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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ahmad (الامام احمد) - 26363 Hadith

Hadith

Imam Ahmad : 81

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَاصِمُ بْنُ كُلَيْبٍ قَالَ قَالَ أَبِي فَحَدَّثَنَا بِهِ ابْنُ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ وَمَا أَعْجَبَكَ مِنْ ذَلِكَ كَانَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِذَا دَعَا الْأَشْيَاخَ مِنْ أَصْحَابِ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَعَانِي مَعَهُمْ فَقَالَ لَا تَتَكَلَّمْ حَتَّى يَتَكَلَّمُوا قَالَ فَدَعَانَا ذَاتَ يَوْمٍ أَوْ ذَاتَ لَيْلَةٍ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فِي لَيْلَةِ الْقَدْرِ مَا قَدْ عَلِمْتُمْ فَالْتَمِسُوهَا فِي الْعَشْرِ الْأَوَاخِرِ وِتْرًا فَفِي أَيِّ الْوِتْرِ تَرَوْنَهَا

हमरा सभकेँ कहलक अछि ['अफ्फान] हमरा सभकेँ [अब्दुल वाहिद बिन जियाद] कहलक अछि जे ओ कहलनि; हमरा सभ केँ ['अशिम बिन कुलैब] केँ कहि ओ कहलनि; [हमर पिता] कहने छथि; हमरा सब के ओहि हदीस [इब्न अब्बास] स बतेने छथि जे ओ कहलनि; 'किछु बात जे अहाँ के सचमुच आश्चर्यचकित करत जे [उमर] जखन मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सब में स बुजुर्ग सब के आमंत्रित केलनि त हमरा सेहो हुनका सब के संग आमंत्रित केलनि, आ कहलनि; 'जा धरि ओ सभ नहि कहताह ता धरि अहाँ नहि बाजब'। तेँ एक दिन वा राति ओ हमरा सभकेँ बजौलनि आ कहलनि; 'सत्ते, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लैलातुल कदर के बारे में कहने छलाह जेना कि अहाँ सब के पहिने सं पता अछि, एतेक तक कि पिछला दस विषम दिन के राति में एकर जासूसी करू आ कखनो काल जेकरा अहाँ अजीब बुझैत छी'।

Hadith

Imam Ahmad : 82

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ عَاصِمَ بْنَ عَمْرٍو الْبَجَلِيَّ يُحَدِّثُ عَنْ رَجُلٍ مِنْ الْقَوْمِ الَّذِينَ سَأَلُوا عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ فَقَالُوا لَهُ إِنَّمَا أَتَيْنَاكَ نَسْأَلُكَ عَنْ ثَلَاثٍ عَنْ صَلَاةِ الرَّجُلِ فِي بَيْتِهِ تَطَوُّعًا وَعَنْ الْغُسْلِ مِنْ الْجَنَابَةِ وَعَنْ الرَّجُلِ مَا يَصْلُحُ لَهُ مِنْ امْرَأَتِهِ إِذَا كَانَتْ حَائِضًا فَقَالَ أَسُحَّارٌ أَنْتُمْ لَقَدْ سَأَلْتُمُونِي عَنْ شَيْءٍ مَا سَأَلَنِي عَنْهُ أَحَدٌ مُنْذُ سَأَلْتُ عَنْهُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ صَلَاةُ الرَّجُلِ فِي بَيْتِهِ تَطَوُّعًا نُورٌ فَمَنْ شَاءَ نَوَّرَ بَيْتَهُ وَقَالَ فِي الْغُسْلِ مِنْ الْجَنَابَةِ يَغْسِلُ فَرْجَهُ ثُمَّ يَتَوَضَّأُ ثُمَّ يُفِيضُ عَلَى رَأْسِهِ ثَلَاثًا وَقَالَ فِي الْحَائِضِ لَهُ مَا فَوْقَ الْإِزَارِ

हमरा सब के कहने छथि [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के कहने छथि [स्यूबाह] ओ कहलनि; हम सुनलहुं जे [‘अशिम बिन अमरू अल बजाली] [एकटा आदमी] स एकटा कहानी कहैत छलाह, जे लोकक समूह मे छल जे [उमर बिन अल खथथब] स पूछलक; 'हम सभ अहाँ लग मात्र तीन बात पूछबाक लेल आयल छी; घर में पुरुष के सुन्नत नमाज के बारे में, जुनब से नहाने के बारे में और मासिक धर्म में पुरुष के लिए की जायज है के बारे में' | तेँ उमर उत्तर देलनि; 'की अहाँ जादूगर छी, अहाँ हमरा सँ एहन बात पूछने छी जे जहिया सँ हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ पूछने रही तखन सँ कियो नहि पूछने अछि?' डाका ओ कहलनि; 'मनुष्य के घर में सुन्नत के नमाज इजोत छै, तें जे चाहै छै ओकर घर इजोत हो'। आ जुनबसँ स्नानक विषयमे बुझेलनि; 'अहाँ अपन जननांग धोउ तखन वजूद करू आ फेर तीन बेर माथ पर पानि ढारि दियौक' आ ओ अपन पत्नीक विषय मे बतौलनि जे मासिक धर्म मे छलीह; 'कारण ओ कपड़ा पर जे अछि -फरजीक अतिरिक्त-'।

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Imam Ahmad : 83

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ أَبِي النَّضْرِ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ سَعْدَ بْنَ أَبِي وَقَّاصٍ يَمْسَحُ عَلَى خُفَّيْهِ بِالْعِرَاقِ حِينَ يَتَوَضَّأُ فَأَنْكَرْتُ ذَلِكَ عَلَيْهِ قَالَ فَلَمَّا اجْتَمَعْنَا عِنْدَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ لِي سَلْ أَبَاكَ عَمَّا أَنْكَرْتَ عَلَيَّ مِنْ مَسْحِ الْخُفَّيْنِ قَالَ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لَهُ فَقَالَ إِذَا حَدَّثَكَ سَعْدٌ بِشَيْءٍ فَلَا تَرُدَّ عَلَيْهِ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَمْسَحُ عَلَى الْخُفَّيْنِ

हमरा सभकेँ [कुतैबा बिन सईद] हमरा सभकेँ [इब्न लहिअह] [अबू अन नदलर]सँ [अबू सलामाह]सँ [इब्न उमर]सँ कहलक अछि जे ओ कहलनि; हम देखलहुं जे [सअद बिन अबी वक्कास] इराक में वजूद करैत काल अपन दू टा खुफ पोछैत छलाह, तखन हम एकर खंडन केलहुं, तें जखन हम सब [उमर बिन अल खथथाब] कात जमा भेलहुं तं ओ कहलनि ; 'खुफ पोछबाक विषय मे अहाँ हमरा की नकारलौं से अपन पिता सँ पूछू'। तेँ हम हुनका ई बात कहलियनि आ ओ उत्तर देलनि। 'जँ स'द अहाँ केँ किछु कहैत छथि तखन एकरा नकारब नहि किएक त' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनकर दू खुफ पोछि देलनि'।

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Imam Ahmad : 84

حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ مَعْرُوفٍ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ عَنْ أَبِي النَّضْرِ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ مَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ وَأَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ سَأَلَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ نَعَمْ إِذَا حَدَّثَكَ سَعْدٌ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَيْئًا فَلَا تَسْأَلْ عَنْهُ غَيْرَهُ

हमरा सभ [हारून बिन मा'रुफ] केँ कहि क' ओ कहलनि; हमरा सब [इब्न वहाब] के [अमरू बिन अल हरिथ] स [अबू अन नदलर] स [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान] स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स [सअद बिन अबी वक्कास] स रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम स कहल गेल अछि, जे ओ दुनू खुफ रगड़लथि, आ अब्दुल्लाह बिन उमर [उमर] स एहि बारे मे पूछलथि तखन ओ उत्तर देलनि; 'हँ, जँ स'द रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ किछु कहैत छथि त' एहि बारे मे ककरो आओर सँ नहि पूछू।'

Hadith

Imam Ahmad : 85

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا هَمَّامُ بْنُ يَحْيَى قَالَ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ الْغَطَفَانِيِّ عَنْ مَعْدَانَ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ الْيَعْمَرِيِّ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَامَ عَلَى الْمِنْبَرِ يَوْمَ الْجُمُعَةِ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ ذَكَرَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَذَكَرَ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ثُمَّ قَالَ رَأَيْتُ رُؤْيَا لَا أُرَاهَا إِلَّا لِحُضُورِ أَجَلِي رَأَيْتُ كَأَنَّ دِيكًا نَقَرَنِي نَقْرَتَيْنِ قَالَ وَذَكَرَ لِي أَنَّهُ دِيكٌ أَحْمَرُ فَقَصَصْتُهَا عَلَى أَسْمَاءَ بِنْتِ عُمَيْسٍ امْرَأَةِ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا فَقَالَتْ يَقْتُلُكَ رَجُلٌ مِنْ الْعَجَمِ قَالَ وَإِنَّ النَّاسَ يَأْمُرُونَنِي أَنْ أَسْتَخْلِفَ وَإِنَّ اللَّهَ لَمْ يَكُنْ لِيُضَيِّعَ دِينَهُ وَخِلَافَتَهُ الَّتِي بَعَثَ بِهَا نَبِيَّهُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَإِنْ يَعْجَلْ بِي أَمْرٌ فَإِنَّ الشُّورَى فِي هَؤُلَاءِ السِّتَّةِ الَّذِينَ مَاتَ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ عَنْهُمْ رَاضٍ فَمَنْ بَايَعْتُمْ مِنْهُمْ فَاسْمَعُوا لَهُ وَأَطِيعُوا وَإِنِّي أَعْلَمُ أَنَّ أُنَاسًا سَيَطْعَنُونَ فِي هَذَا الْأَمْرِ أَنَا قَاتَلْتُهُمْ بِيَدِي هَذِهِ عَلَى الْإِسْلَامِ أُولَئِكَ أَعْدَاءُ اللَّهِ الْكُفَّارُ الضُّلَّالُ وَايْمُ اللَّهِ مَا أَتْرُكُ فِيمَا عَهِدَ إِلَيَّ رَبِّي فَاسْتَخْلَفَنِي شَيْئًا أَهَمَّ إِلَيَّ مِنْ الْكَلَالَةِ وَايْمُ اللَّهِ مَا أَغْلَظَ لِي نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي شَيْءٍ مُنْذُ صَحِبْتُهُ أَشَدَّ مَا أَغْلَظَ لِي فِي شَأْنِ الْكَلَالَةِ حَتَّى طَعَنَ بِإِصْبَعِهِ فِي صَدْرِي وَقَالَ تَكْفِيكَ آيَةُ الصَّيْفِ الَّتِي نَزَلَتْ فِي آخِرِ سُورَةِ النِّسَاءِ وَإِنِّي إِنْ أَعِشْ فَسَأَقْضِي فِيهَا بِقَضَاءٍ يَعْلَمُهُ مَنْ يَقْرَأُ وَمَنْ لَا يَقْرَأُ وَإِنِّي أُشْهِدُ اللَّهَ عَلَى أُمَرَاءِ الْأَمْصَارِ إِنِّي إِنَّمَا بَعَثْتُهُمْ لِيُعَلِّمُوا النَّاسَ دِينَهُمْ وَيُبَيِّنُوا لَهُمْ سُنَّةَ نَبِيِّهِمْ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَيَرْفَعُوا إِلَيَّ مَا عُمِّيَ عَلَيْهِمْ ثُمَّ إِنَّكُمْ أَيُّهَا النَّاسُ تَأْكُلُونَ مِنْ شَجَرَتَيْنِ لَا أُرَاهُمَا إِلَّا خَبِيثَتَيْنِ هَذَا الثُّومُ وَالْبَصَلُ وَايْمُ اللَّهِ لَقَدْ كُنْتُ أَرَى نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَجِدُ رِيحَهُمَا مِنْ الرَّجُلِ فَيَأْمُرُ بِهِ فَيُؤْخَذُ بِيَدِهِ فَيُخْرَجُ بِهِ مِنْ الْمَسْجِدِ حَتَّى يُؤْتَى بِهِ الْبَقِيعَ فَمَنْ أَكَلَهُمَا لَا بُدَّ فَلْيُمِتْهُمَا طَبْخًا قَالَ فَخَطَبَ النَّاسَ يَوْمَ الْجُمُعَةِ وَأُصِيبَ يَوْمَ الْأَرْبِعَاءِ

हमरा सभकेँ कहलक अछि ['अफ्फान] हमरा सभकेँ [हम्मम बिन याह्या] कहलक अछि ओ कहलनि; हमरा सब के [कतादह] के [सलीम बिन अबुल जाद अल गताफानी] स [मदन बिन अबू थल्हाह अल या'मारी] स कहल गेल अछि जे [उमर बिन अल खथथब] शुक्र दिन मंच पर ठाढ़ छलाह, फेर अल्लाह के स्तुति आ महिमामंडन केलनि तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ अबू बकर के जिक्र केलनि, फेर कहलनि; 'हमरा सपना देखल छल आ हमरा लागल जे ई हमर मृत्युक संकेत अछि, हम सपना देखलहुँ जेना मुर्गा हमरा दू बेर चुभने हो' । म'दन बाजल; ओ -उमर- कहलनि जे मुर्गी लाल छल, तखन हम अबू बकरक पत्नी असमा' बिंत उमैस केँ कहलियनि, तें ओ बजलीह; 'विदेशी आदमी/अरब के अलावा दोसर अहाँ के मारि देत'। उमर बजलाह; 'सत्ते, लोक हमरा कहलक जे उत्तराधिकारी नियुक्त करू, आ सचमुच अल्लाह अपन धर्म आ खिलाफत के बर्बाद नहि करताह, जे अपन पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नियुक्ति क' क' पठा देने छथि, आ जँ मृत्यु हमरा लग आबि जायत तखन ई मामला शूरा - विचार-विमर्श मे - छह लोकक बीच सौंपल जायत जे जखन पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केर मृत्यु भ' गेलनि तखन हुनका सभ सँ प्रसन्नता भेलाह, तखन अहाँ।' जिनका प्रति निष्ठा देब से सुनबाक चाही। आ आज्ञा मानब, आ सचमुच हम जनैत छी जे एहन लोक हेताह जे एहि मामला के बाधित करताह, आ हमहीं छी जे इस्लाम के आधार पर हुनका सब स अपन हाथ स लड़ब, ओ सब अल्लाह के दुश्मन छथि, काफिर आ भटकल लोक छथि, अल्लाह के कसम, हम जे हमर रब हमरा स वादा केने छथि से नहि छोड़ब आ फेर हमरा लेल अल कलाला स बेसी महत्वपूर्ण चीज के संग हमरा जगह पर राखब - जे मरि जायत आ कोनो बाप आ बेटा -, आ द्वारा अल्लाह, पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा कोनो बात के बारे में कहियो कोनो बात के पुष्टि नै केने छथि जहिया स हम हुनका संग केने रही, ओ हमरा संग कलाला के मामला में बेसी सख्त छलाह जाबत ओ हमर छाती में अपन आँगुर नै धकेललखिन आ कहलनि: 'अहाँ के लेल काफी अछि शैफ के बारे में आयत जे सूरह आन नीसा के अंत में अछि', सचमुच अगर हम जीब तखन हम मामला के फैसला एकटा एहन फैसला के संग करब जे पढ़निहार आ ओ सब के पता भ सकैत अछि जे नै पढ़ै छै, आरू हम देश के नेता सिनी के ऊपर अल्लाह के सामने गवाही दै छियै, कि हम्में ओकरा ऐसनऽ भेजलकै कि वू लोगऽ क॑ अपनऽ धार्मिक मामला के बारे म॑ सिखाबै आरू ताकि वू अपनऽ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सुन्नत समझै आरू हमरा स॑ शिकायत करलकै कि ओकरा जे नै पता छेलै, त॑ सचमुच तोहें, हे लोग, तोहें दू गाछ खाय छेलियै जेकरा हम्में नै मानलऽ छेलियै कि वू घृणित छेलै, यानी लहसुन आरू पर, अल्लाह के द्वारा हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के देखने छी जखन ओ एकटा आदमी स एहि दुनू के गंध के गंध केने छलाह त ओ हुनका अपन हाथ पकड़ने आदेश देलखिन जे मस्जिद स बाहर निकलि क बकी में राखि दियौन, ताहि लेल जे कियो दुनू के खा लेत ओ ता धरि पकाबथि जा धरि कोनो गंध नहि आबि जायत।' म'दन बाजल; 'उमर शुक्रदिन लोकक सोझाँ प्रचार केलनि आ बुध दिन मारल गेलाह'।

Hadith

Imam Ahmad : 86

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ قَالَ حَدَّثَنِي نَافِعٌ مَوْلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَ خَرَجْتُ أَنَا وَالزُّبَيْرُ والْمِقْدَادُ بْنُ الْأَسْوَدِ إِلَى أَمْوَالِنَا بِخَيْبَرَ نَتَعَاهَدُهَا فَلَمَّا قَدِمْنَاهَا تَفَرَّقْنَا فِي أَمْوَالِنَا قَالَ فَعُدِيَ عَلَيَّ تَحْتَ اللَّيْلِ وَأَنَا نَائِمٌ عَلَى فِرَاشِي فَفُدِعَتْ يَدَايَ مِنْ مِرْفَقِي فَلَمَّا أَصْبَحْتُ اسْتُصْرِخَ عَلَيَّ صَاحِبَايَ فَأَتَيَانِي فَسَأَلَانِي عَمَّنْ صَنَعَ هَذَا بِكَ قُلْتُ لَا أَدْرِي قَالَ فَأَصْلَحَا مِنْ يَدَيَّ ثُمَّ قَدِمُوا بِي عَلَى عُمَرَ فَقَالَ هَذَا عَمَلُ يَهُودَ ثُمَّ قَامَ فِي النَّاسِ خَطِيبًا فَقَالَ أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ عَامَلَ يَهُودَ خَيْبَرَ عَلَى أَنَّا نُخْرِجُهُمْ إِذَا شِئْنَا وَقَدْ عَدَوْا عَلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَفَدَعُوا يَدَيْهِ كَمَا بَلَغَكُمْ مَعَ عَدْوَتِهِمْ عَلَى الْأَنْصَارِ قَبْلَهُ لَا نَشُكُّ أَنَّهُمْ أَصْحَابُهُمْ لَيْسَ لَنَا هُنَاكَ عَدُوٌّ غَيْرَهُمْ فَمَنْ كَانَ لَهُ مَالٌ بِخَيْبَرَ فَلْيَلْحَقْ بِهِ فَإِنِّي مُخْرِجٌ يَهُودَ فَأَخْرَجَهُمْ

हमरा सभ केँ [या'कुब] हमरा सभ केँ [हमर पिता] केँ [इब्न इशाक] सँ कहलक अछि ओ कहलनि; हमरा [नाफी' पूर्व गुलाम अब्दुल्ला बिन उमर] [अब्दुल्ला बिन उमर] स कहलक अछि, ओ कहलनि; हम जुबैर आ मिकदाद बिन असवद के संग खैबर में अपन खजाना देखय लेल गेल रही ओकर जाँच करय लेल, ओतय पहुँचला पर हम सब अपन-अपन जमीन पर बँटि गेलहुं, आधा राति में जखन हम अपन पलंग पर सुतल रही तखन हमरा पर हमला भेल, हमर कलाई कोहनी सं झुकि गेल छल, जखन भोर दिस हमर दुनू मित्र हमरा लेल चिचिया उठलाह, ओ सब हमरा लग आबि पुछलनि; 'अहाँक संग के केलक अछि'। हम उत्तर देलियनि; 'नहि जानि'। ओ आगू बजलाह; अस्तु, जुबैर आ मिकदाद हमर हाथ सुधारि हमरा उमर लग अनलनि, आ [उमर] कहलनि; 'यहूदी सभ ई काज केलक'। तखन ओ उठि कऽ लोकक समक्ष प्रचार कयलनि। 'हे लोग, सचमुच अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खैबर के यहूदी सब के रोजगार देलखिन, एक समझौता के साथ हम सब हुनका सब के बाहर निकालि देलहुं अगर हम सब चाहलहुं, आ ओ सब अब्दुल्ला बिन उमर के कलाई घुमा क अन्याय केने छथि जेना कि अहाँ सब के पास आयल अछि प्लस अंसार लोक के प्रति पहिने दुश्मनी के संग, हमरा सब के कोनो संदेह नै अछि जे ओ सब अपन दोस्त के दोस्त छथि - यहूदी -, कियाक त ओतय हमरा सब के दोसर कोनो दुश्मन नै अछि हुनका सभ केँ, तेँ खैबर मे जकरा सम्पत्ति छैक, ओकरा ल' लेबाक चाही किएक त' हम यहूदी सभ केँ भगा देब'। तखन उमर ओकरा सभकेँ भगा देलक।

Hadith

Imam Ahmad : 87

حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ مُوسَى وَحُسَيْنُ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا شَيْبَانُ عَنْ يَحْيَى عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَيْنَا هُوَ يَخْطُبُ يَوْمَ الْجُمُعَةِ إِذْ جَاءَ رَجُلٌ فَقَالَ عُمَرُ لِمَ تَحْتَبِسُونَ عَنْ الصَّلَاةِ فَقَالَ الرَّجُلُ مَا هُوَ إِلَّا أَنْ سَمِعْتُ النِّدَاءَ فَتَوَضَّأْتُ فَقَالَ أَيْضًا أَوَلَمْ تَسْمَعُوا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِذَا رَاحَ أَحَدُكُمْ إِلَى الْجُمُعَةِ فَلْيَغْتَسِلْ

हमरा सब के कहल गेल अछि जे [हसन बिन मूसा] आ [हुसैन बिन मुहम्मद] दुनू गोटे कहलनि; हमरा सब [सैबान] के [याह्या] स [अबू सलामाह] स [अबू हुरैराह] स कहल गेल अछि जे जखन उमर बिन अल खथथब शुक्र दिन प्रचार क रहल छलाह त अचानक एकटा आदमी आबि गेल, ताहि लेल उमर पुछलथि; 'अहाँ नमाज मे देरी किएक क' रहल छी?' तखन ओ आदमी उत्तर देलक। 'किछु नहि मुदा जखन हम नमाजक आह्वान सुनैत छी त' तुरन्त वज़ूद क' लैत छी ।' [उमर] फेर पुछलकै; 'की अहाँ नै सुनने छी जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर कहने छलाह : 'जखन अहाँ जुमा के नमाज में जायब तखन नहा लिय'।

Hadith

Imam Ahmad : 88

حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ مُوسَى قَالَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ قَالَ حَدَّثَنَا عَاصِمٌ الْأَحْوَلُ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ قَالَ جَاءَنَا كِتَابُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَنَحْنُ بِأَذْرَبِيجَانَ يَا عُتْبَةَ بْنَ فَرْقَدٍ وَإِيَّاكُمْ وَالتَّنَعُّمَ وَزِيَّ أَهْلِ الشِّرْكِ وَلَبُوسَ الْحَرِيرِ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَانَا عَنْ لَبُوسِ الْحَرِيرِ وَقَالَ إِلَّا هَكَذَا وَرَفَعَ لَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِصْبَعَيْهِ

हमरा सभकेँ [हसन बिन मूसा] कहलक अछि जे ओ कहलनि; हमरा सभ [जुहैर] केँ कहि ओ कहलनि; [अबू उस्मान] स हमरा सब स [‘अशिम अल अहवाल] स रिवायत केलाक बाद ओ कहलनि; हमरा सब लग [उमर] के एकटा चिट्ठी आयल छल, आ हम सब ओहि समय अजरबैजान में छलहुं, जाहि में लिखल छल; 'हे उत्बाह बिन फरकाद, मस्ती नै करू आ मुश्रिक के गहना नै पहिरू, आ रेशम के कपड़ा पहिरू, कारण अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा सब के रेशम पहिरय स मना क देलखिन, तखन ओ कहलनि: 'एहि तरहक सिवाय' आ अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा सब के सामने अपन दू आँगुर उठौलनि।'

Hadith

Imam Ahmad : 89

حَدَّثَنَا حَسَنٌ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَسْوَدِ أَنَّهُ سَمِعَ مُحَمَّدَ بْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ ابْنِ لَبِيبَةَ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي سِنَانٍ الدُّؤَلِيِّ أَنَّهُ دَخَلَ عَلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَعِنْدَهُ نَفَرٌ مِنْ الْمُهَاجِرِينَ الْأَوَّلِينَ فَأَرْسَلَ عُمَرُ إِلَى سَفَطٍ أُتِيَ بِهِ مِنْ قَلْعَةٍ مِنْ الْعِرَاقِ فَكَانَ فِيهِ خَاتَمٌ فَأَخَذَهُ بَعْضُ بَنِيهِ فَأَدْخَلَهُ فِي فِيهِ فَانْتَزَعَهُ عُمَرُ مِنْهُ ثُمَّ بَكَى عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ لَهُ مَنْ عِنْدَهُ لِمَ تَبْكِي وَقَدْ فَتَحَ اللَّهُ لَكَ وَأَظْهَرَكَ عَلَى عَدُوِّكَ وَأَقَرَّ عَيْنَكَ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا تُفْتَحُ الدُّنْيَا عَلَى أَحَدٍ إِلَّا أَلْقَى اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ بَيْنَهُمْ الْعَدَاوَةَ وَالْبَغْضَاءَ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ وَأَنَا أُشْفِقُ مِنْ ذَلِكَ

हमरा सभ [हसन] केँ कहि क’ ओ कहलनि; हमरा सब क॑ बतैन॑ छै [इब्न लहिआह] न॑ हमरा [अबू अल असवद] क॑ बतैन॑ छै कि हुनी [मुहम्मद बिन अब्दुररहमान बिन लबीबाह] क॑ [अबू सिनान अद दौली] स॑ एगो कहानी सुनाबैत॑ सुनलकै, कि हुनी [उमर बिन अल खथथब] क॑ देखै लेली ऐलै, आरू हुनकऽ बगल म॑ मुहाजिरीन पूर्ववर्ती छेलै, तखनिये उमर न॑ इराक केरऽ एगो किला स॑ लानलऽ एगो टोकरी निकाललकै जेकरा म॑ एक... अंगूठी, तखन हुनकर एकटा बेटा अंगूठी ल' क' मुँह मे राखि देलक, तखन उमर मुँह सँ निकालि लेलक तखन उमर कानय लागल, बगलक लोक सभ पुछलक; 'अहाँ किएक कानि रहल छी, की अल्लाह अहाँक लेल जीत नहि केने छथि आ अहाँ केँ दुश्मन पर जीत नहि लेलनि आ अहाँक दृष्टिकोण केँ शांतिपूर्ण नहि बनौलनि?' उमर जबाब देलकै; 'सत्ते, हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने रही: 'दुनिया कोनो नौकर के लेल नै खुलत, जाबत तक अल्लाह कयामत के दिन हुनका सब के बीच नफरत आ दुश्मनी नै पैदा नै करताह'। आ हमरा त' ओहिसँ डर होइत अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 90

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ حَدَّثَنِي نَافِعٌ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَيْفَ يَصْنَعُ أَحَدُنَا إِذَا هُوَ أَجْنَبَ ثُمَّ أَرَادَ أَنْ يَنَامَ قَبْلَ أَنْ يَغْتَسِلَ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِيَتَوَضَّأْ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِ ثُمَّ لِيَنَمْ

हमरा सभ केँ [या'कुब] हमरा सभ केँ [हमर पिता] केँ [इब्न इशक] सँ कहलक अछि हमरा [नाफी'] केँ [अब्दुल्लाह बिन उमर] सँ [अपन पिता] सँ कहलक अछि ओ कहलनि; हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछलियैन जे जे जुनूब अछि आ फेर नहाबा स पहिने सुतय चाहैत अछि ओकरा की करबाक चाही? रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'ओकरा नमाज के लेल वज़ूद जैसन वज़ूद करबाक चाही आ फेर सुतबाक चाही'।

Hadith

Imam Ahmad : 91

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ حَدَّثَنِي الزُّهْرِيُّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ لَمَّا تُوُفِّيَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أُبَيٍّ دُعِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِلصَّلَاةِ عَلَيْهِ فَقَامَ إِلَيْهِ فَلَمَّا وَقَفَ عَلَيْهِ يُرِيدُ الصَّلَاةَ تَحَوَّلْتُ حَتَّى قُمْتُ فِي صَدْرِهِ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَعَلَى عَدُوِّ اللَّهِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أُبَيٍّ الْقَائِلِ يَوْمَ كَذَا كَذَا وَكَذَا يُعَدِّدُ أَيَّامَهُ قَالَ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَبَسَّمُ حَتَّى إِذَا أَكْثَرْتُ عَلَيْهِ قَالَ أَخِّرْ عَنِّي يَا عُمَرُ إِنِّي خُيِّرْتُ فَاخْتَرْتُ وَقَدْ قِيلَ { اسْتَغْفِرْ لَهُمْ أَوْ لَا تَسْتَغْفِرْ لَهُمْ إِنْ تَسْتَغْفِرْ لَهُمْ سَبْعِينَ مَرَّةً فَلَنْ يَغْفِرَ اللَّهُ لَهُمْ } لَوْ أَعْلَمُ أَنِّي إِنْ زِدْتُ عَلَى السَّبْعِينَ غُفِرَ لَهُ لَزِدْتُ قَالَ ثُمَّ صَلَّى عَلَيْهِ وَمَشَى مَعَهُ فَقَامَ عَلَى قَبْرِهِ حَتَّى فُرِغَ مِنْهُ قَالَ فَعَجَبٌ لِي وَجَرَاءَتِي عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ فَوَاللَّهِ مَا كَانَ إِلَّا يَسِيرًا حَتَّى نَزَلَتْ هَاتَانِ الْآيَتَانِ { وَلَا تُصَلِّ عَلَى أَحَدٍ مِنْهُمْ مَاتَ أَبَدًا وَلَا تَقُمْ عَلَى قَبْرِهِ إِنَّهُمْ كَفَرُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ وَمَاتُوا وَهُمْ فَاسِقُونَ } فَمَا صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدَهُ عَلَى مُنَافِقٍ وَلَا قَامَ عَلَى قَبْرِهِ حَتَّى قَبَضَهُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ

हमरा सब के [या'कुब] हमरा सब के [हमर पिता] के [इब्न इशाक] स कहलक अछि हमरा [अज जुहरी] के [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] स [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] स कहलक अछि, ओ कहलनि; हम [उमर बिन खट्टब] कहैत सुनलहुँ; जखन अब्दुल्लाह बिन उबाई के मृत्यु भेलैन्ह तखन रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के हुनका लेल नमाज पढ़य लेल बजाओल गेल छलनि, तें ओ हुनका लग दौड़ल गेलाह, जखन ओ हुनका लेल दुआ करय लेल हुनका सोझाँ ठाढ़ भेलाह त हम हुनका रोकि देलियनि तें हम हुनका सोझाँ ठाढ़ भ' क' कहलियनि; 'हे रसुलुल्लाह, अब्दुल्ला बिन उबाई अल्लाह के दुश्मन छै जे एहि आ एहि दिन कहलक,' ओ दिन के नाम कहलक, तखन उमर आगू बजलाह; तथापि, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बस मुस्कुराइत रहलाह जाबत धरि जखन हम अपन बात दोहरौलियनि तखन ओ कहलनि: 'हमरा सँ दूर भ' जाउ, हे उमर, वास्तव मे हमरा एकटा विकल्प देल गेल छल तेँ हम चुनलहुँ, आ कहल गेल अछि: 'अहाँ हुनका सभक लेल माफी माँगब वा हुनका सभक लेल माफी नहि माँगब - ई एकेटा अछि -।' भले ही तोहें ओकरा सिनी लेली सत्तर बार माफी मँगै, लेकिन अल्लाह ओकरा सिनी कॅ कभियो माफ नै करतै।" -QS अल अनफाल आयत 80- अगर हम्में जानितियै कि अगर हम्में अपनौ आग्रह क सत्तर गुना बढ़ाबै केॅ ओकरा माफी मिलतै, तबे हम्में आरू जोड़ितियै' उमर कहलकै; फेरू ओकरा लेली दुआ करलकै आरू ओकरोॅ लाश ल॑ क॑ ओकरोॅ लाश ल॑ क॑ ओकरऽ कब्र के ऊपर खड़ा होय गेलै, जब तलक ओकरा दफना नै देलऽ गेलै,' उमर कहलकै; 'हम खुद पर आश्चर्यचकित छियै।' हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्रति कतेक अभिमानी छलहुं, भले ही अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह बेसी नीक सं जनैत छथि' उमर फेर कहलनि जे, 'त' अल्लाह केर कसम, ई दुनू आयत उतरलाक किछुए दिनक बाद -QS तौबाह आयत 80, 84-' आ हुनका सभक बीच कोनो मृत व्यक्तिक लाश - केर इबादत कहियो नहि करू, आ हुनकर कब्र पर नहि ठाढ़ भ' जाइत छथि - नमाज पढ़ैत छथि अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह में आ ओ सब दुष्टता के हालत में मरि गेलाह' तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एकर बाद फेर कहियो मुनाफीक के नमाज पढ़लनि आ ने हुनकर कब्र के ऊपर ठाढ़ भेलाह |

Hadith

Imam Ahmad : 92

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ كَمَا حَدَّثَنِي عَنْهُ نَافِعٌ مَوْلَاهُ قَالَ كَانَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ إِذَا لَمْ يَكُنْ لِلرَّجُلِ إِلَّا ثَوْبٌ وَاحِدٌ فَلْيَأْتَزِرْ بِهِ ثُمَّ لِيُصَلِّ فَإِنِّي سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ ذَلِكَ وَيَقُولُ لَا تَلْتَحِفُوا بِالثَّوْبِ إِذَا كَانَ وَحْدَهُ كَمَا تَفْعَلُ الْيَهُودُ قَالَ نَافِعٌ وَلَوْ قُلْتُ لَكُمْ إِنَّهُ أَسْنَدَ ذَلِكَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَرَجَوْتُ أَنْ لَا أَكُونَ كَذَبْتُ

हमरा सभ केँ [या'कुब] हमरा सभ केँ [हमर पिता] केँ [इब्न इशाक] सँ कहलक अछि ओ कहलनि; हमरा [नाफी अब्दुल्लाक पूर्व गुलाम] [अब्दुल्लाह] सँ कहि क' नफी' कहलनि; अब्दुल्ला बिन उमर कहलनि; जँ कोनो आदमी लग एकटा कपड़ा छोड़ि कोनो कपड़ा नहि छैक तखन ओकरा सरोंग जकाँ कपड़ा पहिरबाक चाही आ फेर नमाज करबाक चाही, कारण सचमुच हम एक बेर [उमर बिन अल खथथब] केँ ई कहैत सुनने रही, आ ओ कहलनि; 'जँ अहाँ लग मात्र एकटा वस्त्र अछि तँ कपड़ा सँ नहि झाँपि जाउ, जेना यहूदी सभ करैत अछि'। नफी' बाजल; 'जँ हम अहाँ केँ कहलहुँ जे अब्दुल्ला बिन उमर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर भरोसा केने छलाह, तखन हमरा आशा अछि जे हम झूठ नहि बाजि रहल छलहुँ।'

Hadith

Imam Ahmad : 93

حَدَّثَنَا مُؤَمَّلٌ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ قَالَ حَدَّثَنَا زِيَادُ بْنُ مِخْرَاقٍ عَنْ شَهْرٍ عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ قَالَ حَدَّثَنِي عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ مَاتَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ قِيلَ لَهُ ادْخُلْ الْجَنَّةَ مِنْ أَيِّ أَبْوَابِ الْجَنَّةِ الثَّمَانِيَةِ شِئْتَ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [मु`अम्मल] हमरा सभकेँ [हम्मद] कहलक अछि ओ कहलनि; हमरा सब के [जियाद बिन मिखराक] के [शहर] स [उकबाह बिन अमीर] स कहलक अछि ओ कहलनि; ओ हमरा [उमर] केँ कहलनि जे ओ अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) केँ कहैत सुनने छथि: 'जे कियो अल्लाह आ अंतिम दिन पर विश्वास करैत मरि जायत, ओकरा कहल जायत; 'अहाँक जे आठ दरबज्जा नीक लागय ताहि मे सँ कोनो दरबज्जा सँ स्वर्ग मे प्रवेश करू।' '' .

Hadith

Imam Ahmad : 94

حَدَّثَنَا أَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ قَالَ أَخْبَرَنَا جَعْفَرٌ يَعْنِي الْأَحْمَرَ عَنْ مُطَرِّفٍ عَنِ الْحَكَمِ عَنْ مُجَاهِدٍ قَالَ حَذَفَ رَجُلٌ ابْنًا لَهُ بِسَيْفٍ فَقَتَلَهُ فَرُفِعَ إِلَى عُمَرَ فَقَالَ لَوْلَا أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يُقَادُ الْوَالِدُ مِنْ وَلَدِهِ لَقَتَلْتُكَ قَبْلَ أَنْ تَبْرَحَ

हमरा सब [असवद बिन अमीर] के कहला के बाद ओ कहलनि; हमरा सब के [ज'फर अर्थात अल अहमर] के [मुथरीफ] स [अल हकम] स [मुजाहिद] स रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि; एकटा आदमी अपन बेटा के तलवार स काटि लेलक, ओकरा मारि देलक, तखन ई मामला उमर के सामने आनल गेल, तें [उमर] कहलनि; अगर हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहने नहि सुनने रहितियैक जे पिता के अपन बच्चा के हत्या के सजा नै भेटैत छैक। 'हमरा राति बिताबय सँ पहिने हम अहाँ केँ अवश्य मारि देब'।

Hadith

Imam Ahmad : 95

حَدَّثَنَا أَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ قَالَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ عَنْ سُلَيْمَانَ الْأَعْمَشِ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ عَنْ عَابِسِ بْنِ رَبِيعَةَ قَالَ رَأَيْتُ عُمَرَ نَظَرَ إِلَى الْحَجَرِ فَقَالَ أَمَا وَاللَّهِ لَوْلَا أَنِّي رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُقَبِّلُكَ مَا قَبَّلْتُكَ ثُمَّ قَبَّلَهُ

हमरा सब [असवद बिन अमीर] के कहला के बाद ओ कहलनि; हमरा सब के [जुहैर] के [सुलेमान अल अ'मासी] स कहलक अछि ['अबिस बिन रबियाह] स हमरा सब के [इब्राहिम] के कहलक अछि; हम देखलहुँ [उमर] कारी पाथर दिस तकैत आ कहैत छल; 'अल्लाह के कसम, जँ हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के अहाँ के चुम्मा लैत नहि देखितहुँ त' हम अहाँ के चुम्मा नहि लैतहुँ' तखन ओ ओकरा चुम्मा लेलक।

Hadith

Imam Ahmad : 96

حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنَا السَّائِبُ بْنُ يَزِيدَ ابْنُ أُخْتِ نَمِرٍ أَنَّ حُوَيْطِبَ بْنَ عَبْدِ الْعُزَّى أَخْبَرَهُ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ السَّعْدِىِّ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ قَدِمَ عَلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فِي خِلَافَتِهِ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ أَلَمْ أُحَدَّثْ أَنَّكَ تَلِي مِنْ أَعْمَالِ النَّاسِ أَعْمَالًا فَإِذَا أُعْطِيتَ الْعُمَالَةَ كَرِهْتَهَا قَالَ فَقُلْتُ بَلَى فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَمَا تُرِيدُ إِلَى ذَلِكَ قَالَ قُلْتُ إِنَّ لِي أَفْرَاسًا وَأَعْبُدًا وَأَنَا بِخَيْرٍ وَأُرِيدُ أَنْ تَكُونَ عُمَالَتِي صَدَقَةً عَلَى الْمُسْلِمِينَ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَلَا تَفْعَلْ فَإِنِّي قَدْ كُنْتُ أَرَدْتُ الَّذِي أَرَدْتَ فَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعْطِينِي الْعَطَاءَ فَأَقُولُ أَعْطِهِ أَفْقَرَ إِلَيْهِ مِنِّي حَتَّى أَعْطَانِي مَرَّةً مَالًا فَقُلْتُ أَعْطِهِ أَفْقَرَ إِلَيْهِ مِنِّي قَالَ فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خُذْهُ فَتَمَوَّلْهُ وَتَصَدَّقْ بِهِ فَمَا جَاءَكَ مِنْ هَذَا الْمَالِ وَأَنْتَ غَيْرُ مُشْرِفٍ وَلَا سَائِلٍ فَخُذْهُ وَمَا لَا فَلَا تُتْبِعْهُ نَفْسَكَ

हमरा सभ [अबुल यमन] केँ कहि ओ कहलनि; [अज ज़ुहरी] स हमरा सब [स्यूअइब] के रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि; हमरा सब के [अस सा`इब बिन यजीद] नमीर के बहिन के बेटा के सूचित केने छथि, जे [हुवैथिब बिन अब्दुल उज्जा] हुनका सूचित केने छथि, जे [अब्दुल्लाह बिन स'दी] हुनका सूचित केने छथि, जे ओ अपन खिलाफत के समय उमर बिन अल खथथाब लग आयल छलाह, त उमर हुनका कहलनि; 'हमरा -एकटा बात- नहि कहल गेल अछि, जे लोकक काज सम्हारबाक जिम्मा अहाँ पर अछि, तखन जखन अहाँ केँ दरमाहा देल जाइत अछि त' अहाँ केँ नापसंद नहि होइत अछि?' अब्दुल्ला बिन स'दी कहलनि; तेँ हम उत्तर देलियनि; 'ठीक छै' उमर बजलाह; 'अहाँकेँ एहिसँ की चाही ?' ओ उत्तर देलथिन; तेँ हम उत्तर देलियनि; 'सत्ते, हमरा लग कतेको घोड़ा आ गुलाम अछि, आ हमर हालत नीक अछि, हम चाहैत छी जे हमर मजदूरी मुसलमान सभ केँ दान मे देल जाय'। [उमर] कहलनि; 'एना नहि करू, कारण वास्तव मे हमहूँ चाहैत छलहुँ जेना अहाँ चाहैत छलहुँ, मुदा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा एकटा उपहार देलनि आ हम कहलियनि; ‘हमरा सँ गरीब ककरो द’ दियौक,’ जाबत एक दिन ओ हमरा धन-दौलत नहि देलक आ हम कहलियैक; 'हमरा सँ गरीब ककरो द' दियौक', नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा डाँटैत कहलनि: 'एकरा ल' क' एकर विकास करू - एहि मे निवेश करू - तखन एहि मे निवेश करू।' जे किछु एहि धन सँ अहाँ लग अबैत अछि आ अहाँ एकर आशा नहि केने रही आ नहि माँगलहुँ, तखन ल' लिअ, आ जँ एहन नहि अछि तखन ओकरा अपन दावा नहि करू'।

Hadith

Imam Ahmad : 97

حَدَّثَنَا سَكَنُ بْنُ نَافِعٍ الْبَاهِلِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا صَالِحٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ قَالَ حَدَّثَنِي رَبِيعَةُ بْنُ دَرَّاجٍ أَنَّ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَبَّحَ بَعْدَ الْعَصْرِ رَكْعَتَيْنِ فِي طَرِيقِ مَكَّةَ فَرَآهُ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَتَغَيَّظَ عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ أَمَا وَاللَّهِ لَقَدْ عَلِمْتَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْهَا

हमरा लोकनि [सकन बिन नाफी' अल बहिनी] केँ कहि क' ओ कहलनि; [अज ज़ुहरी] सँ हमरा सभ केँ [सालिह] केँ कहि ओ कहलनि; हमरा [रबीअह बिन दरराज] कहने छथि जे [अली बिन अबू तालिब] मक्का के रास्ता में अस्र के बाद दू रकाअत सुन्नत के नमाज केलनि, तखन उमर ई देखलनि आ हुनका पर तमसा गेलाह, फेर कहलनि; 'अल्लाह केर कसम, की अहाँ केँ पहिने सँ ई नहि बुझल छल जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एकरा मना क देने छथि।'

Hadith

Imam Ahmad : 98

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَزِيدَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَاقَ قَالَ حَدَّثَنَا الْعَلَاءُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَعْقُوبَ عَنْ رَجُلٍ مِنْ قُرَيْشٍ مِنْ بَنِي سَهْمٍ عَنْ رَجُلٍ مِنْهُمْ يُقَالُ لَهُ مَاجِدَةُ قَالَ عَارَمْتُ غُلَامًا بِمَكَّةَ فَعَضَّ أُذُنِي فَقَطَعَ مِنْهَا أَوْ عَضِضْتُ أُذُنَهُ فَقَطَعْتُ مِنْهَا فَلَمَّا قَدِمَ عَلَيْنَا أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حَاجًّا رُفِعْنَا إِلَيْهِ فَقَالَ انْطَلِقُوا بِهِمَا إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَإِنْ كَانَ الْجَارِحُ بَلَغَ أَنْ يُقْتَصَّ مِنْهُ فَلْيَقْتَصَّ قَالَ فَلَمَّا انْتُهِيَ بِنَا إِلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ نَظَرَ إِلَيْنَا فَقَالَ نَعَمْ قَدْ بَلَغَ هَذَا أَنْ يُقْتَصَّ مِنْهُ ادْعُوا لِي حَجَّامًا فَلَمَّا ذَكَرَ الْحَجَّامَ قَالَ أَمَا إِنِّي قَدْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ قَدْ أَعْطَيْتُ خَالَتِي غُلَامًا وَأَنَا أَرْجُو أَنْ يُبَارِكَ اللَّهُ لَهَا فِيهِ وَقَدْ نَهَيْتُهَا أَنْ تَجْعَلَهُ حَجَّامًا أَوْ قَصَّابًا أَوْ صَائِغًا حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ قَالَ وَحَدَّثَنِي الْعَلَاءُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ رَجُلٍ مِنْ بَنِي سَهْمٍ عَنِ ابْنِ مَاجِدَةَ السَّهْمِيِّ أَنَّهُ قَالَ حَجَّ عَلَيْنَا أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فِي خِلَافَتِهِ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ

हमरा सब के कहने छथि [मुहम्मद बिन यजीद] हमरा सब के [मुहम्मद बिन इशाक] के कहने छथि ओ कहलनि; हमरा सब के [अल अला` बिन अब्दुररहमान बिन याकूब] के [बनी सहम के एक कुरैश आदमी] स [ओहि सब में स मजिदा नाम के आदमी] स कहला के बाद ओ कहलनि; मक्का में एकटा लड़का सं झगड़ा भेल, फेर ओ हमर कान काटि क' काटि देलक -या- हम कान काटि क' काटि देलक, तें जखन अबू बकर हमरा सभ लग हज करय लेल आयल छलाह, त' हम सभ हुनका लग बात राखि देलियनि, तें ओ जवाब देलनि; 'दुनू गोटे केँ उमर बिन अल खथथाब लग आनि दियौक, जँ एकरा घायल करय बला व्यक्ति केँ किशाश करबाक काज छैक त' ओकरा किशाश करय दियौक'। ओ कहैत छथि; तें जखन हमसब [उमर बिन अल खथथब] सं पहिने पहुँचलहुं तं ओ हमरा लोकनि दिस तकैत कहलनि; 'हँ, हम किशाश करबाक सीमा पर पहुँचि गेल छी, हमरा हजमिया कहब'। तेँ जखन ओ कपारक चर्चा केलनि तऽ कहलनि; 'एम्हर हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनलहुं: 'हम अपन मातृक मौसी के एकटा नौकर द' देने छी एहि आशा में जे अल्लाह ओकरा एहि सं बरकत देतैक, आ हम ओकरा मना क' देने छी जे ओकरा कपार, कसाई आ सोनार नहि बनाबय'।' हमरा सब के कहलक अछि [या'कुब] हमरा सब के [हमर पिता] के [इब्न इशाक] स कहलक अछि ओ कहलनि; आ हमरा सभ केँ [अल 'अला` बिन अब्दुररहमान] [बनी सहम केर एक आदमी] सँ [इब्न मजीदाह अस सहमी] सँ कहने छथि जे ओ कहलनि; 'अबू बकर अपन खिलाफत के दौरान हमरा सब के तीर्थ यात्रा पर गेलाह,' तखन ओ हदीस के जिक्र केलनि।

Hadith

Imam Ahmad : 99

حَدَّثَنَا عَبِيدَةُ بْنُ حُمَيْدٍ عَنْ دَاوُدَ بْنِ أَبِي هِنْدٍ عَنْ أَبِي نَضْرَةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَ خَطَبَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ النَّاسَ فَقَالَ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ رَخَّصَ لِنَبِيِّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا شَاءَ وَإِنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ مَضَى لِسَبِيلِهِ فَأَتِمُّوا الْحَجَّ وَالْعُمْرَةَ كَمَا أَمَرَكُمْ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ وَحَصِّنُوا فُرُوجَ هَذِهِ النِّسَاءِ

हमरा सब के [उबैदा बिन हुमैद] के [दाउद बिन अबू हिंद] स [अबू नदलाह] स [अबू सईद] स कहला के बाद ओ कहलनि; [उमर] लोकक सोझाँ प्रचार केलनि आ कहलनि; 'वास्तव में अल्लाह अपन नबी के जे चाहैत छलाह ताहि लेल राहत देने छथि, आ सचमुच पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन रास्ता पर चलि गेल छथि, तें अल्लाह के आदेश के अनुसार हज आ उमरा पूरा करू, आ एहि महिला के जननांग के रक्षा करू'।

Hadith

Imam Ahmad : 100

حَدَّثَنَا عَبِيدَةُ بْنُ حُمَيْدٍ حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيَرْقُدُ الرَّجُلُ إِذَا أَجْنَبَ قَالَ نَعَمْ إِذَا تَوَضَّأَ

हमरा सभ केँ ['उबैदा बिन हुमैद] हमरा सभ केँ [उबैदुल्लाह बिन उमर] केँ [नाफी' सँ] [इब्न उमर] सँ [उमर बिन अल खथथब] सँ कहलक अछि, ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछल गेल छल; जँ कोनो व्यक्ति जुनब अछि तँ ओकरा सुतब जायज अछि ? ओ उत्तर देलनि: 'हँ, जँ अहाँ वजूद केने छी'।