Imam Malik : 961
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ الْأَشْعَثِ أَخْبَرَهُ أَنَّ عَمَّةً لَهُ يَهُودِيَّةً أَوْ نَصْرَانِيَّةً تُوُفِّيَتْ وَأَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ الْأَشْعَثِ ذَكَرَ ذَلِكَ لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِوَقَالَ لَهُ مَنْ يَرِثُهَا فَقَالَ لَهُ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ يَرِثُهَا أَهْلُ دِينِهَاثُمَّ أَتَى عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ فَسَأَلَهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ لَهُ عُثْمَانُ أَتُرَانِي نَسِيتُ مَا قَالَ لَكَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ يَرِثُهَا أَهْلُ دِينِهَا
हमरा [सुलेमान बिन यासर] स [याह्या बिन सईद] स मालिक स इ कहल गेल जे [मुहम्मद बिन अल अशअतस] हुनका सूचित केलथि जे हुनकर मौसी जे यहूदी या ईसाई छलीह हुनकर मौत भ गेल अछि। तखन मुहम्मद बिन अल अशअतस उमर बिन खत्ताब केँ ई बात कहलनि आ हुनका सँ पूछलनि जे हुनकर संपत्ति केकरा विरासत मे भेटतनि? ' [उमर बिन खट्टाब] उत्तर देलनि; 'जे ओकर सम्पत्ति उत्तराधिकारी होयत से ओकर धर्म मे भाग लेत।' तखन ओ [उस्मान बिन अफान] लग वैह प्रश्न पूछय लेल आयल छलाह, उस्मान पाछाँ पुछलनि; 'उमर बिन खट्टाब जे कहने छलाह से बिसरि गेल छी, जे उत्तराधिकारी के अपन धर्म के हिस्सा होइत छैक?'
Imam Malik : 962
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أَبِي حَكِيمٍ أَنَّ نَصْرَانِيًّا أَعْتَقَهُ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ هَلَكَ قَالَ إِسْمَعِيلُفَأَمَرَنِي عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ أَنْ أَجْعَلَ مَالَهُ فِي بَيْتِ الْمَالِ
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [इस्माइल बिन अबू हकीम] स॑ [याह्या बिन सईद] स॑ मलिक न॑ कहलकै, ‘एक ईसाई जेकरा उमर बिन अब्दुल अजीज न॑ मुक्त करी देल॑ छेलै, ओकरऽ मौत होय गेलै । इस्माइल कहलकै; 'तखन [उमर बिन अब्दुल अजीज] हमरा आदेश देलनि जे हुनकर सभटा संपत्ति बैतुल माल केँ द' दियौक'।
Imam Malik : 963
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ عُلَمَائِهِمْأَنَّهُ لَمْ يَتَوَارَثْ مَنْ قُتِلَ يَوْمَ الْجَمَلِ وَيَوْمَ صِفِّينَ وَيَوْمَ الْحَرَّةِ ثُمَّ كَانَ يَوْمَ قُدَيْدٍ فَلَمْ يُوَرَّثْ أَحَدٌ مِنْ صَاحِبِهِ شَيْئًا إِلَّا مَنْ عُلِمَ أَنَّهُ قُتِلَ قَبْلَ صَاحِبِهِ
यह्या हमरा अपनऽ कुछ विद्वानऽ स॑ [रबीअह बिन अबू अब्दुरहमान] स॑ मालिक स॑ बतैलकै कि जे जमाल के लड़ाई, सिफिन के लड़ाई, आरू हर्राह के लड़ाई म॑ मारलऽ गेलऽ छेलै, वू एक-दूसरा स॑ उत्तराधिकार नै पाबी सकै छेलै । रहल बात कुदैद के लड़ाई के त हुनकर दोस्त के संपत्ति ताबत धरि किनको विरासत में नहिं भेटल छल जाबत ई पता नहिं चलैत छल जे हुनकर मित्र सं पहिने मारल गेल छल.
Imam Malik : 964
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَخْطُبُ أَحَدُكُمْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ
याह्या हमरा [मुहम्मद बिन याह्या बिन हब्बन] स मालिक स [अबू हुरैरा] स [अल अ'राज] स बतेलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन: 'अहाँ मे स कियो अपन भाई स हाथ नहि मांगू।'
Imam Malik : 965
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَخْطُبُ أَحَدُكُمْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ
हमरा [नाफी’] स मालिक स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स रिवायत भेल जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलथि जे ‘अहाँ मे स कियो अपन भाई स विवाह मे हाथ नहि मांगू’।
Imam Malik : 966
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ كَانَ يَقُولُ فِي قَوْلِ اللَّهِ تَبَارَكَ وَتَعَالَى{ وَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِيمَا عَرَّضْتُمْ بِهِ مِنْ خِطْبَةِ النِّسَاءِ أَوْ أَكْنَنْتُمْ فِي أَنْفُسِكُمْ عَلِمَ اللَّهُ أَنَّكُمْ سَتَذْكُرُونَهُنَّ وَلَكِنْ لَا تُوَاعِدُوهُنَّ سِرًّا إِلَّا أَنْ تَقُولُوا قَوْلًا مَعْرُوفًا }أَنْ يَقُولَ الرَّجُلُ لِلْمَرْأَةِ وَهِيَ فِي عِدَّتِهَا مِنْ وَفَاةِ زَوْجِهَا إِنَّكِ عَلَيَّ لَكَرِيمَةٌ وَإِنِّي فِيكِ لَرَاغِبٌ وَإِنَّ اللَّهَ لَسَائِقٌ إِلَيْكِ خَيْرًا وَرِزْقًا وَنَحْوَ هَذَا مِنْ الْقَوْلِ
हमरा [अब्दुररहमान बिन कासिम] स मालिक स [अपन पिता] स कहल गेल अछि जे ओ अल्लाह तआला क वचन क संबंध मे कहने छलाह: ‘आ अहाँ सब लेल कोनो पाप नहि अछि जे अहाँ एहि महिला सब कए इशारा स प्रपोज करब या हुनका सब स विवाह करबाक इच्छा कए अपन दिल मे नुकाबी। अल्लाह जनैत छथि जे अहाँ हुनका सभक जिक्र करब, तेँ हुनका सभ सँ गुप्त रूप सँ वादा नहि करू, सिवाय हुनका सभ सँ एक शब्द म'रूफ-' -Qs. अल बकरा : २३५- अर्थात एकटा एहन पुरुष जे पति के मृत्यु के बाद सेहो इद्दाह के अवधि में रहय वाली महिला स कहैत अछि जे ‘अहाँ हमरा लेल बहुत कुलीन छी, हमरा अहाँ स प्रेम के भाव अछि, अल्लाह अहाँ के भलाई आ रोजी-रोटी के रास्ता पर मार्गदर्शन करथि’, या अन्य एहने शब्द।
Imam Malik : 967
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْفَضْلِ عَنْ نَافِعِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْأَيِّمُ أَحَقُّ بِنَفْسِهَا مِنْ وَلِيِّهَا وَالْبِكْرُ تُسْتَأْذَنُ فِي نَفْسِهَا وَإِذْنُهَا صُمَاتُهَا
मलिक हमरा [अब्दुल्लाह बिन अल फदल] सँ [नफी’ बिन जुबैर बिन मुथइम] सँ [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] सँ बतौलनि जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहलनि: 'विधवा केँ अपन संरक्षक सँ बेसी पति चुनबाक अधिकार छैक, जखन कि कुमारि सँ ओकर सहमति लेल पूछब आवश्यक छैक, आ ओकर सहमति केर निशानी ओकरे छैक शांति।'
Imam Malik : 968
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي حَازِمِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ السَّاعِدِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَاءَتْهُ امْرَأَةٌ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي قَدْ وَهَبْتُ نَفْسِي لَكَ فَقَامَتْ قِيَامًا طَوِيلًا فَقَامَ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ زَوِّجْنِيهَا إِنْ لَمْ تَكُنْ لَكَ بِهَا حَاجَةٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَلْ عِنْدَكَ مِنْ شَيْءٍ تُصْدِقُهَا إِيَّاهُ فَقَالَ مَا عِنْدِي إِلَّا إِزَارِي هَذَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنْ أَعْطَيْتَهَا إِيَّاهُ جَلَسْتَ لَا إِزَارَ لَكَ فَالْتَمِسْ شَيْئًا فَقَالَ مَا أَجِدُ شَيْئًا قَالَ الْتَمِسْ وَلَوْ خَاتَمًا مِنْ حَدِيدٍ فَالْتَمَسَ فَلَمْ يَجِدْ شَيْئًا فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَلْ مَعَكَ مِنْ الْقُرْآنِ شَيْءٌ فَقَالَ نَعَمْ مَعِي سُورَةُ كَذَا وَسُورَةُ كَذَا لِسُوَرٍ سَمَّاهَا فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ أَنْكَحْتُكَهَا بِمَا مَعَكَ مِنْ الْقُرْآنِ
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [अबू हजम बिन दिनार] स॑ मलिक स॑ यह्या [सहल बिन सआद अस सईदी] स॑ कहलकै, ‘एक महिला रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास ऐलै आरू कहलकै, ‘हे रसुलुल्लाह, हम्में खुद क॑ तोरा सामने पूरा तरह स॑ समर्पित करी देल॑ छियै’ । तखन ओ बहुत देर धरि ठाढ़ रहलाह, जाबत धरि एकटा आदमी ठाढ़ भ' क' नहि कहलक, 'हे अल्लाह केर रसूलुल्लाह, जँ अहाँ हुनका पसिन नहि करैत छी त' हमरा हुनका सं विवाह करू'। तखन रसुलुल्लाह सल्लाह अलैहि वसल्लम ओहि आदमी सं पूछलखिन्ह: 'की अहां लग कोनो एहन चीज अछि जेकर उपयोग ओकरा लेल दहेज के रूप मे कएल जा सकय?' ओ आदमी उत्तर देलक। 'हमरा लग एहि सरोंग छोड़ि किछु नहि अछि'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, जँ अहाँ हुनका सरोंग देबनि तखन अहाँ बिना सरोंग के बैसब। दोसर खोजू'। ओ आदमी शिकायत केलक; 'हमरा लग किछु नहि अछि'। ओ फेर बजलाह: ‘लोहाक अंगूठी सेहो ताकू! '। तखन ओ आदमी तकलक मुदा नहि भेटल। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: 'की अहाँ कुरान रटने छी?' ओ आदमी उत्तर देलक। 'हँ, ई चिट्ठी आ ई चिट्ठी रटने छी'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन कहलनि: 'तखन हम अहाँक विवाह ओहि महिला सँ करब, एकटा दहेजक संग जे अहाँ कुरानक अक्षर सँ रटने छी'।
Imam Malik : 969
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ قَالَ قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِأَيُّمَا رَجُلٍ تَزَوَّجَ امْرَأَةً وَبِهَا جُنُونٌ أَوْ جُذَامٌ أَوْ بَرَصٌ فَمَسَّهَا فَلَهَا صَدَاقُهَا كَامِلًا وَذَلِكَ لِزَوْجِهَا غُرْمٌ عَلَى وَلِيِّهَا
हमरा मालिक स [याह्या बिन सईद] स [सैद बिन मुसैयब] स कहने छल ओ कहलक; [उमर बिन खट्टाब] कहलनि; 'कोनो पुरुष जे पागलपन, वा कोढ़, वा कोढ़ सँ बीमार स्त्री सँ विवाह करैत अछि, आ तखन ओकरा संग संभोग करैत अछि, तखन ओहि स्त्री केँ पूर्ण दहेज भेटबाक अधिकार छैक।' आ एकर परिणाम भेल जे ओकर अभिभावक पतिक कर्ज वहन करय लेल बाध्य भ' गेलै।'
Imam Malik : 970
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ ابْنَةَ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ وَأُمُّهَا بِنْتُ زَيْدِ بْنِ الْخَطَّابِ كَانَتْ تَحْتَ ابْنٍ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ فَمَاتَ وَلَمْ يَدْخُلْ بِهَا وَلَمْ يُسَمِّ لَهَا صَدَاقًا فَابْتَغَتْ أُمُّهَا صَدَاقَهَا فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَلَيْسَ لَهَا صَدَاقٌ وَلَوْ كَانَ لَهَا صَدَاقٌ لَمْ نُمْسِكْهُ وَلَمْ نَظْلِمْهَا فَأَبَتْ أُمُّهَا أَنْ تَقْبَلَ ذَلِكَفَجَعَلُوا بَيْنَهُمْ زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍ فَقَضَى أَنْ لَا صَدَاقَ لَهَا وَلَهَا الْمِيرَاثُ
हमरा मलिक सँ रिवायत भेल जे [नफी’] कहलनि जे, ‘उबैदुल्लाह बिन उमर के बेटी - ओकर माय जैद बिन अल खट्टाब के बेटी छलीह - हुनकर बेटा अब्दुल्ला बिन उमर के पत्नी छलीह, तखन ओ - अब्दुल्लाह बिन उमर के बेटा - हुनका संग बिना संभोग केने मरि गेलाह आ दहेज के जिक्र नहि भेल। अस्तु, हुनक पत्नीक माय अपन बेटीक दहेज [अब्दुल्लाह बिन उमर] चाहैत छलीह आ बजलीह: 'हुनका लेल दहेज नहि छैक, जँ हुनका अधिकार रहैत त' हम सभ नहि रोकने रहितहुँ आ ने हुनका संग अन्याय केने रहितहुँ।' हुनकऽ माय क॑ ई फैसला प॑ आपत्ति छेलै, ई लेली जनता एगो ऐन्हऽ व्यक्ति क॑ ल॑ लेलकै जे मध्यस्थ के काम करी सक॑, वू छेलै जैद बिन थाबिट । तखन [जैद] निर्णय लेलक जे महिला केँ दहेज नहि भेटत, मुदा उत्तराधिकार भेटत।'
Imam Malik : 971
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِقَضَى فِي الْمَرْأَةِ إِذَا تَزَوَّجَهَا الرَّجُلُ أَنَّهُ إِذَا أُرْخِيَتْ السُّتُورُ فَقَدْ وَجَبَ الصَّدَاقُ
हमरा मलिक स याह्या [सैद बिन मुसैयब] स मलिक स याह्या द्वारा कहल गेल अछि जे [उमर बिन खट्टाब] एकटा एहन महिला क संबंध मे फैसला केलथि जेकर विवाह कोनो पुरुष स भ गेल छल: ‘जँ पर्दा उतारल गेल अछि त दहेज जरूर देब’।
Imam Malik : 972
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّ زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍ كَانَ يَقُولُإِذَا دَخَلَ الرَّجُلُ بِامْرَأَتِهِ فَأُرْخِيَتْ عَلَيْهِمَا السُّتُورُ فَقَدْ وَجَبَ الصَّدَاقُ
हमरा [इब्न शिहाब] सँ मलिक सँ रिवायत भेल जे [जैद बिन थाबीत] कहलनि; 'जँ पुरुष पत्नीसँ भेंट करैत छथि आ पर्दा नीचाँ कएल गेल अछि तखन महर अवश्य देबाक चाही' ।
Imam Malik : 973
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ هِشَامٍ الْمَخْزُومِيِّ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ تَزَوَّجَ أُمَّ سَلَمَةَ وَأَصْبَحَتْ عِنْدَهُ قَالَ لَهَا لَيْسَ بِكِ عَلَى أَهْلِكِ هَوَانٌ إِنْ شِئْتِ سَبَّعْتُ عِنْدَكِ وَسَبَّعْتُ عِنْدَهُنَّ وَإِنْ شِئْتِ ثَلَّثْتُ عِنْدَكِ وَدُرْتُ فَقَالَتْ ثَلِّثْ
याह्या हमरा [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर बिन मुहम्मद बिन अम्र बिन हज़म] स [अब्दुल मलिक इब्न अबू बकर इब्न अब्दुररहमान इब्न अल हरिथ इब्न हिशाम अल मखज़ूमी] स [अपन पिता] स मलिक स बतेलथि जे कहने छलाह, 'जखन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उम्म सलामाह सँ विवाह केलक आ दुनू गोटे एक संग छल, ओकरा कहलक: 'अहाँक परिवारक कोनो अनादर नहि अछि।' जँ अहाँक इच्छा होयत तँ हम अहाँक लेल सात दिन आ दोसर पत्नीक लेल सात दिन रहब। आ जँ अहाँ चाहब तँ हम तीन दिन अहाँक संग रहब, तखन बारी-बारीसँ रहब।' उम्म सलामा तखन जवाब देलखिन, 'हमरा तीन दिन दिअ।'
Imam Malik : 974
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُلِلْبِكْرِ سَبْعٌ وَلِلثَّيِّبِ ثَلَاثٌقَالَ مَالِك وَذَلِكَ الْأَمْرُ عِنْدَنَا
हमरा मलिक स [हुमैद अथ थाविल] स [अनस बिन मलिक] स कहलक अछि; 'लड़की लेल सात दिन, जखन कि विधवा लेल तीन दिन काफी'। मालिक बजलाह; 'हम सभ ओहि रायक प्रयोग करैत छी'।
Imam Malik : 975
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ الْمِسْوَرِ بْنِ رِفَاعَةَ الْقُرَظِيِّ عَنْ الزُّبَيْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الزَّبِيرِأَنَّ رِفَاعَةَ بْنَ سِمْوَالٍ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ تَمِيمَةَ بِنْتَ وَهْبٍ فِي عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثَلَاثًا فَنَكَحَتْ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ الزَّبِيرِ فَاعْتَرَضَ عَنْهَا فَلَمْ يَسْتَطِعْ أَنْ يَمَسَّهَا فَفَارَقَهَا فَأَرَادَ رِفَاعَةُ أَنْ يَنْكِحَهَا وَهُوَ زَوْجُهَا الْأَوَّلُ الَّذِي كَانَ طَلَّقَهَا فَذَكَرَ ذَلِكَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَهَاهُ عَنْ تَزْوِيجِهَا وَقَالَ لَا تَحِلُّ لَكَ حَتَّى تَذُوقَ الْعُسَيْلَةَ
यह्या हमरा मलिक स॑ [अल मिसवर बिन रिफाअह अल कुरादली] स॑ [जुबैर बिन अब्दुररहमान बिन जुबैर] स॑ बतैलकै जेकरा म॑ कहलऽ गेलऽ छेलै कि ‘रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के समय म॑ रिफाआ बिन सिमवाल न॑ अपनऽ पत्नी तमीमा बिंत वहाब स॑ तीन बार तलाक द॑ देलकै । तखन हुनक पूर्व पत्नीक विवाह अब्दुररहमान बिन जुबैर सँ भेलनि । ओना अब्दुररहमानकेँ एकटा समस्या भेलै किएक तँ ओ ओकरासँ संभोग नै कऽ पबैत छल , तेँ ओ फेर तमिमासँ तलाक दऽ देलक। तखन रिफाआ ओकरासँ फेरसँ विवाह करय चाहैत छल, कारण ओ पहिल पति छल जे ओकरासँ तलाक दऽ देने छल । तखन ई बात अल्लाह केर रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक पहुँचा देल गेल, मुदा ओ एकरा मना क देलखिन आ कहलनि: 'अहाँक लेल ओकरा संग फेर विवाह करब जायज नहि अछि, जा धरि ओ दोसर पुरुषक प्रेम - संभोग - केर मिठासक स्वाद नहि लेत।'
Imam Malik : 976
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّهَا سُئِلَتْ عَنْ رَجُلٍ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ الْبَتَّةَ فَتَزَوَّجَهَا بَعْدَهُ رَجُلٌ آخَرُ فَطَلَّقَهَا قَبْلَ أَنْ يَمَسَّهَا هَلْ يَصْلُحُ لِزَوْجِهَا الْأَوَّلِ أَنْ يَتَزَوَّجَهَا فَقَالَتْ عَائِشَةُ لَا حَتَّى يَذُوقَ عُسَيْلَتَهَا
हमरा मलिक स [याह्या बिन सईद] स [अल कासिम बिन मुहम्मद] स ['ऐस्याह] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी स कहल गेल अछि, एक बेर हुनका स एकटा एहन आदमी क बारे मे पूछल गेल छल जे अपन पत्नी स तलाक बैन - ट्रिपल थलक - स तलाक द देलक, फेर एकटा आओर आदमी ओकर विवाह क ओकरा संग यौन संबंध बनेबा स पहिने फेर स तलाक द देलक। त की हुनकर पहिल पति के फेर सं विवाह करब जायज अछि? 'ऐशा जबाब देलकै; 'नहि अनुमति, जा धरि ओकर पति - ओकर दोसर - ओकरा संग अंतरंग संबंधक सुख नहि महसूस क' सकैत अछि'.
Imam Malik : 977
و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يُجْمَعُ بَيْنَ الْمَرْأَةِ وَعَمَّتِهَا وَلَا بَيْنَ الْمَرْأَةِ وَخَالَتِهَا
यह्या हमरा [अबू अज़ जिनाद] स॑ मालिक स॑ [अबू हुरैरा] स॑ [अल अ’राज] स॑ बतैलकै कि अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह (स.अ.व.) न॑ कहलकै कि ‘एक महिला स॑ ओकरऽ पैतृक मौसी के साथ ही शादी करना जायज नै छै आरू ओकरऽ मातृक मौसी के साथ एक ही समय म॑ महिला स॑ शादी करना जायज नै छै ।’
Imam Malik : 978
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُيُنْهَى أَنْ تُنْكَحَ الْمَرْأَةُ عَلَى عَمَّتِهَا أَوْ عَلَى خَالَتِهَا وَأَنْ يَطَأَ الرَّجُلُ وَلِيدَةً وَفِي بَطْنِهَا جَنِينٌ لِغَيْرِهِ
हमरा मलिक स [याह्या बिन सईद] स [सैद बिन मुसैयब] स कहल गेल अछि कहल गेल अछि; 'स्त्री के पिता के तरफ या माय के तरफ से मौसी के साथ एकजुट करना जायज नै छै।' दोसरक भ्रूण ल' क' जा रहल पत्नीक संग यौन संबंध सेहो जायज नहि अछि।'
Imam Malik : 979
و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَ سُئِلَ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍعَنْ رَجُلٍ تَزَوَّجَ امْرَأَةً ثُمَّ فَارَقَهَا قَبْلَ أَنْ يُصِيبَهَا هَلْ تَحِلُّ لَهُ أُمُّهَا فَقَالَ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ لَا الْأُمُّ مُبْهَمَةٌ لَيْسَ فِيهَا شَرْطٌ وَإِنَّمَا الشَّرْطُ فِي الرَّبَائِبِ
हमरा कहल गेल अछि जे [याह्या बिन सईद] सँ मलिक सँ याह्या कहलनि; ' [जैद बिन थाबीत] स॑ पूछलऽ गेलै कि वू महिला के शादी करी क॑ ओकरा स॑ यौन संबंध बनाबै स॑ पहल॑ ओकरा तलाक द॑ दै छै, की ओकरऽ माय के शादी करना हलाल छै ?' जैद बिन थाबीत जबाब देलकै; 'नहि करबाक चाही।' कारण मायक स्थिति निर्दिष्ट नहि अछि, आ एकर कोनो शर्त नहि अछि । जे शर्तक उल्लेख कैल गेल छै ओ सौतेला बच्चाक कें लेल छै.
Imam Malik : 980
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الشِّغَارِوَالشِّغَارُ أَنْ يُزَوِّجَ الرَّجُلُ ابْنَتَهُ عَلَى أَنْ يُزَوِّجَهُ الْآخَرُ ابْنَتَهُ لَيْسَ بَيْنَهُمَا صَدَاقٌ
हमरा कहल गेल अछि जे मालिक सँ [नाफी’] सँ [अब्दुल्लाह बिन उमर] सँ याह्या कहलनि जे, ‘अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शिघर विवाह सँ मना कयलनि। स्यघर ओ व्यक्ति होइत अछि जे अपन बेटीक विवाह दोसर व्यक्ति सँ एहि शर्त पर करैत अछि जे ओ व्यक्ति अपन बेटीक विवाह अपना संग बिना दुनूक बीच दहेज केने करैत अछि |