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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 हदीस

हदीस

Imam Malik : 61

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ يَأْخُذُ الْمَاءَ بِأُصْبُعَيْهِ لِأُذُنَيْهِ

हमरा से [नाफी’] से मलिक से इ बात बतावल गईल रहे, कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] अपना दुनो कान खाती दु अँगुरी से पानी लेले रहले।

हदीस

Imam Malik : 62

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ أَنَّ أَبَاهُ عُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِكَانَ يَنْزِعُ الْعِمَامَةَ وَيَمْسَحُ رَأْسَهُ بِالْمَاءِ

[हिशाम बिन उर्वाह] से मलिक से हमरा से रिवायत बा कि उनकर पिता - [उर्वाह बिन अज़ जुबैर] - आपन पगड़ी उतार के उनकर माथा पानी से पोंछले।

हदीस

Imam Malik : 63

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّهُ رَأَى صَفِيَّةَ بِنْتَ أَبِي عُبَيْدٍ امْرَأَةَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَتَنْزِعُ خِمَارَهَا وَتَمْسَحُ عَلَى رَأْسِهَا بِالْمَاءِ وَنَافِعٌ يَوْمَئِذٍ صَغِيرٌ

[नफी’] से मलिक से हमरा से रिवायत बा कि उ [शफिया बिन अबू उबैद] - अब्दुल्ला बिन उमर के पत्नी - के घूंघट निकाल के पानी से माथा धोवत देखले रहले, अवुरी नाफी ओ समय अभी बच्चा रहले।

हदीस

Imam Malik : 64

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَبَّادِ بْنِ زِيَادٍ مِنْ وَلَدِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَهَبَ لِحَاجَتِهِ فِي غَزْوَةِ تَبُوكَ قَالَ الْمُغِيرَةُ فَذَهَبْتُ مَعَهُ بِمَاءٍ فَجَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَكَبْتُ عَلَيْهِ الْمَاءَ فَغَسَلَ وَجْهَهُ ثُمَّ ذَهَبَ يُخْرِجُ يَدَيْهِ مِنْ كُمَّيْ جُبَّتِهِ فَلَمْ يَسْتَطِعْ مِنْ ضِيقِ كُمَّيْ الْجُبَّةِ فَأَخْرَجَهُمَا مِنْ تَحْتِ الْجُبَّةِ فَغَسَلَ يَدَيْهِ وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ وَمَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ فَجَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ يَؤُمُّهُمْ وَقَدْ صَلَّى بِهِمْ رَكْعَةً فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الرَّكْعَةَ الَّتِي بَقِيَتْ عَلَيْهِمْ فَفَزِعَ النَّاسُ فَلَمَّا قَضَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَحْسَنْتُمْ

हमरा के बतावल गइल बा कि याह्या मलिक से [इब्न शिहाब] से [अब्बाद बिन जियाद] मुगीरा बिन स्यूबाह के बेटा से, उनकर पिता से [मुगीरा बिन स्यूबाह] से; कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तबुक के लड़ाई के दौरान जरूरत के चलते चल गईले। मुघिरा कहले कि; 'हम ओकरा साथे पानी लेके चल गइनी, तब रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अइले, त हम ओकरा पर पानी डाल देनी, उ आपन चेहरा धो लेले फिर आपन हाथ अपना चोगा के आस्तीन से निकालले, लेकिन उ ना कर पवले काहे कि चोगा के आस्तीन संकरी रहे, एहसे उ चोगा के नीचे से निकाल देले, ताकि उ हाथ धो सके, आपन माथा अवुरी आपन दु खुफ पोंछ सके'। तब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आवे खातिर दौड़ले लेकिन अब्दुररहमान बिन औफ लोग के नेतृत्व कर चुकल रहले अवुरी उनुका संगे एक रकाअत खतम क चुकल रहले, तब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बाकी रकाअत खतम क देले, अवुरी जब खतम भईल त उ कहले कि: 'अच्छा'।

हदीस

Imam Malik : 65

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ أَنَّهُمَا أَخْبَرَاهُأَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَدِمَ الْكُوفَةَ عَلَى سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ وَهُوَ أَمِيرُهَا فَرَآهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ يَمْسَحُ عَلَى الْخُفَّيْنِ فَأَنْكَرَ ذَلِكَ عَلَيْهِ فَقَالَ لَهُ سَعْدٌ سَلْ أَبَاكَ إِذَا قَدِمْتَ عَلَيْهِ فَقَدِمَ عَبْدُ اللَّهِ فَنَسِيَ أَنْ يَسْأَلَ عُمَرَ عَنْ ذَلِكَ حَتَّى قَدِمَ سَعْدٌ فَقَالَ أَسَأَلْتَ أَبَاكَ فَقَالَ لَا فَسَأَلَهُ عَبْدُ اللَّهِ فَقَالَ عُمَرُ إِذَا أَدْخَلْتَ رِجْلَيْكَ فِي الْخُفَّيْنِ وَهُمَا طَاهِرَتَانِ فَامْسَحْ عَلَيْهِمَا قَالَ عَبْدُ اللَّهِ وَإِنْ جَاءَ أَحَدُنَا مِنْ الْغَائِطِ فَقَالَ عُمَرُ نَعَمْ وَإِنْ جَاءَ أَحَدُكُمْ مِنْ الْغَائِطِ

मलिक से [नाफी'] से बतवले रहले अवुरी [अब्दुल्लाह बिन दिनार] दुनो लोग उनुका के सूचित कईले; कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] कुफा के अमीर [सअद बिन अबू वक्कास] से मिले खातिर कुफा आइल रहले। तब अब्दुल्ला बिन उमर उनुका के आपन दु खुफ पोंछत देखले अवुरी उ एकरा से इनकार क देले। त स'द कहले कि; ‘अपना बाबूजी से पूछऽ, जब तू ओकरा लगे पहुँच गइल बाड़ऽ,’ जब ऊ पहुँचल त ऊ उमर से एह बारे में पूछल भुला गइल, जबले कि स’द आके पूछले ना; 'का तू अपना बाबूजी से पूछले बाड़ू?' ऊ जवाब दिहलन; 'अभी तक ना'। अब्दुल्ला -अपना पिता- से पूछले, फिर -[उमर बिन खत्ताब]- जवाब देले; 'अगर रउआ दुनो गोड़ के शुद्ध अवस्था में डाल देनी त ओकरा के पोंछे खातिर काफी बा' अब्दुल्ला कहले; 'भले हमनी में से केहू बस टट्टी कइले होखे?' उमर कहले कि; 'हँ, भले ऊ अभी-अभी शौच कइले होखे'।

हदीस

Imam Malik : 66

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَبَالَ فِي السُّوقِ ثُمَّ تَوَضَّأَ فَغَسَلَ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ وَمَسَحَ رَأْسَهُ ثُمَّ دُعِيَ لِجَنَازَةٍ لِيُصَلِّيَ عَلَيْهَا حِينَ دَخَلَ الْمَسْجِدَ فَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ ثُمَّ صَلَّى عَلَيْهَا

[नाफी’] से मलिक से हमरा से रिवायत बा कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] बाजार में पेशाब करत रहले, ओकरा बाद वज़ूद कईले, चेहरा अवुरी हाथ धोवत रहले, माथा पोंछत रहले, अवुरी ओकरा बाद मस्जिद में घुसते मरेवाला के ऊपर नमाज पढ़े के कहल गईल। त ऊ खाली अपना दू गो खुफ के पोंछ दिहलन, आ फेर मरे वाला पर नमाज पढ़लन.

हदीस

Imam Malik : 67

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سَعِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ رُقَيْشٍ أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍأَتَى قُبَا فَبَالَ ثُمَّ أُتِيَ بِوَضُوءٍ فَتَوَضَّأَ فَغَسَلَ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ وَمَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ ثُمَّ جَاءَ الْمَسْجِدَ فَصَلَّى

मलिक से हमरा से रिवायत बा कि [सईद बिन अब्दुररहमान बिन रुकैसी] कहले रहले; 'हम देखनी कि [अनस बिन मलिक] के कुबा आवत रहले`, उ पेशाब कईले, फिर उनुका के वज़ूद खातिर पानी दिहल गईल, एहसे उ आपन चेहरा अवुरी दुनो हाथ कोहनी तक धो के वज़ूद कईले, आपन माथा अवुरी खुफ पोंछले फिर मस्जिद में आके नमाज पढ़ले'।

हदीस

Imam Malik : 68

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ أَنَّهُ رَأَى أَبَاهُيَمْسَحُ عَلَى الْخُفَّيْنِ قَالَ وَكَانَ لَا يَزِيدُ إِذَا مَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ عَلَى أَنْ يَمْسَحَ ظُهُورَهُمَا وَلَا يَمْسَحُ بُطُونَهُمَا

मलिक हमरा से हिशाम बिन उर्वाह से बतवले कि उ अपना पिता के अपना दु खुफ के पोंछत देखले। हिशाम कहले, 'उ ओह लोग के धोवत घरी बेसी ना कइले; उ खाली ऊपरी हिस्सा के धो के निचला हिस्सा के अकेले छोड़ देले।'

हदीस

Imam Malik : 69

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍعَنْ الْمَسْحِ عَلَى الْخُفَّيْنِ كَيْفَ هُوَ فَأَدْخَلَ ابْنُ شِهَابٍ إِحْدَى يَدَيْهِ تَحْتَ الْخُفِّ وَالْأُخْرَى فَوْقَهُ ثُمَّ أَمَرَّهُمَا

मालिक से बतवले रहले, उ [इब्न शिहाब] से दुनो खुफ धोवे के बारे में पूछले रहले, रउआ कईसे करब? त इब्न शिहाब एक हाथ ओकरा नीचे आ दूसरा हाथ ओकरा ऊपर रखले, फेर दुनो के झाड़ू लगा देले।

हदीस

Imam Malik : 70

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ إِذَا رَعَفَ انْصَرَفَ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ رَجَعَ فَبَنَى وَلَمْ يَتَكَلَّمْ

याह्या हमरा से मलिक से [नफी’] से बतवले कि अगर [अब्दुल्लाह बिन उमर] के नाक से खून बहत रहे त उ बाहर निकल के वज़ूद करेले, फेर लवट के बिना एक शब्द बोलले आपन नमाज जारी रखेले।

हदीस

Imam Malik : 71

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ قُسَيْطٍ اللَّيْثِيِّ أَنَّهُ رَأَى سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِرَعَفَ وَهُوَ يُصَلِّي فَأَتَى حُجْرَةَ أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأُتِيَ بِوَضُوءٍ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ رَجَعَ فَبَنَى عَلَى مَا قَدْ صَلَّى

मलिक हमरा से बतवले कि [यजीद बिन अब्दुल्लाह बिन कुसैथ अल-लैत्सी] [सईद बिन मुसैयब] के नमाज पढ़त घरी नाक से खून बहत देखले रहले। एकरा बाद उ नबी (स.अ.व.) के पत्नी उम्म सलामा के कमरा में गईले अवुरी वजूद खाती पानी दिहल गईल, ओकरा बाद वज़ूद कईले अवुरी नमाज जारी रखले।

हदीस

Imam Malik : 72

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَرْمَلَةَ الْأَسْلَمِيِّ أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِيَرْعُفُ فَيَخْرُجُ مِنْهُ الدَّمُ حَتَّى تَخْتَضِبَ أَصَابِعُهُ مِنْ الدَّمِ الَّذِي يَخْرُجُ مِنْ أَنْفِهِ ثُمَّ يُصَلِّي وَلَا يَتَوَضَّأُ

[अब्दुररहमान बिन हरमलाह अल असलमी] से मलिक से बतवले रहले कहले रहले; 'हम देखनी कि [सैद बिन मुसैयब] के नाक से खून बहत रहे, नाक से खून निकलत रहे, जब तक कि उनुकर हाथ नाक से खून से ना ढंक गईल रहे, लेकिन उ अभी तक नमाज पढ़त रहले अवुरी वज़ूद ना करत रहले'।

हदीस

Imam Malik : 73

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْمُجَبَّرِ أَنَّهُ رَأَى سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِيَخْرُجُ مِنْ أَنْفِهِ الدَّمُ حَتَّى تَخْتَضِبَ أَصَابِعُهُ ثُمَّ يَفْتِلُهُ ثُمَّ يُصَلِّي وَلَا يَتَوَضَّأُ

मलिक हमरा से बतवले कि [अब्दुररहमान बिन अल मुजब्बर] [सलीम बिन अब्दुल्लाह] के नाक से खून बहत देखले जब तक कि उनुकर हाथ खून से ना लथपथ हो गईल। ओकरा के प्लग लगा देले अवुरी ओकरा बाद बिना वजूद कईले नमाज पढ़ले।

हदीस

Imam Malik : 74

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ الْمِسْوَرَ بْنَ مَخْرَمَةَ أَخْبَرَهُأَنَّهُ دَخَلَ عَلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ مِنْ اللَّيْلَةِ الَّتِي طُعِنَ فِيهَا فَأَيْقَظَ عُمَرَ لِصَلَاةِ الصُّبْحِ فَقَالَ عُمَرُ نَعَمْ وَلَا حَظَّ فِي الْإِسْلَامِ لِمَنْ تَرَكَ الصَّلَاةَ فَصَلَّى عُمَرُ وَجُرْحُهُ يَثْعَبُ دَمًا

याह्या हमरा से मालिक से [हिशाम बिन उर्वाह] से [उनकर पिता] से बतवले; कि [अल मिसवर बिन मखरामा] उनुका के सूचित कईले, उ [उमर बिन खत्ताब] से ओ रात मिलल जब उनुका प चाकू मारल गईल रहे, फिर उमर के सुबह के नमाज खाती जगवले, फेर उ कहले कि: 'हाँ।' नमाज छोड़े वाला के इस्लाम में कवनो हिस्सा नईखे,' एहसे उमर नमाज पढ़ले, जबकि उनुकर घाव अभी खून बहत रहे।

हदीस

Imam Malik : 75

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ قَالَمَا تَرَوْنَ فِيمَنْ غَلَبَهُ الدَّمُ مِنْ رُعَافٍ فَلَمْ يَنْقَطِعْ عَنْهُ قَالَ مَالِك قَالَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ ثُمَّ قَالَ سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ أَرَى أَنْ يُومِئَ بِرَأْسِهِ إِيمَاءًقَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك وَذَلِكَ أَحَبُّ مَا سَمِعْتُ إِلَيَّ فِي ذَلِكَ

हमरा से मलिक से [याह्या बिन सईद] से बतावल गइल बा कि [सैद बिन मुसैयब] पूछले बाड़न; 'रउरा का लागत बा कि जेकरा नाक से खून बहला के चलते खून से लथपथ हो जाला अवुरी ओकरा से खून बहत रहेला,' मलिक कहले, याह्या बिन सैद कहले; सईद बिन मुसैयाब कहले कि; 'हम त राय के बानी; ओकरा माथा से संकेत देवे के चाही'। याह्या कहलस, मलिक कहलस; 'एह मामला प हमार सबसे बढ़िया राय इहे बा'।

हदीस

Imam Malik : 76

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي النَّضْرِ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ عَنْ الْمِقْدَادِ بْنِ الْأَسْوَدِأَنَّ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ أَمَرَهُ أَنْ يَسْأَلَ لَهُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الرَّجُلِ إِذَا دَنَا مِنْ أَهْلِهِ فَخَرَجَ مِنْهُ الْمَذْيُ مَاذَا عَلَيْهِ قَالَ عَلِيٌّ فَإِنَّ عِنْدِي ابْنَةَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا أَسْتَحِي أَنْ أَسْأَلَهُ قَالَ الْمِقْدَادُ فَسَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ إِذَا وَجَدَ ذَلِكَ أَحَدُكُمْ فَلْيَنْضَحْ فَرْجَهُ بِالْمَاءِ وَلْيَتَوَضَّأْ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِ

याह्या हमरा से उमर बिन उबैदुल्लाह के पूर्व गुलाम [अबू नदलर] से मलिक से, [अल मिकदाद बिन अल असवद] से [सुलेमान बिन यासर] से बतवले; कि अली बिन अबू तालिब उनुका से कहले कि अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) से एगो अयीसन आदमी के बारे में पूछस, जवन कि अपना पत्नी के नजदीक आवेला अवुरी ओकरा बाद उनुका मुंह से निकल जाला। ओकरा का करे के चाहीं? अली कहले कि; 'काहेंकी हमार पत्नी रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बेटी हई, एहसे हमरा उनुका से पूछे में शर्म आवेला।' मिकदाद कहले कि; तब हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एह बारे में पूछनी त उ जवाब देले कि, 'अगर रउआ में से केहु के अयीसन मिल गईल त ओकरा जननांग प पानी छिड़कीं अवुरी ओकरा बाद नमाज के निहन वज़ूद करीं।'

हदीस

Imam Malik : 77

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَإِنِّي لَأَجِدُهُ يَنْحَدِرُ مِنِّي مِثْلَ الْخُرَيْزَةِ فَإِذَا وَجَدَ ذَلِكَ أَحَدُكُمْ فَلْيَغْسِلْ ذَكَرَهُ وَلْيَتَوَضَّأْ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِ يَعْنِي الْمَذْيَ

हमरा से मलिक से [जैद बिन असलम] से [उनकर पिता] से रिवायत बा कि [उमर बिन अल खत्ताब] कहले कि, 'हमरा एकरा के क्रिस्टल के दाना निहन लागल, एहसे जदी आपके में से केहु के अयीसन अनुभव होखे त उ आपन जननांग धोवे अवुरी नमाज खाती वज़ूज़ निहन वज़ूद करे,' -आ एकर मतलब बा मधी-।

हदीस

Imam Malik : 78

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ جُنْدُبٍ مَوْلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَيَّاشٍ أَنَّهُ قَالَسَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ عَنْ الْمَذْيِ فَقَالَ إِذَا وَجَدْتَهُ فَاغْسِلْ فَرْجَكَ وَتَوَضَّأْ وُضُوءَكَ لِلصَّلَاةِ

हमरा से मलिक से [जैद बिन असलम] से [जुंदुब] अब्दुल्ला बिन अय्यासी के पूर्व गुलाम से बतावल गइल बा, कि ऊ कहले बाड़न; हम [अब्दुल्लाह बिन उमर] से मद्जी के बारे में पूछनी, त उ जवाब देले; 'जब मिल जाई त जननांग धोईं, वज़ूद करीं जइसे नमाज खातिर वज़ूद करेनी'।

हदीस

Imam Malik : 79

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ سَمِعَهُ وَرَجُلٌ يَسْأَلُهُ فَقَالَ إِنِّي لَأَجِدُ الْبَلَلَ وَأَنَا أُصَلِّي أَفَأَنْصَرِفُ فَقَالَ لَهُ سَعِيدٌلَوْ سَالَ عَلَى فَخِذِي مَا انْصَرَفْتُ حَتَّى أَقْضِيَ صَلَاتِي

याह्या हमरा से सईद बिन मुसैयब से याह्या बिन सैद से मालिक से बतवले कि उ एगो आदमी के पूछत सुनले, अवुरी उ कहले कि, 'हमरा नमाज करत घरी हमरा प कुछ भींजल मिलल, का हम ओकरा के तोड़ देनी?' सईद कहले कि, 'भले उ हमरा जांघ से बहत रहे, लेकिन जब तक नमाज खतम ना हो जाई, तब तक ना तोड़त रहनी।'

हदीस

Imam Malik : 80

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ الصَّلْتِ بْنِ زُيَيْدٍ أَنَّهُ قَالَ سَأَلْتُ سُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍعَنْ الْبَلَلِ أَجِدُهُ فَقَالَ انْضَحْ مَا تَحْتَ ثَوْبِكَ بِالْمَاءِ وَالْهُ عَنْهُ

ऐश शाल्ट बिन जुबैद से मलिक से बतवले रहले उ कहले रहले; हम [सुलेमान बिन यासर] से कुछ भींजल के बारे में पूछनी जवन हमरा मिलल, त उ कहले; 'अपना कपड़ा के नीचे जवन बा ओकरा प पानी छिड़क के ओकरा से मुड़ जाईं'।