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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 Hadith

Hadith

Imam Malik : 1081

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ سَعْدِ بْنِ إِسْحَقَ بْنِ كَعْبِ بْنِ عُجْرَةَ عَنْ عَمَّتِهِ زَيْنَبَ بِنْتِ كَعْبِ بْنِ عُجْرَةَ أَنَّ الْفُرَيْعَةَ بِنْتَ مَالِكِ بْنِ سِنَانٍ وَهِيَ أُخْتُ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ أَخْبَرَتْهَاأَنَّهَا جَاءَتْ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَسْأَلُهُ أَنْ تَرْجِعَ إِلَى أَهْلِهَا فِي بَنِي خُدْرَةَ فَإِنَّ زَوْجَهَا خَرَجَ فِي طَلَبِ أَعْبُدٍ لَهُ أَبَقُوا حَتَّى إِذَا كَانُوا بِطَرَفِ الْقَدُومِ لَحِقَهُمْ فَقَتَلُوهُ قَالَتْ فَسَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ أَرْجِعَ إِلَى أَهْلِي فِي بَنِي خُدْرَةَ فَإِنَّ زَوْجِي لَمْ يَتْرُكْنِي فِي مَسْكَنٍ يَمْلِكُهُ وَلَا نَفَقَةٍ قَالَتْ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَعَمْ قَالَتْ فَانْصَرَفْتُ حَتَّى إِذَا كُنْتُ فِي الْحُجْرَةِ نَادَانِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ أَمَرَ بِي فَنُودِيتُ لَهُ فَقَالَ كَيْفَ قُلْتِ فَرَدَّدْتُ عَلَيْهِ الْقِصَّةَ الَّتِي ذَكَرْتُ لَهُ مِنْ شَأْنِ زَوْجِي فَقَالَ امْكُثِي فِي بَيْتِكِ حَتَّى يَبْلُغَ الْكِتَابُ أَجَلَهُ قَالَتْ فَاعْتَدَدْتُ فِيهِ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا قَالَتْ فَلَمَّا كَانَ عُثْمَانُ بْنُ عَفَّانَ أَرْسَلَ إِلَيَّ فَسَأَلَنِي عَنْ ذَلِكَ فَأَخْبَرْتُهُ فَاتَّبَعَهُ وَقَضَى بِهِ

याह्या हमरा अपनऽ मौसी [जैनब बिन कब बिन उजरा] स॑ मालिक स॑ [सैद बिन इशाक बिन क’ब बिन उजरा] स॑ बतैलकै कि [फुरैआ बिंत मलिक बिन सिनान] - अबू सईद अल खुदरी केरऽ बहिन - न॑ ओकरा कहलकै कि वू ओकरा पास वापस आबै के अनुमति मँग॑ क॑ रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास ऐलऽ छै बानी खुदरा में पारिवारिक घर। किएक तँ जखन ओकर पति अपन भागल दास सभकेँ ताकए गेल तँ सीमापर पहुँचि ओकरा सभकेँ भेटल तँ दुनू गोटे मिलिकए ओकरा मारि देलक। फुरैआ बिंत मलिक कहलनि जे, हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ अनुमति मंगलहुँ जे बनी खुदरा मे अपन परिवारक घर वापस आबि जाइ, कारण हमर पति हमरा अपन घर मे नहि छोड़लनि आ हमर भरण-पोषण नहि केलनि।' तखन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन : हाँ। हम तखन घुरि गेलहुँ, आ जखन हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) केर कोठली मे छलहुँ तखन हमरा फोन केलनि वा ककरो फोन करय लेल पठौलनि। तखन ओ पुछलखिन: 'पहिने की कहने रही?' हम तखन अपन पतिक विषय मे कथा दोहरौलहुँ, तखन ओ कहलनि: 'जा धरि अहाँ सँ जे अवधि माँगल गेल अछि, ता धरि अपन घर मे रहू'। फुरै'आ बिंत मलिक कहलनि: 'हम इद्दाह अवधि चारि मास दस दिन बितेलहुं'। अस्तु उस्मान बिन अफान के शासनकाल में ओ हमरा सं भेंट करय लेल ककरो पठेलखिन्ह जे एहि बारे में पूछय, तखन हम हुनका सूचित केलहुं, तें उस्मान सेहो ओकर अनुसरण केलनि आ एहि तरहें निर्णय लेलनि'.

Hadith

Imam Malik : 1082

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ حُمَيْدِ بْنِ قَيْسٍ الْمَكِّيِّ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِكَانَ يَرُدُّ الْمُتَوَفَّى عَنْهُنَّ أَزْوَاجُهُنَّ مِنْ الْبَيْدَاءِ يَمْنَعُهُنَّ الْحَجَّ

हमरा मलिक स [हुमैद बिन कैस अल मकी] स [‘अमरू बिन स्यूअइब] स [सईद इब्नुल मुसैयब] स कहल गेल अछि जे [उमर इब्नुल खत्ताब] एक बेर बैदा स महिला कए घर पठा देलथि, जिनकर पति मरि गेल छलाह, ओ हुनका हज करबा स मना केने छलाह।

Hadith

Imam Malik : 1083

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ السَّائِبَ بْنَ خَبَّابٍ تُوُفِّيَ وَإِنَّ امْرَأَتَهُ جَاءَتْ إِلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَفَذَكَرَتْ لَهُ وَفَاةَ زَوْجِهَا وَذَكَرَتْ لَهُ حَرْثًا لَهُمْ بِقَنَاةَ وَسَأَلَتْهُ هَلْ يَصْلُحُ لَهَا أَنْ تَبِيتَ فِيهِ فَنَهَاهَا عَنْ ذَلِكَ فَكَانَتْ تَخْرُجُ مِنْ الْمَدِينَةِ سَحَرًا فَتُصْبِحُ فِي حَرْثِهِمْ فَتَظَلُّ فِيهِ يَوْمَهَا ثُمَّ تَدْخُلُ الْمَدِينَةَ إِذَا أَمْسَتْ فَتَبِيتُ فِي بَيْتِهَا

मलिक हमरा कहलनि जे [याह्या बिन सईद] केँ खबरि भेटलनि जे अस स`इब बिन खब्बाबक मृत्यु भ’ गेलनि। तखन हुनकर पत्नी [अब्दुल्ला बिन उमर] सँ भेंट केलनि आ कहलनि जे हुनकर पति मरि गेल छथि, आ इहो कहलनि जे हुनकर परिवारक एकटा जमीन पर एकटा गाछी छनि | तखन बजलाह - की ओ ओहि जमीन पर राति बिता सकैत छथि ? इब्न उमर सेहो एकरा पर रोक लगा देलनि। अंततः ओ महिला भोर मे मदीना सँ अपन खेत दिस विदा भ' गेलीह, आ पूरा दुपहर ओतहि बिता देलनि, फेर दुपहर मे मदीना घुरि गेलीह जाहि सँ ओ अपनहि घर मे राति बिता सकथि।'

Hadith

Imam Malik : 1084

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَأَنَّهُ كَانَ يَقُولُ فِي الْمَرْأَةِ الْبَدَوِيَّةِ يُتَوَفَّى عَنْهَا زَوْجُهَا إِنَّهَا تَنْتَوِي حَيْثُ انْتَوَى أَهْلُهَاقَالَ مَالِك وَهَذَا الْأَمْرُ عِنْدَنَا

हमरा सब के मलिक स [हिस्यम बिन उर्वाह] स कहल गेल अछि जे ओ एकटा बेदुइन महिला के बारे में कहने छलाह जिनकर पति मरि गेल छलाह, 'ओ अपन परिवार के पाछू घुमि सकैत छथि'। मालिक बजलाह; 'हम सभ ओहि रायक प्रयोग करैत छी'।

Hadith

Imam Malik : 1085

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُلَا تَبِيتُ الْمُتَوَفَّى عَنْهَا زَوْجُهَا وَلَا الْمَبْتُوتَةُ إِلَّا فِي بَيْتِهَا

हमरा मालिक स [नाफी'] स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स कहलक अछि ओ कहलक; "जे महिला के पति के मौत भ गेलै आरू जे महिला के तलाक के माध्यम स॑ तलाक होय गेलऽ छै, वू अपनऽ घर छोड़ी क॑ रात भर नै रह॑ सकै छै."

Hadith

Imam Malik : 1086

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ يَقُولُإِنَّ يَزِيدَ بْنَ عَبْدِ الْمَلِكِ فَرَّقَ بَيْنَ رِجَالٍ وَبَيْنَ نِسَائِهِمْ وَكُنَّ أُمَّهَاتِ أَوْلَادِ رِجَالٍ هَلَكُوا فَتَزَوَّجُوهُنَّ بَعْدَ حَيْضَةٍ أَوْ حَيْضَتَيْنِ فَفَرَّقَ بَيْنَهُمْ حَتَّى يَعْتَدِدْنَ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا فَقَالَ الْقَاسِمُ بْنُ مُحَمَّدٍ سُبْحَانَ اللَّهِ يَقُولُ اللَّهُ فِي كِتَابِهِ{ وَالَّذِينَ يُتَوَفَّوْنَ مِنْكُمْ وَيَذَرُونَ أَزْوَاجًا }مَا هُنَّ مِنْ الْأَزْوَاجِ

हमरा [याह्या बिन सईद] स मालिक स याह्या क बारे मे कहला क बाद ओ कहलथि; हम सुनलहुँ [अल कासिम बिन मुहम्मद] कहैत छथि; 'एक बेर यजीद बिन अब्दुल मलिक पति के पत्नी स अलग क देलखिन।' ई महिला सब ओहि बच्चा के माय छलीह जिनकर पिता मरि गेल छलाह, आ ओ सब एहि महिला सब के विवाह तखन केने छलीह जखन हुनका सब के एखन एक-दू मासिक धर्म भेल छलनि। तखन यजीद हुनका सभकेँ ताबत धरि अलग क’ देलनि जाबत धरि महिला सभक ‘चारि मास दस दिनक इद्दाह अवधि’ नहि भ’ गेल छलनि | अल कासिम बिन मुहम्मद कहलनि; 'सुभानल्लाह, अल्लाह अपन किताब मे कहैत छथि: 'जे अहाँ सभक बीच पत्नी केँ छोड़ि क' मरि जाइत छथि - ओ पत्नी सभ...'. -प्रश्न। अल बकरा : 234- भले ही पहिने हुनका लोकनिक पति नहि छलनि?'

Hadith

Imam Malik : 1087

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَعِدَّةُ أُمِّ الْوَلَدِ إِذَا تُوُفِّيَ عَنْهَا سَيِّدُهَا حَيْضَةٌ

हमरा [नाफी'] स मालिक [अब्दुल्लाह बिन उमर] स कहने छल ओ कहलक; 'उम्मूल वलाद इद्दाह जँ ओकर मालिक ओकरा मृत बुझि छोड़ि दैत छैक त' एक मासिक धर्म होइत छैक' ।

Hadith

Imam Malik : 1088

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُعِدَّةُ أُمِّ الْوَلَدِ إِذَا تُوُفِّيَ عَنْهَا سَيِّدُهَا حَيْضَةٌقَالَ مَالِك وَهُوَ الْأَمْرُ عِنْدَنَا قَالَ مَالِك وَإِنْ لَمْ تَكُنْ مِمَّنْ تَحِيضُ فَعِدَّتُهَا ثَلَاثَةُ أَشْهُرٍ

हमरा मलिक स [याह्या बिन सईद] स [अल कासिम बिन मुहम्मद] स कहलक अछि ओ कहलक; 'उम्मूल वलाद केरऽ इद्दाह अगर ओकरऽ मालिक ओकरा मरै लेली छोड़ी दै छै त॑ एक मासिक धर्म होय छै' । मालिक बजलाह; 'हमरा सभक विचार एतबे अछि'। मालिक आगू बजलाह, 'जँ आब मासिक धर्म नहि -मोनोपॉज- तखन ओकर इद्दाह तीन मासक अछि'।

Hadith

Imam Malik : 1089

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ وَسُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍكَانَا يَقُولَانِ عِدَّةُ الْأَمَةِ إِذَا هَلَكَ عَنْهَا زَوْجُهَا شَهْرَانِ وَخَمْسُ لَيَالٍو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ مِثْلَ ذَلِكَ

यह्या हमरा मलिक स॑ कहलकै कि हुनका लग ई बात आबी गेलऽ छै कि [सैद इब्नुल मुसैयब] आरू [सुलेमान बिन यासर] न॑ कहलकै, ‘एक महिला दास केरऽ इद्दाह केरऽ अवधि जेकरऽ पति केरऽ मौत होय गेलऽ छै, वू दू महीना आरू पांच दिन छै’ । हमरा इब्न शिहाब स मालिक स एहि हदीस के तरह कहल गेल अछि'।

Hadith

Imam Malik : 1090

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ عَنْ ابْنِ مُحَيْرِيزٍ أَنَّهُ قَالَدَخَلْتُ الْمَسْجِدَ فَرَأَيْتُ أَبَا سَعِيدٍ الْخُدْرِيَّ فَجَلَسْتُ إِلَيْهِ فَسَأَلْتُهُ عَنْ الْعَزْلِ فَقَالَ أَبُو سَعِيدٍ الْخُدْرِيُّ خَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي غَزْوَةِ بَنِي الْمُصْطَلِقِ فَأَصَبْنَا سَبْيًا مِنْ سَبْيِ الْعَرَبِ فَاشْتَهَيْنَا النِّسَاءَ وَاشْتَدَّتْ عَلَيْنَا الْعُزْبَةُ وَأَحْبَبْنَا الْفِدَاءَ فَأَرَدْنَا أَنْ نَعْزِلَ فَقُلْنَا نَعْزِلُ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَ أَظْهُرِنَا قَبْلَ أَنْ نَسْأَلَهُ فَسَأَلْنَاهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ مَا عَلَيْكُمْ أَنْ لَا تَفْعَلُوا مَا مِنْ نَسَمَةٍ كَائِنَةٍ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ إِلَّا وَهِيَ كَائِنَةٌ

हमरा [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] सँ मालिक सँ याह्या [मुहम्मद बिन याह्या बिन हब्बन] सँ [इब्नु मुहैरिज] सँ कहला; 'एक दिन हम मस्जिद मे प्रवेश केलहुं त अबू सैद अल खुदरी के देखलियैक।' हम तखन हुनका संग बैसि गेलहुँ आ 'अजल'क विषय मे पुछलियनि। [अबू सईद अल खुदरी] तखन जवाब देलनि; 'हम एक बेर बनी मुस्तलिक युद्ध के दौरान नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग बाहर निकलल छलहुं. तखन हमरा लोकनि केँ कैदी -बच्चा आ स्त्री- अरब भेटल, तखन एहि महिला सभक प्रति लालसा भेल, आ ताबत धरि हमर सभक इच्छा ताबत धरि प्रबल भ' गेल जाबत धरि हम सभ ओकरा सभ केँ फिरौती -कीनय- नहि चाहैत छलहुँ। तखन हम सब अजल के योजना बनेलौं, फेर कहलौं जे की हम सब पूछय स पहिने अजल करब, जखन कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा सब के बीच छथि? तखन हम सभ हुनकासँ एहि विषयमे पुछलियनि। ओ कहलनि: 'अहाँ किएक नहि करैत छी, कोनो आत्माक नियति नहि अछि जे जा धरि ओ कयामतक दिन धरि नहि जीबैत रहत'।

Hadith

Imam Malik : 1091

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي النَّضْرِ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ عَامِرِ بْنِ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ كَانَ يَعْزِلُ

हमरा मलिक स [अबू नडलर] पूर्व गुलाम उमर बिन उबैदुल्लाह स, [अमीर बिन सअद बिन अबू वक्काश] स [अपन पिता] स कहल गेल अछि जे ओ एक बेर ‘अजल’ केने छलाह।

Hadith

Imam Malik : 1092

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي النَّضْرِ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ ابْنِ أَفْلَحَ مَوْلَى أَبِي أَيُّوبَ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ أُمِّ وَلَدٍ لِأَبِي أَيُّوبَ الْأَنْصَارِيِّأَنَّهُ كَانَ يَعْزِلُ

हमरा उमर बिन उबैदुल्लाह केरऽ गुलाम [अबू नदलर] स॑, अबू अय्यूब अल अंसारी केरऽ पूर्व गुलाम [इब्नु अफलाह] स॑, [अबू अय्यूब अल अंशरी] केरऽ [उम्मू वालाद] स॑ कहलऽ गेलऽ छै कि एक बार वू अज़ल करलकै ।

Hadith

Imam Malik : 1093

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّهُ كَانَ لَا يَعْزِلُ وَكَانَ يَكْرَهُ الْعَزْلَ

हमरा [नाफी’] स मालिक स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स रिवायत भेल जे ओ अजल नहि केलथि आ ओकरा एहि स घृणा छल।

Hadith

Imam Malik : 1094

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ضَمْرَةَ بْنِ سَعِيدٍ الْمَازِنِيِّ عَنْ الْحَجَّاجِ بْنِ عَمْرِو بْنِ غَزِيَّةَ أَنَّهُ كَانَ جَالِسًا عِنْدَ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍفَجَاءَهُ ابْنُ قَهْدٍ رَجُلٌ مِنْ أَهْلِ الْيَمَنِ فَقَالَ يَا أَبَا سَعِيدٍ إِنَّ عِنْدِي جَوَارِيَ لِي لَيْسَ نِسَائِي اللَّاتِي أُكِنُّ بِأَعْجَبَ إِلَيَّ مِنْهُنَّ وَلَيْسَ كُلُّهُنَّ يُعْجِبُنِي أَنْ تَحْمِلَ مِنِّي أَفَأَعْزِلُ فَقَالَ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ أَفْتِهِ يَا حَجَّاجُ قَالَ فَقُلْتُ يَغْفِرُ اللَّهُ لَكَ إِنَّمَا نَجْلِسُ عِنْدَكَ لِنَتَعَلَّمَ مِنْكَ قَالَ أَفْتِهِ قَالَ فَقُلْتُ هُوَ حَرْثُكَ إِنْ شِئْتَ سَقَيْتَهُ وَإِنْ شِئْتَ أَعْطَشْتَهُ قَالَ وَكُنْتُ أَسْمَعُ ذَلِكَ مِنْ زَيْدٍ فَقَالَ زَيْدٌ صَدَقَ

मलिक हमरा [द्लामरह बिन सईद अल मज़िनी] स [अल हज्जाज बिन अमरू बिन गज़ियाह] स कहलथि जे ओ एक बेर [जैद बिन थाबीत] क बगल मे बैसल छलाह। तखन यमनक इब्न कहद एकटा आदमी हुनका लग आबि कहलनि जे हे अबू सईद हमरा लग कतेको महिला गुलाम अछि । आ हमर पत्नी सभ हुनका सभसँ बेसी आकर्षक नहि छथि , मुदा सभटा एहन नहि छथि जिनका हम हमरासँ गर्भवती करए चाहैत छी । त की हम 'अजल' क' सकैत छी? जैद बिन थाबीत तखन कहलनि; 'हे हज्जाज, ओकरा फतवा दियौक! ' अल हज्जाज बिन 'अमरू कहलनि; 'हम तखन कहलियनि, 'अल्लाह अहाँ केँ माफ करथि।' असल मे हम सब एतय अहाँ स सीखबाक अलावा नहि बैसैत छी'। जैद बिन थाबीत फेर कहलनि; 'ओकरा फतवा द' दियौक! ' अल हज्जाज बिन 'अमरू कहलनि; 'त' हम कहलियनि, 'से त' अहाँक खेत अछि।' चाहै छी तऽ पानि दऽ सकै छी आ चाहै छी तऽ बंजर छोड़ि सकै छी।' अल हज्जाज आगू बजलाह, 'हम जैद सँ सुनलहुँ।' जैद जबाब देलकै, 'ओ ठीके कहै छै।'

Hadith

Imam Malik : 1095

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ حُمَيْدِ بْنِ قَيْسٍ الْمَكِّيِّ عَنْ رَجُلٍ يُقَالُ لَهُ ذَفِيفٌ أَنَّهُ قَالَ سُئِلَ ابْنُ عَبَّاسٍعَنْ الْعَزْلِ فَدَعَا جَارِيَةً لَهُ فَقَالَ أَخْبِرِيهِمْ فَكَأَنَّهَا اسْتَحْيَتْ فَقَالَ هُوَ ذَلِكَ أَمَّا أَنَا فَأَفْعَلُهُ يَعْنِي أَنَّهُ يَعْزِلُ

हमरा मलिक सं [हुमैद बिन कैस अल मक्की] सं कहने छल जे [जफीफ] नामक कियो सं कहलक; ' [इब्न अब्बास] स एक बेर अजल के बारे में पूछल गेल छल, तखन ओ अपन एकटा महिला दास के बजा क कहलखिन; 'ओकरा सभकेँ कहि दियौक'। -महिला दास लज्जित बुझाइत छलीह- इब्नू अब्बास तखन कहलनि; 'ठीक छै, हमहूँ करैत छी'। अर्थात इब्न अब्बास सेहो अज़ल केलनि।

Hadith

Imam Malik : 1096

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ نَافِعٍ عَنْ زَيْنَبَ بِنْتِ أَبِي سَلَمَةَ أَنَّهَا أَخْبَرَتْهُ بِهَذِهِ الْأَحَادِيثِ الثَّلَاثَةِ قَالَتْ زَيْنَبُدَخَلْتُ عَلَى أُمِّ حَبِيبَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ تُوُفِّيَ أَبُوهَا أَبُو سُفْيَانَ بْنُ حَرْبٍ فَدَعَتْ أُمُّ حَبِيبَةَ بِطِيبٍ فِيهِ صُفْرَةٌ خَلُوقٌ أَوْ غَيْرُهُ فَدَهَنَتْ بِهِ جَارِيَةً ثُمَّ مَسَحَتْ بِعَارِضَيْهَا ثُمَّ قَالَتْ وَاللَّهِ مَا لِي بِالطِّيبِ مِنْ حَاجَةٍ غَيْرَ أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَحِلُّ لِامْرَأَةٍ تُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ أَنْ تُحِدَّ عَلَى مَيْتٍ فَوْقَ ثَلَاثِ لَيَالٍ إِلَّا عَلَى زَوْجٍ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا

हमरा मालिक स याह्या स [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर बिन मुहम्मद बिन 'अमरू बिन हज़म] स [हुमैद बिन नाफी'] स [जैनब बिन अबू सलामाह] स कहलक अछि जे ओ हुनका इ तीनू हदीस के प्रचार केलथि, जैनब कहलनि; 'हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी उम्म हबीबा के दौरा केलौं जखन हुनकर पिता अबू सुफियान बिन हरब के मौत भ गेल छल। [उम्म हबीबाह] तखन कनेक पीयर रंगक इत्र मंगलक, फेर ओकरा अपन एकटा महिला दास पर लेपलक, तकर बाद ओ ओकरा अपन दुनू गाल पर रगड़ि क' बजलीह; 'अल्लाह केरऽ कसम हमरा ई इत्र केरऽ जरूरत नै छै, लेकिन एक बार हम्में अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) केरऽ कहना सुनने छेलियै कि 'जे महिला अल्लाह आरू आखिरी दिन पर विश्वास करै छै, ओकरा अपनऽ पति के छोड़ी क॑ तीन दिन स॑ अधिक व्यक्ति केरऽ मौत के शोक नै करै के चाही, जे चारि महीना दस दिन छै'' ।

Hadith

Imam Malik : 1097

قَالَتْ زَيْنَبُ ثُمَّ دَخَلْتُ عَلَى زَيْنَبَ بِنْتِ جَحْشٍ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَحِينَ تُوُفِّيَ أَخُوهَا فَدَعَتْ بِطِيبٍ فَمَسَّتْ مِنْهُ ثُمَّ قَالَتْ وَاللَّهِ مَا لِي بِالطِّيبِ حَاجَةٌ غَيْرَ أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَحِلُّ لِامْرَأَةٍ تُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ تُحِدُّ عَلَى مَيْتٍ فَوْقَ ثَلَاثِ لَيَالٍ إِلَّا عَلَى زَوْجٍ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا

-एखनो ओहि संचरण रेखा सँ जेना पिछला हदीस-, [जैनब] कहलनि; 'हम [जैनब बिन जहसी] नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी के पास गेल छलहुं जखन हुनकर भाई के मौत भ गेल छल. ओ इत्र मँगली, फेर ओकरा अपन शरीर पर रगड़ैत बजलीह, 'अल्लाह केर कसम, हमरा एहि इत्र केर आवश्यकता नहि अछि, मुदा हम एक बेर अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ कहैत सुनने रही जे: 'अल्लाह आ अंतिम दिन पर विश्वास करय वाली महिला लेल ई हलाल नहि अछि जे ओ अपन पति केँ छोड़ि ककरो मृत्यु पर तीन दिन सँ बेसी शोक करब, अर्थात चारि मास दस दिन धरि''।

Hadith

Imam Malik : 1098

قَالَتْ زَيْنَبُ وَسَمِعْتُ أُمِّي أُمَّ سَلَمَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَقُولُجَاءَتْ امْرَأَةٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ ابْنَتِي تُوُفِّيَ عَنْهَا زَوْجُهَا وَقَدْ اشْتَكَتْ عَيْنَيْهَا أَفَتَكْحُلُهُمَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا مَرَّتَيْنِ أَوْ ثَلَاثًا كُلُّ ذَلِكَ يَقُولُ لَا ثُمَّ قَالَ إِنَّمَا هِيَ{ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا }وَقَدْ كَانَتْ إِحْدَاكُنَّ فِي الْجَاهِلِيَّةِ تَرْمِي بِالْبَعْرَةِ عَلَى رَأْسِ الْحَوْلِقَالَ حُمَيْدُ بْنُ نَافِعٍ فَقُلْتُ لِزَيْنَبَ وَمَا تَرْمِي بِالْبَعْرَةِ عَلَى رَأْسِ الْحَوْلِ فَقَالَتْ زَيْنَبُ كَانَتْ الْمَرْأَةُ إِذَا تُوُفِّيَ عَنْهَا زَوْجُهَا دَخَلَتْ حِفْشًا وَلَبِسَتْ شَرَّ ثِيَابِهَا وَلَمْ تَمَسَّ طِيبًا وَلَا شَيْئًا حَتَّى تَمُرَّ بِهَا سَنَةٌ ثُمَّ تُؤْتَى بِدَابَّةٍ حِمَارٍ أَوْ شَاةٍ أَوْ طَيْرٍ فَتَفْتَضُّ بِهِ فَقَلَّمَا تَفْتَضُّ بِشَيْءٍ إِلَّا مَاتَ ثُمَّ تَخْرُجُ فَتُعْطَى بَعْرَةً فَتَرْمِي بِهَا ثُمَّ تُرَاجِعُ بَعْدُ مَا شَاءَتْ مِنْ طِيبٍ أَوْ غَيْرِهِ قَالَ مَالِك وَالْحِفْشُ الْبَيْتُ الرَّدِيءُ وَتَفْتَضُّ تَمْسَحُ بِهِ جِلْدَهَا كَالنُّشْرَةِ

-एखनो ओहि संचरण रेखा सँ जेना पिछला हदीस-, [जैनब] कहलनि; ' [उम सलामाह], नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी कहलखिन, 'एकटा महिला छलीह जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आबि पुछलखिन: 'हे रसुलुल्लाह, हमर बेटी के पति मरि गेलाह आ हुनकर आँखि दर्द भ गेलनि - कारण ओ एतेक कानने छलाह -, की ओ आईलाइनर पहिर सकैत छथि? ' रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलनि : 'नहि करू,' -दू-तीन बेर-, आ हर बेर जखन हुनका सँ पूछल गेल त' ओ जवाब देलनि: 'नहि करू'। तखन बजलाह - शोक मात्र चारि मास दस दिनक अछि । सचमुच जहिलियाक जमाना मे अहाँ सभ मे सँ कियो सालक प्रारंभ मे ऊँटक गोबर फेकैत छलहुँ ।' हुमैद बिन नफी' कहलनि; 'हम तखन जैनब सँ पुछलियनि, 'साल केर शुरुआत मे ऊँटक गोबर फेकब' केर की अर्थ?' जैनब जबाब देलकै; 'पहिने जँ कोनो स्त्री केँ पति छोड़ि देल जाइत छलनि त' ओ कुरूप घर मे जा क' सबसँ खराब कपड़ा पहिरैत छलीह आ एक साल धरि इत्र केँ नहि छूबैत छलीह.' तकर बाद ओकरा लग गदहा, वा बकरी, वा चिड़ै आनल जायत, तखन ओकर त्वचा चिकित्साक रूप मे स्पर्श करत, आ ओ मरबाक अतिरिक्त किछु नहि छूओत। तखन ओ बाहर आबि गेलाह आ हुनका ऊँटक गोबर देल गेलनि, तखन ओ गोबर फेकि देलनि जे प्रतीक्षा अवधिक अंतक संकेत छल | तखन ओ फेर अपन सामान्य जीवन जीबय लगलाह, इत्र आ बाकी सब किछु पहिरने'। मालिक बजलाह; 'अल हिफसी कुरूप छोट सन घर वा रिकेटी झोपड़ी अछि, आ तफतदल्लु आकर्षण जकाँ चमड़ा पोछि रहल अछि' ।

Hadith

Imam Malik : 1099

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ صَفِيَّةَ بِنْتِ أَبِي عُبَيْدٍ عَنْ عَائِشَةَ وَحَفْصَةَ زَوْجَيْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَحِلُّ لِامْرَأَةٍ تُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ أَنْ تُحِدَّ عَلَى مَيْتٍ فَوْقَ ثَلَاثِ لَيَالٍ إِلَّا عَلَى زَوْجٍ

हमरा मलिक स [नफी’] स [शफियाह बिंत अबू उबैद] स [ऐशाह] स आ [हफशाह] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलम क पत्नी स कहल गेल अछि, जे अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क कहब छलथि जे ‘अल्लाह आ अंतिम दिन पर विश्वास करय वाली महिला कए ककरो मौत पर शोक करब जायज नहि अछि तीन दिनसँ बेसी धरि, पतिकेँ छोड़ि'।

Hadith

Imam Malik : 1100

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ صَفِيَّةَ بِنْتَ أَبِي عُبَيْدٍاشْتَكَتْ عَيْنَيْهَا وَهِيَ حَادٌّ عَلَى زَوْجِهَا عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ فَلَمْ تَكْتَحِلْ حَتَّى كَادَتْ عَيْنَاهَا تَرْمَصَانِ

हमरा मलिक स [नफी’] स कहल गेल जे [शफियाह बिंत अबू उबैद] दुनू आँखि मे दर्द स पीड़ित छलीह, जखन कि ओहि समय ओ अपन पति अब्दुल्लाह बिन उमर क मौत क शोक मना रहल छलीह, ताहि लेल ओ आईलाइनर नहि पहिरने छलीह। तेँ ओकर आँखि लगभग गंदगीसँ झाँपि गेल छलैक ।'