इमाम मलिक : 101
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ زُيَيْدِ بْنِ الصَّلْتِ أَنَّهُ قَالَ خَرَجْتُ مَعَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِإِلَى الْجُرُفِ فَنَظَرَ فَإِذَا هُوَ قَدْ احْتَلَمَ وَصَلَّى وَلَمْ يَغْتَسِلْ فَقَالَ وَاللَّهِ مَا أَرَانِي إِلَّا احْتَلَمْتُ وَمَا شَعَرْتُ وَصَلَّيْتُ وَمَا اغْتَسَلْتُ قَالَ فَاغْتَسَلَ وَغَسَلَ مَا رَأَى فِي ثَوْبِهِ وَنَضَحَ مَا لَمْ يَرَ وَأَذَّنَ أَوْ أَقَامَ ثُمَّ صَلَّى بَعْدَ ارْتِفَاعِ الضُّحَى مُتَمَكِّنًا
मलिक ने मुझे [हिशाम बिन उरवाह] से [उनके पिता] से [ज़ुबैद बिन अस शाल्ट] तक बताया था, उन्होंने कहा, "मैं [उमर बिन कत्थब] के साथ जुर्फ गया था।" अचानक उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने एक गीला सपना देखा है और बिना नहाए नमाज़ पढ़ रहे हैं। फिर उन्होंने कहा, "अल्लाह की कसम, मुझे नहीं पता था कि मैंने गीला सपना देखा है, लेकिन मैं होश में नहीं था, इसलिए मैंने नमाज़ पढ़ी और नहाया नहीं।" कहानी सुनाने वाले ने कहा, "फिर उन्होंने नहाया और अपने कपड़ों पर जो दिख रहा था उसे धोया और किसी ऐसी चीज़ पर छिड़का जो दिखाई नहीं दे रही थी। उसके बाद उन्होंने नमाज़ या इकामत के लिए अज़ान दी, फिर पहली बार नमाज़ पढ़ी।"
इमाम मलिक : 102
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أَبِي حَكِيمٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ غَدَا إِلَى أَرْضِهِ بِالْجُرُفِ فَوَجَدَ فِي ثَوْبِهِ احْتِلَامًا فَقَالَ لَقَدْ ابْتُلِيتُ بِالْاحْتِلَامِ مُنْذُ وُلِّيتُ أَمْرَ النَّاسِ فَاغْتَسَلَ وَغَسَلَ مَا رَأَى فِي ثَوْبِهِ مِنْ الْاحْتِلَامِ ثُمَّ صَلَّى بَعْدَ أَنْ طَلَعَتْ الشَّمْسُ
मुझे मलिक [इस्माईल बिन अबू हकीम] से [सुलेमान बिन यासर] ने बताया कि [उमर बिन खत्ताब] सुबह जुरूफ इलाके में अपने खेत पर गए थे। फिर उन्होंने अपने कपड़ों पर गीले सपने के निशान देखे, तो उन्होंने कहा, "जब से मैंने लीडरशिप संभाली है, मुझे गीले सपनों ने परेशान किया है।" फिर उन्होंने नहाया और अपने कपड़ों पर गीले सपने के जो निशान दिख रहे थे, उन्हें धोया, फिर सूरज उगने के बाद नमाज़ पढ़ी।
इमाम मलिक : 103
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ صَلَّى بِالنَّاسِ الصُّبْحَ ثُمَّ غَدَا إِلَى أَرْضِهِ بِالْجُرُفِ فَوَجَدَ فِي ثَوْبِهِ احْتِلَامًا فَقَالَ إِنَّا لَمَّا أَصَبْنَا الْوَدَكَ لَانَتْ الْعُرُوقُ فَاغْتَسَلَ وَغَسَلَ الْاحْتِلَامَ مِنْ ثَوْبِهِ وَعَادَ لِصَلَاتِهِ
मुझे मलिक [याह्या बिन सईद] से [सुलेमान बिन यासर] ने बताया कि [उमर बिन खत्ताब] ने एक बार अपने साथियों के साथ सुबह की नमाज़ पढ़ी, फिर सुबह दोपहर के करीब वह जुरूफ़ इलाके में अपने खेत में गए, तो उन्हें अपने कपड़ों पर पसीने के निशान दिखे। तो उन्होंने कहा: "जब हम मोटे होते हैं, तो पसीना आना आसान होता है।" फिर उमर ने नहाया और अपने कपड़ों पर पसीने के निशान धोए, उसके बाद उन्होंने अपनी नमाज़ दोहराई।
इमाम मलिक : 104
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَاطِبٍ أَنَّهُ اعْتَمَرَ مَعَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِفِي رَكْبٍ فِيهِمْ عَمْرُو بْنُ الْعَاصِ وَأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ عَرَّسَ بِبَعْضِ الطَّرِيقِ قَرِيبًا مِنْ بَعْضِ الْمِيَاهِ فَاحْتَلَمَ عُمَرُ وَقَدْ كَادَ أَنْ يُصْبِحَ فَلَمْ يَجِدْ مَعَ الرَّكْبِ مَاءً فَرَكِبَ حَتَّى جَاءَ الْمَاءَ فَجَعَلَ يَغْسِلُ مَا رَأَى مِنْ ذَلِكَ الْاحْتِلَامِ حَتَّى أَسْفَرَ فَقَالَ لَهُ عَمْرُو بْنُ الْعَاصِ أَصْبَحْتَ وَمَعَنَا ثِيَابٌ فَدَعْ ثَوْبَكَ يُغْسَلُ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ وَاعَجَبًا لَكَ يَا عَمْرُو بْنَ الْعَاصِ لَئِنْ كُنْتَ تَجِدُ ثِيَابًا أَفَكُلُّ النَّاسِ يَجِدُ ثِيَابًا وَاللَّهِ لَوْ فَعَلْتُهَا لَكَانَتْ سُنَّةً بَلْ أَغْسِلُ مَا رَأَيْتُ وَأَنْضِحُ مَا لَمْ أَرَ
मुझे मालिक [हिशाम बिन उरवाह] से [उनके पिता] से [याह्या बिन अब्दुर्रहमान बिन हाथीब] तक यह बताया गया कि एक बार उन्होंने [उमर बिन अल खत्ताब] के साथ एक काफिले में उमराह किया जिसमें अमरू बिन अल 'अस मौजूद थे। उमर एक झील के पास एक सड़क पर आराम करने के लिए रुके। उन्होंने एक गीला सपना देखा। जब लगभग सुबह हो गई, तो उन्हें और उनके काफिले को पानी नहीं मिला। वह तब तक चलते रहे जब तक उन्हें पानी नहीं मिल गया, फिर उन्होंने गीले सपने के दिखाई देने वाले निशानों को तब तक धोया जब तक कि वे गायब नहीं हो गए। अमरू बिन अल 'अस ने कहा; "आप इतनी जल्दी चले गए, जबकि हमारे पास अभी भी कपड़े स्टॉक में हैं। हमारे धोने के लिए अपने कपड़े उतार दें।" उमर बिन अल खत्ताब ने कहा; "आप कितने अजीब हैं, ऐ अमरू बिन अल 'अस। अगर आप बहुत सारे कपड़े ले जाते हैं, तो क्या दूसरे भी आपके जैसे हैं? अल्लाह की कसम, अगर मैंने ऐसा किया, तो यह सुन्नत होगी। लेकिन मेरे लिए यह काफी है कि जो दिखाई देता है उसे धो लूं और जो दिखाई नहीं देता है उसे छिड़क दूं।"
इमाम मलिक : 105
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِأَنَّ أُمَّ سُلَيْمٍ قَالَتْ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَرْأَةُ تَرَى فِي الْمَنَامِ مِثْلَ مَا يَرَى الرَّجُلُ أَتَغْتَسِلُ فَقَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَعَمْ فَلْتَغْتَسِلْ فَقَالَتْ لَهَا عَائِشَةُ أُفٍّ لَكِ وَهَلْ تَرَى ذَلِكَ الْمَرْأَةُ فَقَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَرِبَتْ يَمِينُكِ وَمِنْ أَيْنَ يَكُونُ الشَّبَهُ
मुझे मलिक [इब्न शिहाब] से [उरवाह बिन अज़ ज़ुबैर] ने बताया है कि, "उम सुलैम ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक औरत के बारे में पूछा जो नींद में मर्दों जैसा सपना देखती थी। क्या उसे नहाना चाहिए? रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: "हाँ, उसे नहाना चाहिए।" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आयशा से कहा: "मैं तुम्हें शुभकामनाएँ देता हूँ, तो फिर यह समानता कहाँ से आई?"
इमाम मलिक : 106
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ زَيْنَبَ بِنْتِ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْجَاءَتْ أُمُّ سُلَيْمٍ امْرَأَةُ أَبِي طَلْحَةَ الْأَنْصَارِيِّ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ اللَّهَ لَا يَسْتَحْيِي مِنْ الْحَقِّ هَلْ عَلَى الْمَرْأَةِ مِنْ غُسْلٍ إِذَا هِيَ احْتَلَمَتْ فَقَالَ نَعَمْ إِذَا رَأَتْ الْمَاءَ
मुझे मलिक [हिसाम बिन उरवा] से [उनके पिता] से [ज़ैनब बिन्त अबू सलमा] से [उम्मू सलमा] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी से बताया गया है, उन्होंने कहा, "उम सुलैम, अबू तल्हा अल अंसारी की पत्नी, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलीं और कहा; 'ए रसूलुल्लाह, अल्लाह सत्य से शर्मिंदा नहीं है, क्या एक महिला के लिए स्नान करना अनिवार्य है यदि वह गीला सपना देखती है?' तो उन्होंने उत्तर दिया: "हाँ। अगर वह पानी देखता है।"
इमाम मलिक : 107
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ كَانَ يَقُولُلَا بَأْسَ أَنْ يُغْتَسَلَ بِفَضْلِ الْمَرْأَةِ مَا لَمْ تَكُنْ حَائِضًا أَوْ جُنُبًا
मुझे बताया गया है कि मलिक (नफी) से याह्या ने कहा, "[अब्दुल्ला बिन उमर] ने कहा; "जब तक महिला मासिक धर्म या जुनूब में न हो, तब तक उसके नहाने के बचे हुए पानी से नहाने में कोई दिक्कत नहीं है।"
इमाम मलिक : 108
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ يَعْرَقُ فِي الثَّوْبِ وَهُوَ جُنُبٌ ثُمَّ يُصَلِّي فِيهِ
मुझे बताया गया है कि मलिक (नफी) ने कहा, "अब्दुल्ला बिन उमर को जुनूब की हालत में पसीना आया और उनके कपड़े भीग गए। फिर उन्होंने उन्हीं कपड़ों में नमाज़ पढ़ी।"
इमाम मलिक : 109
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ يَغْسِلُ جَوَارِيهِ رِجْلَيْهِ وَيُعْطِينَهُ الْخُمْرَةَ وَهُنَّ حُيَّضٌ
मुझे मालिक (नफी) से वर्णित है कि अब्दुल्लाह बिन उमर की दासियाँ अपने पैर धोती थीं और उनपर सुगंध लगाती थीं, यद्यपि वे मासिक धर्म में होती थीं।
इमाम मलिक : 110
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ أَنَّهَا قَالَتْخَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي بَعْضِ أَسْفَارِهِ حَتَّى إِذَا كُنَّا بِالْبَيْدَاءِ أَوْ بِذَاتِ الْجَيْشِ انْقَطَعَ عِقْدٌ لِي فَأَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى الْتِمَاسِهِ وَأَقَامَ النَّاسُ مَعَهُ وَلَيْسُوا عَلَى مَاءٍ وَلَيْسَ مَعَهُمْ مَاءٌ فَأَتَى النَّاسُ إِلَى أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ فَقَالُوا أَلَا تَرَى مَا صَنَعَتْ عَائِشَةُ أَقَامَتْ بِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَبِالنَّاسِ وَلَيْسُوا عَلَى مَاءٍ وَلَيْسَ مَعَهُمْ مَاءٌ قَالَتْ عَائِشَةُ فَجَاءَ أَبُو بَكْرٍ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاضِعٌ رَأْسَهُ عَلَى فَخِذِي قَدْ نَامَ فَقَالَ حَبَسْتِ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالنَّاسَ وَلَيْسُوا عَلَى مَاءٍ وَلَيْسَ مَعَهُمْ مَاءٌ قَالَتْ عَائِشَةُ فَعَاتَبَنِي أَبُو بَكْرٍ فَقَالَ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَقُولَ وَجَعَلَ يَطْعُنُ بِيَدِهِ فِي خَاصِرَتِي فَلَا يَمْنَعُنِي مِنْ التَّحَرُّكِ إِلَّا مَكَانُ رَأْسِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى فَخِذِي فَنَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى أَصْبَحَ عَلَى غَيْرِ مَاءٍ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَبَارَكَ وَتَعَالَى آيَةَ التَّيَمُّمِ فَتَيَمَّمُوا فَقَالَ أُسَيْدُ بْنُ حُضَيْرٍ مَا هِيَ بِأَوَّلِ بَرَكَتِكُمْ يَا آلَ أَبِي بَكْرٍ قَالَتْ فَبَعَثْنَا الْبَعِيرَ الَّذِي كُنْتُ عَلَيْهِ فَوَجَدْنَا الْعِقْدَ تَحْتَهُ
मुझे बताया गया है कि याह्या मलिक से [अब्दुर्रहमान बिन अल कासिम] से [उनके पिता] से [ऐस्या] उम्मुल मुक्मिनीन ने कहा, "हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ यात्रा पर निकले थे। जब हम बैदा या दज़ातुल जायसी में थे, मेरा हार टूट गया और गिर गया। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इसे ढूंढने के लिए रुके और लोगों ने उनका पीछा किया। जबकि वह और वे पानी नहीं लाए थे। फिर वे अबू बकर अस सिद्दीक से मिले और कहा; "क्या आपको नहीं पता कि ऐस्या को क्या हुआ? वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनके साथियों के साथ रुक गईं, जबकि वे पानी पर नहीं थे और उन्हें अपने साथ नहीं ले गए।" आयशा ने कहा; "अबू बकर आए जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सो रहे थे और अपना सिर मेरी जांघ पर रख दिया। अबू बकर ने कहा; "तुमने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और उनके साथियों के सफ़र में रुकावट डाली, जबकि वे न तो पानी की जगह पर थे और न ही उनके पास पानी था!" अबू बकर ने मुझे डांटा और जैसा अल्लाह ने चाहा वैसा कहा। उन्होंने अपने हाथ से मेरी कमर पर थपकी दी, और मुझे हिलने से सिर्फ़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की हालत ने रोका, जो मेरी जांघ पर सो रहे थे। इस बीच, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) सुबह तक बिना पानी के सो रहे थे, फिर अल्लाह तआला ने तयम्मुम की आयत उतारी, तो उन्होंने तयम्मुम किया। उसैद बिन खुदलैर ने कहा, "ऐ अबू बकर के परिवार, यह अल्लाह की तरफ़ से तुम पर मिली पहली नेमत के अलावा कुछ नहीं था।" आयशा ने कहा, "फिर हमने जिस ऊँट पर सवारी की थी, उसे जगाया, और उसके नीचे हार पाया।"
इमाम मलिक : 111
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّهُ أَقْبَلَ هُوَ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ مِنْ الْجُرُفِ حَتَّى إِذَا كَانَا بِالْمِرْبَدِ نَزَلَ عَبْدُ اللَّهِفَتَيَمَّمَ صَعِيدًا طَيِّبًا فَمَسَحَ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ ثُمَّ صَلَّى
याह्या ने मुझे मलिक से [नफी] बताया कि वह और [अब्दुल्ला बिन उमर] जुरूफ से लौटे थे। जब वे मीरबाद पहुंचे, तो अब्दुल्ला रुके और पवित्र भूमि पर तयुम किया। उन्होंने अपना चेहरा और हाथ कोहनी तक पोंछे, फिर नमाज़ पढ़ी।
इमाम मलिक : 112
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ يَتَيَمَّمُ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ
मुझे मालिक (नफी) से बताया गया कि (अब्दुल्ला बिन उमर) ने कोहनी तक तयुम किया था।
इमाम मलिक : 113
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَرْمَلَةَ أَنَّ رَجُلًا سَأَلَ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِعَنْ الرَّجُلِ الْجُنُبِ يَتَيَمَّمُ ثُمَّ يُدْرِكُ الْمَاءَ فَقَالَ سَعِيدٌ إِذَا أَدْرَكَ الْمَاءَ فَعَلَيْهِ الْغُسْلُ لِمَا يُسْتَقْبَلُ
याह्या ने मुझे मलिक [अब्दुर्रहमान बिन हरमला] से बताया, "एक आदमी ने सईद बिन मुसय्यब से एक जुनूब के बारे में पूछा जिसने तयुम किया और फिर पानी मिला। [सईद ने जवाब दिया]; "जब उसे पानी मिल जाए, तो उसे अगली नमाज़ के लिए नहाना चाहिए।"
इमाम मलिक : 114
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَأَنَّ رَجُلًا سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ مَا يَحِلُّ لِي مِنْ امْرَأَتِي وَهِيَ حَائِضٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِتَشُدَّ عَلَيْهَا إِزَارَهَا ثُمَّ شَأْنَكَ بِأَعْلَاهَا
याह्या ने मुझे मलिक [ज़ैद बिन असलम] से बताया, "एक आदमी ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा, "जब मेरी पत्नी को पीरियड्स हों, तो मैं क्या कर सकता हूँ?" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: "उसे सारोंग बांधने के लिए कहो, उसके बाद ऊपर का काम तुम पर है।"
इमाम मलिक : 115
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِأَنَّ عَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَتْ مُضْطَجِعَةً مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ وَأَنَّهَا قَدْ وَثَبَتْ وَثْبَةً شَدِيدَةً فَقَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا لَكِ لَعَلَّكِ نَفِسْتِ يَعْنِي الْحَيْضَةَ فَقَالَتْ نَعَمْ قَالَ شُدِّي عَلَى نَفْسِكِ إِزَارَكِ ثُمَّ عُودِي إِلَى مَضْجَعِكِ
मुझे मलिक [रबीअह बिन अब्दुर्रहमान] से यह बात सुनाई गई, उन्होंने कहा, "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी आयशा, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ एक कपड़े में लेटी हुई थीं। अचानक वह तेज़ी से उछल पड़ीं, तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा: "तुम्हें क्या हुआ है? क्या तुम्हें पीरियड्स आ रहे हैं?" आयशा ने जवाब दिया, "हाँ।" फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अपने सरोंग के बंधन कस लो, फिर अपने बिस्तर पर वापस जाओ।"
इमाम मलिक : 116
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عُبَيْدَ اللَّهِ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَرْسَلَ إِلَى عَائِشَةَيَسْأَلُهَا هَلْ يُبَاشِرُ الرَّجُلُ امْرَأَتَهُ وَهِيَ حَائِضٌ فَقَالَتْ لِتَشُدَّ إِزَارَهَا عَلَى أَسْفَلِهَا ثُمَّ يُبَاشِرُهَا إِنْ شَاءَ
मुझे बताया गया है कि मलिक (नफी) ने कहा, "उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उमर ने आयशा के पास किसी को यह पूछने के लिए भेजा, 'क्या किसी आदमी के लिए अपनी पत्नी के साथ सेक्स करना जायज़ है जब वह पीरियड्स में हो?" आयशा ने जवाब दिया, "वह (पत्नी) नीचे से सारोंग बांध ले, फिर वह (पति) उसके साथ अपनी मर्ज़ी से सेक्स कर सकता है।"
इमाम मलिक : 117
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ أَبِي عَلْقَمَةَ عَنْ أُمِّهِ مَوْلَاةِ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ أَنَّهَا قَالَتْ كَانَ النِّسَاءُ يَبْعَثْنَ إِلَى عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَبِالدِّرَجَةِ فِيهَا الْكُرْسُفُ فِيهِ الصُّفْرَةُ مِنْ دَمِ الْحَيْضَةِ يَسْأَلْنَهَا عَنْ الصَّلَاةِ فَتَقُولُ لَهُنَّ لَا تَعْجَلْنَ حَتَّى تَرَيْنَ الْقَصَّةَ الْبَيْضَاءَ تُرِيدُ بِذَلِكَ الطُّهْرَ مِنْ الْحَيْضَةِ
मलिक [अलकामा बिन अबू अलकामा] से याह्या के बारे में [उनकी माँ] पूर्व गुलाम ऐशया उम्मुल मुकमिनिन से बताने के बाद, उन्होंने कहा; "औरतों ने ऐशया उम्मुल मुकमिनिन के पास एक डिब्बा भेजा, डिब्बे में रुई थी जिसमें पीरियड्स के खून का पीला तरल पदार्थ मिला हुआ था। उन्होंने पूछा कि उनकी नमाज़ के बारे में क्या नियम है?" तो [आयशा] ने उनसे कहा, "जब तक तुम सफ़ेद तरल पदार्थ न देख लो, तब तक जल्दी मत करो।" इसका मतलब पीरियड्स की पवित्रता है।
इमाम मलिक : 118
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ عَنْ عَمَّتِهِ عَنْ ابْنَةِ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ أَنَّهُ بَلَغَهَاأَنَّ نِسَاءً كُنَّ يَدْعُونَ بِالْمَصَابِيحِ مِنْ جَوْفِ اللَّيْلِ يَنْظُرْنَ إِلَى الطُّهْرِ فَكَانَتْ تَعِيبُ ذَلِكَ عَلَيْهِنَّ وَتَقُولُ مَا كَانَ النِّسَاءُ يَصْنَعْنَ هَذَا
मुझे मलिक [अब्दुल्ला बिन अबू बक्र] से [उनकी मौसी] से [ज़ैद बिन साबित की बेटी] से बताया गया है कि औरतें रात के आखिर में पवित्र समय देखने के लिए दीये मांगती हैं। ज़ैद की बेटी ने उन्हें डांटा और कहा; "औरतें ऐसा क्यों करती हैं?"
इमाम मलिक : 119
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍعَنْ الْمَرْأَةِ الْحَامِلِ تَرَى الدَّمَ قَالَ تَكُفُّ عَنْ الصَّلَاةِقَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك وَذَلِكَ الْأَمْرُ عِنْدَنَا
मुझे मलिक ने बताया कि उसने [इब्न शिहाब] से एक प्रेग्नेंट औरत के बारे में पूछा था जिसे पीरियड्स में खून आया था। इब्न शिहाब ने जवाब दिया; "उसे अपनी नमाज़ छोड़ देनी चाहिए।" याह्या ने कहा; मलिक ने कहा, "यह हमारी राय है।"
इमाम मलिक : 120
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْكُنْتُ أُرَجِّلُ رَأْسَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا حَائِضٌ
मलिक ने मुझे [हिस्याम बिन उरवाह] से [अपने पिता] से [ऐस्या] पैगंबर की पत्नी से बताया था, उन्होंने कहा; "मैंने एक बार रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाल ठीक किए थे, हालांकि उस समय मैं मासिक धर्म में थी।"