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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ahmad (الامام احمد) - 26363 Hadith

Hadith

Imam Ahmad : 101

حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ يَحْيَى قَالَ أَخْبَرَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ قَالَ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ دَرَّاجٍ أَنَّ عَلِيًّا رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ صَلَّى بَعْدَ الْعَصْرِ رَكْعَتَيْنِ فَتَغَيَّظَ عَلَيْهِ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَالَ أَمَا عَلِمْتَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَنْهَانَا عَنْهَا

हमरा सभ [अल हसन बिन याह्या] केँ कहि ओ कहलनि; हमरा सब [इब्नुल मुबारक] के सूचित केने छथि ओ कहलनि; हमरा सब [मा'मर] के [अज ज़ुहरी] स [रबीअह बिन दरराज] स कहल गेल अछि जे अली अस्र के बाद दू रकाअत के नमाज पढ़लनि जाहि स [उमर] के क्रोधित क कहल गेल; 'की तोरा ई नै पता छै कि रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा सब के ई करै स॑ मना करी देलकै' ।

Hadith

Imam Ahmad : 102

حَدَّثَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا صَفْوَانُ حَدَّثَنَا شُرَيْحُ بْنُ عُبَيْدٍ قَالَ قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَرَجْتُ أَتَعَرَّضُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبْلَ أَنْ أُسْلِمَ فَوَجَدْتُهُ قَدْ سَبَقَنِي إِلَى الْمَسْجِدِ فَقُمْتُ خَلْفَهُ فَاسْتَفْتَحَ سُورَةَ الْحَاقَّةِ فَجَعَلْتُ أَعْجَبُ مِنْ تَأْلِيفِ الْقُرْآنِ قَالَ فَقُلْتُ هَذَا وَاللَّهِ شَاعِرٌ كَمَا قَالَتْ قُرَيْشٌ قَالَ فَقَرَأَ { إِنَّهُ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَاعِرٍ قَلِيلًا مَا تُؤْمِنُونَ } قَالَ قُلْتُ كَاهِنٌ قَالَ { وَلَا بِقَوْلِ كَاهِنٍ قَلِيلًا مَا تَذَكَّرُونَ تَنْزِيلٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَمِينَ وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ الْأَقَاوِيلِ لَأَخَذْنَا مِنْهُ بِالْيَمِينِ ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ الْوَتِينَ فَمَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ عَنْهُ حَاجِزِينَ } إِلَى آخِرِ السُّورَةِ قَالَ فَوَقَعَ الْإِسْلَامُ فِي قَلْبِي كُلَّ مَوْقِعٍ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [अबुल मुगिराह] हमरा सभकेँ कहलक अछि [शफवान] हमरा सभकेँ कहलक अछि [स्युरैह बिन उबैद] ओ कहलनि; [उमर बिन अल खथथब] कहलनि; उमर आगू कहलनि जे, हम इस्लाम स्वीकार करबा स पहिने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क सामना करबा लेल निकललहुं, मुदा हमरा पता चलल जे ओ हमरा स पहिने मस्जिद मे आबि गेल छलाह आ हम हुनका पाछु ठाढ़ छलहुं, फेर ओ अल हक्का क अक्षर पढ़ि कए अपन नमाज खोललथि जाहि स हम कुरान क संरचना स चकित भ गेलहुं; तेँ हम कहलियनि; 'अल्लाहक कसम, ई आदमी कवि अछि जेना कुरैश कहैत छथि,' उमर आगू बजलाह; तखन ओ आयत पढ़लनि: 'सत्ते, कुरान सचमुच अल्लाह केर वही अछि जे कुलीन रसूलुल्लाह पर उतारल गेल छल।' आ कुरान कवि के शब्द नै छै, अहाँ के एकरा पर बहुत कम विश्वास छै' -QS अल हाकाह श्लोक 40-41-, उमर कहलनि; तेँ हम कहलियनि; 'कवि' तखन ओ पढ़लनि: 'आ ने भविष्यवाणीक शब्द।' अहाँ एहि सँ बहुत कम सीखैत छी। ई ब्रह्माण्ड केरऽ भगवान स॑ नीचें भेजलऽ गेलऽ प्रकटीकरण छेकै । जँ ओ -मुहम्मद- हमरा सभक -नाम- मे किछु शब्द बजौने रहितथि तऽ हम सभ सही मे हुनका दहिना हाथ मे पकड़ने रहितहुँ । तखन हम वास्तव मे हृदयक डोरी काटि देलियैक। तेँ अहाँ सभ मे सँ कियो हमरा सभ केँ ओहि नस केँ काटि देबा सँ नहि रोकि सकैत अछि,' पत्रक अंत धरि, उमर बजलाह; 'तखन इस्लाम सचमुच हमर दिल मे डूबि गेल'।

Hadith

Imam Ahmad : 103

حَدَّثَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ وَعِصَامُ بْنُ خَالِدٍ قَالَا حَدَّثَنَا صَفْوَانُ عَنْ شُرَيْحِ بْنِ عُبَيْدٍ وَرَاشِدِ بْنِ سَعْدٍ وَغَيْرِهِمَا قَالُوا لَمَّا بَلَغَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَرَغَ حُدِّثَ أَنَّ بِالشَّامِ وَبَاءً شَدِيدًا قَالَ بَلَغَنِي أَنَّ شِدَّةَ الْوَبَاءِ فِي الشَّامِ فَقُلْتُ إِنْ أَدْرَكَنِي أَجَلِي وَأَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِ حَيٌّ اسْتَخْلَفْتُهُ فَإِنْ سَأَلَنِي اللَّهُ لِمَ اسْتَخْلَفْتَهُ عَلَى أُمَّةِ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قُلْتُ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَكَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ لِكُلِّ نَبِيٍّ أَمِينًا وَأَمِينِي أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِ فَأَنْكَرَ الْقَوْمُ ذَلِكَ وَقَالُوا مَا بَالُ عُلْيَا قُرَيْشٍ يَعْنُونَ بَنِي فِهْرٍ ثُمَّ قَالَ فَإِنْ أَدْرَكَنِي أَجَلِي وَقَدْ تُوُفِّيَ أَبُو عُبَيْدَةَ اسْتَخْلَفْتُ مُعَاذَ بْنَ جَبَلٍ فَإِنْ سَأَلَنِي رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ لِمَ اسْتَخْلَفْتَهُ قُلْتُ سَمِعْتُ رَسُولَكَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّهُ يُحْشَرُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ بَيْنَ يَدَيْ الْعُلَمَاءِ نَبْذَةً

हमरा सब के कहल गेल अछि जे [अबुल मुगिराह] आ [‘इशाम बिन खालिद] दुनू गोटे कहलनि; ई हमरा सब [शफवान] के [स्यूरैह बिन उबैद] आ [रसीद बिन स'द] आ अन्य सब स कहल गेल अछि, ओ सब कहलनि; जखन [उमर] सराघ पहुँचलाह तखन हुनका खबरि भेटलनि जे सीरिया मे गंभीर महामारी आयल अछि, तें ओ कहलनि; 'हमरा लग खबरि आयल अछि जे सीरिया में गंभीर महामारी आबि गेल अछि, तें हम कहलियनि; 'जँ अबू उबैदा बिन जर्राह जीबैत काल हमरा लग मृत्यु आबि जायत त' हम हुनका अपन उत्तराधिकारी अवश्य नियुक्त करब, आ जँ हमरा सँ अल्लाह माँगब; 'अहाँ हुनका मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के उम्मा के लेल अपन उत्तराधिकारी किएक नियुक्त केलौं ? ' हम उत्तर देब; 'सत्ते, हम अहाँक रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ कहैत सुनने रही: 'वास्तव मे हर नबी के लेल एकटा अमीन होइत छैक - एकटा एहन व्यक्ति जकरा पर भरोसा होइत छैक - जखन कि हमर अमीन अबू उबैदा बिन जर्राह छथि'। तेँ लोक एकरा नकारैत अछि आ कहैत अछि; 'कुरैश के अधिकारी सब के की गलती छै?' हुनका लोकनिक की मतलब छलनि फिहरी, तखन उमर कहलनि; 'जँ अबू उबैदाक मृत्यु होइत काल हमरा लग मृत्यु आबि गेल तखन हम मुअदज बिन जबल केँ नियुक्त करब, आ जँ हमरा सँ अल्लाह सँ पूछल जाय; 'अहाँ एकरा किएक अनलहुँ? ' हम उत्तर देब; 'हम अहाँक रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छी: 'वास्तव मे ओ कयामत के दिन असगर विद्वान के संग एकत्रित भ' जेताह'।

Hadith

Imam Ahmad : 104

حَدَّثَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا ابْنُ عَيَّاشٍ قَالَ حَدَّثَنِي الْأَوْزَاعِيُّ وَغَيْرُهُ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ وُلِدَ لِأَخِي أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غُلَامٌ فَسَمَّوْهُ الْوَلِيدَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَمَّيْتُمُوهُ بِأَسْمَاءِ فَرَاعِنَتِكُمْ لَيَكُونَنَّ فِي هَذِهِ الْأُمَّةِ رَجُلٌ يُقَالُ لَهُ الْوَلِيدُ لَهُوَ شَرٌّ عَلَى هَذِهِ الْأُمَّةِ مِنْ فِرْعَوْنَ لِقَوْمِهِ

हमरा सभकेँ [अबुल मुगिराह] हमरा सभकेँ कहलक अछि [इब्न अय्यासी] ओ कहलनि; हमरा [अल औजाई] आ अन्य लोकनि केँ कहने छथि, [अज ज़ुहरी] सँ [सैद बिन अल मुसैयब] सँ [उमर बिन अल खथथब] सँ ओ कहलनि; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी उम्म सलामा के भाई स एकटा बच्चा के जन्म भेल छल आ ओकरा अल वलीद नाम देल गेल छल, ताहि लेल नबी कहलखिन: 'अहाँ ओकर नाम अपन फिरौन के नाम पर राखू, सचमुच एहि उम्मा में अल वलीद नाम के आदमी होयत, सचमुच ओ एहि उम्मा के लेल ओहि स बेसी खराब अछि जे फिरौन अपन लोक के लेल छल'।

Hadith

Imam Ahmad : 105

حَدَّثَنَا بَهْزٌ حَدَّثَنَا أَبَانُ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِى الْعَالِيَةِ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ شَهِدَ عِنْدِي رِجَالٌ مَرْضِيُّونَ مِنْهُمْ عُمَرُ وَأَرْضَاهُمْ عِنْدِي عُمَرُ أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَقُولُ لَا صَلَاةَ بَعْدَ صَلَاةِ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ وَلَا صَلَاةَ بَعْدَ صَلَاةِ الصُّبْحِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ

हमरा सभकेँ [बहज] हमरा सभकेँ [कतादा]सँ [अबन] [अबुल अलियाह]सँ [इब्न अब्बास]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; हम अपन बरकत मित्र लोकनिक संग गवाही देने छी, जाहि मे [उमर] छथि, आ जिनका सँ हमरा सबसँ बेसी प्रसन्नता अछि ओ छथि उमर, जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'असर नमाज के बाद नमाज नहि होइत अछि जा धरि सूर्यास्त नहि भ' जाइत अछि, आ फजर नमाज के बाद कोनो नमाज नहि होइत अछि जाबत धरि सूर्य नहि उगैत अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 106

حَدَّثَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا صَفْوَانُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ عَنِ الْحَارِثِ بْنِ مُعَاوِيَةَ الْكِنْدِيِّ أَنَّهُ رَكِبَ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَسْأَلُهُ عَنْ ثَلَاثِ خِلَالٍ قَالَ فَقَدِمَ الْمَدِينَةَ فَسَأَلَهُ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مَا أَقْدَمَكَ قَالَ لِأَسْأَلَكَ عَنْ ثَلَاثِ خِلَالٍ قَالَ وَمَا هُنَّ قَالَ رُبَّمَا كُنْتُ أَنَا وَالْمَرْأَةُ فِي بِنَاءٍ ضَيِّقٍ فَتَحْضُرُ الصَّلَاةُ فَإِنْ صَلَّيْتُ أَنَا وَهِيَ كَانَتْ بِحِذَائِي وَإِنْ صَلَّتْ خَلْفِي خَرَجَتْ مِنْ الْبِنَاءِ فَقَالَ عُمَرُ تَسْتُرُ بَيْنَكَ وَبَيْنَهَا بِثَوْبٍ ثُمَّ تُصَلِّي بِحِذَائِكَ إِنْ شِئْتَ وَعَنْ الرَّكْعَتَيْنِ بَعْدَ الْعَصْرِ فَقَالَ نَهَانِي عَنْهُمَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَعَنْ الْقَصَصِ فَإِنَّهُمْ أَرَادُونِي عَلَى الْقَصَصِ فَقَالَ مَا شِئْتَ كَأَنَّهُ كَرِهَ أَنْ يَمْنَعَهُ قَالَ إِنَّمَا أَرَدْتُ أَنْ أَنْتَهِيَ إِلَى قَوْلِكَ قَالَ أَخْشَى عَلَيْكَ أَنْ تَقُصَّ فَتَرْتَفِعَ عَلَيْهِمْ فِي نَفْسِكَ ثُمَّ تَقُصَّ فَتَرْتَفِعَ حَتَّى يُخَيَّلَ إِلَيْكَ أَنَّكَ فَوْقَهُمْ بِمَنْزِلَةِ الثُّرَيَّا فَيَضَعَكَ اللَّهُ تَحْتَ أَقْدَامِهِمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ بِقَدْرِ ذَلِكَ

हमरा सब के कहलक अछि [अबुल मुगिराह] हमरा सब के कहने अछि [शफवान] हमरा सब के [अब्दुररहमान बिन जुबैर बिन नुफैर] के [अल हरित्स बिन मुअविया अल किंदी] स कहलक अछि जे ओ उमर के तीन बात पूछय लेल गाड़ी चला देलक, ओ कहलनि; तेँ मदीना पहुँचला पर उमर हुनका सँ पुछलखिन; 'अहाँकेँ एतय की अनैत अछि ?' ओ उत्तर देलथिन; ‘अहाँसँ तीन बात पूछबाक लेल,’ उमर पुछलकै; 'ओ तीनू बात की अछि ?' ओ उत्तर देलथिन; 'ई भ' सकैत अछि जे हम आ कोनो महिला कोनो संकीर्ण भवन मे छी, तखन प्रार्थनाक समय आबि जाइत अछि, जँ हम आ ओ एक संग प्रार्थना करैत छी तखन ओ हमरा जकाँ एकहि स्तर पर छथि, आ जँ ओ हमरा पाछू प्रार्थना करैत छथि तखन ओ भवन सँ बाहर निकलि जाइत छथि?' तेँ उमर उत्तर देलनि; 'अपना आ हुनका बीच कपड़ा सँ बाधा बनाउ, तखन ओ अहाँक इच्छा त' बगल मे प्रार्थना करताह'। -आ दोसर अछि- अस्र नमाज के बाद दू रकाअत के नमाज के बारे में?' अस्तु [उमर] उत्तर देलनि; 'अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ हमरा एकरा पूरा करै स॑ मना करी देल॑ छै' । -आ तेसर अछि- कथा केँ चुनौती दियौक -एकटा परीकथा-, ओ सभ चाहैत छथि जे हम एकटा कथा कहब,' तखन उमर उत्तर देलनि; 'अहाँ ऊपर अछि'। जेना ओकरा मना करब नीक नहि लागय, अल हरिथ कहलकै; ‘हम तऽ बस अहाँक विचार देबय चाहैत छलहुँ,’ उमर बजलाह; 'हमरा डर अछि जे अहाँ कथा कहैत छी आ तखन अहाँ ओकरा पर गर्व करैत छी, तखन कथा कहैत छी आ अहाँ अहंकारी भ' जाइत छी, जाहि सँ अहाँ केँ ई सोचय लेल लुभाओल जाइत अछि जे अहाँ ओकरा सभ सँ ऊपर छी जेना अमीर लोकक पद पर छी, तखन अल्लाह अहाँ केँ अहाँक कल्पनाक अनुसार कयामतक दिन हुनका सभक पैरक नीचाँ राखि देत'।'

Hadith

Imam Ahmad : 107

حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ شُعَيْبِ بْنِ أَبِي حَمْزَةَ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنِ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي سَالِمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ أَخْبَرَهُ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ يَنْهَاكُمْ أَنْ تَحْلِفُوا بِآبَائِكُمْ قَالَ عُمَرُ فَوَاللَّهِ مَا حَلَفْتُ بِهَا مُنْذُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْهَا وَلَا تَكَلَّمْتُ بِهَا ذَاكِرًا وَلَا آثِرًا

हमरा सब [बिसीर बिन स्यूअइब बिन अबू हमजाह] के कहला के बाद ओ कहलनि; हमरा [हमर पिता] केँ [अज ज़ुहरी] सँ कहि ओ कहलनि; हमरा [सलीम बिन अब्दुल्ला] के सूचित केने छथि जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] हुनका सूचित केने छथि, जे [उमर बिन अल खथथब] कहलनि; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनलहुं जे सचमुच अल्लाह अहां के अपन पिता के नाम पर कसम खाय सं मना क देने छथिन्ह. उमर बजलाह; 'त अल्लाह के कसम, हम जहिया स अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हुनका स मना करैत सुनने छी तहिया स ई शपथ नै केने छी, चाहे ओ याद करय के अवस्था में हो या नै याद करय के स्थिति में'।

Hadith

Imam Ahmad : 108

حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ رَاشِدِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَحُذَيْفَةَ بْنِ الْيَمَانِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَأْخُذْ مِنْ الْخَيْلِ وَالرَّقِيقِ صَدَقَةً

हमरा सब क॑ [अबुल यमन] क॑ कहलऽ गेलऽ छै कि हमरा [अबू बकर बिन अब्दुल्लाह] क॑ [रसीद बिन स’द] स॑ [उमर बिन अल खथथब] आरू [हुदजाइफा बिन अल यमन] स॑ कहलऽ गेलऽ छै, कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम न॑ घोड़ा आरू गुलाम स॑ जकात नै लेलकै’ ।

Hadith

Imam Ahmad : 109

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ إِسْحَاقَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ يَعْنِي ابْنَ الْمُبَارَكِ أَنْبَأَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سُوقَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَطَبَ النَّاسَ بِالْجَابِيَةِ فَقَالَ قَامَ فِينَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلَ مَقَامِي فِيكُمْ فَقَالَ اسْتَوْصُوا بِأَصْحَابِي خَيْرًا ثُمَّ الَّذِينَ يَلُونَهُمْ ثُمَّ الَّذِينَ يَلُونَهُمْ ثُمَّ يَفْشُو الْكَذِبُ حَتَّى إِنَّ الرَّجُلَ لَيَبْتَدِئُ بِالشَّهَادَةِ قَبْلَ أَنْ يُسْأَلَهَا فَمَنْ أَرَادَ مِنْكُمْ بَحْبَحَةَ الْجَنَّةِ فَلْيَلْزَمْ الْجَمَاعَةَ فَإِنَّ الشَّيْطَانَ مَعَ الْوَاحِدِ وَهُوَ مِنْ الِاثْنَيْنِ أَبْعَدُ لَا يَخْلُوَنَّ أَحَدُكُمْ بِامْرَأَةٍ فَإِنَّ الشَّيْطَانَ ثَالِثُهُمَا وَمَنْ سَرَّتْهُ حَسَنَتُهُ وَسَاءَتْهُ سَيِّئَتُهُ فَهُوَ مُؤْمِنٌ

हमरा सब के कहलक अछि [अली बिन इशाक] हमरा सब के कहने छथि [अब्दुल्लाह, अर्थात इब्नुल मुबारक] हमरा सब के [मुहम्मद बिन सुकाह] [अब्दुल्लाह बिन दिनार] स [इब्न उमर] स कहने छथि जे [उमर बिन अल खथथब] जबियाह -दमिश्क के एकटा गाम- में लोक के सामने प्रचार करैत छलाह आ कहलनि; 'रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा सभक सोझाँ ठाढ़ भ' गेलाह जेना हम अहाँक सोझाँ ठाढ़ छी, तखन ओ कहलनि: 'हमर साथी सभक भलाई सँ स्तुति करू, तखन हुनका सभक बादक लोक, तखन हुनका सभक बादक लोक सभ, तखन तकर बाद झूठ पसरि जायत, जाहि सँ कोनो आदमी ओकरा सँ पूछबा सँ पहिने गवाही देब' लागत, तेँ जे कियो स्वर्गक गंध सुंघय चाहैत अछि, ओकरा जमाआ सँ चिपकल रहबाक चाही कारण वास्तव मे शैतान ओहि व्यक्तिक संग अछि जे अछि।' असगरे, जखन कि दू लोक सँ ओ दूर रहताह, अहाँ मे सँ कियो एकटा स्त्री के संग असगर नहि रहय दियौक - जे ओकर महरम नहि हो - कारण शैतान तेसर व्यक्ति अछि, तेँ जे अपन नीक काज पर गर्व करैत अछि आ अपन अधलाह काज सँ दुखी अछि ओ आस्तिक अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 110

حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ عَنْ حَكِيمِ بْنِ عُمَيْرٍ وَضَمْرَةَ بْنِ حَبِيبٍ قَالَا قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَنْظُرَ إِلَى هَدْيِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلْيَنْظُرْ إِلَى هَدْيِ عَمْرِو بْنِ الْأَسْوَدِ

हमरा सभकेँ [अबुल यमन] हमरा सभकेँ [अबू बकर] [हकीम बिन उमैर] आ [द्लामराह बिन हबीब]सँ कहलक अछि, दुनू गोटे कहलनि; [उमर बिन अल खथथब] कहलनि; 'जे कियो रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मार्गदर्शन देखय चाहैत अछि, तखन 'अमरू बिन असवद' के मार्गदर्शन देखू।

Hadith

Imam Ahmad : 111

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ مَوْلَى بَنِي هَاشِمٍ قَالَ حَدَّثَنَا زَائِدَةُ حَدَّثَنَا سِمَاكٌ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ قَالَ عُمَرُ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي رَكْبٍ فَقَالَ رَجُلٌ لَا وَأَبِي فَقَالَ رَجُلٌ لَا تَحْلِفُوا بِآبَائِكُمْ فَالْتَفَتُّ فَإِذَا هُوَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमरा सब [बानी हाशिम के पूर्व गुलाम अबू सईद] के कहला के बाद ओ कहलनि; हमरा सभकेँ [ज`इदा] कहलक अछि [सुनू] [इक्रीमाह]सँ [श्रीमती अब्बास]सँ ओ कहलक; [उमर] कहलनि; हम सब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग एकटा समूह में छलहुं, तखन एकटा आदमी कहलक; 'नहि, हमर पिताक लेल'। तखन एकटा आओर आदमी छल जे उत्तर देलक: 'अपन पिताक नामक कसम नहि खाउ!' जखन हम घुमलहुं त पता चलल जे जे आदमी जवाब देलक ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम छलाह।

Hadith

Imam Ahmad : 112

حَدَّثَنَا عِصَامُ بْنُ خَالِدٍ وَأَبُو الْيَمَانِ قَالَا أَخْبَرَنَا شُعَيْبُ بْنُ أَبِي حَمْزَةَ عَنِ الزُّهْرِيِّ قَالَ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَ لَمَّا تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَكَانَ أَبُو بَكْرٍ بَعْدَهُ وَكَفَرَ مَنْ كَفَرَ مِنْ الْعَرَبِ قَالَ عُمَرُ يَا أَبَا بَكْرٍ كَيْفَ تُقَاتِلُ النَّاسَ وَقَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَمَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَقَدْ عَصَمَ مِنِّي مَالَهُ وَنَفْسَهُ إِلَّا بِحَقِّهِ وَحِسَابُهُ عَلَى اللَّهِ تَعَالَى قَالَ أَبُو بَكْرٍ وَاللَّهِ لَأُقَاتِلَنَّ قَالَ أَبُو الْيَمَانِ لَأَقْتُلَنَّ مَنْ فَرَّقَ بَيْنَ الصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ فَإِنَّ الزَّكَاةَ حَقُّ الْمَالِ وَاللَّهِ لَوْ مَنَعُونِي عَنَاقًا كَانُوا يُؤَدُّونَهَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَقَاتَلْتُهُمْ عَلَى مَنْعِهَا قَالَ عُمَرُ فَوَاللَّهِ مَا هُوَ إِلَّا أَنْ رَأَيْتُ أَنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ قَدْ شَرَحَ صَدْرَ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لِلْقِتَالِ فَعَرَفْتُ أَنَّهُ الْحَقُّ

हमरा सब के कहल गेल अछि जे [‘इशाम बिन खालिद] आ [अबुल यमन] दुनू गोटे कहलनि; हमरा सब [स्यूअइब बिन अबू हमजाह] के [अज जुहरी] स सूचित केने छथि ओ कहलनि; हमरा सभ केँ [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] केँ कहने छथि, जे [अबू हुरैराह] कहलनि; जखन रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मृत्यु भ गेलैन आ ओकर बाद अबू बकर के बाद हुनकर बाद बहुत रास अरब काफिर भ गेलैन, [उमर] कहलनि; हे अबू बकर, अहाँ हुनका सब स कोना लड़लौं जखन कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छलाह जे हमरा लोक स लड़बाक आदेश देल गेल छल जाबत ओ सब ला इलाहा इल्लाल्लाह नहि कहि देलक - अल्लाह के अलावा इबाद के लायक कोनो देवता नहि अछि -, तखन जे कियो ला इलाहा इल्लाह कहत ओकर मतलब अछि जे ओ हमरा स अपन संपत्ति आ आत्मा के रक्षा क लेने अछि, जाबत ओकर अधिकार आ गणना अल्लाह के हाथ में नै सौंपल जायत त'अला'। [अबू बकर] उत्तर देलनि; 'अल्लाह के कसम हम जरूर लड़ब'। अबुल यमन कहलनि; 'हम नमाज आ जकात के आज्ञा में अंतर करय वाला लोक के जरूर मारब, कारण जकात सही संपत्ति अछि, अल्लाह के कसम, जौं ओ हमरा जकात के एकटा रस्सी के टुकड़ा तक सौंपय सं मना क देत जे एक बेर अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सौंपने छल, त हम हुनका सब सं मना करब के कारण जरूर लड़ब।' उमर बजलाह; 'त' अल्लाह के कसम, हम सिवाय एहि बात के नहि देखलहुं जे अल्लाह अबू बकर के दिल लड़य लेल खोलने छलाह, आ हमरा इहो बुझल छल जे इएह सच्चाई अछि'.

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Imam Ahmad : 113

حَدَّثَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ شُعَيْبٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا صَلَاةَ بَعْدَ صَلَاةِ الصُّبْحِ إِلَى طُلُوعِ الشَّمْسِ وَلَا بَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغِيبَ الشَّمْسُ

हमरा सब [अबुल मुगिराह] के कहल गेल अछि हमरा सब [अल औजाई] के कहल गेल अछि [अमरू बिन स्यूअइब] के [अब्दुल्लाह बिन अमरू बिन अल अश] [उमर बिन अल खथथब] स कहल गेल अछि, जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'सुबह के नमाज के बाद कोनो नमाज नहि होइत अछि जा धरि सूर्य नहि उगैत अछि, आ अस्र नमाज के बाद जाबे सूर्यास्त नै भ जायत ताबे तक कोनो नमाज नै होइत छै'।

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Imam Ahmad : 114

حَدَّثَنَا الْحَكَمُ بْنُ نَافِعٍ حَدَّثَنَا ابْنُ عَيَّاشٍ عَنْ أَبِي سَبَإٍ عُتْبَةَ بْنِ تَمِيمٍ عَنْ الْوَلِيدِ بْنِ عَامِرٍ الْيَزَنِيِّ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ مُغِيثٍ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَضَى النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ صَاحِبَ الدَّابَّةِ أَحَقُّ بِصَدْرِهَا

हमरा सब के [अल हकम बिन नाफी’] हमरा सब के [अबू सबा’ स [इब्नु ‘अय्यासी] के [अबू सबा’ स ‘उतबाह बिन तमीम] [अल वलीद बिन अमीर अल यजानी] स [‘उरवाह बिन मुघित्स अल अंसारी] स [उमर बिन अल खथथब] स कहलक अछि, ओ कहलनि; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम निर्णय लेलनि जे जानवर मालिक के अपन स्तन पर बेसी अधिकार अछि'।

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Imam Ahmad : 115

حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ الْحَكَمُ بْنُ نَافِعٍ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ رَاشِدِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ حُمْرَةَ بْنِ عَبْدِ كُلَالٍ قَالَ سَارَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِلَى الشَّامِ بَعْدَ مَسِيرِهِ الْأَوَّلِ كَانَ إِلَيْهَا حَتَّى إِذَا شَارَفَهَا بَلَغَهُ وَمَنْ مَعَهُ أَنَّ الطَّاعُونَ فَاشٍ فِيهَا فَقَالَ لَهُ أَصْحَابُهُ ارْجِعْ وَلَا تَقَحَّمْ عَلَيْهِ فَلَوْ نَزَلْتَهَا وَهُوَ بِهَا لَمْ نَرَ لَكَ الشُّخُوصَ عَنْهَا فَانْصَرَفَ رَاجِعًا إِلَى الْمَدِينَةِ فَعَرَّسَ مِنْ لَيْلَتِهِ تِلْكَ وَأَنَا أَقْرَبُ الْقَوْمِ مِنْهُ فَلَمَّا انْبَعَثَ انْبَعَثْتُ مَعَهُ فِي أَثَرِهِ فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ رَدُّونِي عَنْ الشَّامِ بَعْدَ أَنْ شَارَفْتُ عَلَيْهِ لِأَنَّ الطَّاعُونَ فِيهِ أَلَا وَمَا مُنْصَرَفِي عَنْهُ مُؤَخِّرٌ فِي أَجَلِي وَمَا كَانَ قُدُومِيهِ مُعَجِّلِي عَنْ أَجَلِي أَلَا وَلَوْ قَدْ قَدِمْتُ الْمَدِينَةَ فَفَرَغْتُ مِنْ حَاجَاتٍ لَا بُدَّ لِي مِنْهَا لَقَدْ سِرْتُ حَتَّى أَدْخُلَ الشَّامَ ثُمَّ أَنْزِلَ حِمْصَ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَيَبْعَثَنَّ اللَّهُ مِنْهَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ سَبْعِينَ أَلْفًا لَا حِسَابَ عَلَيْهِمْ وَلَا عَذَابَ عَلَيْهِمْ مَبْعَثُهُمْ فِيمَا بَيْنَ الزَّيْتُونِ وَحَائِطِهَا فِي الْبَرْثِ الْأَحْمَرِ مِنْهَا

हमरा सभकेँ [अबुल यमन अल हकम बिन नाफी’] हमरा सभकेँ [अबू बकर बिन अब्दुल्लाह] [रसीद बिन स’द]सँ [हमजाह बिन अब्दी कुलाल]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; [उमर बिन अल खथथब] ओतय के पहिल यात्रा के बाद शाम दिस बढ़लाह, जखन ओ लगभग नजदीक आबि रहल छलाह, हुनका आ हुनका संग लोक के खबरि आयल जे ओतय थाउन के बीमारी भड़कि रहल अछि, तें हुनकर संगी सब हुनका कहलखिन; 'पाछू जाउ आ ओतय प्रवेश नहि करू, जँ प्लेग एखनो ओतहि रुकि जायब, तखन हमरा सभ केँ अहाँ केँ एहि सँ शरण लेबाक कोनो स्थान नहि देखाइत अछि'। अस्तु उमर मदीना घर घुरि क' ओहि राति आराम केलनि, आ हम हुनकर सबसँ नजदीकी व्यक्ति छलहुँ, जखन ओ उठलाह त' हम उठि क' हुनका पाछू घुमि गेलहुँ, तखन हम हुनका कहैत सुनलहुँ; 'हमरा सीरिया के नजदीक रहला के बाद ओ सब हमरा सीरिया सं वापस अनलक, कारण ओतय ता'उन महामारी भेल छल, ई जानि लिअ जे ओतय सं हमर वापसी के मतलब ई नहिं जे हम अपन मृत्यु के समाप्त क सकैत छी आ आ ने हमर ओतय एबाक मतलब हमर मृत्यु के जल्दी करब, ई जानि लिय जे जं हम मदीना पहुंचि गेलहुं अछि आ हम अपन जरूरत पूरा क लेने छी जे हमरा पूरा करय पड़त, त हम निश्चित रूप सं पैदल चलब जा धरि हम सीरिया के भूमि में प्रवेश नहिं करब आ फेर हिमशा में रुकब, वास्तव में हम सुनलहुं.' अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत छथि : 'अल्लाह के कयामत के दिन सत्तर हजार लोक के बिना कोनो हिसाब के आ बिना सजा के उठौताह, जतय हुनका सब के उठाओल जायत ओ जगह जैतून के गाछ आ ओकर बगीचा के बीच लाल समतल जमीन पर होयत'।

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Imam Ahmad : 116

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ أَخْبَرَنَا حَيْوَةُ أَخْبَرَنَا أَبُو عَقِيلٍ عَنِ ابْنِ عَمِّهِ عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ أَنَّهُ خَرَجَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي غَزْوَةِ تَبُوكَ فَجَلَسَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمًا يُحَدِّثُ أَصْحَابَهُ فَقَالَ مَنْ قَامَ إِذَا اسْتَقَلَّتْ الشَّمْسُ فَتَوَضَّأَ فَأَحْسَنَ الْوُضُوءَ ثُمَّ قَامَ فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ غُفِرَ لَهُ خَطَايَاهُ فَكَانَ كَمَا وَلَدَتْهُ أُمُّهُ قَالَ عُقْبَةُ بْنُ عَامِرٍ فَقُلْتُ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي رَزَقَنِي أَنْ أَسْمَعَ هَذَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ لِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَكَانَ تُجَاهِي جَالِسًا أَتَعْجَبُ مِنْ هَذَا فَقَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَعْجَبَ مِنْ هَذَا قَبْلَ أَنْ تَأْتِيَ فَقُلْتُ وَمَا ذَاكَ بِأَبِي أَنْتَ وَأُمِّي فَقَالَ عُمَرُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ تَوَضَّأَ فَأَحْسَنَ الْوُضُوءَ ثُمَّ رَفَعَ نَظَرَهُ إِلَى السَّمَاءِ فَقَالَ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ فُتِحَتْ لَهُ ثَمَانِيَةُ أَبْوَابِ الْجَنَّةِ يَدْخُلُ مِنْ أَيِّهَا شَاءَ

हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुल्लाह बिन यजीद] हमरा सब के बता देने अछि [हैवाह] हमरा सब के [अपन चाचा के बेटा] स [उकबाह बिन अमीर] स [अबू अकील] के कहने अछि जे ओ रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के संग तबुक के लड़ाई में निकलल छल, फेर एक दिन रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन शिकायत कहैत बैसल छल, ओ कहलक- जे कियो सूर्य उगला पर जागत तखन वजूद करू आ अपन वज़ूद पूरा करू, तखन दू रकात नमाज करू, तखन ओकर गलती ओहिना माफ भ’ जायत जेना ओकर माय ओकरा जन्म देने छलैक’। उकबाह बिन अमीर कहलनि; अल हमदुलिल्लाह -सब स्तुति अल्लाह के छै- जे हमरा रोजी-रोटी देने छैथ ताकि हम ई बात रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स सुनि सकब, तखन [उमर बिन अल खथथब] हमरा कहलखिन आ ओ हमरा सामने बैसि गेलाह; 'की अहाँ एहि बात सँ आश्चर्यचकित छी, भले रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अहाँक एबा सँ पहिने एहि सँ बेसी आश्चर्यजनक किछु कहने छलाह,' हम पुछलियनि; 'की अछि, बाप-माँक लेल हम फिरौतीक रूप मे तैयार छी?' तेँ उमर उत्तर देलनि; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, जे वजूद करैत अछि आ अपन वज़ूद पूरा करैत अछि, तखन पढ़ैत काल आकाश दिस अपन नजरि उठबैत अछि; 'अशहदु अनला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहुला स्यारीकलाहु वा अशहदु अन्ना मुहम्मद अब्दुहु वारसुलुहु -हम गवाही दैत छी जे अल्लाह सर्वशक्तिमान के अलावा कोनो देवता इबादत के योग्य नहि छथि, जिनकर कोनो साथी नहि छनि, आ हम गवाही दैत छी जे मुहम्मद हुनकर सेवक आ दूत छथि-, तेँ हुनका लेल स्वर्गक आठ दरवाजा खुजल रहत आ ओ जाहि दरबज्जा सँ प्रवेश करताह पसंद करैत अछि'।

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Imam Ahmad : 117

حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ يَعْنِي أَبَا دَاوُدَ الطَّيَالِسِيَّ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ دَاوُدَ الْأَوْدِيِّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْمُسْلِيِّ عَنِ الْأَشْعَثِ بْنِ قَيْسٍ قَالَ ضِفْتُ عُمَرَ فَتَنَاوَلَ امْرَأَتَهُ فَضَرَبَهَا وَقَالَ يَا أَشْعَثُ احْفَظْ عَنِّي ثَلَاثًا حَفِظْتُهُنَّ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَسْأَلْ الرَّجُلَ فِيمَ ضَرَبَ امْرَأَتَهُ وَلَا تَنَمْ إِلَّا عَلَى وَتْرٍ وَنَسِيتُ الثَّالِثَةَ

हमरा लोकनि [सुलेमान बिन दाउद, अर्थात अबू दाउद अथ थयालिसी] केँ कहैत ओ कहलनि; हमरा सब के [अबू अवानाह] के [दाउद अल औदी] स [अब्दुररहमान अस सुलामी] स [अस्यातस बिन कैस] स कहलक अछि; हम [उमर] लग गेलहुँ तखन ओ अपन पत्नी केँ पकड़ि क’ मारि देलक आ ओ बजलीह; 'हे अश'अत हमरा सँ तीन बात राखू जे हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ रटने छी 'ककरो सँ नहि पूछू जे ओ अपन पत्नी केँ किएक मारलक, वितर नमाज केलाक बाद नहि सुतब' आ तेसर बात बिसरि गेलहुँ'।

Hadith

Imam Ahmad : 118

حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا يَزِيدُ يَعْنِي الرِّشْكَ عَنْ مُعَاذَةَ عَنْ أُمِّ عَمْرٍو ابْنَةِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّهَا سَمِعَتْ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الزُّبَيْرِ يَقُولُ سَمِعَتْ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ فِي خُطْبَتِهِ إِنَّهُ سَمِعَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ يَلْبَسْ الْحَرِيرَ فِي الدُّنْيَا فَلَا يُكْسَاهُ فِي الْآخِرَةِ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [अब्दुश शामाद] हमरा सभकेँ [हमर पिता] हमरा सभकेँ [यजीद अर्थात अर रिसिक] [मुअदजाह]सँ [उम्मू अमरू, अब्दुल्लाक बेटी]सँ कहने अछि जे ओ एक बेर [अब्दुल्लाह बिन जुबैर]केँ कहैत सुनने छल; हम [उमर बिन अल खथथब] के अपन प्रवचन में कहैत सुनलहुं; कि ओ अल्लाह के रसूलुल्लाह के कहैत सुनने छल: 'जे कियो एहि दुनिया में रेशम के कपड़ा पहिरत, ओ परलोक में ओकरा पर रेशम के कपड़ा नै पहिरत'।

Hadith

Imam Ahmad : 119

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ إِسْحَاقَ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَ أَخْبَرَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَيَسِيرَنَّ الرَّاكِبُ فِي جَنَبَاتِ الْمَدِينَةِ ثُمَّ لَيَقُولُ لَقَدْ كَانَ فِي هَذَا حَاضِرٌ مِنْ الْمُؤْمِنِينَ كَثِيرٌ قَالَ أَبِي أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ وَلَمْ يَجُزْ بِهِ حَسَنٌ الْأَشْيَبُ جَابِرًا

हमरा सभकेँ [याह्या बिन इशाक] हमरा सभकेँ [अबू अज़ जुबैर] [जाबीर]सँ [इब्न लहिअह] कहलक अछि ओ कहलनि; हमरा [उमर बिन अल खथथब] के जानकारी देने अछि, ओ कहलनि; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनलहुं: 'सत्ते एकटा सवार होयत जे मदीना के बाहरी इलाका में चलत आ फेर कहत; 'पहिने एतय बहुत रास आस्तिक रहैत छलाह'। अब्दुल्ला कहलनि; हमर पिता अहमद बिन हम्बल कहलनि; 'आ हसन अल असी-याब जाबीर के एहि हदीस के संग डिप्लोमा नै देलखिन'।

Hadith

Imam Ahmad : 120

حَدَّثَنَا هَارُونُ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ الْحَارِثِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ السَّائِبِ حَدَّثَهُ أَنَّ الْقَاسِمَ بْنَ أَبِي الْقَاسِمِ السَّبَئِيَّ حَدَّثَهُ عَنْ قَاصِّ الْأَجْنَادِ بِالْقُسْطَنْطِينِيَّةِ أَنَّهُ سَمِعَهُ يُحَدِّثُ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلَا يَقْعُدَنَّ عَلَى مَائِدَةٍ يُدَارُ عَلَيْهَا بِالْخَمْرِ وَمَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلَا يَدْخُلْ الْحَمَّامَ إِلَّا بِإِزَارٍ وَمَنْ كَانَتْ تُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلَا تَدْخُلْ الْحَمَّامَ

हमरा सब के कहलक अछि [हारून] हमरा सब के कहने अछि [इब्नु वहाब] हमरा ['अमरू बिन अल हरिथ] के कहने अछि जे [उमर बिन अस स`इब] हुनका कहलक अछि, जे [अल कासिम बिन अबुल कासिम अस सब`ई] हुनका कांस्टेंटिनोपल -तुर्की- में [कास अल अजनाद] स कहलक अछि, जे ओ हुनका कहैत सुनने अछि, जे [उमर बिन अल खठथब] कहलक; हे लोक, सचमुच हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने रही: 'जे कियो अल्लाह आ अंतिम दिन पर विश्वास करैत अछि, ओ शराब स घेरल भोज मे नहि बैसय, आ जे कियो अल्लाह आ अंतिम दिन पर विश्वास करय वाला आदमी अछि, ओकरा सार्वजनिक बाथरूम मे प्रवेश नहि करबाक चाही, जाबत तक ओ सरोंग -वस्त्र नहि पहिरने हो, आ जे महिला अल्लाह आ अंतिम दिन पर विश्वास करय वाला महिला हो सार्वजनिक बाथरूम मे प्रवेश नहि करब'।