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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 Hadith

Hadith

Imam Malik : 1161

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَلَا بَأْسَ بِأَنْ يُسَلِّفَ الرَّجُلُ الرَّجُلَ فِي الطَّعَامِ الْمَوْصُوفِ بِسِعْرٍ مَعْلُومٍ إِلَى أَجَلٍ مُسَمًّى مَا لَمْ يَكُنْ فِي زَرْعٍ لَمْ يَبْدُ صَلَاحُهُ أَوْ تَمْرٍ لَمْ يَبْدُ صَلَاحُهُ

हमरा कहल गेल अछि जे मालिक सँ [नफी'] सँ [अब्दुल्लाह बिन उमर] सँ याह्या कहलनि; 'कोनो व्यक्ति कोनों अन्य व्यक्ति कें कोनों निश्चित भोजन कें उधार द सकय छै, एकटा ज्ञात मूल्य पर, आ पूर्व निर्धारित भुगतान अवधि कें साथ, जखन तइक ओ कोनों एहन पौधा नहि छै जकर पाकलपन एखन धरि स्पष्ट नहि छै या खजूर जे एखन धरि पाकल नहि देखायत छै'.

Hadith

Imam Malik : 1162

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ الْأَسْوَدِ بْنِ عَبْدِ يَغُوثَفَنِيَ عَلَفُ دَابَّتِهِ فَقَالَ لِغُلَامِهِ خُذْ مِنْ حِنْطَةِ أَهْلِكَ طَعَامًا فَابْتَعْ بِهَا شَعِيرًا وَلَا تَأْخُذْ إِلَّا مِثْلَهُو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ بَلَغَهُ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ ابْنِ مُعَيْقِيبٍ الدَّوْسِيِّ مِثْلُ ذَلِكَ قَالَ مَالِك وَهُوَ الْأَمْرُ عِنْدَنَا

ई हमरा मलिक स॑ [नफी’] स॑ [सुलेमान बिन यासर] स॑ बतैलऽ गेलऽ छै कि हुनी हमरा सूचित करलकै कि [अब्दुररहमान बिन अल असवद बिन अब्दु यघुत्स] के एक बार हुनकऽ माल-जाल केरऽ चारा खतम होय गेलऽ छेलै । तखन ओ अपन दास केँ आदेश देलनि- ‘अपन परिवारक गहूम लऽ लिअ। बाजरा कीनबा मे एकर उपयोग करू, आ जा धरि वजन बराबर नहि होयत ता धरि नहि लिअ।' हमरा मलिक स कहल गेल अछि जे इ हुनका लग पहुंचल, हदीस क रूप मे अल कासिम बिन मुहम्मद बिन मुआइकब अद दौसी स। मालिक बजलाह: 'हम सभ वैह विचारक पालन करैत छी।'

Hadith

Imam Malik : 1163

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي مَرْيَمَ أَنَّهُ سَأَلَ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِفَقَالَ إِنِّي رَجُلٌ أَبْتَاعُ الطَّعَامَ يَكُونُ مِنْ الصُّكُوكِ بِالْجَارِ فَرُبَّمَا ابْتَعْتُ مِنْهُ بِدِينَارٍ وَنِصْفِ دِرْهَمٍ فَأُعْطَى بِالنِّصْفِ طَعَامًا فَقَالَ سَعِيدٌ لَا وَلَكِنْ أَعْطِ أَنْتَ دِرْهَمًا وَخُذْ بَقِيَّتَهُ طَعَامًا

याह्या हमरा [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अबू मरियम] स मालिक स कहलथि जे एक बेर ओ [सैद बिन मुसैयब] स पूछने छलाह; 'हम जखन अल जार मे प्रतिभूति घूमि रहल छल तखन भोजन कीनने रही।' तखन जखन एक दिनार आ आधा दिरहम मे भोजन कीनि लेने रही तखन हमरा आधा भोजन भेटि गेल।' सईद जवाब देलक; "नहि, एकटा दिरहम द' दियौक, आ शेष भोजनक रूप मे ल' लिअ."

Hadith

Imam Malik : 1164

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يُونُسَ بْنِ يُوسُفَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِمَرَّ بِحَاطِبِ بْنِ أَبِي بَلْتَعَةَ وَهُوَ يَبِيعُ زَبِيبًا لَهُ بِالسُّوقِ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ إِمَّا أَنْ تَزِيدَ فِي السِّعْرِ وَإِمَّا أَنْ تُرْفَعَ مِنْ سُوقِنَا

हमरा मलिक स [सैद बिन मुसैयब] स [यूनुस बिन यूसुफ] स कहल गेल जे [उमर बिन खत्ताब] एक बेर हथिब बिन अबू बलताआ स गुजरल छलाह जे बाजार मे किशमिश बेचैत छलाह। उमर बिन खट्टाब तखन हुनका कहलनि; 'अहाँक लेल दू टा विकल्प अछि, दाम बढ़ाउ वा हमर बाजार छोड़ि दियौक'।

Hadith

Imam Malik : 1165

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ صَالِحِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ حَسَنِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ أَنَّ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍبَاعَ جَمَلًا لَهُ يُدْعَى عُصَيْفِيرًا بِعِشْرِينَ بَعِيرًا إِلَى أَجَلٍ

याह्या हमरा [सालिह बिन कैसन] स॑ मलिक स॑ [हसन बिन मुहम्मद बिन अली बिन अबू तालिब] स॑ कहलकै कि [‘अली बिन अबू तालिब] अपनऽ ऊंट क॑ उशैफिर नाम केरऽ ऊंट क॑ एक बार म॑ बीस ऊंट म॑ बेचै छै’ ।

Hadith

Imam Malik : 1166

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَاشْتَرَى رَاحِلَةً بِأَرْبَعَةِ أَبْعِرَةٍ مَضْمُونَةٍ عَلَيْهِ يُوفِيهَا صَاحِبَهَا بِالرَّبَذَةِ

हमरा [नाफी'] सँ मालिक सँ ई बात कहल गेल छल जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] एक बेर चारि टा बछड़ाक संग सवारी करबाक लेल फिट ऊँट कीनने छलाह, आ मालिक केँ रबादजाह' पहुँचलाक बाद मात्र पाइ दैत छलाह |

Hadith

Imam Malik : 1167

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍعَنْ بَيْعِ الْحَيَوَانِ اثْنَيْنِ بِوَاحِدٍ إِلَى أَجَلٍ فَقَالَ لَا بَأْسَ بِذَلِكَ

मालिक स हमरा स इ बात कहल गेल जे ओ [इब्न स्यहाब] स एक जानवर क लेल दूटा जानवर कए एकमुश्त आधार पर बेचबाक फैसला क बारे मे पूछलथि। इब्न सिहाब जवाब देलकै, 'ठीक छै।'

Hadith

Imam Malik : 1168

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ بَيْعِ حَبَلِ الْحَبَلَةِوَكَانَ بَيْعًا يَتَبَايَعُهُ أَهْلُ الْجَاهِلِيَّةِ كَانَ الرَّجُلُ يَبْتَاعُ الْجَزُورَ إِلَى أَنْ تُنْتَجَ النَّاقَةُ ثُمَّ تُنْتَجَ الَّتِي فِي بَطْنِهَا

हमरा कहल गेल अछि जे मलिक सँ [नाफी’] सँ [अब्दुल्लाह बिन उमर] सँ याह्या कहलनि जे, ‘अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अजन्मा बच्चा बेचब मना केने छलाह। जेहिलिया लोकक व्यापारिक मॉडल थिक, कियो ऊँट कीनि लैत अछि जा धरि ऊँट बछड़ा नहि जन्म दैत अछि, तखन बछड़ा दोसर बछड़ाक जन्म नहि दैत अछि'।

Hadith

Imam Malik : 1169

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ قَالَلَا رِبًا فِي الْحَيَوَانِ وَإِنَّمَا نُهِيَ مِنْ الْحَيَوَانِ عَنْ ثَلَاثَةٍ عَنْ الْمَضَامِينِ وَالْمَلَاقِيحِ وَحَبَلِ الْحَبَلَةِ وَالْمَضَامِينُ بَيْعُ مَا فِي بُطُونِ إِنَاثِ الْإِبِلِ وَالْمَلَاقِيحُ بَيْعُ مَا فِي ظُهُورِ الْجِمَالِ

हमरा मलिक सँ [इब्न शिहाब] सँ [सैद बिन मुसैयब] सँ कहल गेल अछि कहलनि; 'पशु कीन-बिक्री मे कोनो सूद नहि।' बस, ई जे तीन टा बात छैक जे जानवरक खरीद-बिक्री मे मनाही छैक; मदलामिन, मलाकीह आ हबालुल हबलाह - भ्रूण बेचब जे एखनो मायक पेट मे अछि -। मदलामीन एहन भ्रूण बेचि रहल अछि जे एखनो मादा ऊँटक पेट मे अछि । एम्हर मलाकीह एहन माल बेचि रहल अछि जे ऊँटक कूबड़सँ ऊपर अछि ।

Hadith

Imam Malik : 1170

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ بَيْعِ الْحَيَوَانِ بِاللَّحْمِ

याह्या हमरा [जैद बिन असलम] स मालिक स [सैद बिन मुसैयब] स बतेलथि जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मांस क लेल जानवर बेचबा स मना केलथि।

Hadith

Imam Malik : 1171

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ دَاوُدَ بْنِ الْحُصَيْنِ أَنَّهُ سَمِعَ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ يَقُولُمِنْ مَيْسِرِ أَهْلِ الْجَاهِلِيَّةِ بَيْعُ الْحَيَوَانِ بِاللَّحْمِ بِالشَّاةِ وَالشَّاتَيْنِ

मालिक हमरा [दाऊद इब्नुल हुशैन] सँ कहलनि जे ओ [सैद इब्नुल मुसैयब] केँ कहैत सुनने छलाह, 'जहिलियाक जुआ सहित मांसक लेल एकटा जानवर बेचब, आ दू टा बकरी मे बकरी बेचब'।

Hadith

Imam Malik : 1172

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُنُهِيَ عَنْ بَيْعِ الْحَيَوَانِ بِاللَّحْمِ قَالَ أَبُو الزِّنَادِ فَقُلْتُ لِسَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَرَأَيْتَ رَجُلًا اشْتَرَى شَارِفًا بِعَشَرَةِ شِيَاهٍ فَقَالَ سَعِيدٌ إِنْ كَانَ اشْتَرَاهَا لِيَنْحَرَهَا فَلَا خَيْرَ فِي ذَلِكَقَالَ أَبُو الزِّنَادِ وَكُلُّ مَنْ أَدْرَكْتُ مِنْ النَّاسِ يَنْهَوْنَ عَنْ بَيْعِ الْحَيَوَانِ بِاللَّحْمِ قَالَ أَبُو الزِّنَادِ وَكَانَ ذَلِكَ يُكْتَبُ فِي عُهُودِ الْعُمَّالِ فِي زَمَانِ أَبَانَ بْنِ عُثْمَانَ وَهِشَامِ بْنِ إِسْمَعِيلَ يَنْهَوْنَ عَنْ ذَلِكَ

हमरा [अबू अज़ जिनाद] स मालिक स [सैद बिन मुसैयब] स कहल गेल अछि जे; 'मांस के साथ जानवर बेचै पर रोक लगाय देलऽ गेलऽ छै' । अबू जिनाद कहलनि; 'हम सईद बिन मुसैयाबसँ पुछलियनि; 'दस बरदक बदला मे कोनो आदमी बूढ़ ऊँट कीनि लेत त' अहाँक की विचार अछि? ' सईद जबाब देलकै; 'जँ वधक लेल कीनि लेत तखन एहि मे कोनो नीक नहि'। अबू जिनाद कहलनि; 'हमरा जे व्यक्ति भेटैत अछि, ओ सब मांसक लेल जीवित जानवर खरीदबा आ बेचबा पर रोक लगा दैत अछि'। अबू जिनाद आगू बजलाह; 'ई बात रोजगार अनुबंध में कहलऽ गेलऽ छेलै जे अबन बिन उस्मान के समय में लागू छेलै, आरू हिस्यम बिन इस्माइल न॑ भी ऐन्हऽ प्रथा पर रोक लगाय देल॑ छेलै' ।

Hadith

Imam Malik : 1173

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ هِشَامٍ عَنْ أَبِي مَسْعُودٍ الْأَنْصَارِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ ثَمَنِ الْكَلْبِ وَمَهْرِ الْبَغِيِّ وَحُلْوَانِ الْكَاهِنِيَعْنِي بِمَهْرِ الْبَغِيِّ مَا تُعْطَاهُ الْمَرْأَةُ عَلَى الزِّنَا وَحُلْوَانُ الْكَاهِنِ رَشْوَتُهُ وَمَا يُعْطَى عَلَى أَنْ يَتَكَهَّنَ

याह्या हमरा मलिक सँ [इब्न शिहाब] सँ [अबू बकर बिन अब्दुररहमान बिन अल हरिथ इब्न हिशाम] सँ [अबू मसूद अल अंसारी] सँ बतौलनि जे कहलनि जे, 'अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कुकुरक बिक्री सँ अर्जित धन, वेश्या केर मजदूरी, आ मजदूरी केर सेवन सँ मना केने छलाह।' जादूगर के। वेश्या के मजदूरी के तात्पर्य छै व्यभिचार के कमाई स महिला के प्राप्त धन। जादूगरक मजदूरी घूस होइत छैक जे हुनका लोकनिक सेवाक लेल देल जाइत छैक |'

Hadith

Imam Malik : 1174

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍوَرَجُلٌ يَسْأَلُهُ عَنْ رَجُلٍ سَلَّفَ فِي سَبَائِبَ فَأَرَادَ بَيْعَهَا قَبْلَ أَنْ يَقْبِضَهَا فَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ تِلْكَ الْوَرِقُ بِالْوَرِقِ وَكَرِهَ ذَلِكَقَالَ مَالِك وَذَلِكَ فِيمَا نُرَى وَاللَّهُ أَعْلَمُ أَنَّهُ أَرَادَ أَنْ يَبِيعَهَا مِنْ صَاحِبِهَا الَّذِي اشْتَرَاهَا مِنْهُ بِأَكْثَرَ مِنْ الثَّمَنِ الَّذِي ابْتَاعَهَا بِهِ وَلَوْ أَنَّهُ بَاعَهَا مِنْ غَيْرِ الَّذِي اشْتَرَاهَا مِنْهُ لَمْ يَكُنْ بِذَلِكَ بَأْسٌ

हमरा मालिक सँ [अल कासिम बिन मुहम्मद] सँ [याह्या बिन सईद] सँ याह्या कहि ओ कहलनि; 'हम [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] केँ कियोक संग सुनलहुँ जे हुनका सँ एहन व्यक्तिक विषय मे पूछलनि जे पहिने सँ पाइ द' कपड़ा कीनैत-बेचैत छल।' तखन ओकरा स्वीकार करबासँ पहिने फेर बेच’ चाहैत अछि । इब्न अब्बास कहलनि; ‘ई चानीक बदला चानीक कारोबार जकाँ छल,’ आ इब्न अब्बास एहि तरहक प्रथासँ घृणा करैत छलाह । मालिक बजलाह; 'ई हमरा सभक विचार मे -वल्लाहु अ'लम- अछि, एकर मतलब ई जे ओ एकरा बेचनिहार केँ वापस बेच' चाहैत छथि, जाहि दाम पर ओ कीनने छलाह.' जँ ओ ककरो बेचि दैत अछि - ओहि व्यक्ति केँ नहि, जकरा सँ ओ वस्तु कीनने छल - तखन से ठीक'।

Hadith

Imam Malik : 1175

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي حَازِمِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ بَيْعِ الْغَرَرِ

हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [अबू हजम बिन दिनार] स॑ मलिक स॑ यह्या [सैद बिन मुसैयब] स॑ कहलकै, ‘रसूलुल्लाह शल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ खरीद-बिक्री के मना करी देलकै, जेकरा म॑ धोखाधड़ी के तत्व छै ।

Hadith

Imam Malik : 1176

حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ وَعَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الْمُلَامَسَةِ وَالْمُنَابَذَةِقَالَ مَالِك وَالْمُلَامَسَةُ أَنْ يَلْمِسَ الرَّجُلُ الثَّوْبَ وَلَا يَنْشُرُهُ وَلَا يَتَبَيَّنُ مَا فِيهِ أَوْ يَبْتَاعَهُ لَيْلًا وَلَا يَعْلَمُ مَا فِيهِ وَالْمُنَابَذَةُ أَنْ يَنْبِذَ الرَّجُلُ إِلَى الرَّجُلِ ثَوْبَهُ وَيَنْبِذَ الْآخَرُ إِلَيْهِ ثَوْبَهُ عَلَى غَيْرِ تَأَمُّلٍ مِنْهُمَا وَيَقُولُ كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا هَذَا بِهَذَا فَهَذَا الَّذِي نُهِيَ عَنْهُ مِنْ الْمُلَامَسَةِ وَالْمُنَابَذَةِ

यह्या हमरा [मुहम्मद बिन याह्या बिन हब्बन] स॑ मलिक स॑ आरू [अबू अज़ जिनाद] स॑ [अल अ’राज] स॑ [अबू हुरैरा] स॑ बतैलकै जे कहलकै, ‘अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह (स.अ.व.) न॑ मुलामासा आरू मुनाबजाह के माध्यम स॑ खरीद-बिक्री स॑ मना करी देलकै । मालिक बजलाह; 'मुलामासा तखन होइत अछि जखन व्यक्ति कोनो वस्त्र केँ बिना पसारेने, बिना ओकरा मे की अछि से बुझेने, वा राति मे कीनने स्पर्श करैत अछि, जाहि सँ ओकरा नहि बुझल हो जे ओ की अछि।' जखन कि मुनाबजह तखन होइत अछि जखन कोनो व्यक्ति अपन वस्त्र दोसर व्यक्ति पर फेकि दैत अछि, आ दोसर व्यक्ति ओकरा पर बिना कोनो विचार केने दुनू मे सँ कोनो व्यक्ति सँ अपन वस्त्र फेकि दैत अछि, आ दुनू मे सँ प्रत्येक कहैत अछि: 'ई एहि लेल बिकाइत अछि।' एहि तरहें मुलामासा आ मुनाबजाह वर्जित अछि।'

Hadith

Imam Malik : 1177

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمُتَبَايِعَانِ كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا بِالْخِيَارِ عَلَى صَاحِبِهِ مَا لَمْ يَتَفَرَّقَا إِلَّا بَيْعَ الْخِيَارِقَالَ مَالِك وَلَيْسَ لِهَذَا عِنْدَنَا حَدٌّ مَعْرُوفٌ وَلَا أَمْرٌ مَعْمُولٌ بِهِ فِيهِ

यह्या हमरा [अब्दुल्लाह बिन उमर] स॑ मालिक स॑ [नाफी’] स॑ बतैलकै कि अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) न॑ कहलकै कि ‘बिक्री आरू खरीद के लेन-देन म॑ प्रवेश करै वाला दू व्यक्ति क॑ चुनै के अधिकार छै जब॑ तलक कि वू अलग नै होय छै, सिवाय पसंद स॑ जुड़लऽ लेनदेन के ।’ मालिक कहलनि जे, हमरा सब के नहि लगैत अछि जे एहि मे कोनो खास प्रतिबंध या अपवाद अछि।'

Hadith

Imam Malik : 1178

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ بُسْرِ بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عُبَيْدٍ أَبِي صَالِحٍ مَوْلَى السَّفَّاحِ أَنَّهُ قَالَبِعْتُ بَزًّا لِي مِنْ أَهْلِ دَارِ نَخْلَةَ إِلَى أَجَلٍ ثُمَّ أَرَدْتُ الْخُرُوجَ إِلَى الْكُوفَةِ فَعَرَضُوا عَلَيَّ أَنْ أَضَعَ عَنْهُمْ بَعْضَ الثَّمَنِ وَيَنْقُدُونِي فَسَأَلْتُ عَنْ ذَلِكَ زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍ فَقَالَ لَا آمُرُكَ أَنْ تَأْكُلَ هَذَا وَلَا تُوكِلَهُ

हमरा मलिक सँ याह्या [अबू अज़ जिनाद] सँ [बुसर बिन सईद] सँ [उबैद अबू शालिह] सँ अस सफ्फा के पूर्व गुलाम, ओ कहलनि; 'हम अपन माल समय पर दार नखलाह के निवासी के बेचैत छी।' तखन हमरा कुफा जेबाक इच्छा भेल, मुदा ओ सब हमरा कहलक जे जा धरि नगद पाइ नहि द सकैत छी ता धरि दाम कम करू। अस्तु हम [जैद बिन थाबीत] स एहि बारे मे पूछलहुं। ओ उत्तर देलथिन; "हम अहाँ केँ नहि कहलहुँ जे खजाना खाउ आ ओहि सँ भोजन नहि करू।"

Hadith

Imam Malik : 1179

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عُثْمَانَ بْنِ حَفْصِ بْنِ خَلْدَةَ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّهُ سُئِلَ عَنْ الرَّجُلِ يَكُونُ لَهُ الدَّيْنُ عَلَى الرَّجُلِ إِلَى أَجَلٍ فَيَضَعُ عَنْهُ صَاحِبُ الْحَقِّ وَيُعَجِّلُهُ الْآخَرُ فَكَرِهَ ذَلِكَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ وَنَهَى عَنْهُ

हमरा [उस्मान बिन हफस बिन खलदाह] स मालिक स [इब्न शिहाब] स [सलीम इब्न अब्दुल्लाह] स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स रिवायत अछि जे एक बेर हुनका स एकटा एहन आदमी क बारे मे पूछल गेल छल जे एकटा एहन आदमी क बारे मे पूछल गेल छल जे एकटा निश्चित अवधि पर दोसर आदमी पर कर्ज क बकाया छल। तखन अधिकारधारी कम क देलक आ दोसर पक्ष तुरंत भुगतान करय लेल कहलक। अब्दुल्ला बिन उमर के ई बात नापसंद छलनि आ ओ मना क देलनि।'

Hadith

Imam Malik : 1180

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ أَنَّهُ قَالَكَانَ الرِّبَا فِي الْجَاهِلِيَّةِ أَنْ يَكُونَ لِلرَّجُلِ عَلَى الرَّجُلِ الْحَقُّ إِلَى أَجَلٍ فَإِذَا حَلَّ الْأَجَلُ قَالَ أَتَقْضِي أَمْ تُرْبِي فَإِنْ قَضَى أَخَذَ وَإِلَّا زَادَهُ فِي حَقِّهِ وَأَخَّرَ عَنْهُ فِي الْأَجَلِ

मलिक हमरा [जैद बिन असलम] स कहलनि जे ओ कहलनि; 'रिबा जहिलियह कियो दोसर व्यक्ति के एकटा निश्चित समय के लेल लोन देबय वाला अछि.' तखन जखन समय भेल तऽ ओ कहलनि; 'अहाँ आब पाइ देबय चाहैत छी आकि ब्याज देबय चाहैत छी? ' तखन जँ पाइ द' दैत छल तखन ल' लैत छल । मुदा जँ से नै तँ कर्ज बढ़ि जेतै आ बादमे ओ भुगतान समाप्त कऽ लेताह'।