इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
Free Download / Download

Imam Ahmad (الامام احمد) - 26363 Hadith

Hadith

Imam Ahmad : 161

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ عُمَرَ حَمَلَ عَلَى فَرَسٍ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَرَآهَا أَوْ بَعْضَ نِتَاجِهَا يُبَاعُ فَأَرَادَ شِرَاءَهُ فَسَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْهُ فَقَالَ اتْرُكْهَا تُوَافِكَ أَوْ تَلْقَهَا جَمِيعًا وَقَالَ مَرَّتَيْنِ فَنَهَاهُ وَقَالَ لَا تَشْتَرِهِ وَلَا تَعُدْ فِي صَدَقَتِكَ

हमरा सब के [सुफयान] के [जैद बिन असलम] स [अपन पिता] स कहल गेल अछि जे उमर अल्लाह के रास्ता में घोड़ा के प्रयोग केने छलाह, फेर ओकरा देखलनि या किछु परिणाम, ताहि लेल ओ एकरा खरीदय चाहैत छलाह, तखन ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स एहि बारे में पूछलखिन, मुदा नबी जवाब देलखिन: 'घोड़ा छोड़ू, ई अहाँ के लेल काफी भ जायत या अहाँ सब किछु छोड़ि देब' उमर दू बेर आ पूछलखिन नबी हुनका मना क देलखिन आ ओ कहलनि: 'एकरा नहि कीनू आ एकरा अपन भिक्षा वापस नहि करू'।

Hadith

Imam Ahmad : 162

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَامِرِ بْنِ رَبِيعَةَ يُحَدِّثُ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَبْلُغُ بِهِ النَّبِيَّ وَقَالَ سُفْيَانُ مَرَّةً عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تَابِعُوا بَيْنَ الْحَجِّ وَالْعُمْرَةِ فَإِنَّ مُتَابَعَةً بَيْنَهُمَا يَنْفِيَانِ الْفَقْرَ وَالذُّنُوبَ كَمَا يَنْفِي الْكِيرُ خَبَثَ الْحَدِيدِ

हमरा सब के [सुफियान] के [अशिम बिन उबैदिल्लाह] स [अब्दुल्लाह बिन अमीर बिन रबियाह] स कहने छथि जे ओ [उमर] स कहानी सुनौने छलाह जाहि पर नबी के भरोसा छल, आ सूफियान एकटा आओर मौका पर कहलनि; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलखिन जे हज आ उमरा के संग चलू, कियाक त दुनू के पालन करब गरीबी आ पाप के समाप्त क देत, जेना लोहा के लोहार लोहा स गंदगी निकालैत अछि।

Hadith

Imam Ahmad : 163

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ يَحْيَى عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ وَقَّاصٍ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّمَا الْأَعْمَالُ بِالنِّيَّةِ وَلِكُلِّ امْرِئٍ مَا نَوَى فَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ إِلَى اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فَهِجْرَتُهُ إِلَى مَا هَاجَرَ إِلَيْهِ وَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ لِدُنْيَا يُصِيبُهَا أَوْ امْرَأَةٍ يَنْكِحُهَا فَهِجْرَتُهُ إِلَى مَا هَاجَرَ إِلَيْهِ

हमरा सब के [सुफयान] के [याह्या] स [मुहम्मद बिन इब्राहिम अत तैमी] स [‘अलकामाह बिन वक्काश] स कहला के बाद ओ कहलनि; हम [उमर] केँ कहैत सुनलहुँ; हम सुनलहुँ जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत छथि : 'कर्म केवल नियत पर निर्भर करैत अछि, आ सभ केँ ओ भेटत जे ओकर इरादा छलैक, जे कियो अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह केँ अपन हिजरा करत, तखन ओकर हिजरा अल्लाह आ हुनक रसूलुल्लाह दिस होयत, आ जे अपन हिजरा करत जे दुनियादारी प्राप्त करबाक लेल वा कोनो महिलाक लेल विवाह करत, तखन ओकर हिजरा ओ भेटतैक जे ओकर इरादा छलैक'।

Hadith

Imam Ahmad : 164

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدَةَ بْنِ أَبِي لُبَابَةَ عَنْ أَبِي وَائِلٍ قَالَ قَالَ الصُّبَيُّ بْنُ مَعْبَدٍ كُنْتُ رَجُلًا نَصْرَانِيًّا فَأَسْلَمْتُ فَأَهْلَلْتُ بِالْحَجِّ وَالْعُمْرَةِ فَسَمِعَنِي زَيْدُ بْنُ صُوحَانَ وَسَلْمَانُ بْنُ رَبِيعَةَ وَأَنَا أُهِلُّ بِهِمَا فَقَالَا لَهَذَا أَضَلُّ مِنْ بَعِيرِ أَهْلِهِ فَكَأَنَّمَا حُمِلَ عَلَيَّ بِكَلِمَتِهِمَا جَبَلٌ فَقَدِمْتُ عَلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَأَخْبَرْتُهُ فَأَقْبَلَ عَلَيْهِمَا فَلَامَهُمَا وَأَقْبَلَ عَلَيَّ فَقَالَ هُدِيتَ لِسُنَّةِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هُدِيتَ لِسُنَّةِ نَبِيِّكَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ عَبْدَةُ قَالَ أَبُو وَائِلٍ كَثِيرًا مَا ذَهَبْتُ أَنَا وَمَسْرُوقٌ إِلَى الصُّبَيِّ نَسْأَلُهُ عَنْهُ

[अब्दाह बिन अबू लुबाबाह] स [अबू वा`इल] स हमरा सब कए [सुफयान] कए कहला के बाद ओ कहलथि; [शुबै बिन मा'बाद] कहलनि; हम पहिने ईसाई छलहुं तखन इस्लाम स्वीकार केलहुं, फेर हज आ उमरा करबाक इरादा छल, फेर जैद बिन शुहान आ सलमान बिन रबियाह हमरा सुनलनि जखन हम हज आ उमरा करबाक इरादा रखने रही, दुनू गोटे कहलनि; 'ई व्यक्ति अपन परिवारक ऊँटसँ बेसी विकृत अछि' । त जेना हम दुनू गोटेक कहलाक कारणे पहाड़ ल' क' जा रहल छी, तखन हम उमर लग आबि हुनका एहि बातक बात कहलियनि, तखन [उमर] दुनू गोटे लग आबि डाँटि देलनि, फेर हमरा लग आबि कहलनि; 'अहाँ के नबी के सुन्नत के संबंध में मार्गदर्शन भेटल अछि, अहाँ के अपन नबी के सुन्नत के संबंध में मार्गदर्शन भेटल अछि'। अब्दाह कहलक, अबू वा`इल कहलक; 'हम आ मस्रुक प्रायः शुबै लग ओहि विषय मे पूछैत अबैत छी' ।

Hadith

Imam Ahmad : 165

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرٍو عَنْ طَاوُسٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ذُكِرَ لِعُمَرَ أَنَّ سَمُرَةَ وَقَالَ مَرَّةً بَلَغَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ سَمُرَةَ بَاعَ خَمْرًا قَالَ قَاتَلَ اللَّهُ سَمُرَةَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَعَنَ اللَّهُ الْيَهُودَ حُرِّمَتْ عَلَيْهِمْ الشُّحُومُ فَجَمَلُوهَا فَبَاعُوهَا

हमरा सब के [सुफयान] के [अमरू] स [थवस] स [इब्न अब्बास] स [उमर] के जिक्र कयल गेल अछि जे समुराह -एकटा दोसर अवसर पर कहलनि; - उमर लग पहुँचि गेल छल जे समुराह खमेर बेचि रहल अछि, तेँ उमर कहलक; 'अल्लाह समुराह के नष्ट करथि, सचमुच अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छैथ: 'अल्लाह यहूदी सब के गारी देलखिन, कियाक त अल्लाह हुनका सब के चर्बी के मना क देने छैथ, तखन ओ सब ओकरा तेल में बदलि क बेच देलखिन'।

Hadith

Imam Ahmad : 166

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرٍو وَمَعْمَرٍ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَوْسِ بْنِ الْحَدَثَانِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كَانَتْ أَمْوَالُ بَنِي النَّضِيرِ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَى رَسُولِهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِمَّا لَمْ يُوجِفْ الْمُسْلِمُونَ عَلَيْهِ بِخَيْلٍ وَلَا رِكَابٍ فَكَانَتْ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَالِصَةً وَكَانَ يُنْفِقُ عَلَى أَهْلِهِ مِنْهَا نَفَقَةَ سَنَةٍ وَقَالَ مَرَّةً قُوتَ سَنَةٍ وَمَا بَقِيَ جَعَلَهُ فِي الْكُرَاعِ وَالسِّلَاحِ عُدَّةً فِي سَبِيلِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ

['अमरू] स [सुफयान] आ [मलिक बिन औस बिन अल हदातसन] स [उमर बिन अल खथथब] स [मा'मर] स [अज ज़ुहरी] स कहला के बाद ओ कहलनि; 'बनी नदलीर केरऽ जे संपत्ति अल्लाह न॑ रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लेली फै केरऽ संपत्ति बनैलकै, आरू जेकरा मुसलमान न॑ घोड़ा आरू ऊंट स॑ जीत नै लेलकै, वू तखन॑ रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम केरऽ शुद्ध संपत्ति बनी गेलै जेकरा वू एक साल लेली अपनऽ परिवार केरऽ इंतजाम करलकै,’ दोसरऽ मौका प॑ कहलकै; 'एक साल के मूलभूत जरूरत आ बाकी के लेल ओ अल्लाह के रास्ता में जिहाद के तैयारी में घोड़ा आ हथियार -कीनैत-'.

Hadith

Imam Ahmad : 167

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرٍو عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَوْسٍ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ لِعَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ وَطَلْحَةَ وَالزُّبَيْرِ وَسَعْدٍ نَشَدْتُكُمْ بِاللَّهِ الَّذِي تَقُومُ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ بِهِ أَعَلِمْتُمْ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّا لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ قَالُوا اللَّهُمَّ نَعَمْ

हमरा सभ केँ [सुफयान] केँ ['अमरू] सँ [अज ज़ुहरी] सँ [मलिक बिन औस] सँ कहला के बाद ओ कहलनि; हम सुनलहुँ जे [उमर] केँ [अब्दुररहमान बिन औफ], [थल्हाह], [जुबैर] आ [सआद] केँ कहैत छल; 'हम अहाँ के कसम खाइत छी जे आकाश आ धरती के स्थापित करय वाला अल्लाह के नाम पर, की अहाँ के पता अछि जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छथि: 'वास्तव में हमरा सब के विरासत में नहिं भेटैत अछि आ जे धन छोड़ैत छी ओ दान बनि जाइत अछि'। ओ सभ उत्तर देलथिन; 'अल्लाह के कसम, ई सच अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 168

حَدَّثَنَا سَفْيَانُ عَنْ ابْنِ أَبِي يَزِيدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْوَلَدُ لِلْفِرَاشِ

हमरा सब [सुफयान] के [इब्न अबू यजीद] स [उमर बिन अल खथथब] स [उमर बिन अल खथथब] स कहल गेल अछि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'बच्चा ओहि व्यक्ति के होइत अछि जकर बिस्तर -पति-'।

Hadith

Imam Ahmad : 169

حَدَّثَنَا ابْنُ إِدْرِيسَ أَنْبَأَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ عَنِ ابْنِ أَبِي عَمَّارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بَابَيْهِ عَنْ يَعْلَى بْنِ أُمَيَّةَ قَالَ سَأَلْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قُلْتُ { لَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ أَنْ تَقْصُرُوا مِنْ الصَّلَاةِ إِنْ خِفْتُمْ أَنْ يَفْتِنَكُمْ الَّذِينَ كَفَرُوا } وَقَدْ أَمَّنَ اللَّهُ النَّاسَ فَقَالَ لِي عُمَرُ عَجِبْتُ مِمَّا عَجِبْتَ مِنْهُ فَسَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ صَدَقَةٌ تَصَدَّقَ اللَّهُ بِهَا عَلَيْكُمْ فَاقْبَلُوا صَدَقَتَهُ

हमरा सब के कहलक अछि [इब्न इदरीश] हमरा सब के [इब्न जुरैज] [इब्न अबी अम्मार] स [अब्दुल्लाह बिन बबैह] स [या'ला बिन उमैया] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम उमर बिन अल खथथाब स पूछलियैन, हम अल्लाह के वचन पढ़लौं: 'आ जखन अहाँ धरती पर यात्रा करैत छी तखन अहाँ के अपन नमाज पढ़य के कोनो कारण नै अछि, अगर अहाँ के काफिर के हमला स डर होइत अछि। सचमुच, काफिर अहाँक लेल असली दुश्मन अछि'। -QS एक निसा'यत 101-। की अल्लाह मनुक्ख के सुरक्षित नै बनौने छैथ?' [उमर] हमरा कहलनि; 'हमरा तहिना आश्चर्य भेल जेना अहाँ छी, तेँ हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ एहि विषय मे पूछलहुँ, तखन ओ कहलनि: 'से अहाँ सभक लेल अल्लाह केर दक्षिणा अछि तेँ हुनकर दक्षिणा स्वीकार करू'।

Hadith

Imam Ahmad : 170

حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَهُوَ بِعَرَفَةَ قَالَ أَبُو مُعَاوِيَةَ وَحَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ خَيْثَمَةَ عَنْ قَيْسِ بْنِ مَرْوَانَ أَنَّهُ أَتَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ جِئْتُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ مِنْ الْكُوفَةِ وَتَرَكْتُ بِهَا رَجُلًا يُمْلِي الْمَصَاحِفَ عَنْ ظَهْرِ قَلْبِهِ فَغَضِبَ وَانْتَفَخَ حَتَّى كَادَ يَمْلَأُ مَا بَيْنَ شُعْبَتَيْ الرَّحْلِ فَقَالَ وَمَنْ هُوَ وَيْحَكَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْعُودٍ فَمَا زَالَ يُطْفَأُ وَيُسَرَّى عَنْهُ الْغَضَبُ حَتَّى عَادَ إِلَى حَالِهِ الَّتِي كَانَ عَلَيْهَا ثُمَّ قَالَ وَيْحَكَ وَاللَّهِ مَا أَعْلَمُهُ بَقِيَ مِنْ النَّاسِ أَحَدٌ هُوَ أَحَقُّ بِذَلِكَ مِنْهُ وَسَأُحَدِّثُكَ عَنْ ذَلِكَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَزَالُ يَسْمُرُ عِنْدَ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ اللَّيْلَةَ كَذَاكَ فِي الْأَمْرِ مِنْ أَمْرِ الْمُسْلِمِينَ وَإِنَّهُ سَمَرَ عِنْدَهُ ذَاتَ لَيْلَةٍ وَأَنَا مَعَهُ فَخَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَخَرَجْنَا مَعَهُ فَإِذَا رَجُلٌ قَائِمٌ يُصَلِّي فِي الْمَسْجِدِ فَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْتَمِعُ قِرَاءَتَهُ فَلَمَّا كِدْنَا أَنْ نَعْرِفَهُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَقْرَأَ الْقُرْآنَ رَطْبًا كَمَا أُنْزِلَ فَلْيَقْرَأْهُ عَلَى قِرَاءَةِ ابْنِ أُمِّ عَبْدٍ قَالَ ثُمَّ جَلَسَ الرَّجُلُ يَدْعُو فَجَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَهُ سَلْ تُعْطَهْ سَلْ تُعْطَهْ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قُلْتُ وَاللَّهِ لَأَغْدُوَنَّ إِلَيْهِ فَلَأُبَشِّرَنَّهُ قَالَ فَغَدَوْتُ إِلَيْهِ لِأُبَشِّرَهُ فَوَجَدْتُ أَبَا بَكْرٍ قَدْ سَبَقَنِي إِلَيْهِ فَبَشَّرَهُ وَلَا وَاللَّهِ مَا سَبَقْتُهُ إِلَى خَيْرٍ قَطُّ إِلَّا وَسَبَقَنِي إِلَيْهِ

हमरा सब के [अबू मुअवियाह] हमरा सब के [अल अमासी] के [इब्राहिम] स [अलकामा] स कहलक अछि ओ कहलनि; ‘एक आदमी [उमर] क॑ देखै लेली ऐलै जब॑ वू अराफात म॑ छेलै,’ [अबू मुअवियाह] न॑ कहलकै; आ हमरा सभ केँ [अल अ'मासी] केँ [खैसमाह] सँ [कैस बिन मरवान] सँ कहने छथि जे ओ [उमर] केँ देखय आयल छलाह तखन कहलनि; 'हे अमीरुल मुकमिनिन, हम कुफा सं आयल छलहुं आ ओतय एकटा आदमी के छोड़ि देलहुं जे मुशफ के डिक्टेट करैत छल -रोट-,' तखन उमर एहन तेज आवाज में तमसा गेलाह जेना ओकर चारू कात चोटी पर चढ़ि गेल हो, तखन ओ पुछलखिन्ह; 'धिक्कार अछि, ओ के छथि ?' ओ -कैस- उत्तर देलनि; 'अब्दुल्लाह बिन मसूद'। तखन ओकर तामस अचानक कम भ गेलै आ ओकरा खुशी भेलै जे बात सामान्य भ गेलै, तखन ओ कहलकै; 'हाय तोरा, अल्लाह के कसम हम ककरो नै जनैत छी - साथी सब में - जे एखनो जीवित अछि जिनका ओहि मामला में हुनका स बेसी अधिकार अछि, हम अहाँ के ओहि बारे में कहब, जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम सदिखन पहरा पर ठाढ़ रहैत छलाह - नहि सुतैत छलाह - राति में अबू बकर के कात में मुसलमान के काज पर चर्चा करैत छलाह, आ एक बेर एक राति ओ हुनकर कात में पहरा पर ठाढ़ भ गेलाह आ हम संग छलहुं।' हुनका, तखन अल्लाह के रसूलुल्लाह बाहर आबि गेलाह आ हम सब हुनका संग बाहर आबि गेलहुं, अचानक मस्जिद में एकटा आदमी ठाढ़ भ गेल छल जे नमाज पढ़ैत छल, तखन रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उठि क पढ़ाई सुनलनि, आ जखन हमरा सब के लगभग पता चलल त रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन: 'जेकरा कुरान के मंद मंद पढ़ब पसंद अछि जेना कि खुलासा भेल छल, तखन ओकरा ओहिना पढ़बाक चाही इब्न उम्मी 'अब्द' द्वारा पढ़ल गेल। उमर आगू बजलाह; 'तखन ओ आदमी बैसि क' नमाज पढ़लक, तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओकरा कहलक; 'माँग जरूर देल जायत, माँग जरूर देल जायत'। उमर बजलाह; हम कहलियनि; 'अल्लाहक कसम, हम हुनका लग भोरे-भोर अवश्य आबि हुनका नीक खबरि देबनि,' ओ कहलनि; तखन हम हुनका लग भोरे-भोर हुनका लग खुशखबरी देबाक लेल गेलहुं, मुदा हमरा पता चलल जे अबू बकर हमरा सं पहिने हुनका लग गेल छलाह आ हुनका नीक खबरि देने छलाह, अल्लाह के कसम हम हुनका सं नीक के लेल एकदम सं मुकाबला नहिं करब जाबत ओ निश्चित रूप सं हमरा सं आगू नहिं रहताह'.

Hadith

Imam Ahmad : 171

حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ قَالَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَابِسِ بْنِ رَبِيعَةَ قَالَ رَأَيْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يُقَبِّلُ الْحَجَرَ وَيَقُولُ إِنِّي لَأُقَبِّلُكَ وَأَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ وَلَوْلَا أَنِّي رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُقَبِّلُكَ لَمْ أُقَبِّلْكَ

हमरा सभ [अबू मुअवियाह] केँ कहि क’ ओ कहलनि; हमरा सब के [अल अ'मासी] के [इब्राहिम] स ['अबीस बिन रबियाह] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम देखलहुँ जे [उमर] कारी पाथर केँ चुम्मा ल' क' कहैत छल; 'सत्ते, हम तोरा चुम्मा लेलहुँ, आ हमरा बुझल अछि जे अहाँ मात्र पाथर छी, जँ हम अल्लाहक रसूलुल्लाह केँ अहाँ केँ चुम्मा लैत नहि देखितहुँ त' हम अहाँ केँ चुम्मा नहि लेने रहितहुँ'।

Hadith

Imam Ahmad : 172

حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ قَالَ خَطَبَ عُمَرُ النَّاسَ بِالْجَابِيَةِ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَامَ فِي مِثْلِ مَقَامِي هَذَا فَقَالَ أَحْسِنُوا إِلَى أَصْحَابِي ثُمَّ الَّذِينَ يَلُونَهُمْ ثُمَّ الَّذِينَ يَلُونَهُمْ ثُمَّ يَجِيءُ قَوْمٌ يَحْلِفُ أَحَدُهُمْ عَلَى الْيَمِينِ قَبْلَ أَنْ يُسْتَحْلَفَ عَلَيْهَا وَيَشْهَدُ عَلَى الشَّهَادَةِ قَبْلَ أَنْ يُسْتَشْهَدَ فَمَنْ أَحَبَّ مِنْكُمْ أَنْ يَنَالَ بُحْبُوحَةَ الْجَنَّةِ فَلْيَلْزَمْ الْجَمَاعَةَ فَإِنَّ الشَّيْطَانَ مَعَ الْوَاحِدِ وَهُوَ مِنْ الِاثْنَيْنِ أَبْعَدُ وَلَا يَخْلُوَنَّ رَجُلٌ بِامْرَأَةٍ فَإِنَّ ثَالِثَهُمَا الشَّيْطَانُ وَمَنْ كَانَ مِنْكُمْ تَسُرُّهُ حَسَنَتُهُ وَتَسُوءُهُ سَيِّئَتُهُ فَهُوَ مُؤْمِنٌ

[जाबिर बिन समुरा] स [अब्दुल मलिक बिन उमैर] स हमरा सब कए [जरीर] कहला के बाद ओ कहलनि; [उमर प्रवचन] जबियाह -दमिश्क के एकटा गाम- में लोक के सामने प्रवचन देलखिन आ कहलखिन; 'सत्ते, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एकटा एहन जगह पर ठाढ़ भ' गेलाह जेना हम छी आ तखन ओ कहलनि: 'हमर साथी सभक भलाई सँ स्तुति करू, तखन जे हुनका सभक पाछाँ आओत, तखन जे हुनका सभक पाछाँ आओत, तखन एकटा लोक आओत, जाहि मे सँ एक गोटे शपथ लेत ताहि सँ पहिने जे शपथ लेत आ गवाही पर गवाही देबाक लेल कहल जाय ताहि सँ पहिने।' अहाँ सब मे जे कियो स्वर्गक गंध प्राप्त करय चाहैत छथि हुनका जमात पर अडिग रहबाक चाही, कारण शैतान ओहि लोकक संग अछि जे दू गोटेक संग असगर रहैत छथि, ओ दूर रहत, आ अहाँ मे सँ एक गोटे केँ कोनो महिलाक संग असगर नहि रहय दियौक - जे मुहरामी नहि छथि - कारण वास्तव मे तेसर व्यक्ति शैतान थिक, जकर नीक काज ओकरा खुश करैत छैक आ ओकर गलती ओकरा दुखी बना दैत छैक, तखन ओ मुसलमान अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 173

حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْمُرُ عِنْدَ أَبِي بَكْرٍ اللَّيْلَةَ كَذَلِكَ فِي الْأَمْرِ مِنْ أَمْرِ الْمُسْلِمِينَ وَأَنَا مَعَهُ

हमरा सब के [अबू मुअवियाह] हमरा सब के [अल अमासी] के [इब्राहिम] स [अलकामाह] स [उमर] स कहलक अछि, ओ कहलनि; 'अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ रात भर अबू बकर स॑ मुसलमानऽ के मामला के बारे म॑ सलाह-मशवरा करलकै, आरू हम्में हुनका साथ छेलियै' ।

Hadith

Imam Ahmad : 174

حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ عَنْ مَعْدَانَ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ قَالَ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مَا سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ شَيْءٍ أَكْثَرَ مِمَّا سَأَلْتُهُ عَنْ الْكَلَالَةِ حَتَّى طَعَنَ بِإِصْبَعِهِ فِي صَدْرِي وَقَالَ تَكْفِيكَ آيَةُ الصَّيْفِ الَّتِي فِي آخِرِ سُورَةِ النِّسَاءِ

हमरा सब के [इसमाइल] के [सैद बिन अबू अरूबाह] स [कतादह] स [सलीम बिन अबुल जाद] स [मदन बिन अबू थल्हाह] स कहलक अछि ओ कहलनि; [उमर] कहलनि; 'हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ कहियो कोनो बात पर बेसी नहि पूछने छी, जखन कि हम कलालाह के बारे मे पूछने रही, ताहि लेल ओ हमर छाती पर अपन आँगुर ठोकि देलनि, जखन ओ कहलनि: 'सूरह अन नीसा के अंत मे ऐश शैफ आयत मे अहाँ लेल ई काफी अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 175

حَدَّثَنَا يَحْيَى حَدَّثَنَا شُعْبَةُ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمَيِّتُ يُعَذَّبُ فِي قَبْرِهِ بِالنِّيَاحَةِ عَلَيْهِ

हमरा सब के बता देलक [याह्या] हमरा सब के कहलक अछि [स्यूबाह] हमरा सब के [कतादह] के [सैद बिन अल मुसैयब] स [इब्न उमर] स [उमर] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलक अछि, ओ कहलनि; 'एकटा मृत व्यक्ति के ओकर कब्र में यातना देल जायत जे ओकरा पर नियहाह -विलाप- के परिणामस्वरूप'।

Hadith

Imam Ahmad : 176

حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ مَوْلَى أَسْمَاءَ قَالَ أَرْسَلَتْنِي أَسْمَاءُ إِلَى ابْنِ عُمَرَ أَنَّهُ بَلَغَهَا أَنَّكَ تُحَرِّمُ أَشْيَاءَ ثَلَاثَةً الْعَلَمَ فِي الثَّوْبِ وَمِيثَرَةَ الْأُرْجُوَانِ وَصَوْمَ رَجَبٍ كُلِّهِ فَقَالَ أَمَّا مَا ذَكَرْتَ مِنْ صَوْمِ رَجَبٍ فَكَيْفَ بِمَنْ يَصُومُ الْأَبَدَ وَأَمَّا مَا ذَكَرْتَ مِنْ الْعَلَمِ فِي الثَّوْبِ فَإِنِّي سَمِعْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ لَبِسَ الْحَرِيرَ فِي الدُّنْيَا لَمْ يَلْبَسْهُ فِي الْآخِرَةِ

[अब्दुल मलिक] स [याह्या] कहि देने अछि [अब्दुल्ला गुलाम असमा'] स कहलक अछि; 'आस्मा' हमरा [इब्न उमर] लग पठौलनि -संप्रेषित करबाक लेल- जे ई बात हुनका लग पहुँचि गेल अछि, 'जे अहाँ तीन बात मना क' देने छी; कपड़ा पर छवि, लाल रेशम स बनल काठी आ रजब मास भरि उपवास'। त इब्न उमर कहलनि; 'रजब के रोजा के बारे में की कहलौं, तखन हरदम रोजा रखनिहार लोक के की कहब, आ कपड़ा पर छवि के बारे में की कहलहुं, तखन हम [उमर] के कहैत सुनलहुं; हम सुनलहुँ जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत छथि जे ‘जे कियो एहि दुनिया मे रेशम पहिरत, ओ परलोक मे नहि पहिरत’।

Hadith

Imam Ahmad : 177

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ وَأَنَا سَأَلْتُهُ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا ثَابِتٌ عَنْ أَنَسٍ قَالَ كُنَّا مَعَ عُمَرَ بَيْنَ مَكَّةَ وَالْمَدِينَةِ فَتَرَاءَيْنَا الْهِلَالَ وَكُنْتُ حَدِيدَ الْبَصَرِ فَرَأَيْتُهُ فَجَعَلْتُ أَقُولُ لِعُمَرَ أَمَا تَرَاهُ قَالَ سَأَرَاهُ وَأَنَا مُسْتَلْقٍ عَلَى فِرَاشِي ثُمَّ أَخَذَ يُحَدِّثُنَا عَنْ أَهْلِ بَدْرٍ قَالَ إِنْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيُرِينَا مَصَارِعَهُمْ بِالْأَمْسِ يَقُولُ هَذَا مَصْرَعُ فُلَانٍ غَدًا إِنْ شَاءَ اللَّهُ تَعَالَى وَهَذَا مَصْرَعُ فُلَانٍ غَدًا إِنْ شَاءَ اللَّهُ تَعَالَى قَالَ فَجَعَلُوا يُصْرَعُونَ عَلَيْهَا قَالَ قُلْتُ وَالَّذِي بَعَثَكَ بِالْحَقِّ مَا أَخْطَئُوا تِيكَ كَانُوا يُصْرَعُونَ عَلَيْهَا ثُمَّ أَمَرَ بِهِمْ فَطُرِحُوا فِي بِئْرٍ فَانْطَلَقَ إِلَيْهِمْ فَقَالَ يَا فُلَانُ يَا فُلَانُ هَلْ وَجَدْتُمْ مَا وَعَدَكُمْ اللَّهُ حَقًّا فَإِنِّي وَجَدْتُ مَا وَعَدَنِي اللَّهُ حَقًّا قَالَ عُمَرُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَتُكَلِّمُ قَوْمًا قَدْ جَيَّفُوا قَالَ مَا أَنْتُمْ بِأَسْمَعَ لِمَا أَقُولُ مِنْهُمْ وَلَكِنْ لَا يَسْتَطِيعُونَ أَنْ يُجِيبُوا

हमरा सभकेँ [याह्या बिन सईद] कहि देने छथि आ हम हुनकासँ पुछने छी, हमरा सभकेँ [सुलेमान बिन अल मुगिराह] हमरा सभकेँ [त्सबित] [अनास]सँ कहने छथि ओ कहलनि; हम आ [उमर] मक्का आ मदीना के बीच में छलहुं तखन हम दुनू गोटे अमावस्या देखलहुं - अर्धचंद्र -, आ हमर दृष्टि तेज छल जाहि सं हम अमावस्या देख सकितहुं, तें हम उमर सं कहलियनि; 'अहाँ देख' नहि चाहैत छी?' ओ उत्तर देलथिन; ‘हम अपन पलंग पर पड़ला पर ओकरा देखब,’ तखन ओ बदरक एक्सपर्टक विषय मे कहय लगलाह, ओ कहलनि; 'ई रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम छलाह जे हमरा सभ केँ ओ स्थान देखौलनि जतय ओ सभ - काफिर सभ - जे काल्हि - युद्ध सँ पहिने मारल गेल छल -, तखन ओ कहलनि: 'ई काल्हि फल्लाँक लेल जगह अछि, भगवान् चाहथि, आ ई काल्हि फल्लाँक लेल जगह अछि, भगवान् चाहथि,' उमर कहलनि; 'तखन ओहि ठाम मारल गेल, हम पुछलियनि; ‘ओहि द्वारा जे अहाँ केँ सही धर्मक संग पठौलनि, ओहि मामला मे ओ सभ गलत नहि छलाह, ओतहि मारल गेलाह,’ तखन हुनका हुनका लोकनिक लाश केँ इनार मे फेकबाक आदेश देल गेलनि, तखन ओ हुनका सभक दिस बढ़लाह - काफिर सभक लाश- आ पुछलनि: 'हे फलां-फल्लाँ की अहाँ सभ केँ ओ नहि भेटल जे अल्लाह वादा केने छलाह जे निश्चित रूप सँ सत्य अछि? त हमरा जे अल्लाह हमरा स वादा केने छथि से सच भेटल अछि'। उमर बजलाह; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की अहाँ कोनो लोक सं बात क' रहल छी जखन कि ओ लाश बनि गेल अछि?' ओ उत्तर देलथिन: 'अहाँ सभ हमरा कहल बात सँ बेसी नहि सुनलहुँ, मुदा ओ सभ कोनो उत्तर नहि द' सकल'।

Hadith

Imam Ahmad : 178

حَدَّثَنَا يَحْيَى حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ الْمُعَلِّمُ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ قَالَ فَلَمَّا رَجَعَ عَمْرٌو جَاءَ بَنُو مَعْمَرِ بْنِ حَبِيبٍ يُخَاصِمُونَهُ فِي وَلَاءِ أُخْتِهِمْ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ أَقْضِي بَيْنَكُمْ بِمَا سَمِعْتُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَا أَحْرَزَ الْوَلَدُ أَوْ الْوَالِدُ فَهُوَ لِعَصَبَتِهِ مَنْ كَانَ فَقَضَى لَنَا بِهِ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [याह्या] हमरा सभकेँ कहलक अछि [हुसैन अल मुअल्लीम] हमरा सभकेँ ['अमरू बिन स्यू'एब] [अपन पिता]सँ [अपन दादा]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; जखन 'अमरू घर आयल त' मा'मार बिन हबीब के बच्चा सब अपन बहिन के वाला' -नसाब आ वारत- के ल' क' उमर बिन अल खथथाब के विवाद करय लेल आयल छल, तें [उमर] कहलनि; 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स जे सुनने छी ओकर आधार पर अहाँ सबहक बीच मामला के फैसला करैत छी, जे ओ कहलनि: 'बच्चा या पिता के जे भेटैत अछि ओ हुनकर अशाबा के अछि जे कियो होथि'। तेँ ओ हमरा सभक लेल हुनका संग निर्णय कयलनि'।

Hadith

Imam Ahmad : 179

قَالَ قَرَأْتُ عَلَى يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ غِيَاثٍ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ وَحُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحِمْيَرِيِّ قَالَا لَقِينَا عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ فَذَكَرْنَا الْقَدَرَ وَمَا يَقُولُونَ فِيهِ فَقَالَ إِذَا رَجَعْتُمْ إِلَيْهِمْ فَقُولُوا إِنَّ ابْنَ عُمَرَ مِنْكُمْ بَرِيءٌ وَأَنْتُمْ مِنْهُ بُرَآءُ ثَلَاثَ مِرَارٍ ثُمَّ قَالَ أَخْبَرَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُمْ بَيْنَا هُمْ جُلُوسٌ أَوْ قُعُودٌ عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَاءَهُ رَجُلٌ يَمْشِي حَسَنُ الْوَجْهِ حَسَنُ الشَّعْرِ عَلَيْهِ ثِيَابُ بَيَاضٍ فَنَظَرَ الْقَوْمُ بَعْضُهُمْ إِلَى بَعْضٍ مَا نَعْرِفُ هَذَا وَمَا هَذَا بِصَاحِبِ سَفَرٍ ثُمَّ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ آتِيكَ قَالَ نَعَمْ فَجَاءَ فَوَضَعَ رُكْبَتَيْهِ عِنْدَ رُكْبَتَيْهِ وَيَدَيْهِ عَلَى فَخِذَيْهِ فَقَالَ مَا الْإِسْلَامُ قَالَ شَهَادَةُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَتُقِيمُ الصَّلَاةَ وَتُؤْتِي الزَّكَاةَ وَتَصُومُ رَمَضَانَ وَتَحُجُّ الْبَيْتَ قَالَ فَمَا الْإِيمَانُ قَالَ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَالْجَنَّةِ وَالنَّارِ وَالْبَعْثِ بَعْدَ الْمَوْتِ وَالْقَدَرِ كُلِّهِ قَالَ فَمَا الْإِحْسَانُ قَالَ أَنْ تَعْمَلَ لِلَّهِ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنْ لَمْ تَكُنْ تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ قَالَ فَمَتَى السَّاعَةُ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنْ السَّائِلِ قَالَ فَمَا أَشْرَاطُهَا قَالَ إِذَا الْعُرَاةُ الْحُفَاةُ الْعَالَةُ رِعَاءُ الشَّاءِ تَطَاوَلُوا فِي الْبُنْيَانِ وَوَلَدَتْ الْإِمَاءُ رَبَّاتِهِنَّ قَالَ ثُمَّ قَالَ عَلَيَّ الرَّجُلَ فَطَلَبُوهُ فَلَمْ يَرَوْا شَيْئًا فَمَكَثَ يَوْمَيْنِ أَوْ ثَلَاثَةً ثُمَّ قَالَ يَا ابْنَ الْخَطَّابِ أَتَدْرِي مَنْ السَّائِلُ عَنْ كَذَا وَكَذَا قَالَ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ ذَاكَ جِبْرِيلُ جَاءَكُمْ يُعَلِّمُكُمْ دِينَكُمْ قَالَ وَسَأَلَهُ رَجُلٌ مِنْ جُهَيْنَةَ أَوْ مُزَيْنَةَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فِيمَا نَعْمَلُ أَفِي شَيْءٍ قَدْ خَلَا أَوْ مَضَى أَوْ فِي شَيْءٍ يُسْتَأْنَفُ الْآنَ قَالَ فِي شَيْءٍ قَدْ خَلَا أَوْ مَضَى فَقَالَ رَجُلٌ أَوْ بَعْضُ الْقَوْمِ يَا رَسُولَ اللَّهِ فِيمَا نَعْمَلُ قَالَ أَهْلُ الْجَنَّةِ يُيَسَّرُونَ لِعَمَلِ أَهْلِ الْجَنَّةِ وَأَهْلُ النَّارِ يُيَسَّرُونَ لِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ قَالَ يَحْيَى قَالَ هُوَ هَكَذَا يَعْنِي كَمَا قَرَأْتَ عَلَيَّ

अहमद बिन हम्बल कहलनि; हम [यह्या बिन सईद] के [‘उतस्मान बिन घियात] स पढ़लहुं ई हमरा [अब्दुल्लाह बिन बुराइदा] के [याह्या बिन या’मर] स कहल गेल छल आ [हुमैद बिन अब्दुररहमान अल हिम्यारी] दुनू गोटे कहलनि; हम [अब्दुल्लाह बिन उमर] स भेंट केलहुं तखन तकदीर के बारे में कहलौं आ तकदीर के बारे में ओ सब की कहलखिन, तखन ओ जवाब देलखिन; 'जँ अहाँ हुनका सभ लग घुरि जाइत छी तँ हुनका सभकेँ कहू; "कि इब्न उमर अहाँ सँ अलग भ' गेल आ अहाँ हुनका सँ अलग भ' गेलहुँ -तीन बेर-''। तखन ओ कहलनि; 'हम [उमर बिन अल खथथब] केँ कहने छी, जे जखन ओ सभ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केर बगल मे बैसल छलाह, तखन अचानक हुनका लग पैदल चलैत एकटा आदमी आबि गेलाह, जेकर चेहरा सुन्दर छल, केश सुन्दर छल आ सब उज्जर कपड़ा पहिरने छल, तेँ लोक एक दोसरा दिस तकलक, हम सभ नै जनैत छल जे ओ मुसाफिर छथि, तखन ओ कहलनि, 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हम अहाँक पास आबि रहल छी,' नबी उत्तर देलनि: 'हँ' तें ओ आबि अपन ठेहुन ठेहुन पर आ हाथ अपन जाँघ पर राखि देलनि, तखन ओ पुछलनि जे 'इस्लाम की थिक;' नबी जवाब देलकै: ‘गवाही दियौ कि अल्लाह के अलावा इबादत के लायक कोनो देवता नै छै आरू मुहम्मद अल्लाह के दूत छै, आरू तोहें नमाज करी, जकात करी, रमजान के महीना में रोजा करी क॑ हज करी,’ वू फेरू पूछलकै; 'विश्वास की होइत छैक ?' नबी जवाब देलखिन: 'अहाँ सब के अल्लाह, हुनकर स्वर्गदूत, स्वर्ग आ नरक, मृत्यु के बाद कयामत आ सब किस्मत पर विश्वास करबाक चाही'। ओ पुछलकै; 'इहसान की अछि ?' नबी जवाब देलखिन: 'अहाँ के अल्लाह के लेल नीक काज करबाक चाही जेना अहाँ अल्लाह के देखैत छी, आ जौं अहाँ हुनका नहि देखि सकैत छी त सचमुच ओ अहाँ के देखैत छथि'। ओ पुछलकै; 'आ एपोकैलिप्स कहिया होयत?' नबी जवाब देलखिन: 'जे व्यक्ति स पूछल जा रहल अछि ओ प्रश्नकर्ता स बेसी नहि जनैत अछि'। ओ पुछलकै; 'तखन की संकेत अछि ?' नबी जवाब देलखिन: 'जखन जे लोक के पास कपड़ा नै छै, जूता नै छै आ गरीब लोक भवन ठाढ़ करै के होड़ करै छै, आ महिला दास अपन मालिक के जन्म दै छै'। उमर बजलाह; तखन ओ कहलनि: 'हमरा दिस ओहि आदमीक मुँह करू!' तखन ओ सभ ओकरा तकलक, मुदा ओकरा एकदम नहि देखलक, तेँ दू-तीन दिनक बाद ओ कहलक: ‘हे इब्नुल खथथाब, अहाँकेँ बुझल अछि जे एहि आ एहि विषयमे के पुछलक?’। उमर जबाब देलकै; 'अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह बेसी जनैत छथि'। नबी कहलनि: 'ई जिब्रिल छलाह जे अहाँक दीन -धर्मक बात सिखाब' लेल अहाँ लग आयल छलाह'। उमर बजलाह; 'आ हुनका सँ जुहैना वा मुजैना सँ कोनो आदमी पूछलनि जे ओ कहलनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हम की करब, की ई एहन चीज अछि जे पहिने सं पूरा भ गेल अछि या पास भ गेल अछि या आब कोनो नव चीज अछि?' नबी उत्तर देलनि; 'किछु जे बीतल -पहिने सँ- अछि,' तखन कोनो आदमी वा किछु लोक कहैत छथि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, तखन हम सब दान कियैक करैत छी?' अतः नबी जवाब देलकै: 'स्वर्ग के संभावित निवासी के लेलऽ स्वर्ग के निवासी के कर्म करै में आसानी होय जाय छै, आरू नरक के संभावित निवासी के लेलऽ नरक के निवासी के कर्म करै में आसानी होय जाय छै'। याह्या कहलक; 'एहि तरहेँ जेना अहाँ हमरा पढ़ि रहल छी'।

Hadith

Imam Ahmad : 180

حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ شُعْبَةَ حَدَّثَنِي سَلَمَةُ بْنُ كُهَيْلٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا الْحَكَمِ قَالَ سَأَلْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ نَبِيذِ الْجَرِّ وَالدُّبَّاءِ فَقَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ نَبِيذِ الْجَرِّ وَالدُّبَّاءِ وَقَالَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يُحَرِّمَ مَا حَرَّمَ اللَّهُ تَعَالَى وَرَسُولُهُ فَلْيُحَرِّمْ النَّبِيذَ قَالَ وَسَأَلْتُ ابْنَ الزُّبَيْرِ فَقَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الدُّبَّاءِ وَالْجَرِّ قَالَ وَسَأَلْتُ ابْنَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَحَدَّثَ عَنْ عُمَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الدُّبَّاءِ وَالْمُزَفَّتِ قَالَ وَحَدَّثَنِي أَخِي عَنْ أَبِي سَعِيدٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الْجَرِّ وَالدُّبَّاءِ وَالْمُزَفَّتِ وَالْبُسْرِ وَالتَّمْرِ

हमरा सभकेँ [शुअबा]सँ [याह्या] कहलक अछि हमरा [सलामह बिन कुहैल] कहलक अछि; हम [अबुल हकम] केँ कहैत सुनलहुँ; हम [इब्न अब्बास] सं अल जरर में शराब - माटि सं बनल मटका - आ अद दुब्बा` - कद्दूक खाल सं बनल मटका - के बारे में पूछलहुं. तेँ ओ उत्तर देलथिन। रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल जरर आ अद दुब्बा में शराब मना क देलखिन आ ओ कहलनि जे, जे कियो हराम बनाबय चाहैत अछि जे अल्लाह तआला आ हुनकर रसूलुल्लाह हराम बनौने छथि, तखन हरम शराब बनाउ जे शराब बनि गेल अछि'। [अबुल हकम] कहलनि; आ हम [इब्न जुबैर] सँ पुछलियनि, तेँ ओ उत्तर देलनि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल जरर आ अद दुब्बा` पर रोक लगा देने छथि | [अबुल हकम] कहलनि; आ हम [इब्न उमर] स पूछलहुं, त ओ [उमर] स कहलथि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल जरर आ अल मुजफ्फात - टार स रंगल मटका स मना क देने छथि। [अबुल हकम] कहलनि; आरू हमरा [हमरऽ भाई] क॑ [अबू सईद] स॑ कहल॑ छेलै कि रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ अल जरर, अद दुब्बा` आरू अल मुजफ्फात स॑ भी मना करी देल॑ छै आरू साथ ही साथ कच्चा खजूर आरू पाकल खजूर -जकर इरादा ताड़ केरऽ शराब बनाबै के छै-' ।