Imam Malik : 1121
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَبَاعَ غُلَامًا لَهُ بِثَمَانِ مِائَةِ دِرْهَمٍ وَبَاعَهُ بِالْبَرَاءَةِ فَقَالَ الَّذِي ابْتَاعَهُ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ بِالْغُلَامِ دَاءٌ لَمْ تُسَمِّهِ لِي فَاخْتَصَمَا إِلَى عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ فَقَالَ الرَّجُلُ بَاعَنِي عَبْدًا وَبِهِ دَاءٌ لَمْ يُسَمِّهِ وَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بِعْتُهُ بِالْبَرَاءَةِ فَقَضَى عُثْمَانُ بْنُ عَفَّانَ عَلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنْ يَحْلِفَ لَهُ لَقَدْ بَاعَهُ الْعَبْدَ وَمَا بِهِ دَاءٌ يَعْلَمُهُ فَأَبَى عَبْدُ اللَّهِ أَنْ يَحْلِفَ وَارْتَجَعَ الْعَبْدَ فَصَحَّ عِنْدَهُ فَبَاعَهُ عَبْدُ اللَّهِ بَعْدَ ذَلِكَ بِأَلْفٍ وَخَمْسِ مِائَةِ دِرْهَمٍ
याह्या हमरा सलीम बिन अब्दुल्लाह स याह्या बिन सईद स मालिक स कहलथि जे अब्दुल्ला बिन उमर अपन दास लड़का कए आठ सौ दिरहम मे बेच देलथि। बिना कोनो दोष के बेचि देलखिन। हुनकासँ दास कीननिहार बजलाह - काल्हि अहाँ जे दास बेचने रही ताहिमे कोनो दोष छल आ अहाँ हमरा ई बात नहि कहलहुँ । तेँ दुनू गोटे एहि मामला केँ खलीफा उस्मान बिन अफान लग पहुँचा देलनि | खरीदनिहार कहलक जे ओ हमरा एकटा गुलाम बेचि देलक, मुदा ओकर एकटा एहन दोष छलैक जे ओ हमरा नहि कहलक।' अब्दुल्ला बिन उमर एकर खंडन करैत कहलनि जे, हम हुनका नीक हालत मे आ बिना कोनो दोषक बेचि देलियनि। तखन उस्मान बिन अफ्फान अपन फैसला देलनि; ओ अब्दुल्ला बिन उमर सँ कसम खाय लेल कहलक जे ओ एकटा गुलाम के बिना कोनो दोष के बेचने अछि | मुदा अब्दुल्ला बिन उमर मना क देलखिन आ शपथ नहि खाय लगलाह, ताहि लेल गुलाम हुनका वापस क देल गेल। आ पता चलल जे दास ओकरा संग रहैत ठीक भ गेलै, आ अब्दुल्ला ओकरा बेचि क' एक हजार पाँच सय दिरहम मे बेचि देलकैक।
Imam Malik : 1122
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّ عُبَيْدَ اللَّهِ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ مَسْعَودٍابْتَاعَ جَارِيَةً مِنْ امْرَأَتِهِ زَيْنَبَ الثَّقَفِيَّةِ وَاشْتَرَطَتْ عَلَيْهِ أَنَّكَ إِنْ بِعْتَهَا فَهِيَ لِي بِالثَّمَنِ الَّذِي تَبِيعُهَا بِهِ فَسَأَلَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْعُودٍ عَنْ ذَلِكَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ لَا تَقْرَبْهَا وَفِيهَا شَرْطٌ لِأَحَدٍ
याह्या हमरा उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद स इब्न शिहाब स मालिक स बतेलथि, जे हुनका सूचित केलथि जे अब्दुल्लाह बिन मसूद अपन पत्नी जैनब अत-थकाफिया स एकटा गुलाम कीनने छथि। पत्नी हुनका लेल शर्त लगा देने छलीह जे जँ हुनका वापस बेचि देबनि तँ हुनका कीनबाक अधिकार मात्र पत्नीकेँ हेतनि , आ ओही दाम पर । तखन इब्न मसूद उमर बिन खट्टाब स एहि बारे मे पूछलथि, त उमर जवाब देलथि, 'जखन तक ओ ककरो हालत स बान्हल रहत ता धरि दासी क पास नहि जाउ।'
Imam Malik : 1123
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُلَا يَطَأُ الرَّجُلُ وَلِيدَةً إِلَّا وَلِيدَةً إِنْ شَاءَ بَاعَهَا وَإِنْ شَاءَ وَهَبَهَا وَإِنْ شَاءَ أَمْسَكَهَا وَإِنْ شَاءَ صَنَعَ بِهَا مَا شَاءَ
हमरा मालिक स [नाफी'] स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स कहलक अछि ओ कहलक; 'कोनो पुरुष स्त्री दास के साथ यौन संबंध नै करऽ, सिवाय कोनो दास के जे चाहै छी त ओकरा बेचि सकै छी, वा राखि सकै छी, वा दऽ सकै छी, वा कोनो दास जकरा अहाँ अपन मनपसंद क' सकै छी'।
Imam Malik : 1124
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَامِرٍ أَهْدَى لِعُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ جَارِيَةً وَلَهَا زَوْجٌ ابْتَاعَهَا بِالْبَصْرَةِ فَقَالَ عُثْمَانُلَا أَقْرَبُهَا حَتَّى يُفَارِقَهَا زَوْجُهَا فَأَرْضَى ابْنُ عَامِرٍ زَوْجَهَا فَفَارَقَهَا
याह्या हमरा [इब्न शिहाब] स मालिक स कहलथि जे अब्दुल्ला बिन अमीर [उस्मान बिन अफान] कए एकटा महिला गुलाम भेंट केलथि। दासीक पति छल जे बसरा मे रहैत ओकरा कीनि लेने छल । उस्मान तखन कहलनि; 'जा धरि ओकर पति ओकरा तलाक नहि देत ता धरि हम ओकरा लग नहि जायब'। तखन इब्न अमीर अपन पति सँ कहलखिन जे हुनका छोड़ि दियौक, तेँ अंततः हुनकर पति हुनका तलाक दऽ देलनि ।
Imam Malik : 1125
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ أَنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ عَوْفٍابْتَاعَ وَلِيدَةً فَوَجَدَهَا ذَاتَ زَوْجٍ فَرَدَّهَا
हमरा [इब्न शिहाब] स मालिक स [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान बिन औफ] स रिवायत भेल जे [अब्दुररहमान बिन औफ] एक बेर एकटा दासी लड़की कीनने छलाह, आ पता चलल जे हुनकर विवाह पहिने स भ गेल छल। तखन अब्दुररहमान बिन औफ ओकरा वापस क’ देलकैक।
Imam Malik : 1126
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ بَاعَ نَخْلًا قَدْ أُبِّرَتْ فَثَمَرُهَا لِلْبَائِعِ إِلَّا أَنْ يَشْتَرِطَ الْمُبْتَاعُ
याह्या हमरा [अब्दुल्लाह बिन उमर] स [नफी’] स मालिक स कहलथि जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे जे कियो खजूर क गाछ बेचैत अछि, जेकर फल पक गेल अछि, ओ फल बेचनिहार क संपत्ति बनि जाइत अछि, जाबत तक खरीददार कए एकर आवश्यकता नहि होएत।
Imam Malik : 1127
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ بَيْعِ الثِّمَارِ حَتَّى يَبْدُوَ صَلَاحُهَا نَهَى الْبَائِعَ وَالْمُشْتَرِيَ
हमरा कहल गेल अछि जे [इब्न उमर] सँ मलिक सँ [नफी’] सँ याह्या कहलनि जे, अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फल बेचब ताबत धरि मना क’ देलनि जाबत धरि ओ पाकल नहि देखाइत छल। लोक के बेचय आ खरीदय पर सेहो रोक लगा देलखिन्ह'.
Imam Malik : 1128
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ بَيْعِ الثِّمَارِ حَتَّى تُزْهِيَ فَقِيلَ لَهُ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَمَا تُزْهِيَ فَقَالَ حِينَ تَحْمَرُّ وَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرَأَيْتَ إِذَا مَنَعَ اللَّهُ الثَّمَرَةَ فَبِمَ يَأْخُذُ أَحَدُكُمْ مَالَ أَخِيهِ
हमरा मलिक स [हुमैद अथ-थविल] स [अनस बिन मलिक] स रिवायत भेल अछि जे कहने छलाह, 'अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फल बेचबा स मना क देलथि जा धरि ओ पाकल नहि देखाइत छल। तखन हुनका कहल गेलनि जे हे अल्लाह के रसूलुल्लाह हुनकर की विशेषता छनि? ओ उत्तर देलथिन; 'जखन धरि लाल नहि भ' जायत'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आगू कहलनि जे, ‘अहाँ सभक की विचार अछि जँ अल्लाह फल केँ पाकल नहि करितथि, तखन अहाँ मे सँ कियो दोसरक संपत्ति कोन कारण सँ ल’ लेत’।
Imam Malik : 1129
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الرِّجَالِ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَارِثَةَ عَنْ أُمِّهِ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ بَيْعِ الثِّمَارِ حَتَّى تَنْجُوَ مِنْ الْعَاهَةِ
मलिक हमरा [अबू अर रिजाल मुहम्मद बिन अब्दुररहमान बिन हरिस्ताह] स अपन माँ [अमरा बिन अब्दुररहमान] स कहलथि जे ओ कहलथि जे अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क रसूलुल्लाह फल बेचबा स मना केलथि जा धरि ओ कीट स मुक्त नहि भ जाएत।
Imam Malik : 1130
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ خَارِجَةَ بْنِ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍأَنَّهُ كَانَ لَا يَبِيعُ ثِمَارَهُ حَتَّى تَطْلُعَ الثُّرَيَّا
हमरा [अबू अज़ जिनाद] स मालिक स [खरियाह बिन जैद बिन त्साबीत] स [जैद बिन त्साबीत] स कहल गेल अछि जे ओ अपन फल कहियो नहि बेचलथि जा धरि ओहि पर पाकल तारा नहि देखाइत छल।
Imam Malik : 1131
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرْخَصَ لِصَاحِبِ الْعَرِيَّةِ أَنْ يَبِيعَهَا بِخَرْصِهَا
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [नफी’] स॑ मालिक स॑ यह्या [जैद बिन थाबीत] स॑ [अब्दुल्लाह बिन उमर] स॑ कहलकै, ‘रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ फलदार खजूर के गाछ के मालिकऽ क॑ मूल्यांकन करी क॑ बेचै लेली राहत देलकै’ ।
Imam Malik : 1132
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ دَاوُدَ بْنِ الْحُصَيْنِ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ مَوْلَى ابْنِ أَبِي أَحْمَدَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرْخَصَ فِي بَيْعِ الْعَرَايَا بِخَرْصِهَا فِيمَا دُونَ خَمْسَةِ أَوْسُقٍ أَوْ فِي خَمْسَةِ أَوْسُقٍ يَشُكُّ دَاوُدُ قَالَ خَمْسَةِ أَوْسُقٍ أَوْ دُونَ خَمْسَةِ أَوْسُقٍ
एकरा हमरा [दाउद बिन अल हुशैन] स॑ [अबू सुफियान] इब्न अबू अहमद केरऽ गुलाम स॑ मलिक स॑ जोड़लऽ गेलऽ छै, [अबू हुरैराह] स॑ कहलऽ गेलऽ छै, ‘रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम न॑ ‘अरया’ बेचै म॑ राहत देलकै, एकरऽ अनुमान के साथ जब॑ तलक एकरऽ वजन पाँच वसाक या पाँच वसाक स॑ कम छै । दाउद एखनो अनिश्चित छल जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह पाँच वसाक कहलनि वा पाँच वसाक सँ कम।
Imam Malik : 1133
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الرِّجَالِ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أُمِّهِ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّهُ سَمِعَهَا تَقُولُابْتَاعَ رَجُلٌ ثَمَرَ حَائِطٍ فِي زَمَانِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَعَالَجَهُ وَقَامَ فِيهِ حَتَّى تَبَيَّنَ لَهُ النُّقْصَانُ فَسَأَلَ رَبَّ الْحَائِطِ أَنْ يَضَعَ لَهُ أَوْ أَنْ يُقِيلَهُ فَحَلَفَ أَنْ لَا يَفْعَلَ فَذَهَبَتْ أُمُّ الْمُشْتَرِي إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرَتْ ذَلِكَ لَهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَأَلَّى أَنْ لَا يَفْعَلَ خَيْرًا فَسَمِعَ بِذَلِكَ رَبُّ الْحَائِطِ فَأَتَى رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ هُوَ لَهُ
याह्या हमरा अपनऽ माय [अमरा बिन अब्दुररहमान] स॑ मालिक स॑ [अबू अर रिजाल मुहम्मद बिन अब्दुररहमान] स॑ बतैलकै कि हुनी अमराह क॑ ई कहतें सुनलकै कि ‘अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह के समय म॑ एक आदमी एगो फल के बगीचा स॑ फल खरीदी लेलकै । ओ ओकर जाँच केलक आ ओकर जाँच केलक जाबत धरि ओकरा मे कोनो दोषक पता नहि चललैक । तखन ओ बगीचा के मालिक स कहलखिन जे एकरा रद्द करू या दाम कम करू। मालिक तखन कसम खा लेलक जे हम एहन नहि करब। अस्तु, ओहि आदमीक माय अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) लग आबि हुनका सँ एहि बातक शिकायत केलनि। तखन अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहलनि जे, ओ कसम खा लेने छथि जे ओ भलाई नहि करत। बगीचा के मालिक हुनकर बात सुनलनि, तखन तुरंत रसूलुल्लाह (स.अ.व.) लग दौड़ल गेलाह आ कहलनि: 'हम हुनका वापस करय लेल तैयार छी।'
Imam Malik : 1134
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍكَانَ يَبِيعُ ثَمَرَ حَائِطِهِ وَيَسْتَثْنِي مِنْهُ
याह्या हमरा [रबीअह बिन अब्दुररहमान] स मालिक स बतेलथि जे [अल कासिम बिन मुहम्मद] अपन बगीचा क फल बेचैत छलाह, फेर ओहि मे स किछु बाहर क देलथि।
Imam Malik : 1135
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ أَنَّ جَدَّهُ مُحَمَّدَ بْنَ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍبَاعَ ثَمَرَ حَائِطٍ لَهُ يُقَالُ لَهُ الْأَفْرَقُ بِأَرْبَعَةِ آلَافِ دِرْهَمٍ وَاسْتَثْنَى مِنْهُ بِثَمَانِ مِائَةِ دِرْهَمٍ تَمْرًا
हमरा मलिक सँ [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर] सँ ई बात कहल गेल छल जे हुनकर दादा [मुहम्मद बिन अम्र इब्न हज़म] अपन बगीचा मे जे सब फल छल, जकरा अल-अफ्राक कहल जाइत छल, चारि हजार दिरहम मे बेचि देलनि | तखन ओहि मे खजूर बाहर क' देलनि, जे आठ सय दिरहम केर छल.
Imam Malik : 1136
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الرِّجَالِ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَارِثَةَ أَنَّ أُمَّهُ عَمْرَةَ بِنْتَ عَبْدِ الرَّحْمَنِكَانَتْ تَبِيعُ ثِمَارَهَا وَتَسْتَثْنِي مِنْهَا
हमरा मलिक स [अबू अर रिजाल मुहम्मद बिन अब्दुररहमान बिन हरिस्ताह] स कहल गेल छल जे हुनकर मां ['अमरह बिंती अब्दुररहमान] अपन फल कए किछु कए बाहर क कए बेचैत छलीह' ।
Imam Malik : 1137
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ أَنَّهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ التَّمْرُ بِالتَّمْرِ مِثْلًا بِمِثْلٍ فَقِيلَ لَهُ إِنَّ عَامِلَكَ عَلَى خَيْبَرَ يَأْخُذُ الصَّاعَ بِالصَّاعَيْنِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ادْعُوهُ لِي فَدُعِيَ لَهُ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَتَأْخُذُ الصَّاعَ بِالصَّاعَيْنِ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَا يَبِيعُونَنِي الْجَنِيبَ بِالْجَمْعِ صَاعًا بِصَاعٍ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِعْ الْجَمْعَ بِالدَّرَاهِمِ ثُمَّ ابْتَعْ بِالدَّرَاهِمِ جَنِيبًا
याह्या हमरा मलिक स [जैद बिन असलम] स [अथा बिन यासर] स कहलथि जे ओ कहलथि जे अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क रसूलुल्लाह कहलथि जे खजूर क लेल खजूर बेचब एकहि पैमाना मे हेबाक चाही। तखन हुनका कहल गेलनि जे ‘खैबर मे अहाँक मजदूर एक शा’ खजूर दू शा मे बेचैत अछि’? रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन ओहि आदमी सँ कहलनि: 'ओकरा बजाउ! ' त अल्लाह के रसूलुल्लाह मजदूर के फोन केलनि, तखन ओ पूछलखिन: 'की ई सही अछि जे अहाँ एक शा' खजूर दू शा' खजूर में बेचैत छी' | ओ उत्तर देलथिन; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमरा एक शा' मे खजूर के एक शा' नहि बेचताह'?' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन हुनका कहलखिन; 'तखन किछु दिरहम मे खराब खजूर बेचि दियौक, तखन ओहि दिरहम सँ नीक खजूर कीनि लिअ।'
Imam Malik : 1138
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الْمَجِيدِ بْنِ سُهَيْلِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْتَعْمَلَ رَجُلًا عَلَى خَيْبَرَ فَجَاءَهُ بِتَمْرٍ جَنِيبٍ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَكُلُّ تَمْرِ خَيْبَرَ هَكَذَا فَقَالَ لَا وَاللَّهِ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا لَنَأْخُذُ الصَّاعَ مِنْ هَذَا بِالصَّاعَيْنِ وَالصَّاعَيْنِ بِالثَّلَاثَةِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَفْعَلْ بِعْ الْجَمْعَ بِالدَّرَاهِمِ ثُمَّ ابْتَعْ بِالدَّرَاهِمِ جَنِيبًا
हमरा मलिक स [अब्दुल मजीद बिन सुहैल बिन अब्दुररहमान बिन औफ] स [सैद बिन मुसैयब] स [अबू सईद अल खुदरी] स आ [अबू हुरैरा] स कहल गेल अछि जे ‘रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम एकटा कर्मचारी नियुक्त केलथि जेकरा खैबर मे नियुक्त कैल गेल छल, तखन ओ हुनका लग खजूर क स्मारिका अनलथि। ओ पुछलकै; 'की हर खैबर खजूरक स्वाद एहने होइत छैक ?' ओ उत्तर देलनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, न। अल्लाह के कसम हम सब एहि प्रकार के एक शा' खजूर के दोसर प्रकार के दू शा' खजूर के संग बेचैत छलहुं, आ एहि प्रकार के दू शा' खजूर के संग दोसर प्रकार के तीन शा' खजूर के संग बेचैत छलहुं. त रसुलुल्लाह सल्लाह अलैहि वसल्लम कहलखिन: 'एना नहि करू! मुदा दिरहम मे खराब खजूर बेचू, फेर दिरहमक उपयोग नीक खजूर कीनबा मे करू'।
Imam Malik : 1139
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ أَنَّ زَيْدًا أَبَا عَيَّاشٍ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ سَأَلَ سَعْدَ بْنَ أَبِي وَقَّاصٍعَنْ الْبَيْضَاءِ بِالسُّلْتِ فَقَالَ لَهُ سَعْدٌ أَيَّتُهُمَا أَفْضَلُ قَالَ الْبَيْضَاءُ فَنَهَاهُ عَنْ ذَلِكَ وَقَالَ سَعْدٌ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُسْأَلُ عَنْ اشْتِرَاءِ التَّمْرِ بِالرُّطَبِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيَنْقُصُ الرُّطَبُ إِذَا يَبِسَ فَقَالُوا نَعَمْ فَنَهَى عَنْ ذَلِكَ
मलिक हमरा [अब्दुल्लाह बिन यजीद] सं कहलनि जे [जैद अबू अय्यासी] हुनका कहलनि जे एक बेर ओ [सअद बिन अबू वक्काश] सं सुल्तान सं गहूम बेचबाक कानून के बारे में पूछने छलाह - दुनू गहूमक प्रकार थिक - . सअद बिन अबू वक्काश तखन पुछलखिन; 'दुनू के बीच, कोन नीक?' जैद जवाब देलक; 'गहूम'। तेँ ओ मना क देलनि। तखन स'द कहलक; 'हम एक बेर सुनने रही जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रुथब -गीला खजूर- के संग तमर -सूखा खजूर- खरीद-बेचबाक बारे मे पूछने छलाह।' तेँ ओ पुछलथिन; 'खजूर सुखा गेला पर भीजल रहत त' कम होयत?' ओ सभ उत्तर देलथिन; 'हँ'। तेँ ओ मना क देलनि।
Imam Malik : 1140
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الْمُزَابَنَةِ وَالْمُزَابَنَةُ بَيْعُ الثَّمَرِ بِالتَّمْرِ كَيْلًا وَبَيْعُ الْكَرْمِ بِالزَّبِيبِ كَيْلًا
याह्या हमरा [नाफी’] स मालिक स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स कहलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुजबाना क माध्यम स खरीद-बिक्री स मना केलथि; अर्थात माप निर्धारित कए त्सामार - अपक्व खजूर - पाकल खजूर के लेल बेचब, या किशमिश के लेल अंगूर - सूखल अंगूर - माप निर्धारित क के बेचब |