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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
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इमाम मलिक (الامام مالك) - 1594 हदीस

बेहोश होने वाले लोगों के लिए नमाज़ पढ़ने का क़ानून

इमाम मलिक : 21

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍأَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ أُغْمِيَ عَلَيْهِ فَذَهَبَ عَقْلُهُ فَلَمْ يَقْضِ الصَّلَاةَقَالَ مَالِك وَذَلِكَ فِيمَا نَرَى وَاللَّهُ أَعْلَمُ أَنَّ الْوَقْتَ قَدْ ذَهَبَ فَأَمَّا مَنْ أَفَاقَ فِي الْوَقْتِ فَإِنَّهُ يُصَلِّي

मुझे मलिक (नफी) ने बताया कि अब्दुल्लाह बिन उमर बेहोश थे और उन्हें याददाश्त चली गई थी, और वह नमाज़ नहीं पढ़ते थे। मलिक ने कहा; "हमारे हिसाब से अल्लाह बेहतर जानता है, इसलिए जब समय बीत जाता है, तो जो व्यक्ति समय को जानता है, उसे नमाज़ पढ़नी चाहिए।"

नींद में होने के कारण छूटी हुई नमाज़ों के लिए क़ज़ा कैसे करें?

इमाम मलिक : 22

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ قَفَلَ مِنْ خَيْبَرَ أَسْرَى حَتَّى إِذَا كَانَ مِنْ آخِرِ اللَّيْلِ عَرَّسَ وَقَالَ لِبِلَالٍ اكْلَأْ لَنَا الصُّبْحَ وَنَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَصْحَابُهُ وَكَلَأَ بِلَالٌ مَا قُدِّرَ لَهُ ثُمَّ اسْتَنَدَ إِلَى رَاحِلَتِهِ وَهُوَ مُقَابِلُ الْفَجْرِ فَغَلَبَتْهُ عَيْنَاهُ فَلَمْ يَسْتَيْقِظْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَا بِلَالٌ وَلَا أَحَدٌ مِنْ الرَّكْبِ حَتَّى ضَرَبَتْهُمْ الشَّمْسُ فَفَزِعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ بِلَالٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَخَذَ بِنَفْسِي الَّذِي أَخَذَ بِنَفْسِكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اقْتَادُوا فَبَعَثُوا رَوَاحِلَهُمْ وَاقْتَادُوا شَيْئًا ثُمَّ أَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِلَالًا فَأَقَامَ الصَّلَاةَ فَصَلَّى بِهِمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الصُّبْحَ ثُمَّ قَالَ حِينَ قَضَى الصَّلَاةَ مَنْ نَسِيَ الصَّلَاةَ فَلْيُصَلِّهَا إِذَا ذَكَرَهَا فَإِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى يَقُولُ فِي كِتَابِهِ{ أَقِمْ الصَّلَاةَ لِذِكْرِي }

मुझे बताया गया है कि याह्या मलिक से [इब्न शिहाब] से [सईद बिन मुसय्यब] तक जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खैबर को जीत लिया, तो वह रात के अंत तक चले, फिर आराम करने के लिए रुके, फिर बिलाल से कहा; "हमें जगाने के लिए भोर को जागते रहना," फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनके साथी सो गए, जबकि बिलाल मजबूत होकर जागता रहा, जब भोर होने वाली थी तो वह अपने वाहन से टिक गया, और अंत में वह सो गया। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, बिलाल और अन्य साथी तब तक नहीं जागे जब तक कि सूरज ने उन्हें नहीं जगा दिया, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आश्चर्यचकित हुए, और बिलाल ने उनसे कहा; "ऐ अल्लाह के रसूल, मेरे साथ भी कुछ ऐसा हुआ है जैसा आपके साथ हुआ है," तब रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अपने घोड़ों को आगे बढ़ाओ", तो वे उठे और थोड़ी देर के लिए अपने घोड़ों को आगे बढ़ाया, फिर रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बिलाल से इकामा पढ़ने को कहा, और रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनके साथ सुबह की नमाज़ पढ़ी, जब उन्होंने अपनी नमाज़ खत्म की तो कहा, "जो कोई नमाज़ पढ़ना भूल जाए तो जब उसे याद आए तब नमाज़ पढ़े। क्योंकि अल्लाह तआला अपनी किताब में कहते हैं: 'मुझे याद करने के लिए नमाज़ कायम करो।'"

एक ऐसी जगह जहाँ शैतानी और क़ज़ा की नमाज़ें होती हैं

इमाम मलिक : 23

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ أَنَّهُ قَالَعَرَّسَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْلَةً بِطَرِيقِ مَكَّةَ وَوَكَّلَ بِلَالًا أَنْ يُوقِظَهُمْ لِلصَّلَاةِ فَرَقَدَ بِلَالٌ وَرَقَدُوا حَتَّى اسْتَيْقَظُوا وَقَدْ طَلَعَتْ عَلَيْهِمْ الشَّمْسُ فَاسْتَيْقَظَ الْقَوْمُ وَقَدْ فَزِعُوا فَأَمَرَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَرْكَبُوا حَتَّى يَخْرُجُوا مِنْ ذَلِكَ الْوَادِي وَقَالَ إِنَّ هَذَا وَادٍ بِهِ شَيْطَانٌ فَرَكِبُوا حَتَّى خَرَجُوا مِنْ ذَلِكَ الْوَادِي ثُمَّ أَمَرَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَنْزِلُوا وَأَنْ يَتَوَضَّئُوا وَأَمَرَ بِلَالًا أَنْ يُنَادِيَ بِالصَّلَاةِ أَوْ يُقِيمَ فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالنَّاسِ ثُمَّ انْصَرَفَ إِلَيْهِمْ وَقَدْ رَأَى مِنْ فَزَعِهِمْ فَقَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ اللَّهَ قَبَضَ أَرْوَاحَنَا وَلَوْ شَاءَ لَرَدَّهَا إِلَيْنَا فِي حِينٍ غَيْرِ هَذَا فَإِذَا رَقَدَ أَحَدُكُمْ عَنْ الصَّلَاةِ أَوْ نَسِيَهَا ثُمَّ فَزِعَ إِلَيْهَا فَلْيُصَلِّهَا كَمَا كَانَ يُصَلِّيهَا فِي وَقْتِهَا ثُمَّ الْتَفَتَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى أَبِي بَكْرٍ فَقَالَ إِنَّ الشَّيْطَانَ أَتَى بِلَالًا وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي فَأَضْجَعَهُ فَلَمْ يَزَلْ يُهَدِّئُهُ كَمَا يُهَدَّأُ الصَّبِيُّ حَتَّى نَامَ ثُمَّ دَعَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِلَالًا فَأَخْبَرَ بِلَالٌ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلَ الَّذِي أَخْبَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبَا بَكْرٍ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ أَشْهَدُ أَنَّكَ رَسُولُ اللَّهِ

मलिक [ज़ैद बिन असलम] ने मुझे बताया था उन्होंने कहा; "एक रात रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मक्का में एक सड़क पर आराम करने के लिए रुके, बिलाल को नमाज़ के समय उन्हें जगाने का आदेश दिया, फिर बिलाल सो गए और वे भी, तो सूरज उग आया। वे हैरान होकर जागे, फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे कहा कि वे अपनी गाड़ियाँ घाटी से बाहर निकाल दें। फिर (रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: "सच में, इस घाटी में शैतान हैं," फिर वे तब तक चले जब तक वे उस जगह से निकल नहीं गए, फिर उन्होंने उन्हें वज़ू के लिए रुकने का आदेश दिया और बिलाल से नमाज़ या इकामा के लिए अज़ान देने को कहा, फिर अल्लाह के रसूल ने लोगों के साथ नमाज़ पढ़ी, उसके बाद वह डर के मारे उनकी तरफ़ मुड़े, फिर कहा: "ऐ लोगों, अल्लाह ने हमारी रूह ले ली है, अगर वह चाहेगा तो इस समय के अलावा किसी और समय भी हमारी रूह ले लेगा, अगर तुम में से कोई नमाज़ से सो जाए या भूल जाए और फिर याद आए तो वैसा ही करो जैसा उसने उस समय किया था। रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अबू बकर की तरफ़ रुख़ किया और कहा: "बेशक शैतान बिलाल के पास आया जब वह नमाज़ पढ़ रहा था और उसे सुला दिया, और वह उसे तब तक सुलाता रहा जैसे एक माँ अपने बच्चे को सुलाती है जब तक वह सो नहीं जाता", फिर उन्होंने बिलाल को बुलाया और उसने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को बताया जैसा उन्होंने अबू बकर को बताया था, फिर अबू बकर ने कहा; "मैं गवाही देता हूँ कि आप अल्लाह के रसूल हैं।"

जहन्नम की नरक से आती है प्रचंड गर्मी

इमाम मलिक : 24

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ شِدَّةَ الْحَرِّ مِنْ فَيْحِ جَهَنَّمَ فَإِذَا اشْتَدَّ الْحَرُّ فَأَبْرِدُوا عَنْ الصَّلَاةِ وَقَالَ اشْتَكَتْ النَّارُ إِلَى رَبِّهَا فَقَالَتْ يَا رَبِّ أَكَلَ بَعْضِي بَعْضًا فَأَذِنَ لَهَا بِنَفَسَيْنِ فِي كُلِّ عَامٍ نَفَسٍ فِي الشِّتَاءِ وَنَفَسٍ فِي الصَّيْفِ

याह्या ने मुझे मलिक [ज़ैद बिन असलम] से ['अथो` बिन यासर] से बताया है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "ज़रूर, तेज़ गर्मी जहन्नम की हवा से आती है, इसलिए अगर गर्मी तेज़ हो, तो नमाज़ को तब तक टाल दो जब तक कि उस पर छाया न हो जाए।" और उन्होंने कहा: "जहन्नम ने अपने रब से शिकायत की, और कहा; 'ऐ मेरे रब, मेरा कुछ हिस्सा खाओ, कुछ और' तो (अल्लाह अज़्ज़ा वजल्ला) ने उसे हर साल दो साँसें दीं, एक साँस सर्दियों में और दूसरी साँस गर्मियों में।"

चिलचिलाती गर्मी के दौरान प्रार्थना में देरी

इमाम मलिक : 25

و حَدَّثَنَا مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ مَوْلَى الْأَسْوَدِ بْنِ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَعَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ ثَوْبَانَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا اشْتَدَّ الْحَرُّ فَأَبْرِدُوا عَنْ الصَّلَاةِ فَإِنَّ شِدَّةَ الْحَرِّ مِنْ فَيْحِ جَهَنَّمَ وَذَكَرَ أَنَّ النَّارَ اشْتَكَتْ إِلَى رَبِّهَا فَأَذِنَ لَهَا فِي كُلِّ عَامٍ بِنَفَسَيْنِ نَفَسٍ فِي الشِّتَاءِ وَنَفَسٍ فِي الصَّيْفِ

मलिक ने मुझे [अब्दुल्ला बिन यज़ीद] से बताया है, जो अल असवद बिन सुफ़यान का पुराना गुलाम था, [अबू सलामह बिन अब्दुर्रहमान] से, और [मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान बिन त्सौबान] से [अबू हुरैरा] से, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अगर गर्मी बहुत ज़्यादा हो, तो नमाज़ के लिए तब तक इंतज़ार करो जब तक कि छाँव न हो जाए, क्योंकि बहुत ज़्यादा गर्मी जहन्नम के झोंकों से आती है," और उन्होंने कहा, "कि जहन्नम अपने रब से शिकायत करता है, फिर अल्लाह हर साल दो साँसों में उसे अंदर आने देता है, एक साँस सर्दियों में और एक साँस गर्मियों में।"

भीषण गर्मी के दौरान प्रार्थना करने पर प्रतिबंध

इमाम मलिक : 26

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا اشْتَدَّ الْحَرُّ فَأَبْرِدُوا عَنْ الصَّلَاةِ فَإِنَّ شِدَّةَ الْحَرِّ مِنْ فَيْحِ جَهَنَّمَ

कहानी सुनाने वाले बताते हैं; और मुझे मलिक (अबू अज़ ज़िनाद) से (अल अराज) से (अबू हुरैरा) तक बताया गया है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जब गर्मी बहुत ज़्यादा हो तो नमाज़ का समय तब तक टाल दो जब तक वह ठंडी न हो जाए, क्योंकि गर्मी की तेज़ी जहन्नम की मार से आती है।"

प्याज खाकर मस्जिद में जाने पर रोक

इमाम मलिक : 27

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَكَلَ مِنْ هَذِهِ الشَّجَرَةِ فَلَا يَقْرُبْ مَسَاجِدَنَا يُؤْذِينَا بِرِيحِ الثُّومِ

मुझे बताया गया है कि याह्या, मालिक (इब्न शिहाब) से (सईद बिन मुसय्यब) रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "जो कोई भी इस पेड़ (प्याज) को खाए, वह हमारी मस्जिद के पास न आए, क्योंकि इसकी गंध हमें परेशान कर सकती है।"

प्रार्थना के दौरान मुंह ढकने वाले लोगों के कपड़े खींचना

इमाम मलिक : 28

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْمُجَبَّرِأَنَّهُ كَانَ يَرَى سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ إِذَا رَأَى الْإِنْسَانَ يُغَطِّي فَاهُ وَهُوَ يُصَلِّي جَبَذَ الثَّوْبَ عَنْ فِيهِ جَبْذًا شَدِيدًا حَتَّى يَنْزِعَهُ عَنْ فِيهِ

मलिक ने मुझे [अब्दुर्रहमान बिन अल मुजब्बर] से बताया कि उन्होंने [सलीम बिन अब्दुल्ला] को देखा, जब उन्होंने एक व्यक्ति को देखा जिसने नमाज़ पढ़ते समय अपना मुंह ढका हुआ था, तो उसने उसकी कमीज़ इतनी ज़ोर से खींची कि वह उसके मुंह से गिर गई।"

पैगंबर के घृणित कार्य के लिए प्रक्रियाएं

इमाम मलिक : 29

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى الْمَازِنِيِّ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدِ بْنِ عَاصِمٍ وَهُوَ جَدُّ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى الْمَازِنِيِّ وَكَانَ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَهَلْ تَسْتَطِيعُ أَنْ تُرِيَنِي كَيْفَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدِ بْنِ عَاصِمٍ نَعَمْ فَدَعَا بِوَضُوءٍ فَأَفْرَغَ عَلَى يَدِهِ فَغَسَلَ يَدَيْهِ مَرَّتَيْنِ مَرَّتَيْنِ ثُمَّ تَمَضْمَضَ وَاسْتَنْثَرَ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ يَدَيْهِ مَرَّتَيْنِ مَرَّتَيْنِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ ثُمَّ مَسَحَ رَأْسَهُ بِيَدَيْهِ فَأَقْبَلَ بِهِمَا وَأَدْبَرَ بَدَأَ بِمُقَدَّمِ رَأْسِهِ ثُمَّ ذَهَبَ بِهِمَا إِلَى قَفَاهُ ثُمَّ رَدَّهُمَا حَتَّى رَجَعَ إِلَى الْمَكَانِ الَّذِي بَدَأَ مِنْهُ ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَيْهِ

याह्या ने मुझे मलिक से ['अम्र इब्न याह्या अल मज़ीनी] [उनके पिता] के बारे में बताया, उन्होंने अब्दुल्ला ज़ैद इब्न असिम से कहा, जो 'अम्र इब्न याह्या अल मज़ीनी' के दादा थे, जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथियों में से एक थे: "क्या आप मुझे दिखा सकते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) वज़ू कैसे करते थे?" अब्दुल्ला इब्न ज़ैद इब्न असिम ने कहा: "हाँ।" तो उन्होंने वज़ू के लिए पानी माँगा, उसे अपने हाथों पर डाला, और उन्हें दो बार धोया। फिर उन्होंने अपना मुँह धोया और तीन बार इस्तिंत्सार किया। फिर उन्होंने अपना चेहरा तीन बार धोया, फिर उन्होंने अपनी बाँहों को कोहनी तक दो बार धोया। फिर उन्होंने अपने सिर को दोनों हाथों से आगे-पीछे पोंछा, उन्होंने अपने सिर के सामने से शुरू किया फिर अपनी गर्दन के पिछले हिस्से तक जारी रखा और जहाँ से शुरू किया था वहीं वापस आ गए फिर उन्होंने अपने पैर धोए।

इसिन्त्सार और इस्तिजमार कैसे बनाएं

इमाम मलिक : 30

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا تَوَضَّأَ أَحَدُكُمْ فَلْيَجْعَلْ فِي أَنْفِهِ مَاءً ثُمَّ لِيَنْثِرْ وَمَنْ اسْتَجْمَرَ فَلْيُوتِرْ

मुझे मलिक से, अबू अज़ ज़िनाद से [अल अराज] से [अबू हुरैरा] से बताया गया है, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जब तुम में से कोई वुज़ू करे, तो उसे अपनी नाक में पानी डालना चाहिए और फिर इस्तिंज़ार करना चाहिए। और जो कोई पत्थर से इस्तिंजा करे, तो उसे ऑड नंबर से करना चाहिए।"

आंत्र और इस्तिजमार का आदेश

इमाम मलिक : 31

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلَانِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ تَوَضَّأَ فَلْيَسْتَنْثِرْ وَمَنْ اسْتَجْمَرَ فَلْيُوتِرْ

यह मुझे मलिक से [इब्नु शिहाब] से [अबू इदरीस अल ख़ौलानी] से [अबू हुरैरा] से वर्णित है, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "जो कोई भी वुज़ू करता है उसे इस्तज्मार करना चाहिए और जो कोई इस्तज्मा करता है उसे इसे विषम संख्या में करना चाहिए।"

उमर बिन ख़त्ताब ने इस्तिंजा द्वारा इस्तेमाल किए गए पानी से वुज़ू किया

इमाम मलिक : 32

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ طَحْلَاءَ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ أَبَاهُ حَدَّثَهُ أَنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِيَتَوَضَّأُ بِالْمَاءِ لِمَا تَحْتَ إِزَارِهِ

मुझे मालिक [याह्या बिन मुहम्मद बिन थहला`] से [उथमान बिन अब्दुर्रहमान] से वर्णित किया गया था, कि [उनके पिता] ने उनसे कहा कि उन्होंने सुना है कि [उमर बिन अल खत्ताब] ने इस्तिंजा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी से वज़ू किया।

जागने के बाद हाथ धोना

इमाम मलिक : 33

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا اسْتَيْقَظَ أَحَدُكُمْ مِنْ نَوْمِهِ فَلْيَغْسِلْ يَدَهُ قَبْلَ أَنْ يُدْخِلَهَا فِي وَضُوئِهِ فَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَا يَدْرِي أَيْنَ بَاتَتْ يَدُهُ

याह्या ने मुझे मलिक से अबू अज़ ज़िनाद से [अल अराज] से [अबू हुरैरा] से बताया है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जब तुम में से कोई नींद से उठे, तो वज़ू के पानी में डालने से पहले अपने हाथ धो ले, क्योंकि तुम में से कोई नहीं जानता कि उसके हाथ रात में कहाँ रहे।"

प्रार्थना के लिए आवश्यक शर्त के रूप में लेटकर सोने के बाद संक्षिप्त रूप

इमाम मलिक : 34

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَإِذَا نَامَ أَحَدُكُمْ مُضْطَجِعًا فَلْيَتَوَضَّأْ

मुझे मालिक [ज़ैद बिन असलम] से रिवायत है, [उमर बिन अल खत्ताब] ने कहा; "अगर तुम में से कोई पीठ के बल सोता है, तो उसे वज़ू करना चाहिए।"

उमर बिन ख़त्ताब के अनुसार वुज़ू की आयतों की व्याख्या

इमाम मलिक : 35

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَأَنَّ تَفْسِيرَ هَذِهِ الْآيَةِ{ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا قُمْتُمْ إِلَى الصَّلَاةِ فَاغْسِلُوا وُجُوهَكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ إِلَى الْمَرَافِقِ وَامْسَحُوا بِرُءُوسِكُمْ وَأَرْجُلَكُمْ إِلَى الْكَعْبَيْنِ }أَنَّ ذَلِكَ إِذَا قُمْتُمْ مِنْ الْمَضَاجِعِ يَعْنِي النَّوْمَ

मुझे मलिक [ज़ैद बिन असलम] से आयत के मतलब के बारे में बताया गया है: "ऐ ईमान वालों, जब तुम नमाज़ पढ़ना चाहो, तो अपने चेहरे और हाथों को कोहनी तक धो लो, और अपने सिर और पैरों को टखनों तक पोंछ लो" यानी जब तुम नींद से जाग जाओ।

इब्नु उमर के अनुसार सिर्फ़ सो जाने से वुज़ू ख़त्म नहीं होता

इमाम मलिक : 36

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ ابْنَ عُمَرَكَانَ يَنَامُ جَالِسًا ثُمَّ يُصَلِّي وَلَا يَتَوَضَّأُ

कहानी सुनाने वाले ने बताया कि मुझे मलिक (नफी) से बताया गया कि एक बार इब्न उमर (इब्न उमर) बैठे-बैठे सो गए, फिर उन्होंने नमाज़ पढ़ी और वुज़ू नहीं किया।

समुद्री जल की स्वीकृति और उसकी वैधानिकता

इमाम मलिक : 37

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ سَلَمَةَ مِنْ آلِ بَنِي الْأَزْرَقِ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ أَبِي بُرْدَةَ وَهُوَ مِنْ بَنِي عَبْدِ الدَّارِ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُجَاءَ رَجُلٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا نَرْكَبُ الْبَحْرَ وَنَحْمِلُ مَعَنَا الْقَلِيلَ مِنْ الْمَاءِ فَإِنْ تَوَضَّأْنَا بِهِ عَطِشْنَا أَفَنَتَوَضَّأُ بِهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هُوَ الطَّهُورُ مَاؤُهُ الْحِلُّ مَيْتَتُهُ

कहानी सुनाने वाले बताते हैं; मुझे मलिक [शफ़वान बिन सुलेमान], [सईद बिन सलामा], बनी अल अर्ज़ाक, [अल मुगीरा बिन अबू बुरदा], बनी अब्दुद दार से बताया कि उन्होंने [अबू हुरैरा] को यह कहते सुना; कोई रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आया और कहा; "अल्लाह के रसूल, हम समुद्र में सफ़र कर रहे हैं और हमारे पास थोड़ा सा पानी है। अगर हम इससे वुज़ू करेंगे तो हमें प्यास लगेगी, क्या हम इससे वुज़ू कर सकते हैं?" पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "समुद्र का पानी पवित्र है, इसकी लाशें हलाल हैं।"

बिल्ली द्वारा चाटे जाने वाले पानी की स्वीकृति

इमाम मलिक : 38

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ حُمَيْدَةَ بِنْتِ عُبَيْدِ بْنِ رِفَاعَةَ عَنْ خَالَتِهَا كَبْشَةَ بِنْتِ كَعْبِ بْنِ مَالِكٍ وَكَانَتْ تَحْتَ ابْنِ أَبِي قَتَادَةَ الْأَنْصَارِيِّ أَنَّهَا أَخْبَرَتْهَاأَنَّ أَبَا قَتَادَةَ دَخَلَ عَلَيْهَا فَسَكَبَتْ لَهُ وَضُوءًا فَجَاءَتْ هِرَّةٌ لِتَشْرَبَ مِنْهُ فَأَصْغَى لَهَا الْإِنَاءَ حَتَّى شَرِبَتْ قَالَتْ كَبْشَةُ فَرَآنِي أَنْظُرُ إِلَيْهِ فَقَالَ أَتَعْجَبِينَ يَا ابْنَةَ أَخِي قَالَتْ فَقُلْتُ نَعَمْ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّهَا لَيْسَتْ بِنَجَسٍ إِنَّمَا هِيَ مِنْ الطَّوَّافِينَ عَلَيْكُمْ أَوْ الطَّوَّافَاتِ

कहानी सुनाने वाले ने बताया; मुझे मलिक [इस्हाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] से [हुमैदा बिन्त उबैद बिन रिफा'आ] से उसकी मौसी - [कबस्याह बिन्त क'ब बिन मलिक] - के बारे में बताया है - और वह अबू क़तादाह अल अंसारी की देखरेख में थी, उसने उसे बताया कि [अबू क़तादाह] उससे मिलने आए थे, कबस्याह ने उसके लिए वज़ू का पानी डाला, अचानक एक बिल्ली आई और उसके वज़ू के पानी से पी गई, तो उसने बर्तन को पास लाया ताकि बिल्ली उससे पी सके। कबस्याह ने कहा; फिर उसने मुझे देखा जो उसे देख रहा था और कहा; "क्या तुम हैरान हो, ऐ मेरे भाई की बेटी?" उसने कहा; तो मैंने जवाब दिया, "हाँ।" अबू क़तादाह ने बताया, कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "बिल्ली नापाक नहीं है, क्योंकि यह एक जानवर है जो हमारे आस-पास है।"

उमर बिन ख़त्ताब जंगली जानवरों द्वारा पिया गया पानी पीते हैं

इमाम मलिक : 39

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ الْحَارِثِ التَّيْمِيِّ عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَاطِبٍأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ خَرَجَ فِي رَكْبٍ فِيهِمْ عَمْرُو بْنُ الْعَاصِ حَتَّى وَرَدُوا حَوْضًا فَقَالَ عَمْرُو بْنُ الْعَاصِ لِصَاحِبِ الْحَوْضِ يَا صَاحِبَ الْحَوْضِ هَلْ تَرِدُ حَوْضَكَ السِّبَاعُ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ يَا صَاحِبَ الْحَوْضِ لَا تُخْبِرْنَا فَإِنَّا نَرِدُ عَلَى السِّبَاعِ وَتَرِدُ عَلَيْنَا

कहानी सुनाने वाले ने बताया; मुझे मलिक [याह्या बिन सईद] से [मुहम्मद बिन इब्राहिम बिन अल हारिथ अत तैमी] से [याह्या बिन अब्दुर्रहमान बिन हथिब] से बताया है कि [उमर बिन अल खताब] एक बार एक ग्रुप के साथ निकले जिसमें 'अमर बिन अल ऐश' भी था, जब वे एक तालाब के पास पहुँचे, 'अमरू बिन अल ऐश ने तालाब के मालिक से कहा; "ऐ तालाब के रखवाले, क्या कोई जंगली जानवर है जो तुम्हारे तालाब का पानी पीता है?" तब उमर बिन अल खताब ने बीच में टोका; "ऐ तालाब के रखवाले, हमें मत बताओ, हम वह पानी पीते हैं जो जंगली जानवरों ने पिया है और जंगली जानवर भी वह पानी पीते हैं जो हमने पिया है।"

रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय में पुरुष और महिलाएं एक साथ वुज़ू करते हैं

इमाम मलिक : 40

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ كَانَ يَقُولُإِنْ كَانَ الرِّجَالُ وَالنِّسَاءُ فِي زَمَانِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيَتَوَضَّئُونَ جَمِيعًا

कहानी सुनाने वाले ने बताया; मुझे मलिक (नफी) से बताया है; कि [अब्दुल्ला बिन उमर] ने कहा; "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के ज़माने में मर्द और औरतें एक साथ वज़ू करते थे।"