Imam Malik : 61
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ يَأْخُذُ الْمَاءَ بِأُصْبُعَيْهِ لِأُذُنَيْهِ
हमरा [नाफी’] स मालिक स कहल गेल छल, जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] अपन दूनू कान लेल अपन दू आँगुर स पानि लेलथि।
Imam Malik : 62
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ أَنَّ أَبَاهُ عُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِكَانَ يَنْزِعُ الْعِمَامَةَ وَيَمْسَحُ رَأْسَهُ بِالْمَاءِ
हमरा [हिशाम बिन उर्वाह] स मालिक स रिवायत भेल जे हुनकर पिता - [उर्वाह बिन अज़ जुबैर] - अपन पाग उतारि हुनकर माथ पानि स पोछि लेलथि।
Imam Malik : 63
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّهُ رَأَى صَفِيَّةَ بِنْتَ أَبِي عُبَيْدٍ امْرَأَةَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَتَنْزِعُ خِمَارَهَا وَتَمْسَحُ عَلَى رَأْسِهَا بِالْمَاءِ وَنَافِعٌ يَوْمَئِذٍ صَغِيرٌ
हमरा [नफी’] स मालिक स रिवायत भेल जे ओ [शफियाह बिंत अबू उबैद] - अब्दुल्ला बिन उमर क पत्नी - कए अपन घूंघट निकालि कए माथ पानि स धोबैत देखलथि, आ नाफी ओहि समय एखनो बच्चा छल।
Imam Malik : 64
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَبَّادِ بْنِ زِيَادٍ مِنْ وَلَدِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَهَبَ لِحَاجَتِهِ فِي غَزْوَةِ تَبُوكَ قَالَ الْمُغِيرَةُ فَذَهَبْتُ مَعَهُ بِمَاءٍ فَجَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَكَبْتُ عَلَيْهِ الْمَاءَ فَغَسَلَ وَجْهَهُ ثُمَّ ذَهَبَ يُخْرِجُ يَدَيْهِ مِنْ كُمَّيْ جُبَّتِهِ فَلَمْ يَسْتَطِعْ مِنْ ضِيقِ كُمَّيْ الْجُبَّةِ فَأَخْرَجَهُمَا مِنْ تَحْتِ الْجُبَّةِ فَغَسَلَ يَدَيْهِ وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ وَمَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ فَجَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ يَؤُمُّهُمْ وَقَدْ صَلَّى بِهِمْ رَكْعَةً فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الرَّكْعَةَ الَّتِي بَقِيَتْ عَلَيْهِمْ فَفَزِعَ النَّاسُ فَلَمَّا قَضَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَحْسَنْتُمْ
हमरा कहल गेल अछि जे याह्या मलिक सं [इब्न शिहाब] सं [अब्बाद बिन जियाद] मुगीरा बिन स्यूबाह के बेटा सं, हुनकर पिता सं [मुगीरा बिन स्यूबाह] सं; कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तबुक के लड़ाई के दौरान आवश्यकता के कारण चलि गेलाह | मुगिरा बजलाह; 'हम हुनका संग पानि ल' क' गेलहुँ, तखन रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम आबि गेलाह, तें हम हुनका पर पानि ढारि देलियनि, ओ हुनकर मुँह धो लेलनि तखन अपन वस्त्रक आस्तीन सँ हाथ निकालि लेलनि, मुदा ओ नहि क' सकलाह, कारण वस्त्रक आस्तीन संकीर्ण छल, तें ओ वस्त्रक नीचाँ सँ ओकरा सभ केँ निकालि लेलनि, जाहि सँ ओ हाथ धो सकैत छल, माथ आ अपन दू खुफ पोछि सकैत छल'। तखन रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आबय लेल दौड़ल मुदा अब्दुररहमान बिन औफ पहिने सँ लोकक नेतृत्व क' चुकल छलाह आ हुनका संग एक रकाआ समाप्त क' लेने छलाह, तखन रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शेष रका' समाप्त केलनि, आ जखन समाप्त भ' गेल त' कहलनि: 'नीक'.
Imam Malik : 65
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ أَنَّهُمَا أَخْبَرَاهُأَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَدِمَ الْكُوفَةَ عَلَى سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ وَهُوَ أَمِيرُهَا فَرَآهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ يَمْسَحُ عَلَى الْخُفَّيْنِ فَأَنْكَرَ ذَلِكَ عَلَيْهِ فَقَالَ لَهُ سَعْدٌ سَلْ أَبَاكَ إِذَا قَدِمْتَ عَلَيْهِ فَقَدِمَ عَبْدُ اللَّهِ فَنَسِيَ أَنْ يَسْأَلَ عُمَرَ عَنْ ذَلِكَ حَتَّى قَدِمَ سَعْدٌ فَقَالَ أَسَأَلْتَ أَبَاكَ فَقَالَ لَا فَسَأَلَهُ عَبْدُ اللَّهِ فَقَالَ عُمَرُ إِذَا أَدْخَلْتَ رِجْلَيْكَ فِي الْخُفَّيْنِ وَهُمَا طَاهِرَتَانِ فَامْسَحْ عَلَيْهِمَا قَالَ عَبْدُ اللَّهِ وَإِنْ جَاءَ أَحَدُنَا مِنْ الْغَائِطِ فَقَالَ عُمَرُ نَعَمْ وَإِنْ جَاءَ أَحَدُكُمْ مِنْ الْغَائِطِ
हमरा मालिक सं [नाफी’] सं कहने छलाह आ [अब्दुल्लाह बिन दिनार] दुनू गोटे हुनका सूचित केलनि; कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] कुफा के अमीर [सअद बिन अबू वक्कास] स भेंट करय लेल कुफा आयल छलाह | तखन अब्दुल्ला बिन उमर हुनका अपन दू खुफ पोछैत देखलनि आ ओ एकरा नकारलनि । तेँ स'द कहलक; 'अपन बाबूजी सँ पूछू, जखन अहाँ हुनका लग पहुँचि गेलहुँ,' जखन ओ पहुँचलाह तखन ओ उमर सँ एहि विषय मे पूछब बिसरि गेलाह, जाबत स'द आबि क' पुछलनि; 'अहाँ अपन पितासँ पुछने छी ?' ओ उत्तर देलनि; 'एखन नहि'। अब्दुल्ला -अपन पिता- सँ पुछलकै, तखन -[उमर बिन खट्टाब]- जवाब देलकै; 'जँ दुनू पैर शुद्ध अवस्था मे राखब तखन पोछब काफी अछि' अब्दुल्ला कहलनि; 'भले हमरा सभ मे सँ एक गोटे एखनहि टट्टी क' देलक?' उमर बजलाह; 'हँ, भले ओ एखनहि शौच केने होथि'।
Imam Malik : 66
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَبَالَ فِي السُّوقِ ثُمَّ تَوَضَّأَ فَغَسَلَ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ وَمَسَحَ رَأْسَهُ ثُمَّ دُعِيَ لِجَنَازَةٍ لِيُصَلِّيَ عَلَيْهَا حِينَ دَخَلَ الْمَسْجِدَ فَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ ثُمَّ صَلَّى عَلَيْهَا
हमरा [नाफी’] स मालिक स रिवायत भेल जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] बाजार मे पेशाब करैत छलाह, फेर वज़ूद करैत छलाह, चेहरा आ हाथ धोबैत छलाह, माथ पोछैत छलाह, आ फेर मस्जिद मे प्रवेश करबा पर मृतक पर नमाज पढ़बा लेल कहल गेल छल। तेँ ओ मात्र अपन दू टा खुफ पोछि लेलक, आ फेर मृतक पर नमाज पढ़लक।
Imam Malik : 67
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سَعِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ رُقَيْشٍ أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍأَتَى قُبَا فَبَالَ ثُمَّ أُتِيَ بِوَضُوءٍ فَتَوَضَّأَ فَغَسَلَ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ وَمَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ ثُمَّ جَاءَ الْمَسْجِدَ فَصَلَّى
हमरा मलिक सँ रिवायत भेल जे [सैद बिन अब्दुररहमान बिन रुकैसी] कहलनि; 'हम देखलहुँ [अनस बिन मलिक] केँ कुबा आबि रहल छल`, ओ पेशाब केलनि, तखन हुनका वजूद लेल पानि देल गेलनि, तें ओ अपन चेहरा आ दुनू हाथ कोहनी धरि धो क' वजूद केलनि, माथ आ खुफ पोछलनि तखन मस्जिद आबि नमाज पढ़लनि'.
Imam Malik : 68
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ أَنَّهُ رَأَى أَبَاهُيَمْسَحُ عَلَى الْخُفَّيْنِ قَالَ وَكَانَ لَا يَزِيدُ إِذَا مَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ عَلَى أَنْ يَمْسَحَ ظُهُورَهُمَا وَلَا يَمْسَحُ بُطُونَهُمَا
मलिक हमरा हिशाम बिन उर्वाह सँ बतौलनि जे ओ अपन पिता केँ अपन दुनू खुफ पोछैत देखलनि। हिशाम कहलकै, 'ओ ओकरा सभकेँ धोबैत काल बेसी नहि केलकै; ओ मात्र ऊपरका भाग धो कऽ निचला भागकेँ असगरे छोड़ि देलक।'
Imam Malik : 69
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍعَنْ الْمَسْحِ عَلَى الْخُفَّيْنِ كَيْفَ هُوَ فَأَدْخَلَ ابْنُ شِهَابٍ إِحْدَى يَدَيْهِ تَحْتَ الْخُفِّ وَالْأُخْرَى فَوْقَهُ ثُمَّ أَمَرَّهُمَا
मालिक स कहने छलाह, ओ [इब्न शिहाब] स दुनू खुफ धोबय के बारे मे पूछने छलाह, कोना करब? अस्तु इब्न शिहाब एकटा हाथ ओकर नीचाँ आ दोसर हाथ ओकरा ऊपर राखि देलकैक, तखन दुनू गोटे केँ झाड़ि देलकैक।
Imam Malik : 70
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ إِذَا رَعَفَ انْصَرَفَ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ رَجَعَ فَبَنَى وَلَمْ يَتَكَلَّمْ
याह्या हमरा [नाफी’] स मालिक स बतेलथि जे अगर [अब्दुल्लाह बिन उमर] कए नाक स खून बहैत छल त ओ बाहर निकलि जाइत छलाह, वजूद करैत छलाह, फेर वापस आबि कए बिना एक शब्द बजने अपन नमाज जारी रखैत छलाह।
Imam Malik : 71
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ قُسَيْطٍ اللَّيْثِيِّ أَنَّهُ رَأَى سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِرَعَفَ وَهُوَ يُصَلِّي فَأَتَى حُجْرَةَ أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأُتِيَ بِوَضُوءٍ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ رَجَعَ فَبَنَى عَلَى مَا قَدْ صَلَّى
मालिक हमरा बतौलनि जे [यजीद बिन अब्दुल्लाह बिन कुसैथ अल-लैत्सी] [सैद बिन मुसैयब] के नमाज पढ़ैत काल नाक स खून बहैत देखलनि। तखन ओ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पत्नी उम्म सलामा के कोठरी में गेलाह आ वज़ूद के लेल पानि देल गेलैन, फेर वज़ूद केलनि आ नमाज जारी रखलनि।
Imam Malik : 72
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَرْمَلَةَ الْأَسْلَمِيِّ أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِيَرْعُفُ فَيَخْرُجُ مِنْهُ الدَّمُ حَتَّى تَخْتَضِبَ أَصَابِعُهُ مِنْ الدَّمِ الَّذِي يَخْرُجُ مِنْ أَنْفِهِ ثُمَّ يُصَلِّي وَلَا يَتَوَضَّأُ
हमरा [अब्दुररहमान बिन हरमलाह अल असलमी] स मालिक स कहने छल कहने छल; 'हम देखलहुँ जे [सैद बिन मुसैयब] केँ नाक सँ खून बहैत छलैक, नाक सँ खून निकलि रहल छलैक, जाबत ओकर हाथ नाक सँ खून निकलि रहल छलैक, मुदा ओ एखनो नमाज पढ़ि रहल छलैक आ वज़ूद नहि क' रहल छलैक'।
Imam Malik : 73
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْمُجَبَّرِ أَنَّهُ رَأَى سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِيَخْرُجُ مِنْ أَنْفِهِ الدَّمُ حَتَّى تَخْتَضِبَ أَصَابِعُهُ ثُمَّ يَفْتِلُهُ ثُمَّ يُصَلِّي وَلَا يَتَوَضَّأُ
मलिक हमरा बतौलनि जे [अब्दुररहमान बिन अल मुजब्बर] [सलीम बिन अब्दुल्लाह] के नाक सं खून बहैत देखलनि जाबत धरि हुनकर हाथ खून सं लथपथ नहि भ गेलनि. प्लग लगा देलनि आ फेर बिना वजूद केने नमाज पढ़लनि।
Imam Malik : 74
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ الْمِسْوَرَ بْنَ مَخْرَمَةَ أَخْبَرَهُأَنَّهُ دَخَلَ عَلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ مِنْ اللَّيْلَةِ الَّتِي طُعِنَ فِيهَا فَأَيْقَظَ عُمَرَ لِصَلَاةِ الصُّبْحِ فَقَالَ عُمَرُ نَعَمْ وَلَا حَظَّ فِي الْإِسْلَامِ لِمَنْ تَرَكَ الصَّلَاةَ فَصَلَّى عُمَرُ وَجُرْحُهُ يَثْعَبُ دَمًا
याह्या हमरा मालिक सँ [हिशाम बिन उर्वाह] सँ [अपन पिता] सँ बतौलनि; कि [अल मिसवर बिन मखरामा] हुनका सूचित केलनि, ओ [उमर बिन खट्टाब] सँ ओहि राति भेंट केलनि जखन हुनका चाकू मारल गेल छलनि, फेर उमर केँ भोरका नमाज लेल जगौलनि, तखन ओ कहलनि: 'हँ।' नमाज छोड़निहारक इस्लाम मे कोनो हिस्सा नहि छैक,’ तेँ उमर नमाज केलनि जखन कि हुनकर घाव मे एखनो खून बहैत छलनि।
Imam Malik : 75
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ قَالَمَا تَرَوْنَ فِيمَنْ غَلَبَهُ الدَّمُ مِنْ رُعَافٍ فَلَمْ يَنْقَطِعْ عَنْهُ قَالَ مَالِك قَالَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ ثُمَّ قَالَ سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ أَرَى أَنْ يُومِئَ بِرَأْسِهِ إِيمَاءًقَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك وَذَلِكَ أَحَبُّ مَا سَمِعْتُ إِلَيَّ فِي ذَلِكَ
हमरा [याह्या बिन सईद] स मालिक स कहल गेल अछि जे [सैद बिन मुसैयब] पूछलथि; 'अहाँक की विचार अछि जे नाकक खून बहबाक कारणेँ खूनसँ लथपथ भ' गेल हो आ ओकरासँ खून बहैत रहैत अछि,' मलिक बजलाह, याह्या बिन सैइद कहलनि; सईद बिन मुसैयब कहलनि; 'हमर विचारक छी; माथसँ संकेत करबाक चाही'। याह्या कहलक, मालिक कहलक; 'एहि मामला पर सुनल सबसँ नीक राय इएह अछि'।
Imam Malik : 76
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي النَّضْرِ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ عَنْ الْمِقْدَادِ بْنِ الْأَسْوَدِأَنَّ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ أَمَرَهُ أَنْ يَسْأَلَ لَهُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الرَّجُلِ إِذَا دَنَا مِنْ أَهْلِهِ فَخَرَجَ مِنْهُ الْمَذْيُ مَاذَا عَلَيْهِ قَالَ عَلِيٌّ فَإِنَّ عِنْدِي ابْنَةَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا أَسْتَحِي أَنْ أَسْأَلَهُ قَالَ الْمِقْدَادُ فَسَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ إِذَا وَجَدَ ذَلِكَ أَحَدُكُمْ فَلْيَنْضَحْ فَرْجَهُ بِالْمَاءِ وَلْيَتَوَضَّأْ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِ
याह्या हमरा उमर बिन उबैदुल्लाह के पूर्व गुलाम [अबू नडलर] स मालिक स, [सुलेमान बिन यासर] स [अल मिकदाद बिन अल असवद] स बतेलथि; कि अली बिन अबू तालिब हुनका कहलकै कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स एकटा एहन आदमी के बारे में पूछू जे अपन पत्नी के पास पहुंचैत अछि आ फेर हुनकर मुँह स बाहर निकलैत अछि। ओकरा की करबाक चाही? अली बजलाह; 'किएक त' हमर पत्नी अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) केर बेटी छथि, हमरा हुनका सँ पूछबा मे लाज होइत अछि।' मिकदाद बाजल; तखन हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स एहि बारे मे पूछलहुं, त ओ जवाब देलथि जे अगर अहां सब मे स कियो एहन पाबि गेल त ओकर जननांग पर पानि छिड़कि दियौ आ फेर नमाज के तरह वज़ूद करू।
Imam Malik : 77
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَإِنِّي لَأَجِدُهُ يَنْحَدِرُ مِنِّي مِثْلَ الْخُرَيْزَةِ فَإِذَا وَجَدَ ذَلِكَ أَحَدُكُمْ فَلْيَغْسِلْ ذَكَرَهُ وَلْيَتَوَضَّأْ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِ يَعْنِي الْمَذْيَ
हमरा [जैद बिन असलम] स मालिक स [हुनकर पिता] स रिवायत भेल जे [उमर बिन अल खत्ताब] कहला जे हमरा इ स्फटिक के दाना जेकां भेटल, ताहि लेल जौं अहाँ मे स कियो एहन अनुभव करैत अछि त ओ अपन जननांग धोबय आ नमाज के लेल वज़ूज के तरह वजूद करय,' -आ एकर मतलब अछि मधी-।
Imam Malik : 78
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ جُنْدُبٍ مَوْلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَيَّاشٍ أَنَّهُ قَالَسَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ عَنْ الْمَذْيِ فَقَالَ إِذَا وَجَدْتَهُ فَاغْسِلْ فَرْجَكَ وَتَوَضَّأْ وُضُوءَكَ لِلصَّلَاةِ
हमरा ई मलिक सँ [जैद बिन असलम] सँ [जुंदुब] अब्दुल्लाह बिन अय्यासी के पूर्व गुलाम सँ कहल गेल अछि, जे ओ कहलनि; हम [अब्दुल्लाह बिन उमर] स मद्जी क बारे मे पूछलहुं, त ओ जवाब देलथि; 'जखन भेटत तखन जननांग धोउ, जहिना नमाज लेल वजूद करैत छी तहिना वजूद करू'।
Imam Malik : 79
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ سَمِعَهُ وَرَجُلٌ يَسْأَلُهُ فَقَالَ إِنِّي لَأَجِدُ الْبَلَلَ وَأَنَا أُصَلِّي أَفَأَنْصَرِفُ فَقَالَ لَهُ سَعِيدٌلَوْ سَالَ عَلَى فَخِذِي مَا انْصَرَفْتُ حَتَّى أَقْضِيَ صَلَاتِي
याह्या हमरा सईद बिन मुसैयब स याह्या बिन सैद स मालिक स बतेलथि जे ओ एकटा आदमी स पूछैत सुनलथि, आ ओ कहलथि जे नमाज पढ़ैत काल हमरा पर किछु भीजल भेटल, की हम ओकरा तोड़ि दी? सईद कहलक जे भले ओ हमर जाँघसँ नीचाँ बहैत हो मुदा जा धरि नमाज समाप्त नहि क' लेब ता धरि ओकरा नहि तोड़ब।'
Imam Malik : 80
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ الصَّلْتِ بْنِ زُيَيْدٍ أَنَّهُ قَالَ سَأَلْتُ سُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍعَنْ الْبَلَلِ أَجِدُهُ فَقَالَ انْضَحْ مَا تَحْتَ ثَوْبِكَ بِالْمَاءِ وَالْهُ عَنْهُ
हमरा मलिक सँ कहने छल जे ऐश शाल्ट बिन जुबैद सँ ओ कहलनि; हम [सुलेमान बिन यासर] सं किछु भीजल बात पूछलहुं जे हमरा भेटल, तें ओ कहलनि; 'अपन कपड़ाक नीचाँ जे अछि ओकरा पानि छिड़कि दियौक आ ओकरासँ मुँह घुमाउ'।