Imam Ahmad : 1
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ قَالَ أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ يَعْنِي ابْنَ أَبِي خَالِدٍ عَنْ قَيْسٍ قَالَ قَامَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ هَذِهِ الْآيَةَ { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا عَلَيْكُمْ أَنْفُسَكُمْ لَا يَضُرُّكُمْ مَنْ ضَلَّ إِذَا اهْتَدَيْتُمْ } وَإِنَّا سَمِعْنَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّاسَ إِذَا رَأَوْا الْمُنْكَرَ فَلَمْ يُنْكِرُوهُ أَوْشَكَ أَنْ يَعُمَّهُمْ اللَّهُ بِعِقَابِهِ
हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुल्ला बिन नुमैर] उ कहले बाड़े; [कायस] से हमनी के [इस्माइल] के जानकारी देले बा उ कहले; [अबू बकर] खड़ा होके अल्लाह के तारीफ कईले अवुरी उनुका के शुद्ध कईले फिर कहले; हे लोग, तू लोग ई श्लोक जरूर पढ़त बाड़ऽ कि ‘हे विश्वास करे वाला लोग, आपन रक्षा करीं; अगर रउरा मार्गदर्शन मिलल बा त कवनो गुमराह करे वाला आदमी रउरा के नुकसान ना चहुँपा पाई'. -क्यूएस अल मैदाह श्लोक 105- के बा। आ साँचहू हमनी के अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बानी जा कि ‘वास्तव में अगर लोग बुराई देखेला आ ओकरा बाद ओकरा से इनकार ना करे त अल्लाह लगभग ओह सब पर सजा दे दीहें’।
Imam Ahmad : 2
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ قَالَ حَدَّثَنَا مِسْعَرٌ وَسُفْيَانُ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ الْمُغِيرَةِ الثَّقَفِيِّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ رَبِيعَةَ الْوَالِبِيِّ عَنْ أَسْمَاءَ بْنِ الْحَكَمِ الْفَزَارِيِّ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كُنْتُ إِذَا سَمِعْتُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثًا نَفَعَنِي اللَّهُ بِمَا شَاءَ مِنْهُ وَإِذَا حَدَّثَنِي عَنْهُ غَيْرِي اسْتَحْلَفْتُهُ فَإِذَا حَلَفَ لِي صَدَّقْتُهُ وَإِنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حَدَّثَنِي وَصَدَقَ أَبُو بَكْرٍ أَنَّهُ سَمِعَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَا مِنْ رَجُلٍ يُذْنِبُ ذَنْبًا فَيَتَوَضَّأُ فَيُحْسِنُ الْوُضُوءَ قَالَ مِسْعَرٌ وَيُصَلِّي وَقَالَ سُفْيَانُ ثُمَّ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ فَيَسْتَغْفِرُ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ إِلَّا غَفَرَ لَهُ
हमनी के [वाकी'] बता के उ कहले; [अली] से [अली बिन अल हकम अल फजारी] से [उस्मान बिन अल मुगीरा अतस त्साफी] से [अली बिन रबियाह अल वलीबी] से [मिस'अर] अवुरी [सुफयान] के बता के उ कहले कि; अगर हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कवनो हदीस सुनब त अल्लाह हमरा के ओकर मर्जी के मुताबिक ओकरा से फायदा देवेले। आ अगर केहू दोसर हमरा के बतावे त हम ओकरा से कसम खाए के कहत बानी, अगर ऊ हमरा के किरिया खइले बा त हम एकर पुष्टि कर देनी. सचमुच, अबू बकर हमरा के बतवले बाड़े, अवुरी इ सही बा कि [अबू बकर] नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बाड़े कि: 'इ अयीसन आदमी नईखे जवन कि पाप क के फेर वज़ूद क के आपन वज़ूद निमन क देवे, -मिस'र कहले; -' तब उ नमाज कईले, जबकि सुफियान कहले 'फिर उ दु रकाअत के नमाज कईले अवुरी अल्लाह से माफी मंगले जब तक कि निश्चित रूप से अल्लाह उनुकर पाप ना माफ ना करीहे'।
Imam Ahmad : 3
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مُحَمَّدٍ أَبُو سَعِيدٍ يَعْنِي الْعَنْقَزِيَّ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنِ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَ اشْتَرَى أَبُو بَكْرٍ مِنْ عَازِبٍ سَرْجًا بِثَلَاثَةَ عَشَرَ دِرْهَمًا قَالَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ لِعَازِبٍ مُرْ الْبَرَاءَ فَلْيَحْمِلْهُ إِلَى مَنْزِلِي فَقَالَ لَا حَتَّى تُحَدِّثَنَا كَيْفَ صَنَعْتَ حِينَ خَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنْتَ مَعَهُ قَالَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ خَرَجْنَا فَأَدْلَجْنَا فَأَحْثَثْنَا يَوْمَنَا وَلَيْلَتَنَا حَتَّى أَظْهَرْنَا وَقَامَ قَائِمُ الظَّهِيرَةِ فَضَرَبْتُ بِبَصَرِي هَلْ أَرَى ظِلًّا نَأْوِي إِلَيْهِ فَإِذَا أَنَا بِصَخْرَةٍ فَأَهْوَيْتُ إِلَيْهَا فَإِذَا بَقِيَّةُ ظِلِّهَا فَسَوَّيْتُهُ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَفَرَشْتُ لَهُ فَرْوَةً وَقُلْتُ اضْطَجِعْ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَاضْطَجَعَ ثُمَّ خَرَجْتُ أَنْظُرُ هَلْ أَرَى أَحَدًا مِنْ الطَّلَبِ فَإِذَا أَنَا بِرَاعِي غَنَمٍ فَقُلْتُ لِمَنْ أَنْتَ يَا غُلَامُ فَقَالَ لِرَجُلٍ مِنْ قُرَيْشٍ فَسَمَّاهُ فَعَرَفْتُهُ فَقُلْتُ هَلْ فِي غَنَمِكَ مِنْ لَبَنٍ قَالَ نَعَمْ قَالَ قُلْتُ هَلْ أَنْتَ حَالِبٌ لِي قَالَ نَعَمْ قَالَ فَأَمَرْتُهُ فَاعْتَقَلَ شَاةً مِنْهَا ثُمَّ أَمَرْتُهُ فَنَفَضَ ضَرْعَهَا مِنْ الْغُبَارِ ثُمَّ أَمَرْتُهُ فَنَفَضَ كَفَّيْهِ مِنْ الْغُبَارِ وَمَعِي إِدَاوَةٌ عَلَى فَمِهَا خِرْقَةٌ فَحَلَبَ لِي كُثْبَةً مِنْ اللَّبَنِ فَصَبَبْتُ يَعْنِي الْمَاءَ عَلَى الْقَدَحِ حَتَّى بَرَدَ أَسْفَلُهُ ثُمَّ أَتَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَوَافَيْتُهُ وَقَدْ اسْتَيْقَظَ فَقُلْتُ اشْرَبْ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَشَرِبَ حَتَّى رَضِيتُ ثُمَّ قُلْتُ هَلْ أَنَى الرَّحِيلُ قَالَ فَارْتَحَلْنَا وَالْقَوْمُ يَطْلُبُونَا فَلَمْ يُدْرِكْنَا أَحَدٌ مِنْهُمْ إِلَّا سُرَاقَةُ بْنُ مَالِكِ بْنِ جُعْشُمٍ عَلَى فَرَسٍ لَهُ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَذَا الطَّلَبُ قَدْ لَحِقَنَا فَقَالَ لَا تَحْزَنْ إِنَّ اللَّهَ مَعَنَا حَتَّى إِذَا دَنَا مِنَّا فَكَانَ بَيْنَنَا وَبَيْنَهُ قَدْرُ رُمْحٍ أَوْ رُمْحَيْنِ أَوْ ثَلَاثَةٍ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَذَا الطَّلَبُ قَدْ لَحِقَنَا وَبَكَيْتُ قَالَ لِمَ تَبْكِي قَالَ قُلْتُ أَمَا وَاللَّهِ مَا عَلَى نَفْسِي أَبْكِي وَلَكِنْ أَبْكِي عَلَيْكَ قَالَ فَدَعَا عَلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ اللَّهُمَّ اكْفِنَاهُ بِمَا شِئْتَ فَسَاخَتْ قَوَائِمُ فَرَسِهِ إِلَى بَطْنِهَا فِي أَرْضٍ صَلْدٍ وَوَثَبَ عَنْهَا وَقَالَ يَا مُحَمَّدُ قَدْ عَلِمْتُ أَنَّ هَذَا عَمَلُكَ فَادْعُ اللَّهَ أَنْ يُنْجِيَنِي مِمَّا أَنَا فِيهِ فَوَاللَّهِ لَأُعَمِّيَنَّ عَلَى مَنْ وَرَائِي مِنْ الطَّلَبِ وَهَذِهِ كِنَانَتِي فَخُذْ مِنْهَا سَهْمًا فَإِنَّكَ سَتَمُرُّ بِإِبِلِي وَغَنَمِي فِي مَوْضِعِ كَذَا وَكَذَا فَخُذْ مِنْهَا حَاجَتَكَ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا حَاجَةَ لِي فِيهَا قَالَ وَدَعَا لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأُطْلِقَ فَرَجَعَ إِلَى أَصْحَابِهِ وَمَضَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا مَعَهُ حَتَّى قَدِمْنَا الْمَدِينَةَ فَتَلَقَّاهُ النَّاسُ فَخَرَجُوا فِي الطَّرِيقِ وَعَلَى الْأَجَاجِيرِ فَاشْتَدَّ الْخَدَمُ وَالصِّبْيَانُ فِي الطَّرِيقِ يَقُولُونَ اللَّهُ أَكْبَرُ جَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَاءَ مُحَمَّدٌ قَالَ وَتَنَازَعَ الْقَوْمُ أَيُّهُمْ يَنْزِلُ عَلَيْهِ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْزِلُ اللَّيْلَةَ عَلَى بَنِي النَّجَّارِ أَخْوَالِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ لِأُكْرِمَهُمْ بِذَلِكَ فَلَمَّا أَصْبَحَ غَدَا حَيْثُ أُمِرَ قَالَ الْبَرَاءُ بْنُ عَازِبٍ أَوَّلُ مَنْ كَانَ قَدِمَ عَلَيْنَا مِنْ الْمُهَاجِرِينَ مُصْعَبُ بْنُ عُمَيْرٍ أَخُو بَنِي عَبْدِ الدَّارِ ثُمَّ قَدِمَ عَلَيْنَا ابْنُ أُمِّ مَكْتُومٍ الْأَعْمَى أَخُو بَنِي فِهْرٍ ثُمَّ قَدِمَ عَلَيْنَا عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فِي عِشْرِينَ رَاكِبًا فَقُلْنَا مَا فَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ هُوَ عَلَى أَثَرِي ثُمَّ قَدِمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبُو بَكْرٍ مَعَهُ قَالَ الْبَرَاءُ وَلَمْ يَقْدَمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى حَفِظْتُ سُوَرًا مِنْ الْمُفَصَّلِ قَالَ إِسْرَائِيلُ وَكَانَ الْبَرَاءُ مِنْ الْأَنْصَارِ مِنْ بَنِي حَارِثَةَ
हमनी के ['अमरू बिन मुहम्मद अबू सैद यानी अल 'अनकाजी] के बता के उ कहले; [अबू इशक] से [अल बर्रा’ बिन ‘अजीब] से हमनी के [इजरायल] के बता के उ कहले कि; अबू बकर ‘अजीब से तेरह दिरहम में काठी खरीदले रहले, अल बर्रा’ कहले; तब अबू बकर अजीब से कहले; 'अल बैरो से कह दीं कि ओकरा के हमरा घरे ले जास'। त अजीब जवाब दिहले; 'ना, जब तक कि रउआ हमनी के इ ना बतावल चाहब कि जब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रउआ संगे निकलले त रउआ का कईले रहनी’। ऊ कहत बाड़न कि; तब [अबू बकर] कहले कि; 'हम रात में टहलत निकलनी आ दिन-रात में सड़क के गति तेज कइनी जवन हमनी के गुजरत रहनी जा, जब हम दुपहरिया में पहुँचनी आ सूरज सीधे ऊपर रहे, हम अपना चारो ओर देखनी कि हमनी खातिर कवनो आश्रय बा कि ना, एक पल बाद हम एगो बड़हन चट्टान देखनी आ हम ओकरा लगे पहुँचनी आ पता चलल कि एगो छोट गुहा रहे - उभर के - जवन चट्टान के छाया से ढंकल रहे, त हम ओह जगह के सुव्यवस्थित कइनी आ एगो अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खातिर चमड़ा के वस्त्र, तब हम कहनी; "लेट जा ए अल्लाह के रसूलुल्लाह" फिर उ लेट गईले, फेर हम निकलनी कि केहू देखत बा कि ना, अचानक हमरा एगो बकरी चरावे वाला देखाई देलस, हम पूछनी; 'जवना केकर हउवऽ?' ऊ जवाब दिहलन; 'कुरैश के एगो आदमी के ह,' तब ऊ आपन नाम कहलस आ हम ओकरा के चिन्ह गइनी, हम फेर पूछनी; 'का तोहार बकरी दूध पैदा करेले? ' ऊ जवाब दिहले; 'हँ' हम फेरु से पूछनी; 'हमरा खातिर दूध एक्सप्रेस करब का? ' ऊ जवाब दिहले; 'हँ' त हम ओकरा के आदेश देनी कि ओकर एगो बकरी पकड़ के बकरी के दूध आ हाथ के हथेली के धूल से साफ करस, हम एगो चमड़ा के गेरिबा लेके अइनी जवना के मुँह में कपड़ा के ढक्कन रहे, ओकरा बाद उ हमरा खातिर तनी दूध दूध देले रहनी आ हम गेरिबा पर पानी डाल देनी ताकि नीचे ज्यादा गरम ना होखे, फिर हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे आ गईनी कि देवे खातिर ओकरा के एगो पेय, आ पता चलल कि ऊ नींद से जाग गइल बा, हम कहनी; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, एकरा के पी लीं' ऊ तब तक पी लिहलन जबले हमरा राहत ना मिलल, तब हम कहनी; 'का हमनी के जाए के समय आ गईल बा?' त हम जब लोग खोजत रहे तबले निकल गइनी आ ओहमें से केहू के हमनी के ना मिलल सिवाय घोड़ा पर सवार सुराकाह बिन मालिक बिन जू'स्यूम के, हम कहनी; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, जे हमनी के शिकार करत बा, उ हमनी के ओवरटेक करी', नबी जवाब देले: 'दुःखी मत हो, अल्लाह हमनी के संगे बाड़े' जब तक कि जब सूरका हमनी के नजदीक ना रहे, लगभग एक भाला चाहे दु भाला चाहे तीन भाला के दूरी प, हम कहनी; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, जे हमनी के शिकार कर रहल बा - हमनी के पकड़ ली' आ हम -ओह घरी- रोवत रहनी, नबी पूछले: 'तू काहे रोवत बाड़ू?' हम जवाब देनी; 'अल्लाह के कसम, हम एह से ना रोवत बानी कि हम अपना बारे में चिंतित बानी, लेकिन हम रोवत बानी काहे कि हम तोहरा चिंता में बानी' तब अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दुआ कइले: 'हम ओकरा के -सूरकाह- आपके मर्जी से छोड़ देनी' फिर सुराकाह के घोड़ा के पेट तक के गोड़ कड़ा जमीन में फिसल गईल अवुरी उ ओकरा से कूद के कहले; 'हे मुहम्मद, हम त पहिलही से जानत बानी कि इ तहार कर्म ह, एहसे अल्लाह से दुआ करीं कि हमरा संगे जवन भईल बा ओकरा से हमरा के बचावे, अल्लाह के कसम हम आपके खबर के ओ लोग खाती गुप्त राखब, जवन कि आपके खोजत बा, जवन कि हमरा पीछे बा, अवुरी इहाँ हमार चमड़ा के तीर के थरथराईल बा, कुछ तीर ले लीं, असल में तू हमरा ऊंट अवुरी बकरी से ए अवुरी ए जगह से गुजरब, एहसे अपना जरूरत खाती ओ लोग से ले लीं'। अबू बकर आगे कहले, फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब दिहले; 'हमरा एकर जरूरत नइखे' तब रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनका खातिर दुआ कइलन ताकि सुरकह मुक्त हो गइलन - जवन आपदा उनका पर आइल रहे - आ अपना दोस्तन के लगे लवट गइलन, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा साथे आपन सफर जारी रखलन, जब हमनी के मदीना पहुंचनी जा त लोग हमनी के स्वागत कइल आ सड़कन पर आ घरन के छत पर निकलल, पी नौकर आ लइका-लइकी जल्दी-जल्दी बाहर निकलले कि; 'अल्लाह सबसे बड़ बाड़े, रसुलुल्लाह शल्लाहु 'अलैहि वसल्लम आ गईल बाड़े, मुहम्मद आ गईल बाड़े'। जनता एह बात पर बहस करत रहे कि ओहमें से कवना के ओकर घर पर कब्जा करे के अधिकार बा, एहसे रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले: ‘आज रात हम बानी नजर चाचा अब्दुल मुतालिब के घरे रुक के ओह लोग के सम्मानित करब’ एहसे जब अगिला दिने सबेरे भइल त ऊ आदेश का मुताबिक चल गइलन. बररा' बिन अजीब कहले कि; 'हमनी के लगे सबसे पहिले मुहाजिरीन आइल रहले बानी अब्दुद दार के भाई मुश'अब बिन उमैर, फेर इब्नू उम्मी मकतुम जे आन्हर रहले, बानी फिहरी के भाई, फेर उमर बिन अल खथथाब बीस लोग के साथे सवारी कइले रहले, त हम पूछनी; 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कइले?' ऊ जवाब दिहलन; 'उ हमरा पीछे रहले', तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अबू बकर, बैरो के संगे पहुंचले' कहले; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम -मदीना में- ना पहुंचले रहते जब तक कि ओह घरी हम अल मुफाशल के कई गो चिट्ठी रट ना लेतीं'। इस्राएल कहलस कि; 'बरो' बनू हरित्सह से अंसार के दोस्त रहले'।
Imam Ahmad : 4
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ قَالَ قَالَ إِسْرَائِيلُ قَالَ أَبُو إِسْحَاقَ عَنْ زَيْدِ بْنِ يُثَيْعٍ عَنْ أَبِي بَكْرٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعَثَهُ بِبَرَاءَةٌ لِأَهْلِ مَكَّةَ لَا يَحُجُّ بَعْدَ الْعَامِ مُشْرِكٌ وَلَا يَطُوفُ بِالْبَيْتِ عُرْيَانٌ وَلَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ إِلَّا نَفْسٌ مُسْلِمَةٌ مَنْ كَانَ بَيْنَهُ وَبَيْنَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُدَّةٌ فَأَجَلُهُ إِلَى مُدَّتِهِ وَاللَّهُ بَرِيءٌ مِنْ الْمُشْرِكِينَ وَرَسُولُهُ قَالَ فَسَارَ بِهَا ثَلَاثًا ثُمَّ قَالَ لِعَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُ الْحَقْهُ فَرُدَّ عَلَيَّ أَبَا بَكْرٍ وَبَلِّغْهَا أَنْتَ قَالَ فَفَعَلَ قَالَ فَلَمَّا قَدِمَ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبُو بَكْرٍ بَكَى قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ حَدَثَ فِيَّ شَيْءٌ قَالَ مَا حَدَثَ فِيكَ إِلَّا خَيْرٌ وَلَكِنْ أُمِرْتُ أَنْ لَا يُبَلِّغَهُ إِلَّا أَنَا أَوْ رَجُلٌ مِنِّي
हमनी के [वाकी'] बता के उ कहले; कहले बा [इजराइल]; कहले बाड़न [अबू इशाक]; [ज़ैद बिन युतसाई'] से [अबू बकर] से कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनुका के मक्का के लोग से आजादी के बयान के संगे भेजले बाड़े; 'ताकि एह साल के बाद कवनो मुशरीक हज प ना जाई, केहु नंगा तवाफ ना करी अवुरी मुसलमान के छोड़ के स्वर्ग में ना जाई, जेकरा अपना अवुरी अल्लाह के रसूलुल्लाह के बीच समझौता होखे, ओकर सीमा समझौता के अंत तक बा, अवुरी अल्लाह अवुरी उनुकर रसूलुल्लाह मुशरिर से मुक्त हो जईहे'। याजिद कहले कि; त उ तीन लोग के संगे चल गईले। तब उ अली से कहले; 'उनुका पीछे चलीं आ अबू बकर के हमरा लगे वापस कर दीं आ अपना ओर से बयान दे दीं'. अइसहीं ऊ कइलन, ऊ कहले; जब अबू बकर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे अइले त उ रो के पूछले; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, का हमरा कुछ भईल बा?' ऊ जवाब दिहलन; 'तोहरा साथे अच्छा के अलावा कुछुओ नइखे भइल, लेकिन हमरा के आदेश दिहल गईल रहे कि इ मामला हमरा भा हमरा में से कवनो एक के छोड़ के ना पहुंचावल जाए'।
Imam Ahmad : 5
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُمَيْرٍ عَنْ سُلَيْمِ بْنِ عَامِرٍ عَنْ أَوْسَطَ قَالَ خَطَبَنَا أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَقَامِي هَذَا عَامَ الْأَوَّلِ وَبَكَى أَبُو بَكْرٍ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ سَلُوا اللَّهَ الْمُعَافَاةَ أَوْ قَالَ الْعَافِيَةَ فَلَمْ يُؤْتَ أَحَدٌ قَطُّ بَعْدَ الْيَقِينِ أَفْضَلَ مِنْ الْعَافِيَةِ أَوْ الْمُعَافَاةِ عَلَيْكُمْ بِالصِّدْقِ فَإِنَّهُ مَعَ الْبِرِّ وَهُمَا فِي الْجَنَّةِ وَإِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ فَإِنَّهُ مَعَ الْفُجُورِ وَهُمَا فِي النَّارِ وَلَا تَحَاسَدُوا وَلَا تَبَاغَضُوا وَلَا تَقَاطَعُوا وَلَا تَدَابَرُوا وَكُونُوا إِخْوَانًا كَمَا أَمَرَكُمْ اللَّهُ تَعَالَى
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन जा'फर] उ कहले बाड़े; [औसत] से [यजीद बिन खुमैर] से [सुलेम बिन अमीर] से हमनी के [स्यूबाह] के बारे में बता के उ कहले कि; [अबू बकर] हमनी के उपदेश देके कहले कि; रसुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहिला साल में हमरा जगह पर खड़ा हो गइलन। तब अबू बकर रोवे लगले, फेर कहले; अल्लाह से अल मुआफात - माफी मांगीं - या उ कहतारे अल आफियाह - सुरक्षा -, काहे कि विश्वास के बाद केहू के अल आफिया या अल मुआफात से बड़ कुछ ना दिहल जाला, ईमानदार रहीं काहे कि ईमानदारी सदाचार के साथ मिल के बा आ दुनु स्वर्ग में बा, आ झूठ से दूर रहीं काहे कि झूठ बुराई के साथे मिल के बा आ दुनु नरक में बा, आ एक दूसरा से ईर्ष्या मत करीं, दुश्मनी करीं, आ दोस्ती के संबंध ना काट के एक दोसरा से मुँह ना मोड़ें, बलुक भाई बनीं जइसन कि अल्लाह तआला के हुक्म बा.'
Imam Ahmad : 6
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ وَأَبُو عَامِرٍ قَالَا حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ يَعْنِي ابْنَ مُحَمَّدٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ يَعْنِي ابْنَ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ عَنْ مُعَاذِ بْنِ رِفَاعَةَ بْنِ رَافِعٍ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ أَبِيهِ رِفَاعَةَ بْنِ رَافِعٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ عَلَى مِنْبَرِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ فَبَكَى أَبُو بَكْرٍ حِينَ ذَكَرَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ سُرِّيَ عَنْهُ ثُمَّ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ فِي هَذَا الْقَيْظِ عَامَ الْأَوَّلِ سَلُوا اللَّهَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ وَالْيَقِينَ فِي الْآخِرَةِ وَالْأُولَى
हमनी के बतावल गईल बा कि [अब्दुररहमान बिन महदी] अवुरी [अबू अमीर] दुनो कहले कि; हमनी के [जुहैर यानी इब्नु मुहम्मद] से [अब्दुल्लाह यानी इब्नु मुहम्मद बिन अकील] से [मुअदज बिन रिफाआह बिन रफी’ अल अंसारी] से अपना पिता यानी [रिफाआह बिन रफी’] से बता के उ कहले; हम [अबू बकर ऐश सिद्दिक] के रसुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मंच से उपदेश देत सुननी, तब कहत रहले; 'हम रसुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बानी,' आ अबू बकर रसुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नाम लेत रोअले, तब उ अपना लोर से चुप हो गईले अवुरी कहले; 'हम पहिला साल में रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अयीसन गरम, गरम दिन प कहत सुनले रहनी कि 'अल्लाह से माफी, सुरक्षा अवुरी परलोक अवुरी दुनिया प भरोसा मांगी'।
Imam Ahmad : 7
حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ يَعْنِي ابْنَ سَلَمَةَ عَنِ ابْنِ أَبِي عَتِيقٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ السِّوَاكُ مَطْهَرَةٌ لِلْفَمِ مَرْضَاةٌ لِلرَّبِّ
हमनी के [अबू कामिल] के बता के उ कहले कि; हमनी के [हम्मद, यानी इब्न सलामा] के [इब्न अबू अतीक] से [उनकर पिता] से [अबू बकर] से बतावल गईल बा, कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'सिवाक मुंह साफ करेवाला ह अवुरी अल्लाह से खुश बा'।
Imam Ahmad : 8
حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ قَالَ حَدَّثَنِي يَزِيدُ بْنُ أَبِي حَبِيبٍ عَنْ أَبِي الْخَيْرِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ أَنَّهُ قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلِّمْنِي دُعَاءً أَدْعُو بِهِ فِي صَلَاتِي قَالَ قُلْ اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ وَارْحَمْنِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ و قَالَ يُونُسُ كَبِيرًا حَدَّثَنَاه حَسَنٌ الْأَشْيَبُ عَنْ ابْنِ لَهِيعَةَ قَالَ قَالَ كَبِيرًا
हमनी के [हसीम बिन अल कासिम] के बता के उ कहले कि; हमनी के [अल लैट्स] के बता के उ कहले कि; हमरा के [यजीद बिन अबू हबीब] से [अबुल खैर] से [अब्दुल्लाह बिन अमरू] से [अबू बकर ऐश शिद्दिक] से बतवले बाड़े कि उ रसुल्लाह से कहले रहले; 'हमरा के ऊ दुआ सिखाईं जवना से हम अपना नमाज में नमाज पढ़त बानी,' ऊ जवाब दिहलन: 'पढ़ीं, अल्लाहम्मा इनिई झालमतु नफसी झुलमान कत्सिरो, वाला यघफिरुज ज़ुनूबा इल्ला अंता, फगफिरली मघफिरातन मिन 'इंडिका वारहमनी इन्नाका अंतल घोफुरुर रहीम '-हे अल्लाह, हम अपना पर बहुत अन्याय कइले बानी, आ केहू हमरा के माफ नइखे कर सकत sins except तू तब अपना पक्ष से माफी के साथ हमार पाप माफ करऽ आ हमरा पर दया करऽ, वाकई तू सबसे क्षमाशील, सबसे दयालु हउअ-'। [योना] कहले कि; 'कबीरा -बड़-,' हमनी के [हसन अल असी याब] से [इब्न लहिआह] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; ऊ कहले: 'कबीरा -बड़का-'।
Imam Ahmad : 9
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا أَنَّ فَاطِمَةَ وَالْعَبَّاسَ أَتَيَا أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَلْتَمِسَانِ مِيرَاثَهُمَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُمَا حِينَئِذٍ يَطْلُبَانِ أَرْضَهُ مِنْ فَدَكَ وَسَهْمَهُ مِنْ خَيْبَرَ فَقَالَ لَهُمْ أَبُو بَكْرٍ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ إِنَّمَا يَأْكُلُ آلُ مُحَمَّدٍ فِي هَذَا الْمَالِ وَإِنِّي وَاللَّهِ لَا أَدَعُ أَمْرًا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَصْنَعُهُ فِيهِ إِلَّا صَنَعْتُهُ
हमनी के [अब्दुरज्जाक] के बता के उ कहले कि; हमनी के [मा'मर] के [अज ज़ुहरी] से ['उरवाह] से [ऐस्याह] से बतावल गईल बा, कि फातिमा अवुरी अल अब्बास अबू बकर के लगे आईल रहले, दुनो लोग अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अपना विरासत के हिस्सा के मांग कईले रहले, जब दुनो लोग फदक युद्ध के दौरान उनुकर जमीन अवुरी खैबर युद्ध से उनुकर हिस्सा मंगले रहले, तब [अबू बकर] कहले रहले ओह लोग के; दरअसल हम अल्लाह के रसूलुल्लाह के कहत सुनले रहनी कि 'हमनी के विरासत में ना मिलेला, हमनी के जवन धन छोड़ेनी जा उ दक्षिणा हो जाला, मुहम्मद के परिवार सिर्फ ए धन से खाला'। त अल्लाह के कसम, हम कवनो अयीसन काम के ना छोड़ब जवन कि हम रसुलुल्लाह के करत देखले रहनी, जब तक कि हम निश्चित रूप से ना करब'।
Imam Ahmad : 10
حَدَّثَنَا أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْمُقْرِئُ قَالَ حَدَّثَنَا حَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحٍ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ الْمَلِكِ بْنَ الْحَارِثِ يَقُولُ إِنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَلَى هَذَا الْمِنْبَرِ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي هَذَا الْيَوْمِ مِنْ عَامِ الْأَوَّلِ ثُمَّ اسْتَعْبَرَ أَبُو بَكْرٍ وَبَكَى ثُمَّ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَمْ تُؤْتَوْا شَيْئًا بَعْدَ كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ مِثْلَ الْعَافِيَةِ فَاسْأَلُوا اللَّهَ الْعَافِيَةَ
हमनी के [अबू अब्दुररहमान अल मुकरी'] के बता के उ कहले; हमनी के [हाइवाह बिन स्यूरैह] के बता के उ कहले; सुनले बानी [अब्दुल मालिक बिन अल हरिथ] के कहनाम बा; सचमुच [अबू हुरैरा] कहले रहले कि; हम [अबू बकर ऐश सिद्दिक] के एह मंच पर कहत सुनले बानी; पहिला साल के एह दिन रसुलुल्लाह सल्लाह अलैहि वसल्लम के कहत सुनले रहनी, तब अबू बकर सलाह में एतना खो गईले कि रोवे लगले अवुरी फेर कहले; हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुननी कि 'रउरा के कुछ ना दिहल जाला - जवन कि उच्च पद प होखे - अल अफीया - सुरक्षा - जईसन निश्छल वाक्य के बाद, एहसे अल्लाह से अल अफीया के मांग करीं'।
Imam Ahmad : 11
حَدَّثَنَا عَفَّانُ قَالَ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ قَالَ أَخْبَرَنَا ثَابِتٌ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ حَدَّثَهُ قَالَ قُلْتُ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ فِي الْغَارِ وَقَالَ مَرَّةً وَنَحْنُ فِي الْغَارِ لَوْ أَنَّ أَحَدَهُمْ نَظَرَ إِلَى قَدَمَيْهِ لَأَبْصَرَنَا تَحْتَ قَدَمَيْهِ قَالَ فَقَالَ يَا أَبَا بَكْرٍ مَا ظَنُّكَ بِاثْنَيْنِ اللَّهُ ثَالِثُهُمَا
हमनी के ['अफ्फान] के बता के उ कहले; हमनी के [हम्मम] के बता के उ कहले कि; [अनस] से हमनी के [थाबीत] के सूचित कईले बा कि [अबू बकर] उनुका के बतवले बाड़े, उ -अबू बकर- कहले; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहनी जब उ गुफा में रहले, - एगो अउरी रिवायत में उ कहले रहले; 'आ हम गुफा में रहनी, - आ अगर ओहमें से केहू ओकर दू गो गोड़ देखले रहित त ओकरा गोड़ के नीचे से हमनी के देखल रहित', तब ऊ कहले: 'हे अबू बकर, रउरा दू आदमी के का सोचत बानी, का अल्लाह दुनु में से तीसरा ना हउवें'.
Imam Ahmad : 12
حَدَّثَنَا رَوْحٌ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ أَبِي التَّيَّاحِ عَنِ الْمُغِيرَةِ بْنِ سُبَيْعٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ حُرَيْثٍ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ قَالَ حَدَّثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ الدَّجَّالَ يَخْرُجُ مِنْ أَرْضٍ بِالْمَشْرِقِ يُقَالُ لَهَا خُرَاسَانُ يَتَّبِعُهُ أَقْوَامٌ كَأَنَّ وُجُوهَهُمْ الْمَجَانُّ الْمُطْرَقَةُ
हमनी के [रौह] के बता के उ कहले; हमनी के [इब्न अबी अरूबाह] से [अबू अत तैय्याह] से [अल मुगीरा बिन सुबाई’] से [‘अमरू बिन हुरैत] से [अबू बकर ऐश शिद्दिक] से बतवले बाड़े, उ कहले कि; 'रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमनी के बतवले कि दज्जाल धरती के पूरबी हिस्सा से निकली जवना के नाम ह खुरासान, बहुत लोग उनुका पीछे-पीछे चल जईहे, जईसे कि उनुकर चेहरा हथौड़ा से मारल ढाल निहन होखे'।
Imam Ahmad : 13
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ مَوْلَى بَنِي هَاشِمٍ قَالَ حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ مُوسَى صَاحِبُ الدَّقِيقِ عَنْ فَرْقَدٍ عَنْ مُرَّةَ بْنِ شَرَاحِيلَ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ بَخِيلٌ وَلَا خَبٌّ وَلَا خَائِنٌ وَلَا سَيِّئُ الْمَلَكَةِ وَأَوَّلُ مَنْ يَقْرَعُ بَابَ الْجَنَّةِ الْمَمْلُوكُونَ إِذَا أَحْسَنُوا فِيمَا بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ وَفِيمَا بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ مَوَالِيهِمْ
बानी हाशिम के एगो पूर्व गुलाम हमनी के [अबू सईद] के बता के उ कहले कि; हमनी के बतवले बाड़े [शदकाह बिन मूसा] दोस्त अद दाकीक, [फरकाद] से [मुर्राह बिन स्याराहिल] से [अबू बकर ऐश शिद्दिक] से, उ कहले; अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहले कि, 'ना त उ लोग स्वर्ग में प्रवेश करीहे जवन कि नटखट, धोखेबाज, कायर होईहे, ना उ लोग जे अभद्र व्यवहार करीहे, अवुरी जवन लोग पहिले स्वर्ग के दरवाजा खटखटावेले, उ लोग अयीसन नौकर होईहे जवन कि उनुका अवुरी अल्लाह अज्जा व जल्ला के बीच जवन बा अवुरी उनुका अवुरी अपना मालिक के बीच जवन बा ओकरा के पूरा करे में निपुण होईहे'।
Imam Ahmad : 14
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ أَبِي شَيْبَةَ قَالَ عَبْد اللَّهِ وَسَمِعْتُهُ مِنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي شَيْبَةَ قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ عَنِ الْوَلِيدِ بْنِ جُمَيْعٍ عَنْ أَبِي الطُّفَيْلِ قَالَ لَمَّا قُبِضَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرْسَلَتْ فَاطِمَةُ إِلَى أَبِي بَكْرٍ أَنْتَ وَرِثْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمْ أَهْلُهُ قَالَ فَقَالَ لَا بَلْ أَهْلُهُ قَالَتْ فَأَيْنَ سَهْمُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ إِذَا أَطْعَمَ نَبِيًّا طُعْمَةً ثُمَّ قَبَضَهُ جَعَلَهُ لِلَّذِي يَقُومُ مِنْ بَعْدِهِ فَرَأَيْتُ أَنْ أَرُدَّهُ عَلَى الْمُسْلِمِينَ فَقَالَتْ فَأَنْتَ وَمَا سَمِعْتَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَعْلَمُ
हमनी के [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद बिन अबू स्याइबा] बतवले बाड़े। अब्दुल्ला कहले कि; आ हम अब्दुल्ला बिन अबू सियाबा से सुनले बानी, ऊ कहले; हमनी के [मुहम्मद बिन फुदलैल] से [अल वलीद बिन जुमाई'] से [अबू अथ थुफैल] से बतवले बाड़े उ कहले कि; जब नबी के मौत हो गईल त फातिमा अबू बकर के एगो चिट्ठी लिखली जवना में; 'का रउआ या रउआ परिवार के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के विरासत में मिल रहल बा?' उ जवाब दिहले; फातिमा कहली कि, 'हमरा विरासत में ना मिलल, लेकिन उनुका परिवार के मिलल; 'तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हिस्सेदारी कहां बा?' त [अबू बकर] कहले कि; 'वास्तव में हम अल्लाह के रसूलुल्लाह के कहत सुनले बानी; 'साँचहूँ अगर अल्लाह कवनो नबी के खाना खियावेले, फेर मर जाले, त उ - अल्लाह - ओकरा बाद आवे वाला लोग खातिर बनावेले', त हमार इरादा बा कि मुसलमानन के वापस कर दीं'। तब फातिमा कहली; 'तब रउआ अल्लाह के रसूलुल्लाह से जवन सुनले बानी ओकरा के बेहतर तरीका से जानत बानी'।
Imam Ahmad : 15
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ إِسْحَاقَ الطَّالَقَانِيُّ قَالَ حَدَّثَنِي النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ الْمَازِنِيُّ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو نَعَامَةَ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو هُنَيْدَةَ الْبَرَاءُ بْنُ نَوْفَلٍ عَنْ وَالَانَ الْعَدَوِيِّ عَنْ حُذَيْفَةَ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ أَصْبَحَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ فَصَلَّى الْغَدَاةَ ثُمَّ جَلَسَ حَتَّى إِذَا كَانَ مِنْ الضُّحَى ضَحِكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ جَلَسَ مَكَانَهُ حَتَّى صَلَّى الْأُولَى وَالْعَصْرَ وَالْمَغْرِبَ كُلُّ ذَلِكَ لَا يَتَكَلَّمُ حَتَّى صَلَّى الْعِشَاءَ الْآخِرَةَ ثُمَّ قَامَ إِلَى أَهْلِهِ فَقَالَ النَّاسُ لِأَبِي بَكْرٍ أَلَا تَسْأَلُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا شَأْنُهُ صَنَعَ الْيَوْمَ شَيْئًا لَمْ يَصْنَعْهُ قَطُّ قَالَ فَسَأَلَهُ فَقَالَ نَعَمْ عُرِضَ عَلَيَّ مَا هُوَ كَائِنٌ مِنْ أَمْرِ الدُّنْيَا وَأَمْرِ الْآخِرَةِ فَجُمِعَ الْأَوَّلُونَ وَالْآخِرُونَ بِصَعِيدٍ وَاحِدٍ فَفَظِعَ النَّاسُ بِذَلِكَ حَتَّى انْطَلَقُوا إِلَى آدَمَ عَلَيْهِ السَّلَام وَالْعَرَقُ يَكَادُ يُلْجِمُهُمْ فَقَالُوا يَا آدَمُ أَنْتَ أَبُو الْبَشَرِ وَأَنْتَ اصْطَفَاكَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ اشْفَعْ لَنَا إِلَى رَبِّكَ قَالَ لَقَدْ لَقِيتُ مِثْلَ الَّذِي لَقِيتُمْ انْطَلِقُوا إِلَى أَبِيكُمْ بَعْدَ أَبِيكُمْ إِلَى نُوحٍ { إِنَّ اللَّهَ اصْطَفَى آدَمَ وَنُوحًا وَآلَ إِبْرَاهِيمَ وَآلَ عِمْرَانَ عَلَى الْعَالَمِينَ } قَالَ فَيَنْطَلِقُونَ إِلَى نُوحٍ عَلَيْهِ السَّلَام فَيَقُولُونَ اشْفَعْ لَنَا إِلَى رَبِّكَ فَأَنْتَ اصْطَفَاكَ اللَّهُ وَاسْتَجَابَ لَكَ فِي دُعَائِكَ وَلَمْ يَدَعْ عَلَى الْأَرْضِ مِنْ الْكَافِرِينَ دَيَّارًا فَيَقُولُ لَيْسَ ذَاكُمْ عِنْدِي انْطَلِقُوا إِلَى إِبْرَاهِيمَ عَلَيْهِ السَّلَام فَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ اتَّخَذَهُ خَلِيلًا فَيَنْطَلِقُونَ إِلَى إِبْرَاهِيمَ فَيَقُولُ لَيْسَ ذَاكُمْ عِنْدِي وَلَكِنْ انْطَلِقُوا إِلَى مُوسَى عَلَيْهِ السَّلَام فَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ كَلَّمَهُ تَكْلِيمًا فَيَقُولُ مُوسَى عَلَيْهِ السَّلَام لَيْسَ ذَاكُمْ عِنْدِي وَلَكِنْ انْطَلِقُوا إِلَى عِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ فَإِنَّهُ يُبْرِئُ الْأَكْمَهَ وَالْأَبْرَصَ وَيُحْيِي الْمَوْتَى فَيَقُولُ عِيسَى لَيْسَ ذَاكُمْ عِنْدِي وَلَكِنْ انْطَلِقُوا إِلَى سَيِّدِ وَلَدِ آدَمَ فَإِنَّهُ أَوَّلُ مَنْ تَنْشَقُّ عَنْهُ الْأَرْضُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ انْطَلِقُوا إِلَى مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَيَشْفَعَ لَكُمْ إِلَى رَبِّكُمْ عَزَّ وَجَلَّ قَالَ فَيَنْطَلِقُ فَيَأْتِي جِبْرِيلُ عَلَيْهِ السَّلَام رَبَّهُ فَيَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ ائْذَنْ لَهُ وَبَشِّرْهُ بِالْجَنَّةِ قَالَ فَيَنْطَلِقُ بِهِ جِبْرِيلُ فَيَخِرُّ سَاجِدًا قَدْرَ جُمُعَةٍ وَيَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ ارْفَعْ رَأْسَكَ يَا مُحَمَّدُ وَقُلْ يُسْمَعْ وَاشْفَعْ تُشَفَّعْ قَالَ فَيَرْفَعُ رَأْسَهُ فَإِذَا نَظَرَ إِلَى رَبِّهِ عَزَّ وَجَلَّ خَرَّ سَاجِدًا قَدْرَ جُمُعَةٍ أُخْرَى فَيَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ ارْفَعْ رَأْسَكَ وَقُلْ يُسْمَعْ وَاشْفَعْ تُشَفَّعْ قَالَ فَيَذْهَبُ لِيَقَعَ سَاجِدًا فَيَأْخُذُ جِبْرِيلُ عَلَيْهِ السَّلَام بِضَبْعَيْهِ فَيَفْتَحُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ عَلَيْهِ مِنْ الدُّعَاءِ شَيْئًا لَمْ يَفْتَحْهُ عَلَى بَشَرٍ قَطُّ فَيَقُولُ أَيْ رَبِّ خَلَقْتَنِي سَيِّدَ وَلَدِ آدَمَ وَلَا فَخْرَ وَأَوَّلَ مَنْ تَنْشَقُّ عَنْهُ الْأَرْضُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا فَخْرَ حَتَّى إِنَّهُ لَيَرِدُ عَلَيَّ الْحَوْضَ أَكْثَرُ مِمَّا بَيْنَ صَنْعَاءَ وَأَيْلَةَ ثُمَّ يُقَالُ ادْعُوا الصِّدِّيقِينَ فَيَشْفَعُونَ ثُمَّ يُقَالُ ادْعُوا الْأَنْبِيَاءَ قَالَ فَيَجِيءُ النَّبِيُّ وَمَعَهُ الْعِصَابَةُ وَالنَّبِيُّ وَمَعَهُ الْخَمْسَةُ وَالسِّتَّةُ وَالنَّبِيُّ وَلَيْسَ مَعَهُ أَحَدٌ ثُمَّ يُقَالُ ادْعُوا الشُّهَدَاءَ فَيَشْفَعُونَ لِمَنْ أَرَادُوا وَقَالَ فَإِذَا فَعَلَتْ الشُّهَدَاءُ ذَلِكَ قَالَ يَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ أَنَا أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ أَدْخِلُوا جَنَّتِي مَنْ كَانَ لَا يُشْرِكُ بِي شَيْئًا قَالَ فَيَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ قَالَ ثُمَّ يَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ انْظُرُوا فِي النَّارِ هَلْ تَلْقَوْنَ مِنْ أَحَدٍ عَمِلَ خَيْرًا قَطُّ قَالَ فَيَجِدُونَ فِي النَّارِ رَجُلًا فَيَقُولُ لَهُ هَلْ عَمِلْتَ خَيْرًا قَطُّ فَيَقُولُ لَا غَيْرَ أَنِّي كُنْتُ أُسَامِحُ النَّاسَ فِي الْبَيْعِ وَالشِّرَاءِ فَيَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ أَسْمِحُوا لِعَبْدِي كَإِسْمَاحِهِ إِلَى عَبِيدِي ثُمَّ يُخْرِجُونَ مِنْ النَّارِ رَجُلًا فَيَقُولُ لَهُ هَلْ عَمِلْتَ خَيْرًا قَطُّ فَيَقُولُ لَا غَيْرَ أَنِّي قَدْ أَمَرْتُ وَلَدِي إِذَا مِتُّ فَأَحْرِقُونِي بِالنَّارِ ثُمَّ اطْحَنُونِي حَتَّى إِذَا كُنْتُ مِثْلَ الْكُحْلِ فَاذْهَبُوا بِي إِلَى الْبَحْرِ فَاذْرُونِي فِي الرِّيحِ فَوَاللَّهِ لَا يَقْدِرُ عَلَيَّ رَبُّ الْعَالَمِينَ أَبَدًا فَقَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لِمَ فَعَلْتَ ذَلِكَ قَالَ مِنْ مَخَافَتِكَ قَالَ فَيَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ انْظُرْ إِلَى مُلْكِ أَعْظَمِ مَلِكٍ فَإِنَّ لَكَ مِثْلَهُ وَعَشَرَةَ أَمْثَالِهِ قَالَ فَيَقُولُ لِمَ تَسْخَرُ بِي وَأَنْتَ الْمَلِكُ قَالَ وَذَاكَ الَّذِي ضَحِكْتُ مِنْهُ مِنْ الضُّحَى
हमनी के [इब्राहिम बिन इशाक अथ थलकानी] के बता के उ कहले कि; हमरा के [अन नडलर बिन स्युमैल अल मज़िनी] के बता के उ कहले; हमरा के [अबू नअमाह] के बता के उ कहले; हमरा के [अबू हुनैदा अल बर्रा’ बिन नौफल] से [वालन अल अदावी] से [हुदजाइफा] से [अबू बकर ऐश शिद्दिक] से बता के उ कहले; 'एक दिन सबेरे रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सुबह के नमाज कइले। फिर उ बईठ गईले, जब तक कि जब धुहा के समय ना आईल त रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हंस गईले, फिर अपना मूल जगह प तब तक बईठ गईले जब तक उ दुपहरिया के नमाज, असर अवुरी मगरीब के नमाज ना कईले, रात के अंत में शाम के नमाज तक ना बोलले, फिर अपना परिवार के घरे चल गईले, फिर लोग अबू बकर से कहलस; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह से काहे ना पूछब कि आज उ का कईले, भले उ पहिले कबो ना कईले रहले?' ऊ कहले कि; तब ऊ पूछले, त ऊ जवाब दिहले: 'हँ, हमरा के देखावल गइल बा कि एह दुनिया आ परलोक के मामिला में का होई, त जे पहिले रहे आ जे आइल रहे ऊ एके जगहा जमा हो गइल, तब लोग एह बात से डेरा गइल, एहसे ऊ लोग आदम का लगे आइल जबकि पसीना लगभग ढंक लिहलसि, ऊ लोग कहल; 'हे आदम, तू इंसानियत के बाप हउअ आ अल्लाह अज्जा वजल्ला तोहरा के चुनले बाड़ू, एहसे अपना रब से हमनी खातिर शफाद करे के कहऽ,' आदम जवाब दिहलन; 'हम भी उहे सामना कर रहल बानी जवना के सामना तोहरा कर रहल बा, अपना पिता यानी नूह के बाद अपना पिता के लगे जाईं,' सचमुच अल्लाह आदम, नूह, इब्राहीम के परिवार अवुरी 'इमरान के परिवार के सभ लोग प' चुनले बाड़े। त उ लोग नूह के लगे आके कहलस कि; 'हमनी के अपना रब्ब के सोझा बिनती कर, काहे कि अल्लाह तोहरा के चुनले बाड़े अवुरी आपके दुआ के जवाब देले बाड़े अवुरी उ धरती के सतह प काफिरन के बीच कवनो घर नईखन छोड़ले'। तब नूह कहले कि; 'हम तोहरा खातिर बिनती नईखी क सकत, एहसे इब्राहिम के लगे जा, काहेंकी अल्लाह उनुका के आपन प्रेमी बना लेले बाड़े'। तब उ लोग इब्राहिम के लगे गईले अवुरी इब्राहिम कहले; 'हम तोहरा के बिनती नईखी दे सकत, मूसा के लगे जा, काहेकी एक बेर अल्लाह उनुका से सीधा बात कईले रहले'। तब मूसा जवाब दिहलन; 'हमरा लगे उ नईखे जवन तू मांगत बाड़ू, त ईसा बिन मरियम के लगे जा, सचमुच उ आन्हर, बेमार के ठीक क सकतारे अवुरी मरेवाला के जिंदा क सकतारे'। तब यीशु जवाब दिहलन; 'हमरा लगे उहे नइखे जवन तू मांगत बाड़ू, लेकिन अपना मालिक के लगे जा, आदम के बेटा, काहे कि ओकर कब्र कयामत के दिन सबसे पहिले खुली, मुहम्मद शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे जा, निश्चित रूप से उ आपके रब्ब के सोझा आपके खातिर बिनती करीहे'। ऊ कहले कि; 'त उ चल गईले, फेर जिब्रिल अपना रब के सामना कईले, फेर अल्लाह कहले: 'उनुका के अनुमति दीं - शफार करीं - अवुरी ओकरा के स्वर्ग के खुशखबरी दीं'। ऊ कहत बाड़न कि; तब जिब्रिल खुशखबरी लेके चल गईले, फिर मुहम्मद प्रणाम कईले अवुरी एक शुक्रवार तक सजदा कईले, फेर अल्लाह कहले कि, 'हे मुहम्मद, आपन माथा उठाई, कह दीं कि आपके बात सुनल जाई अवुरी बिनती कईल जाई, आपके बिनती करे के अनुमति दिहल गईल बा'। ऊ कहत बाड़न कि; त ऊ आपन माथा उठवले आ जब ऊ अपना रब के ओर देखले त ऊ एगो अउरी जुमरा खातिर अधीनता में सजदा कइलन आ अल्लाह फेर से कहले कि ‘मूड़ी उठा के कह दीं कि रउरा सुनल जाई, शफार करीं, रउरा के शफाद करे के इजाजत बा’. ऊ कहत बाड़न कि; ऊ सजदा करे गइलन, आ जिब्राईल उनकर दुनु हाथ पकड़ लिहलन, फेर एगो अइसन प्रार्थना खोललन जवन पहिले कबो कवनो इंसान खातिर ना खुलल रहे, त ऊ कहले; 'हे हमार रब्ब, तू हमरा के आदम के बेटा के मालिक बने खातिर बनवले बाड़ू अवुरी कवनो अहंकार नईखे, तू हमरा के सबसे पहिले कयामत के दिन ओकर कब्र खोलवा देले बाड़ू अवुरी कवनो अहंकार नईखे, जब तक कि तू हमरा झील में ओतना लोग के ना बनाईब जेतना कि शोन'आ अवुरी ऐला के बीच बा,' तब कहल गईल; 'शिद्दीकीन के बोलावऽ कि ऊ लोग बिनती करस', तब कहल गइल; 'नब के फोन करऽ।' हम' के ह। ऊ कहले कि; तब नबी अपना अनुयायी लोग के एगो समूह के साथे अइले, आ एगो नबी रहले जिनकर पांच-छह अनुयायी रहले, आ एगो नबी रहले जिनकर अनुयायी ना रहे, तब कहल गइल; 'शहीदन के बोलावल जाव कि ऊ लोग जेकरा मन करेला ओकरा खातिर बिनती करस'. आ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आगे रहले; त जब शहीद लोग अयीसन कईले त नबी कहले कि: अल्लाह कहले कि 'हम दयालु में सबसे दयालु हई, उ लोग हमरा स्वर्ग में घुस जास, जवन कि हमरा से कुछूओ ना करेले'। ऊ कहले कि; तब उ लोग स्वर्ग में घुस गईले। उ कहले कि तब अल्लाह कहले कि नरक में देख, का रउवा केहु अयीसन मिलता, जवन कि कबो कवनो नीमन काम कईले होखे? 'ऊ कहत बाड़े; त उ लोग के एगो आदमी मिल गईल, फिर अल्लाह ओकरा से पूछले कि, 'का तू कबो कवनो नीमन काम कईले बाड़ू? ' ऊ आदमी जवाब दिहलस; 'ना, सिवाय एह बात के कि पहिले हम खरीद-बिक्री के मामला में लोग के काम आसान बना देले बानी'। त अल्लाह कहले कि, 'हमरा सेवक के ओसही आसान बनाईं, जईसे उ हमरा बाकी सेवक खाती आसान बना देले बाड़े'। तब उ लोग एगो आदमी के नरक से बाहर निकालले अवुरी अल्लाह ओकरा से पूछले कि; 'का तू कबो कवनो नीमन काम कइले बाड़ू? ' ऊ जवाब दिहले; 'ना, जब तक हम अपना बेटा से ना कहब कि अगर हम मर गईनी त हमरा के आग से जरा दीं फिर हमरा के आटा निहन पीस दीं, फेर ओकरा के समुंदर में लेके हवा में बिखेर दीं, तब सब दुनिया के मालिक अल्लाह के कसम, इ हमरा के फेर कबहूँ वापस ना ले आ पाई'। तब अल्लाह कहले कि तू अयीसन काहें कईले? ' ऊ जवाब दिहले; 'तोहरा डर से'। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आगे कहले: तब अल्लाह कहले: 'देखऽ सबसे शानदार राज्य के राज्य, त सचमुच तोहरा खातिर ई एकरा जइसन बा, उहो दस गुना जेतना बा'। नबी आगे कहले: नौकर कहले; 'राजा रहला पर हमार अपमान काहे करत बाड़ू?' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'अतीत में इहे हमरा के हँसावत रहे'।
Imam Ahmad : 16
حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ قَالَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ يَعْنِي ابْنَ مُعَاوِيَةَ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ قَالَ حَدَّثَنَا قَيْسٌ قَالَ قَامَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَحَمِدَ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ وَأَثْنَى عَلَيْهِ فَقَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ هَذِهِ الْآيَةَ { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا عَلَيْكُمْ أَنْفُسَكُمْ لَا يَضُرُّكُمْ مَنْ ضَلَّ إِذَا اهْتَدَيْتُمْ } إِلَى آخِرِ الْآيَةِ وَإِنَّكُمْ تَضَعُونَهَا عَلَى غَيْرِ مَوْضِعِهَا وَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّاسَ إِذَا رَأَوْا الْمُنْكَرَ وَلَا يُغَيِّرُوهُ أَوْشَكَ اللَّهُ أَنْ يَعُمَّهُمْ بِعِقَابِهِ قَالَ وَسَمِعْتُ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ فَإِنَّ الْكَذِبَ مُجَانِبٌ لِلْإِيمَانِ
हमनी के [हसीम बिन अल कासिम] के बता के उ कहले कि; हमनी के [जुहैर अर्थात इब्न मुअवियाह] के बता के उ कहले; हमनी के बतवले बाड़े [इस्माइल बिन अबू खालिद] उ कहले बाड़े; हमनी के [कैस] के बता के उ कहले कि; ' [अबू बकर] खड़ा होके अल्लाह के स्तुति कईले अवुरी उनुका के शुद्ध कईले, फेर कहले; 'हे लोग, सचमुच रउआ इ आयत पढ़ रहल बानी: 'हे विश्वास करे वाला लोग, रउआ लोग अपना हर एक के जिम्मेदार बानी, एकरा से रउआ लोग के जरा भी नुकसान ना होई, जवन कि भटक जाई... -आयत के अंत तक-, आ रउआ लोग एकरा के जगह से बाहर रख देनी, हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बानी कि: 'वास्तव में, अगर लोग बुराई देखत बा, त ओकरा के मत बदली, त ओकरा से डर लागेला।' कि अल्लाह सभके सजा फैला दिहे।' ऊ कहत बाड़न कि; 'आ हम अबू बकर के कहत सुनले बानी; 'हे लोग, झूठ से दूर रहीं, काहे कि साँचहू झूठ रउरा के विश्वास से दूर कर देला'।
Imam Ahmad : 17
حَدَّثَنَا هَاشِمٌ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ أَخْبَرَنِي يَزِيدُ بْنُ خُمَيْرٍ قَالَ سَمِعْتُ سُلَيْمَ بْنَ عَامِرٍ رَجُلًا مِنْ حِمْيَرَ يُحَدِّثُ عَنْ أَوْسَطَ بْنِ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَوْسَطَ الْبَجَلِيِّ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي بَكْرٍ أَنَّهُ سَمِعَهُ حِينَ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَامَ الْأَوَّلِ مَقَامِي هَذَا ثُمَّ بَكَى ثُمَّ قَالَ عَلَيْكُمْ بِالصِّدْقِ فَإِنَّهُ مَعَ الْبِرِّ وَهُمَا فِي الْجَنَّةِ وَإِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ فَإِنَّهُ مَعَ الْفُجُورِ وَهُمَا فِي النَّارِ وَسَلُوا اللَّهَ الْمُعَافَاةَ فَإِنَّهُ لَمْ يُؤْتَ رَجُلٌ بَعْدَ الْيَقِينِ شَيْئًا خَيْرًا مِنْ الْمُعَافَاةِ ثُمَّ قَالَ لَا تَقَاطَعُوا وَلَا تَدَابَرُوا وَلَا تَبَاغَضُوا وَلَا تَحَاسَدُوا وَكُونُوا عِبَادَ اللَّهِ إِخْوَانًا
हमनी के [हसीम] के बता के उ कहले कि; हमनी के [शु'बाह] बता के उ कहले; हमरा के [यजीद बिन खुमैर] के जानकारी देले बा उ कहले; हम हिम्यार के एगो आदमी [सुलेम बिन अमीर] के सुनले रहनी, [औसत बिन इस्माइल बिन औसत अल बजली] से एगो कहानी सुनावत रहले, जवन [अबू बकर] से एगो कहानी सुनवले रहले, कि उ सुनले रहले जब अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के मौत हो गईल, उ कहले; अल्लाह के रसूलुल्लाह पहिला साल में हमरा जगह प खड़ा रहले अवुरी फेर रोवत कहले कि, 'ईमानदार रहीं, काहेंकी ईमानदारी भलाई के संगे चलेला अवुरी दुनो स्वर्ग में बाड़े, अवुरी झूठ से दूर रहीं, काहेंकी उ लोग पाप के संगे बाड़े अवुरी दुनो नरक में बाड़े, अवुरी अल्लाह से मुक्ति मांगेले, काहेंकी सचमुच केहु के कुछूओ ना दिहल जाला, काहेंकी ओकरा विश्वास कईला के बाद उ मुक्ति से निमन बा'। फेर उ आगे कहले 'एक दूसरा से संबंध मत काट, एक दूसरा से बची, एक दूसरा से नफरत मत करीं, अवुरी एक दूसरा से ईर्ष्या मत करीं, बालुक अल्लाह के सेवक बनी जवन कि भाई हवे'।
Imam Ahmad : 18
حَدَّثَنَا عَفَّانُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ دَاوُدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْأَوْدِيِّ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبُو بَكْرٍ فِي طَائِفَةٍ مِنْ الْمَدِينَةِ قَالَ فَجَاءَ فَكَشَفَ عَنْ وَجْهِهِ فَقَبَّلَهُ وَقَالَ فِدَاكَ أَبِي وَأُمِّي مَا أَطْيَبَكَ حَيًّا وَمَيِّتًا مَاتَ مُحَمَّدٌ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَبِّ الْكَعْبَةِ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ قَالَ فَانْطَلَقَ أَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ يَتَقَاوَدَانِ حَتَّى أَتَوْهُمْ فَتَكَلَّمَ أَبُو بَكْرٍ وَلَمْ يَتْرُكْ شَيْئًا أُنْزِلَ فِي الْأَنْصَارِ وَلَا ذَكَرَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ شَأْنِهِمْ إِلَّا وَذَكَرَهُ وَقَالَ وَلَقَدْ عَلِمْتُمْ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَوْ سَلَكَ النَّاسُ وَادِيًا وَسَلَكَتْ الْأَنْصَارُ وَادِيًا سَلَكْتُ وَادِيَ الْأَنْصَارِ وَلَقَدْ عَلِمْتَ يَا سَعْدُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَأَنْتَ قَاعِدٌ قُرَيْشٌ وُلَاةُ هَذَا الْأَمْرِ فَبَرُّ النَّاسِ تَبَعٌ لِبَرِّهِمْ وَفَاجِرُهُمْ تَبَعٌ لِفَاجِرِهِمْ قَالَ فَقَالَ لَهُ سَعْدٌ صَدَقْتَ نَحْنُ الْوُزَرَاءُ وَأَنْتُمْ الْأُمَرَاءُ
हमनी के ['अफ्फान] के बता के उ कहले; हमनी के [अबू अवानाह] के [दाउद बिन अब्दुल्लाह अल औदी] से [हुमैद बिन अब्दुररहमान] से बता के उ कहले कि; जब रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मौत हो गईल, त [अबू बकर] मदीना के बाहरी इलाका में रहले, उ -हुमैद बिन अब्दुररहमान- कहले; तब ऊ आके आपन चेहरा ढंक के कपड़ा खोल के चुम्मा लेके कहलस; 'हम अपना बाबूजी आ महतारी के राउर फिरौती के रूप में स्वीकार करे के तइयार बानी, राउर जीवन आ मौत केतना सुन्दर होई, मुहम्मद शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मौत हो गइल बा, आ काबा के मालिक रब्ब के द्वारा'। तब उ हदीस के जिक्र कईले। ऊ कहत बाड़न कि; 'तब अबू बकर आ उमर -अंसार के लगे - जे एक दूसरा से नेतृत्व के लेके बहस करत रहले, एहसे उ लोग ओ लोग से मिलले - अंसार -, तब अबू बकर बोलले अवुरी कुछूओ ना छोड़ले जवन अंसार प उतारल गईल रहे अवुरी कुछूओ ना छोड़ले जवन कि रसूलुल्लाह (स.अ.व.) ओ लोग के बारे में बतवले रहले, जब तक कि उ सभके जिक्र ना कईले रहले, अवुरी उ कहले कि; 'वास्तव में रउआ त पहिलही से जानत बानी कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले रहले कि, 'अगर इंसान एक घाटी से गुजरत अवुरी अंसार दोसरा घाटी से गुजरत त हम अंसार के घाटी से गुजरती।' आ रउरा त पहिलहीं से जानत बानी, हे स’द, कि अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) जब रउरा बइठल रहनी -कुछ ना करत- कहले रहले कि, 'एह मामला के प्रभारी कुरैश हवें, एहसे जनता के कर्तव्यनिष्ठ लोग ओह लोग के कर्तव्यनिष्ठ लोग -कुरैश- के पालन करेला आ ओह लोग के आज्ञाकारी लोग अपना आज्ञाकारी लोग के पीछे चलेला'। ऊ कहत बाड़न कि; तब [स'द] अबू बकर के जवाब दिहले; 'तू सही कहत बाड़ू, हमनी के मंत्री बानी जा जबकि तू नेता बाड़ू'।
Imam Ahmad : 19
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَيَّاشٍ قَالَ حَدَّثَنَا الْعَطَّافُ بْنُ خَالِدٍ قَالَ حَدَّثَنِي رَجُلٌ مِنْ أَهْلِ الْبَصْرَةِ عَنْ طَلْحَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ قَالَ سَمِعْتُ أَبِي يَذْكُرُ أَنَّ أَبَاهُ سَمِعَ أَبَا بَكْرٍ وَهُوَ يَقُولُ قُلْتُ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا رَسُولَ اللَّهِ الْعَمَلُ عَلَى مَا فُرِغَ مِنْهُ أَوْ عَلَى أَمْرٍ مُؤْتَنَفٍ قَالَ بَلْ عَلَى أَمْرٍ قَدْ فُرِغَ مِنْهُ قَالَ قُلْتُ فَفِيمَ الْعَمَلُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ كُلٌّ مُيَسَّرٌ لِمَا خُلِقَ لَهُ
हमनी के [अली बिन अय्यासी] के बता के उ कहले कि; हमनी के [अल अथथफ बिन खालिद] के बता के उ कहले कि; बशरोह के लोग से [एक आदमी] के बतवले बाड़े, [थल्हाह बिन अब्दुल्ला बिन अब्दुररहमान बिन अबू बकर ऐश शिद्दिक] से उ कहले बाड़े; हम [हमार पिता] के जिक्र सुनले बानी कि [उनकर पिता] [अबू बकर] के कहत सुनले रहले; हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछनी; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, का कर्म स्थापित चीजन पर आधारित बा कि नया चीजन पर?' उ जवाब देले: 'लेकिन जवन मामला तय भईल बा ओकरा आधार प'। ऊ कहले, हम पूछनी; 'त हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, इ कवना काम खातिर बा? उ कहले कि, 'हर आदमी के जवना मकसद से बनावल गईल बा, ओकरा मुताबिक नीमन काम कईल आसान बा'।
Imam Ahmad : 20
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي رَجُلٌ مِنْ الْأَنْصَارِ مِنْ أَهْلِ الْفِقْهِ أَنَّهُ سَمِعَ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يُحَدِّثُ أَنَّ رِجَالًا مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ تُوُفِّيَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَزِنُوا عَلَيْهِ حَتَّى كَادَ بَعْضُهُمْ يُوَسْوِسُ قَالَ عُثْمَانُ وَكُنْتُ مِنْهُمْ فَبَيْنَا أَنَا جَالِسٌ فِي ظِلِّ أُطُمٍ مِنْ الْآطَامِ مَرَّ عَلَيَّ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَسَلَّمَ عَلَيَّ فَلَمْ أَشْعُرْ أَنَّهُ مَرَّ وَلَا سَلَّمَ فَانْطَلَقَ عُمَرُ حَتَّى دَخَلَ عَلَى أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ لَهُ مَا يُعْجِبُكَ أَنِّي مَرَرْتُ عَلَى عُثْمَانَ فَسَلَّمْتُ عَلَيْهِ فَلَمْ يَرُدَّ عَلَيَّ السَّلَامَ وَأَقْبَلَ هُوَ وَأَبُو بَكْرٍ فِي وِلَايَةِ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حَتَّى سَلَّمَا عَلَيَّ جَمِيعًا ثُمَّ قَالَ أَبُو بَكْرٍ جَاءَنِي أَخُوكَ عُمَرُ فَذَكَرَ أَنَّهُ مَرَّ عَلَيْكَ فَسَلَّمَ فَلَمْ تَرُدَّ عَلَيْهِ السَّلَامَ فَمَا الَّذِي حَمَلَكَ عَلَى ذَلِكَ قَالَ قُلْتُ مَا فَعَلْتُ فَقَالَ عُمَرُ بَلَى وَاللَّهِ لَقَدْ فَعَلْتَ وَلَكِنَّهَا عُبِّيَّتُكُمْ يَا بَنِي أُمَيَّةَ قَالَ قُلْتُ وَاللَّهِ مَا شَعَرْتُ أَنَّكَ مَرَرْتَ وَلَا سَلَّمْتَ قَالَ أَبُو بَكْرٍ صَدَقَ عُثْمَانُ وَقَدْ شَغَلَكَ عَنْ ذَلِكَ أَمْرٌ فَقُلْتُ أَجَلْ قَالَ مَا هُوَ فَقَالَ عُثْمَانُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ تَوَفَّى اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ نَبِيَّهُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبْلَ أَنْ نَسْأَلَهُ عَنْ نَجَاةِ هَذَا الْأَمْرِ قَالَ أَبُو بَكْرٍ قَدْ سَأَلْتُهُ عَنْ ذَلِكَ قَالَ فَقُمْتُ إِلَيْهِ فَقُلْتُ لَهُ بِأَبِي أَنْتَ وَأُمِّي أَنْتَ أَحَقُّ بِهَا قَالَ أَبُو بَكْرٍ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا نَجَاةُ هَذَا الْأَمْرِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ قَبِلَ مِنِّي الْكَلِمَةَ الَّتِي عَرَضْتُ عَلَى عَمِّي فَرَدَّهَا عَلَيَّ فَهِيَ لَهُ نَجَاةٌ
हमनी के [अबुल यमन] के बता के उ कहले कि; [अज ज़ुहरी] से हमनी के [स्यूअइब] के रिपोर्ट कईले बाड़े उ कहले कि; हमरा के [अंसार के न्यायशास्त्र के विशेषज्ञ आदमी] के जानकारी देले बा, कि उ [उस्मान बिन अफान] के एगो कहानी सुनावत सुनले बा; कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कई गो साथी रहले जवन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मौत पर दुखी रहले, जवना से लगभग आधा लोग बेचैन हो गईले, उस्मान कहले; 'आ हम ओहमें से एगो रहनी, जब हम एगो देवाल के छाया में बईठल रहनी त उमर हमरा सामने से गुजर के हमरा के नमस्कार कईले, लेकिन हमरा ना लागल कि उ ओहिजा से गुजरत बाड़े अवुरी नमस्कार कईले, एहसे उ तब तक निधन हो गईले जब तक कि उ अबू बकर से ना मिल गईले, फेर उ उनुका से कहले; 'कुछ अयीसन बा जवन कि आपके हैरान क दिही, असल में हम उस्मान के सोझा से गुजर के उनुका के अभिवादन कईनी, लेकिन उ हमार अभिवादन के जवाब ना देले।' त अबू बकर के शासन काल में उमर आ अबू बकर अइले आ दुनु जाना हमरा के अभिवादन कइले, तब अबू बकर कहले; 'तोहार भाई उमर हमरा लगे आके कहलस कि उ तोहरा सोझा से गुजर के नमस्कार कईले, लेकिन तू उनुका के जवाब ना देनी, त आपके अयीसन काहें भईल?' ऊ कहलस, “हम जवाब देले बानी; 'हम त ना कइनी'। त उमर कहले कि; 'हँ, अल्लाह के कसम, तू त कइले बाड़ू, बाकिर ई तोहरा अहंकार के चलते भइल बा, हे बानी उमय्या।' ऊ कहले, हम जवाब देले बानी; अबू बकर कहले कि, 'अल्लाह के कसम, हमरा कबो ना लागल कि तू ओहिजा से गुजर के हमरा के नमस्कार कईले बाड़ू; 'उस्मान सही कहत बाड़े, साँचहू रउरा उनुका से कवनो धंधा में व्यस्त रहल बानी, त हम कहनी; 'हँ' उमर पूछले; 'ई कवन धंधा ह?' तब उस्मान कहले कि; अबू बकर कहले कि, हमनी के उनुका से ए मामला के सुरक्षा के बारे में पूछे से पहिले अल्लाह अपना नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के निधन क देले। 'हम ओकरा से अफेयर के बारे में पूछले बानी,' उ कहले; त हम उनका सोझा खड़ा होके कहनी कि ‘हमार बाप-माई के द्वारा तोहरा ओकरा पर अधिका अधिकार बा’ [अबू बकर] कहले; हम पूछनी कि; हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, ई कइसे सुरक्षित बा? तब रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'जेकरा हमरा से कवनो वाक्य मिल जाई जवन हम एक बेर अपना चाचा के देले रहनी अवुरी ओकरा बाद हमरा के वापस क दिही, त उ वाक्य ओकरा खाती मुक्ति होई'।