Imam Ahmad : 61
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَزِيدَ حَدَّثَنَا نَافِعُ بْنُ عُمَرَ الْجُمَحِيُّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ قَالَ قِيلَ لِأَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَا خَلِيفَةَ اللَّهِ فَقَالَ بَلْ خَلِيفَةُ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا أَرْضَى بِهِ
हमरा सब के कहलक अछि [मुहम्मद बिन यजीद] हमरा सब के [नाफी बिन उमर अल जुमाही] के [अब्दुल्लाह बिन अबूमुलिकाह] स कहलक अछि ओ कहलनि; [अबू बकर] के नाम स कहल जाइत छल; 'हे खलीफातुल्लाह' तखन ओ उत्तर देलनि; "हालांकि, हम आरू खलीफा मुहम्मद शल्लाहु अलैहि वसल्लम ई आह्वान क॑ स्वीकार करै लेली तैयार छियै।"
Imam Ahmad : 62
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ دَاوُدَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُؤَمَّلِ عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ قَالَ كَانَ رُبَّمَا سَقَطَ الْخِطَامُ مِنْ يَدِ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ فَيَضْرِبُ بِذِرَاعِ نَاقَتِهِ فَيُنِيخُهَا فَيَأْخُذُهُ قَالَ فَقَالُوا لَهُ أَفَلَا أَمَرْتَنَا نُنَاوِلُكَهُ فَقَالَ إِنَّ حَبِيبِي رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَرَنِي أَنْ لَا أَسْأَلَ النَّاسَ شَيْئًا
हमरा सभकेँ [मूसा बिन दाउद] हमरा सभकेँ [अब्दुल्लाह बिन अल मु`अम्मल] [इब्न अबिमुलिका]सँ कहलक अछि, ओ कहलनि; एक बेर घोड़ाक लगाम अबू बकर अश सिद्दीक के हाथ सं खसि पड़ल, तखन ओ अपन ऊँटक आगूक बाँहि पर एहन मारि देलक जे ऊँट गर्जना केलक आ फेर ओकरा उठा लेलक, तखन मित्र लोकनि कहलनि; 'अहाँ हमरा सभकेँ ल' जेबाक आदेश नहि देलहुँ?' [अबू बकर] कहलनि; 'सत्ते हमर प्रिय रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा आदेश देलनि जे लोक सँ किछु नहि पूछू।'
Imam Ahmad : 63
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ عَنْ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَامَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِعَامٍ فَقَالَ قَامَ فِينَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَامَ الْأَوَّلِ فَقَالَ إِنَّ ابْنَ آدَمَ لَمْ يُعْطَ شَيْئًا أَفْضَلَ مِنْ الْعَافِيَةِ فَاسْأَلُوا اللَّهَ الْعَافِيَةَ وَعَلَيْكُمْ بِالصِّدْقِ وَالْبِرِّ فَإِنَّهُمَا فِي الْجَنَّةِ وَإِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ وَالْفُجُورَ فَإِنَّهُمَا فِي النَّارِ
हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के [सुफयान] के [अमरू बिन मुर्राह] स [अबू उबैदाह] स [अबू बकर] स कहलक अछि, ओ कहलनि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ निधन के एक साल बाद अबू बकर खड़ा होय क॑ कहलकै; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहिल साल में हमरा सब के सामने ठाढ़ भ गेलाह आ फेर कहलनि: 'सत्ते आदम के वंशज के मुक्ति स बेसी महत्वपूर्ण किछु नै देल गेल अछि, ताहि लेल अल्लाह स मुक्ति मांगू, ईमानदारी स आ नीक काज करू कियाक त अहाँ दुनू गोटे स्वर्ग में छी, आ झूठ आ बुराई स दूर रहू कियाक त दुनू गोटे नरक में छथि'।
Imam Ahmad : 64
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَزِيدَ قَالَ أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ بْنُ حُسَيْنٍ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَإِذَا قَالُوهَا عَصَمُوا مِنِّي دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ إِلَّا بِحَقِّهَا وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللَّهِ تَعَالَى قَالَ فَلَمَّا كَانَتْ الرِّدَّةُ قَالَ عُمَرُ لِأَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ تُقَاتِلُهُمْ وَقَدْ سَمِعْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ كَذَا وَكَذَا قَالَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَاللَّهِ لَا أُفَرِّقُ بَيْنَ الصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ وَلَأُقَاتِلَنَّ مَنْ فَرَّقَ بَيْنَهُمَا قَالَ فَقَاتَلْنَا مَعَهُ فَرَأَيْنَا ذَلِكَ رَشَدًا
हमरा सब के [मुहम्मद बिन यजीद] के कहने छथि जे ओ कहलनि; हमरा [सुफयान बिन हुसैन] के [अज ज़ुहरी] स [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] स [अबू हुरैरा] स, पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स रिपोर्ट केने छथि, ओ कहलनि: 'हमरा मनुक्ख स लड़बाक आदेश देल गेल अछि जा धरि ओ ला इलाहा इल्लाह नहि कहैत अछि - सिवाय कोनो भगवान के इबादत के लायक नहि अछि अल्लाह -, जखन ओ सब कहताह तखन हुनकर खून आ संपत्ति के रक्षा होयत, सिवाय अल्लाह तला' के हक आ गणना के आधार पर। अबू हुरैरा कहलनि; तेँ जखन धर्मत्याग भेल तखन [उमर] अबू बकर केँ कहलनि; 'की अहाँ हुनका सभसँ लड़ि रहल छी भले अहाँ रसूलुल्लाह (स.अ.व.) केँ ई-ओह कहैत सुनने होयब?' तेँ [अबू बकर] उत्तर देलनि; 'अल्लाह के कसम हम नमाज आ जकात के आज्ञा में अंतर नै करब, आ जे दुनू में अंतर करत ओकरा स लड़ब।' अबू हुरैरा कहलनि; 'त' हम सभ हुनकासँ लड़लहुँ आ देखलहुँ जे ई बात सत्य अछि' ।
Imam Ahmad : 65
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ قَالَ أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ أَبِي زُهَيْرٍ قَالَ أُخْبِرْتُ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ الصَّلَاحُ بَعْدَ هَذِهِ الْآيَةِ { لَيْسَ بِأَمَانِيِّكُمْ وَلَا أَمَانِيِّ أَهْلِ الْكِتَابِ مَنْ يَعْمَلْ سُوءًا يُجْزَ بِهِ } فَكُلَّ سُوءٍ عَمِلْنَا جُزِينَا بِهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَفَرَ اللَّهُ لَكَ يَا أَبَا بَكْرٍ أَلَسْتَ تَمْرَضُ أَلَسْتَ تَنْصَبُ أَلَسْتَ تَحْزَنُ أَلَسْتَ تُصِيبُكَ اللَّأْوَاءُ قَالَ بَلَى قَالَ فَهُوَ مَا تُجْزَوْنَ بِهِ
हमरा सब [अब्दुल्लाह बिन नुमैर] के कहने छथि जे ओ कहलनि; [अबू बकर बिन अबू जुहैर] स हमरा सब [इस्माइल] के रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि; हमरा [खबर भेटल अछि] जे [अबू बकर] कहलनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, एहि आयत के बाद भलाई कोना होयत: 'ई अहाँक इच्छा नहि अछि आ ने किताब के लोक के इच्छा।' जे कोनो अपराध करत ओकरा ओहि अपराधक अनुसार अवश्य चुकाओल जायत' -QS An Nisa'ayat 23-, की हमरा सभक हर अपराधक प्रतिफल भेटत? तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'अल्लाह अहाँ के माफ करथि, हे अबू बकर, की अहाँ बीमार, थकल, दुखी, परीक्षा स घेरल नहि छी?' अबू बकर उत्तर देलनि; 'हँ' तखन ओ कहलनि: 'तखन ई सबटा अहाँक लेल इनाम अछि'।
Imam Ahmad : 66
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ أَبِي زُهَيْرٍ أَظُنُّهُ قَالَ أَبُو بَكْرٍ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ الصَّلَاحُ بَعْدَ هَذِهِ الْآيَةِ قَالَ يَرْحَمُكَ اللَّهُ يَا أَبَا بَكْرٍ أَلَسْتَ تَمْرَضُ أَلَسْتَ تَحْزَنُ أَلَسْتَ تُصِيبُكَ اللَّأْوَاءُ قَالَ بَلَى قَالَ فَإِنَّ ذَاكَ بِذَاكَ حَدَّثَنَا يَعْلَى بْنُ عُبَيْدٍ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الثَّقَفِيِّ قَالَ قَالَ أَبُو بَكْرٍ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ الصَّلَاحُ بَعْدَ هَذِهِ الْآيَةِ { مَنْ يَعْمَلْ سُوءًا يُجْزَ بِهِ } فَذَكَرَ الْحَدِيثَ
हमरा सभ [सुफयान] केँ कहि ओ कहलनि; हमरा लोकनि [इब्न अबू खालिद] केँ [अबू बकर बिन अबू जुहैर] सँ कहलाक बाद हमरा लागल जे ई एहन अछि जेना [अबू बकर कहलनि]; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, एहि आयत के बाद भलाई कोना होयत'। ओ जवाब देलनि: 'अल्लाह अहाँ पर रहम करथि, हे अबू बकर, की अहाँ केँ पीड़ा, उदासी, वा परीक्षा नहि भेल अछि?' अबू बकर उत्तर देलनि; 'हाँ' तखन नबी कहलनि: 'तखन सचमुच ई सबटा इनाम अछि'। हमरा सभकेँ [या'ला बिन उबैद] हमरा सभकेँ [इस्माइल] [अबू बकर अतस त्साफी]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; [अबू बकर] कहलनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, एहि आयत के बाद भलाई कोना होयत: 'जे कियो बुराई करत ओकर बदला ओहि बुराई के हिसाब सं अवश्य भेटत'। -QS एक निसा'यत 123-। तखन हदीसक जिक्र करैत छथि।
Imam Ahmad : 67
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ أَبِي زُهَيْرٍ الثَّقَفِيِّ قَالَ لَمَّا نَزَلَتْ { لَيْسَ بِأَمَانِيِّكُمْ وَلَا أَمَانِيِّ أَهْلِ الْكِتَابِ مَنْ يَعْمَلْ سُوءًا يُجْزَ بِهِ } قَالَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا لَنُجَازَى بِكُلِّ سُوءٍ نَعْمَلُهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَرْحَمُكَ اللَّهُ يَا أَبَا بَكْرٍ أَلَسْتَ تَنْصَبُ أَلَسْتَ تَحْزَنُ أَلَسْتَ تُصِيبُكَ اللَّأْوَاءُ فَهَذَا مَا تُجْزَوْنَ بِهِ
हमरा सभकेँ [वाकी'] हमरा सभकेँ [इब्न अबू खालिद] [अबू बकर बिन अबू जुहैर अतस त्साफी]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; जखन श्लोक प्रकट भेल, 'ई अहाँक इच्छा नहि अछि आ ने पोथीक लोकक इच्छा।' जे कियो बुराई करत, ओकर बदला ओहि बुराई के अनुसार अवश्य भेटत-' -QS An Nisa'ayat 123-, ओ कहलनि, [अबू बकर] कहलनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की हमरा सब के हर अपराध के बदला भेटत?' त रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'अल्लाह अहाँ पर रहम करथि, हे अबू बकर, की अहाँ के दर्द, उदासी, परीक्षा के प्रहार नहि भेल अछि? त' से अहाँक जवाब अछि'।
Imam Ahmad : 68
حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ قَالَ أَخَذْتُ هَذَا الْكِتَابَ مِنْ ثُمَامَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ كَتَبَ لَهُمْ إِنَّ هَذِهِ فَرَائِضُ الصَّدَقَةِ الَّتِي فَرَضَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى الْمُسْلِمِينَ الَّتِي أَمَرَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ بِهَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَنْ سُئِلَهَا مِنْ الْمُسْلِمِينَ عَلَى وَجْهِهَا فَلْيُعْطِهَا وَمَنْ سُئِلَ فَوْقَ ذَلِكَ فَلَا يُعْطِهِ فِيمَا دُونَ خَمْسٍ وَعِشْرِينَ مِنْ الْإِبِلِ فَفِي كُلِّ خَمْسِ ذَوْدٍ شَاةٌ فَإِذَا بَلَغَتْ خَمْسًا وَعِشْرِينَ فَفِيهَا ابْنَةُ مَخَاضٍ إِلَى خَمْسٍ وَثَلَاثِينَ فَإِنْ لَمْ تَكُنِ ابْنَةُ مَخَاضٍ فَابْنُ لَبُونٍ ذَكَرٌ فَإِذَا بَلَغَتْ سِتَّةً وَثَلَاثِينَ فَفِيهَا ابْنَةُ لَبُونٍ إِلَى خَمْسٍ وَأَرْبَعِينَ فَإِذَا بَلَغَتْ سِتَّةً وَأَرْبَعِينَ فَفِيهَا حِقَّةٌ طَرُوقَةُ الْفَحْلِ إِلَى سِتِّينَ فَإِذَا بَلَغَتْ إِحْدَى وَسِتِّينَ فَفِيهَا جَذَعَةٌ إِلَى خَمْسٍ وَسَبْعِينَ فَإِذَا بَلَغَتْ سِتَّةً وَسَبْعِينَ فَفِيهَا بِنْتَا لَبُونٍ إِلَى تِسْعِينَ فَإِذَا بَلَغَتْ إِحْدَى وَتِسْعِينَ فَفِيهَا حِقَّتَانِ طَرُوقَتَا الْفَحْلِ إِلَى عِشْرِينَ وَمِائَةٍ فَإِنْ زَادَتْ عَلَى عِشْرِينَ وَمِائَةٍ فَفِي كُلِّ أَرْبَعِينَ ابْنَةُ لَبُونٍ وَفِي كُلِّ خَمْسِينَ حِقَّةٌ فَإِذَا تَبَايَنَ أَسْنَانُ الْإِبِلِ فِي فَرَائِضِ الصَّدَقَاتِ فَمَنْ بَلَغَتْ عِنْدَهُ صَدَقَةُ الْجَذَعَةِ وَلَيْسَتْ عِنْدَهُ جَذَعَةٌ وَعِنْدَهُ حِقَّةٌ فَإِنَّهَا تُقْبَلُ مِنْهُ وَيَجْعَلُ مَعَهَا شَاتَيْنِ إِنْ اسْتَيْسَرَتَا لَهُ أَوْ عِشْرِينَ دِرْهَمًا وَمَنْ بَلَغَتْ عِنْدَهُ صَدَقَةُ الْحِقَّةِ وَلَيْسَتْ عِنْدَهُ إِلَّا جَذَعَةٌ فَإِنَّهَا تُقْبَلُ مِنْهُ وَيُعْطِيهِ الْمُصَدِّقُ عِشْرِينَ دِرْهَمًا أَوْ شَاتَيْنِ وَمَنْ بَلَغَتْ عِنْدَهُ صَدَقَةُ الْحِقَّةِ وَلَيْسَتْ عِنْدَهُ وَعِنْدَهُ بِنْتُ لَبُونٍ فَإِنَّهَا تُقْبَلُ مِنْهُ وَيَجْعَلُ مَعَهَا شَاتَيْنِ إِنْ اسْتَيْسَرَتَا لَهُ أَوْ عِشْرِينَ دِرْهَمًا وَمَنْ بَلَغَتْ عِنْدَهُ صَدَقَةُ ابْنَةِ لَبُونٍ وَلَيْسَتْ عِنْدَهُ إِلَّا حِقَّةٌ فَإِنَّهَا تُقْبَلُ مِنْهُ وَيُعْطِيهِ الْمُصَدِّقُ عِشْرِينَ دِرْهَمًا أَوْ شَاتَيْنِ وَمَنْ بَلَغَتْ عِنْدَهُ صَدَقَةُ ابْنَةِ لَبُونٍ وَلَيْسَتْ عِنْدَهُ ابْنَةُ لَبُونٍ وَعِنْدَهُ ابْنَةُ مَخَاضٍ فَإِنَّهَا تُقْبَلُ مِنْهُ وَيَجْعَلُ مَعَهَا شَاتَيْنِ إِنْ اسْتَيْسَرَتَا لَهُ أَوْ عِشْرِينَ دِرْهَمًا وَمَنْ بَلَغَتْ صَدَقَتُهُ بِنْتَ مَخَاضٍ وَلَيْسَ عِنْدَهُ إِلَّا ابْنُ لَبُونٍ ذَكَرٌ فَإِنَّهُ يُقْبَلُ مِنْهُ وَلَيْسَ مَعَهُ شَيْءٌ وَمَنْ لَمْ يَكُنْ عِنْدَهُ إِلَّا أَرْبَعٌ مِنْ الْإِبِلِ فَلَيْسَ فِيهَا شَيْءٌ إِلَّا أَنْ يَشَاءَ رَبُّهَا وَفِي صَدَقَةِ الْغَنَمِ فِي سَائِمَتِهَا إِذَا كَانَتْ أَرْبَعِينَ فَفِيهَا شَاةٌ إِلَى عِشْرِينَ وَمِائَةٍ فَإِنْ زَادَتْ فَفِيهَا شَاتَانِ إِلَى مِائَتَيْنِ فَإِذَا زَادَتْ وَاحِدَةٌ فَفِيهَا ثَلَاثُ شِيَاهٍ إِلَى ثَلَاثِ مِائَةٍ فَإِذَا زَادَتْ فَفِي كُلِّ مِائَةٍ شَاةٌ وَلَا تُؤْخَذُ فِي الصَّدَقَةِ هَرِمَةٌ وَلَا ذَاتُ عَوَارٍ وَلَا تَيْسٌ إِلَّا أَنْ يَشَاءَ الْمُصَدِّقُ وَلَا يُجْمَعُ بَيْنَ مُتَفَرِّقٍ وَلَا يُفَرَّقُ بَيْنَ مُجْتَمِعٍ خَشْيَةَ الصَّدَقَةِ وَمَا كَانَ مِنْ خَلِيطَيْنِ فَإِنَّهُمَا يَتَرَاجَعَانِ بَيْنَهُمَا بِالسَّوِيَّةِ وَإِذَا كَانَتْ سَائِمَةُ الرَّجُلِ نَاقِصَةً مِنْ أَرْبَعِينَ شَاةً وَاحِدَةً فَلَيْسَ فِيهَا شَيْءٌ إِلَّا أَنْ يَشَاءَ رَبُّهَا وَفِي الرِّقَةِ رُبْعُ الْعُشْرِ فَإِذَا لَمْ يَكُنْ الْمَالُ إِلَّا تِسْعِينَ وَمِائَةَ دِرْهَمٍ فَلَيْسَ فِيهَا شَيْءٌ إِلَّا أَنْ يَشَاءَ رَبُّهَا
हमरा सभ [अबू कामिल] केँ कहि क’ ओ कहलनि; हमरा सभ [हमद बिन सलामाह] केँ कहि क’ ओ कहलनि; हम ई पत्र [त्सुमामा बिन अब्दुल्लाह बिन अनस] सँ [अनस बिन मलिक] सँ लेलहुँ, जे [अबू बकर] हुनका लोकनि केँ लिखने छलाह; 'सत्ते, ई जकात के बंटवारा छै जे अल्लाह के रसूलुल्लाह मुसलमान के लेल निर्धारित केने छैथ आ जे अल्लाह अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आदेश देने छैथ, त मुसलमान में स जेकरा रूज के अनुसार मांगल जाय छै, ओकरा ओ द दियौ, आ जेकरा रजत स बेसी मांगल जाय, तखन ओकरा नै दियौ; पच्चीस सँ कम ऊँट लेल हर पाँच सँ दस ऊँट पर जकात एकटा बकरी होइत छैक, आ जँ पच्चीस धरि पहुँचि जाइत छैक तखन जकात एकटा मादा ऊँट होइत छैक जकर उम्र दू वर्ष धरि होइत छैक, पैंतीस वर्ष धरि, जँ दू वर्षक मादा ऊँट नहि छैक तखन नर ऊँट तीन वर्षक होइत छैक, आ जँ संख्या छत्तीस वर्षक होइत छैक तखन जकात होइत छैक | एक नर ऊँट के उम्र तीन साल के जाबे तक संख्या पैंतालीस नै भ जायत, आ जौं संख्या छियालीस भ जायत तखन जकात एक अछि यदि संख्या एकसठ भ जायत त जकात एकटा मादा ऊंट के देल जायत जे पांच साल के होयत, पचहत्तर तक, आ जौं छहत्तर तक पहुंच जायत त जकात दू टा मादा ऊंट के देल जायत जे तीन साल के होयत, ऊपर नब्बे तक, आरू अगर एकनब्बे तक पहुँच जाय छै, त॑ जकात दू ऊँट क॑ देलऽ जैतै जे चारि साल के छै, जेना कि दू नर ऊंट कुल एक सौ बीस तक, आरू अगर एक सौ बीस स॑ अधिक छै त॑ हर चालीस जकात के एक बछड़ा एक ऊंट छै जे तीन साल के होय छै, आरू हर पचास जकात के लेलऽ एक मादा ऊंट चारि साल के होय छै, आरू अगर ओकरऽ उम्र के होय छै ऊँट जकात के फर्ज में भिन्न होइत अछि तखन जे कियो मादा ऊंट पर जकात पर पहुँचि गेल अछि जे पांच साल के अछि आ ओकर मादा ऊंट नै अछि जे पांच साल के अछि, मुदा ओकर मादा ऊंट अछि जे चारि साल के अछि, तखन से स्वीकार करय लेल काफी अछि, मुदा दू टा बकरी जोड़ू अगर ओकरा भेटब आसान अछि या बीस दिरहम, आ जे फर्ज जकात पर पहुंच गेल अछि | एकटा बछड़ा। एकटा मादा ऊँट जे चारि वर्षक अछि आ ओकरा लग एकटा नहि अछि सिवाय एकटा जे पाँच वर्षक अछि, तखन से काफी अछि जे ओकरा स्वीकार क' क' ओहि व्यक्ति केँ देल जाय जकरा जकात बीस दिरहम वा दू टा बकरीक बकाया छैक | आ जे चारि वर्षक मादा ऊँट पर अनिवार्य जकात प्राप्त कएने अछि आ ओकरा लग एकटा नहि अछि मुदा तीन वर्षक एकटा मादा ऊँट अछि, तखन ओकरासँ प्राप्त करबाक लेल से काफी अछि आ संगहि दू टा बकरी जँ भेटब आसान अछि वा बीस दिरहम, आ जे तीन वर्षक एकटा मादा ऊँट पर अनिवार्य जकात प्राप्त कएने अछि, मुदा चारि वर्षक मादा ऊंट छोड़ि किछु नहि अछि, तखन जे जकात के बीस दिरहम या दू टा बकरी के बकाया व्यक्ति के स्वीकार क देल जाय, आ जेकरा लग छै अगर अहां एकटा तीन साल के मादा ऊंट पर फर्ज जकात प्राप्त क लेने छी, मुदा एकटा नै छै आ एकटा छै जे दू साल के छै तखन ओ काफी छै जे ओकरा स प्राप्त करय लेल आ दू बकरी जोड़य लेल अगर ओकरा भेटब आसान छै या बीस दिरहम, आ जे फर्ज प्राप्त केने छै एकटा दू सालक मादा ऊँट पर जकात, मुदा एकटा नर ऊँट छोड़ि नहि जे तीन सालक अछि, तखन ओकरासँ प्राप्त करबा लेल से काफी अछि आ आओर किछु नहि जोड़ल जाय, आ जकरा लग चारि ऊँट छोड़ि जकात नहि अछि, तखन ओकरा लेल जकात नहि छैक जाबत मालिक नहि चाहत। आ बकरी चरबाक जकात मे जँ संख्या चालीस धरि पहुँचि गेल तखन जकात एक ओक अछि वा एक सय बीस धरि बकरी, आ जँ ओहिसँ बेसी अछि तँ जकात दू सौक संख्या धरि दू बकरी होइत अछि, आ जँ एकसँ बेसी अछि तँ जकात तीन सय धरि तीन बकरी होइत अछि, आ जँ बेसी अछि तँ हर सौक लेल जकात एक बकरी होइत अछि, आ जकात नाबालिग, कमजोर, विकलांग वा बीन बकरीसँ नहि लेल जाइत अछि, जाबत धरि ओ व्यक्ति जे दऽ रहल अछि जकात के इच्छा छै, आरू अलग-अलग संपत्ति के संग्रह नै करलऽ जाय - जकात लेबै लेली - आरू साथ ही साथ जमा करलऽ गेलऽ संपत्ति के भी डर स॑ अलग नै करलऽ जाय । जकात स, आ संपत्ति जे दू भाग स मिला देल जाइत अछि तखन दुनू एक-एकटा कए बराबर वापस भ जाइत अछि, आ जौं ककरो चरैत बकरी चालीस मे स एक बकरी स कम अछि तखन जा धरि मालिक नहि चाहैत छथि ता धरि जकात नहि होइत अछि। आ दास पर जकात चारि दसम होइत छैक आ जँ ओकर सम्पत्ति एक सय नब्बे दिरहम धरि नहि पहुँचि जाइत छैक तखन जा धरि मालिक नहि चाहैत हो ता धरि जकात नहि होइत छैक' |
Imam Ahmad : 69
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَهْلُ مَكَّةَ يَقُولُونَ أَخَذَ ابْنُ جُرَيْجٍ الصَّلَاةَ مِنْ عَطَاءٍ وَأَخَذَهَا عَطَاءٌ مِنْ ابْنِ الزُّبَيْرِ وَأَخَذَهَا ابْنُ الزُّبَيْرِ مِنْ أَبِي بَكْرٍ وَأَخَذَهَا أَبُو بَكْرٍ مِنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا رَأَيْتُ أَحَدًا أَحْسَنَ صَلَاةً مِنْ ابْنِ جُرَيْجٍ
हमरा सभ [अब्दुरज्जाक] केँ कहि ओ कहलनि; मक्कन लोकनि बाजल; ' [इब्न जुरैज] नमाज के प्रक्रिया ['अथो'] स लेलक, अथो' [इब्न अज़ जुबैर] स लेलक, इब्न जुबैर [अबू बकर] स लेलक आ अबू बकर के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स लेलक, हम इब्न जुरैज स नीक नमाज पढ़य वाला कियो नहि देखलहुं।'
Imam Ahmad : 70
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ قَالَ تَأَيَّمَتْ حَفْصَةُ بِنْتُ عُمَرَ مِنْ خُنَيْسٍ أَوْ حُذَيْفَةَ بْنِ حُذَافَةَ شَكَّ عَبْدُ الرَّزَّاقِ وَكَانَ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِمَّنْ شَهِدَ بَدْرًا فَتُوُفِّيَ بِالْمَدِينَةِ قَالَ فَلَقِيتُ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ فَعَرَضْتُ عَلَيْهِ حَفْصَةَ فَقُلْتُ إِنْ شِئْتَ أَنْكَحْتُكَ حَفْصَةَ قَالَ سَأَنْظُرُ فِي ذَلِكَ فَلَبِثْتُ لَيَالِيَ فَلَقِيَنِي فَقَالَ مَا أُرِيدُ أَنْ أَتَزَوَّجَ يَوْمِي هَذَا قَالَ عُمَرُ فَلَقِيتُ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقُلْتُ إِنْ شِئْتَ أَنْكَحْتُكَ حَفْصَةَ ابْنَةَ عُمَرَ فَلَمْ يَرْجِعْ إِلَيَّ شَيْئًا فَكُنْتُ أَوْجَدَ عَلَيْهِ مِنِّي عَلَى عُثْمَانَ فَلَبِثْتُ لَيَالِيَ فَخَطَبَهَا إِلَيَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَنْكَحْتُهَا إِيَّاهُ فَلَقِيَنِي أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ لَعَلَّكَ وَجَدْتَ عَلَيَّ حِينَ عَرَضْتَ عَلَيَّ حَفْصَةَ فَلَمْ أَرْجِعْ إِلَيْكَ شَيْئًا قَالَ قُلْتُ نَعَمْ قَالَ فَإِنَّهُ لَمْ يَمْنَعْنِي أَنْ أَرْجِعَ إِلَيْكَ شَيْئًا حِينَ عَرَضْتَهَا عَلَيَّ إِلَّا أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَذْكُرُهَا وَلَمْ أَكُنْ لِأُفْشِيَ سِرَّ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَوْ تَرَكَهَا لَنَكَحْتُهَا
हमरा सभ [अब्दुरज्जाक] केँ कहि ओ कहलनि; हमरा सब के [मा'मर] के [अज ज़ुहरी] स [सलीम] स [इब्न उमर] स [उमर] स रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि; हफशोह बिंत उमर विधवा भ गेल छलीह आ हुनैस या हुदजाइफा बिन हुदजाफाह द्वारा छोड़ि देल गेल छलीह - अब्दुर्रज्जाक के संदेह छनि - आ ओ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी में सं एक छलीह जे बदर के लड़ाई के घटना के गवाह छलीह आ मदीना में मरि गेल छलीह, उमर कहलनि; तें उस्मान बिन अफान सं भेंट भेल आ हम हुनका हफशाह के चढ़ा देलियनि, हम कहलियनि; ‘अहाँ चाहब तखन हम अहाँक विवाह हफशाह सँ करब,’ उस्मान उत्तर देलनि; 'पहिने ओहि पर सोचब'। कतेको राति बीति गेल आ तखन उस्मान हमरा सँ भेंट केलनि आ कहलनि; 'हमरा आइ-काल्हि विवाह करबाक कोनो इच्छा नहि अछि'। उमर बजलाह; तखन अबू बकरसँ भेंट भेल आ हम हुनका कहलियनि; 'अहाँ चाहब त' हम अहाँक विवाह हफशाह बिंत उमर सँ करब'। मुदा ओ हमरा कोनो जवाब नहि देलनि, तें हमर हृदय मे एकटा एहन भाव छल जे उस्मान के संग रहला पर जे भावना छल, ओहि सं बेसी छल, आ कतेको दिन बीतैत गेल जाबत अंततः रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा लग आबि हफशाह के प्रपोज केलनि, तखन हम हुनका सं हफशाह के विवाह क देलनि, अबू बकर हमरा देखय आबि कहलनि; 'शायद अहाँक हृदय मे हमरा लेल कोनो एहन भाव छल जखन अहाँ हमरा हफशाहक प्रस्ताव देलहुँ आ हम अहाँ केँ कोनो जवाब नहि देलहुँ?' उमर बजलाह, हम जबाब देलियनि; 'हँ' [अबू बकर] कहलनि; 'सत्ते, एहन कोनो बात नै छै जे हमरा हफशाह के पेशकश करला पर हमरा अहाँ लग जवाब ल क वापस आबय स रोकैत अछि, मुदा हम रसुलुल्लाह सल्लाह अलैहि वसल्लम के एकर जिक्र सुनने छलहुं, आ हम रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के रहस्य नहि पसारब, जौं ओ हुनका छोड़ि देताह त हम हुनकर विवाह जरूर करब'।
Imam Ahmad : 71
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ سُلَيْمَانَ قَالَ سَمِعْتُ الْمُغِيرَةَ بْنَ مُسْلِمٍ أَبَا سَلَمَةَ عَنْ فَرْقَدٍ السَّبَخِيِّ عَنْ مُرَّةَ الطَّيِّبِ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ سَيِّئُ الْمَلَكَةِ فَقَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلَيْسَ أَخْبَرْتَنَا أَنَّ هَذِهِ الْأُمَّةَ أَكْثَرُ الْأُمَمِ مَمْلُوكِينَ وَأَيْتَامًا قَالَ بَلَى فَأَكْرِمُوهُمْ كَرَامَةَ أَوْلَادِكُمْ وَأَطْعِمُوهُمْ مِمَّا تَأْكُلُونَ قَالُوا فَمَا يَنْفَعُنَا فِي الدُّنْيَا يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فَرَسٌ صَالِحٌ تَرْتَبِطُهُ تُقَاتِلُ عَلَيْهِ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَمَمْلُوكٌ يَكْفِيكَ فَإِذَا صَلَّى فَهُوَ أَخُوكَ
हमरा सब [इशाक बिन सुलेमान] के कहला के बाद ओ कहलनि; हम [अल मुगीरा बिन मुस्लिम अबू सलामाह] के [फरकाद अस सुबाखी] स [मुर्रा अथ थाय्यब] स [अबू बकर ऐश शिद्दिक] स सुनलहुं, ओ कहलनि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: ‘जकर चरित्र खराब हो, ओ स्वर्ग मे प्रवेश नहि करत’, तेँ एकटा आदमी पूछलक; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की अहाँ घोषणा नहि केने छी जे ई उम्मा ओ उम्मा अछि जाहि मे सबसँ बेसी गुलाम आ अनाथ अछि?' त अल्लाह के रसूलुल्लाह जवाब देलखिन: 'हँ, तखन हुनकर आदर करू जेना अहाँ अपन बच्चा के सम्मान करैत छी, हुनका जे भोजन खाइत छी ओहि सं खुआउ'। संगी सभ पुछलकै; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, दुनिया में हमरा सब के की फायदा भ सकैत अछि?' ओ जवाब देलखिन: 'एकटा नीक वाहन जेकरा अहाँ अल्लाह के रास्ता में लड़य लेल बंधा लैत छी आ एकटा गुलाम जे अहाँ के लेल पर्याप्त अछि, आ जखन ओ नमाज करैत अछि तखन ओ अहाँक भाई अछि'।
Imam Ahmad : 72
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ قَالَ أَخْبَرَنَا يُونُسُ عَنِ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي ابْنُ السَّبَّاقِ قَالَ أَخْبَرَنِي زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَرْسَلَ إِلَيْهِ مَقْتَلَ أَهْلِ الْيَمَامَةِ فَإِذَا عُمَرُ عِنْدَهُ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ إِنَّ عُمَرَ أَتَانِي فَقَالَ إِنَّ الْقَتْلَ قَدْ اسْتَحَرَّ بِأَهْلِ الْيَمَامَةِ مِنْ قُرَّاءِ الْقُرْآنِ مِنْ الْمُسْلِمِينَ وَأَنَا أَخْشَى أَنْ يَسْتَحِرَّ الْقَتْلُ بِالْقُرَّاءِ فِي الْمَوَاطِنِ فَيَذْهَبَ قُرْآنٌ كَثِيرٌ لَا يُوعَى وَإِنِّي أَرَى أَنْ تَأْمُرَ بِجَمْعِ الْقُرْآنِ فَقُلْتُ لِعُمَرَ وَكَيْفَ أَفْعَلُ شَيْئًا لَمْ يَفْعَلْهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ هُوَ وَاللَّهِ خَيْرٌ فَلَمْ يَزَلْ يُرَاجِعُنِي فِي ذَلِكَ حَتَّى شَرَحَ اللَّهُ بِذَلِكَ صَدْرِي وَرَأَيْتُ فِيهِ الَّذِي رَأَى عُمَرُ قَالَ زَيْدٌ وَعُمَرُ عِنْدَهُ جَالِسٌ لَا يَتَكَلَّمُ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّكَ شَابٌّ عَاقِلٌ لَا نَتَّهِمُكَ وَقَدْ كُنْتَ تَكْتُبُ الْوَحْيَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاجْمَعْهُ قَالَ زَيْدٌ فَوَاللَّهِ لَوْ كَلَّفُونِي نَقْلَ جَبَلٍ مِنْ الْجِبَالِ مَا كَانَ بِأَثْقَلَ عَلَيَّ مِمَّا أَمَرَنِي بِهِ مِنْ جَمْعِ الْقُرْآنِ فَقُلْتُ كَيْفَ تَفْعَلُونَ شَيْئًا لَمْ يَفْعَلْهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमरा सब [उस्मान बिन उमर] के कहला के बाद ओ कहलनि; हमरा सभ [युनुस] केँ [अज ज़ुह्री] सँ सूचित केने छथि ओ कहलनि; हमरा [इब्न अस सब्बाक] के सूचित केने छथि ओ कहलनि; हमरा [जैद बिन थाबीत] के सूचित केने छलाह, जे [अबू बकर] हुनका यमामा के लोक के युद्ध स्थल पर पठा देलखिन जखन कि उमर हुनका बगल में छलाह, तखन अबू बकर कहलनि; 'सत्ते उमर हमरासँ भेंट केलनि आ ओ कहलनि; 'सत्ते, यमामा युद्ध केरऽ बहुत शिकार गिरी गेलै, वू मुसलमानऽ के कोरी' स॑ छेलै, आरू हमरा डर छै कि अन्य युद्ध के मैदानऽ प॑ अधिक स॑ अधिक कोरी' मारलऽ जैतै ताकि कुरान केरऽ बड़ऽ संख्या म॑ नुकसान होय जैतै, कैन्हेंकि ओकरा पता नै छै, आरू वास्तव म॑ हमरऽ मत छै कि तोरा हमरा कुरान वसूली के जनादेश दै के चाही' । तेँ हम उमर केँ कहलियनि; 'हम कोना एहन काज करब जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहियो नहि केने छथि? ' तेँ उमर उत्तर देलनि; 'अल्लाह के कसम, ई नीक अछि'। तखन उमर हमरा लग अबैत रहलाह आ एहि पर प्रतिक्रिया मांगैत रहलाह, जाहि स अल्लाह हमर छाती खोलि देलथि आ हम उमर क विचार स सहमत भ गेलहुं। ओ कहैत छथि; जखन कि जैद आ उमर हुनका बगल मे बैसल एक शब्द नहि बाजल, तखन अबू बकर कहलनि; 'सत्ते, अहाँ एकटा बुद्धिमान युवक छी, हमरा सभ केँ अहाँक क्षमता पर कोनो संदेह नहि अछि कारण अहाँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लेल खुलासा लिखने छी, तेँ कुरानक किताब बनाउ' जैद कहलनि; 'अल्लाह के कसम, जौं ओ सब हमरा पर कोनो पहाड़ के स्थानांतरित करबाक जिम्मा दैतथि त ओ ओतेक भारी नहि होयत जतेक ओ हमरा कुरान जमा करबाक आदेश देने छलाह, तखन हम कहलियनि; 'अहाँ एहन काज कोना क' सकैत छी जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहियो नहि केने छथि?'
Imam Ahmad : 73
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمَّادٍ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنِ الْأَعْمَشِ عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ رَجَاءٍ عَنْ عُمَيْرٍ مَوْلَى الْعَبَّاسِ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ لَمَّا قُبِضَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاسْتُخْلِفَ أَبُو بَكْرٍ خَاصَمَ الْعَبَّاسُ عَلِيًّا فِي أَشْيَاءَ تَرَكَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ شَيْءٌ تَرَكَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمْ يُحَرِّكْهُ فَلَا أُحَرِّكُهُ فَلَمَّا اسْتُخْلِفَ عُمَرُ اخْتَصَمَا إِلَيْهِ فَقَالَ شَيْءٌ لَمْ يُحَرِّكْهُ أَبُو بَكْرٍ فَلَسْتُ أُحَرِّكُهُ قَالَ فَلَمَّا اسْتُخْلِفَ عُثْمَانُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ اخْتَصَمَا إِلَيْهِ قَالَ فَأَسْكَتَ عُثْمَانُ وَنَكَسَ رَأْسَهُ قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ فَخَشِيتُ أَنْ يَأْخُذَهُ فَضَرَبْتُ بِيَدِي بَيْنَ كَتِفَيْ الْعَبَّاسِ فَقُلْتُ يَا أَبَتِ أَقْسَمْتُ عَلَيْكَ إِلَّا سَلَّمْتَهُ لِعَلِيٍّ قَالَ فَسَلَّمَهُ لَهُ
हमरा सब के [याह्या बिन हम्मद] हमरा सब के [अबू अवानाह] के [अल अ'मासी] स [इस्माइल बिन राजा'] स [अल अब्बास के पूर्व गुलाम उमैर] स [इब्न अब्बास] स कहलक अछि ओ कहलनि; जखन रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ मृत्यु होय गेलै आरू अबू बकर क॑ खलीफा नियुक्त करलऽ गेलै, त॑ अब्बास न॑ अली स॑ रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम द्वारा छोड़लऽ गेलऽ विरासत के बारे म॑ पूछताछ करलकै, तखनिये [अबू बकर] न॑ कहलकै; 'किछु एहन चीज जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा छोड़ल गेल छल आ ओ ओकरा नहि हिला देलक, हम ओकरा नहि हिला देब'। जखन उमर के खलीफा बनाओल गेल त दुनू गोटे अपन मामला के शिकायत उमर सं केलनि, तखन उमर कहलनि; 'जे अबू बकर नहि हिलैत अछि, हम नहि हिलब'। आ जखन उस्मान केँ खलीफा नियुक्त कयल गेल तखन दुनू गोटे उस्मान सँ शिकायत केलनि, उस्मान चुप भ' गेलाह आ माथ झुका लेलनि, इब्न अब्बास कहलनि; 'हमरा चिन्ता छल जे ओ ल' लेत, तें हम अब्बासक कान्हक बीचोबीच हाथ थपड़ी मारि क' कहलियैक; 'हे हमर बाबूजी, अहाँक कसम, अहाँ केँ अली केँ सौंपबाक चाही'। इब्न अब्बास कहलनि; 'त' ओ अली केँ सौंप देलनि'।
Imam Ahmad : 74
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمَّادٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ عَاصِمِ بْنِ كُلَيْبٍ قَالَ حَدَّثَنِي شَيْخٌ مِنْ قُرَيْشٍ مِنْ بَنِي تَيْمٍ قَالَ حَدَّثَنِي فُلَانٌ وَفُلَانٌ وَقَالَ فَعَدَّ سِتَّةً أَوْ سَبْعَةً كُلُّهُمْ مِنْ قُرَيْشٍ فِيهِمْ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الزُّبَيْرِ قَالَ بَيْنَا نَحْنُ جُلُوسٌ عِنْدَ عُمَرَ إِذْ دَخَلَ عَلِيٌّ وَالْعَبَّاسُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَدْ ارْتَفَعَتْ أَصْوَاتُهُمَا فَقَالَ عُمَرُ مَهْ يَا عَبَّاسُ قَدْ عَلِمْتُ مَا تَقُولُ تَقُولُ ابْنُ أَخِي وَلِي شَطْرُ الْمَالِ وَقَدْ عَلِمْتُ مَا تَقُولُ يَا عَلِيُّ تَقُولُ ابْنَتُهُ تَحْتِي وَلَهَا شَطْرُ الْمَالِ وَهَذَا مَا كَانَ فِي يَدَيْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَدْ رَأَيْنَا كَيْفَ كَانَ يَصْنَعُ فِيهِ فَوَلِيَهُ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مِنْ بَعْدِهِ فَعَمِلَ فِيهِ بِعَمَلِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ وَلِيتُهُ مِنْ بَعْدِ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَأَحْلِفُ بِاللَّهِ لَأَجْهَدَنَّ أَنْ أَعْمَلَ فِيهِ بِعَمَلِ رَسُولِ اللَّهِ وَعَمَلِ أَبِي بَكْرٍ ثُمَّ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَحَلَفَ بِأَنَّهُ لَصَادِقٌ أَنَّهُ سَمِعَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّبِيَّ لَا يُورَثُ وَإِنَّمَا مِيرَاثُهُ فِي فُقَرَاءِ الْمُسْلِمِينَ وَالْمَسَاكِينِ و حَدَّثَنِي أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَحَلَفَ بِاللَّهِ إِنَّهُ صَادِقٌ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ النَّبِيَّ لَا يَمُوتُ حَتَّى يَؤُمَّهُ بَعْضُ أُمَّتِهِ وَهَذَا مَا كَانَ فِي يَدَيْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَدْ رَأَيْنَا كَيْفَ كَانَ يَصْنَعُ فِيهِ فَإِنْ شِئْتُمَا أَعْطَيْتُكُمَا لِتَعْمَلَا فِيهِ بِعَمَلِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَعَمَلِ أَبِي بَكْرٍ حَتَّى أَدْفَعَهُ إِلَيْكُمَا قَالَ فَخَلَوَا ثُمَّ جَاءَا فَقَالَ الْعَبَّاسُ ادْفَعْهُ إِلَى عَلِيٍّ فَإِنِّي قَدْ طِبْتُ نَفْسًا بِهِ لَهُ
हमरा सभ [याह्या बिन हम्मद] केँ कहि ओ कहलनि; हमरा सभ केँ [अबू अवानाह] केँ [अशिम बिन कुलैब] सँ कहने छथि ओ कहलनि; हमरा [बनी तैम के एकटा कुरैश शेख] कहि ओ कहलनि; हमरा फल्लाँ फल्लाँ कहि देने छल आ ओ कहलक; तें ओ छह-सात गोटेक जिक्र केलनि जे सब कुरैश सं छलाह जाहि में [अब्दुल्लाह बिन अज़ जुबैर] सेहो शामिल छलाह, ओ कहलनि; जखन हम सब उमर के बगल में बैसल छलहुं त अचानक अली आ अब्बास आवाज उठौने भीतर आबि गेलाह, तें [उमर] कहलनि; 'चुप्पी, हे अब्बास! हमरा पहिने स बुझल अछि जे अहाँ की कहय जा रहल छी, अहाँ कहलौं हमर भाई के बेटा आ हमरा आधा संपत्ति भेटैत अछि। आ हमहूँ पहिने सँ जनैत छी जे अहाँ की कहब हे अली, अहाँ कहब जे हुनकर बेटी हमर देखरेख मे अछि, तेँ ओ आधा संपत्ति बाँटि लेताह, आ ई बात रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय मे भेल छल, त हम सब देखलहुँ जे ओ एहि मामला मे कोना निर्णय लेलनि, तखन अबू बकर रसुलुल्लाह के बाद आगू बढ़लाह आ जे रसुलुल्लाह केने छलाह से केलनि, तखन हम अबू बकर के गेलाक बाद आगू बढ़लहुं, त हम अल्लाह के नाम पर कसम खाउ जे गंभीरता स एहि मामला के फैसला करू जेना कि रसुलुल्लाह आ अबू बकर' केने छलाह | तखन ओ कहलनि; 'आ अबू बकर हमरा कहलनि आ कसम खा लेलनि जे ओ ईमानदारी सँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छलाह: 'सत्ते नबी के विरासत मे नहि भेटलनि, मात्र हुनकर विरासत मुसलमान मे जरूरतमंद आ जरूरतमंद मे बाँटल गेल छल।' आरू [अबू बकर] न॑ हमरा बतैन॑ छै आरू अल्लाह के नाम स॑ कसम खाय छै कि वू ईमानदार छै, कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै: ‘वास्तव म॑ एगो पैगम्बर तब तलक नै मरतै जब॑ तलक ओकरऽ कुछ लोग ओकरा इमाम नै बनाबै छै’ । आ ई -खजाना- कहियो रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हाथ में छल, आ हम सब देखलौं जे ओ एहि मामला में कोना केने छलाह, जौं अहाँ चाहब त हम अहाँ दुनू गोटे के देब जाहि स अहाँ सब एकर व्यवहार ओहि हिसाब स करू जेना रसुलुल्लाह आ अबू बकर केने छलाह, ताहि लेल हम अहाँ दुनू गोटे के देब'। अब्दुल्ला बिन जुबैर कहलनि; तेँ दुनू गोटे चलि गेलाह, तखन दुनू गोटे घुरि गेलाह, अब्बास कहलनि; 'अली के दियौ किएक त' सचमुच अली के देबय लेल आत्मा शांतिपूर्ण भ' जाइत अछि'.
Imam Ahmad : 75
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ عَطَاءٍ قَالَ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ فَاطِمَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا جَاءَتْ أَبَا بَكْرٍ وَعُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا تَطْلُبُ مِيرَاثَهَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَا إِنَّا سَمِعْنَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنِّي لَا أُورَثُ
हमरा लोकनि [अब्दुल वहाब बिन 'अथो`] केँ कहि क' ओ कहलनि; हमरा सब [मुहम्मद बिन अमरू] के [अबू सलामाह] स [अबू हुरैरा] स रिपोर्ट केने छथि जे फातिमा अबू बकर आ उमर के पास आयल छलीह, अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स हुनकर विरासत के हिस्सा मांगैत छलीह, तखन [अबू बकर] आ [उमर] कहलनि; 'सत्ते, हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनलहुं: 'वास्तव में हमरा विरासत में नहिं भेटल अछि'।
Imam Ahmad : 76
حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ قَالَ حَدَّثَنَا عِيسَى يَعْنِي ابْنَ الْمُسَيَّبِ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ قَالَ إِنِّي لَجَالِسٌ عِنْدَ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَلِيفَةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدَ وَفَاةِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِشَهْرٍ فَذَكَرَ قِصَّةً فَنُودِيَ فِي النَّاسِ أَنَّ الصَّلَاةَ جَامِعَةٌ وَهِيَ أَوَّلُ صَلَاةٍ فِي الْمُسْلِمِينَ نُودِيَ بِهَا إِنَّ الصَّلَاةَ جَامِعَةٌ فَاجْتَمَعَ النَّاسُ فَصَعِدَ الْمِنْبَرَ شَيْئًا صُنِعَ لَهُ كَانَ يَخْطُبُ عَلَيْهِ وَهِيَ أَوَّلُ خُطْبَةٍ خَطَبَهَا فِي الْإِسْلَامِ قَالَ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ وَلَوَدِدْتُ أَنَّ هَذَا كَفَانِيهِ غَيْرِي وَلَئِنْ أَخَذْتُمُونِي بِسُنَّةِ نَبِيِّكُمْ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا أُطِيقُهَا إِنْ كَانَ لَمَعْصُومًا مِنْ الشَّيْطَانِ وَإِنْ كَانَ لَيَنْزِلُ عَلَيْهِ الْوَحْيُ مِنْ السَّمَاءِ
हमरा सब [हसीम बिन अल कासिम] के कहला के बाद ओ कहलनि; हमरा सब के [ईसा अर्थात इब्न अल मुसैयब] [कायस बिन अबू हाजिम] स कहने छथि ओ कहलनि; जखन हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के निधन के एक महीना बाद रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खलीफा [अबू बकर] ऐश सिद्दीक के बगल में बैसल रही त अबू बकर तखन हमरा एकटा कहानी सुनौलनि; अचानक जनताक सामने घोषणा कयल गेल; 'सत्ते प्रार्थना मंडली मे होइत छैक'। आ ई पहिल नमाज छल जे मुसलमान लोकनि एकरा कहि क' केने छलाह; 'सत्ते प्रार्थना मंडली मे होइत छैक'। अस्तु, लोक जमा भ' गेल, तखन अबू बकर मंच पर चढ़ि गेलाह, ओ जगह जे हुनका एहि पर प्रचार करबाक लेल बनाओल गेल छलनि, आ ओ छल पहिल प्रवचन जे हुनका इस्लाम मे अनुभव भेलनि'. कैस कहलकै; तखन अबू बकर अल्लाह के स्तुति आ महिमामंडन केलनि आ कहलनि; 'हे लोक सभ, हमरा बहुत खुशी होयत जँ एहि मामला मे हमरा छोड़ि कियो आओर हमरा जगह लेत, आ जँ अहाँ हमरा पर अपन पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केर सुन्नत सँ मुकदमा करब, तखन हम एकरा स्वीकार नहि करब, कारण ओ शैतान सँ सुरक्षित छथि आ आकाश सँ हुनका लग वहाई उतरि गेल अछि'।
Imam Ahmad : 77
حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ حَدَّثَنَا شَيْبَانُ عَنْ لَيْثٍ عَنْ مُجَاهِدٍ قَالَ قَالَ أَبُو بَكْرٍ الصِّدِّيقُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَمَرَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ أَقُولَ إِذَا أَصْبَحْتُ وَإِذَا أَمْسَيْتُ وَإِذَا أَخَذْتُ مَضْجَعِي مِنْ اللَّيْلِ اللَّهُمَّ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ أَنْتَ رَبُّ كُلِّ شَيْءٍ وَمَلِيكُهُ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُكَ وَرَسُولُكَ أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي وَشَرِّ الشَّيْطَانِ وَشِرْكِهِ وَأَنْ أَقْتَرِفَ عَلَى نَفْسِي سُوءًا أَوْ أَجُرَّهُ إِلَى مُسْلِمٍ آخِرُ مُسْنَدِ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ
हमरा सब के [हसीम बिन अल कासिम] हमरा सब के [शैबान] के [लैट्स] स [मुजाहिद] स कहलक अछि ओ कहलनि, [अबू बकर] ऐश शिद्दिक कहलनि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा सब दिन भोरे, साँझ आ राति मे सुतय सँ पहिने पढ़बाक आदेश देलनि: 'अल्लाहुम्मा फअथिरास समवाती वाल अर्दली 'आलिमाल घैबी वसी श्याहादह अनता रब्बा कुल्ली स्याई'इन वा मालीकुहू, अस्यहदु अनला इलाहा इल्ला अनता वहदका लाआ स्यारीइकलका वा अन्ना मुहम्मदन अब्दुका वा रसूलुका आऊउद्जुबिका मिन स्यारी नफसी वा स्यारीसी स्याइथानी वा सिरकिहि वा एक अकतरीफा आला नफसी सुआन अजुर्रुहु इला मुस्लिम -हे अल्लाह, आकाश और धरती के रचयिता, जो सब जानकार हैं | अदृश्य आ दृश्यमान, अहाँ सब वस्तुक रब्ब आ ओकर मालिक छी, हम गवाही दैत छी जे अहाँक छोड़ि कोनो देवता नहि छथि -जिनका पूजा करबाक अधिकार छनि- अहाँक असगर कोनो साथी नहि छथि, आ हम गवाही दैत छी जे मुहम्मद अहाँक सेवक आ दूत छथि, हम अहाँक शरण लैत छी हमर आत्मा आ शैतान आ ओकर सहयोगी सभक बुराई सँ, आ अपन आत्माक विरुद्ध बुराई करबा सँ वा ओकरा दोसर मुसलमान पर स्थानांतरित करबा सँ'।
Imam Ahmad : 78
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ حَارِثَةَ قَالَ جَاءَ نَاسٌ مِنْ أَهْلِ الشَّامِ إِلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالُوا إِنَّا قَدْ أَصَبْنَا أَمْوَالًا وَخَيْلًا وَرَقِيقًا نُحِبُّ أَنْ يَكُونَ لَنَا فِيهَا زَكَاةٌ وَطَهُورٌ قَالَ مَا فَعَلَهُ صَاحِبَايَ قَبْلِي فَأَفْعَلَهُ وَاسْتَشَارَ أَصْحَابَ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَفِيهِمْ عَلِيٌّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ عَلِيٌّ هُوَ حَسَنٌ إِنْ لَمْ يَكُنْ جِزْيَةً رَاتِبَةً يُؤْخَذُونَ بِهَا مِنْ بَعْدِكَ
हमरा सभ केँ [अब्दुररहमान बिन महदी] केँ [सुफयान] सँ [अबू इशाक] सँ [हरितसाह] सँ कहिकय ओ कहलनि; सीरिया सं लोकक एकटा समूह उमर लग आयल, तखन ओ सभ कहलक; 'सत्ते, हमरा सभ लग धन, घोड़ा आ गुलाम अछि, आ हम सभ ओकरा सभसँ जकात आ शुद्धि देबय चाहैत छी'। [उमर] उत्तर देलनि; 'जेना हमर दुनू मित्र हमरासँ पहिने केने छलाह, हमहूँ ओहिना करब जेना दुनू गोटे केने छलाह' । तखन ओ पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सब स परामर्श केलनि आ ओहि मे अली सेहो छलाह, तखन अली कहलनि; 'अहाँक बाद हुनका सभसँ लेल गेल नियमित कर नहि तँ नीक अछि' ।
Imam Ahmad : 79
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنِ الْحَكَمِ عَنْ أَبِي وَائِلٍ أَنَّ الصُّبَيَّ بْنَ مَعْبَدٍ كَانَ نَصْرَانِيًّا تَغْلِبِيًّا أَعْرَابِيًّا فَأَسْلَمَ فَسَأَلَ أَيُّ الْعَمَلِ أَفْضَلُ فَقِيلَ لَهُ الْجِهَادُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فَأَرَادَ أَنْ يُجَاهِدَ فَقِيلَ لَهُ حَجَجْتَ فَقَالَ لَا فَقِيلَ حُجَّ وَاعْتَمِرْ ثُمَّ جَاهِدْ فَانْطَلَقَ حَتَّى إِذَا كَانَ بِالْحَوَابِطِ أَهَلَّ بِهِمَا جَمِيعًا فَرَآهُ زَيْدُ بْنُ صُوحَانَ وَسَلْمَانُ بْنُ رَبِيعَةَ فَقَالَا لَهُوَ أَضَلُّ مِنْ جَمَلِهِ أَوْ مَا هُوَ بِأَهْدَى مِنْ نَاقَتِهِ فَانْطَلَقَ إِلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَأَخْبَرَهُ بِقَوْلِهِمَا فَقَالَ هُدِيتَ لِسُنَّةِ نَبِيِّكَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْحَكَمُ فَقُلْتُ لِأَبِي وَائِلٍ حَدَّثَكَ الصُّبَيُّ فَقَالَ نَعَمْ
हमरा सब के [मुहम्मद बिन जा'फर] के कहने छथि जे ओ कहलनि; हमरा सब [स्यूबाह] के [अल हकम] स [अबू व`इल] स कहल गेल अछि जे [शुबै बिन मा'बाद] पहिने अरब तगलीब कबीला के ईसाई छलाह, फेर इस्लाम स्वीकार केलनि, तखन ओ पूछलनि; 'सबसँ बेसी जरूरी प्रथा की अछि ?' तेना हुनका कहल गेलनि। 'अल्लाह के रास्ता में जिहाद' तखन ओ जिहाद करय चाहैत छलाह मुदा हुनका सं पूछल गेलनि; 'अहाँ हज केने छी?' ओ उत्तर देलथिन; 'एखन धरि नहि' हुनका कहल गेलनि; 'हज आ उमरा करू तखन जिहाद करू'। तें ओ चलैत रहलाह जाबत धरि ओ कोनो सूखल जगह पर नहिं पहुँचि गेलाह, तखन हज आ उमरा करय के इरादा रखैत छलाह, आ जखन जैद बिन शुहान आ सलमान बिन रबियाह के देखलनि त दुनू गोटे कहलनि; 'ओ अपन ऊँट सँ बेसी भटकल अछि,' वा; 'ओ अपन ऊँटसँ बेसी मार्गदर्शित नहि छथि' । अस्तु, ओ उमर लग आबि गेलाह आ जैद आ सलमानक कहल बात कहलनि, तें [उमर] कहलनि; 'अहाँ अपन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सुन्नत के पालन केने छी।' अल हकम कहलनि; तेँ हम अबू वा`इलसँ पुछलियनि; 'शुबे कहलक ?' ओ उत्तर देलथिन; 'हँ'।
Imam Ahmad : 80
حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ قَالَ سَمِعْتُ عَمْرَو بْنَ مَيْمُونٍ قَالَ صَلَّى بِنَا عُمَرُ بِجَمْعٍ الصُّبْحَ ثُمَّ وَقَفَ وَقَالَ إِنَّ الْمُشْرِكِينَ كَانُوا لَا يُفِيضُونَ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ وَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَالَفَهُمْ ثُمَّ أَفَاضَ قَبْلَ أَنْ تَطْلُعَ الشَّمْسُ
हमरा सब स [अफ्फान] हमरा सब स [स्यूबाह] स संबंधित केने छथि [अबू इशाक] स ओ कहलनि; सुनलहुँ ['अमरू बिन मैमुन] कहैत छथि; [उमर] मुजदलिफा मे हमरा सभक संग भोरक नमाज केलनि तखन ठाढ़ भ' क' कहलनि; 'वास्तव में मुश्रिक लोकनि मुजदलिफा सं ता धरि नहिं छोड़लनि जा धरि सूर्य नहिं निकलल छल आ सचमुच अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका लोकनिक संग कोनो फर्क क' देने छलाह, जाहि सं ओ सूर्य उगय सं पहिने मुजदलिफा सं बाहर निकलि गेलाह'.