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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
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इमाम अहमद (الامام احمد) - 26363 हदीस

पिता के लिए क़िशाह का नियम

इमाम अहमद : 141

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يُقَادُ وَالِدٌ مِنْ وَلَدٍ

[अबू सईद] ने हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन लाहिआ] ने हमें [अमरू बिन स्यूऐब] [अपने पिता] से [अपने दादा] से [उमर] से बताया है, कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "एक पिता अपने बेटे के लिए जवाबदेह नहीं है।"

वाला उत्तराधिकार के प्रावधान

इमाम अहमद : 142

وَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَرِثُ الْمَالَ مَنْ يَرِثُ الْوَلَاءَ

(उमर बिन खत्ताब से उसी लाइन से)। और पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो लोग जायदाद के वारिस होते हैं, उन्हें वला (नौकर) भी वारिस होते हैं।"

बच्चों को उनके पिता से क़िशाह नहीं मिलता

इमाम अहमद : 143

حَدَّثَنَا حَسَنٌ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يُقَادُ لِوَلَدٍ مِنْ وَالِدِهِ

हज़रत हसन ने हमें बताया है, हज़रत इब्ने लहिया ने हमें बताया है, हज़रत अमरू बिन स्यूऐब ने हमें बताया है, हज़रत अब्दुल्लाह बिन अमरू ने कहा है, हज़रत उमर बिन ख़तथब ने कहा है, "मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना है: "बच्चे अपने बाप से किशाश नहीं होते।"

उमर ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को एक बार वुज़ू करते हुए देखा

इमाम अहमद : 144

حَدَّثَنَا حَسَنٌ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا الضَّحَّاكُ بْنُ شُرَحْبِيلَ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ مَرَّةً مَرَّةً

हज़रत हसन ने हमें बताया है कि हज़रत इब्ने लहिया ने हमें बताया है कि हज़रत ज़ैद बिन असलम ने अपने पिता उमर बिन ख़तथब से कहा है कि उन्होंने कहा कि मैंने एक बार अल्लाह के रसूल को वज़ू करते हुए देखा।

रसूलल्लाह शाल्लाहु अलैहि वसल्लम के अनुसार शहीद लोगों के चार समूह

इमाम अहमद : 145

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ إِسْحَاقَ أَنْبَأَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي يَزِيدَ الْخَوْلَانِيِّ قَالَ سَمِعْتُ فَضَالَةَ بْنَ عُبَيْدٍ يَقُولُ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الشُّهَدَاءُ أَرْبَعَةٌ رَجُلٌ مُؤْمِنٌ جَيِّدُ الْإِيمَانِ لَقِيَ الْعَدُوَّ فَصَدَقَ اللَّهَ فَقُتِلَ فَذَلِكَ الَّذِي يَنْظُرُ النَّاسُ إِلَيْهِ هَكَذَا وَرَفَعَ رَأْسَهُ حَتَّى سَقَطَتْ قَلَنْسُوَةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ قَلَنْسُوَةُ عُمَرَ وَالثَّانِي رَجُلٌ مُؤْمِنٌ لَقِيَ الْعَدُوَّ فَكَأَنَّمَا يُضْرَبُ ظَهْرُهُ بِشَوْكِ الطَّلْحِ جَاءَهُ سَهْمٌ غَرْبٌ فَقَتَلَهُ فَذَاكَ فِي الدَّرَجَةِ الثَّانِيَةِ وَالثَّالِثُ رَجُلٌ مُؤْمِنٌ خَلَطَ عَمَلًا صَالِحًا وَآخَرَ سَيِّئًا لَقِيَ الْعَدُوَّ فَصَدَقَ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ حَتَّى قُتِلَ قَالَ فَذَاكَ فِي الدَّرَجَةِ الثَّالِثَةِ وَالرَّابِعُ رَجُلٌ مُؤْمِنٌ أَسْرَفَ عَلَى نَفْسِهِ إِسْرَافًا كَثِيرًا لَقِيَ الْعَدُوَّ فَصَدَقَ اللَّهَ حَتَّى قُتِلَ فَذَاكَ فِي الدَّرَجَةِ الرَّابِعَةِ

हमें [याह्या बिन इसहाक] ने बताया है हमें [इब्न लाहिआ] ने [अथो बिन दीनार] से [अबू यजीद अल खौलानी] से बताया है उन्होंने कहा; मैंने [फदलल्लाह बिन उबैद] को कहते सुना; मैंने [उमर बिन अल खत्थब] को कहते सुना; मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना; "चार शहीद हुए; एक आदमी जो मोमिन था जो अपने ईमान में अच्छा था, एक दुश्मन से मिला और वह अल्लाह के प्रति ईमानदार था और मारा गया, वह वह व्यक्ति है जिसे लोगों ने इस तरह देखा," और अल्लाह के रसूल ने अपना सिर तब तक ऊपर उठाया जब तक कि रसूलुल्लाह का सिर का टुकड़ा या उमर का सिर का टुकड़ा गिर नहीं गया; "दूसरा वह मोमिन आदमी है जो दुश्मन से ऐसे मिलता है जैसे उसकी पीठ पर पेड़ का कांटा लग गया हो, उसे कोई भटका हुआ तीर चुभ जाए और फिर वह मारा जाए, वह दूसरे लेवल का इंसान है, और तीसरा वह मोमिन आदमी है जो अपने अच्छे कामों को अपने बुरे कामों के साथ मिलाता है फिर दुश्मन से मिलता है और अल्लाह अज़्ज़ा वजल्ला के लिए ईमानदारी से काम करता है जब तक कि वह मारा नहीं जाता," रसूलुल्लाह ने कहा: "वह तीसरे लेवल का इंसान है, और चौथा वह मोमिन आदमी है जिसने अपने साथ बहुत गलत काम किए हैं फिर दुश्मन से मिलता है और अल्लाह के साथ ईमानदारी से काम करता है जब तक कि वह मारा नहीं जाता, तो वह चौथे लेवल का इंसान है।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने युद्ध के दौरान एक बार वुज़ू किया

इमाम अहमद : 146

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ غَيْلَانَ حَدَّثَنَا رِشْدِينُ بْنُ سَعْدٍ حَدَّثَنِي أَبُو عَبْدِ اللَّهِ الْغَافِقِيُّ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ تَوَضَّأَ عَامَ تَبُوكَ وَاحِدَةً وَاحِدَةً

हमें [याह्या बिन घैलन] ने बताया है, हमें [रिस्यदीन बिन साद] ने बताया है कि मुझे [अबू अब्दुल्लाह अल ग़ाफ़िकी] ने [ज़ैद बिन असलम] से [अपने पिता] से [उमर बिन अल ख़त्थाब] से अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से बताया है, कि उन्होंने एक बार तबूक की लड़ाई में वुज़ू किया था।

मक्का के निवासियों के संबंध में पैगंबर शालल्लाहु अलैहि वसल्लम की खबर

इमाम अहमद : 147

حَدَّثَنَا حَسَنٌ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا أَبُو الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ سَيَخْرُجُ أَهْلُ مَكَّةَ ثُمَّ لَا يَعْبُرُ بِهَا أَوْ لَا يَعْرِفُهَا إِلَّا قَلِيلٌ ثُمَّ تَمْتَلِئُ وَتُبْنَى ثُمَّ يَخْرُجُونَ مِنْهَا فَلَا يَعُودُونَ فِيهَا أَبَدًا

हमें [हसन] ने बताया है, हमें [इब्न लाहिआ] ने हमें [अबू अज़ ज़ुबैर] ने [जाबिर] से बताया है कि [उमर बिन अल ख़त्थाब] ने उन्हें बताया, कि उन्होंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को यह कहते हुए सुना: "मक्का के लोग बाहर आएंगे और फिर उसके पास से नहीं गुजरेंगे या इसके बारे में कुछ नहीं जानेंगे, सिवाय कुछ लोगों के, फिर वह भर जाएगा और जागृत हो जाएगा, फिर वे उससे बाहर आ जाएंगे और हमेशा के लिए वापस नहीं लौटेंगे।"

पैगम्बर शाल्लाहु अलैहि वसल्लम का अपूर्ण वुज़ू दोहराने का आदेश

इमाम अहमद : 148

حَدَّثَنَا الْحَسَنُ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا أَبُو الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأَى رَجُلًا تَوَضَّأَ لِصَلَاةِ الظُّهْرِ فَتَرَكَ مَوْضِعَ ظُفُرٍ عَلَى ظَهْرِ قَدَمِهِ فَأَبْصَرَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ ارْجِعْ فَأَحْسِنْ وُضُوءَكَ فَرَجَعَ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ صَلَّى

हमें बताया है [अल हसन] हमें बताया है [इब्न लाहिआ] हमें बताया है [अबू अज़ ज़ुबैर] ने [जाबिर] से कि [उमर बिन अल ख़त्थाब] ने उनसे कहा है, कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने एक आदमी को ज़ुहर की नमाज़ के लिए वुज़ू करते देखा, फिर उसने अपने पैर का एक हिस्सा नाखून के आकार का छोड़ दिया (धोया नहीं), फिर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उसे देखा और कहा: "दोहराओ! और अपना वुज़ू पूरा करो" तो आदमी ने अपना वुज़ू दोहराया और फिर नमाज़ पढ़ी।

पैगंबर ईसा की खेती पर रोक

इमाम अहमद : 149

حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ قَالَ زَعَمَ الزُّهْرِيُّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تُطْرُونِي كَمَا أَطْرَتْ النَّصَارَى عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ عَلَيْهِ السَّلَام فَإِنَّمَا أَنَا عَبْدُ اللَّهِ وَرَسُولُهُ

हमसे [हुसैय्यम] रिवायत है कि उन्होंने कहा; [अज़ ज़ुहरी] ने [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबा बिन मसूद] से [इब्न अब्बास] से [उमर] से रिवायत किया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मेरी इबादत मत करो जैसे ईसाई ईसा बिन मरियम की इबादत करते हैं, मैं तो बस अल्लाह और उसके रसूल का बंदा हूँ।"

पैगम्बर शाल्लाहु अलैहि वसल्लम की याद दिलाते हुए पढ़ते हुए ऊपर न देखें

इमाम अहमद : 150

حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَنْبَأَنَا أَبُو بِشْرٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ نَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُتَوَارٍ بِمَكَّةَ { وَلَا تَجْهَرْ بِصَلَاتِكَ وَلَا تُخَافِتْ بِهَا } قَالَ كَانَ إِذَا صَلَّى بِأَصْحَابِهِ رَفَعَ صَوْتَهُ بِالْقُرْآنِ قَالَ فَلَمَّا سَمِعَ ذَلِكَ الْمُشْرِكُونَ سَبُّوا الْقُرْآنَ وَمَنْ أَنْزَلَهُ وَمَنْ جَاءَ بِهِ فَقَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لِنَبِيِّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ { وَلَا تَجْهَرْ بِصَلَاتِكَ } أَيْ بِقِرَاءَتِكَ فَيَسْمَعَ الْمُشْرِكُونَ فَيَسُبُّوا الْقُرْآنَ { وَلَا تُخَافِتْ بِهَا } عَنْ أَصْحَابِكَ فَلَا تُسْمِعُهُمْ الْقُرْآنَ حَتَّى يَأْخُذُوهُ عَنْكَ { وَابْتَغِ بَيْنَ ذَلِكَ سَبِيلًا }

हमें [हुसैय्यम] ने हमें [अबू बिसीर] ने [सईद बिन जुबैर] से बताया है [इब्न अब्बास] से उन्होंने कहा; यह आयत तब उतरी जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मक्का में छिपे हुए थे; "और अपनी नमाज़ में अपनी आवाज़ ऊँची न करो और इसे कम न करो," (क्यूएस अल इसरो 'आयत 110), इब्न अब्बास ने कहा; पहले, जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने साथियों का नेतृत्व करते हुए नमाज़ पढ़ी, तो उन्होंने ज़ोर से कुरान पढ़ा, फिर जब बहुदेववादियों ने पाठ सुना, तो उन्होंने कुरान पर, इसे भेजने वाले और इसे लाने वाले पैगंबर पर शाप दिया, फिर अल्लाह ने अपने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा: "और अपनी नमाज़ में अपनी आवाज़ ऊँची न करो।" इसका मतलब है कि आपका पढ़ना बहुदेववादियों द्वारा सुना जाएगा; "और अपने साथियों से इसे तुच्छ न समझो, ताकि कुरान उन्हें न सुनाई पड़े, फिर वे इसे तुमसे ले लें, और इसे उन दोनों के बीच करो।"

उमर ने पत्थरबाजी की सजा लागू करने को मंजूरी दी

इमाम अहमद : 151

حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَنْبَأَنَا عَلِيُّ بْنُ زَيْدٍ عَنْ يُوسُفَ بْنِ مِهْرَانَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ خَطَبَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَالَ هُشَيْمٌ مَرَّةً خَطَبَنَا فَحَمِدَ اللَّهَ تَعَالَى وَأَثْنَى عَلَيْهِ فَذَكَرَ الرَّجْمَ فَقَالَ لَا تُخْدَعُنَّ عَنْهُ فَإِنَّهُ حَدٌّ مِنْ حُدُودِ اللَّهِ تَعَالَى أَلَا إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ رَجَمَ وَرَجَمْنَا بَعْدَهُ وَلَوْلَا أَنْ يَقُولَ قَائِلُونَ زَادَ عُمَرُ فِي كِتَابِ اللَّهِ مَا لَيْسَ مِنْهُ لَكَتَبْتُهُ فِي نَاحِيَةٍ مِنْ الْمُصْحَفِ شَهِدَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَالَ هُشَيْمٌ مَرَّةً وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ وَفُلَانٌ وَفُلَانٌ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ رَجَمَ وَرَجَمْنَا مِنْ بَعْدِهِ أَلَا وَإِنَّهُ سَيَكُونُ مِنْ بَعْدِكُمْ قَوْمٌ يُكَذِّبُونَ بِالرَّجْمِ وَبِالدَّجَّالِ وَبِالشَّفَاعَةِ وَبِعَذَابِ الْقَبْرِ وَبِقَوْمٍ يُخْرَجُونَ مِنْ النَّارِ بَعْدَمَا امْتَحَشُوا

हमें [हुसैय्यम] ने बताया है हमें [अली बिन ज़ैद] [यूसुफ बिन मिहरान] से [इब्न अब्बास] से उन्होंने कहा; [उमर ने उपदेश दिया], -हुसैय्यम ने कहा; एक बार उमर ने हमें उपदेश दिया - फिर अल्लाह तआला की प्रशंसा की और पवित्र किया फिर पत्थर मारने के कानून का उल्लेख किया, और कहा; "इससे मूर्ख मत बनो, क्योंकि वास्तव में यह अल्लाह तआला के कानूनों में से एक है, जान लें कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पत्थर मारने का कानून लागू किया है, इसलिए हमने भी उनके बाद पत्थर मारने का कानून लागू किया। अगर (मुझे चिंता नहीं है) लोग कहेंगे कि उमर ने अल्लाह की किताब में वह जोड़ा जो उससे नहीं था, तो मैं निश्चित रूप से इसे मुशफ के कोने में लिखूंगा, उमर बिन खत्थब ने गवाही दी है।" एक अन्य अवसर पर हुसैय्यम ने कहा; [अब्दुर्रहमान बिन औफ], ऐसा-वैसा, कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पत्थर मारने का नियम लागू किया और हमने अल्लाह के रसूल के बाद पत्थर मारने का नियम लागू किया, जान लो कि तुम्हारे बाद ऐसे लोग होंगे जो पत्थर मारने के नियम, दज्जाल के होने, सयाफ़ात, कब्र की यातना और ऐसे लोगों के होने से इनकार करेंगे जो जहन्नम की आग से झुलस जाने के बाद निकाले जाएंगे।

उमर को भगवान ने तीन चीज़ों में मंज़ूर किया था

इमाम अहमद : 152

حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَنْبَأَنَا حُمَيْدٌ عَنْ أَنَسٍ قَالَ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَافَقْتُ رَبِّي فِي ثَلَاثٍ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَوْ اتَّخَذْنَا مِنْ مَقَامِ إِبْرَاهِيمَ مُصَلًّى فَنَزَلَتْ { وَاتَّخِذُوا مِنْ مَقَامِ إِبْرَاهِيمَ مُصَلًّى } وَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ نِسَاءَكَ يَدْخُلُ عَلَيْهِنَّ الْبَرُّ وَالْفَاجِرُ فَلَوْ أَمَرْتَهُنَّ أَنْ يَحْتَجِبْنَ فَنَزَلَتْ آيَةُ الْحِجَابِ وَاجْتَمَعَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نِسَاؤُهُ فِي الْغَيْرَةِ فَقُلْتُ لَهُنَّ { عَسَى رَبُّهُ إِنْ طَلَّقَكُنَّ أَنْ يُبْدِلَهُ أَزْوَاجًا خَيْرًا مِنْكُنَّ } قَالَ فَنَزَلَتْ كَذَلِكَ

हुमैद ने हमें बताया है कि उन्होंने अनस से कहा; उमर ने कहा; मैंने तीन चीज़ों में अपने रब की बात मानी है; मैंने कहा; "ऐ अल्लाह के रसूल, अगर हम मक़ाम इब्राहीम को नमाज़ की जगह बना दें," तो आयत उतरी; "और इब्राहीम के मक़ाम का एक हिस्सा नमाज़ की जगह बना दें" (QS अल बक़रा: 125)। मैंने कहा; "ऐ अल्लाह के रसूल, अगर आप अपनी बीवियों को हिजाब पहनने का हुक्म देंगे, तो उनके पास अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोग आएंगे।" तो हिजाब वाली आयत उतरी। और आखिर में रसूलल्लाह की बीवियां भी उनसे जलती थीं, तो मैंने उनसे कहा; "अगर पैगंबर तुम्हें तलाक़ दे दें, तो शायद उनका रब उनकी जगह तुमसे बेहतर बीवी रख दे," उन्होंने कहा; "तो ऐसी ही एक आयत उतरी (QS अत तहरीम: 5)।"

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)

इमाम अहमद : 153

حَدَّثَنَا عَبْدُ الْأَعْلَى بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى عَنْ مَعْمَرٍ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنِ الْمِسْوَرِ بْنِ مَخْرَمَةَ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَمِعْتُ هِشَامَ بْنَ حَكِيمِ بْنِ حِزَامٍ يَقْرَأُ سُورَةَ الْفُرْقَانِ فَقَرَأَ فِيهَا حُرُوفًا لَمْ يَكُنْ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَقْرَأَنِيهَا قَالَ فَأَرَدْتُ أَنْ أُسَاوِرَهُ وَهُوَ فِي الصَّلَاةِ فَلَمَّا فَرَغَ قُلْتُ مَنْ أَقْرَأَكَ هَذِهِ الْقِرَاءَةَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قُلْتُ كَذَبْتَ وَاللَّهِ مَا هَكَذَا أَقْرَأَكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخَذْتُ بِيَدِهِ أَقُودُهُ فَانْطَلَقْتُ بِهِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّكَ أَقْرَأْتَنِي سُورَةَ الْفُرْقَانِ وَإِنِّي سَمِعْتُ هَذَا يَقْرَأُ فِيهَا حُرُوفًا لَمْ تَكُنْ أَقْرَأْتَنِيهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اقْرَأْ يَا هِشَامُ فَقَرَأَ كَمَا كَانَ قَرَأَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَكَذَا أُنْزِلَتْ ثُمَّ قَالَ اقْرَأْ يَا عُمَرُ فَقَرَأْتُ فَقَالَ هَكَذَا أُنْزِلَتْ ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ الْقُرْآنَ نَزَلَ عَلَى سَبْعَةِ أَحْرُفٍ

हमें [अब्दुल अ'ला बिन अब्दुल अ'ला] को [म'मार] से [अज़ ज़ुहरी] से [उरवाह बिन अज़ ज़ुबैर] से [अल मिस्वर बिन मखराम] से बताया गया है कि [उमर बिन अल ख़त्थब] ने कहा; मैंने हिसाम बिन हकीम बिन हिज़ाम को अल फुरकान पढ़ते हुए सुना, फिर उन्होंने एक ऐसा पाठ पढ़ा जो उन्हें नबीउल्लाह ने कभी नहीं पढ़ा था, इसलिए मैं नमाज़ पढ़ते समय उनका सिर खींचना चाहता था, इसलिए जब उन्होंने नमाज़ समाप्त की तो मैंने पूछा; "आपके लिए इस तरह कौन पढ़ता है?" उन्होंने उत्तर दिया; "रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम।" मैंने कहा; "आप झूठ बोल रहे हैं, अल्लाह की कसम, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आपके लिए इस तरह नहीं पढ़ा।" फिर मैंने उनका हाथ पकड़ा और मैं उन्हें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास ले गया और मैंने उनसे कहा; "ऐ अल्लाह के रसूल, आपने असल में हमें अल फुरकून का खत पढ़कर सुनाया और मैंने उन्हें अल फुरकून का खत ऐसे पढ़ते सुना जैसा आपने हमें नहीं पढ़ा।" तो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "पढ़ो, ऐ हिशाम।" तो उन्होंने जैसे-जैसे पढ़ा, वैसे-वैसे पढ़ा, फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "ऐसे ही उन्हें भेजा गया था।" फिर उन्होंने कहा: "पढ़ो, ऐ उमर।" तो मैंने पढ़ा, फिर उन्होंने कहा: "ऐसे ही उन्हें भेजा गया था।" फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "ज़रूर कुरान सात अक्षरों में उतारा गया था।"

पैगंबर शालल्लाहु अलैहि वसल्लम की स्थायी भूख की सादगी

इमाम अहमद : 154

حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ الْهَيْثَمِ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ عَنْ عُمَرَ قَالَ لَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَلْتَوِي مَا يَجِدُ مَا يَمْلَأُ بِهِ بَطْنَهُ مِنْ الدَّقَلِ

[अमरू बिन अल हैतसम] ने हमें [स्यूबा] से [सिमक बिन हर्ब] से [अन नुमान बिन बसीर] से [उमर] से बताया है कि उन्होंने कहा; मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पेट में मरोड़ उठते देखा है क्योंकि उन्हें कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिससे उनका पेट भर सके, यहाँ तक कि सूखी खजूर भी नहीं।

उमर को तीन चीजों में भगवान ने मंजूरी दी थी, जिसमें हिजाब और तलाक कानून भी शामिल था

इमाम अहमद : 155

حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ عَنْ حُمَيْدٍ عَنْ أَنَسٍ قَالَ قَالَ عُمَرُ وَافَقْتُ رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ فِي ثَلَاثٍ أَوْ وَافَقَنِي رَبِّي فِي ثَلَاثٍ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَوْ اتَّخَذْتَ الْمَقَامَ مُصَلًّى قَالَ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { وَاتَّخِذُوا مِنْ مَقَامِ إِبْرَاهِيمَ مُصَلًّى } وَقُلْتُ لَوْ حَجَبْتَ عَنْ أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ فَإِنَّهُ يَدْخُلُ عَلَيْكَ الْبَرُّ وَالْفَاجِرُ فَأُنْزِلَتْ آيَةُ الْحِجَابِ قَالَ وَبَلَغَنِي عَنْ أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ شَيْءٌ فَاسْتَقْرَيْتُهُنَّ أَقُولُ لَهُنَّ لَتَكُفُّنَّ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ لَيُبْدِلَنَّهُ اللَّهُ بِكُنَّ أَزْوَاجًا خَيْرًا مِنْكُنَّ مُسْلِمَاتٍ حَتَّى أَتَيْتُ عَلَى إِحْدَى أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ فَقَالَتْ يَا عُمَرُ أَمَا فِي رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا يَعِظُ نِسَاءَهُ حَتَّى تَعِظَهُنَّ فَكَفَفْتُ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { عَسَى رَبُّهُ إِنْ طَلَّقَكُنَّ أَنْ يُبْدِلَهُ أَزْوَاجًا خَيْرًا مِنْكُنَّ مُسْلِمَاتٍ مُؤْمِنَاتٍ قَانِتَاتٍ } الْآيَةَ

हमें [इब्न अबू अदी] ने [हुमैद] से [अनस] से बताया है कि उन्होंने कहा; [उमर] ने कहा; मैंने अपने रब की आज्ञा का पालन किया या मेरे रब ने मुझसे तीन बातों में सहमति जताई; मैंने कहा; "ऐ अल्लाह के रसूल, अगर तुम मक़ाम इब्राहीम को नमाज़ की जगह बनाओ, तो अल्लाह ने आयत उतारी; "और मक़ाम इब्राहीम के एक हिस्से को नमाज़ की जगह बनाओ", (QS अल बक़रोह आयत 125)। मैंने कहा; "ऐ अल्लाह के रसूल, अगर तुम उम्मत-उल-मुनियों (अल्लाह के रसूल की पत्नियों) को हिजाब पहनाओ, क्योंकि तुम्हारे पास आने वाले कुछ लोग अच्छे हैं और कुछ बुरे।" फिर हिजाब वाली आयत उतारी गई। वह कहते हैं; "और आखिर में मुझे उम्मत-उल-मुकमिनिन से खबर मिली कि अल्लाह के रसूल की पत्नियाँ एक साथ उनसे जलती हैं, तो मैंने उनसे कहा: "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से जलना बंद करो, वरना अल्लाह सच में तुम्हारी जगह ऐसी मुस्लिम पत्नियाँ ला देगा जो तुमसे बेहतर हैं।" तो मैं एक उम्मत-उल-मुकमिनिन से मिला, तो उसने कहा: "ऐ उमर, क्या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरफ से उनकी पत्नियों के लिए कोई सलाह नहीं है जब तक कि तुम उन्हें सलाह न दो?" तो मैं रुक गया, फिर अल्लाह ने आयत बताई: "अगर पैगंबर ने तुम्हें तलाक दे दिया, तो शायद उनका रब उनकी जगह तुमसे बेहतर पत्नी ला देगा जो आज्ञा मानने वाली, ईमान लाने वाली, आज्ञा मानने वाली, तौबा करने वाली हो।" (QS अत तहरीम आयत 5)।

पैगम्बर शाल्लाहु अलैहि वसल्लम को उमरा करने की याद दिलाना

इमाम अहमद : 156

حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ أَنَّ يَحْيَى بْنَ أَبِي كَثِيرٍ حَدَّثَهُ عَنْ عِكْرِمَةَ مَوْلَى ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقُولُ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ بِالْعَقِيقِ يَقُولُ أَتَانِي اللَّيْلَةَ آتٍ مِنْ رَبِّي فَقَالَ صَلِّ فِي هَذَا الْوَادِي الْمُبَارَكِ وَقُلْ عُمْرَةٌ فِي حَجَّةٍ قَالَ الْوَلِيدُ يَعْنِي ذَا الْحُلَيْفَةِ

हमें [अल वालिद बिन मुस्लिम] ने बताया है कि [याह्या बिन अबी कसीर] ने उन्हें [इब्न अब्बास के गुलाम इक्रीमा] से बताया है, उन्होंने कहा; मैंने [इब्न अब्बास] को कहते सुना; मैंने [उमर बिन अल खत्थब] को कहते सुना; मैंने रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना जब वह अक़ीक की घाटी में थे: "कल रात मेरे रब की तरफ से कोई मेरे पास आया और कहा; 'इस मुबारक घाटी में नमाज़ पढ़ो, और कहो; हज के लिए उमराह'" वालिद ने कहा; "यह ज़ुल्हुलैफ़ा है।"

कुछ वस्तुओं के आदान-प्रदान में ब्याज प्रावधान

इमाम अहमद : 157

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنِ الزُّهْرِيِّ سَمِعَ مَالِكَ بْنَ أَوْسِ بْنِ الْحَدَثَانِ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ سُفْيَانُ مَرَّةً سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الذَّهَبُ بِالْوَرِقِ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ وَالْبُرُّ بِالْبُرِّ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ وَالشَّعِيرُ بِالشَّعِيرِ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ وَالتَّمْرُ بِالتَّمْرِ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ

हमें [सुफ़यान] ने [अज़ ज़ुहरी] से बताया है कि उसने [मलिक बिन औस बिन अल हदत्सन] को [उमर बिन अल खत्थब] को यह कहते सुना; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: - एक और मौके पर सुफ़यान ने कहा; "उमर ने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: - "सोना (चांदी के बदले) रिबा है जब तक कि कैश न हो, गेहूं (गेहूं के बदले) रिबा है जब तक कि कैश न हो, खजूर (खजूर के बदले) रिबा है जब तक कि कैश न हो।"

ऐदुल फितरी और ऐदुल अज़हा के दिनों में रोज़ा रखने की मनाही

इमाम अहमद : 158

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنِ الزُّهْرِيِّ سَمِعَ أَبَا عُبَيْدٍ قَالَ شَهِدْتُ الْعِيدَ مَعَ عُمَرَ فَبَدَأَ بِالصَّلَاةِ قَبْلَ الْخُطْبَةِ وَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ صِيَامِ هَذَيْنِ الْيَوْمَيْنِ أَمَّا يَوْمُ الْفِطْرِ فَفِطْرُكُمْ مِنْ صَوْمِكُمْ وَأَمَّا يَوْمُ الْأَضْحَى فَكُلُوا مِنْ لَحْمِ نُسُكِكُمْ

हमें [सुफ़यान] ने [अज़ ज़ुहरी] से बताया है कि उसने [अबू उबैद] को यह कहते हुए सुना; मैंने [उमर] के साथ 'ऐद' की नमाज़ पढ़ी, फिर उन्होंने खुतबे से पहले नमाज़ शुरू की और कहा; "बेशक, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इन दो दिनों में रोज़ा रखने से मना किया है। जहाँ तक ऐदुल फ़ित्र का दिन है, वह वह दिन है जब तुम अपना रोज़ा तोड़ते हो, और ऐदुल अज़हा के दिन, अपनी कुर्बानी का मांस खाओ।"

पैगंबर ईश्वर द्वारा भेजे गए सामान्य लोग हैं

इमाम अहमद : 159

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تُطْرُونِي كَمَا أَطْرَتْ النَّصَارَى عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ عَلَيْهِ السَّلَام فَإِنَّمَا أَنَا عَبْدٌ فَقُولُوا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ

हमें [सुफ़यान] ने [अज़ ज़ुहरी] से [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबा] से [इब्न अब्बास] से [उमर] से बताया है; उन्होंने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मेरी पूजा मत करो जैसे ईसाई मरियम के बेटे ईसा की पूजा करते हैं, मैं केवल एक सेवक हूं, इसलिए अपने सेवकों और रसूलों से कहो।"

पैगंबर शल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम को जुनूब की हालत में सोने से पहले वुज़ू करने का आदेश दिया गया है

इमाम अहमद : 160

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ أَنَّهُ سَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيَنَامُ أَحَدُنَا وَهُوَ جُنُبٌ قَالَ يَتَوَضَّأُ وَيَنَامُ إِنْ شَاءَ وَقَالَ سُفْيَانُ مَرَّةً لِيَتَوَضَّأْ وَلْيَنَمْ

हमें [सुफ़यान] को [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [इब्न उमर] से [उमर] तक बताया गया है कि उन्होंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा; "क्या हममें से कोई जुनुब होने पर भी सो सकता है?" पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: "अगर वह चाहे तो वुज़ू करे फिर सो जाए।" एक और मौके पर सुफ़यान ने कहा; "वुज़ू करे और फिर सो जाए।"