Imam Malik : 921
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عُمَارَةَ بْنِ صَيَّادٍ أَنَّ عَطَاءَ بْنَ يَسَارٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا أَيُّوبَ الْأَنْصَارِيَّ أَخْبَرَهُ قَالَكُنَّا نُضَحِّي بِالشَّاةِ الْوَاحِدَةِ يَذْبَحُهَا الرَّجُلُ عَنْهُ وَعَنْ أَهْلِ بَيْتِهِ ثُمَّ تَبَاهَى النَّاسُ بَعْدُ فَصَارَتْ مُبَاهَاةً
हमरा [उमराह बिन शय्याद] स मालिक स रिवायत भेल जे [अथा बिन यासर] हुनका सूचित केलथि जे [अबू अय्यूब अल अंसारी] हुनका सूचित केलथि, ओ कहलथि, 'हम एक बेर एक व्यक्ति आ ओकर परिवार लेल बकरी क बलि देलहुं, जकर बाद जनता एक-दोसर पर गर्व केलक आ अहंकार के काज केलक'।
Imam Malik : 922
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ قَالَمَا نَحَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْهُ وَعَنْ أَهْلِ بَيْتِهِ إِلَّا بَدَنَةً وَاحِدَةً أَوْ بَقَرَةً وَاحِدَةًقَالَ مَالِك لَا أَدْرِي أَيَّتَهُمَا قَالَ ابْنُ شِهَابٍ
हमरा मलिक स कहने छल [इब्न शिहाब] स कहलक; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक ऊँट या एक गाय के अलावा कहियो अपना आ अपन परिवार के लेल कत्ल नै केलनि'। मालिक बजलाह; 'पता नहि इब्न शिहाब कोन एकटा कहलनि'।
Imam Malik : 923
و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَالَالْأَضْحَى يَوْمَانِ بَعْدَ يَوْمِ الْأَضْحَىو حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ بَلَغَهُ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ مِثْلُ ذَلِكَ
याह्या हमरा [नाफी’] स मालिक स बतेलथि जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] कहला जे ‘ईद अल-अधा के दिन के दू दिन बाद तक वध कयल जा सकैत अछि’। ओ हमरा मालिकसँ बतौलनि जे अली बिन अबू थालिबसँ हुनका लग ओही हदीस पहुँचि गेल छलनि' ।
Imam Malik : 924
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَلَمْ يَكُنْ يُضَحِّي عَمَّا فِي بَطْنِ الْمَرْأَةِقَالَ مَالِك الضَّحِيَّةُ سُنَّةٌ وَلَيْسَتْ بِوَاجِبَةٍ وَلَا أُحِبُّ لِأَحَدٍ مِمَّنْ قَوِيَ عَلَى ثَمَنِهَا أَنْ يَتْرُكَهَا
हमरा [नाफी’] स मालिक स रिवायत भेल जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] कहियो एहन चीज क लेल बलिदान नहि देलथि जे एखनो ओकर माय क पेट मे छल। मालिक बजलाह; 'बलिदान के नियम सुन्नत छै आरू फर्ज नै छै, लेकिन हमरा ई नापसंद छै, जे व्यक्ति के सामर्थ्य छै लेकिन छोड़ी दै छै।'
Imam Malik : 925
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَسُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقِيلَ لَهُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ نَاسًا مِنْ أَهْلِ الْبَادِيَةِ يَأْتُونَنَا بِلُحْمَانٍ وَلَا نَدْرِي هَلْ سَمَّوْا اللَّهَ عَلَيْهَا أَمْ لَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَمُّوا اللَّهَ عَلَيْهَا ثُمَّ كُلُوهَاقَالَ مَالِك وَذَلِكَ فِي أَوَّلِ الْإِسْلَامِ
हमरा कहल गेल अछि जे मालिक सँ [हिस्यम बिन उर्वाह] सँ [हुनकर पिता] सँ याह्या कहलनि; एक बेर रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछल गेल छल; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, बेदुइन के एकटा समूह हमरा सब लग बलिदान के मांस ल क आयल छल, मुदा हमरा सब के पता नै अछि जे ओ सब वध करय काल बसमला पढ़ैत छल या नै?' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: ‘बसमला पढ़ू, फेर खाउ’। मालिक बजलाह; 'ई इस्लाम के शुरुआत में भेल छल'।
Imam Malik : 926
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَيَّاشِ بْنِ أَبِي رَبِيعَةَ الْمَخْزُومِيَّأَمَرَ غُلَامًا لَهُ أَنْ يَذْبَحَ ذَبِيحَةً فَلَمَّا أَرَادَ أَنْ يَذْبَحَهَا قَالَ لَهُ سَمِّ اللَّهَ فَقَالَ لَهُ الْغُلَامُ قَدْ سَمَّيْتُ فَقَالَ لَهُ سَمِّ اللَّهَ وَيْحَكَ قَالَ لَهُ قَدْ سَمَّيْتُ اللَّهَ فَقَالَ لَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَيَّاشٍ وَاللَّهِ لَا أَطْعَمُهَا أَبَدًا
हमरा मलिक स [याह्या बिन सईद] स कहल गेल अछि जे [अब्दुल्लाह बिन अय्यास बिन अबू रबियाह अल मखज़ूमी] अपन दास कए एकटा जानवर क वध करबाक आदेश देलथि, आ जखन हुनकर दास ओकरा कत्ल करय बला छल तखन ओ हुनका कहलथि, ‘बसमल्लाह पढ़ू! ' दास उत्तर देलक; 'हम पढ़ि लेने छी'। अब्दुल्ला फेर बजलाह - हाय हमरा सभक, पढ़ू बसमल्लाह! ' दास फेर उत्तर देलक; 'हम पढ़ि लेने छी'। अब्दुल्ला बिन अय्यास हुनका कहलनि; 'अल्लाहक कसम हम कहियो नहि खाएब'।
Imam Malik : 927
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَجُلًا مِنْ الْأَنْصَارِ مِنْ بَنِي حَارِثَةَ كَانَ يَرْعَى لِقْحَةً لَهُ بِأُحُدٍ فَأَصَابَهَا الْمَوْتُ فَذَكَّاهَا بِشِظَاظٍ فَسُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ لَيْسَ بِهَا بَأْسٌ فَكُلُوهَا
हमरा कहल गेल अछि जे मलिक सँ [जैद बिन असलम] सँ [अथा’ बिन यासर] सँ याह्या कहलनि, ‘बनी हरिथा सँ एकटा अंसार आदमी एक बेर उहुद खेत मे दूधक ऊँट चरैत छल, तखन ऊँट ताबत धरि मरि गेल जाबत धरि ओ ओकरा तेज लाठी सँ नहि मारि देलक। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स तखन एहि बारे मे पूछल गेल, ओ जवाब देलथि; 'कोनो बात नै, मांस खाउ'।
Imam Malik : 928
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ رَجُلٍ مِنْ الْأَنْصَارِ عَنْ مُعَاذِ بْنِ سَعْدٍ أَوْ سَعْدِ بْنِ مُعَاذٍأَنَّ جَارِيَةً لِكَعْبِ بْنِ مَالِكٍ كَانَتْ تَرْعَى غَنَمًا لَهَا بِسَلْعٍ فَأُصِيبَتْ شَاةٌ مِنْهَا فَأَدْرَكَتْهَا فَذَكَّتْهَا بِحَجَرٍ فَسُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ لَا بَأْسَ بِهَا فَكُلُوهَا
हमरा [नाफी’ स मालिक स] [अंसार] स [मुअदज बिन सअद] स कहल गेल अछि या सअद बिन मुअदज कहला अछि, 'पूर्व दास काअब बिन मलिक साल मे बकरी चरैत अछि'। तखन एकटा बकरी छल जे लगभग मरि गेल छल, तेँ ओ ओकरा पाथर सँ मारि देलक। जखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स एहि बारे मे पूछल गेल त ओ जवाब देलथि; 'कोनो बात नै, मांस खाउ'।
Imam Malik : 929
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ثَوْرِ بْنِ زَيْدٍ الدِّيلِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍأَنَّهُ سُئِلَ عَنْ ذَبَائِحِ نَصَارَى الْعَرَبِ فَقَالَ لَا بَأْسَ بِهَا وَتَلَا هَذِهِ الْآيَةَ{ وَمَنْ يَتَوَلَّهُمْ مِنْكُمْ فَإِنَّهُ مِنْهُمْ }و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ كَانَ يَقُولُ مَا فَرَى الْأَوْدَاجَ فَكُلُوهُ
मलिक हमरा [त्सौर बिन जैद अद-दिली] स [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] स कहलथि जे एक बेर हुनका स अरब ईसाई क कत्ल क बारे मे पूछल गेल छल। इब्न अब्बास तखन जवाब देलखिन, 'ठीक छै'। तखन ओ ई श्लोक पढ़लनि: '-जे हुनका सभ केँ -ईसाई- अहाँ सभक लेल रक्षक बना दैत छथि तखन सचमुच ओ हुनका सभक हिस्सा छथि-' -प्र. अल मैदा : 51- हमरा मलिक सँ कहल गेल अछि जे ई बात हुनका लग पहुँचि गेल अछि जे अब्दुल्ला बिन अब्बास कहलनि; 'कोनो एहन चीज जे जानवरक गला नस केँ काटि सकैत अछि, तखन ओकर मांस खा सकैत अछि' ।
Imam Malik : 930
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُمَا ذُبِحَ بِهِ إِذَا بَضَعَ فَلَا بَأْسَ بِهِ إِذَا اضْطُرِرْتَ إِلَيْهِ
हमरा मलिक स [याह्या बिन सईद] स [सैद बिन मुसैयब] स कहल गेल अछि कहल गेल अछि; 'पशु के नस कटला पर वध कयल जाइत छैक, तेँ जरूरत पड़ला पर ओकरा खाएब जायज अछि' ।
Imam Malik : 931
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي مُرَّةَ مَوْلَى عَقِيلِ بْنِ أَبِي طَالِبٍ أَنَّهُ سَأَلَ أَبَا هُرَيْرَةَعَنْ شَاةٍ ذُبِحَتْ فَتَحَرَّكَ بَعْضُهَا فَأَمَرَهُ أَنْ يَأْكُلَهَاثُمَّ سَأَلَ عَنْ ذَلِكَ زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍ فَقَالَ إِنَّ الْمَيْتَةَ لَتَتَحَرَّكُ وَنَهَاهُ عَنْ ذَلِكَ
याह्या हमरा मालिक स याह्या बिन सैद स अकील बिन अबू थालिब के पूर्व गुलाम अबू मुर्रा स बता देलखिन। ओ अबू हुरैरा सँ एकटा बकरी के बारे मे पूछलखिन्ह जे कत्ल भ गेल छल मुदा ओकर शरीर के किछु हिस्सा एखनो हिलैत छल. अबू हुरैरा तखन कहलखिन जे खाउ। अबू मुर्रा फेर जैद बिन थाबित सँ पुछलखिन। जैद जबाब देलक, ‘शव एकटा एहन जानवर अछि जकरा वध भ’ गेल अछि मुदा एखनो चलैत अछि,’ तखन ओकरा खाय सँ मना क’ देलक।
Imam Malik : 932
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُإِذَا نُحِرَتْ النَّاقَةُ فَذَكَاةُ مَا فِي بَطْنِهَا فِي ذَكَاتِهَا إِذَا كَانَ قَدْ تَمَّ خَلْقُهُ وَنَبَتَ شَعَرُهُ فَإِذَا خَرَجَ مِنْ بَطْنِ أُمِّهِ ذُبِحَ حَتَّى يَخْرُجَ الدَّمُ مِنْ جَوْفِهِ
हमरा मलिक सँ याह्या [नफी'] सँ [अब्दुल्लाह बिन उमर] सँ कहलक अछि; 'जँ ऊँट के वध कयल जाय त' ऊँटक भीतरक भ्रूण के ओहिना नियम छैक जेना ऊँट के वध कयल गेल छैक, बशर्ते भ्रूण सिद्ध हो आ केश बढ़य।' जँ मायक पेटसँ बाहर निकलल अछि तँ जा धरि अन्ननलिकासँ खून नहि निकलि जाए ता धरि ओकरा वध करए पड़त' ।
Imam Malik : 933
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ قُسَيْطٍ اللَّيْثِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُذَكَاةُ مَا فِي بَطْنِ الذَّبِيحَةِ فِي ذَكَاةِ أُمِّهِ إِذَا كَانَ قَدْ تَمَّ خَلْقُهُ وَنَبَتَ شَعَرُهُ
हमरा मालिक स [यजीद बिन अब्दुल्लाह बिन कुसैथ अल लैत्सी] स [सैद बिन मुसैयब] स कहलक अछि ओ कहलक; 'माय के पेट में भ्रूण के नियम वध करला पर माय के समान छै।' ई तखन होइत अछि जखन भ्रूण एकदम सही हो आ केश बढ़ैत हो' ।
Imam Malik : 934
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّهُ قَالَرَمَيْتُ طَائِرَيْنِ بِحَجَرٍ وَأَنَا بِالْجُرْفِ فَأَصَبْتُهُمَا فَأَمَّا أَحَدُهُمَا فَمَاتَ فَطَرَحَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ وَأَمَّا الْآخَرُ فَذَهَبَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ يُذَكِّيهِ بِقَدُومٍ فَمَاتَ قَبْلَ أَنْ يُذَكِّيَهُ فَطَرَحَهُ عَبْدُ اللَّهِ أَيْضًا
हमरा [नाफी'] स मालिक स याह्या कहने छल ओ कहलक; 'हम एक बेर पाथरसँ दू टा चिड़ै फेकि देने रही, ओहि समय हम पहाड़ीक ढाल पर छलहुँ ।' पाथर दुनू गोटेकेँ लागल जाहिसँ एक गोटेक मृत्यु भऽ गेलनि । [अब्दुल्लाह बिन उमर] शव के फेंक देलखिन जखन कि - दोसर - अब्दुल्ला बिन उमर ओकरा कुल्हाड़ी स वध करय लेल ल गेलखिन मुदा चिड़ै के वध स पहिने मरि गेल छल ताहि लेल इब्न उमर ओकरा सेहो फेंक देलखिन'।
Imam Malik : 935
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّهُ كَانَ يَقُولُ فِي الْكَلْبِ الْمُعَلَّمِ كُلْ مَا أَمْسَكَ عَلَيْكَ إِنْ قَتَلَ وَإِنْ لَمْ يَقْتُلْ و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَمِعَ نَافِعًا يَقُولُ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ وَإِنْ أَكَلَ وَإِنْ لَمْ يَأْكُلْ
याह्या हमरा मलिक सं [नाफी'] सं [अब्दुल्लाह बिन उमर] सं कहलनि जे ओ प्रशिक्षित कुकुरक बारे में कहलनि; 'पकड़ल जानवर खाउ, चाहे मारल गेल हो वा नहि'। मालिकसँ कहने छल जे नाफीक कहब सुनने छल; अब्दुल्ला बिन उमर कहलनि; 'खेल खायल गेल अछि वा नहि'।
Imam Malik : 936
و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ أَبِي هُرَيْرَةَ سَأَلَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ عَمَّا لَفَظَ الْبَحْرُ فَنَهَاهُ عَنْ أَكْلِهِ قَالَ نَافِعٌ ثُمَّ انْقَلَبَ عَبْدُ اللَّهِفَدَعَا بِالْمُصْحَفِ فَقَرَأَ{ أُحِلَّ لَكُمْ صَيْدُ الْبَحْرِ وَطَعَامُهُ }قَالَ نَافِعٌ فَأَرْسَلَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ إِلَى عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي هُرَيْرَةَ إِنَّهُ لَا بَأْسَ بِأَكْلِهِ
याह्या हमरा [नाफी’] स मालिक स बतेलथि जे अब्दुररहमान बिन अबू हुरैरा [अब्दुल्लाह बिन उमर] स ओहि जानवर क बारे मे पूछलथि जे समुद्र स उल्टी होइत अछि। इब्न उमर एकरा खाय सं मना क देलखिन्ह. नाफी' कहलकै: 'अब्दुल्लाह एकटा मुशफ के आनै के लेल कहलकै आरू ओकरा बाद एक आयत पढ़लकै: "समुद्र के खेल आरू ओकरऽ खाना तोरा लेली जायज होय गेलऽ छै।" नफी' कहलकै, 'अब्दुल्ला बिन उमर हमरा अब्दुररहमान बिन अबू हुरैरा के पास भेजलकै कि ओकरा ई बताय देलऽ जाय कि खाना जायज छै।'
Imam Malik : 937
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ سَعْدٍ الْجَارِيِّ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ أَنَّهُ قَالَ سَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَعَنْ الْحِيتَانِ يَقْتُلُ بَعْضُهَا بَعْضًا أَوْ تَمُوتُ صَرَدًا فَقَالَ لَيْسَ بِهَا بَأْسٌقَالَ سَعْدٌ ثُمَّ سَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ فَقَالَ مِثْلَ ذَلِكَ
हमरा मलिक स [जैद बिन असलम] स [सअद अल जारी] पूर्व गुलाम उमर बिन खत्ताब स कहलक अछि, कहलक; 'हम [अब्दुल्ला बिन उमर] स पूछलियैन जे ह्वेल के एकटा समूह एक दोसरा के मारय के बारे में, या ह्वेल के जमैत मरि जाय के बारे में'. इब्न उमर उत्तर देलनि; 'से त' ठीक छै'। सा'द कहलक; 'हम तखन [अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन ऐश] सँ फेर पूछलहुँ मुदा ओ सेहो इब्न उमर केर अनुसार जवाब देलनि।'
Imam Malik : 938
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَزَيْدِ بْنِ ثَابِتٍأَنَّهُمَا كَانَا لَا يَرَيَانِ بِمَا لَفَظَ الْبَحْرُ بَأْسًا
हमरा [अबू अज़ जिनाद] स मालिक स [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान] स [अबू हुरैरा] स आ [जैद बिन थाबीत] स कहल गेल अछि जे दुनू गोटे समुद्र स किनार पर धोल गेल मृत जानवर कए खाए लेल हलाल मानैत छलाह।
Imam Malik : 939
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ نَاسًا مِنْ أَهْلِ الْجَارِ قَدِمُوا فَسَأَلُوا مَرْوَانَ بْنَ الْحَكَمِ عَمَّا لَفَظَ الْبَحْرُ فَقَالَ لَيْسَ بِهِ بَأْسٌ وَقَالَ اذْهَبُوا إِلَى زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ وَأَبِي هُرَيْرَةَفَاسْأَلُوهُمَا عَنْ ذَلِكَ ثُمَّ ائْتُونِي فَأَخْبِرُونِي مَاذَا يَقُولَانِ فَأَتَوْهُمَا فَسَأَلُوهُمَا فَقَالَا لَا بَأْسَ بِهِفَأَتَوْا مَرْوَانَ فَأَخْبَرُوهُ فَقَالَ مَرْوَانُ قَدْ قُلْتُ لَكُمْ
हमरा [अबू अज़ जिनाद] स मालिक स [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान] स रिवायत अछि जे लोक क एकटा समूह [मरवान बिन अल हकम] लग आयल छल, ओ सब ओहि मृत जानवर क बारे मे पूछलक जे समुद्र स किनार पर बहल छल?' मरवान बिन अल हकम जबाब देलकै; 'से कोनो दिक्कत नहि'। तखन मरवान कहलनि, '[जैद बिन थाबीत] आ [अबू हुरैरा] लग जाउ, हुनका सभ सँ एहि विषय मे पूछू, तखन हमरा जवाबक सूचना दियौक'। तखन ओ सभ हुनका सभ लग आबि एहि विषय मे पुछलनि। दुनू गोटे जबाब देलखिन; 'से कोनो दिक्कत नहि'। तकर बाद ओ सभ मरवान लग आबि हुनका उत्तरक सूचना देलनि । मरवान बजलाह; 'ओ उत्तर ओहिना अछि जेना हम अहाँकेँ कहने रही' ।
Imam Malik : 940
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلَانِيِّ عَنْ أَبِي ثَعْلَبَةَ الْخُشَنِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَكْلُ كُلِّ ذِي نَابٍ مِنْ السِّبَاعِ حَرَامٌ
हमरा मलिक स याह्या द्वारा [इब्न शिहाब] स [अबू इदरीश अल खौलानी] स [अबू त्सा'लाबा अल खुसियानी] स कहल गेल अछि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे कोनो जंगली जानवर कए खाएब जेकर फंग होएत अछि, ओ हरम अछि।