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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
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इमाम मलिक (الامام مالك) - 1594 हदीस

अधिक शराब पीने के दौरान अपने कान कैसे पोंछें

इमाम मलिक : 61

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ يَأْخُذُ الْمَاءَ بِأُصْبُعَيْهِ لِأُذُنَيْهِ

मलिक (नफी) ने मुझे बताया कि अब्दुल्लाह बिन उमर ने अपने दोनों कानों के लिए अपनी दोनों उंगलियों से पानी ले लिया।

उरवाह बिन अज़ ज़ुबैर ने बिना पगड़ी पहने पानी से सिर पोंछा

इमाम मलिक : 62

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ أَنَّ أَبَاهُ عُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِكَانَ يَنْزِعُ الْعِمَامَةَ وَيَمْسَحُ رَأْسَهُ بِالْمَاءِ

मुझे मलिक [हिशाम बिन उरवाह] से वर्णित किया गया था कि उनके पिता - [उरवाह बिन अज़ ज़ुबैर] - ने अपनी पगड़ी उतार दी और अपने सिर को पानी से पोंछा।

शफ़ियाह वुज़ू के दौरान सिर धोने के लिए पर्दा हटाता है

इमाम मलिक : 63

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّهُ رَأَى صَفِيَّةَ بِنْتَ أَبِي عُبَيْدٍ امْرَأَةَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَتَنْزِعُ خِمَارَهَا وَتَمْسَحُ عَلَى رَأْسِهَا بِالْمَاءِ وَنَافِعٌ يَوْمَئِذٍ صَغِيرٌ

मुझे मालिक [नफी] से वर्णित किया गया था कि उसने [शफिया बिन्त अबू उबैद] - अब्दुल्लाह बिन उमर की पत्नी - को अपना घूंघट हटाकर अपना सिर पानी से धोते हुए देखा, और नफी उस समय अभी भी एक बच्चा था।

कठिन परिस्थितियों में वुज़ू को मुकम्मल करना

इमाम मलिक : 64

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَبَّادِ بْنِ زِيَادٍ مِنْ وَلَدِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَهَبَ لِحَاجَتِهِ فِي غَزْوَةِ تَبُوكَ قَالَ الْمُغِيرَةُ فَذَهَبْتُ مَعَهُ بِمَاءٍ فَجَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَكَبْتُ عَلَيْهِ الْمَاءَ فَغَسَلَ وَجْهَهُ ثُمَّ ذَهَبَ يُخْرِجُ يَدَيْهِ مِنْ كُمَّيْ جُبَّتِهِ فَلَمْ يَسْتَطِعْ مِنْ ضِيقِ كُمَّيْ الْجُبَّةِ فَأَخْرَجَهُمَا مِنْ تَحْتِ الْجُبَّةِ فَغَسَلَ يَدَيْهِ وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ وَمَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ فَجَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ يَؤُمُّهُمْ وَقَدْ صَلَّى بِهِمْ رَكْعَةً فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الرَّكْعَةَ الَّتِي بَقِيَتْ عَلَيْهِمْ فَفَزِعَ النَّاسُ فَلَمَّا قَضَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَحْسَنْتُمْ

मुझे बताया गया है कि याह्या मालिक [इब्न शिहाब] से [अब्बाद बिन ज़ियाद] के बेटे मुगीरा बिन स्यूबा के, उनके पिता [मुगीरा बिन स्यूबा] से हैं; कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तबुक की लड़ाई के दौरान ज़रूरत के कारण चले गए थे। मुगीरा ने कहा; "मैं उनके साथ पानी लेकर गया, फिर रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आए, तो मैंने उन पर पानी डाला, उन्होंने अपना चेहरा धोया फिर अपने हाथ अपने कपड़े की आस्तीन से बाहर निकाले, लेकिन वह नहीं कर सके क्योंकि कपड़े की आस्तीन पतली थीं, इसलिए उन्होंने उन्हें कपड़े के नीचे से बाहर निकाला, ताकि वह अपने हाथ धो सकें, अपना सिर और अपने दो खुफ़ पोंछ सकें।" फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दौड़कर आए लेकिन अब्दुर्रहमान बिन औफ पहले ही लोगों को लीड कर चुके थे और उनके साथ एक रकअत पूरी कर चुके थे, फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बाकी रकअत पूरी की, और जब उन्होंने खत्म किया तो कहा: "अच्छा।"

उमर को वुज़ू के बाद ख़ुफ़ पोंछने की इजाज़त दी गई, भले ही वह ख़त्म हो चुका था

इमाम मलिक : 65

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ أَنَّهُمَا أَخْبَرَاهُأَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَدِمَ الْكُوفَةَ عَلَى سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ وَهُوَ أَمِيرُهَا فَرَآهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ يَمْسَحُ عَلَى الْخُفَّيْنِ فَأَنْكَرَ ذَلِكَ عَلَيْهِ فَقَالَ لَهُ سَعْدٌ سَلْ أَبَاكَ إِذَا قَدِمْتَ عَلَيْهِ فَقَدِمَ عَبْدُ اللَّهِ فَنَسِيَ أَنْ يَسْأَلَ عُمَرَ عَنْ ذَلِكَ حَتَّى قَدِمَ سَعْدٌ فَقَالَ أَسَأَلْتَ أَبَاكَ فَقَالَ لَا فَسَأَلَهُ عَبْدُ اللَّهِ فَقَالَ عُمَرُ إِذَا أَدْخَلْتَ رِجْلَيْكَ فِي الْخُفَّيْنِ وَهُمَا طَاهِرَتَانِ فَامْسَحْ عَلَيْهِمَا قَالَ عَبْدُ اللَّهِ وَإِنْ جَاءَ أَحَدُنَا مِنْ الْغَائِطِ فَقَالَ عُمَرُ نَعَمْ وَإِنْ جَاءَ أَحَدُكُمْ مِنْ الْغَائِطِ

मुझे मालिक [नफी'] और [अब्दुल्ला बिन दिनार] से पता चला था, उन दोनों ने उसे बताया; कि [अब्दुल्ला बिन उमर] कूफ़ा के अमीर [सअद बिन अबू वक्कास] से मिलने कूफ़ा आए थे। फिर अब्दुल्ला बिन उमर ने उन्हें अपने दोनों पैरों को पोंछते हुए देखा और उन्होंने इनकार कर दिया। तो साद ने कहा; "जब तुम उनके पास पहुँचो तो अपने पिता से पूछो।" जब वह पहुँचे, तो वह उमर से इसके बारे में पूछना भूल गए, जब तक कि साद ने आकर पूछा; "क्या तुमने अपने पिता से पूछा है?" उन्होंने जवाब दिया; "अभी नहीं।" अब्दुल्ला ने (अपने पिता) से पूछा, फिर ([उमर बिन खत्ताब]) ने जवाब दिया; "अगर तुम दोनों पैरों को शुद्ध अवस्था में रख दो, तो दोनों को पोंछना काफी है" अब्दुल्ला ने कहा; "भले ही हममें से किसी ने अभी-अभी शौच किया हो?" उमर ने कहा; "हाँ, भले ही वह अभी-अभी शौच कर रहा हो।"

उन्मूलन के बाद ख़ुफ़ को मिटा दें

इमाम मलिक : 66

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَبَالَ فِي السُّوقِ ثُمَّ تَوَضَّأَ فَغَسَلَ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ وَمَسَحَ رَأْسَهُ ثُمَّ دُعِيَ لِجَنَازَةٍ لِيُصَلِّيَ عَلَيْهَا حِينَ دَخَلَ الْمَسْجِدَ فَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ ثُمَّ صَلَّى عَلَيْهَا

मुझे मलिक (नफी) से बताया गया कि अब्दुल्लाह इब्न उमर ने बाज़ार में पेशाब किया, फिर उन्होंने वज़ू किया, अपना चेहरा और हाथ धोए, अपना सिर पोंछा, और फिर मस्जिद में दाखिल होने पर उनसे कहा गया कि वे मृतक के लिए दुआ करें। तो उन्होंने सिर्फ़ अपने दो ख़ुफ़ों पर मसह किया, और फिर मृतक के लिए दुआ की।

अनस बिन मलिक ने खुफ़ का मसह करके और तुरंत नमाज़ पढ़कर वुज़ू किया

इमाम मलिक : 67

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سَعِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ رُقَيْشٍ أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍأَتَى قُبَا فَبَالَ ثُمَّ أُتِيَ بِوَضُوءٍ فَتَوَضَّأَ فَغَسَلَ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ وَمَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ ثُمَّ جَاءَ الْمَسْجِدَ فَصَلَّى

मलिक ने मुझे बताया कि [सईद बिन अब्दुर्रहमान बिन रुकैसी] ने कहा; "मैंने [अनस बिन मलिक] को कुबा आते देखा, उसने पेशाब किया, फिर उसे वुज़ू के लिए पानी दिया गया, तो उसने अपना चेहरा और दोनों हाथ कोहनी तक धोकर वुज़ू किया, अपना सिर और खुफ़ पोंछा, फिर मस्जिद में आया और नमाज़ पढ़ी।"

खुफ़ को कैसे स्वाइप करें

इमाम मलिक : 68

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ أَنَّهُ رَأَى أَبَاهُيَمْسَحُ عَلَى الْخُفَّيْنِ قَالَ وَكَانَ لَا يَزِيدُ إِذَا مَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ عَلَى أَنْ يَمْسَحَ ظُهُورَهُمَا وَلَا يَمْسَحُ بُطُونَهُمَا

मलिक ने मुझे हिशाम बिन उरवाह से बताया कि उसने अपने पिता को अपने दो खुफ़ों पर मसह करते देखा। हिशाम ने तब कहा, "उन्होंने उन्हें धोते समय ज़्यादा नहीं किया; उन्होंने सिर्फ़ ऊपरी हिस्सा धोया और निचले हिस्से को वैसे ही छोड़ दिया।"

इब्नु शिहाब ने दिखाया कि दो ख़ुफ़ों को कैसे मिटाया जाए

इमाम मलिक : 69

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍعَنْ الْمَسْحِ عَلَى الْخُفَّيْنِ كَيْفَ هُوَ فَأَدْخَلَ ابْنُ شِهَابٍ إِحْدَى يَدَيْهِ تَحْتَ الْخُفِّ وَالْأُخْرَى فَوْقَهُ ثُمَّ أَمَرَّهُمَا

मलिक ने मुझे बताया था, उसने [इब्न शिहाब] से दो खूफ धोने के बारे में पूछा, आप इसे कैसे करते हैं? तो इब्न शिहाब ने एक हाथ उसके नीचे और दूसरा उसके ऊपर रखा, फिर उसने दोनों को झाड़ू लगाया।

अब्दुल्लाह बिन उमर ने नाक से खून बहने के बाद संक्षिप्तीकरण किया और प्रार्थना जारी रखी

इमाम मलिक : 70

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ إِذَا رَعَفَ انْصَرَفَ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ رَجَعَ فَبَنَى وَلَمْ يَتَكَلَّمْ

याह्या ने मुझे मलिक (नफी) से बताया कि अगर अब्दुल्लाह बिन उमर को नाक से खून आता था तो वह बाहर जाते, वुज़ू करते, फिर वापस आते और बिना कुछ बोले नमाज़ पढ़ते रहते।

सईद बिन मुसय्यब की नाक से खून बहने लगा और वह संक्षिप्तीकरण करने के बाद नमाज़ के लिए वापस आ गया

इमाम मलिक : 71

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ قُسَيْطٍ اللَّيْثِيِّ أَنَّهُ رَأَى سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِرَعَفَ وَهُوَ يُصَلِّي فَأَتَى حُجْرَةَ أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأُتِيَ بِوَضُوءٍ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ رَجَعَ فَبَنَى عَلَى مَا قَدْ صَلَّى

मलिक ने मुझे बताया कि [यज़ीद बिन अब्दुल्लाह बिन कुसैथ अल-लैत्सी] ने देखा कि [सईद बिन मुसय्यब] को नमाज़ पढ़ते समय नाक से खून आ रहा था। फिर वह पैगंबर (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) की पत्नी उम्म सलमा के कमरे में गए, और उन्हें वुज़ू के लिए पानी दिया गया, फिर उन्होंने वुज़ू किया और अपनी नमाज़ जारी रखी।

सईद बिन मुसय्यब ने अभी भी बिना वुज़ू के नाक से नमाज़ पढ़ी

इमाम मलिक : 72

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَرْمَلَةَ الْأَسْلَمِيِّ أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِيَرْعُفُ فَيَخْرُجُ مِنْهُ الدَّمُ حَتَّى تَخْتَضِبَ أَصَابِعُهُ مِنْ الدَّمِ الَّذِي يَخْرُجُ مِنْ أَنْفِهِ ثُمَّ يُصَلِّي وَلَا يَتَوَضَّأُ

मलिक ने मुझे बताया था कि [अब्दुर्रहमान बिन हरमला अल असलमी] ने कहा; "मैंने देखा कि [सईद बिन मुसय्यब] की नाक से खून बह रहा था, उसकी नाक से खून निकल रहा था, जब तक कि उसके हाथ नाक से निकलने वाले खून से भर नहीं गए, लेकिन वह अभी भी नमाज़ पढ़ रहा था और वुज़ू नहीं कर रहा था।"

सलीम बिन अब्दुल्ला ने अपनी नाक बंद कर ली और बिना वुज़ू के नमाज़ पढ़ी

इमाम मलिक : 73

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْمُجَبَّرِ أَنَّهُ رَأَى سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِيَخْرُجُ مِنْ أَنْفِهِ الدَّمُ حَتَّى تَخْتَضِبَ أَصَابِعُهُ ثُمَّ يَفْتِلُهُ ثُمَّ يُصَلِّي وَلَا يَتَوَضَّأُ

मलिक ने मुझे बताया कि [अब्दुर्रहमान इब्न अल मुजब्बार] ने देखा कि [सलीम इब्न अब्दुल्ला] की नाक से खून बह रहा था, जब तक कि उनका हाथ खून से भर नहीं गया। उन्होंने अपनी नाक बंद कर ली और फिर बिना वुज़ू किए नमाज़ पढ़ी।

उमर ने सुबह की नमाज़ अदा की, हालांकि उनके घाव से अभी भी खून निकल रहा था

इमाम मलिक : 74

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ الْمِسْوَرَ بْنَ مَخْرَمَةَ أَخْبَرَهُأَنَّهُ دَخَلَ عَلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ مِنْ اللَّيْلَةِ الَّتِي طُعِنَ فِيهَا فَأَيْقَظَ عُمَرَ لِصَلَاةِ الصُّبْحِ فَقَالَ عُمَرُ نَعَمْ وَلَا حَظَّ فِي الْإِسْلَامِ لِمَنْ تَرَكَ الصَّلَاةَ فَصَلَّى عُمَرُ وَجُرْحُهُ يَثْعَبُ دَمًا

याह्या ने मुझे मलिक [हिशाम बिन उरवाह] से [उनके पिता] के बारे में बताया; कि [अल मिस्वर बिन मखराम] ने उन्हें बताया, वह [उमर बिन खत्ताब] से उस रात मिले जब उन्हें चाकू मारा गया था, फिर उन्होंने उमर को सुबह की नमाज़ के लिए जगाया, तो उन्होंने कहा; "हाँ। इस्लाम में नमाज़ छोड़ने वाले का कोई हिस्सा नहीं है," फिर उमर ने नमाज़ पढ़ी जबकि उनके घाव से खून बह रहा था।

सैद बिन मुसय्यब ने सुझाव दिया है कि अगर आपको लगातार नाक से खून बह रहा हो तो सिर पर निशान रखकर नमाज़ पढ़नी चाहिए

इमाम मलिक : 75

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ قَالَمَا تَرَوْنَ فِيمَنْ غَلَبَهُ الدَّمُ مِنْ رُعَافٍ فَلَمْ يَنْقَطِعْ عَنْهُ قَالَ مَالِك قَالَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ ثُمَّ قَالَ سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ أَرَى أَنْ يُومِئَ بِرَأْسِهِ إِيمَاءًقَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك وَذَلِكَ أَحَبُّ مَا سَمِعْتُ إِلَيَّ فِي ذَلِكَ

मलिक ने मुझे [याह्या बिन सईद] से बताया कि [सईद बिन मुसय्यब] ने पूछा; "आप उस व्यक्ति के बारे में क्या सोचते हैं जो नाक से खून बहने की वजह से खून से लथपथ है और खून बहता रहता है," मलिक ने कहा, याह्या बिन सईद ने कहा; सईद बिन मुसय्यब ने कहा; "मुझे लगता है कि उसे अपने सिर से इशारा करना चाहिए।" याह्या ने कहा, मलिक ने कहा; "इस मामले पर मैंने यही सबसे अच्छी राय सुनी है।"

पैगंबर शालल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मदजी जल के बारे में सवालों के जवाब दिए

इमाम मलिक : 76

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي النَّضْرِ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ عَنْ الْمِقْدَادِ بْنِ الْأَسْوَدِأَنَّ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ أَمَرَهُ أَنْ يَسْأَلَ لَهُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الرَّجُلِ إِذَا دَنَا مِنْ أَهْلِهِ فَخَرَجَ مِنْهُ الْمَذْيُ مَاذَا عَلَيْهِ قَالَ عَلِيٌّ فَإِنَّ عِنْدِي ابْنَةَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا أَسْتَحِي أَنْ أَسْأَلَهُ قَالَ الْمِقْدَادُ فَسَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ إِذَا وَجَدَ ذَلِكَ أَحَدُكُمْ فَلْيَنْضَحْ فَرْجَهُ بِالْمَاءِ وَلْيَتَوَضَّأْ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِ

याह्या ने मुझे मलिक (अबू नदलर) से, जो उमर बिन उबैदुल्लाह का पुराना गुलाम था, और सुलेमान बिन यासर (अल मिकदाद बिन अल असवद) से बताया कि अली बिन अबू तालिब ने उससे कहा कि वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से एक ऐसे आदमी के बारे में पूछे जो अपनी पत्नी के पास जाता है और फिर उसके मुँह से मदी का पानी निकाल देता है। उसे क्या करना चाहिए? अली ने कहा; "क्योंकि मेरी पत्नी अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की बेटी है, इसलिए मुझे उससे पूछने में शर्म आती है।" मिकदाद ने कहा; फिर मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से इसके बारे में पूछा, और उन्होंने जवाब दिया: "अगर तुम में से किसी को ऐसा मिले, तो उसके प्राइवेट पार्ट पर पानी छिड़कें और फिर नमाज़ की तरह वज़ू करें।"

उमर बिन खत्ताब ने नमाज़ के लिए मद्ज़ी धोने और वुज़ू करने का आदेश दिया

इमाम मलिक : 77

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَإِنِّي لَأَجِدُهُ يَنْحَدِرُ مِنِّي مِثْلَ الْخُرَيْزَةِ فَإِذَا وَجَدَ ذَلِكَ أَحَدُكُمْ فَلْيَغْسِلْ ذَكَرَهُ وَلْيَتَوَضَّأْ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِ يَعْنِي الْمَذْيَ

मुझे मालिक [ज़ैद बिन असलम] से [उनके पिता] से वर्णित किया गया है कि [उमर बिन अल खत्ताब] ने कहा: "मैंने इसे क्रिस्टल कणों की तरह पाया, इसलिए यदि आप में से कोई इसका अनुभव करता है, तो उसे अपने जननांगों को धोना चाहिए और नमाज़ के लिए वज़ू की तरह वज़ू करना चाहिए," -और इसका मतलब मदी है-।

माडज़ी से शुद्धिकरण कैसे करें

इमाम मलिक : 78

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ جُنْدُبٍ مَوْلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَيَّاشٍ أَنَّهُ قَالَسَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ عَنْ الْمَذْيِ فَقَالَ إِذَا وَجَدْتَهُ فَاغْسِلْ فَرْجَكَ وَتَوَضَّأْ وُضُوءَكَ لِلصَّلَاةِ

मुझे मालिक [ज़ैद बिन असलम] ने [जुनदुब] अब्दुल्लाह बिन अय्यासी के पुराने गुलाम से बताया है कि उसने कहा; मैंने [अब्दुल्ला बिन उमर] से मद्ज़ी के बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया; "जब तुम्हें वह मिल जाए, तो अपने प्राइवेट पार्ट धो लो, और नमाज़ के लिए वुज़ू करते हो वैसे ही वुज़ू करो।"

सैद बिन मुसय्यब नमाज़ रद्द नहीं करते, भले ही कुछ गीला हो

इमाम मलिक : 79

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ سَمِعَهُ وَرَجُلٌ يَسْأَلُهُ فَقَالَ إِنِّي لَأَجِدُ الْبَلَلَ وَأَنَا أُصَلِّي أَفَأَنْصَرِفُ فَقَالَ لَهُ سَعِيدٌلَوْ سَالَ عَلَى فَخِذِي مَا انْصَرَفْتُ حَتَّى أَقْضِيَ صَلَاتِي

याह्या ने मुझे मलिक से याह्या बिन सईद से सईद बिन मुसय्यब के ज़रिए बताया कि उसने एक आदमी को उससे पूछते हुए सुना, और उसने कहा, "जब मैं नमाज़ पढ़ रहा था तो मुझ पर कुछ गीला लगा। क्या मुझे इसे तोड़ देना चाहिए?" सईद ने कहा, "अगर यह मेरी जांघ से नीचे भी बह जाए, तो भी मैं इसे तब तक नहीं तोड़ूंगा जब तक मैं अपनी नमाज़ पूरी न कर लूं।"

किसी भी गीली चीज़ के बारे में संदेह दूर करने के लिए उस पर पानी छिड़कें

इमाम मलिक : 80

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ الصَّلْتِ بْنِ زُيَيْدٍ أَنَّهُ قَالَ سَأَلْتُ سُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍعَنْ الْبَلَلِ أَجِدُهُ فَقَالَ انْضَحْ مَا تَحْتَ ثَوْبِكَ بِالْمَاءِ وَالْهُ عَنْهُ

मलिक अशशल्ट बिन ज़ुबैद ने मुझे बताया था कि मैंने [सुलेमान बिन यासर] से किसी गीली चीज़ के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा; "अपने कपड़ों के नीचे जो है उस पर पानी छिड़को और उससे मुँह मोड़ लो।"