह बिन अज़ जुबैर] स॑ बतैलऽ गेलऽ छै जे कहलकै कि उम्म सुलैम न॑ अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ एगो महिला के बारे म॑ पूछलकै जे अपनऽ नींद म॑ सपना देखलकै जेना कि आदमी केरऽ सपना । की ओकरा बौछार करबाक चाही? रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'हँ, ओकरा नहाएब जरूरी छै'। ऐस्याह उम्म सुलैम सँ कहलकै; 'धिक्कार अछि, महिलाक लेल एहन सपना देखब संभव अछि?' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आइशा सँ कहलखिन: 'हम अहाँक शुभकामना दैत छी, तखन उपमा कतय सँ अबैत अछि?'

Hadith

Imam Malik : 106

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ زَيْنَبَ بِنْتِ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْجَاءَتْ أُمُّ سُلَيْمٍ امْرَأَةُ أَبِي طَلْحَةَ الْأَنْصَارِيِّ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ اللَّهَ لَا يَسْتَحْيِي مِنْ الْحَقِّ هَلْ عَلَى الْمَرْأَةِ مِنْ غُسْلٍ إِذَا هِيَ احْتَلَمَتْ فَقَالَ نَعَمْ إِذَا رَأَتْ الْمَاءَ

हमरा मलिक स [हिस्यम बिन उर्वाह] स [हुनकर पिता] स [जैनब बिंत अबू सलामाह] स [उम्मू सलामाह] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी स कहल गेल अछि ओ कहलथि, उम सुलैम, अबू तल्हाह अल अंसारी क पत्नी अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी स भेंट केलथि आ कहलथि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अल्लाह के सही बात में लाज नै छै, की महिला के भीजल सपना देखला पर स्नान करनाय बाध्य छै? ' तेँ ओ उत्तर देलनि : 'हँ।' जँ पानि देखाइ पड़य'।

Hadith

Imam Malik : 107

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ كَانَ يَقُولُلَا بَأْسَ أَنْ يُغْتَسَلَ بِفَضْلِ الْمَرْأَةِ مَا لَمْ تَكُنْ حَائِضًا أَوْ جُنُبًا

हमरा ई बात कहल गेल अछि जे [नाफी’] सँ मलिक सँ याह्या कहलनि, ‘[अब्दुल्लाह बिन उमर] कहलनि; 'स्त्री के स्नान सं बचल पानि सं नहाबय मे कोनो दिक्कत नहिं जा धरि महिला के मासिक धर्म या जुनुब नहिं होएत अछि'.

Hadith

Imam Malik : 108

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ يَعْرَقُ فِي الثَّوْبِ وَهُوَ جُنُبٌ ثُمَّ يُصَلِّي فِيهِ

हमरा सँ रिवायत भेल जे [नाफी’] सँ मलिक कहलनि जे, ‘[अब्दुल्लाह बिन उमर] पसीना सँ तर-बतर क’ क’ कपड़ा भीजौलनि जखन कि ओ जुनुब केर अवस्था मे छलाह। तखन ओहि कमीज पहिरने प्रार्थना केलनि।'

Hadith

Imam Malik : 109

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ يَغْسِلُ جَوَارِيهِ رِجْلَيْهِ وَيُعْطِينَهُ الْخُمْرَةَ وَهُنَّ حُيَّضٌ

हमरा [नाफी’] स मालिक स रिवायत भेल जे दासी महिला [अब्दुल्ला बिन उमर] क पैर धोबैत छलीह आ सुगंधित करैत छलीह, भले ही ओ मासिक धर्म मे छलीह।

Hadith

Imam Malik : 110

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ أَنَّهَا قَالَتْخَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي بَعْضِ أَسْفَارِهِ حَتَّى إِذَا كُنَّا بِالْبَيْدَاءِ أَوْ بِذَاتِ الْجَيْشِ انْقَطَعَ عِقْدٌ لِي فَأَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى الْتِمَاسِهِ وَأَقَامَ النَّاسُ مَعَهُ وَلَيْسُوا عَلَى مَاءٍ وَلَيْسَ مَعَهُمْ مَاءٌ فَأَتَى النَّاسُ إِلَى أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ فَقَالُوا أَلَا تَرَى مَا صَنَعَتْ عَائِشَةُ أَقَامَتْ بِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَبِالنَّاسِ وَلَيْسُوا عَلَى مَاءٍ وَلَيْسَ مَعَهُمْ مَاءٌ قَالَتْ عَائِشَةُ فَجَاءَ أَبُو بَكْرٍ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاضِعٌ رَأْسَهُ عَلَى فَخِذِي قَدْ نَامَ فَقَالَ حَبَسْتِ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالنَّاسَ وَلَيْسُوا عَلَى مَاءٍ وَلَيْسَ مَعَهُمْ مَاءٌ قَالَتْ عَائِشَةُ فَعَاتَبَنِي أَبُو بَكْرٍ فَقَالَ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَقُولَ وَجَعَلَ يَطْعُنُ بِيَدِهِ فِي خَاصِرَتِي فَلَا يَمْنَعُنِي مِنْ التَّحَرُّكِ إِلَّا مَكَانُ رَأْسِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى فَخِذِي فَنَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى أَصْبَحَ عَلَى غَيْرِ مَاءٍ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَبَارَكَ وَتَعَالَى آيَةَ التَّيَمُّمِ فَتَيَمَّمُوا فَقَالَ أُسَيْدُ بْنُ حُضَيْرٍ مَا هِيَ بِأَوَّلِ بَرَكَتِكُمْ يَا آلَ أَبِي بَكْرٍ قَالَتْ فَبَعَثْنَا الْبَعِيرَ الَّذِي كُنْتُ عَلَيْهِ فَوَجَدْنَا الْعِقْدَ تَحْتَهُ

हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि मालिक स॑ यह्या [अब्दुररहमान बिन अल कासिम] स॑ [अपनऽ पिता] स॑ [ऐसिया] उम्मूल मुकमिनिन न॑ कहलकै, ‘हम॑ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के साथ यात्रा प॑ निकललऽ छेलियै । जखन हमसब बैदा`ओर द्ज़ातुल जैसी मे रही तखन हमर हार टूटि क खसि पड़ल। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका तकबा लेल रुकि गेलाह आ लोक हुनका पाछू-पाछू चलि गेलाह। एम्हर ओ आ ओ सभ पानि नहि अनलनि। तखन ओ सभ अबू बकर अस सिद्दीक सँ भेंट केलनि आ कहलनि; 'अहाँकेँ नहि बुझल अछि जे आइशाक की भेलै? ओ अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ हुनकर साथी सब के संग रुकि गेलाह, जखन कि ओ सब पानि पर नहि छलाह आ संगहि नहि अनलनि'। ऐशा बजलीह; अबू बकर तखन आबि गेलाह जखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सुतल छलाह आ हमर जाँघ पर माथ राखि देलनि। अबू बकर कहलनि; 'अहाँ अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) आ हुनकर साथी के यात्रा में बाधा पहुंचा देने छी, जखन कि ओ सब ने पानि देबय वाला जगह पर छल आ ने हुनका सब के संग कोनो पानि छल!' अबू बकर हमरा डाँटैत छलाह आ अल्लाह जे इच्छा केने छलाह ताहि हिसाबे किछु बजलाह। ओ हमर कमर मे हाथ सँ ठोकि देलक, आ हमरा जाँघ पर सुतल रसूलुल्लाह (स.अ.व.) केर स्थिति छोड़ि हमरा हिलबा सँ किछु नहि रोकलक। एम्हर अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एखनो भोर धरि बिना पानि के सुतल छलाह, तखन अल्लाह परमात्मा तायम्मूम के आयत उतारलनि, ताहि लेल ओ सब तायम्मुम केलनि। उसैद बिन खुदलैर कहलनि जे, हे अबू बकर के परिवार, ई किछु नहि छल, सिवाय पहिल बरकत जे अल्लाह अहाँ पर देलनि। 'ऐशा बजलीह, 'तखन हम सभ जे ऊँट पर सवार छलहुँ, ओकरा जगौलहुँ, आ ओकर नीचाँ हार भेटल।'

Hadith

Imam Malik : 111

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّهُ أَقْبَلَ هُوَ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ مِنْ الْجُرُفِ حَتَّى إِذَا كَانَا بِالْمِرْبَدِ نَزَلَ عَبْدُ اللَّهِفَتَيَمَّمَ صَعِيدًا طَيِّبًا فَمَسَحَ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ ثُمَّ صَلَّى

याह्या हमरा [नाफी’] स मालिक स कहलथि जे ओ आ [अब्दुल्लाह बिन उमर] जुरुफ स वापस आबि गेल छथि। जखन ओ सभ मीरबाद पहुँचलाह तखन अब्दुल्ला रुकि गेलाह आ पवित्र भूमि पर तयुम्म केलनि । ओ अपन चेहरा आ हाथ कोहनी धरि रगड़ल, फेर प्रार्थना केलक।

Hadith

Imam Malik : 112

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ يَتَيَمَّمُ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ

हमरा [नाफी’] स मालिक स कहल गेल जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] कोहनी तक तयमुम करैत छथि।

Hadith

Imam Malik : 113

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَرْمَلَةَ أَنَّ رَجُلًا سَأَلَ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِعَنْ الرَّجُلِ الْجُنُبِ يَتَيَمَّمُ ثُمَّ يُدْرِكُ الْمَاءَ فَقَالَ سَعِيدٌ إِذَا أَدْرَكَ الْمَاءَ فَعَلَيْهِ الْغُسْلُ لِمَا يُسْتَقْبَلُ

याह्या हमरा [अब्दुररहमान बिन हरमलाह] स मालिक स कहलक जे एकटा आदमी सईद बिन मुसैयाब स एकटा जुनब क बारे मे पूछलक जे तयमुम केलक आ फेर पानि भेटल। [सैद जवाब देलक]; 'जखन पानि भेटि गेलनि तखन अगिला नमाज लेल स्नान अवश्य करथि'।

Hadith

Imam Malik : 114

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَأَنَّ رَجُلًا سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ مَا يَحِلُّ لِي مِنْ امْرَأَتِي وَهِيَ حَائِضٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِتَشُدَّ عَلَيْهَا إِزَارَهَا ثُمَّ شَأْنَكَ بِأَعْلَاهَا

हमरा कहल गेल अछि जे [जैद बिन असलम] स मालिक स याह्या कहला जे एकटा आदमी अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क रसूलुल्लाह स पूछलक जे जखन हमर पत्नी मासिक धर्म भ जाएत त हम की क सकैत छी। रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'ओकरा कहि दियौन जे सरोंग बान्हि दियौक, तकर बाद ऊपरका भाग के संग अहाँ पर निर्भर अछि'।

Hadith

Imam Malik : 115

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِأَنَّ عَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَتْ مُضْطَجِعَةً مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ وَأَنَّهَا قَدْ وَثَبَتْ وَثْبَةً شَدِيدَةً فَقَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا لَكِ لَعَلَّكِ نَفِسْتِ يَعْنِي الْحَيْضَةَ فَقَالَتْ نَعَمْ قَالَ شُدِّي عَلَى نَفْسِكِ إِزَارَكِ ثُمَّ عُودِي إِلَى مَضْجَعِكِ

हमरा [रबीअह बिन अब्दुररहमान] स मलिक स रिवायत भेल जे कहने छलाह जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी ऐशा एक कपड़ा मे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क संग पड़ल छलीह। अचानक ओ जल्दी-जल्दी कूदि गेलाह, तेँ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: ‘अहाँक की गलती अछि? मासिक धर्म भ' रहल अछि की?' 'ऐस्या उत्तर देलकै, 'सही छै'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन कहलनि: 'अपन सरोंग के बंधन कस लिअ, फेर अपन बिस्तर पर वापस आबि जाउ'।

Hadith

Imam Malik : 116

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عُبَيْدَ اللَّهِ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَرْسَلَ إِلَى عَائِشَةَيَسْأَلُهَا هَلْ يُبَاشِرُ الرَّجُلُ امْرَأَتَهُ وَهِيَ حَائِضٌ فَقَالَتْ لِتَشُدَّ إِزَارَهَا عَلَى أَسْفَلِهَا ثُمَّ يُبَاشِرُهَا إِنْ شَاءَ

हमरा कहल गेल अछि जे [नाफी’] सँ मलिक कहलनि जे, ‘[उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उमर] ककरो [आइशा] लग पठौलनि जे पूछि लेथि जे की पुरुषक पत्नीक मासिक धर्म मे सेक्स करब जायज अछि?’। ऐश्याह उत्तर देलखिन, 'ओ - पत्नी - नीचाँ मे सरोंग कस' दियौक, तखन ओ - पति - ओकरा संग जेना चाहै सेक्स क' सकैत अछि'।

Hadith

Imam Malik : 117

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ أَبِي عَلْقَمَةَ عَنْ أُمِّهِ مَوْلَاةِ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ أَنَّهَا قَالَتْ كَانَ النِّسَاءُ يَبْعَثْنَ إِلَى عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَبِالدِّرَجَةِ فِيهَا الْكُرْسُفُ فِيهِ الصُّفْرَةُ مِنْ دَمِ الْحَيْضَةِ يَسْأَلْنَهَا عَنْ الصَّلَاةِ فَتَقُولُ لَهُنَّ لَا تَعْجَلْنَ حَتَّى تَرَيْنَ الْقَصَّةَ الْبَيْضَاءَ تُرِيدُ بِذَلِكَ الطُّهْرَ مِنْ الْحَيْضَةِ

हमरा [अलकामा बिन अबू अलकामाह] स मालिक स याह्या क बारे मे [हुनकर मां] पूर्व दास ऐसिया उमुल मुकमिनिन स कहलथि; 'महिला सभ एकटा डिब्बा 'ऐस्याह उम्मूल मुकमिनिन केँ पठौलनि, ओहि डिब्बा मे मासिक धर्मक खून सँ पीयर तरल पदार्थ मिला क' कपास छल ।' ओ सभ पुछलखिन जे ओ जे प्रार्थनाक नियम केने छलाह, ओकर की?' अस्तु ['ऐशा] हुनका लोकनि केँ कहलनि, 'जा धरि उज्जर तरल नहि देखब ता धरि हड़बड़ा नहि करू'। अर्थ मासिक धर्मक शुद्धता थिक।

Hadith

Imam Malik : 118

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ عَنْ عَمَّتِهِ عَنْ ابْنَةِ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ أَنَّهُ بَلَغَهَاأَنَّ نِسَاءً كُنَّ يَدْعُونَ بِالْمَصَابِيحِ مِنْ جَوْفِ اللَّيْلِ يَنْظُرْنَ إِلَى الطُّهْرِ فَكَانَتْ تَعِيبُ ذَلِكَ عَلَيْهِنَّ وَتَقُولُ مَا كَانَ النِّسَاءُ يَصْنَعْنَ هَذَا

हमरा [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर] स मालिक स [जैद बिन थाबीत क बेटी] स [हुनकर मौसी] स रिवायत अछि जे महिला सब पवित्र काल देखबा लेल राति क अंत मे दीपक मांगैत छलीह। जैद के बेटी हुनका सब के डांटैत कहलखिन: 'स्त्री सब एना किएक करैत छथि?'

Hadith

Imam Malik : 119

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍعَنْ الْمَرْأَةِ الْحَامِلِ تَرَى الدَّمَ قَالَ تَكُفُّ عَنْ الصَّلَاةِقَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك وَذَلِكَ الْأَمْرُ عِنْدَنَا

मालिक स हमरा कहल गेल जे ओ [इब्न शिहाब] स एकटा गर्भवती महिला क बारे मे पूछलथि जे मासिक धर्म क खून देखने छलीह। इब्न शिहाब उत्तर देलनि; 'ओ अपन प्रार्थना छोड़ि दियौक'। याह्या कहलक; मालिक बजलाह - ई हमर सभक विचार अछि'।

Hadith

Imam Malik : 120

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْكُنْتُ أُرَجِّلُ رَأْسَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا حَائِضٌ

हमरा मालिक स [हिस्याम बिन उर्वाह] स [अपन पिता] स [ऐसिया] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी स कहने छलाह, ओ कहलनि; 'हम एक बेर रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के केश साफ केने रही, भले ओहि समय हमरा मासिक धर्म छल।'