Imam Malik : 81
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِ يَقُولُدَخَلْتُ عَلَى مَرْوَانَ بْنِ الْحَكَمِ فَتَذَاكَرْنَا مَا يَكُونُ مِنْهُ الْوُضُوءُ فَقَالَ مَرْوَانُ وَمِنْ مَسِّ الذَّكَرِ الْوُضُوءُ فَقَالَ عُرْوَةُ مَا عَلِمْتُ هَذَا فَقَالَ مَرْوَانُ بْنُ الْحَكَمِ أَخْبَرَتْنِي بُسْرَةُ بِنْتُ صَفْوَانَ أَنَّهَا سَمِعَتْ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِذَا مَسَّ أَحَدُكُمْ ذَكَرَهُ فَلْيَتَوَضَّأْ
[अब्दुल्ला बिन अबू बकर बिन मुहम्मद बिन अमर बिन हज़म] से मलिक से याह्या का बतावा है, उ [उर्वाह बिन जुबैर] का कहत सुना है; हम मरवान बिन अल हकाम से मिलेन, यहिसे हम वजू के मुद्दन के बारे मा ज्ञान का आदान-प्रदान किहिन। [मरवान] कहिन; 'वजू के लिए जननांगन का छूब अनिवार्य है,' उरवाह कहिन; 'हमका ई नाहीं पता रहा'। त मरवान बिन अल हकाम कहिन; मोका [बुसराह बिन्त शफवान] सूचित किहिन रहैं, उ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कहत सुनिन रहैं: 'अगर तुममें से केहू ओकरे जननांगन का छूवत है तौ वजू करौ! '
Imam Malik : 82
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ عَنْ مُصْعَبِ بْنِ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ أَنَّهُ قَالَكُنْتُ أُمْسِكُ الْمُصْحَفَ عَلَى سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ فَاحْتَكَكْتُ فَقَالَ سَعْدٌ لَعَلَّكَ مَسِسْتَ ذَكَرَكَ قَالَ فَقُلْتُ نَعَمْ فَقَالَ قُمْ فَتَوَضَّأْ فَقُمْتُ فَتَوَضَّأْتُ ثُمَّ رَجَعْتُ
मलिक से [इस्माइल बिन मुहम्मद बिन सद बिन अबू वकाश] से [मुशब बिन सद बिन अबू वकाश] से कहिन रहा, उ कहिन; हम सद बिन वकाश के सामने मुशाफ रखेन, फिर हम ओनका खुजली करत देखेन, फिर [सद] कहिन; 'शायद आपने अपने जननांगन का छुवा होय?' -मुशब- कहिन; हम जवाब दिहेन; 'हाँ। त उ कहिन; 'खड़ा होइके वजू करौ,' फिर मैं खड़ा होइके वजू करि लिहेव, फिरि आय गयेन।
Imam Malik : 83
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ كَانَ يَقُولُإِذَا مَسَّ أَحَدُكُمْ ذَكَرَهُ فَقَدْ وَجَبَ عَلَيْهِ الْوُضُوءُ
ई [नफी'] से मलिक से मुझसे संबंधित रहा है, कि [अब्दुल्ला बिन उमर] ने कहा; 'यदि तुममें से कोई ओकरे गुप्त अंगन का छूए तौ ओकरे लिए वजू लेब अनिवार्य है।'
Imam Malik : 84
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُمَنْ مَسَّ ذَكَرَهُ فَقَدْ وَجَبَ عَلَيْهِ الْوُضُوءُ
मलिक से [हिस्याम बिन उरवाह] से [अपने पिता] से कहिन है; 'जे ओकरे गुप्त अंगन का छूए, ओका वजू करै का चाही।'
Imam Malik : 85
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ أَبِي عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَيَغْتَسِلُ ثُمَّ يَتَوَضَّأُ فَقُلْتُ لَهُ يَا أَبَتِ أَمَا يَجْزِيكَ الْغُسْلُ مِنْ الْوُضُوءِ قَالَ بَلَى وَلَكِنِّي أَحْيَانًا أَمَسُّ ذَكَرِي فَأَتَوَضَّأُ
ई मलिक से [इब्न शिहाब] से [सलीम बिन अब्दुल्ला] से संबंधित रहा है, वास्तव मा उ कहिन; हम अपने पिता [अब्दुल्ला बिन उमर] का नहावत अऊर फिर वजू करत देखेन, फिर हम उनसे पूछेन; 'हे बाबूजी वजू न लेवे खातिर गुस्ल काफी नाहीं है?' उ जवाब दिहिस; 'हाँ, बस इहै है कि कभौं-कभौं मैं अपने जननांगन का छू लेत हौं, तौ मैं वजू करत हौं'।
Imam Malik : 86
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّهُ قَالَ كُنْتُ مَعَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَفِي سَفَرٍ فَرَأَيْتُهُ بَعْدَ أَنْ طَلَعَتْ الشَّمْسُ تَوَضَّأَ ثُمَّ صَلَّى قَالَ فَقُلْتُ لَهُ إِنَّ هَذِهِ لَصَلَاةٌ مَا كُنْتَ تُصَلِّيهَا قَالَ إِنِّي بَعْدَ أَنْ تَوَضَّأْتُ لِصَلَاةِ الصُّبْحِ مَسِسْتُ فَرْجِي ثُمَّ نَسِيتُ أَنْ أَتَوَضَّأَ فَتَوَضَّأْتُ وَعُدْتُ لِصَلَاتِي
मलिक से [नफी] से [सलीम बिन अब्दुल्ला] से बताइस है, उ कहिन; मैं [अब्दुल्ला बिन उमर] के साथे एक यात्रा पर रहा। सूर्योदय के बाद वजू करते देखा और फिर नमाज पढ़ी, -सलीम- कहा; हम पूछित है; 'का तुम ई नाहीं किहे हौ?' उ जवाब दिहिन; 'सुबह के नमाज के लिए वजू लेवे के बाद, हम अपने जननांगन का छुए रहेन। अब वजू न करै का भूल गयेंव, तौ वजू कइके नमाज दोहरायेन'।
Imam Malik : 87
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُقُبْلَةُ الرَّجُلِ امْرَأَتَهُ وَجَسُّهَا بِيَدِهِ مِنْ الْمُلَامَسَةِ فَمَنْ قَبَّلَ امْرَأَتَهُ أَوْ جَسَّهَا بِيَدِهِ فَعَلَيْهِ الْوُضُوءُ
मलिक से [इब्नू शिहाब] से [सलीम बिन अब्दुल्ला] से अपने पिता से याह्या का बताइस है, - [अब्दुल्ला बिन उमर] - उ एक बार कहिन; 'मर्द का चूमना अऊर अपनी पत्नी पर हाथ छूना मुमसाह माना जात है। जे आपन पत्नी का चूम लेई या ओका छुई, ओका वजू करै का चाही।
Imam Malik : 88
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُمِنْ قُبْلَةِ الرَّجُلِ امْرَأَتَهُ الْوُضُوءُ
ई [इब्न शिहाब] से मलिक से मुझसे संबंधित है कि उ कहिन; 'वुधू एक आदमी के लिए फर्ज है जो अपनी पत्नी का चूम लेता है'।
Imam Malik : 89
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا اغْتَسَلَ مِنْ الْجَنَابَةِ بَدَأَ بِغَسْلِ يَدَيْهِ ثُمَّ تَوَضَّأَ كَمَا يَتَوَضَّأُ لِلصَّلَاةِ ثُمَّ يُدْخِلُ أَصَابِعَهُ فِي الْمَاءِ فَيُخَلِّلُ بِهَا أُصُولَ شَعَرِهِ ثُمَّ يَصُبُّ عَلَى رَأْسِهِ ثَلَاثَ غَرَفَاتٍ بِيَدَيْهِ ثُمَّ يُفِيضُ الْمَاءَ عَلَى جِلْدِهِ كُلِّهِ
मलिक से [हिस्याम बिन उर्वाह] से [अपने पिता] से [ऐस्याह, उम्मुल मुकमिनिन] से याह्या बताइस है; कि जब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जुनुब से नहाइन तौ हाथ धोवै से शुरू किहिन। नमाज के लिए वजू के रूप में वजू करौ। पानी मा अपनी उंगली डालत अऊर ओनका अपने बालन के आधार तक पार करत, फिर उ दुइनौ हाथन से अपने सिर पर पानी के तीन स्कूप डारिन, फिर पानी का अपनी त्वचा पर समान रूप से फैला दिहिन।
Imam Malik : 90
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَغْتَسِلُ مِنْ إِنَاءٍ هُوَ الْفَرَقُ مِنْ الْجَنَابَةِ
ई मोका मलिक से [इब्नू शिहाब] से [उर्वाह बिन अज़ जुबैर] से [ऐस्याह, उम्म मुकमिनिन] से बतावा गा है; कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने अल फराक के बर्तन से जुनुब नहवाया।
Imam Malik : 91
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ إِذَا اغْتَسَلَ مِنْ الْجَنَابَةِ بَدَأَ فَأَفْرَغَ عَلَى يَدِهِ الْيُمْنَى فَغَسَلَهَا ثُمَّ غَسَلَ فَرْجَهُ ثُمَّ مَضْمَضَ وَاسْتَنْثَرَ ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ وَنَضَحَ فِي عَيْنَيْهِ ثُمَّ غَسَلَ يَدَهُ الْيُمْنَى ثُمَّ الْيُسْرَى ثُمَّ غَسَلَ رَأْسَهُ ثُمَّ اغْتَسَلَ وَأَفَاضَ عَلَيْهِ الْمَاءَ
[नफी'] से मलिक से मोका बतावा गा है कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] जब जुनब से नहात हैं, तौ अपने दाहिने हाथ पर पानी डारै से शुरू करत हैं। ऊ ओका धोइस, फिर आपन लंड धोइस। ऊ आपन मुँह धोइस अऊर फिर साँस लिहिस अऊर नाक मा डाले पानी का थूक दिहिस। आपन मुँह धोइस अऊर आपन आँखिन पर पानी छिड़किस, आपन दाहिना हाथ धोइस फिर आपन बायां, फिर उ आपन माथा धोइस। ऊ नहाइस अऊर पानी का पूरे शरीर मा फैला दिहिस।
Imam Malik : 92
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ وَعُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ وَعَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانُوا يَقُولُونَ إِذَا مَسَّ الْخِتَانُ الْخِتَانَ فَقَدْ وَجَبَ الْغُسْلُ
याह्या द्वारा मलिक से [इब्न शिहाब] से [सईद बिन मुसैयब] से बतावा गा है कि [उमर बिन खथब], [उथमान बिन अफ्फान] अऊर [ऐस्याह] पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के पत्नी कहिन; 'अगर दुइ खतना एक दूसरे का छूवत हैं तौ नहाना अनिवार्य है'।
Imam Malik : 93
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي النَّضْرِ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ أَنَّهُ قَالَسَأَلْتُ عَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا يُوجِبُ الْغُسْلَ فَقَالَتْ هَلْ تَدْرِي مَا مَثَلُكَ يَا أَبَا سَلَمَةَ مَثَلُ الْفَرُّوجِ يَسْمَعُ الدِّيَكَةَ تَصْرُخُ فَيَصْرُخُ مَعَهَا إِذَا جَاوَزَ الْخِتَانُ الْخِتَانَ فَقَدْ وَجَبَ الْغُسْلُ
उमर बिन उबैदुल्लाह के एक पूर्व दास [अबू नदलर] से मलिक से [अबू सलामा बिन अब्दुर्रहमान बिन औफ] से बताये रहे, उ कहिन; हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी [ऐस्याह] से पूछेन कि नहाना का अनिवार्य बनावत है, तौ उ जवाब दिहिन; 'हे अबू सलामा, का तुम आपन उदाहरण जानत हौ? यानी मुर्गा के तरह, जे मुर्गी के बाँग सुनत है अऊर फिर ऊ भी बाँग देत है। अगर लिंग जननांग मा घुस गा है, तौ ओका नहाना जरूरी है''।
Imam Malik : 94
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّ أَبَا مُوسَى الْأَشْعَرِيَّ أَتَى عَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَفَقَالَ لَهَا لَقَدْ شَقَّ عَلَيَّ اخْتِلَافُ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي أَمْرٍ إِنِّي لَأُعْظِمُ أَنْ أَسْتَقْبِلَكِ بِهِ فَقَالَتْ مَا هُوَ مَا كُنْتَ سَائِلًا عَنْهُ أُمَّكَ فَسَلْنِي عَنْهُ فَقَالَ الرَّجُلُ يُصِيبُ أَهْلَهُ ثُمَّ يُكْسِلُ وَلَا يُنْزِلُ فَقَالَتْ إِذَا جَاوَزَ الْخِتَانُ الْخِتَانَ فَقَدْ وَجَبَ الْغُسْلُفَقَالَ أَبُو مُوسَى الْأَشْعَرِيُّ لَا أَسْأَلُ عَنْ هَذَا أَحَدًا بَعْدَكِ أَبَدًا
[यह्या बिन सईद] से [सईद बिन मुसैयब] से मलिक से मोका बतावा गा है कि अबू मूसा अल असीअरी पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी आयशा के पास आए अऊर ओसे कहिन; 'ई वाकई मा मोर लिए एक समस्या के बारे मा अपने दोस्तन के बीच मतभेद रखब मुश्किल बना दिहिस है। अगर वइसन न होत तौ हमका तोहसे फतवा माँगै मा दिक्कत होत' तब ऐसिया ने पूछा; 'वह का है? मां से जो पूछना है, तब पूछो'। तब -अबू मूसा- कहिन; 'एक आदमी अपनी पत्नी के पास आया, फिर उसने अपना जननांग निकाला और वीर्य नहीं निकला'। [ऐसिया] जवाब दिहिस; 'अगर जननांग जननांग मा घुस गा है, तौ नहाना अनिवार्य है'। अबू मूसा अल असियारी ने कहा; 'तब हम फिर केहू से नाहीं पूछब'।
Imam Malik : 95
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ كَعْبٍ مَوْلَى عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ أَنَّ مَحْمُودَ بْنَ لَبِيدٍ الْأَنْصَارِيَّ سَأَلَ زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍعَنْ الرَّجُلِ يُصِيبُ أَهْلَهُ ثُمَّ يُكْسِلُ وَلَا يُنْزِلُ فَقَالَ زَيْدٌ يَغْتَسِلُفَقَالَ لَهُ مَحْمُودٌ إِنَّ أُبَيَّ بْنَ كَعْبٍ كَانَ لَا يَرَى الْغُسْلَ فَقَالَ لَهُ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ إِنَّ أُبَيَّ بْنَ كَعْبٍ نَزَعَ عَنْ ذَلِكَ قَبْلَ أَنْ يَمُوتَ
[यह्या बिन सईद] से [अब्दुल्ला बिन काअब] उस्मान बिन अफ्फान के पूर्व दास से मलिक से ई मोका बतावा गा है कि महमूद बिन लबीद अल अंसारी से [जैद बिन थाबित] से एक आदमी के बारे मा पूछा गा रहा जे ओकर पत्नी के पास आवा रहा अऊर फिर उ बिना वीर्य छोड़े आपन जननांग निकाल लिहिस, तौ जैद जवाब दिहिस; 'उनका नहावै का है'। तब महमूद कहिन; 'वास्तव मा [उबाई बिन काअब] अइसन नाहीं सोचत हैं,' जैद बिन थाबित ने इनकार किहिन; 'उबाई बिन काअब ने अपने मरने से पहले अपनी राय स्पष्ट कर दी थी'।
Imam Malik : 96
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ كَانَ يَقُولُإِذَا جَاوَزَ الْخِتَانُ الْخِتَانَ فَقَدْ وَجَبَ الْغُسْلُ
ई [नफी'] से मलिक से मुझसे संबंधित रहा है कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] ने कहा; 'अगर जननांग जननांग मा घुस गा है तौ नहाना अनिवार्य है'।
Imam Malik : 97
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَذَكَرَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ يُصِيبُهُ جَنَابَةٌ مِنْ اللَّيْلِ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ تَوَضَّأْ وَاغْسِلْ ذَكَرَكَ ثُمَّ نَمْ
ई मोका मलिक से [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [अब्दुल्ला बिन उमर] से बतावा गा है; उमर बिन खट्टाब एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से शिकायत किहिन, कि उ एक रात जुनुब मा रहे, फिर उ कहिन: 'वजू करा अऊर आपन गुप्तांग धोवा फिर सो जा'।
Imam Malik : 98
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا كَانَتْ تَقُولُإِذَا أَصَابَ أَحَدُكُمْ الْمَرْأَةَ ثُمَّ أَرَادَ أَنْ يَنَامَ قَبْلَ أَنْ يَغْتَسِلَ فَلَا يَنَمْ حَتَّى يَتَوَضَّأَ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِ
ई मोका मलिक से [हिस्याम बिन उर्वाह] से [उनके पिता] से [ऐस्याह] से बतावा गा है - पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी - कहिन; 'अगर आप अपनी पत्नी के साथ सेक्स करत हैं, तो नहावै से पहिले सोवै चाहत हैं, तौ जब तक आप नमाज के लिए वजू नहीं लेत हैं तब तक न सोओ'।
Imam Malik : 99
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ إِذَا أَرَادَ أَنْ يَنَامَ أَوْ يَطْعَمَ وَهُوَ جُنُبٌ غَسَلَ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ ثُمَّ طَعِمَ أَوْ نَامَ
[नफी'] से मलिक से मोका बतावा गा है कि जब [अब्दुल्ला बिन उमर] सोवै या खाना खावै चाहत है, जब उ जुनुब है, तौ उ आपन चेहरा अऊर हाथन का कोहनी तक धोवत है। ओकर माथा रगड़ौ फिर खावा या सोवा।
Imam Malik : 100
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أَبِي حَكِيمٍ أَنَّ عَطَاءَ بْنَ يَسَارٍ أَخْبَرَهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَبَّرَ فِي صَلَاةٍ مِنْ الصَّلَوَاتِ ثُمَّ أَشَارَ إِلَيْهِمْ بِيَدِهِ أَنْ امْكُثُوا فَذَهَبَ ثُمَّ رَجَعَ وَعَلَى جِلْدِهِ أَثَرُ الْمَاءِ
याह्या ने [इस्माइल बिन अबू हकीम] से मलिक से मुझसे कहा, कि ['अथो` बिन यासर] ने उन्हें सूचित किया; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नमाज में तकबीर कहा, फिर अपने हाथों से लोगो को इशारा किया: 'जहाँ हो वहीं रहो! ' फिर उ चला गवा अऊर फिर वापस आवा, जबकि ओकरे त्वचा पर पानी के निशान दिखाई दिहिन।