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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ahmad (الامام احمد) - 26363 Hadith

Hadith

Imam Ahmad : 121

حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ الْخُزَاعِيُّ أَنْبَأَنَا لَيْثٌ وَيُونُسُ حَدَّثَنَا لَيْثٌ عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أُسَامَةَ بْنِ الْهَادِ عَنِ الْوَلِيدِ بْنِ أَبِي الْوَلِيدِ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ يَعْنِي ابْنَ سُرَاقَةَ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ أَظَلَّ رَأْسَ غَازٍ أَظَلَّهُ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَمَنْ جَهَّزَ غَازِيًا حَتَّى يَسْتَقِلَّ كَانَ لَهُ مِثْلُ أَجْرِهِ حَتَّى يَمُوتَ قَالَ قَالَ يُونُسُ أَوْ يَرْجِعَ وَمَنْ بَنَى لِلَّهِ مَسْجِدًا يُذْكَرُ فِيهِ اسْمُ اللَّهِ تَعَالَى بَنَى اللَّهُ لَهُ بِهِ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ

हमरा सब के कहलक अछि [अबू सलामाह अल खुजाई] हमरा सब के [लैट्स] के [यजीद बिन अब्दुल्लाह बिन उसामाह बिन अल हद] स [अल वलीद बिन अबुल वालिद] स [उस्मान बिन अब्दुल्लाह यानी इब्न सुरकाह] स [उमर बिन अल खथथब] स कहलक अछि, ओ कहलनि; हम सुनलहुँ जे रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत छथि : 'जे कियो योद्धा के माथ के आश्रय देत, अल्लाह ओकर रक्षा कयामत के दिन करत, जे कियो योद्धा के उपकरण तैयार करत जाहि स ओकर इंतजाम भ सकय, तखन ओकरा लेल ई योद्धा के इनाम जेकाँ होयत जाबत तक ओकर मृत्यु नै भ जायत'। [योना] कहलनि; 'या जाबे तक ओ वापस नै आबि जायत, आ जे कियो अल्लाह के लेल मस्जिद नै बनाओत, जेकरा में अल्लाह तआला के नाम लिखल छै, तखन अल्लाह ओकरा लेल स्वर्ग में घर बना देत'।

Hadith

Imam Ahmad : 122

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ سُلَيْمَانَ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقٍ عَنْ سَلْمَانَ بْنِ رَبِيعَةَ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ قَسَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قِسْمَةً فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَغَيْرُ هَؤُلَاءِ أَحَقُّ مِنْهُمْ أَهْلُ الصُّفَّةِ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّكُمْ تُخَيِّرُونِي بَيْنَ أَنْ تَسْأَلُونِي بِالْفُحْشِ وَبَيْنَ أَنْ تُبَخِّلُونِي وَلَسْتُ بِبَاخِلٍ

हमरा सब के [अफ्फान] हमरा सब के [अबू अवानाह] के [सुलेमान अल अ'मासी] स [स्याकिक] स [सलमान बिन रबियाह] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [उमर] केँ कहैत सुनलहुँ; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बँटवारा बँटवारा केलनि, तें हम कहलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, सचमुच हुनका सब के अलावा दोसर लोक के बेसी अधिकार छैन्ह, यानी अहलुश शुफ्फाह!' तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलनि: 'सत्ते अहाँ हमरा दू टा विकल्प देने छी; अहाँ हमरासँ जबरदस्ती पूछब आ हमरा कंजूस मानब बीच, आ हम कंजूस नहि छी'।

Hadith

Imam Ahmad : 123

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا خَالِدٌ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي زِيَادٍ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدَ الْحَدَثِ تَوَضَّأَ وَمَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ

हमरा सब के [अफ्फान] हमरा सब के [खालिद] के [यजीद बिन अबू जियाद] स [‘अशिम बिन उबैदिल्लाह] स [अपन पिता] स [अपन दादा] स [उमर बिन अल खथथब] स कहलक अछि, ओ कहलनि; 'हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हदात केलाक बाद देखलहुं, ओ वजूद क' रहल छलाह आ दुनू खुफ पोछि रहल छलाह'.

Hadith

Imam Ahmad : 124

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ أَبِي رَافِعٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ كَانَ مُسْتَنِدًا إِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ وَعِنْدَهُ ابْنُ عُمَرَ وَسَعِيدُ بْنُ زَيْدٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا فَقَالَ اعْلَمُوا أَنِّي لَمْ أَقُلْ فِي الْكَلَالَةِ شَيْئًا وَلَمْ أَسْتَخْلِفْ مِنْ بَعْدِي أَحَدًا وَأَنَّهُ مَنْ أَدْرَكَ وَفَاتِي مِنْ سَبْيِ الْعَرَبِ فَهُوَ حُرٌّ مِنْ مَالِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فَقَالَ سَعِيدُ بْنُ زَيْدٍ أَمَا إِنَّكَ لَوْ أَشَرْتَ بِرَجُلٍ مِنْ الْمُسْلِمِينَ لَأْتَمَنَكَ النَّاسُ وَقَدْ فَعَلَ ذَلِكَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَأْتَمَنَهُ النَّاسُ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَدْ رَأَيْتُ مِنْ أَصْحَابِي حِرْصًا سَيِّئًا وَإِنِّي جَاعِلٌ هَذَا الْأَمْرَ إِلَى هَؤُلَاءِ النَّفَرِ السِّتَّةِ الَّذِينَ مَاتَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ عَنْهُمْ رَاضٍ ثُمَّ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لَوْ أَدْرَكَنِي أَحَدُ رَجُلَيْنِ ثُمَّ جَعَلْتُ هَذَا الْأَمْرَ إِلَيْهِ لَوَثِقْتُ بِهِ سَالِمٌ مَوْلَى أَبِي حُذَيْفَةَ وَأَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِ

हमरा सब के ['अफ्फान] कहल गेल अछि जे हमरा सब के [हम्मद बिन सलामाह] के [अली बिन जैद] स [अबू रफी'] स कहल गेल अछि जे उमर इब्न अब्बास पर झुकल छलाह जखन कि हुनकर कात में इब्नू उमर आ सईद बिन जैद छलाह, तखन ओ कहलनि; 'अहाँ केँ बुझल अछि, वास्तव मे हम कलाला के मामला मे कोनो राय नहि व्यक्त करैत छी, आ हम हमरा बाद खलीफा के नियुक्ति नहि करैत छी, वास्तव मे जे अरब दास मे सँ जे हमरा मृत्युक समय हमरा पाबि लेत, ओ अल्लाह केर संपत्ति सँ मुक्त भ' जायत'। त सईद बिन जैद कहलनि; 'अहाँ जँ कोनो मुसलमान केँ नहि नियुक्त केने रहितहुँ त' लोक अहाँ पर विश्वास करैत, जेना अबू बकर केने छलाह आ लोक हुनका पर विश्वास करैत छल?' अस्तु [उमर] उत्तर देलनि; 'हम अपन मित्रक खराब महत्वाकांक्षा देखलहुँ अछि, तेँ हम ई मामला ओहि छह गोटेक हाथ मे सौंपलहुँ जे जखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केर मृत्यु भ' गेलाह तखन हुनका सभ सँ प्रसन्न छलाह'। तखन उमर बजलाह; 'जँ एहि दुनू आदमी मे सँ एक गोटे हमरा सँ भेंट करैत छथि आ तखन हम ई बात हुनका सौंपैत छी तखन हम हुनका सौंपैत छी; सलीम अबू हुदजाइफा आ अबू उबैदा बिन जर्राह' के नौकर छलाह |

Hadith

Imam Ahmad : 125

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ حَدَّثَنِي أَبُو الْعَالِيَةِ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ شَهِدَ عِنْدِي رِجَالٌ مَرْضِيُّونَ فِيهِمْ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَأَرْضَاهُمْ عِنْدِي عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا صَلَاةَ بَعْدَ الصُّبْحِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ وَلَا صَلَاةَ بَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ

हमरा सब के कहलक [अफ्फान] हमरा सब के कहलक [हम्माम] हमरा सब के कहलक [कतादा] हमरा [अबुल अलियाह] के [इब्न अब्बास] स कहलक ओ कहलक; 'हम अपन समक्ष बरनत पुरुषक गवाही देने छी, ओहि मे [उमर], आ जिनका सँ हमरा सबसँ बेसी प्रसन्नता अछि ओ छथि उमर, जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'सुबह के नमाज के बाद नमाज नहि होइत अछि जाबत धरि सूर्य नहि उगैत अछि, आ दुपहरक नमाज के बाद कोनो नमाज नहि होइत अछि जाबत धरि सूर्यास्त नहि भ' जाइत अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 126

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ خُثَيْمٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَكَبَّ عَلَى الرُّكْنِ فَقَالَ إِنِّي لَأَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ وَلَوْ لَمْ أَرَ حَبِيبِي صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبَّلَكَ وَاسْتَلَمَكَ مَا اسْتَلَمْتُكَ وَلَا قَبَّلْتُكَ وَ { لَقَدْ كَانَ لَكُمْ فِي رَسُولِ اللَّهِ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ }

हमरा सब के कहलक अछि ['अफ्फान] हमरा सब के कहलक अछि [वुहैब] हमरा सब के [अब्दुल्लाह बिन उस्मान बिन खुतईम] के [सैद बिन जुबैर] स [श्रीमती अब्बास] स कहलक अछि जे [उमर बिन अल खथथब] ब्लैक स्टोन के चुम्मा लेलक तखन कहलक; 'सत्ते, हम जनैत छी जे अहाँ पाथर छी, जँ हम अपन प्रेमी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ अहाँ केँ चुम्मा लैत आ रगड़ैत नहि देखितहुँ त' हम निश्चित रूप सँ अहाँ केँ रगड़ैत आ चुम्मा नहि लैतहुँ, आ सचमुच अल्लाह केर रसूलुल्लाह मे एकटा नीक रोल मॉडल छल।'

Hadith

Imam Ahmad : 127

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ أَنْبَأَنَا عَمَّارُ بْنُ أَبِي عَمَّارٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأَى فِي يَدِ رَجُلٍ خَاتَمًا مِنْ ذَهَبٍ فَقَالَ أَلْقِ ذَا فَأَلْقَاهُ فَتَخَتَّمَ بِخَاتَمٍ مِنْ حَدِيدٍ فَقَالَ ذَا شَرٌّ مِنْهُ فَتَخَتَّمَ بِخَاتَمٍ مِنْ فِضَّةٍ فَسَكَتَ عَنْهُ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [अफ्फान] हमरा सभकेँ कहलक अछि [हम्मद] हमरा सभकेँ [अम्मर बिन अबू अम्मार]केँ कहलक अछि जे [उमर बिन अल खथथब] कहलनि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एकटा आदमी के हाथ पर सोनाक अंगूठी देखलनि, तखन ओ कहलनि: 'फेंक दियौक - ओ चीज!' तेँ फेकि देलकै, तखन लोहाक बनल अंगूठी पहिरलकै, तेँ कहलकै: ‘ई त’ ओहि सँ बेसी खराब छै’ तखन चानीक बनल अंगूठी पहिरलकै तेँ ओकरा चुप क’ देलकै।

Hadith

Imam Ahmad : 128

حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ عَمْرٍو حَدَّثَنَا زَائِدَةُ حَدَّثَنَا عَاصِمٌ وَحُسَيْنُ بْنُ عَلِيٍّ عَنْ زَائِدَةَ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ زِرٍّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ لَمَّا قُبِضَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ الْأَنْصَارُ مِنَّا أَمِيرٌ وَمِنْكُمْ أَمِيرٌ فَأَتَاهُمْ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ يَا مَعْشَرَ الْأَنْصَارِ أَلَسْتُمْ تَعْلَمُونَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ أَمَرَ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنْ يَؤُمَّ النَّاسَ فَأَيُّكُمْ تَطِيبُ نَفْسُهُ أَنْ يَتَقَدَّمَ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَتْ الْأَنْصَارُ نَعُوذُ بِاللَّهِ أَنْ نَتَقَدَّمَ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [मुअवियाह बिन अमरू] हमरा सभकेँ [जैदाह] हमरा सभकेँ [अशिम] आ [हुसैन बिन अली]केँ कहलक अछि, [जैदाह]सँ [अशिम]सँ [जिरर]सँ [अब्दुल्लाह]सँ ओ कहलनि; जखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मृत्यु भ गेलैन त अंसार के लोक कहलक; 'हमरा सभ मे सँ नेता आ अहाँ सभक बीच सँ नेता'। अस्तु [उमर] हुनका लोकनिक लग आबि कहलनि; 'हे अंसार के लोग, की तोरा सब के ई नै पता छै कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ अबू बकर के आदेश देल॑ छेलै कि वू लोगऽ के नेतृत्व करै, त॑ अबू बकर के आगू बढ़ै लेली ओकरऽ आत्मा में के शांत छै?' तेँ अंसारक लोक सभ उत्तर देलक; 'हम अबू बकर स आगू बढ़बा स अल्लाह स शरण लैत छी'।

Hadith

Imam Ahmad : 129

حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ دَاوُدَ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ رَأَى رَجُلًا تَوَضَّأَ لِلصَّلَاةِ فَتَرَكَ مَوْضِعَ ظُفُرٍ عَلَى ظَهْرِ قَدَمِهِ فَأَبْصَرَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ ارْجِعْ فَأَحْسِنْ وُضُوءَكَ فَرَجَعَ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ صَلَّى

हमरा सब के [मूसा बिन दाउद] हमरा सब के [इब्न लहिअह] के [अबू अज़ जुबैर] स [जाबीर] स कहने छथि जे [उमर बिन अल खथथब] हुनका रिपोर्ट केलनि, जे ओ एकटा आदमी के नमाज के लेल वज़ूद बनबैत देखलनि, फेर हुनकर पैर के तलवा पर नाखून के आकार के नाखून के आकार छोड़ि देलखिन, आ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका देखलनि, ओ कहलनि: 'पाछू जाउ आ अपन वजूद पूरा करू'। तेँ ओ घुरि कऽ वजूद केलनि तखन नमाज पढ़लनि |

Hadith

Imam Ahmad : 130

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ مَوْلَى بَنِي هَاشِمٍ حَدَّثَنَا الْهَيْثَمُ بْنُ رَافِعٍ الطَّاطَرِيُّ بَصْرِيٌّ حَدَّثَنِي أَبُو يَحْيَى رَجُلٌ مِنْ أَهْلِ مَكَّةَ عَنْ فَرُّوخَ مَوْلَى عُثْمَانَ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَهُوَ يَوْمَئِذٍ أَمِيرُ الْمُؤْمِنِينَ خَرَجَ إِلَى الْمَسْجِدِ فَرَأَى طَعَامًا مَنْثُورًا فَقَالَ مَا هَذَا الطَّعَامُ فَقَالُوا طَعَامٌ جُلِبَ إِلَيْنَا قَالَ بَارَكَ اللَّهُ فِيهِ وَفِيمَنْ جَلَبَهُ قِيلَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ فَإِنَّهُ قَدْ احْتُكِرَ قَالَ وَمَنْ احْتَكَرَهُ قَالُوا فَرُّوخُ مَوْلَى عُثْمَانَ وَفُلَانٌ مَوْلَى عُمَرَ فَأَرْسَلَ إِلَيْهِمَا فَدَعَاهُمَا فَقَالَ مَا حَمَلَكُمَا عَلَى احْتِكَارِ طَعَامِ الْمُسْلِمِينَ قَالَا يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ نَشْتَرِي بِأَمْوَالِنَا وَنَبِيعُ فَقَالَ عُمَرُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ احْتَكَرَ عَلَى الْمُسْلِمِينَ طَعَامَهُمْ ضَرَبَهُ اللَّهُ بِالْإِفْلَاسِ أَوْ بِجُذَامٍ فَقَالَ فَرُّوخُ عِنْدَ ذَلِكَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ أُعَاهِدُ اللَّهَ وَأُعَاهِدُكَ أَنْ لَا أَعُودَ فِي طَعَامٍ أَبَدًا وَأَمَّا مَوْلَى عُمَرَ فَقَالَ إِنَّمَا نَشْتَرِي بِأَمْوَالِنَا وَنَبِيعُ قَالَ أَبُو يَحْيَى فَلَقَدْ رَأَيْتُ مَوْلَى عُمَرَ مَجْذُومًا

हमरा सब के कहने छथि [बनी हाशिम के गुलाम अबू सईद] हमरा सब के [बसराह के अल हैतसम बिन रफी' अथ थथरी] हमरा सब के [मक्का के एक आदमी अबू याह्या] के [फररुख, उस्मान के नौकर] स कहने छथि, जे [उमर] जखन अमीरुल मुकमिनिन छलाह, तखन ओ मस्जिद में बाहर आबि भोजन के चारू कात छिड़ियाएल देखलनि, तें ओ पुछलकै; 'ई की भोजन अछि ?' ओ सभ उत्तर देलथिन; 'जे भोजन हमरा सभ लग आनल गेल छल,' ओ कहलनि; ‘अल्लाह एहि भोजन आ जे व्यक्ति अनने छल, ओकरा पर बरकत देथिन,’ तखन कियो कहलक; ‘हे अमीरुल मुकमिनिन, भोजन जमा भ’ गेलै,’ उमर पुछलकै; 'के जमा केने अछि ?' ओ सभ उत्तर देलथिन; ‘फररुख उस्मान के नौकर छै आ फुलान उमर के नौकर छै,’ तें उमर दुनू गोटे के बजाबय लेल दूत पठौलनि, तखन कहलनि; 'अहाँ दुनू गोटे केँ मुस्लिम भोजनक जमाखोरी करबाक लेल की प्रेरित केलक?' दुनू गोटे उत्तर देलनि; 'हे अमीरुल मुकमिनिन, हम सब अपन धन स कीनैत छी आ बेचैत छी'। तेँ उमर उत्तर देलनि; 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने रही: 'जे मुसलमान के धन जमा करत, अल्लाह ओकरा दिवालियापन या कोढ़ के शिकार करत,' तखन फर्रुख कहलनि; 'हे अमीरुल मुकमिनिन, हम अल्लाह आ अहाँ सँ वादा करैत छी जे भोजन जमा करब हमेशा लेल दोहराब' नहि करब'। रहल बात उमर के नौकर के त ओ कहलनि; 'हम सभ बस अपन धनसँ कीनैत छी आ बेचैत छी'। अबू याह्या कहलनि; 'तखन देखलहुँ जे उमरक नोकर कोढ़सँ पीड़ित छल ।'

Hadith

Imam Ahmad : 131

حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَنْبَأَنَا شُعَيْبٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ حَدَّثَنَا سَالِمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ يَقُولُ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعْطِينِي الْعَطَاءَ فَأَقُولُ أَعْطِهِ أَفْقَرَ إِلَيْهِ مِنِّي حَتَّى أَعْطَانِي مَرَّةً مَالًا فَقُلْتُ أَعْطِهِ أَفْقَرَ إِلَيْهِ مِنِّي فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خُذْهُ فَتَمَوَّلْهُ وَتَصَدَّقْ بِهِ فَمَا جَاءَكَ مِنْ هَذَا الْمَالِ وَأَنْتَ غَيْرُ مُشْرِفٍ وَلَا سَائِلٍ فَخُذْهُ وَمَا لَا فَلَا تُتْبِعْهُ نَفْسَكَ حَدَّثَنَا هَارُونُ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ يَقُولُ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعْطِينِي الْعَطَاءَ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ

हमरा सब के कहलक अछि [अबू यमन] हमरा सब के [स्यूअइब] के [अज जुहरी] स कहलक अछि हमरा सब के [सलीम बिन अब्दुल्लाह] के कहलक अछि जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] कहलनि; हम [उमर] केँ कहैत सुनलहुँ; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा एकटा उपहार देलनि, तेँ हम कहलियनि; 'बस हमरा स बेसी जरूरत वाला लोक के द दियौक'। जाबे एक दिन ओ हमरा सम्पत्ति देलक आ हम कहलियैक; 'बस हमरा स बेसी जरूरत वाला लोक के द दियौक'। त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन्ह : धन के लऽ कऽ विकसित करू - निवेश करू - तखन ओहि मे निवेश करू । जे किछु एहि धन सँ अहाँ लग अबैत अछि आ अहाँ एकर आशा नहि केने रही आ नहि माँगलहुँ, तखन ल' लिअ, आ जँ एहन नहि अछि तखन ओकरा अपन दावा नहि करू'। हमरा सभकेँ [हारून] हमरा सभकेँ कहलक अछि [इब्न वहाब] हमरा [यूनुस]केँ [इब्न शिहाब]सँ [सलीम]सँ [अपन पिता]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; हम [उमर] केँ कहैत सुनलहुँ; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा एकटा वरदान देलनि,’ तखन ओ हदीसक अर्थ बतौलनि।

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Imam Ahmad : 132

حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ حَدَّثَنَا لَيْثٌ حَدَّثَنِي بُكَيْرٌ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ سَعِيدٍ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ هَشَشْتُ يَوْمًا فَقَبَّلْتُ وَأَنَا صَائِمٌ فَأَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ صَنَعْتُ الْيَوْمَ أَمْرًا عَظِيمًا فَقَبَّلْتُ وَأَنَا صَائِمٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرَأَيْتَ لَوْ تَمَضْمَضْتَ بِمَاءٍ وَأَنْتَ صَائِمٌ قُلْتُ لَا بَأْسَ بِذَلِكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَفِيمَ

हमरा सब के कहलक अछि [हज्जाज] हमरा सब के कहलक अछि [लैट्स] हमरा [बुकाइर] के [अब्दुल मलिक बिन सईद अल अंसारी] स [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] स [उमर बिन अल खथथब] स कहलक अछि ओ कहलनि; एक दिन हम तरसैत रही आ हमर इच्छा उठल तखन हम रोजा रहितो चुम्मा लेलहुँ, तेँ हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लग आबि गेलहुँ आ हम कहलियनि; 'आइ हम बड़ गलती केलौं, रोजा रहितो चुम्मा लेलौं', नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: 'अहाँ सब के की लगैत अछि जे अहाँ रोजा राखब आ फेर मुँह कुल्ला करब?' हम उत्तर देलियनि; 'से कहियो बात नहि'। तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: तखन समस्या कतय अछि?

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Imam Ahmad : 133

حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا دَاوُدُ يَعْنِي ابْنَ أَبِي الْفُرَاتِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِي الْأَسْوَدِ أَنَّهُ قَالَ أَتَيْتُ الْمَدِينَةَ فَوَافَيْتُهَا وَقَدْ وَقَعَ فِيهَا مَرَضٌ فَهُمْ يَمُوتُونَ مَوْتًا ذَرِيعًا فَجَلَسْتُ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَمَرَّتْ بِهِ جَنَازَةٌ فَأُثْنِيَ عَلَى صَاحِبِهَا خَيْرًا فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَجَبَتْ ثُمَّ مُرَّ بِأُخْرَى فَأُثْنِيَ عَلَى صَاحِبِهَا خَيْرًا فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَجَبَتْ ثُمَّ مُرَّ بِالثَّالِثَةِ فَأُثْنِيَ عَلَيْهَا شَرًّا فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَجَبَتْ فَقَالَ أَبُو الْأَسْوَدِ مَا وَجَبَتْ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ قَالَ قُلْتُ كَمَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيُّمَا مُسْلِمٍ شَهِدَ لَهُ أَرْبَعَةٌ بِخَيْرٍ أَدْخَلَهُ اللَّهُ الْجَنَّةَ قَالَ فَقُلْنَا وَثَلَاثَةٌ قَالَ فَقَالَ وَثَلَاثَةٌ قَالَ قُلْنَا وَاثْنَانِ قَالَ وَاثْنَانِ قَالَ ثُمَّ لَمْ نَسْأَلْهُ عَنْ الْوَاحِدِ

हमरा सब के [यूनुस बिन मुहम्मद] हमरा सब के [दाउद अर्थात इब्नू अबिल फुराथ] के [अब्दुल्लाह बिन बुराइदा] स [अबुल असवद] स कहलक अछि जे ओ कहलनि; हम मदीना आयल रही, जखन ओतय पहुँचलहुं त प्रत्यक्षतः महामारी चलि रहल छल, लोक दयनीय हालत में मरि रहल छल, तें जखन हम [उमर बिन अल खथथब] के बगल में बैसलहुं त लाश ओहि ठाम सं गुजरि गेल आ लाश के नीक सं प्रशंसा भेल, तखन उमर कहलनि; 'अनिवार्य' तखन एकटा आओर लाश ओहि ठाम सं गुजरि गेल आ लाशक प्रशंसा दयालुता सं भेल, तखन उमर कहलनि; 'अनिवार्य' तखन तेसर लाश गुजरि गेल आ लाशक कुरूपताक खुलासा भेल, तखन उमर बजलाह; 'अनिवार्य' अंततः अबुल असवद पुछलखिन; 'अमीरुल मुक्मिनिन, फर्ज के की मतलब छै?' उमर जबाब देलकै; 'हम कहलियनि जेना अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'कोनो मुसलमान जकरा चारि गोटे भलाईक संग गवाह बनत, तखन अल्लाह ओकरा स्वर्ग मे राखि देत' हम पुछलियनि; 'तीन गोटे जँ की हेतै?' ओ उत्तर देलनि: ‘तीन गोटे सेहो’ हम फेर पुछलियनि; 'दू गोटे जँ की हेतै?' ओ उत्तर देलथिन; 'दू गोटे सेहो'। तखन हम सभ ओकरासँ नहि पुछैत छी जे एक व्यक्ति जँ की हेतैक'।

Hadith

Imam Ahmad : 134

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا بُكَيْرٌ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ عُمَرَ قَالَ غَزَوْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي رَمَضَانَ وَالْفَتْحَ فِي رَمَضَانَ فَأَفْطَرْنَا فِيهِمَا

हमरा सभकेँ [अबू सईद] हमरा सभकेँ कहलक अछि [इब्न लहिअह] हमरा सभकेँ [बुकाइर] [सैद बिन अल मुसैयब]सँ [उमर]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; 'हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ रमजान के महीना में लड़लौं, आ रमजान के महीना में मक्का शहर पर विजय के दौरान, आ दुनू अवसर पर रोजा तोड़लौं'।

Hadith

Imam Ahmad : 135

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ مَوْلَى بَنِي هَاشِمٍ حَدَّثَنَا الْمُثَنَّى بْنُ عَوْفٍ الْعَنَزِيُّ بَصْرِيٌّ قَالَ أَنْبَأَنَا الْغَضْبَانُ بْنُ حَنْظَلَةَ أَنَّ أَبَاهُ حَنْظَلَةَ بْنَ نُعَيْمٍ وَفَدَ إِلَى عُمَرَ فَكَانَ عُمَرُ إِذَا مَرَّ بِهِ إِنْسَانٌ مِنْ الْوَفْدِ سَأَلَهُ مِمَّنْ هُوَ حَتَّى مَرَّ بِهِ أَبِي فَسَأَلَهُ مِمَّنْ أَنْتَ فَقَالَ مِنْ عَنَزَةَ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ حَيٌّ مِنْ هَاهُنَا مَبْغِيٌّ عَلَيْهِمْ مَنْصُورُونَ

हमरा सब के कहलक अछि [बनी हाशिम के गुलाम अबू सैद] हमरा सब के कहलक अछि [बसराह के अल मुत्सन्ना बिन औफ अल अनाजी] ओ कहलनि; हमरा सब [अल गद्लबान बिन हंझाला] के सूचित केने छथि जे हुनकर पिता अर्थात हंझाला बिन नुअइम उमर के दूत छलाह, आ [उमर] के जखन कोनो दूत आयल त ओ ओहि व्यक्ति सं पूछलखिन्ह; ‘कोन दूतक छथि’ जाबत अंततः हमर पिताक बारी आबि गेलनि आ ओ हुनकासँ पुछलनि; 'अहाँ कोन दूतक छी ?' तेँ ओ उत्तर देलथिन। ''अनाजा' सँ ओ कहलनि; 'हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छलहुं: 'एहि इलाका के गाम सब के हमेशा मदद मिलैत अछि अगर ओकरा पर अत्याचार कयल जाइत अछि'.

Hadith

Imam Ahmad : 136

حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ أَبِي حَبِيبٍ عَنْ مَعْمَرٍ أَنَّهُ سَأَلَ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ عَنْ الصِّيَامِ فِي السَّفَرِ فَحَدَّثَهُ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ غَزَوْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَزْوَتَيْنِ فِي شَهْرِ رَمَضَانَ يَوْمَ بَدْرٍ وَيَوْمَ الْفَتْحِ فَأَفْطَرْنَا فِيهِمَا

हमरा सभकेँ कहलक अछि [हसन बिन मूसा] हमरा सभकेँ [इब्न लहिआह] कहने अछि ओ कहलनि; हमरा सब के [यजीद बिन अबू हबीब] के [मा'मार] स कहने छथि जे ओ [सईद बिन मुसैयब] स यात्रा के समय रोजा के बारे में पूछने छलाह, ताहि लेल ओ हुनका [उमर बिन अल खथथब] स कहलखिन, जे ओ कहलनि; 'हम सब रमजान के महीना में दू बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग लड़लहुं, अर्थात बदर के लड़ाई आ मक्का शहर पर विजय, फेर ओहि युद्ध के दौरान रोजा तोड़लहुं'।

Hadith

Imam Ahmad : 137

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا دَيْلَمُ بْنُ غَزْوَانَ عَبْدِيٌّ حَدَّثَنَا مَيْمُونٌ الْكُرْدِيُّ حَدَّثَنِي أَبُو عُثْمَانَ النَّهْدِيُّ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ أَخْوَفَ مَا أَخَافُ عَلَى أُمَّتِي كُلُّ مُنَافِقٍ عَلِيمِ اللِّسَانِ

हमरा सब [अबू सईद] के कहल गेल अछि जे हमरा सब के [दैलम बिन गज़वान] एक अब्द कहल गेल अछि, हमरा सब के [मैमुन अल कुर्दी] कहल गेल अछि जे हमरा [अबू उस्मान अन नहदी] के [उमर बिन अल खथथब] स कहल गेल अछि जे रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'सत्ते, जे हमरा हमर उम्मा स सबस बेसी डर अछि, ओ सब अछि पाखंडी जे जीह सँ चतुर होइत अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 138

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا صَالِحُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ زَائِدَةَ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّهُ كَانَ مَعَ مَسْلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الْمَلِكِ فِي أَرْضِ الرُّومِ فَوُجِدَ فِي مَتَاعِ رَجُلٍ غُلُولٌ فَسَأَلَ سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ فَقَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ وَجَدْتُمْ فِي مَتَاعِهِ غُلُولًا فَأَحْرِقُوهُ قَالَ وَأَحْسَبُهُ قَالَ وَاضْرِبُوهُ قَالَ فَأَخْرَجَ مَتَاعَهُ فِي السُّوقِ قَالَ فَوَجَدَ فِيهِ مُصْحَفًا فَسَأَلَ سَالِمًا فَقَالَ بِعْهُ وَتَصَدَّقْ بِثَمَنِهِ

हमरा सब के कहलक अछि [अबू सईद] हमरा सब के बता देने अछि [अब्दुल अजीज बिन मुहम्मद] हमरा सब के [सलीह बिन मुहम्मद बिन ज़ैदाह] के [सलीम बिन अब्दुल्लाह] स कहलक अछि जे ओ रोमन दुनिया में मसलमाह बिन अब्दुल मलिक के संग छल, फेर एकटा गुलुल आदमी के खजाना में भेटल -युद्ध के लूटपाट स सामान चोरी केलक-, फेर मसलमाह बिन अब्दुल मलिक पूछलक सलीम बिन अब्दुल्ला, सलीम बिन अब्दुल्ला जवाब देलनि; हमरा [अब्दुल्लाह] के [उमर] स कहल गेल छल जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छलाह : 'जेकरा सम्पत्ति मे अहाँ सब के पास गुलुल के सामान अछि, ओकरा जरा दियौक'। उमर बजलाह; 'हमरा लागल जे ओ कहलनि: 'आ मारि दियौक' सालिह बाजल; 'तखन मसलमाह ओहि आदमीक सम्पत्ति बजार ल' गेल'। सालिह बाजल; 'आ ओकरा ओहि मे मुशफ भेटलैक, तखन ओ सलीम सँ पुछलकै, आ ओ उत्तर देलकैक; 'बेच क' जे आमदनी होइत छैक से दान मे दियौक'।

Hadith

Imam Ahmad : 139

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ وَحُسَيْنُ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَتَعَوَّذُ مِنْ خَمْسٍ مِنْ الْبُخْلِ وَالْجُبْنِ وَفِتْنَةِ الصَّدْرِ وَعَذَابِ الْقَبْرِ وَسُوءِ الْعُمُرِ

हमरा सब के कहल गेल अछि जे [अबू सईद] आ [हुसैन बिन मुहम्मद] दुनू गोटे कहलनि; हमरा सब [इजरायल] के [अबू इशक] स [अमरू बिन मैमुन] स [उमर] स कहल गेल अछि, जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पांच चीज स शरण लेलथि; 'नटखट, कायर, फितनातुश शदर -पश्चाताप स पहिने मरि गेल-, कबर आ खराब उम्र के यातना के स्वभाव स'।

Hadith

Imam Ahmad : 140

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ قَالَ سَمِعْتُ عَطَاءَ بْنَ دِينَارٍ عَنْ أَبِي يَزِيدَ الْخَوْلَانِيِّ أَنَّهُ سَمِعَ فَضَالَةَ بْنَ عُبَيْدٍ يَقُولُ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الشُّهَدَاءُ ثَلَاثَةٌ رَجُلٌ مُؤْمِنٌ جَيِّدُ الْإِيمَانِ لَقِيَ الْعَدُوَّ فَصَدَقَ اللَّهَ حَتَّى قُتِلَ فَذَلِكَ الَّذِي يَرْفَعُ إِلَيْهِ النَّاسُ أَعْنَاقَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَرَفَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأْسَهُ حَتَّى وَقَعَتْ قَلَنْسُوَتُهُ أَوْ قَلَنْسُوَةُ عُمَرَ وَرَجُلٌ مُؤْمِنٌ جَيِّدُ الْإِيمَانِ لَقِيَ الْعَدُوَّ فَكَأَنَّمَا يُضْرَبُ جِلْدُهُ بِشَوْكِ الطَّلْحِ أَتَاهُ سَهْمٌ غَرْبٌ فَقَتَلَهُ هُوَ فِي الدَّرَجَةِ الثَّانِيَةِ وَرَجُلٌ مُؤْمِنٌ جَيِّدُ الْإِيمَانِ خَلَطَ عَمَلًا صَالِحًا وَآخَرَ سَيِّئًا لَقِيَ الْعَدُوَّ فَصَدَقَ اللَّهَ حَتَّى قُتِلَ فَذَلِكَ فِي الدَّرَجَةِ الثَّالِثَةِ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [अबू सईद] हमरा सभकेँ [इब्न लहिआह] कहलक अछि ओ कहलनि; ['अथो` बिन दिनार] के [अबू यजीद अल खौलानी] स सुनलौं जे ओ [फदलालाह बिन उबैद] के कहैत सुनलौं; हम [उमर बिन अल खथथब] के सुनलहुं जे ओ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छलाह: ‘तीन गोटे शहीद भेलाह; एक मुसलमान आदमी जे अपनऽ ईमान म॑ अच्छा छै, ओकरा एगो दुश्मन स॑ मिलै छै आरू ओकरा बाद वू अल्लाह के साथ ईमानदार रहै छै जब॑ तलक ओकरा नै मारलऽ जाय छै, तखनिये कयामत के दिन लोगऽ न॑ ओकरा देखै लेली अपनऽ गर्दन क्रेन करी लेतै,’ आरू अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वस्ल्लम न॑ भी ओकरऽ गर्दन तानलकै, जब॑ तलक कि ओकरऽ खोपड़ी के टोपी नै गिरी गेलै या उमर के खोपड़ी के टोपी गिरी नै गेलै, ‘आरू एक ईमानदार आदमी जे अपनऽ ईमान म॑ अच्छा छेलै, ओकरा स॑ मिललै दुश्मन जेना ओकर चमड़ा गाछक काँटसँ मारल गेल हो , ओकरा आवारा बाणसँ घुसि गेल आ मारल गेल , तखन मारल गेल | स्वर्ग दोसर स्तर पर अछि। आरू जे मुसलमान केरऽ ईमान अच्छा छै, जेकरऽ अच्छा काम बुरा कामऽ म॑ मिलाबै छै, वू दुश्मन स॑ मिलै छै आरू ओकरा बाद अल्लाह के साथ ईमानदारी स॑ काम करै छै जब॑ तलक ओकरा नै मारलऽ जाय छै, तखनिये वू तेसरऽ स्तर प॑ स्वर्ग म॑ रहतै' ।