Imam Malik : 981
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَمُجَمِّعٍ ابْنَيْ يَزِيدَ بْنِ جَارِيَةَ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ خَنْسَاءَ بِنْتِ خِدَامٍ الْأَنْصَارِيَّةِأَنَّ أَبَاهَا زَوَّجَهَا وَهِيَ ثَيِّبٌ فَكَرِهَتْ ذَلِكَ فَأَتَتْ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَرَدَّ نِكَاحَهُ
मलिक सँ हमरा ई बात कहल गेल छल जे [अब्दुररहमान बिन अल कासिम] [हुनकर पिता] सँ जे [अब्दुररहमान] आ [मुजम्मा'] दुनू यजीद बिन जरियाह अल अंशरी के बेटा छलाह, खांसा बिंत खिदम अल अंशरियाह सँ ओहि समय ओ विधवा छलीह, तखन हुनकर पिता हुनका सँ विवाह केलनि मुदा ओ विवाह स्वीकार नहि करय चाहैत छलीह | तखन ओ अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लग गेलीह जाबत धरि ओ विवाह रद्द नहि क' देलनि।
Imam Malik : 982
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ الْمَكِّيِّ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِأُتِيَ بِنِكَاحٍ لَمْ يَشْهَدْ عَلَيْهِ إِلَّا رَجُلٌ وَامْرَأَةٌ فَقَالَ هَذَا نِكَاحُ السِّرِّ وَلَا أُجِيزُهُ وَلَوْ كُنْتُ تَقَدَّمْتُ فِيهِ لَرَجَمْتُ
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [अबू अज़ जुबैर अल माकी] केरऽ मलिक न॑ कहलकै, ‘एक बार उमर इब्नुल खट्टाब के सामने एगो ऐसनऽ शादी पेश करलकै जेकरऽ गवाह खाली एगो पुरुष आरू एगो महिला छेलै, तखनिये [उमर] न॑ कहलकै, ‘ई सिरी शादी छै, हम्में एकरा नै दै छियै । जँ भेटि जाय तँ पाथर जरूर मारब'।
Imam Malik : 983
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ وَعَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍأَنَّ طُلَيْحَةَ الْأَسَدِيَّةَ كَانَتْ تَحْتَ رُشَيْدٍ الثَّقَفِيِّ فَطَلَّقَهَا فَنَكَحَتْ فِي عِدَّتِهَا فَضَرَبَهَا عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ وَضَرَبَ زَوْجَهَا بِالْمِخْفَقَةِ ضَرَبَاتٍ وَفَرَّقَ بَيْنَهُمَا ثُمَّ قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ أَيُّمَا امْرَأَةٍ نَكَحَتْ فِي عِدَّتِهَا فَإِنْ كَانَ زَوْجُهَا الَّذِي تَزَوَّجَهَا لَمْ يَدْخُلْ بِهَا فُرِّقَ بَيْنَهُمَا ثُمَّ اعْتَدَّتْ بَقِيَّةَ عِدَّتِهَا مِنْ زَوْجِهَا الْأَوَّلِ ثُمَّ كَانَ الْآخَرُ خَاطِبًا مِنْ الْخُطَّابِ وَإِنْ كَانَ دَخَلَ بِهَا فُرِّقَ بَيْنَهُمَا ثُمَّ اعْتَدَّتْ بَقِيَّةَ عِدَّتِهَا مِنْ الْأَوَّلِ ثُمَّ اعْتَدَّتْ مِنْ الْآخَرِ ثُمَّ لَا يَجْتَمِعَانِ أَبَدًاقَالَ مَالِك وَقَالَ سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ وَلَهَا مَهْرُهَا بِمَا اسْتَحَلَّ مِنْهَا
हमरा मलिक स [इब्नु शिहाब] स [सैद इब्नुल मुसैयब] स [सुलेमान बिन यासर] स कहल गेल अछि जे, ‘थुलैह अल असदिया रुसैद अतस त्साफी क पत्नी छलीह, मुदा फेर ओ हुनका स तलाक द देलथि। तखन ठुलैहह अपन इद्दाह काल मे विवाह केलनि। ' [उमर इब्नुल खट्टाब] तखन ओकरा पर प्रहार केलक, जेना ओकर पति सेहो मारलक, ओ ठुलैहा केँ कतेको बेर चाबुक सँ मारलक। तखन उमर थुलैहा के दोसर पति स अलग क देलखिन। तकर बाद ओ कहलनि जे, कोनो महिला जे अपन इद्दाह अवधि मे विवाह करैत छथि, जँ हुनका सँ विवाह करयवला पति हुनका संग शारीरिक संबंध नहि केने छथि तखन दुनू गोटे केँ अलग करबाक चाही, तखन हुनका अपन इद्दाह अवधिक शेष समय केँ अपन पहिल पति सँ जारी रखबाक चाही। आ दोसर पति मात्र सुइटर छलाह। मुदा जँ ओ - दोसर पति - ओकरा संग सेक्स केने छथि तखन दुनू गोटे अलग भ' जाइत छथि, तखन पत्नी अपन पहिल पति सँ अपन इद्दाहक शेष अवधि पूरा करैत छथि आ फेर दोसर पति सँ इद्दाह मे वृद्धि करैत छथि, आ दुनू गोटे केँ फेर सँ सदाक लेल एक संग नहि रहबाक अनुमति छनि'। मालिक बजलाह; 'सैद इब्नुल मुसैयब कहलनि; 'स्त्री केँ दहेज भेटबाक अधिकार छैक - दोसर पति सँ - कारण ओ ओकरा संग सेक्स केने अछि' ।
Imam Malik : 984
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُلَا تُنْكَحُ الْأَمَةُ عَلَى الْحُرَّةِ إِلَّا أَنْ تَشَاءَ الْحُرَّةُ فَإِنْ طَاعَتْ الْحُرَّةُ فَلَهَا الثُّلُثَانِ مِنْ الْقَسْمِ
हमरा मालिक स [याह्या बिन सईद] स [सईद इब्नुल मुसैयब] स कहने छल ओ कहलक; 'दासक विवाह स्वतंत्र स्त्री सँ नहि भ' सकैत अछि, जाबत स्वतंत्र स्त्री केँ प्रसन्नता नहि होयत।' जँ मुक्त महिला सहमत छलीह तखन वितरण मे दू तिहाईक हकदार छलीह।'
Imam Malik : 985
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍأَنَّهُ كَانَ يَقُولُ فِي الرَّجُلِ يُطَلِّقُ الْأَمَةَ ثَلَاثًا ثُمَّ يَشْتَرِيهَا إِنَّهَا لَا تَحِلُّ لَهُ حَتَّى تَنْكِحَ زَوْجًا غَيْرَهُ
याह्या हमरा मालिक सँ [इब्न शिहाब] सँ [अबू अब्दुररहमान] सँ [जैद बिन थाबीत] सँ बतौलनि जे ओ एकटा एहन आदमीक विषय मे कहलनि जे अपन दासी केँ तीन तलाक सँ तलाक द’ देलक, फेर ओकरा वापस कीनि लेलक, ‘ओ दासी ओकरा लेल ताबत धरि जायज नहि छैक जाबत धरि ओ दोसर पुरुष सँ विवाह नहि करत।’
Imam Malik : 986
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍعَنْ رَجُلٍ كَانَتْ تَحْتَهُ أَمَةٌ مَمْلُوكَةٌ فَاشْتَرَاهَا وَقَدْ كَانَ طَلَّقَهَا وَاحِدَةً فَقَالَ تَحِلُّ لَهُ بِمِلْكِ يَمِينِهِ مَا لَمْ يَبُتَّ طَلَاقَهَا فَإِنْ بَتَّ طَلَاقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُ بِمِلْكِ يَمِينِهِ حَتَّى تَنْكِحَ زَوْجًا غَيْرَهُ
मालिक हमरा कहलनि जे एक बेर ओ [इब्न शिहाब] सँ एकटा एहन आदमी के बारे मे पूछने छलाह जिनकर दास पत्नी छलनि, फेर ओ ओकरा तलाक केलाक बाद कीनि लेलनि। इब्न सिहाब जवाब देलखिन, 'गुलाम मालिकाना हक के दर्जा के कारण हुनका लेल एखनो गुलाम हलाल अछि, जाबत ओ तलाक बैन नहि दैत छथि। मुदा जँ ओ तलाक बैन देने छथि तँ हुनका लेल हलाल नहि अछि भले ओकर हैसियत ओकर गुलाम हो, माने जाबत धरि दास दोसर पुरुषक विवाह नहि क' लेत'।
Imam Malik : 987
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِسُئِلَ عَنْ الْمَرْأَةِ وَابْنَتِهَا مِنْ مِلْكِ الْيَمِينِ تُوطَأُ إِحْدَاهُمَا بَعْدَ الْأُخْرَى فَقَالَ عُمَرُ مَا أُحِبُّ أَنْ أَخْبُرَهُمَا جَمِيعًا وَنَهَى عَنْ ذَلِكَ
याह्या हमरा [इब्न शिहाब] स मालिक स [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] स [हुनकर पिता] स कहलथि जे [उमर बिन खत्ताब] स एकटा गुलाम आ ओकर बेटी क बारे मे पूछल गेल छल, जाहि मे स एकटा दोसर स संभोग केने छल। 'उमर कहलनि: 'हमरा दुनू गोटेक संग संभोग करब नापसंद अछि।' उमर इब्न अल-खत्ताब ओहि काज स मना क देलथि।
Imam Malik : 988
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ قَبِيصَةَ بْنِ ذُؤَيْبٍ أَنَّ رَجُلًا سَأَلَ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَعَنْ الْأُخْتَيْنِ مِنْ مِلْكِ الْيَمِينِ هَلْ يُجْمَعُ بَيْنَهُمَا فَقَالَ عُثْمَانُ أَحَلَّتْهُمَا آيَةٌ وَحَرَّمَتْهُمَا آيَةٌ فَأَمَّا أَنَا فَلَا أُحِبُّ أَنْ أَصْنَعَ ذَلِكَقَالَ فَخَرَجَ مِنْ عِنْدِهِ فَلَقِيَ رَجُلًا مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَأَلَهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ لَوْ كَانَ لِي مِنْ الْأَمْرِ شَيْءٌ ثُمَّ وَجَدْتُ أَحَدًا فَعَلَ ذَلِكَ لَجَعَلْتُهُ نَكَالًا قَالَ ابْنُ شِهَابٍ أُرَاهُ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ
हमरा [इब्न शिहाब] स मालिक स [कबीशाह बिन ज़ू`एब] स कहल गेल छल जे एकटा आदमी [उस्मान बिन अफ्फान] स दूटा बहिन क बारे मे पूछलक जे एकटा आदमी क मालिकाना हक मे छल, की ओकरा सब स संभोग करब जायज अछि। उस्मान जवाब देलखिन: 'कुरान के आयत में दुनू के अनुमति अछि, मुदा एकटा आओर आयत सेहो अछि जे हुनका सब के मना करैत अछि - हुनका सब सं संभोग करब - . मुदा हमरा स्वयं एहन करब नीक नहि लगैत अछि - दुनू गोटेक संग संभोग करब - ' । काबीशा कहलनि: 'तखन ओ आदमी उस्मान के आवास सं बाहर निकलि गेल आ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सं [एक साथी सं] भेंट केलक, तखन ओ ओकरा सं एहि बारे मे पूछलक. तखन संगी जबाब देलकैक, 'जँ हमरा ओहि काज करबाक अधिकार रहैत, आ हमरा ओहि काज करयवला व्यक्ति भेटि जाय त' हम ओकरा अवश्य सजा दितियैक।' इब्न शिहाब कहलनि जे, हमरा लगैत अछि जे ओ साथी अली बिन अबू तालिब छलाह।
Imam Malik : 989
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْمُجَبَّرِ أَنَّهُ قَالَ وَهَبَ سَالِمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِلِابْنِهِ جَارِيَةً فَقَالَ لَا تَقْرَبْهَا فَإِنِّي قَدْ أَرَدْتُهَا فَلَمْ أَنْشَطْ إِلَيْهَا
हमरा मलिक सँ रिवायत भेल जे [अब्दुररहमान बिन अल मुजब्बर] कहलनि; '[सलीम बिन अब्दुल्लाह] एक बेर अपन बेटा के महिला गुलाम के रूप में उपहार देलखिन जखन कि 'अहाँ के हुनका लग नै पहुंचबाक चाही, हम हुनका सं संभोग करय चाहैत छी, मुदा हमरा एखन धरि हुनकर इच्छा नहिं भेल अछि'।
Imam Malik : 990
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ أَبَا نَهْشَلِ بْنَ الْأَسْوَدِ قَالَ لِلْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍإِنِّي رَأَيْتُ جَارِيَةً لِي مُنْكَشِفًا عَنْهَا وَهِيَ فِي الْقَمَرِ فَجَلَسْتُ مِنْهَا مَجْلِسَ الرَّجُلِ مِنْ امْرَأَتِهِ فَقَالَتْ إِنِّي حَائِضٌ فَقُمْتُ فَلَمْ أَقْرَبْهَا بَعْدُ أَفَأَهَبُهَا لِابْنِي يَطَؤُهَا فَنَهَاهُ الْقَاسِمُ عَنْ ذَلِكَ
हमरा [याह्या बिन सैइद] सं मालिक सं ई बात कहल गेल छल जे अबू नहस्याल बिन अल असवद [अल कासिम बिन मुहम्मद] सं कहलनि, 'हम अपन दासीक वस्त्र खोलल देखलहुं, तें हम ओकरा पर बैसल रही जेना पति अपन पत्नी पर बैसल छथि - संभोगक स्थिति - . तखन बजलीह, 'हमरा मासिक धर्म भ' रहल अछि! ' हम तखन ठाढ़ भ' गेलहुँ आ तकर बाद हुनका लग नहि पहुँचलहुँ, तेँ की हमरा लेल जायज अछि जे हम ओकरा अपन बेटा केँ ओकरा संग संभोग करबाक लेल देब ?' मुदा अल कासिम एकरा मना क देलक।
Imam Malik : 991
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ أَبِي عَبْلَةَ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ مَرْوَانَأَنَّهُ وَهَبَ لِصَاحِبٍ لَهُ جَارِيَةً ثُمَّ سَأَلَهُ عَنْهَا فَقَالَ قَدْ هَمَمْتُ أَنْ أَهَبَهَا لِابْنِي فَيَفْعَلُ بِهَا كَذَا وَكَذَا فَقَالَ عَبْدُ الْمَلِكِ لَمَرْوَانُ كَانَ أَوْرَعَ مِنْكَ وَهَبَ لِابْنِهِ جَارِيَةً ثُمَّ قَالَ لَا تَقْرَبْهَا فَإِنِّي قَدْ رَأَيْتُ سَاقَهَا مُنْكَشِفَةً
हमरा [इब्राहिम बिन अबू अब्ला] स मालिक स [अब्दुल मलिक बिन मरवान] स कहल गेल अछि जे एक बेर ओ अपन दोस्त कए एकटा महिला दास कए उपहार देलथि। तखन ओ स्त्री दासक विषय मे पुछलनि, हुनकर मित्र तखन कहलनि, 'हमर इच्छा अछि जे दास अपन बेटा केँ द' दी जाहि सँ ओ ई-ओ काज क' सकय'. अब्दुल मलिक कहलनि; 'सत्ते [मरवान] अहाँ सँ बेसी वारा' -अपन रक्षा करैत अछि-, ओ एक बेर अपन बेटा केँ एकटा गुलाम द' देने छल, कहैत; 'अहाँ स्त्री दासी लग नहि जाउ, कारण हम ओकर बछड़ा उजागर देखलहुँ अछि' ।
Imam Malik : 992
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ قَالَ{ الْمُحْصَنَاتُ مِنْ النِّسَاءِ }هُنَّ أُولَاتُ الْأَزْوَاجِ وَيَرْجِعُ ذَلِكَ إِلَى أَنَّ اللَّهَ حَرَّمَ الزِّنَا
हमरा मालिक सँ [इब्न शिहाब] सँ [सैद बिन मुसैयब] सँ याह्या कहने छलाह ओ कहलनि; ''-सम्मान निर्वाह करय वाली महिला-' सँ की अभिप्राय होइत छैक, ओ महिला छथि जिनकर पति छनि | एकरऽ कारण छै कि अल्लाह व्यभिचार केरऽ नियम स॑ मना करै छै ।
Imam Malik : 993
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ وَبَلَغَهُ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ أَنَّهُمَا كَانَا يَقُولَانِإِذَا نَكَحَ الْحُرُّ الْأَمَةَ فَمَسَّهَا فَقَدْ أَحْصَنَتْهُقَالَ مَالِك وَكُلُّ مَنْ أَدْرَكْتُ كَانَ يَقُولُ ذَلِكَ تُحْصِنُ الْأَمَةُ الْحُرَّ إِذَا نَكَحَهَا فَمَسَّهَا فَقَدْ أَحْصَنَتْهُ
हमरा मलिक सँ [इब्न शिहाब] सँ ई बात कहल गेल अछि जे ई बात हुनका लग पहुँचि गेल अछि, [अल कासिम बिन मुहम्मद] सँ दुनू गोटे कहलनि: 'जँ कोनो स्वतंत्र पुरुष दास महिला सँ विवाह क' ओकरा संग संभोग करैत अछि त' दास ओकर इज्जतक रक्षा केलक अछि।' मलिक बजलाह: 'हमरा भेटल लगभग सब लोक कहलक, 'गुलाम स्त्री स्वतंत्र पुरुषक इज्जतक रक्षा करैत अछि; अर्थात जँ ओ विवाह कए ओकरा संग संभोग करैत अछि तँ एकर अर्थ होइत अछि जे दास ओकर इज्जतक रक्षा केने अछि ।'
Imam Malik : 994
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ وَالْحَسَنِ ابْنَيْ مُحَمَّدِ بْنِ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ عَنْ أَبِيهِمَا عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ مُتْعَةِ النِّسَاءِ يَوْمَ خَيْبَرَ وَعَنْ أَكْلِ لُحُومِ الْحُمُرِ الْإِنْسِيَّةِ
हमरा कहल गेल अछि जे मलिक सँ [इब्न शिहाब] सँ [अब्दुल्लाह] सँ आ [हसन] सँ याह्या जे दुनू मुहम्मद बिन अली बिन अबू तालिब सँ पुत्र छलाह, [अपन पिता] सँ [अली बिन अबू तालिब] सँ कहलनि, ‘खैबर युद्ध मे अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) मुत’आ विवाह केँ ताम खाय सँ मना केने छलाह गदहा के मांस।
Imam Malik : 995
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِأَنَّ خَوْلَةَ بِنْتَ حَكِيمٍ دَخَلَتْ عَلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَقَالَتْ إِنَّ رَبِيعَةَ بْنَ أُمَيَّةَ اسْتَمْتَعَ بِامْرَأَةٍ فَحَمَلَتْ مِنْهُ فَخَرَجَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَزِعًا يَجُرُّ رِدَاءَهُ فَقَالَ هَذِهِ الْمُتْعَةُ وَلَوْ كُنْتُ تَقَدَّمْتُ فِيهَا لَرَجَمْتُ
हमरा [इब्नु शिहाब] स मालिक स [उरवाह बिन जुबैर] स कहल गेल अछि जे खौला बिंत हकीम उमर बिन खट्टाब स भेंट क कहलथि; रबीअह बिन उमय्याह एकटा महिला स मुतअह विवाह केने छलाह, तखन ओ महिला गर्भवती भ गेलीह! ' [उमर बिन खत्ताब] तखन अपन शाल ल' क' बाहर निकललाह, तखन कहलनि, 'ई मुत'आ निकाह अछि, जँ भेटि जायत त' पाथर मारि देब'.
Imam Malik : 996
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَمِعَ رَبِيعَةَ بْنَ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ يَقُولُيَنْكِحُ الْعَبْدُ أَرْبَعَ نِسْوَةٍقَالَ مَالِك وَهَذَا أَحْسَنُ مَا سَمِعْتُ فِي ذَلِكَ
हमरा कहल गेल अछि जे मलिक सं यजीद [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] के सुनने छलाह जे हुनकर कहब छलनि; 'गुलाम चारि टा स्त्री सँ विवाह क' सकैत अछि'। मालिक बजलाह; 'ई राय एहि मामला पर सुनल सबस नीक अछि'।
Imam Malik : 997
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ بَلَغَهُأَنَّ نِسَاءً كُنَّ فِي عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُسْلِمْنَ بِأَرْضِهِنَّ وَهُنَّ غَيْرُ مُهَاجِرَاتٍ وَأَزْوَاجُهُنَّ حِينَ أَسْلَمْنَ كُفَّارٌ مِنْهُنَّ بِنْتُ الْوَلِيدِ بْنِ الْمُغِيرَةِ وَكَانَتْ تَحْتَ صَفْوَانَ بْنِ أُمَيَّةَ فَأَسْلَمَتْ يَوْمَ الْفَتْحِ وَهَرَبَ زَوْجُهَا صَفْوَانُ بْنُ أُمَيَّةَ مِنْ الْإِسْلَامِ فَبَعَثَ إِلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ابْنَ عَمِّهِ وَهْبَ بْنَ عُمَيْرٍ بِرِدَاءِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَانًا لِصَفْوَانَ بْنِ أُمَيَّةَ وَدَعَاهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى الْإِسْلَامِ وَأَنْ يَقْدَمَ عَلَيْهِ فَإِنْ رَضِيَ أَمْرًا قَبِلَهُ وَإِلَّا سَيَّرَهُ شَهْرَيْنِ فَلَمَّا قَدِمَ صَفْوَانُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِرِدَائِهِ نَادَاهُ عَلَى رُءُوسِ النَّاسِ فَقَالَ يَا مُحَمَّدُ إِنَّ هَذَا وَهْبَ بْنَ عُمَيْرٍ جَاءَنِي بِرِدَائِكَ وَزَعَمَ أَنَّكَ دَعَوْتَنِي إِلَى الْقُدُومِ عَلَيْكَ فَإِنْ رَضِيتُ أَمْرًا قَبِلْتُهُ وَإِلَّا سَيَّرْتَنِي شَهْرَيْنِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ انْزِلْ أَبَا وَهْبٍ فَقَالَ لَا وَاللَّهِ لَا أَنْزِلُ حَتَّى تُبَيِّنَ لِي فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَلْ لَكَ تَسِيرُ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ فَخَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قِبَلَ هَوَازِنَ بِحُنَيْنٍ فَأَرْسَلَ إِلَى صَفْوَانَ بْنِ أُمَيَّةَ يَسْتَعِيرُهُ أَدَاةً وَسِلَاحًا عِنْدَهُ فَقَالَ صَفْوَانُ أَطَوْعًا أَمْ كَرْهًا فَقَالَ بَلْ طَوْعًا فَأَعَارَهُ الْأَدَاةَ وَالسِّلَاحَ الَّذِي عِنْدَهُ ثُمَّ خَرَجَ صَفْوَانُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ كَافِرٌ فَشَهِدَ حُنَيْنًا وَالطَّائِفَ وَهُوَ كَافِرٌ وَامْرَأَتُهُ مُسْلِمَةٌ وَلَمْ يُفَرِّقْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَهُ وَبَيْنَ امْرَأَتِهِ حَتَّى أَسْلَمَ صَفْوَانُ وَاسْتَقَرَّتْ عِنْدَهُ امْرَأَتُهُ بِذَلِكَ النِّكَاحِو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ قَالَ كَانَ بَيْنَ إِسْلَامِ صَفْوَانَ وَبَيْنَ إِسْلَامِ امْرَأَتِهِ نَحْوٌ مِنْ شَهْرَيْنِ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ وَلَمْ يَبْلُغْنَا أَنَّ امْرَأَةً هَاجَرَتْ إِلَى اللَّهِ وَرَسُولِهِ وَزَوْجُهَا كَافِرٌ مُقِيمٌ بِدَارِ الْكُفْرِ إِلَّا فَرَّقَتْ هِجْرَتُهَا بَيْنَهَا وَبَيْنَ زَوْجِهَا إِلَّا أَنْ يَقْدَمَ زَوْجُهَا مُهَاجِرًا قَبْلَ أَنْ تَنْقَضِيَ عِدَّتُهَا
हमरा [इब्न शिहाब] स मलिक द्वारा कहल गेल छल जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय में महिला सब अपन माटी में इस्लाम स्वीकार क लेने छलीह आ ओ सब प्रवास करय वाला में शामिल नै छलीह। जखन ओ लोकनि इस्लाम स्वीकार केलनि तखनहु हुनका लोकनिक पति काफिर छलाह | एहि मे अल वालिद बिन मुगिराहक बेटी सेहो छथि । ओ शफवान बिन उमय्याहक पत्नी छलीह, तखन फथू मक्काक समय मे ओ इस्लाम स्वीकार केलनि, जखन कि हुनकर पति शफवान बिन उमय्याह इस्लाम स्वीकार नहि करय चाहैत छलाह | रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन भतीजा वहाब बिन उमैर के शफवान बिन उमय्याह के सुरक्षा गारंटी के रूप में रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के शाल के संग हुनका पास भेजलखिन्ह. तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका इस्लाम स्वीकार करय लेल आमंत्रित केलनि आ चाहैत छलाह जे हुनका सं भेंट करथि. जँ सहमत हेताह तखन ओ स्वीकार करताह, जँ सहमत नहि हेताह तखन दू मासक समय देताह । जखन शफवान अपन शाल ल क रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के सामना केलनि त ओ आकृति के सामने रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्ल्लम के बजौलनि। ओ कहलनि, 'हे मुहम्मद, वहाब बिन उमैर हमरा सँ अहाँक शाल ल' क' भेंट केने छथि, ओ बयान देलनि जे अहाँ हमरा अहाँक सोझाँ हाजिर हेबाक आदेश देलहुँ, जँ हम एहि बात सँ सहमत छी तखन हम एकरा अवश्य स्वीकार करब।' जँ नहि तँ दू मासक निलंबन देब?' रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'हे अबू वहाब, उतरू - वाहन सँ - '। ओ उत्तर देलथिन; 'नहि, अल्लाह केर कसम, हम ता धरि नहि उतरब जा धरि अहाँ हमरा ई नहि बुझा देब'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन कहलनि: 'अहाँक निलंबन सेहो चारि मासक अछि'। आगू रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनैन इलाका मे हवज़िन के सामना करय लेल गेलाह. ओ अपन युद्धक उपकरण आ हथियार उधार लेबाक लेल शफवान बिन उमय्याह लग एकटा दूत पठौलनि । शफवान बजलाह; 'बाध्यता या सहमति के आधार पर'। ओ उत्तर देलथिन; 'इच्छा'। तखन शफवान हुनका अपन युद्धक उपकरण आ हथियार उधार द देलकनि । तखन शफवान सेहो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग चलि गेलाह, जखन कि ओ एखनो काफिर छलाह | हुनैन आ ताइफ युद्ध मे भाग लेलक। ओहि समय मे ओ एखनो काफिर छलाह जखन कि हुनकर पत्नी इस्लाम स्वीकार कएने छलीह, मुदा रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका आ हुनकर पत्नी कए अलग नहि केलथि जा धरि शफवान इस्लाम नहि स्वीकार कए लेलथि, आ हुनकर पत्नी एखनो हुनका पुरान विवाह स स्वीकार केलथि। इब्न शिहाब स मालिक स हमरा कहने छल कहने छल; 'शफवान के इस्लाम आरू पत्नी के इस्लाम के बीच के समय के अंतर लगभग दू महीना के छेलै' । इब्न शिहाब कहलनि; "हमरा सब तक कोनो खबर नै पहुँचल छै कि अगर कोनो महिला अल्लाह आरू हुनकऽ रसूलुल्लाह के पास प्रवास करी जाय छै जबकि ओकरऽ पति काफिर छै आरू अखनी भी दारुल कुफर में रह॑ छै, जब॑ तलक कि ओकरऽ प्रवास ओकरा आरू ओकरऽ पति के बीच के अलगाव नै होतै, जब तलक कि ओकरऽ पति अपनऽ पत्नी के इद्दाह के अवधि खतम होय स॑ पहल॑ प्रवास करै लेली नै आबै छै।"
Imam Malik : 998
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍأَنَّ أُمَّ حَكِيمٍ بِنْتَ الْحَارِثِ بْنِ هِشَامٍ وَكَانَتْ تَحْتَ عِكْرِمَةَ بْنِ أَبِي جَهْلٍ فَأَسْلَمَتْ يَوْمَ الْفَتْحِ وَهَرَبَ زَوْجُهَا عِكْرِمَةُ بْنُ أَبِي جَهْلٍ مِنْ الْإِسْلَامِ حَتَّى قَدِمَ الْيَمَنَ فَارْتَحَلَتْ أُمُّ حَكِيمٍ حَتَّى قَدِمَتْ عَلَيْهِ بِالْيَمَنِ فَدَعَتْهُ إِلَى الْإِسْلَامِ فَأَسْلَمَ وَقَدِمَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَامَ الْفَتْحِ فَلَمَّا رَآهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَثَبَ إِلَيْهِ فَرِحًا وَمَا عَلَيْهِ رِدَاءٌ حَتَّى بَايَعَهُفَثَبَتَا عَلَى نِكَاحِهِمَا ذَلِكَ
हमरा [इब्न शिहाब] स मालिक स रिवायत भेल जे: उम्म हकीम बिंत अल हरिथ बिन हिशाम इकरीमा बिन अबू जहल के पत्नी छलीह, फेर मक्का पर विजय के समय ओ इस्लाम स्वीकार केलनि जखन कि हुनकर पति इकरीमा बिन अबू जहल, एहि लेल भागि गेलाह जे ओ इस्लाम धर्म नहि मानय चाहैत छलाह, ताहि लेल ओ - इकरीमा - यमन शहर आबि गेलीह। एकरऽ बाद उम्म हकीम हुनकऽ पीछू-पीछू यमन चल्लऽ गेलै, फेरू वू अपनऽ पति क॑ इस्लाम ग्रहण करै लेली आमंत्रित करलकै । अंततः इकरीमा सेहो इस्लाम अपना लेलक, तखन ओ अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स भेंट केलनि जखन मक्का शहर खुजल छल | जखन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका देखलनि त हुनकर स्वागत खुशी सं केलनि, जखन कि इकरीमा शाल नहिं अनलनि - गारंटी के निशानी के रूप में - जाबत धरि ओ अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वफादारी के शपथ नहिं लेलनि. तकर बाद ओ दुनूक विवाह फेर सँ स्थापित केलनि।'
Imam Malik : 999
و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ عَوْفٍ جَاءَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَبِهِ أَثَرُ صُفْرَةٍ فَسَأَلَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخْبَرَهُ أَنَّهُ تَزَوَّجَ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَمْ سُقْتَ إِلَيْهَا فَقَالَ زِنَةَ نَوَاةٍ مِنْ ذَهَبٍ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْلِمْ وَلَوْ بِشَاةٍ
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [हुमैद अथ थाविल] स॑ मालिक स॑ यह्या [अनस बिन मलिक] स॑ कहलकै, ‘अब्दुररहमान बिन औफ केरऽ मुलाकात रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ भेलै, जबकि ओकरा प॑ पीला रंग के वारंट छेलै जेकरा प॑ ज़’फरन के निशान छेलै । त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन जे किएक, तखन ओ कहलखिन जे एखनहि विवाह भेल अछि। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: 'अहाँ ओकरा कतेक दहेज देलियैक?' 'अब्दुर्रहमान उत्तर देलनि; 'खजूर जकाँ पैघ सोना'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन कहलनि: 'वलीमा हो भले मात्र बकरी के वध क' क'।
Imam Malik : 1000
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَ لَقَدْ بَلَغَنِيأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يُولِمُ بِالْوَلِيمَةِ مَا فِيهَا خُبْزٌ وَلَا لَحْمٌ
हमरा मालिक स [याह्या बिन सईद] स कहने छल कहने छल; 'हमरा लग ई बात आबि गेल अछि जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर वलीमा के आयोजन करैत छलाह, जखन कि ओहि मे रोटी आ मांस बिल्कुल नहि छल'।