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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 Hadith

Hadith

Imam Malik : 41

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عُمَارَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ أُمِّ وَلَدٍ لِإِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ أَنَّهَا سَأَلَتْ أُمَّ سَلَمَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْإِنِّي امْرَأَةٌ أُطِيلُ ذَيْلِي وَأَمْشِي فِي الْمَكَانِ الْقَذِرِ قَالَتْ أُمُّ سَلَمَةَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُطَهِّرُهُ مَا بَعْدَهُ

कथाकार बुझेलनि; याह्या हमरा [मुहम्मद बिन उमराह] स मालिक स [मुहम्मद बिन इब्राहिम] स [इब्राहिम बिन अब्दुररहमान बिन औफ क मां] स बतेलथि, जे ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी उम्म सलामा स पूछलथि; 'हम एकटा एहन महिला छी जिनकर कपड़ा नमहर अछि आ जे गंदा जगह पर चलैत अछि।' अस्तु [उम्म सलामाह] उत्तर देलनि; अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि ओकरा बाद जे जगह स॑ गुजरै छै, वू ओकरा शुद्ध करी देतै ।

Hadith

Imam Malik : 42

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِكأَنَّهُ رَأَى رَبِيعَةَ بْنَ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ يَقْلِسُ مِرَارًا وَهُوَ فِي الْمَسْجِدِ فَلَا يَنْصَرِفُ وَلَا يَتَوَضَّأُ حَتَّى يُصَلِّيَ

कथाकार बुझेलनि; ओ हमरा मालिक सँ बतौलनि, जे ओ मस्जिद मे रहैत [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] केँ बेर-बेर उल्टी करैत देखलनि, मुदा ओ नहि निकललनि आ जा धरि नमाज नहि केलनि ता धरि वज़ूज नहि केलनि।

Hadith

Imam Malik : 43

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَحَنَّطَ ابْنًا لِسَعِيدِ بْنِ زَيْدٍ وَحَمَلَهُ ثُمَّ دَخَلَ الْمَسْجِدَ فَصَلَّى وَلَمْ يَتَوَضَّأْ

कथाकार बुझेलनि; [नफी'] स मालिक स हमरा कहने अछि; कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] सईद बिन जैद के बेटा के लाश के सुगंधित केलक आ ओहो ओकरा ल क गेल, फेर ओ मस्जिद में घुसि गेल आ बिना वजूद केने नमाज पढ़लक।

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Imam Malik : 44

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَكَلَ كَتِفَ شَاةٍ ثُمَّ صَلَّى وَلَمْ يَتَوَضَّأْ

याह्या हमरा मलिक स [जैद बिन असलम] स ['अथो` बिन यासर] स [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] स रिवायत केलथि, अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम बकरी के जांघ खा गेलाह तखन ओ नमाज केलनि आ वजूद नहि केलनि।

Hadith

Imam Malik : 45

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ بُشَيْرِ بْنِ يَسَارٍ مَوْلَى بَنِي حَارِثَةَ عَنْ سُوَيْدِ بْنِ النُّعْمَانِ أَنَّهُ أَخْبَرَهُأَنَّهُ خَرَجَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَامَ خَيْبَرَ حَتَّى إِذَا كَانُوا بِالصَّهْبَاءِ وَهِيَ مِنْ أَدْنَى خَيْبَرَ نَزَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَصَلَّى الْعَصْرَ ثُمَّ دَعَا بِالْأَزْوَادِ فَلَمْ يُؤْتَ إِلَّا بِالسَّوِيقِ فَأَمَرَ بِهِ فَثُرِّيَ فَأَكَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَكَلْنَا ثُمَّ قَامَ إِلَى الْمَغْرِبِ فَمَضْمَضَ وَمَضْمَضْنَا ثُمَّ صَلَّى وَلَمْ يَتَوَضَّأْ

कथाकार बुझबैत छथि; हमरा मलिक सँ [याह्या बिन सैद] सँ [बुसैर बिन यासर] सँ बनी हरित्साह सँ, [सुवैद बिन अन नु'मान] सँ, कहने छथि जे ओ हुनका सूचित केने छलाह, ओ खैबर युद्धक दौरान रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के संग बाहर गेल छलाह, जखन ओ सब शाहबा` मे छलाह, खैबर के किनार पर एकटा जगह, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु 'अलैहि | वसाल्लम रुकि कए असर नमाज पढ़लनि, तखन ओ सामान मंगलनि, मुदा सवक छोड़ि किछु नहि भेटल, तेँ ओ पानि मे मिलाबाक आदेश देलनि | तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खा लेलक, आ हम सब सेहो खा लेलौं। तकर बाद ओ पश्चिम दिस उठि मुँह मे गार्गल केलनि, आ हमहूँ सभ मुँह कुल्ला केलहुँ, फेर बिना वजूद केने प्रार्थना केलहुँ।

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Imam Malik : 46

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ وَعَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ أَنَّهُمَا أَخْبَرَاهُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ الْحَارِثِ التَّيْمِيِّ عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْهُدَيْرِأَنَّهُ تَعَشَّى مَعَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ ثُمَّ صَلَّى وَلَمْ يَتَوَضَّأْ

कथाकार बुझेलनि; हमरा [मुहम्मद बिन अल मुनकदीर] स मालिक स आ [शफवान बिन सुलैम] स कहल गेल अछि जे दुनू गोटे हुनका [रबीअह बिन अब्दुल्लाह बिन अल हुदैर] स [मुहम्मद बिन इब्राहिम बिन अल हरिथ अत तैमी] स सूचित केलथि, जे ओ [उमर बिन खथाब] क संग लंच केलथि तखन नमाज पढ़लथि आ वजूद नहि केलथि।

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Imam Malik : 47

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ضَمْرَةَ بْنِ سَعِيدٍ الْمَازِنِيِّ عَنْ أَبَانَ بْنِ عُثْمَانَأَنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ أَكَلَ خُبْزًا وَلَحْمًا ثُمَّ مَضْمَضَ وَغَسَلَ يَدَيْهِ وَمَسَحَ بِهِمَا وَجْهَهُ ثُمَّ صَلَّى وَلَمْ يَتَوَضَّأْ

कथाकार बुझेलनि; हमरा [अबन बिन उस्मान] स [द्लामरह बिन सैद अल मज़िनी] स मालिक स कहल गेल अछि जे [उस्मान बिन अफ्फान] रोटी आ मांस खाइत छल, फेर मुँह कुल्ला केलक, हाथ धोलक, चेहरा पोछलक, फेर नमाज पढ़लक आ वजूद नहि केलक।

Hadith

Imam Malik : 48

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ سَأَلَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَامِرِ بْنِ رَبِيعَةَعَنْ الرَّجُلِ يَتَوَضَّأُ لِلصَّلَاةِ ثُمَّ يُصِيبُ طَعَامًا قَدْ مَسَّتْهُ النَّارُ أَيَتَوَضَّأُ قَالَ رَأَيْتُ أَبِي يَفْعَلُ ذَلِكَ وَلَا يَتَوَضَّأُ

कथाकार बुझेलनि; हमरा [याह्या बिन सैद] स मालिक स बतेने छथि, जे ओ [अब्दुल्लाह बिन अमीर बिन रबिअह] स एकटा एहन आदमी क बारे मे पूछलथि जे नमाज लेल वजूद केने छल, फेर ओ एहन भोजन खा गेल जे आगि कए छू गेल छल, की ओ फेर वज़ूद केलक?' - अब्दुल्लाह बिन अमीर बिन रबियाह - जवाब देलनि; 'हम [हमर पिता] के एहन करैत देखलहुं आ ओ वजूद नहि केलनि'।

Hadith

Imam Malik : 49

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي نُعَيْمٍ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ الْأَنْصَارِيَّ يَقُولُ رَأَيْتُ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَأَكَلَ لَحْمًا ثُمَّ صَلَّى وَلَمْ يَتَوَضَّأْ

कथाकार बुझबैत छथि; हमरा मलिक स याह्या [अबू नुअइम वहाब बिन कैसन] स कहलक अछि ओ [जाबिर बिन अब्दुल्लाह अल अंसारी] के कहैत सुनने छल; 'हम देखलहुँ जे [अबू बकर अस सिद्दिक] मांस खाइत छलाह तखन नमाज पढ़ैत छलाह आ वज़ूद नहि करैत छलाह' ।

Hadith

Imam Malik : 50

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دُعِيَ لِطَعَامٍ فَقُرِّبَ إِلَيْهِ خُبْزٌ وَلَحْمٌ فَأَكَلَ مِنْهُ ثُمَّ تَوَضَّأَ وَصَلَّى ثُمَّ أُتِيَ بِفَضْلِ ذَلِكَ الطَّعَامِ فَأَكَلَ مِنْهُ ثُمَّ صَلَّى وَلَمْ يَتَوَضَّأْ

कथाकार बुझेलनि; हमरा [मुहम्मद बिन अल मुनकदीर] स मालिक स रिवायत भेल छल, जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम के खाय लेल आमंत्रित कयल गेल छल, फेर हुनका रोटी आ मांस परोसल गेल छल, ताहि लेल ओ एकरा खा लेलक, फेर वज़ूद केलक आ नमाज केलक, फेर ओकरा बाकी भोजन देल गेल आ ओ ओकरा खा लेलक, फेर नमाज केलक आ वज़ूद नहि केलक।

Hadith

Imam Malik : 51

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ الْأَنْصَارِيِّ أَنَّ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍقَدِمَ مِنْ الْعِرَاقِ فَدَخَلَ عَلَيْهِ أَبُو طَلْحَةَ وَأُبَيُّ بْنُ كَعْبٍ فَقَرَّبَ لَهُمَا طَعَامًا قَدْ مَسَّتْهُ النَّارُ فَأَكَلُوا مِنْهُ فَقَامَ أَنَسٌ فَتَوَضَّأَ فَقَالَ أَبُو طَلْحَةَ وَأُبَيُّ بْنُ كَعْبٍ مَا هَذَا يَا أَنَسُ أَعِرَاقِيَّةٌ فَقَالَ أَنَسٌ لَيْتَنِي لَمْ أَفْعَلْ وَقَامَ أَبُو طَلْحَةَ وَأُبَيُّ بْنُ كَعْبٍ فَصَلَّيَا وَلَمْ يَتَوَضَّآَ

कथाकार बुझेलनि; हमरा मलिक सँ [मूसा बिन उकबाह] सँ [अब्दुररहमान बिन यजीद अल अंसारी] सँ बतौने छथि, जे [अनस बिन मलिक] इराक सँ आयल छलाह, तखन अबू तल्हाह आ उबाई बिन काब हुनका लग गेलाह, अनस आगि सँ पकाओल भोजन परोसलनि, आ सब ओहि मे सँ खा गेलाह | तखन अनस उठि कऽ वजूद केलक, तखन [अबू तलहह] आ [उबाई बिन क'ब] हुनका सँ पुछलखिन: 'ई की अछि, हे अनस, की ई इराकक प्रथा अछि?' अनस बिन मलिक कहलनि; 'काश, हम नहि केने रहितहुँ'। तखन अबू तलहा आ उबाई बिन क'ब उठलाह आ दुनू गोटे बिना वजूद केने नमाज पढ़लनि।

Hadith

Imam Malik : 52

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُئِلَ عَنْ الْاسْتِطَابَةِ فَقَالَ أَوَلَا يَجِدُ أَحَدُكُمْ ثَلَاثَةَ أَحْجَارٍ

हमरा कहल गेल अछि जे मालिक स याह्या स [हिस्यम बिन उर्वाह] स [हुनकर पिता] स, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम स एक बेर इस्तीताबा के बारे मे पूछल गेल छल -मूत्र आ शौच के बाद अशुद्धि स साफ करब-, तखन ओ कहलनि; 'अहाँ सभकेँ तीन टा पाथर नहि भेटल'।

Hadith

Imam Malik : 53

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَرَجَ إِلَى الْمَقْبُرَةِ فَقَالَ السَّلَامُ عَلَيْكُمْ دَارَ قَوْمٍ مُؤْمِنِينَ وَإِنَّا إِنْ شَاءَ اللَّهُ بِكُمْ لَاحِقُونَ وَدِدْتُ أَنِّي قَدْ رَأَيْتُ إِخْوَانَنَا فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلَسْنَا بِإِخْوَانِكَ قَالَ بَلْ أَنْتُمْ أَصْحَابِي وَإِخْوَانُنَا الَّذِينَ لَمْ يَأْتُوا بَعْدُ وَأَنَا فَرَطُهُمْ عَلَى الْحَوْضِ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ تَعْرِفُ مَنْ يَأْتِي بَعْدَكَ مِنْ أُمَّتِكَ قَالَ أَرَأَيْتَ لَوْ كَانَ لِرَجُلٍ خَيْلٌ غُرٌّ مُحَجَّلَةٌ فِي خَيْلٍ دُهْمٍ بُهْمٍ أَلَا يَعْرِفُ خَيْلَهُ قَالُوا بَلَى يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فَإِنَّهُمْ يَأْتُونَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ غُرًّا مُحَجَّلِينَ مِنْ الْوُضُوءِ وَأَنَا فَرَطُهُمْ عَلَى الْحَوْضِ فَلَا يُذَادَنَّ رِجَالٌ عَنْ حَوْضِي كَمَا يُذَادُ الْبَعِيرُ الضَّالُّ أُنَادِيهِمْ أَلَا هَلُمَّ أَلَا هَلُمَّ أَلَا هَلُمَّ فَيُقَالُ إِنَّهُمْ قَدْ بَدَّلُوا بَعْدَكَ فَأَقُولُ فَسُحْقًا فَسُحْقًا فَسُحْقًا

कथाकार बुझबैत छथि; हमरा मलिक स [अल अला` बिन अब्दुररहमान] स [अपन पिता] स [अबू हुरैरा] स कहने छथि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कब्रिस्तान मे निकललाह तखन ओ पढ़लनि; '-हे आस्तिक के कब्र पर रहनिहार, अहाँ सब के मोक्ष। अल्लाह चाहथि त हम अहाँक पाछाँ चलब। - हमरा अपन भाइ सभक देखबाक बड्ड मोन अछि। तें मित्र लोकनि पुछलखिन; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की हम तोहर भाई नहि छी'। ओ उत्तर देलनि: ‘अहाँ सभ सेहो हमर संगी छी, मुदा हमर भाइ सभ बाद मे आओत, जखन हम पोखरिक कात मे ओकर प्रतीक्षा करब’ ओ सभ कहलक; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अहाँ अपन लोक सँ अहाँक बाद आयल लोक के कोना चिन्हब?' रसुलुल्लाह जबाब देलखिन: 'अहाँक की लगैत अछि जे जँ कोनो एहन आदमी हो जकरा कारी घोड़ाक बीच चमकैत उज्जर घोड़ा हो त' की ओकरा ई बात नहि बुझल हेतैक?' ओ सभ उत्तर देलक। 'हँ, ई बात सही अछि, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह'। ओ बजलाह : 'सत्ते, ओ सभ कयामतक दिन वजूदक कारणेँ उज्जर मुँह उज्जर चमकि क' आबि जेताह, हम पोखरि पर स्वागत करब। तेँ हमर पोखरि सँ ककरो नहि भगाओल जाय, जेना आवारा ऊँट भगाओल जाइत अछि, हम ओकरा सभ केँ बजबैत छी: ‘एतय आउ, एतय आउ! यहा आउ!' अचानक कियो डाँटैत अछि : 'सत्ते, अहाँक बाद ओ सभ अपन धर्म बदलि लेलक' तेँ हम कहैत छी: 'दूर रहू, दूर रहू, दूर रहू''।

Hadith

Imam Malik : 54

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ حُمْرَانَ مَوْلَى عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ أَنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَجَلَسَ عَلَى الْمَقَاعِدِ فَجَاءَ الْمُؤَذِّنُ فَآذَنَهُ بِصَلَاةِ الْعَصْرِ فَدَعَا بِمَاءٍ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ قَالَ وَاللَّهِ لَأُحَدِّثَنَّكُمْ حَدِيثًا لَوْلَا أَنَّهُ فِي كِتَابِ اللَّهِ مَا حَدَّثْتُكُمُوهُ ثُمَّ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَا مِنْ امْرِئٍ يَتَوَضَّأُ فَيُحْسِنُ وُضُوءَهُ ثُمَّ يُصَلِّي الصَّلَاةَ إِلَّا غُفِرَ لَهُ مَا بَيْنَهُ وَبَيْنَ الصَّلَاةِ الْأُخْرَى حَتَّى يُصَلِّيَهَاقَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك أُرَاهُ يُرِيدُ هَذِهِ الْآيَةَ{ أَقِمْ الصَّلَاةَ طَرَفَيْ النَّهَارِ وَزُلَفًا مِنْ اللَّيْلِ إِنَّ الْحَسَنَاتِ يُذْهِبْنَ السَّيِّئَاتِ ذَلِكَ ذِكْرَى لِلذَّاكِرِينَ }

हमरा मलिक स [हिस्यम बिन उर्वाह] स [हुनकर पिता] स [हुमरान] उस्मान बिन अफ्फान क गुलाम स कहल गेल अछि, [उस्मान बिन अफ्फान] एकटा बेंच पर बैसल छलाह, फेर एकटा मुएजजिन आबि गेल, ओ दुपहर के नमाज के लेल आवाज देबय वाला छलाह। तेँ ओ पानि मँगलनि तखन वजूद केलनि, तकर बाद कहलनि; 'अल्लाह के कसम, हम अहाँ के की कहब, जौं ई अल्लाह के किताब में नै रहैत त हम नै कहितौं'। तखन ओ कहलनि; हम अल्लाह के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के कहैत सुनलहुं: ‘ई एहन बात नहिं जे व्यक्ति ठीक स वधू करय आ फेर नमाज करय, मुदा ओहि नमाज आ दोसर नमाज करय के समय के बीच जे पाप केने अछि, ओकरा माफ भ जायत,’ याह्या कहलनि; मालिक बजलाह; हमरा लगैत अछि जे हुनकर जे कहबाक छल से एहि श्लोकक अर्थ छल; 'आ दिनक दुनू छोर पर - भोर आ साँझ - आ रातिक प्रारंभ मे नमाज स्थापित करू।' नीक काज अधलाह काजक पाप मेटा दैत अछि। जे मोन पाड़निहार लेल चेतावनी अछि'।

Hadith

Imam Malik : 55

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ الصُّنَابِحِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا تَوَضَّأَ الْعَبْدُ الْمُؤْمِنُ فَتَمَضْمَضَ خَرَجَتْ الْخَطَايَا مِنْ فِيهِ وَإِذَا اسْتَنْثَرَ خَرَجَتْ الْخَطَايَا مِنْ أَنْفِهِ فَإِذَا غَسَلَ وَجْهَهُ خَرَجَتْ الْخَطَايَا مِنْ وَجْهِهِ حَتَّى تَخْرُجَ مِنْ تَحْتِ أَشْفَارِ عَيْنَيْهِ فَإِذَا غَسَلَ يَدَيْهِ خَرَجَتْ الْخَطَايَا مِنْ يَدَيْهِ حَتَّى تَخْرُجَ مِنْ تَحْتِ أَظْفَارِ يَدَيْهِ فَإِذَا مَسَحَ بِرَأْسِهِ خَرَجَتْ الْخَطَايَا مِنْ رَأْسِهِ حَتَّى تَخْرُجَ مِنْ أُذُنَيْهِ فَإِذَا غَسَلَ رِجْلَيْهِ خَرَجَتْ الْخَطَايَا مِنْ رِجْلَيْهِ حَتَّى تَخْرُجَ مِنْ تَحْتِ أَظْفَارِ رِجْلَيْهِ قَالَ ثُمَّ كَانَ مَشْيُهُ إِلَى الْمَسْجِدِ وَصَلَاتُهُ نَافِلَةً لَهُ

हमरा मलिक सँ [जैद बिन असलम] सँ ['अथो` बिन यासर] सँ [अब्दुल्ला शुनाबीही] सँ कहल गेल अछि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे जखन कोनो मुसलमान वज़ूद करैत अछि आ मुँह कुल्ला करैत अछि तखन ओकर मुँह सँ पाप निकलैत अछि। जँ ओ नाक मे राखल पानि थूकैत अछि तखन ओकर नाक सँ पाप निकलैत छैक, जँ ओ मुँह धोबैत अछि तखन ओकर चेहरा सँ पाप निकलैत छैक आ पलक सँ सेहो। जँ ओ हाथ धोबैत छथि तँ हुनकर हाथसँ पाप निकलि कऽ नाखून धरि पहुँचि जाइत छनि। जँ माथ पोछत तँ ओकर माथसँ आ कानसँ पाप निकलि जाइत छैक। जँ ओ पएर धोबैत छथि तँ पाप हुनकर पएरसँ बाहर निकलि जाइत छनि जाबत धरि हुनकर नाखूनक नीचाँसँ नहि निकलि जाइत छनि'। ओ कहलनि : 'हुनकर मस्जिद यात्रा आ नमाज हुनका लेल अतिरिक्त अछि'।

Hadith

Imam Malik : 56

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا تَوَضَّأَ الْعَبْدُ الْمُسْلِمُ أَوْ الْمُؤْمِنُ فَغَسَلَ وَجْهَهُ خَرَجَتْ مِنْ وَجْهِهِ كُلُّ خَطِيئَةٍ نَظَرَ إِلَيْهَا بِعَيْنَيْهِ مَعَ الْمَاءِ أَوْ مَعَ آخِرِ قَطْرِ الْمَاءِ فَإِذَا غَسَلَ يَدَيْهِ خَرَجَتْ مِنْ يَدَيْهِ كُلُّ خَطِيئَةٍ بَطَشَتْهَا يَدَاهُ مَعَ الْمَاءِ أَوْ مَعَ آخِرِ قَطْرِ الْمَاءِ فَإِذَا غَسَلَ رِجْلَيْهِ خَرَجَتْ كُلُّ خَطِيئَةٍ مَشَتْهَا رِجْلَاهُ مَعَ الْمَاءِ أَوْ مَعَ آخِرِ قَطْرِ الْمَاءِ حَتَّى يَخْرُجَ نَقِيًّا مِنْ الذُّنُوبِ

हमरा [सुहैल इब्न अबू सालिह] स मालिक स [अपन पिता] स [अबू हुरैरा] स रिवायत अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलथिन: "जखन कोनो मुसलमान या मुसलमान नौकर वजूद करैत अछि आ फेर ओकर चेहरा धोबैत अछि, त ओकर चेहरा पर जे पाप देखैत अछि, ओ पानिक अंतिम बूंद स बाहर निकलैत अछि। यदि ओ ओकर हाथ छल, त... ओ जे पाप केने छल से पानि के अंतिम बूंद सं बाहर निकलैत अछि, जँ ओ अपन पैर धोबैत अछि त' ओ पाप पर जे पाप केने छल से अंतिम बूंद पानि सं बाहर निकलैत अछि, जाबत धरि ओ पाप सँ साफ नहि निकलि जाइत अछि।"

Hadith

Imam Malik : 57

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ قَالَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَحَانَتْ صَلَاةُ الْعَصْرِ فَالْتَمَسَ النَّاسُ وَضُوءًا فَلَمْ يَجِدُوهُ فَأُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِوَضُوءٍ فِي إِنَاءٍ فَوَضَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي ذَلِكَ الْإِنَاءِ يَدَهُ ثُمَّ أَمَرَ النَّاسَ يَتَوَضَّئُونَ مِنْهُ قَالَ أَنَسٌ فَرَأَيْتُ الْمَاءَ يَنْبُعُ مِنْ تَحْتِ أَصَابِعِهِ فَتَوَضَّأَ النَّاسُ حَتَّى تَوَضَّئُوا مِنْ عِنْدِ آخِرِهِمْ

हमरा मलिक स [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] स [अनस बिन मलिक] स रिवायत भेल अछि जे कहने छलाह: हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के देखलहुं जखन अस्र के नमाज के समय आबि गेल छल आ लोक वजूद के लेल पानि तकैत छल मुदा ओकरा सब के पानि नहि भेटल। तखन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एकटा बर्तन में वज़ूद के लेल पानि देल गेलैन। अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन हाथ ओहि बर्तन मे राखि देलखिन्ह, फेर लोक के ओहि बर्तन सं वजूद करय के आदेश देलखिन्ह. अनस कहलक: 'हम देखलियैक जे ओकर आँगुरक नीचाँ सँ पानि बहैत छलैक, तखन लोक सभ ओहि सँ वजूद केलक, जाबत धरि अंतिम लोक एखनो वजूद नहि क' सकल।'

Hadith

Imam Malik : 58

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نُعَيْمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْمَدَنِيِّ الْمُجْمِرِ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُمَنْ تَوَضَّأَ فَأَحْسَنَ وُضُوءَهُ ثُمَّ خَرَجَ عَامِدًا إِلَى الصَّلَاةِ فَإِنَّهُ فِي صَلَاةٍ مَا دَامَ يَعْمِدُ إِلَى الصَّلَاةِ وَإِنَّهُ يُكْتَبُ لَهُ بِإِحْدَى خُطْوَتَيْهِ حَسَنَةٌ وَيُمْحَى عَنْهُ بِالْأُخْرَى سَيِّئَةٌ فَإِذَا سَمِعَ أَحَدُكُمْ الْإِقَامَةَ فَلَا يَسْعَ فَإِنَّ أَعْظَمَكُمْ أَجْرًا أَبْعَدُكُمْ دَارًا قَالُوا لِمَ يَا أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَ مِنْ أَجْلِ كَثْرَةِ الْخُطَا

हमरा [नुआइम बिन अब्दुल्लाह अल मदनी अल मुजमीर] स मालिक स कहल गेल छल, जे ओ [अबू हुरैरा] कए कहैत सुनने छलाह: 'जे अपन वज़ूद पूरा करैत अछि, फेर नमाज पढ़बा लेल निकलैत अछि, ओकरा नमाज मे गिनल जाइत अछि जा धरि ओ एहि पर ध्यान केंद्रित करैत अछि।' सचमुच ओकर हर डेग पर नीक काज लिखल जाइत छैक आ ओकरा संग एकटा अधलाह काज मेटा जाइत छैक | जँ अहाँ सभ मे सँ कियो इकमाह सुनैत अछि मुदा नहि जायत तखन जेकरा सबसँ बेसी इनाम भेटतैक से ओ अछि जकर घर सबसँ बेसी दूर अछि।' ओ सभ पुछलथिन्ह - हे अबू हुरैरा किएक ? ओ उत्तर देलखिन: 'बहुत डेगक कारणे।'

Hadith

Imam Malik : 59

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ سَمِعَ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِيُسْأَلُ عَنْ الْوُضُوءِ مِنْ الْغَائِطِ بِالْمَاءِ فَقَالَ سَعِيدٌ إِنَّمَا ذَلِكَ وُضُوءُ النِّسَاءِ

[याह्या बिन सईद] स मालिक स हमरा कहने छल; कि ओ सुनलनि जे [सैद बिन मुसैयब] शौच केलाक बाद पानि सं वजूद करबाक बारे मे पूछलनि, तें सईद जवाब देलनि; 'सत्ते, ई स्त्रीगणक वजूद थिक'।

Hadith

Imam Malik : 60

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا شَرِبَ الْكَلْبُ فِي إِنَاءِ أَحَدِكُمْ فَلْيَغْسِلْهُ سَبْعَ مَرَّاتٍ

हमरा [अबू अज़ जिनाद] स मालिक स [अबू हुरैरा] स [अल अ'राज] स इ कहल गेल अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे अगर कुत्ता अहां मे स कोनो एकटा क बर्तन चाटि लैत अछि त ओकरा सात बेर धोउ।