Imam Ahmad : 141
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يُقَادُ وَالِدٌ مِنْ وَلَدٍ
हमरा सब [अबू सईद] के कहल गेल अछि जे हमरा सब [अब्दुल्लाह बिन लहिअह] के कहल गेल अछि [अमरू बिन स्यूअइब] के [अपन पिता] स [अपन दादा] स [उमर] स कहल गेल अछि, जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलम कहलनि: 'बाप अपन बेटा स किशाश मे नहि अछि'।
Imam Ahmad : 142
وَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَرِثُ الْمَالَ مَنْ يَرِثُ الْوَلَاءَ
-एखनो [उमर बिन खट्टाब] स संचरण के ओही लाइन स-। आरू नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि जे व्यक्ति क॑ संपत्ति के उत्तराधिकार म॑ मिलै छै ओकरा वला` - नौकर - के भी विरासत म॑ मिलै छै ।
Imam Ahmad : 143
حَدَّثَنَا حَسَنٌ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يُقَادُ لِوَلَدٍ مِنْ وَالِدِهِ
हमरा सभकेँ कहलक अछि [हसन] हमरा सभकेँ [इब्न लहिअह] हमरा सभकेँ [अमरू बिन स्यूअइब] [अपन पिता]सँ [अब्दुल्लाह बिन अमरू]सँ कहलक अछि, ओ कहलनि; [उमर बिन अल खथथब] कहलनि; 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छलहुं: 'बच्चा के अपन पिता स किशाश नै बनाओल जाइत अछि'।
Imam Ahmad : 144
حَدَّثَنَا حَسَنٌ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا الضَّحَّاكُ بْنُ شُرَحْبِيلَ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ مَرَّةً مَرَّةً
हमरा सभकेँ कहलक अछि [हसन] हमरा सभकेँ [इब्नु लहिआह] हमरा सभकेँ [अदल दलाहक बिन स्यूराहबिल] [जैद बिन असलम]सँ [अपन पिता]सँ [उमर बिन अल खथथब]सँ कहलक अछि जे ओ कहलनि; 'हम एक बेर अल्लाह के रसूलुल्लाह के वजूद करैत देखलहुं।'
Imam Ahmad : 145
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ إِسْحَاقَ أَنْبَأَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي يَزِيدَ الْخَوْلَانِيِّ قَالَ سَمِعْتُ فَضَالَةَ بْنَ عُبَيْدٍ يَقُولُ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الشُّهَدَاءُ أَرْبَعَةٌ رَجُلٌ مُؤْمِنٌ جَيِّدُ الْإِيمَانِ لَقِيَ الْعَدُوَّ فَصَدَقَ اللَّهَ فَقُتِلَ فَذَلِكَ الَّذِي يَنْظُرُ النَّاسُ إِلَيْهِ هَكَذَا وَرَفَعَ رَأْسَهُ حَتَّى سَقَطَتْ قَلَنْسُوَةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ قَلَنْسُوَةُ عُمَرَ وَالثَّانِي رَجُلٌ مُؤْمِنٌ لَقِيَ الْعَدُوَّ فَكَأَنَّمَا يُضْرَبُ ظَهْرُهُ بِشَوْكِ الطَّلْحِ جَاءَهُ سَهْمٌ غَرْبٌ فَقَتَلَهُ فَذَاكَ فِي الدَّرَجَةِ الثَّانِيَةِ وَالثَّالِثُ رَجُلٌ مُؤْمِنٌ خَلَطَ عَمَلًا صَالِحًا وَآخَرَ سَيِّئًا لَقِيَ الْعَدُوَّ فَصَدَقَ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ حَتَّى قُتِلَ قَالَ فَذَاكَ فِي الدَّرَجَةِ الثَّالِثَةِ وَالرَّابِعُ رَجُلٌ مُؤْمِنٌ أَسْرَفَ عَلَى نَفْسِهِ إِسْرَافًا كَثِيرًا لَقِيَ الْعَدُوَّ فَصَدَقَ اللَّهَ حَتَّى قُتِلَ فَذَاكَ فِي الدَّرَجَةِ الرَّابِعَةِ
हमरा सब के कहलक अछि [याह्या बिन इशाक] हमरा सब के [इब्न लहिअह] के ['अथो` बिन दिनार] स [अबू यजीद अल खौलानी] स कहलक अछि ओ कहलनि; सुनलहुँ [फदलालाह बिन उबैद] कहैत छथि; हम सुनलहुँ [उमर बिन अल खथथब] कहैत छथि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत सुनलहुँ; 'चारि टा शहीद छल; एकटा मुसलमान आदमी जेकरऽ ईमान अच्छा छेलै, ओकरऽ दुश्मन से मुलाकात होय गेलै आरू वू अल्लाह के साथ ईमानदार छेलै आरो मारलऽ गेलै, वू वू व्यक्ति छै जेकरा लोग ऐन्हऽ देखै छै,’ आरू अल्लाह के रसूलुल्लाह अपनऽ माथा ऊपर उठैलकै जबेॅ तलक कि रसुलुल्लाह के खोपड़ी नै गिरी गेलै या उमर के खोपड़ी नै गिरी गेलै; 'दोसर एकटा मुसलमान जे दुश्मन सँ भेंट करैत अछि जेना ओकर पीठ गाछक काँट सँ मारल गेल हो, ओकरा आवारा तीर सँ छेदल जाइत छैक आ तखन ओकरा मारल जाइत छैक, ओ व्यक्ति जे दोसर स्तर मे छैक, आ तेसर एकटा मुसलमान जे अपन सत्कर्म केँ अपन खराब काज मे मिला दैत छैक तखन दुश्मन सँ भेंट करैत छैक आ ओ अल्लाह 'अज्जा वजल्ला'क प्रति ईमानदारी सँ काज करैत छैक जा धरि ओकरा मारल नहि जाइत छैक,'।' रसुलुल्लाह कहलनि : 'ओ व्यक्ति अछि जे तेसर स्तर पर अछि, आ चारिम एकटा मुसलमान आदमी अछि जे अपना प्रति बहुत गलत काज केने अछि तखन कोनो दुश्मन सँ भेंट करैत अछि आ अल्लाह सँ ईमानदारी सँ काज करैत अछि जा धरि ओकरा नहि मारल जाइत अछि, तखन ओ व्यक्ति अछि जे चारिम स्तर पर अछि'।
Imam Ahmad : 146
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ غَيْلَانَ حَدَّثَنَا رِشْدِينُ بْنُ سَعْدٍ حَدَّثَنِي أَبُو عَبْدِ اللَّهِ الْغَافِقِيُّ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ تَوَضَّأَ عَامَ تَبُوكَ وَاحِدَةً وَاحِدَةً
हमरा सब के कहने छथि [याह्या बिन घैलन] हमरा सब के बता देने छथि [रिसीदीन बिन सअद] हमरा [अबू अब्दुल्लाह अल गफीकी] स [जैद बिन असलम] स [अपन पिता] स [उमर बिन अल खथथब] स रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहने छथि, जे ओ तबुक के लड़ाई में एक बेर आ... एक बेर'।
Imam Ahmad : 147
حَدَّثَنَا حَسَنٌ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا أَبُو الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ سَيَخْرُجُ أَهْلُ مَكَّةَ ثُمَّ لَا يَعْبُرُ بِهَا أَوْ لَا يَعْرِفُهَا إِلَّا قَلِيلٌ ثُمَّ تَمْتَلِئُ وَتُبْنَى ثُمَّ يَخْرُجُونَ مِنْهَا فَلَا يَعُودُونَ فِيهَا أَبَدًا
हमरा सब के कहलक [हसन] हमरा सब के [इब्न लहिअह] हमरा सब के [अबू अज़ जुबैर] के [जाबीर] स कहलक अछि जे [उमर बिन अल खथथब] हुनका रिपोर्ट केने छथि, जे ओ अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छथि: 'मक्का के लोक चलि जेताह आ एहि स नहि गुजरत या एहि बारे में किछु लोक के छोड़ि क' नहि बुझताह, तखन।' ओ भरल आ जागल तखन ओ सभ ओहि मे सँ बाहर निकलत आ सदाक लेल घुरि क' नहि आओत'।
Imam Ahmad : 148
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا أَبُو الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأَى رَجُلًا تَوَضَّأَ لِصَلَاةِ الظُّهْرِ فَتَرَكَ مَوْضِعَ ظُفُرٍ عَلَى ظَهْرِ قَدَمِهِ فَأَبْصَرَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ ارْجِعْ فَأَحْسِنْ وُضُوءَكَ فَرَجَعَ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ صَلَّى
हमरा सब के [अल हसन] कहल गेल अछि हमरा सब के [इब्न लहिअह] [जाबीर] स हमरा सब के [अबू अज़ जुबैर] के कहल गेल अछि जे [उमर बिन अल खथथब] हुनका रिपोर्ट केने छलाह, जे रसूलुल्लाह सल्लाह अलैहि वस्लाम एकटा आदमी के मध्याह्न के नमाज के लेल वजूद बनबैत देखलखिन, फेर छोड़ि देलखिन - बिना धोने - अपन पैर के किछु हिस्सा जेकर साइज के छल नाखून, तखन रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका देखलनि आ कहलनि: 'दोहराउ! आ अपन वज़ूद पूरा करू' तखन ओ व्यक्ति वज़ूद दोहराबैत अछि तखन नमाज पढ़ैत अछि'।
Imam Ahmad : 149
حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ قَالَ زَعَمَ الزُّهْرِيُّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تُطْرُونِي كَمَا أَطْرَتْ النَّصَارَى عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ عَلَيْهِ السَّلَام فَإِنَّمَا أَنَا عَبْدُ اللَّهِ وَرَسُولُهُ
हमरा सभ [हुसैम] केँ कहि ओ कहलनि; [अज ज़ुहरी] न॑ [उबैदल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] स॑ [उमर] स॑ [इब्नु अब्बास] स॑ -रवायद- मानलकै कि रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि ‘हमरऽ पूजा ऐन्हऽ नै करऽ जेना ईसाई ईसा बिन मरियम केरऽ पूजा करै छै, हम्में खाली अल्लाह आरू हुनकऽ रसूलुल्लाह केरऽ सेवक छियै’ ।
Imam Ahmad : 150
حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَنْبَأَنَا أَبُو بِشْرٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ نَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُتَوَارٍ بِمَكَّةَ { وَلَا تَجْهَرْ بِصَلَاتِكَ وَلَا تُخَافِتْ بِهَا } قَالَ كَانَ إِذَا صَلَّى بِأَصْحَابِهِ رَفَعَ صَوْتَهُ بِالْقُرْآنِ قَالَ فَلَمَّا سَمِعَ ذَلِكَ الْمُشْرِكُونَ سَبُّوا الْقُرْآنَ وَمَنْ أَنْزَلَهُ وَمَنْ جَاءَ بِهِ فَقَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لِنَبِيِّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ { وَلَا تَجْهَرْ بِصَلَاتِكَ } أَيْ بِقِرَاءَتِكَ فَيَسْمَعَ الْمُشْرِكُونَ فَيَسُبُّوا الْقُرْآنَ { وَلَا تُخَافِتْ بِهَا } عَنْ أَصْحَابِكَ فَلَا تُسْمِعُهُمْ الْقُرْآنَ حَتَّى يَأْخُذُوهُ عَنْكَ { وَابْتَغِ بَيْنَ ذَلِكَ سَبِيلًا }
हमरा सब के कहलक अछि [हुसैम] हमरा सब के [अबू बिसीर] के [सैद बिन जुबैर] स कहलक अछि [इब्न अब्बास] स ओ कहलनि; ई आयत तखन आयल जखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मक्का मे नुकायल छलाह; 'आ अपन नमाज मे आवाज नहि उठाउ आ ओकरा नीचा नहि करू,' -QS Al Isro' श्लोक 110-, इब्न अब्बास कहलनि; पहिने जखन पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन साथी सब के नेतृत्व करैत नमाज पढ़ैत छलाह त ओ जोर स कुरान के पाठ करैत छलाह, फेर जखन मुश्रिक सब पाठ सुनैत छलाह त ओ सब कुरान के गारि पढ़ैत छलाह, जे ओकरा उतारय वाला छलाह आ नबी जे एकरा अनने छलाह, तखन अल्लाह अपन पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलखिन: 'आ अपन शून्यता के आवाज नहि उठाउ अहाँक प्रार्थना'। तात्पर्य जे अहाँक पाठ मुश्रिक लोकनि केँ सुनबा मे आओत; 'आ अपन साथी सब स एकरा तिरस्कार नहि करू ताकि कुरान हुनका सब स नहि सुनल जा सकए जे ओ अहाँ स ल लेथि, आ दुनू क बीच करू'।
Imam Ahmad : 151
حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَنْبَأَنَا عَلِيُّ بْنُ زَيْدٍ عَنْ يُوسُفَ بْنِ مِهْرَانَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ خَطَبَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَالَ هُشَيْمٌ مَرَّةً خَطَبَنَا فَحَمِدَ اللَّهَ تَعَالَى وَأَثْنَى عَلَيْهِ فَذَكَرَ الرَّجْمَ فَقَالَ لَا تُخْدَعُنَّ عَنْهُ فَإِنَّهُ حَدٌّ مِنْ حُدُودِ اللَّهِ تَعَالَى أَلَا إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ رَجَمَ وَرَجَمْنَا بَعْدَهُ وَلَوْلَا أَنْ يَقُولَ قَائِلُونَ زَادَ عُمَرُ فِي كِتَابِ اللَّهِ مَا لَيْسَ مِنْهُ لَكَتَبْتُهُ فِي نَاحِيَةٍ مِنْ الْمُصْحَفِ شَهِدَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَالَ هُشَيْمٌ مَرَّةً وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ وَفُلَانٌ وَفُلَانٌ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ رَجَمَ وَرَجَمْنَا مِنْ بَعْدِهِ أَلَا وَإِنَّهُ سَيَكُونُ مِنْ بَعْدِكُمْ قَوْمٌ يُكَذِّبُونَ بِالرَّجْمِ وَبِالدَّجَّالِ وَبِالشَّفَاعَةِ وَبِعَذَابِ الْقَبْرِ وَبِقَوْمٍ يُخْرَجُونَ مِنْ النَّارِ بَعْدَمَا امْتَحَشُوا
हमरा सब के कहलक अछि [हुसैम] हमरा सब के [अली बिन जैद] के [यूसुफ बिन मिहरान] स [इब्न अब्बास] स कहलक अछि ओ कहलनि; [उमर उपदेश देलनि], -हुसैम कहलनि; एक बेर उमर हमरा सब के उपदेश देलखिन - फेर अल्लाह तआला के स्तुति आ पवित्र केलनि तखन पत्थरबाजी के नियम के जिक्र केलनि, आ कहलनि; 'एहि सँ बेवकूफ नहि बनू, कारण वास्तव मे ई अल्लाह तआला केर नियम मे सँ एक अछि, ई जानि लिअ जे रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम पत्थर मारबाक नियम लागू केने छथि, तेँ हम सभ हुनका बाद पत्थर मारबाक कानून सेहो लागू केलहुँ।' जँ - हमरा चिन्ता नहि अछि - लोक कहत जे उमर अल्लाहक किताब मे ओ जोड़ि देलनि जे एहि मे सँ नहि छल, त' हम मुशफक कोन मे अवश्य लिखब, उमर बिन खथथब गवाही देने छथि'. एकटा आओर अवसर पर हुसैम कहलनि; [अब्दुररहमान बिन औफ], फलाना, कि रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पत्थरबाजी के नियम लागू केलक आ हम सब अल्लाह के रसूलुल्लाह के बाद पत्थरबाजी के कानून लागू केलौं, जानू जे अहाँक बाद एकटा एहन लोक होयत जे पत्थरबाजी के नियम के अस्तित्व स इनकार करत, दज्जाल के अस्तित्व स नकारत, स्याफात के अस्तित्व स, कुबूर के अजब स आ ओतय एहन लोक होयत जेकरा स बाहर क देल जायत जरि गेलाक बाद नरकक आगि'।
Imam Ahmad : 152
حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَنْبَأَنَا حُمَيْدٌ عَنْ أَنَسٍ قَالَ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَافَقْتُ رَبِّي فِي ثَلَاثٍ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَوْ اتَّخَذْنَا مِنْ مَقَامِ إِبْرَاهِيمَ مُصَلًّى فَنَزَلَتْ { وَاتَّخِذُوا مِنْ مَقَامِ إِبْرَاهِيمَ مُصَلًّى } وَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ نِسَاءَكَ يَدْخُلُ عَلَيْهِنَّ الْبَرُّ وَالْفَاجِرُ فَلَوْ أَمَرْتَهُنَّ أَنْ يَحْتَجِبْنَ فَنَزَلَتْ آيَةُ الْحِجَابِ وَاجْتَمَعَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نِسَاؤُهُ فِي الْغَيْرَةِ فَقُلْتُ لَهُنَّ { عَسَى رَبُّهُ إِنْ طَلَّقَكُنَّ أَنْ يُبْدِلَهُ أَزْوَاجًا خَيْرًا مِنْكُنَّ } قَالَ فَنَزَلَتْ كَذَلِكَ
हमरा सभकेँ कहलक अछि [हुशैम] हमरा सभकेँ [हुमैद] [अनास]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; [उमर] कहलनि; हम अपन रब्बक बात तीन बात मे मानलहुँ अछि; हम कहलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अगर हम मकाम इब्राहिम के नमाज के जगह बनाबी,' तखन आयत उतारल गेल; 'और इब्राहिम के मकाम के एक हिस्सा को नमाज के स्थान बनाओ' -Q S Al Baqarah: 125-. हम कहलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, सचमुच तोहर पत्नी के पास नीक-बेजाय लोक आओत, जँ अहाँ हिजाब पहिरबाक आदेश देब'। तेँ हिजाबक छंद उतरि गेल। आ अंत मे रसुलुल्लाह के पत्नी सब एक संग हुनका स ईर्ष्या करैत छलीह ताहि लेल हम हुनका सब स कहलियनि; 'जँ नबी अहाँक तलाक द' देताह त' शायद हुनकर प्रभु हुनकर जगह अहाँ सँ नीक पत्नी बना लेताह,' ओ कहलनि; 'त' एहन एकटा श्लोक उतरि गेल -QS At Tahrim: 5-'।
Imam Ahmad : 153
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْأَعْلَى بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى عَنْ مَعْمَرٍ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنِ الْمِسْوَرِ بْنِ مَخْرَمَةَ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَمِعْتُ هِشَامَ بْنَ حَكِيمِ بْنِ حِزَامٍ يَقْرَأُ سُورَةَ الْفُرْقَانِ فَقَرَأَ فِيهَا حُرُوفًا لَمْ يَكُنْ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَقْرَأَنِيهَا قَالَ فَأَرَدْتُ أَنْ أُسَاوِرَهُ وَهُوَ فِي الصَّلَاةِ فَلَمَّا فَرَغَ قُلْتُ مَنْ أَقْرَأَكَ هَذِهِ الْقِرَاءَةَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قُلْتُ كَذَبْتَ وَاللَّهِ مَا هَكَذَا أَقْرَأَكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخَذْتُ بِيَدِهِ أَقُودُهُ فَانْطَلَقْتُ بِهِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّكَ أَقْرَأْتَنِي سُورَةَ الْفُرْقَانِ وَإِنِّي سَمِعْتُ هَذَا يَقْرَأُ فِيهَا حُرُوفًا لَمْ تَكُنْ أَقْرَأْتَنِيهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اقْرَأْ يَا هِشَامُ فَقَرَأَ كَمَا كَانَ قَرَأَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَكَذَا أُنْزِلَتْ ثُمَّ قَالَ اقْرَأْ يَا عُمَرُ فَقَرَأْتُ فَقَالَ هَكَذَا أُنْزِلَتْ ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ الْقُرْآنَ نَزَلَ عَلَى سَبْعَةِ أَحْرُفٍ
हमरा सब के [अब्दुल अ'ला बिन अब्दुल अ'ला] के [मा'मार] स [अज जुहरी] स ['उरवाह बिन अज़ जुबैर] स [अल मिस्वार बिन मखरामा] स कहल गेल अछि जे [उमर बिन अल खथथब] कहलनि; हम हिस्यम बिन हाकिम बिन हिजाम के अल फुरकान पढ़ैत सुनलहुं, तखन ओ एकटा एहन पाठ पढ़लनि जे हुनका कहियो नबीयुल्लाह नहिं पढ़लनि, तें हम हुनकर नमाज पढ़ैत काल हुनकर माथ खींचय चाहैत छलहुं, तें जखन ओ नमाज समाप्त केलनि त हम पुछलियनि; 'एहि तरहक अंश अहाँ केँ के पढ़ैत अछि?' ओ उत्तर देलथिन; 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम'। हम कहलियनि; 'अहाँ झूठ बाजि रहल छी, अल्लाह के कसम, रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अहाँ के एना नहि पढ़लनि'। तखन हम हुनकर हाथ पकड़ि लेलियनि आ हम हुनका रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लग ल गेलियनि आ हम हुनका कहलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, सचमुच अहाँ हमरा सब के सूरह अल फुर्कून पढ़लौं आ हम हुनका सूरह अल फुर्कून के पढ़ल सुनलौं जे अहाँ हमरा सब के नै पढ़लौं'। त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन: 'पढ़ू हे हिशाम'। त ओ पढ़ैत-पढ़ैत पढ़लनि, तखन अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'एहि तरहे हुनका उतारल गेलनि'। तखन बजलाह-पढ़ू हे उमर’। तेँ हम पढ़लहुँ, तखन ओ कहलनि: 'एहि तरहेँ ओकरा नीचाँ पठाओल गेल'। तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'वास्तव मे कुरान सात अक्षर सँ उतारल गेल छल'।
Imam Ahmad : 154
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ الْهَيْثَمِ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ عَنْ عُمَرَ قَالَ لَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَلْتَوِي مَا يَجِدُ مَا يَمْلَأُ بِهِ بَطْنَهُ مِنْ الدَّقَلِ
हमरा सब के ['अमरू बिन अल हैतसम] हमरा सब के [सिमक बिन हरब] स [स्यू'बाह] के [उमर] स [अन नु'मान बिन बसिर] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम अल्लाह के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पेट में गाँठ लगा क देखलौं, कियाक त हुनका सुखायल खजूर के रूप में सेहो पेट भरय लेल किछु नै भेटैत छल।
Imam Ahmad : 155
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ عَنْ حُمَيْدٍ عَنْ أَنَسٍ قَالَ قَالَ عُمَرُ وَافَقْتُ رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ فِي ثَلَاثٍ أَوْ وَافَقَنِي رَبِّي فِي ثَلَاثٍ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَوْ اتَّخَذْتَ الْمَقَامَ مُصَلًّى قَالَ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { وَاتَّخِذُوا مِنْ مَقَامِ إِبْرَاهِيمَ مُصَلًّى } وَقُلْتُ لَوْ حَجَبْتَ عَنْ أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ فَإِنَّهُ يَدْخُلُ عَلَيْكَ الْبَرُّ وَالْفَاجِرُ فَأُنْزِلَتْ آيَةُ الْحِجَابِ قَالَ وَبَلَغَنِي عَنْ أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ شَيْءٌ فَاسْتَقْرَيْتُهُنَّ أَقُولُ لَهُنَّ لَتَكُفُّنَّ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ لَيُبْدِلَنَّهُ اللَّهُ بِكُنَّ أَزْوَاجًا خَيْرًا مِنْكُنَّ مُسْلِمَاتٍ حَتَّى أَتَيْتُ عَلَى إِحْدَى أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ فَقَالَتْ يَا عُمَرُ أَمَا فِي رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا يَعِظُ نِسَاءَهُ حَتَّى تَعِظَهُنَّ فَكَفَفْتُ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { عَسَى رَبُّهُ إِنْ طَلَّقَكُنَّ أَنْ يُبْدِلَهُ أَزْوَاجًا خَيْرًا مِنْكُنَّ مُسْلِمَاتٍ مُؤْمِنَاتٍ قَانِتَاتٍ } الْآيَةَ
हमरा सभ केँ [इब्न अबू अदी] केँ [हुमैद] सँ [अनास] सँ कहने छथि ओ कहलनि; [उमर] कहलनि; हम अपन रब्बक बात मानलहुँ वा हमर रब्ब हमरा संग तीन बात मे सहमत भेलाह; हम कहलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अगर अहाँ मकाम इब्राहिम के नमाज के जगह बना लेब त अल्लाह आयत के उतारत; 'और इब्राहिम के मकाम के एक हिस्सा को नमाज के स्थान बनाओ', -QS अल बकूरोह श्लोक 125-। हम कहलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अगर तोहें उम्माहतुल मुसलमान - नबी के पत्नी - पर हिजाब लगा देते हैं, क्योंकि तोरा पास आने वाला कुछ लोग अच्छा है और कुछ अधला है' | तखन हिजाबक शेर उतरि गेल। ओ कहैत छथि; 'आ अंततः उम्माहतुल मुकमिनिन सँ हमरा लग खबरि आयल जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह केर पत्नी लोकनि एकहि संग हुनका सँ ईर्ष्या करैत छलीह, तें हम हुनका लोकनि केँ कहलियनि; 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स ईर्ष्या करब बंद करू, नहि त अल्लाह सचमुच अहाँक जगह मुस्लिम पत्नी ल लेताह जे अहाँ स नीक छथि।' अस्तु, उम्माहतुल मुकमिनिन मे सं एकटा सं भेंट भेल, तखन ओ कहलनि; 'हे उमर, की रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ हुनकर पत्नी सभक लेल कोनो सलाह नहि छल जाबत धरि अहाँ हुनका सभ केँ सलाह नहि देलहुँ?' अस्तु हम रुकि गेलहुँ, तखन अल्लाह आयत उतारलनि: 'जँ नबी अहाँक तलाक द' देताह त' शायद हुनकर प्रभु हुनकर जगह अहाँ सँ नीक पत्नी बना लेताह जे आज्ञाकारी होथि, विश्वास करैत होथि, आज्ञा मानैत होथि, पश्चाताप करैत होथि'। -QS तहरीम पर श्लोक 5-।
Imam Ahmad : 156
حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ أَنَّ يَحْيَى بْنَ أَبِي كَثِيرٍ حَدَّثَهُ عَنْ عِكْرِمَةَ مَوْلَى ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقُولُ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ بِالْعَقِيقِ يَقُولُ أَتَانِي اللَّيْلَةَ آتٍ مِنْ رَبِّي فَقَالَ صَلِّ فِي هَذَا الْوَادِي الْمُبَارَكِ وَقُلْ عُمْرَةٌ فِي حَجَّةٍ قَالَ الْوَلِيدُ يَعْنِي ذَا الْحُلَيْفَةِ
हमरा सभकेँ [अल वलीद बिन मुस्लिम] हमरा सभकेँ [अल औजाई] कहलक अछि जे [याह्या बिन अबी कथिर] हुनका [इब्न अब्बासक गुलाम इकरीमा]सँ कहने छथि जे ओ कहलनि; हम [इब्न अब्बास] केँ कहैत सुनलहुँ; हम सुनलहुँ [उमर बिन अल खथथब] कहैत छथि; अकीक घाटी में रहैत रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनलहुं: ‘काल्हि राति हमरा लग कियो हमर रब्ब सं आयल छल आ कहलनि; 'एहि धन्य घाटी मे प्रार्थना करू, आ कहब; हज के लेल उमरा'' वालिद कहलनि; 'अर्थात ज़ुलहुलाइफाह'।
Imam Ahmad : 157
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنِ الزُّهْرِيِّ سَمِعَ مَالِكَ بْنَ أَوْسِ بْنِ الْحَدَثَانِ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ سُفْيَانُ مَرَّةً سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الذَّهَبُ بِالْوَرِقِ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ وَالْبُرُّ بِالْبُرِّ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ وَالشَّعِيرُ بِالشَّعِيرِ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ وَالتَّمْرُ بِالتَّمْرِ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ
हमरा सब के [सुफयान] के [अज ज़ुहरी] स कहलक अछि जे ओ सुनने छल [मलिक बिन औस बिन अल हदतसन] [उमर बिन अल खथथब] के कहैत सुनने छल; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: -एकटा आओर अवसर पर सुफियान कहलनि; उमर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनलनि जे : - 'सोना -चांदी के बदला- बदलल- रिबा अछि जाबत तक नगद नहिं, गहूम -बदलल- गहूम के बदला रिबा अछि जखन तक नगद नहिं, खजूर के बदला- खजूर के बदला रिबा अछि नगद के छोड़ि क'.
Imam Ahmad : 158
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنِ الزُّهْرِيِّ سَمِعَ أَبَا عُبَيْدٍ قَالَ شَهِدْتُ الْعِيدَ مَعَ عُمَرَ فَبَدَأَ بِالصَّلَاةِ قَبْلَ الْخُطْبَةِ وَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ صِيَامِ هَذَيْنِ الْيَوْمَيْنِ أَمَّا يَوْمُ الْفِطْرِ فَفِطْرُكُمْ مِنْ صَوْمِكُمْ وَأَمَّا يَوْمُ الْأَضْحَى فَكُلُوا مِنْ لَحْمِ نُسُكِكُمْ
हमरा सभ केँ [सुफयान] केँ [अज ज़ुहरी] सँ कहने छथि जे ओ [अबू उबैद] केँ कहैत सुनने छलाह; हम [उमर] के संग सहायता के नमाज में शामिल भेलहुं, फेर ओ प्रवचन सं पहिने के नमाज सं शुरू केलनि आ कहलनि; 'सत्ते, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एहि दू दिनक रोजा मना कएने छलाह, जखन कि ऐदुल फितर ओहि दिन अछि जखन अहाँ अपन रोजा तोड़ैत छी, जखन कि ऐदुल अधा केर त' अपन बलिदानक मांस खाउ'।
Imam Ahmad : 159
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تُطْرُونِي كَمَا أَطْرَتْ النَّصَارَى عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ عَلَيْهِ السَّلَام فَإِنَّمَا أَنَا عَبْدٌ فَقُولُوا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
हमरा सब के [सुफयान] के [अज ज़ुहरी] स [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह] स [इब्न अब्बास] स [उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, हमरा ओहिना पूजा नहि करू जेना ईसाई मरियमक पुत्र यीशुक पूजा करैत छथि, हम मात्र नौकर छी, तेँ हुनकर सेवक आ रसूलुल्लाह सभ केँ कहू’।
Imam Ahmad : 160
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ أَنَّهُ سَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيَنَامُ أَحَدُنَا وَهُوَ جُنُبٌ قَالَ يَتَوَضَّأُ وَيَنَامُ إِنْ شَاءَ وَقَالَ سُفْيَانُ مَرَّةً لِيَتَوَضَّأْ وَلْيَنَمْ
हमरा सब [सुफयान] के [अब्दुल्लाह बिन दिनार] स [इब्न उमर] स [उमर] स कहल गेल अछि जे ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछलथि; 'हमरा सभ मे सँ कियो जुनब रहितो सुति सकैत अछि?' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'वज़ूद करू फेर चाहथि त सुतब'। एकटा आओर अवसर पर सुफियन कहलनि; 'वजूद करबाक लेल तखन सुतब'।