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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 Hadith

Hadith

Imam Malik : 1041

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْفَضْلِ عَنْ الْأَعْرَجِ أَنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَوَرَّثَ نِسَاءَ ابْنِ مُكْمِلٍ مِنْهُ وَكَانَ طَلَّقَهُنَّ وَهُوَ مَرِيضٌ

हमरा [अब्दुल्लाह बिन अल फद्दल] स मलिक स [अल अ'राज] स रिवायत भेल जे [उस्मान बिन अफान] इब्न मुकमिल क पूर्व पत्नी क विरासत क अधिकार निर्धारित केलथि, इब्न मुकमिल बीमार रहैत तलाक द देलथि'।

Hadith

Imam Malik : 1042

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَمِعَ رَبِيعَةَ بْنَ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ يَقُولُ بَلَغَنِي أَنَّ امْرَأَةَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍسَأَلَتْهُ أَنْ يُطَلِّقَهَا فَقَالَ إِذَا حِضْتِ ثُمَّ طَهُرْتِ فَآذِنِينِي فَلَمْ تَحِضْ حَتَّى مَرِضَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ فَلَمَّا طَهُرَتْ آذَنَتْهُ فَطَلَّقَهَا الْبَتَّةَ أَوْ تَطْلِيقَةً لَمْ يَكُنْ بَقِيَ لَهُ عَلَيْهَا مِنْ الطَّلَاقِ غَيْرُهَاوَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ يَوْمَئِذٍ مَرِيضٌ فَوَرَّثَهَا عُثْمَانُ بْنُ عَفَّانَ مِنْهُ بَعْدَ انْقِضَاءِ عِدَّتِهَا

मलिक स हमरा स इ बात कहल गेल जे ओ [रबीअह बिन अबू अब्दुरहमान] कए कहैत सुनलथि: हमरा लग पहुंच गेल अछि जे [अब्दुररहमान इब्न औफ क] पत्नी अब्दुररहमान स तलाक देबा लेल कहलथि। अब्दुररहमान इब्न औफ कहलनि: जखन अहाँ मासिक धर्म भ' जायब आ फेर शुद्ध भ' जायब तखन हमरा सूचित करू।' मुदा पत्नीक मासिक धर्म ताबत धरि नहि भेलनि जाबत धरि अब्दुररहमान बिन औफ बीमार नहि पड़ि गेलाह | जखन ओ शुद्ध भ गेलीह आ हुनका सूचित केलनि त अब्दुररहमान हुनका बैइन मे तलाक के संग तलाक द देलखिन, भले ओहि समय अब्दुररहमान इब्न औफ एखनो बीमार छलाह | तखन [उस्मान बिन अफान] हुनकर इद्दाह अवधि समाप्त भेलाक बाद हुनकर विरासत निर्धारित केलनि।'

Hadith

Imam Malik : 1043

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ قَالَكَانَتْ عِنْدَ جَدِّي حَبَّانَ امْرَأَتَانِ هَاشِمِيَّةٌ وَأَنْصَارِيَّةٌ فَطَلَّقَ الْأَنْصَارِيَّةَ وَهِيَ تُرْضِعُ فَمَرَّتْ بِهَا سَنَةٌ ثُمَّ هَلَكَ عَنْهَا وَلَمْ تَحِضْ فَقَالَتْ أَنَا أَرِثُهُ لَمْ أَحِضْ فَاخْتَصَمَتَا إِلَى عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ فَقَضَى لَهَا بِالْمِيرَاثِ فَلَامَتْ الْهَاشِمِيَّةُ عُثْمَانَ فَقَالَ هَذَا عَمَلُ ابْنِ عَمِّكِ هُوَ أَشَارَ عَلَيْنَا بِهَذَا يَعْنِي عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ

हमरा मालिक स [याह्या बिन सईद] स [मुहम्मद बिन याह्या बिन हब्बन] स कहने छल ओ कहलक; 'हमर दादा हब्बन के दू टा पत्नी छलीह, एकटा हाशिमी आ दोसर अंसार के।' ओ अपन पत्नी जे अंसारक छलीह, तखनो तलाक द' देलनि, भले ओ स्तनपान करा रहल छलीह. एक साल बीतला के बाद हब्बन के मौत भ गेलैन आ हुनकर पत्नी के पीरियड्स एकदम नै भेल छलनि। पत्नी बजलीह; 'हमरा हुनकर संपत्ति विरासत मे भेटबाक अधिकार अछि, कारण जहिया स हुनकर तलाक भेल अछि तहिया स हमरा कहियो मासिक धर्म नहि भेल अछि'। दुनू पत्नीक मतभेद भेलनि आ उस्मान बिन अफ्फानसँ शिकायत केलनि । [उस्मान बिन अफ्फान] न॑ ई उत्तराधिकार अंसार महिला सिनी क॑ दै के फैसला करलकै, जब॑ तलक कि बनी हाशिम केरऽ वंशज केरऽ पत्नी न॑ हुनकऽ निंदा नै करी देलकै । उस्मान बिन अफ्फान कहलनि; '[अहाँक काकाक बेटा] सेहो एहने काज केलक, एतेक धरि जे हमरा सभकेँ ई करबाक सुझाव देलक'। हुनकर मतलब छलनि अली बिन अबू तालिब।

Hadith

Imam Malik : 1044

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ شِهَابٍ يَقُولُإِذَا طَلَّقَ الرَّجُلُ امْرَأَتَهُ ثَلَاثًا وَهُوَ مَرِيضٌ فَإِنَّهَا تَرِثُهُقَالَ مَالِك وَإِنْ طَلَّقَهَا وَهُوَ مَرِيضٌ قَبْلَ أَنْ يَدْخُلَ بِهَا فَلَهَا نِصْفُ الصَّدَاقِ وَلَهَا الْمِيرَاثُ وَلَا عِدَّةَ عَلَيْهَا وَإِنْ دَخَلَ بِهَا ثُمَّ طَلَّقَهَا فَلَهَا الْمَهْرُ كُلُّهُ وَالْمِيرَاثُ الْبِكْرُ وَالثَّيِّبُ فِي هَذَا عِنْدَنَا سَوَاءٌ

मालिक सॅं हमरा कहने छलाह जे ओ [इब्न शिहाब] केँ कहैत सुनने छलाह; 'जँ कोनो पुरुष अपन पत्नीक बीमार रहैत तीन बेर तलाक द' दैत अछि त' ओकर पत्नी केँ ओकर उत्तराधिकारक अधिकार छैक'। मालिक बजलाह; 'जँ ओकर पति ओकरा बीमार पड़ला पर तलाक द' दैत छैक, आ ओकरा संग कहियो शारीरिक संबंध नहि भेलैक त' ओकर पत्नी केँ ओकर आधा दहेज भेटबाक हकदार छैक, ओकर उत्तराधिकारक सेहो हकदार छैक, आ ओकरा इद्दाहक अवधि करबाक आवश्यकता नहि छैक।' जँ पति ओकरा संग यौन संबंध केने छथि आ फेर तलाक दऽ दैत छथि तखन पत्नी केँ पूर्ण दहेज भेटबाक अधिकार छनि आ उत्तराधिकारक अधिकार छनि | एहि मामला मे लड़की आ विधवा लेल कानून एके अछि।'

Hadith

Imam Malik : 1045

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُلِكُلِّ مُطَلَّقَةٍ مُتْعَةٌ إِلَّا الَّتِي تُطَلَّقُ وَقَدْ فُرِضَ لَهَا صَدَاقٌ وَلَمْ تُمْسَسْ فَحَسْبُهَا نِصْفُ مَا فُرِضَ لَهَا

हमरा मालिक स [नाफी'] स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स कहलक अछि ओ कहलक; 'तलाकशुदा हर पत्नी के मुतअह के अधिकार छै, सिवाय ओहि महिला के जेकर दहेज तय भ गेल छै आ ओ कहियो अपन पति के संग यौन संबंध नै केने छैथ, तखन ओकरा मात्र आधा दहेज भेटबाक हकदार छै जे ओकरा लेल निर्धारित छै'।

Hadith

Imam Malik : 1046

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ قَالَلِكُلِّ مُطَلَّقَةٍ مُتْعَةٌقَالَ مَالِك وَبَلَغَنِي عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ مِثْلُ ذَلِكَ قَالَ مَالِك لَيْسَ لِلْمُتْعَةِ عِنْدَنَا حَدٌّ مَعْرُوفٌ فِي قَلِيلِهَا وَلَا كَثِيرِهَا

मालिक हमरा बतौलनि जे इब्न शिहाब कहलनि जे, "हर तलाकशुदा पत्नी के मुतअह लेबय के अधिकार छनि." मलिक कहलनि जे, ई खबर हमरा लग अल कासिम बिन मुहम्मद स पहुंच गेल अछि। मलिक कहलकै, "हमरा सब लेल मुतअह के कोनो न्यूनतम या अधिकतम सीमा नै छै।"

Hadith

Imam Malik : 1047

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍأَنَّ نُفَيْعًا مُكَاتَبًا كَانَ لِأُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ عَبْدًا لَهَا كَانَتْ تَحْتَهُ امْرَأَةٌ حُرَّةٌ فَطَلَّقَهَا اثْنَتَيْنِ ثُمَّ أَرَادَ أَنْ يُرَاجِعَهَا فَأَمَرَهُ أَزْوَاجُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَأْتِيَ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ فَيَسْأَلَهُ عَنْ ذَلِكَ فَلَقِيَهُ عِنْدَ الدَّرَجِ آخِذًا بِيَدِ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ فَسَأَلَهُمَا فَابْتَدَرَاهُ جَمِيعًا فَقَالَا حَرُمَتْ عَلَيْكَ حَرُمَتْ عَلَيْكَ

हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [सुलेमान बिन यासर] स॑ मलिक स॑ यह्याया न॑ कहलकै कि ‘नुफाई’ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ पत्नी उम्म सलामा केरऽ अमुकताब या गुलाम छेलै । नुफाई' के स्वतंत्र पत्नी छै, दू बेर तलाक द' देने छै आ ओकरा सं मेल मिलाप करय चाहैत छै. त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी सब हुनका सलाह देलखिन जे उस्मान बिन अफ्फान स भेंट क हुनका स एहि बारे में पूछल जाय। तखन नुफाई' [उस्मान] सँ भेंट केलनि जे ओहि समय मे [जैद बिन थाबीत] के हाथ पकड़ने दार्ज -स्थानक नाम- मे छलाह | तखन ओ दुनू गोटेसँ पुछलनि, दुनू गोटे तखन उत्तर देलनि; 'ओ अहाँक लेल हरम अछि, ओ अहाँक लेल हरम अछि'।

Hadith

Imam Malik : 1048

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ نُفَيْعًا مُكَاتَبًا كَانَ لِأُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ طَلَّقَ امْرَأَةً حُرَّةً تَطْلِيقَتَيْنِ فَاسْتَفْتَى عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ فَقَالَ حَرُمَتْ عَلَيْكَ

हमरा मलिक स [इब्नु शिहाब] स [सईद बिन मुसैयब] स कहल गेल अछि जे ‘नुफाई’ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी उम्म सलामा के अमुकताब छल। पत्नीकेँ दू बेर ठकलक, एकटा मुक्त स्त्री। तखन ओ उस्मान बिन अफ्फान सँ फतवा मँगलनि, आ [उस्मान] जवाब देलनि, 'ओ अहाँक लेल हरम छथि'।

Hadith

Imam Malik : 1049

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ رَبِّهِ بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ الْحَارِثِ التَّيْمِيِّأَنَّ نُفَيْعًا مُكَاتَبًا كَانَ لِأُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْتَفْتَى زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍ فَقَالَ إِنِّي طَلَّقْتُ امْرَأَةً حُرَّةً تَطْلِيقَتَيْنِ فَقَالَ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ حَرُمَتْ عَلَيْكَ

हमरा मलिक स [अब्दु रब्बीह बिन सईद] स [मुहम्मद बिन इब्राहिम बिन अल हरिथ अत-तैमी] स कहल गेल अछि, ‘नुफाई’ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलम के पत्नी उम्म सलामा के अमुकताब छल। ओ जैद बिन थाबीत सँ फतवा मँगलनि, ई कहैत; 'हमर पत्नी स्वतंत्र स्त्री छथि, हम दू बेर तलाक द' देने छी?' [जैद बिन थाबीत] तखन कहलनि; 'ओ अहाँक लेल हरम अछि'।

Hadith

Imam Malik : 1050

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ كَانَ يَقُولُإِذَا طَلَّقَ الْعَبْدُ امْرَأَتَهُ تَطْلِيقَتَيْنِ فَقَدْ حَرُمَتْ عَلَيْهِ حَتَّى تَنْكِحَ زَوْجًا غَيْرَهُ حُرَّةً كَانَتْ أَوْ أَمَةً وَعِدَّةُ الْحُرَّةِ ثَلَاثُ حِيَضٍ وَعِدَّةُ الْأَمَةِ حَيْضَتَانِ

हमरा [नाफी’] स मालिक स कहल गेल अछि जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] कहलनि; 'जँ कोनो दास अपन पत्नीक दू बेर तलाक दैत अछि तँ ओकर पत्नी ओकरा ताबत धरि अशुद्ध भ' जाइत छैक जाबत धरि ओ दोसर पुरुषक विवाह नहि करत, चाहे ओ पत्नी दास हो वा स्वतंत्र स्त्री।' आ मुक्त महिलाक इद्दाह तीन मासिक धर्म होइत छैक, जखन कि महिला दासक इद्दाह दू मासिक धर्म होइत छैक |'

Hadith

Imam Malik : 1051

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ كَانَ يَقُولُمَنْ أَذِنَ لِعَبْدِهِ أَنْ يَنْكِحَ فَالطَّلَاقُ بِيَدِ الْعَبْدِ لَيْسَ بِيَدِ غَيْرِهِ مِنْ طَلَاقِهِ شَيْءٌ فَأَمَّا أَنْ يَأْخُذَ الرَّجُلُ أَمَةَ غُلَامِهِ أَوْ أَمَةَ وَلِيدَتِهِ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِ

हमरा [नाफी’] स मालिक स कहल गेल अछि जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] कहलनि; 'जे अपन दास केँ विवाह करय दैत अछि, तखन तलाकक निर्णय सेहो ओकरे पर निर्भर करैत छैक आ ओकरा पर तलाकक निर्णय करबाक अधिकार दोसर केकरो नहि छैक |' जँ पुरुष अपन बेटा वा बेटीक स्त्री दास लऽ लैत अछि तखन ओकरा पर कोनो पाप नहि छैक' ।

Hadith

Imam Malik : 1052

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَأَيُّمَا امْرَأَةٍ فَقَدَتْ زَوْجَهَا فَلَمْ تَدْرِ أَيْنَ هُوَ فَإِنَّهَا تَنْتَظِرُ أَرْبَعَ سِنِينَ ثُمَّ تَعْتَدُّ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا ثُمَّ تَحِلُّقَالَ مَالِك وَإِنْ تَزَوَّجَتْ بَعْدَ انْقِضَاءِ عِدَّتِهَا فَدَخَلَ بِهَا زَوْجُهَا أَوْ لَمْ يَدْخُلْ بِهَا فَلَا سَبِيلَ لِزَوْجِهَا الْأَوَّلِ إِلَيْهَا قَالَ مَالِك وَذَلِكَ الْأَمْرُ عِنْدَنَا وَإِنْ أَدْرَكَهَا زَوْجُهَا قَبْلَ أَنْ تَتَزَوَّجَ فَهُوَ أَحَقُّ بِهَا قَالَ مَالِك وَأَدْرَكْتُ النَّاسَ يُنْكِرُونَ الَّذِي قَالَ بَعْضُ النَّاسِ عَلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ أَنَّهُ قَالَ يُخَيَّرُ زَوْجُهَا الْأَوَّلُ إِذَا جَاءَ فِي صَدَاقِهَا أَوْ فِي امْرَأَتِهِ قَالَ مَالِك وَبَلَغَنِي أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَ فِي الْمَرْأَةِ يُطَلِّقُهَا زَوْجُهَا وَهُوَ غَائِبٌ عَنْهَا ثُمَّ يُرَاجِعُهَا فَلَا يَبْلُغُهَا رَجْعَتُهُ وَقَدْ بَلَغَهَا طَلَاقُهُ إِيَّاهَا فَتَزَوَّجَتْ أَنَّهُ إِنْ دَخَلَ بِهَا زَوْجُهَا الْآخَرُ أَوْ لَمْ يَدْخُلْ بِهَا فَلَا سَبِيلَ لِزَوْجِهَا الْأَوَّلِ الَّذِي كَانَ طَلَّقَهَا إِلَيْهَا قَالَ مَالِك وَهَذَا أَحَبُّ مَا سَمِعْتُ إِلَيَّ فِي هَذَا وَفِي الْمَفْقُودِ

हमरा मलिक स यह्या [सैद बिन मुसैयब] स [यह्या बिन सईद] स कहल गेल अछि जे [उमर बिन खत्ताब] कहने छथि; 'जे स्त्री पति केँ गमा लेने छथि आ हुनकर ठिकाना नहि जनैत छथि, हुनका चारि साल धरि प्रतीक्षा करथि ।' तखन चारि मास दस दिनक इद्दाह अवधि करू आ तकर बाद दोसर विवाह क' सकैत छी।' मालिक बजलाह; 'जँ इद्दाहक अवधि समाप्त भेलाक बाद विवाह करैत छथि, आ हुनकर दोसर पति हुनका संग सेक्स केने छथि वा नहि केने छथि, तखन पहिल पति केँ हुनका पर कोनो अधिकार नहि छनि।' मालिक आगू बजलाह - एतेक दिन हमरा सभक बीच एहने भेल अछि । मुदा, जँ दोसर विवाह नहि केने पति आबि गेलाह तखन पति के हुनका पर बेसी अधिकार छनि।' मलिक आगू बजलाह, "हमरा एकटा समूह के लोक भेटल जे उमर बिन खट्टाब के प्रति किछु समूह द्वारा व्यक्त विचार के नकारैत छल, जखन ओ कहलनि जे, 'पहिल पति के अपन दहेज लेबय के विकल्प देल गेल छल या पत्नी के पास वापस जेबाक विकल्प देल गेल छल''. मलिक कहलनि; 'उमर बिन खट्टाब के राय सेहो हमरा लग एकटा एहन महिला के संबंध में आबि गेल अछि जेकर तलाक ओकर पति द्वारा कयल गेल छल जे दूर छल, आ फेर ओ ओकरा सं फेर मेल-मिलाप क लेलक. तथापि, द... मेल-मिलाप पत्नी धरि नहि पहुँचल, आ पत्नी धरि तलाकक खबरि मात्र पहुँचल, तखन पत्नी दोसर पुरुषक संग पुनर्विवाह क' लेलनि जँ दोसर पति हुनका संग सेक्स केने छथि वा नहि केने छथि, तखन पहिल पति, जे हुनका छोड़ि देने छथि, हुनका पर आब कोनो अधिकार नहि छनि।' मलिक कहलकै, 'ई राय वू विचार छै जेकरा हम्में ई मामला में आरू लापता पति के मामला में सबसें अच्छा मानै छियै'।

Hadith

Imam Malik : 1053

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَطَلَّقَ امْرَأَتَهُ وَهِيَ حَائِضٌ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَأَلَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُرْهُ فَلْيُرَاجِعْهَا ثُمَّ يُمْسِكْهَا حَتَّى تَطْهُرَ ثُمَّ تَحِيضَ ثُمَّ تَطْهُرَ ثُمَّ إِنْ شَاءَ أَمْسَكَ بَعْدُ وَإِنْ شَاءَ طَلَّقَ قَبْلَ أَنْ يَمَسَّ فَتِلْكَ الْعِدَّةُ الَّتِي أَمَرَ اللَّهُ أَنْ يُطَلَّقَ لَهَا النِّسَاءُ

याह्या हमरा [नाफी’] स मालिक स कहलथि जे अब्दुल्ला बिन उमर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय मे अपन पत्नी के मासिक धर्म के दौरान तलाक द देलखिन। उमर बिन खत्ताब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स एहि बारे मे पूछलथि। ओ उत्तर देलथिन; 'कहू जे मेल-मिलाप कर' वापस पत्नी सँ आ ओकरा ताबत धरि रोकय दियौक जा धरि ओ शुद्ध नहि भ' जाय, फेर मासिक धर्म नहि भ' जाय, आ फेर शुद्ध नहि भ' जाय। तखन जँ चाहैत अछि तँ ओकरा रोकि सकैत अछि, आ जँ चाहैत अछि तँ ओकरासँ फेरसँ सेक्स करबासँ पहिने ओकरा तलाक दऽ सकैत अछि । जे इद्दाह नियम छै जे अल्लाह द्वारा महिला के तलाक देबय में स्थापित कयल गेल अछि।'

Hadith

Imam Malik : 1054

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَأَنَّهَا انْتَقَلَتْ حَفْصَةَ بِنْتَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ حِينَ دَخَلَتْ فِي الدَّمِ مِنْ الْحَيْضَةِ الثَّالِثَةِ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ فَذُكِرَ ذَلِكَ لِعَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ فَقَالَتْ صَدَقَ عُرْوَةُ وَقَدْ جَادَلَهَا فِي ذَلِكَ نَاسٌ فَقَالُوا إِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى يَقُولُ فِي كِتَابِهِ{ ثَلَاثَةَ قُرُوءٍ }فَقَالَتْ عَائِشَةُ صَدَقْتُمْ تَدْرُونَ مَا الْأَقْرَاءُ إِنَّمَا الْأَقْرَاءُ الْأَطْهَارُو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا بَكْرِ بْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ يَقُولُ مَا أَدْرَكْتُ أَحَدًا مِنْ فُقَهَائِنَا إِلَّا وَهُوَ يَقُولُ هَذَا يُرِيدُ قَوْلَ عَائِشَةَ

हमरा [इब्नु शिहाब] स मलिक स [उर्वाह बिन जुबैर] स ['ऐस्यह] उम्मूल मुकमिनिन स कहल गेल अछि, जे ओ हफशाह बिंत अब्दुररहमान बिन अबू बकर अश शिद्दिक कए अपन तेसर मासिक धर्म मे प्रवेश करबा पर निवास बदलबाक आदेश देलथि। इब्न शिहाब कहलनि; 'तखन एहि बातक सूचना अमराह बिंत अब्दुररहमान केँ देल गेलनि।' [अमरह] कहलकै, 'उरवाह सही छै'। ओहि समय मे बहुत लोक एहि पर बहस करैत छलाह। [ओ सब कहलक], 'वास्तव मे अल्लाह तआला अपन किताब मे कहने छथि: 'तीन बेर कुरू' -Qs. अल बकरा : 228- 'ऐस्याह तखन जवाब देलनि; 'अहाँ ठीके कहैत छी, आ अहाँकेँ बुझल अछि जे कुरू की होइत छैक? कुरू` पवित्र अछि'। इब्न शिहाब स मालिक स हमरा कहने छल कहने छल; हम सुनलहुँ [अबू बकर बिन अब्दुररहमान] कहैत छथि; 'हमरा सभ मे न्यायशास्त्रक एकोटा विशेषज्ञ नहि भेटल जाबत धरि ओ एहि बात सँ सहमत नहि भ' गेलाह।' अर्थात् 'ऐस्यह के मत।

Hadith

Imam Malik : 1055

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ وَزَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍأَنَّ الْأَحْوَصَ هَلَكَ بِالشَّامِ حِينَ دَخَلَتْ امْرَأَتُهُ فِي الدَّمِ مِنْ الْحَيْضَةِ الثَّالِثَةِ وَقَدْ كَانَ طَلَّقَهَا فَكَتَبَ مُعَاوِيَةُ بْنُ أَبِي سُفْيَانَ إِلَى زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ يَسْأَلُهُ عَنْ ذَلِكَ فَكَتَبَ إِلَيْهِ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ إِنَّهَا إِذَا دَخَلَتْ فِي الدَّمِ مِنْ الْحَيْضَةِ الثَّالِثَةِ فَقَدْ بَرِئَتْ مِنْهُ وَبَرِئَ مِنْهَا وَلَا تَرِثُهُ وَلَا يَرِثُهَا

ई हमरा [नाफी’] स॑ मलिक आरू [सुलेमान बिन यासर] स॑ [जैद बिन असलम] स॑ संबंधित छेलै जे कहलकै, ‘अल अहवाश केरऽ मौत सीरिया म॑ होय गेलै, जबकि ओकरऽ पत्नी अपनऽ इद्दाह केरऽ तेसरऽ दौर म॑ प्रवेश करी चुकलऽ छेली, कैन्हेंकि ओकरा स॑ तलाक होय गेलऽ छेलै ।’ तखन मुअवियाह बिन अबू सुफियान जैद बिन थाबीत केँ चिट्ठी पठेलनि जे एहि विषय मे पूछलनि, [जैद बिन थाबीत] तखन जवाब देलनि आ कहलनि जे जँ महिला अपन इद्दाह अवधिक तेसर अवधि मे प्रवेश क' लेने छथि त' एकर मतलब अछि जे ओ अपन पति सँ तलाक द' देने छथि आ हुनकर पति सेहो हुनका तलाक द' देने छथि, हुनका हुनकर संपत्तिक उत्तराधिकार नहि छनि, आ हुनकर पति केँ हुनकर संपत्तिक उत्तराधिकार नहि छनि।'

Hadith

Imam Malik : 1056

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُإِذَا طَلَّقَ الرَّجُلُ امْرَأَتَهُ فَدَخَلَتْ فِي الدَّمِ مِنْ الْحَيْضَةِ الثَّالِثَةِ فَقَدْ بَرِئَتْ مِنْهُ وَبَرِئَ مِنْهَاقَالَ مَالِك وَهُوَ الْأَمْرُ عِنْدَنَا

हमरा मालिक स [नफी'] स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स कहलक अछि; 'जँ पति अपन पत्नी सँ तलाक द' दैत छथि, आ पत्नी तेसर मासिक धर्म मे प्रवेश क' लेने छथि त' एकर मतलब जे दुनू गोटेक तलाक भ' गेल छनि'. मालिक बजलाह; 'हमरा सभक बीच एना अछि'।

Hadith

Imam Malik : 1057

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ الْفُضَيْلِ بْنِ أَبِي عَبْدِ اللَّهِ مَوْلَى الْمَهْرِيِّ أَنَّ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ وَسَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ كَانَا يَقُولَانِإِذَا طُلِّقَتْ الْمَرْأَةُ فَدَخَلَتْ فِي الدَّمِ مِنْ الْحَيْضَةِ الثَّالِثَةِ فَقَدْ بَانَتْ مِنْهُ وَحَلَّتْ

हमरा [अल फुदलैल बिन अबू अब्दुल्लाह] अल महरी के गुलाम स मालिक स कहल गेल अछि, जे [अल कासिम बिन मुहम्मद] आ [सलीम बिन अब्दुल्लाह] कहलनि; 'जँ पत्नीक तलाक भ' गेलै आ फेर तेसर मासिक धर्म मे प्रवेश भ' गेलै त' ओ अपन पति सँ तलाक ल' लेने छै आ ओकरा लेल दोसर विवाह हलाल छै'।

Hadith

Imam Malik : 1058

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ شِهَابٍ يَقُولُعِدَّةُ الْمُطَلَّقَةِ الْأَقْرَاءُ وَإِنْ تَبَاعَدَتْ

मलिक के संग हमरा कहने छल जे [इब्न शिहाब] कहैत सुनने छल; 'तलाकशुदा महिलाक इद्दाह कतेको कुरू होइत छैक', भले दुनू दूर-दूर धरि हो' |

Hadith

Imam Malik : 1059

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ رَجُلٍ مِنْ الْأَنْصَارِأَنَّ امْرَأَتَهُ سَأَلَتْهُ الطَّلَاقَ فَقَالَ لَهَا إِذَا حِضْتِ فَآذِنِينِي فَلَمَّا حَاضَتْ آذَنَتْهُ فَقَالَ إِذَا طَهُرْتِ فَآذِنِينِي فَلَمَّا طَهُرَتْ آذَنَتْهُ فَطَلَّقَهَاقَالَ مَالِك وَهَذَا أَحْسَنُ مَا سَمِعْتُ فِي ذَلِكَ

मलिक हमरा एकटा अंसार आदमी के [याह्या बिन सईद] स कहलखिन, जे हुनकर पत्नी एक बेर हुनका स तलाक मंगलखिन, तखन ओ हुनका स कहलखिन, 'अगर अहाँक पीरियड -मासिक धर्म- -आबय त कहू! ' पीरियड आबि गेलै त' ओ महिला ओकरा कहलक। पति कहलथिन्ह - जँ अहाँ शुद्ध भ' गेलहुँ त' कहू! ' जखन ओ शुद्ध भ' गेलीह तखन ओ स्त्री पति केँ ई कहय लेल घुरि गेलीह । तकर बाद ओकर पति ओकरा तलाक दऽ देलकैक।' मालिक बजलाह; 'ई हमरा सुनल सबसँ नीक राय अछि'।

Hadith

Imam Malik : 1060

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ وَسُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّهُ سَمِعَهُمَا يَذْكُرَانِأَنَّ يَحْيَى بْنَ سَعِيدِ بْنِ الْعَاصِ طَلَّقَ ابْنَةَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَكَمِ الْبَتَّةَ فَانْتَقَلَهَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ الْحَكَمِ فَأَرْسَلَتْ عَائِشَةُ أُمُّ الْمُؤْمِنِينَ إِلَى مَرْوَانَ بْنِ الْحَكَمِ وَهُوَ يَوْمَئِذٍ أَمِيرُ الْمَدِينَةِ فَقَالَتْ اتَّقِ اللَّهَ وَارْدُدْ الْمَرْأَةَ إِلَى بَيْتِهَا فَقَالَ مَرْوَانُ فِي حَدِيثِ سُلَيْمَانَ إِنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ غَلَبَنِي وَقَالَ مَرْوَانُ فِي حَدِيثِ الْقَاسِمِ أَوَ مَا بَلَغَكِ شَأْنُ فَاطِمَةَ بِنْتِ قَيْسٍ فَقَالَتْ عَائِشَةُ لَا يَضُرُّكَ أَنْ لَا تَذْكُرَ حَدِيثَ فَاطِمَةَ فَقَالَ مَرْوَانُ إِنْ كَانَ بِكِ الشَّرُّ فَحَسْبُكِ مَا بَيْنَ هَذَيْنِ مِنْ الشَّرِّ

याह्या हमरा मलिक स॑ [अल कासिम बिन मुहम्मद] आरू [सुलेमान बिन यासर] स॑ बतैलकै कि हुनी दोनों क॑ ई कहतें सुनलकै कि याह्या बिन सईद बिन ऐश न॑ अब्दुररहमान बिन हकम केरऽ बेटी स॑ तलाक के बैन स॑ तलाक द॑ देलकै, तखनिये अब्दुररहमान बिन हकम न॑ अपनऽ बेटी क॑ घर बदलै के आदेश देलकै’ । ['आइशा], मुसलमानक माँ तखन मरवान बिन अल हकम लग एकटा दूत पठौलनि जे तखन मदीनाक गवर्नरक रूप मे काज क' रहल छलाह, ओ कहलनि, 'अल्लाह सँ डरू आ महिला केँ ओकर घर वापस करू'। सुलेमान के हदीस में मरवान जवाब देलकै, 'अब्दुररहमान हमरा हरा देलकै - आज्ञा नै मानी - ' । या अल कासिम के हदीस में मरवान जवाब देलखिन, 'की अहाँ ओ घटना नै सुनने छी जे फातिमा बिंत कैस के संग भेल छल?' 'ऐशा जबाब देलकै; 'ई जरूरी नै छै कि आपने फातिमा के हदीस के जिक्र करी' । मरवान बजलाह; 'अहाँक विचारे जँ किछु खराब अछि तँ ओ दुनू समस्या अहाँक लेल काफी अछि' ।