इमाम अहमद : 121
حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ الْخُزَاعِيُّ أَنْبَأَنَا لَيْثٌ وَيُونُسُ حَدَّثَنَا لَيْثٌ عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أُسَامَةَ بْنِ الْهَادِ عَنِ الْوَلِيدِ بْنِ أَبِي الْوَلِيدِ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ يَعْنِي ابْنَ سُرَاقَةَ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ أَظَلَّ رَأْسَ غَازٍ أَظَلَّهُ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَمَنْ جَهَّزَ غَازِيًا حَتَّى يَسْتَقِلَّ كَانَ لَهُ مِثْلُ أَجْرِهِ حَتَّى يَمُوتَ قَالَ قَالَ يُونُسُ أَوْ يَرْجِعَ وَمَنْ بَنَى لِلَّهِ مَسْجِدًا يُذْكَرُ فِيهِ اسْمُ اللَّهِ تَعَالَى بَنَى اللَّهُ لَهُ بِهِ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ
हमें बताया है [अबू सलामह अल खुज़ाई] ने हमें बताया है [लैट्स] [यज़ीद बिन अब्दुल्लाह बिन उसामा बिन अल हद] से [अल वालिद बिन अबुल वालिद] से [उथमन बिन अब्दुल्लाह यानी इब्न सुराका] से [उमर बिन अल खत्थब] से, उन्होंने कहा; मैंने रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए सुना: "जो कोई योद्धा के सिर को आश्रय देता है, अल्लाह उसे पुनरुत्थान के दिन आश्रय देगा, जो कोई भी योद्धा का सामान तैयार करता है ताकि उसे प्रदान किया जा सके, तो उसके लिए यह एक योद्धा के पुरस्कार की तरह होगा जब तक कि वह मर न जाए।" [योना] ने कहा; "या जब तक वह वापस न आ जाए, और जो कोई अल्लाह के लिए एक मस्जिद बनाए जिसका नाम उसमें अल्लाह तआला का उल्लेख है, तो अल्लाह उसके लिए स्वर्ग में एक घर बनाएगा।"
इमाम अहमद : 122
حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ سُلَيْمَانَ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقٍ عَنْ سَلْمَانَ بْنِ رَبِيعَةَ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ قَسَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قِسْمَةً فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَغَيْرُ هَؤُلَاءِ أَحَقُّ مِنْهُمْ أَهْلُ الصُّفَّةِ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّكُمْ تُخَيِّرُونِي بَيْنَ أَنْ تَسْأَلُونِي بِالْفُحْشِ وَبَيْنَ أَنْ تُبَخِّلُونِي وَلَسْتُ بِبَاخِلٍ
हमें [अफ़्फ़ान] ने बताया है, हमें [अबू अवाना] ने [सुलेमान अल अमासी] से [स्याक़िक] से [सलमान बिन रबीअह] से बताया है, उन्होंने कहा; मैंने [उमर] को कहते सुना; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बँटवारा किया, तो मैंने कहा; "अल्लाह के रसूल, बेशक उनके अलावा दूसरे लोगों के ज़्यादा हक़ हैं, यानी अहलुश शुफ़्फ़ा!" तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: "बेशक आपने मुझे दो ऑप्शन दिए हैं: या तो आप मुझसे ज़बरदस्ती माँगें या या आप मुझे कंजूस समझें, और मैं कंजूस नहीं हूँ।"
इमाम अहमद : 123
حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا خَالِدٌ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي زِيَادٍ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدَ الْحَدَثِ تَوَضَّأَ وَمَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ
हमें [अफ्फान] ने बताया है कि हमें [खालिद] ने [यज़ीद बिन अबू ज़ियाद] से [आशिम बिन उबैदिल्लाह] से [अपने पिता] से [अपने दादा] से [उमर बिन अल ख़त्थाब] से बताया है, उन्होंने कहा; "मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा कि उन्होंने वुज़ू किया और दोनों ख़ुफ़ों पर मसह किया।"
इमाम अहमद : 124
حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ أَبِي رَافِعٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ كَانَ مُسْتَنِدًا إِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ وَعِنْدَهُ ابْنُ عُمَرَ وَسَعِيدُ بْنُ زَيْدٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا فَقَالَ اعْلَمُوا أَنِّي لَمْ أَقُلْ فِي الْكَلَالَةِ شَيْئًا وَلَمْ أَسْتَخْلِفْ مِنْ بَعْدِي أَحَدًا وَأَنَّهُ مَنْ أَدْرَكَ وَفَاتِي مِنْ سَبْيِ الْعَرَبِ فَهُوَ حُرٌّ مِنْ مَالِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فَقَالَ سَعِيدُ بْنُ زَيْدٍ أَمَا إِنَّكَ لَوْ أَشَرْتَ بِرَجُلٍ مِنْ الْمُسْلِمِينَ لَأْتَمَنَكَ النَّاسُ وَقَدْ فَعَلَ ذَلِكَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَأْتَمَنَهُ النَّاسُ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَدْ رَأَيْتُ مِنْ أَصْحَابِي حِرْصًا سَيِّئًا وَإِنِّي جَاعِلٌ هَذَا الْأَمْرَ إِلَى هَؤُلَاءِ النَّفَرِ السِّتَّةِ الَّذِينَ مَاتَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ عَنْهُمْ رَاضٍ ثُمَّ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لَوْ أَدْرَكَنِي أَحَدُ رَجُلَيْنِ ثُمَّ جَعَلْتُ هَذَا الْأَمْرَ إِلَيْهِ لَوَثِقْتُ بِهِ سَالِمٌ مَوْلَى أَبِي حُذَيْفَةَ وَأَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِ
हमें [अफ्फान] बताया गया है कि हमें [हम्मद बिन सलमा] [अली बिन जैद] से [अबू रफी] से बताया गया है कि उमर इब्न अब्बास पर झुके हुए थे, जबकि उनके साथ इब्नु उमर और सईद बिन जैद थे, फिर उन्होंने कहा; "आप जानते हैं, वास्तव में मैं कलालत के मामले में कोई राय व्यक्त नहीं करता, और मैं अपने बाद किसी खलीफ़ा को नियुक्त नहीं करता, वास्तव में जो भी अरब गुलामों में से मुझे मेरी मृत्यु के समय मिल जाएगा, वह अल्लाह के खजाने से मुक्त हो जाएगा।" तो सईद बिन जैद ने कहा; "यदि आपने मुसलमानों में से किसी को नियुक्त नहीं किया होता, तो क्या लोग आप पर विश्वास करते, जैसा कि अबू बकर ने किया और लोगों ने उन पर विश्वास किया?" तो [उमर] ने उत्तर दिया; "मैंने अपने दोस्तों की बुरी महत्वाकांक्षाओं को देखा है, इसलिए मैंने इस मामले को उन छह लोगों को सौंप दिया, जो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मृत्यु के बाद उनसे प्रसन्न थे।" तब उमर ने कहा; "अगर इन दो आदमियों में से कोई मुझसे मिलता है तो मैं यह मामला उसे सौंप देता हूँ; सलीम, अबू हुदज़ैफ़ा का नौकर और अबू उबैदा बिन जर्राह।"
इमाम अहमद : 125
حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ حَدَّثَنِي أَبُو الْعَالِيَةِ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ شَهِدَ عِنْدِي رِجَالٌ مَرْضِيُّونَ فِيهِمْ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَأَرْضَاهُمْ عِنْدِي عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا صَلَاةَ بَعْدَ الصُّبْحِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ وَلَا صَلَاةَ بَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ
हमें बताया है [अफ़्फ़ान] हमें बताया है [हम्माम] हमें बताया है [क़तादा] मुझे बताया है [अबुल अलियाह] [इब्न अब्बास] से उसने कहा; "मैंने अपने से पहले धन्य लोगों की गवाही दी है, उनमें से [उमर], और जिनमें से मैं सबसे अधिक प्रसन्न हूं वह उमर हैं, कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "सुबह की प्रार्थना के बाद सूरज उगने तक कोई प्रार्थना नहीं है, और दोपहर की प्रार्थना के बाद सूरज डूबने तक कोई प्रार्थना नहीं है।"
इमाम अहमद : 126
حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ خُثَيْمٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَكَبَّ عَلَى الرُّكْنِ فَقَالَ إِنِّي لَأَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ وَلَوْ لَمْ أَرَ حَبِيبِي صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبَّلَكَ وَاسْتَلَمَكَ مَا اسْتَلَمْتُكَ وَلَا قَبَّلْتُكَ وَ { لَقَدْ كَانَ لَكُمْ فِي رَسُولِ اللَّهِ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ }
हमें [अफ़्फ़ान] ने बताया है, हमें [वुहैब] ने बताया है, हमें [अब्दुल्ला बिन उस्मान बिन खुत्सैम] ने [सईद बिन जुबैर] से [इबू अब्बास] से बताया है कि [उमर बिन अल ख़त्थाब] ने काले पत्थर को चूमा और फिर कहा; "वास्तव में मुझे पता है कि तुम एक पत्थर हो, अगर मैंने अपने प्रिय सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को तुम्हें चूमते और रगड़ते हुए नहीं देखा होता, तो मैंने तुम्हें रगड़ा और चूमा नहीं होता, और वास्तव में अल्लाह के रसूल में एक अच्छा उदाहरण था।"
इमाम अहमद : 127
حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ أَنْبَأَنَا عَمَّارُ بْنُ أَبِي عَمَّارٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأَى فِي يَدِ رَجُلٍ خَاتَمًا مِنْ ذَهَبٍ فَقَالَ أَلْقِ ذَا فَأَلْقَاهُ فَتَخَتَّمَ بِخَاتَمٍ مِنْ حَدِيدٍ فَقَالَ ذَا شَرٌّ مِنْهُ فَتَخَتَّمَ بِخَاتَمٍ مِنْ فِضَّةٍ فَسَكَتَ عَنْهُ
हमें बताया है [अफ़्फ़ान] ने हमें बताया है [हम्माद] ने हमें बताया है [अम्मार बिन अबू अम्मार] कि [उमर बिन अल ख़तथब] ने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक आदमी के हाथ में सोने की अंगूठी देखी, फिर उन्होंने कहा: "इसे फेंक दो!" तो उसने उसे फेंक दिया, फिर उसने लोहे की अंगूठी पहन ली, तो उसने कहा: "यह उससे भी ज़्यादा खराब है" फिर उसने चांदी की अंगूठी पहन ली तो उसने चुप हो गया।
इमाम अहमद : 128
حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ عَمْرٍو حَدَّثَنَا زَائِدَةُ حَدَّثَنَا عَاصِمٌ وَحُسَيْنُ بْنُ عَلِيٍّ عَنْ زَائِدَةَ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ زِرٍّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ لَمَّا قُبِضَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ الْأَنْصَارُ مِنَّا أَمِيرٌ وَمِنْكُمْ أَمِيرٌ فَأَتَاهُمْ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ يَا مَعْشَرَ الْأَنْصَارِ أَلَسْتُمْ تَعْلَمُونَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ أَمَرَ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنْ يَؤُمَّ النَّاسَ فَأَيُّكُمْ تَطِيبُ نَفْسُهُ أَنْ يَتَقَدَّمَ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَتْ الْأَنْصَارُ نَعُوذُ بِاللَّهِ أَنْ نَتَقَدَّمَ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ
हमें बताया है [मुअविया बिन अमरू] हमें बताया है [ज़ैदा] हमें बताया है ['आशिम] और [हुसैन बिन अली], [ज़ैदा] से ['आशिम] से [ज़िर] से [अब्दुल्ला] से उन्होंने कहा; जब रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मृत्यु हुई, तो अंसार लोगों ने कहा; "हमारे बीच में से नेता हैं और तुम्हारे बीच में से नेता हैं।" तो [उमर] उनके पास आए और कहा; "ऐ अंसार के लोगों, क्या तुम नहीं जानते कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अबू बकर को लोगों का नेतृत्व करने का आदेश दिया है, तो अबू बकर से पहले कौन अपने मन में शांत है?" तो अंसार लोगों ने उत्तर दिया; "हम अबू बकर से आगे जाने से अल्लाह की शरण लेते हैं।"
इमाम अहमद : 129
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ دَاوُدَ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ رَأَى رَجُلًا تَوَضَّأَ لِلصَّلَاةِ فَتَرَكَ مَوْضِعَ ظُفُرٍ عَلَى ظَهْرِ قَدَمِهِ فَأَبْصَرَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ ارْجِعْ فَأَحْسِنْ وُضُوءَكَ فَرَجَعَ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ صَلَّى
मूसा इब्न दाऊद ने हमें अबू अज़ ज़ुबैर से बताया कि उमर इब्न खत्तब ने उन्हें बताया कि उन्होंने एक आदमी को नमाज़ के लिए वुज़ू करते हुए देखा, फिर उसने अपने पैर के तलवे पर नाखून के बराबर एक टुकड़ा छोड़ दिया, और पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसे देखा, तो उन्होंने कहा: "वापस जाओ और अपना वुज़ू पूरा करो।" तो वह वापस गया और वुज़ू किया और फिर नमाज़ पढ़ी।
इमाम अहमद : 130
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ مَوْلَى بَنِي هَاشِمٍ حَدَّثَنَا الْهَيْثَمُ بْنُ رَافِعٍ الطَّاطَرِيُّ بَصْرِيٌّ حَدَّثَنِي أَبُو يَحْيَى رَجُلٌ مِنْ أَهْلِ مَكَّةَ عَنْ فَرُّوخَ مَوْلَى عُثْمَانَ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَهُوَ يَوْمَئِذٍ أَمِيرُ الْمُؤْمِنِينَ خَرَجَ إِلَى الْمَسْجِدِ فَرَأَى طَعَامًا مَنْثُورًا فَقَالَ مَا هَذَا الطَّعَامُ فَقَالُوا طَعَامٌ جُلِبَ إِلَيْنَا قَالَ بَارَكَ اللَّهُ فِيهِ وَفِيمَنْ جَلَبَهُ قِيلَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ فَإِنَّهُ قَدْ احْتُكِرَ قَالَ وَمَنْ احْتَكَرَهُ قَالُوا فَرُّوخُ مَوْلَى عُثْمَانَ وَفُلَانٌ مَوْلَى عُمَرَ فَأَرْسَلَ إِلَيْهِمَا فَدَعَاهُمَا فَقَالَ مَا حَمَلَكُمَا عَلَى احْتِكَارِ طَعَامِ الْمُسْلِمِينَ قَالَا يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ نَشْتَرِي بِأَمْوَالِنَا وَنَبِيعُ فَقَالَ عُمَرُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ احْتَكَرَ عَلَى الْمُسْلِمِينَ طَعَامَهُمْ ضَرَبَهُ اللَّهُ بِالْإِفْلَاسِ أَوْ بِجُذَامٍ فَقَالَ فَرُّوخُ عِنْدَ ذَلِكَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ أُعَاهِدُ اللَّهَ وَأُعَاهِدُكَ أَنْ لَا أَعُودَ فِي طَعَامٍ أَبَدًا وَأَمَّا مَوْلَى عُمَرَ فَقَالَ إِنَّمَا نَشْتَرِي بِأَمْوَالِنَا وَنَبِيعُ قَالَ أَبُو يَحْيَى فَلَقَدْ رَأَيْتُ مَوْلَى عُمَرَ مَجْذُومًا
हमें बताया है [अबू सईद, बनी हाशिम का एक गुलाम] हमें बताया है [अल हैत्सम बिन रफी' अथ थथारी ऑफ बसरा] मुझे [अबू याह्या, मक्का से एक आदमी] [फारुख, उस्मान के नौकर] से बताया है, कि [उमर] जब वह अमीरुल मुक्मिनीन था, वह मस्जिद में आया और उसने देखा कि भोजन बिखरा हुआ है, इसलिए उसने पूछा; "यह क्या भोजन है?" उन्होंने उत्तर दिया; "वह भोजन जो हमारे लिए लाया गया था," उसने कहा; "अल्लाह इस भोजन और इसे लाने वाले व्यक्ति को आशीर्वाद दे," फिर किसी ने कहा; "हे अमीरुल मुक्मिनीन, भोजन जमा कर लिया गया है," उमर ने पूछा; "इसे किसने जमा किया?" उन्होंने उत्तर दिया; "फारुख उस्मान का नौकर है और फुलान उमर का नौकर है," इसलिए उमर ने उन दोनों को बुलाने के लिए एक दूत भेजा, फिर उसने कहा; "ऐ अमीरुल मुमिनीन, हम अपने पैसे से खरीदते हैं और बेचते हैं।" तो उमर ने जवाब दिया; "मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि व सल्लम) को यह कहते सुना: "जो कोई मुसलमानों का पैसा जमा करेगा, अल्लाह उसे दिवालिया या कोढ़ से परेशान करेगा," फिर फारुख ने कहा: "ऐ अमीरुल मुमिनीन, मैं अल्लाह और आपसे वादा करता हूँ कि मैं कभी भी खाना जमा नहीं करूँगा।" उमर के नौकर के बारे में, उसने कहा; "हम सिर्फ़ अपने पैसे से खरीदते हैं और बेचते हैं।" अबू याह्या ने कहा; "फिर मैंने अपने नौकर को देखा। उमर को कोढ़ हो गया था।"
इमाम अहमद : 131
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَنْبَأَنَا شُعَيْبٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ حَدَّثَنَا سَالِمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ يَقُولُ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعْطِينِي الْعَطَاءَ فَأَقُولُ أَعْطِهِ أَفْقَرَ إِلَيْهِ مِنِّي حَتَّى أَعْطَانِي مَرَّةً مَالًا فَقُلْتُ أَعْطِهِ أَفْقَرَ إِلَيْهِ مِنِّي فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خُذْهُ فَتَمَوَّلْهُ وَتَصَدَّقْ بِهِ فَمَا جَاءَكَ مِنْ هَذَا الْمَالِ وَأَنْتَ غَيْرُ مُشْرِفٍ وَلَا سَائِلٍ فَخُذْهُ وَمَا لَا فَلَا تُتْبِعْهُ نَفْسَكَ حَدَّثَنَا هَارُونُ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ يَقُولُ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعْطِينِي الْعَطَاءَ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ
[अबू यमन] ने हमसे [स्यूऐब] को [अज़ ज़ुहरी] से वर्णित किया है [सलीम बिन अब्दुल्लाह] ने हमसे वर्णित किया कि [अब्दुल्ला बिन उमर] ने कहा; मैंने [उमर] को कहते सुना; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझे एक उपहार दिया, तो मैंने कहा; "इसे किसी ऐसे व्यक्ति को दे दो जो मुझसे अधिक जरूरतमंद हो।" जब तक कि एक दिन उन्होंने मुझे कुछ धन दिया और मैंने कहा; "इसे किसी ऐसे व्यक्ति को दे दो जो मुझसे अधिक जरूरतमंद हो।" तो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "इसे ले लो और इसमें निवेश करो और फिर इसे खर्च करो। जो कुछ भी इस धन से तुम्हारे पास आता है जिसे तुम चाहते नहीं हो या मांगते नहीं हो, तो उसे ले लो, और यदि ऐसा नहीं है, तो इसे अपना न कहो।" हमें [हारुन] ने बताया है हमें [इब्न वहाब] ने बताया है मुझे [यूनुस] ने [इब्न शिहाब] से [सलीम] से [उसके पिता] से बताया है उसने कहा; मैंने [उमर] को कहते सुना; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझे एक तोहफ़ा दिया," फिर उन्होंने हदीस का मतलब बताया।
इमाम अहमद : 132
حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ حَدَّثَنَا لَيْثٌ حَدَّثَنِي بُكَيْرٌ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ سَعِيدٍ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ هَشَشْتُ يَوْمًا فَقَبَّلْتُ وَأَنَا صَائِمٌ فَأَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ صَنَعْتُ الْيَوْمَ أَمْرًا عَظِيمًا فَقَبَّلْتُ وَأَنَا صَائِمٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرَأَيْتَ لَوْ تَمَضْمَضْتَ بِمَاءٍ وَأَنْتَ صَائِمٌ قُلْتُ لَا بَأْسَ بِذَلِكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَفِيمَ
हमें बताया है [हज्जाज] हमें बताया है [लैतस] मुझे बताया है [बुकैर] [अब्दुल मलिक बिन सईद अल अंसारी] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] से [उमर बिन अल खत्थब] से उन्होंने कहा; एक दिन मुझे चाहत हुई और मेरी इच्छा जागृत हुई, फिर मैंने उपवास के बावजूद चुंबन किया, इसलिए मैं पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आया और मैंने कहा; "आज मैंने एक बड़ी गलती की, मैंने उपवास के बावजूद चुंबन किया" तो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा: "तुम क्या सोचते हो अगर तुम उपवास करते हो और फिर अपना मुंह कुल्ला करते हो?" मैंने उत्तर दिया; "यह ठीक है।" तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "तो समस्या कहां है?"
इमाम अहमद : 133
حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا دَاوُدُ يَعْنِي ابْنَ أَبِي الْفُرَاتِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِي الْأَسْوَدِ أَنَّهُ قَالَ أَتَيْتُ الْمَدِينَةَ فَوَافَيْتُهَا وَقَدْ وَقَعَ فِيهَا مَرَضٌ فَهُمْ يَمُوتُونَ مَوْتًا ذَرِيعًا فَجَلَسْتُ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَمَرَّتْ بِهِ جَنَازَةٌ فَأُثْنِيَ عَلَى صَاحِبِهَا خَيْرًا فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَجَبَتْ ثُمَّ مُرَّ بِأُخْرَى فَأُثْنِيَ عَلَى صَاحِبِهَا خَيْرًا فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَجَبَتْ ثُمَّ مُرَّ بِالثَّالِثَةِ فَأُثْنِيَ عَلَيْهَا شَرًّا فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَجَبَتْ فَقَالَ أَبُو الْأَسْوَدِ مَا وَجَبَتْ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ قَالَ قُلْتُ كَمَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيُّمَا مُسْلِمٍ شَهِدَ لَهُ أَرْبَعَةٌ بِخَيْرٍ أَدْخَلَهُ اللَّهُ الْجَنَّةَ قَالَ فَقُلْنَا وَثَلَاثَةٌ قَالَ فَقَالَ وَثَلَاثَةٌ قَالَ قُلْنَا وَاثْنَانِ قَالَ وَاثْنَانِ قَالَ ثُمَّ لَمْ نَسْأَلْهُ عَنْ الْوَاحِدِ
हमें [यूनुस बिन मुहम्मद] ने बताया है कि [दाऊद यानी इब्नु अबिल फुराथ] ने [अब्दुल्ला बिन बुरैदा] से [अबुल असवद] से कहा कि उसने कहा; मैं मदीना आया, जब मैं वहाँ पहुँचा तो साफ़ तौर पर एक महामारी फैली हुई थी, लोग बुरी हालत में मर रहे थे, तो जब मैं [उमर बिन अल खत्थब] के पास बैठा, तो एक लाश गुज़री और लाश की अच्छाई की तारीफ़ की गई, फिर उमर ने कहा; "ज़रूरी" फिर एक और लाश गुज़री और लाश की अच्छाई की तारीफ़ की गई, फिर उमर ने कहा; "ज़रूरी" फिर तीसरी लाश गुज़री और लाश की बदसूरती सामने आई, फिर उमर ने कहा; "ज़रूरी" आखिर में अबुल असवद ने पूछा; "ज़रूरी का क्या मतलब है, ऐ अमीरुल मुकमिनीन?" उमर ने जवाब दिया; "मैंने कहा जैसा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "कोई भी मुसलमान जिसके अच्छे कामों को चार लोग देखें, तो अल्लाह उसे जन्नत में दाखिल करेगा।"
इमाम अहमद : 134
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا بُكَيْرٌ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ عُمَرَ قَالَ غَزَوْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي رَمَضَانَ وَالْفَتْحَ فِي رَمَضَانَ فَأَفْطَرْنَا فِيهِمَا
हमें [अबू सईद] ने बताया है, हमें [इब्न लाहिआ] ने बताया है [बुकैर] ने [सईद बिन अल मुसय्यब] से [उमर] से बताया है, उन्होंने कहा; "हमने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ रमज़ान के महीने में और रमज़ान के महीने में मक्का शहर की जीत के दौरान युद्ध किया, और हमने दोनों अवसरों पर उपवास तोड़ा।"
इमाम अहमद : 135
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ مَوْلَى بَنِي هَاشِمٍ حَدَّثَنَا الْمُثَنَّى بْنُ عَوْفٍ الْعَنَزِيُّ بَصْرِيٌّ قَالَ أَنْبَأَنَا الْغَضْبَانُ بْنُ حَنْظَلَةَ أَنَّ أَبَاهُ حَنْظَلَةَ بْنَ نُعَيْمٍ وَفَدَ إِلَى عُمَرَ فَكَانَ عُمَرُ إِذَا مَرَّ بِهِ إِنْسَانٌ مِنْ الْوَفْدِ سَأَلَهُ مِمَّنْ هُوَ حَتَّى مَرَّ بِهِ أَبِي فَسَأَلَهُ مِمَّنْ أَنْتَ فَقَالَ مِنْ عَنَزَةَ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ حَيٌّ مِنْ هَاهُنَا مَبْغِيٌّ عَلَيْهِمْ مَنْصُورُونَ
हमें बताया है [बनी हाशिम के गुलाम अबू सईद ने] हमें बताया है [अल मुत्सन्ना बिन औफ अल अनाज़ी ऑफ़ बसरा] उन्होंने कहा; हमें बताया है [अल ग़दलबान बिन हंजलाह] कि उनके पिता, यानी हंजलाह बिन नुआइम, उमर के पास एक संदेशवाहक थे, और [उमर] जब एक संदेशवाहक उनके पास आया तो उन्होंने उस व्यक्ति से पूछा; "वह किस संदेशवाहक से है" आखिरकार मेरे पिता की बारी आई और उन्होंने उनसे पूछा; "तुम किस संदेशवाहक से हो?" तो उन्होंने जवाब दिया; "अनाज़ा से" तो उन्होंने कहा; "मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: "इस क्षेत्र के गांवों की हमेशा मदद की जाती है यदि उन पर अत्याचार होता है।"
इमाम अहमद : 136
حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ أَبِي حَبِيبٍ عَنْ مَعْمَرٍ أَنَّهُ سَأَلَ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ عَنْ الصِّيَامِ فِي السَّفَرِ فَحَدَّثَهُ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ غَزَوْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَزْوَتَيْنِ فِي شَهْرِ رَمَضَانَ يَوْمَ بَدْرٍ وَيَوْمَ الْفَتْحِ فَأَفْطَرْنَا فِيهِمَا
हसन बिन मूसा ने हमें बताया है कि हसन बिन मुसय्यब ने हमें बताया है; यज़ीद बिन अबू हबीब ने हमें म'मार से बताया है कि उन्होंने सफ़र के दौरान सईद बिन मुसय्यब से रोज़े के बारे में पूछा, तो उन्होंने उन्हें उमर बिन अल खत्थब से बताया कि उन्होंने कहा: "हमने रमज़ान के महीने में अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) से दो बार लड़ाई की, यानी बद्र की लड़ाई और मक्का की जीत, फिर हमने उन लड़ाइयों में रोज़ा तोड़ा।"
इमाम अहमद : 137
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا دَيْلَمُ بْنُ غَزْوَانَ عَبْدِيٌّ حَدَّثَنَا مَيْمُونٌ الْكُرْدِيُّ حَدَّثَنِي أَبُو عُثْمَانَ النَّهْدِيُّ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ أَخْوَفَ مَا أَخَافُ عَلَى أُمَّتِي كُلُّ مُنَافِقٍ عَلِيمِ اللِّسَانِ
हमसे कहा है [अबू सईद] हमसे कहा है [दैलम बिन ग़ज़वान] अन अब्द, हमसे कहा है [मैमुन अल कुर्दी] मुझसे कहा है [अबू उस्मान अन नहदी] [उमर बिन अल ख़त्थाब] से कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "वास्तव में, मुझे अपनी उम्मत से सबसे ज़्यादा डर हर उस पाखंडी से है जो अपनी ज़बान से चतुराई करता है।"
इमाम अहमद : 138
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا صَالِحُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ زَائِدَةَ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّهُ كَانَ مَعَ مَسْلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الْمَلِكِ فِي أَرْضِ الرُّومِ فَوُجِدَ فِي مَتَاعِ رَجُلٍ غُلُولٌ فَسَأَلَ سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ فَقَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ وَجَدْتُمْ فِي مَتَاعِهِ غُلُولًا فَأَحْرِقُوهُ قَالَ وَأَحْسَبُهُ قَالَ وَاضْرِبُوهُ قَالَ فَأَخْرَجَ مَتَاعَهُ فِي السُّوقِ قَالَ فَوَجَدَ فِيهِ مُصْحَفًا فَسَأَلَ سَالِمًا فَقَالَ بِعْهُ وَتَصَدَّقْ بِثَمَنِهِ
हमें [अबू सईद] ने बताया है कि हमें [अब्दुल अज़ीज़ बिन मुहम्मद] ने हमें [सालिह बिन मुहम्मद बिन ज़ैदा] ने [सलीम बिन अब्दुल्ला] से बताया है कि वह रोम की दुनिया में मसलमा बिन अब्दुल मलिक के साथ था, फिर उसे एक ग़ुलुल आदमी के खजाने में (युद्ध की लूट से चुराया हुआ सामान) मिला, फिर मसलमा बिन अब्दुल मलिक ने सलीम बिन अब्दुल्ला से पूछा, सलीम बिन अब्दुल्ला ने जवाब दिया; मुझे [अब्दुल्ला] को [उमर] से बताया गया था कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा था: "जिस किसी के पास भी ग़ुलुल चीज़ें हों, उन्हें जला दो।" उमर ने कहा; "मैंने सोचा कि उसने कहा: "और उसे मारो" सालेह ने कहा; "फिर मसलमा उस आदमी का खजाना बाज़ार में ले गया।" सालेह ने कहा; "और उसे उसमें मुशफ़ मिला, फिर उसने सलीम से पूछा, और उसने जवाब दिया; "इसे बेच दो और कमाई दान कर दो।"
इमाम अहमद : 139
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ وَحُسَيْنُ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَتَعَوَّذُ مِنْ خَمْسٍ مِنْ الْبُخْلِ وَالْجُبْنِ وَفِتْنَةِ الصَّدْرِ وَعَذَابِ الْقَبْرِ وَسُوءِ الْعُمُرِ
[अबू सईद] और [हुसैन बिन मुहम्मद] दोनों ने कहा: [इज़राइल] ने हमें [अबू इसहाक] से ['अम्र बिन मैमून] से [उमर] से बताया, कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पाँच चीज़ों से पनाह मांगी: "कंजूसी, कायरता, फितनातुश सद्र (पश्चाताप से पहले मरना), कब्र की यातना और बुरा जीवन।"
इमाम अहमद : 140
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ قَالَ سَمِعْتُ عَطَاءَ بْنَ دِينَارٍ عَنْ أَبِي يَزِيدَ الْخَوْلَانِيِّ أَنَّهُ سَمِعَ فَضَالَةَ بْنَ عُبَيْدٍ يَقُولُ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الشُّهَدَاءُ ثَلَاثَةٌ رَجُلٌ مُؤْمِنٌ جَيِّدُ الْإِيمَانِ لَقِيَ الْعَدُوَّ فَصَدَقَ اللَّهَ حَتَّى قُتِلَ فَذَلِكَ الَّذِي يَرْفَعُ إِلَيْهِ النَّاسُ أَعْنَاقَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَرَفَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأْسَهُ حَتَّى وَقَعَتْ قَلَنْسُوَتُهُ أَوْ قَلَنْسُوَةُ عُمَرَ وَرَجُلٌ مُؤْمِنٌ جَيِّدُ الْإِيمَانِ لَقِيَ الْعَدُوَّ فَكَأَنَّمَا يُضْرَبُ جِلْدُهُ بِشَوْكِ الطَّلْحِ أَتَاهُ سَهْمٌ غَرْبٌ فَقَتَلَهُ هُوَ فِي الدَّرَجَةِ الثَّانِيَةِ وَرَجُلٌ مُؤْمِنٌ جَيِّدُ الْإِيمَانِ خَلَطَ عَمَلًا صَالِحًا وَآخَرَ سَيِّئًا لَقِيَ الْعَدُوَّ فَصَدَقَ اللَّهَ حَتَّى قُتِلَ فَذَلِكَ فِي الدَّرَجَةِ الثَّالِثَةِ
हमें बताया है [अबू सईद] हमें बताया है [इब्न लाहिआ] उसने कहा; मैंने [अथो बिन दीनार] को [अबू यज़ीद अल खौलानी] से सुना कि उसने [फ़दलल्लाह बिन उबैद] को कहते सुना; मैंने [उमर बिन अल खत्तहब] को सुना कि उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: "तीन लोग शहीद हुए; एक मोमिन आदमी जिसका ईमान अच्छा था, वह दुश्मन से मिला और फिर वह अल्लाह के साथ ईमानदार रहा जब तक कि वह मारा नहीं गया, फिर क़यामत के दिन लोग उसे देखने के लिए अपनी गर्दनें ऊपर उठाएंगे," और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी अपनी गर्दन ऊपर उठाई, जब तक कि उसकी खोपड़ी गिर नहीं गई या उमर की टोपी गिर नहीं गई, "और एक मोमिन जो अपने ईमान में अच्छा है, दुश्मन से ऐसे मिलता है जैसे उसकी खाल पर पेड़ का कांटा लग गया हो, उसे कोई भटका हुआ तीर लग जाए और वह मारा जाए, फिर वह दूसरे दर्जे में जन्नत में होता है। और एक अच्छा मोमिन जिसके अच्छे काम बुरे कामों के साथ मिले हुए हैं, वह दुश्मन से मिलता है और फिर अल्लाह के साथ ईमानदारी से काम करता है जब तक कि वह मारा नहीं जाता, फिर वह तीसरे दर्जे में जन्नत में होता है।"