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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
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इमाम अहमद (الامام احمد) - 26363 हदीस

नेतृत्व चुनाव के दौरान अबू बकर का अनुभव

इमाम अहमद : 41

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَيَّاشٍ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ قَالَ أَخْبَرَنِي يَزِيدُ بْنُ سَعِيدِ بْنِ ذِي عَصْوَانَ الْعَنْسِيُّ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ اللَّخْمِيِّ عَنْ رَافِعٍ الطَّائِيِّ رَفِيقِ أَبِي بَكْرٍ فِي غَزْوَةِ السُّلَاسِلِ قَالَ وَسَأَلْتُهُ عَمَّا قِيلَ مِنْ بَيْعَتِهِمْ فَقَالَ وَهُوَ يُحَدِّثُهُ عَمَّا تَكَلَّمَتْ بِهِ الْأَنْصَارُ وَمَا كَلَّمَهُمْ بِهِ وَمَا كَلَّمَ بِهِ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ الْأَنْصَارَ وَمَا ذَكَّرَهُمْ بِهِ مِنْ إِمَامَتِي إِيَّاهُمْ بِأَمْرِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي مَرَضِهِ فَبَايَعُونِي لِذَلِكَ وَقَبِلْتُهَا مِنْهُمْ وَتَخَوَّفْتُ أَنْ تَكُونَ فِتْنَةٌ تَكُونُ بَعْدَهَا رِدَّةٌ

हमें [अली बिन अय्यासी] ने बताया है, हमें [अल वालिद बिन मुस्लिम] ने बताया है; उन्होंने कहा; हमें [यज़ीद बिन सईद बिन दज़ी अशवान अल अंसी] ने [अब्दुल मलिक बिन उमैर अल लखमी] से [रफ़ी अथ थाई] से बताया है, जो व्यक्ति अस सुलासिल की लड़ाई में [अबू बकर] के साथ था, उसने कहा; मैंने उनसे उन शब्दों के बारे में पूछा जो उन्होंने बैअत लेते समय कहे थे, तो उन्होंने रफ़ी को बताते हुए कहा कि अंसार लोगों ने क्या कहा, और उन्होंने उनसे क्या कहा, साथ ही उमर बिन अल खत्थब ने अंसार लोगों से क्या कहा और उन्होंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आदेश पर मेरे नेतृत्व के बारे में उन्हें क्या बताया, जब वह बीमार थे, तो उन्होंने मुझे इसके लिए बैअत दी और मैंने भी उनसे इसे स्वीकार कर लिया, और मुझे चिंता थी कि बदनामी होगी जो बाद में धर्मत्याग का कारण बनेगी।

अबू बकर द्वारा धर्मत्यागियों से लड़ने के लिए खालिद बिन वालिद की नियुक्ति

इमाम अहमद : 42

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَيَّاشٍ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنِي وَحْشِيُّ بْنُ حَرْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ وَحْشِيِّ بْنِ حَرْبٍ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَقَدَ لِخَالِدِ بْنِ الْوَلِيدِ عَلَى قِتَالِ أَهْلِ الرِّدَّةِ وَقَالَ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ نِعْمَ عَبْدُ اللَّهِ وَأَخُو الْعَشِيرَةِ خَالِدُ بْنُ الْوَلِيدِ وَسَيْفٌ مِنْ سُيُوفِ اللَّهِ سَلَّهُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ عَلَى الْكُفَّارِ وَالْمُنَافِقِينَ

हमें [अली बिन अय्यासी] ने बताया है, हमें [अल वालिद बिन मुस्लिम] ने मुझे [वहसी बिन हर्ब] अपने पिता से [अपने दादा] वहसी बिन हर्ब से बताया है कि [अबू बक्र] ने खालिद बिन वालिद को धर्मत्यागियों से लड़ने के लिए नियुक्त किया, फिर कहा; वास्तव में, मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए सुना: "अल्लाह का सबसे अच्छा बंदा और साथी खालिद बिन अल वालिद है और अल्लाह की तलवारों में से एक है, जिसे अल्लाह अविश्वासियों और पाखंडियों के खिलाफ चलाता है।"

परमेश्‍वर से सुरक्षा माँगने और ईमानदार होने का महत्व

इमाम अहमद : 43

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ يَعْنِي ابْنَ صَالِحٍ عَنْ سُلَيْمِ بْنِ عَامِرٍ الْكَلَاعِيِّ عَنْ أَوْسَطَ بْنِ عَمْرٍو قَالَ قَدِمْتُ الْمَدِينَةَ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِسَنَةٍ فَأَلْفَيْتُ أَبَا بَكْرٍ يَخْطُبُ النَّاسَ فَقَالَ قَامَ فِينَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَامَ الْأَوَّلِ فَخَنَقَتْهُ الْعَبْرَةُ ثَلَاثَ مِرَارٍ ثُمَّ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ سَلُوا اللَّهَ الْمُعَافَاةَ فَإِنَّهُ لَمْ يُؤْتَ أَحَدٌ مِثْلَ يَقِينٍ بَعْدَ مُعَافَاةٍ وَلَا أَشَدَّ مِنْ رِيبَةٍ بَعْدَ كُفْرٍ وَعَلَيْكُمْ بِالصِّدْقِ فَإِنَّهُ يَهْدِي إِلَى الْبِرِّ وَهُمَا فِي الْجَنَّةِ وَإِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ فَإِنَّهُ يَهْدِي إِلَى الْفُجُورِ وَهُمَا فِي النَّارِ

हमें [अब्दुर्रहमान बिन महदी] ने बताया है कि हमें [मुअविया यानी इब्न सलीह] ने [सुलैम बिन 'अमीर अल कुलाई] से [औसथ बिन 'अमरू] से बताया है, उन्होंने कहा; मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मौत के एक साल बाद मदीना पहुँचा, तो मैंने [अबू बकर] को लोगों के सामने खुतबा देते हुए पाया और कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहले साल हमारे सामने खड़े हुए, उन्हें यह बात तीन बार रुलाई आई, फिर उन्होंने कहा "ऐ लोगों, अल्लाह से मुक्ति मांगो, क्योंकि सच में मुक्ति के बाद किसी को ऐसा ईमान नहीं दिया जाता, और अविश्वास के बाद शक से ज़्यादा बुरा कुछ नहीं है। ईमानदार बनो क्योंकि यह अच्छाई की ओर ले जाता है और दोनों स्वर्ग की ओर ले जाते हैं, और झूठ से दूर रहो क्योंकि यह पाप की ओर ले जाता है और दोनों नरक की ओर ले जाएंगे।"

अबू बकर की वसीयत, सोमवार को उनके अंतिम संस्कार के संबंध में

इमाम अहमद : 44

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُيَسَّرٍ أَبُو سَعْدٍ الصَّاغَانِيُّ الْمَكْفُوفُ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لَمَّا حَضَرَتْهُ الْوَفَاةُ قَالَ أَيُّ يَوْمٍ هَذَا قَالُوا يَوْمُ الِاثْنَيْنِ قَالَ فَإِنْ مِتُّ مِنْ لَيْلَتِي فَلَا تَنْتَظِرُوا بِي الْغَدَ فَإِنَّ أَحَبَّ الْأَيَّامِ وَاللَّيَالِي إِلَيَّ أَقْرَبُهَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

[मुहम्मद बिन मुयस्सर अबू साद अश शगनी अल मकफूफ] ने हमें [हिशाम बिन उरवाह] को [अपने पिता] से [आयशा] से बताया है कि; जब [अबू बक्र] की मौत आई, तो उन्होंने पूछा; "आज कौन सा दिन है?" लोगों ने कहा; "सोमवार" उन्होंने कहा; "अगर मैं अपनी इस रात को मर जाऊं, तो कल तक मेरा इंतज़ार मत करना, क्योंकि मेरे लिए सबसे अच्छे दिन और रातें वे हैं जिनमें मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के सबसे करीब होता हूं।"

अबू बकर की सलाह है कि सुरक्षा मांगें और ईमानदार रहें

इमाम अहमद : 45

حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مُرَّةَ عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ قَالَ قَامَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِعَامٍ فَقَالَ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَقَامِي عَامَ الْأَوَّلِ فَقَالَ سَلُوا اللَّهَ الْعَافِيَةَ فَإِنَّهُ لَمْ يُعْطَ عَبْدٌ شَيْئًا أَفْضَلَ مِنْ الْعَافِيَةِ وَعَلَيْكُمْ بِالصِّدْقِ وَالْبِرِّ فَإِنَّهُمَا فِي الْجَنَّةِ وَإِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ وَالْفُجُورَ فَإِنَّهُمَا فِي النَّارِ

हमें [सुफ़यान] से [वाकी] बताया है, हमें [अबू उबैदा] से [अमरू बिन मुर्रा] बताया है, उन्होंने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम [अबू बक्र] की मौत के एक साल बाद खड़े हुए और कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहले साल मेरे यहाँ खड़े हुए और फिर कहा; "अल्लाह से मुक्ति मांगो क्योंकि बंदों के लिए मुक्ति से बेहतर कोई तोहफ़ा नहीं है, और ईमानदार बनो क्योंकि इससे नेकी मिलती है और दोनों जन्नत की ओर ले जाते हैं, और झूठ और बुराई से दूर रहो क्योंकि ये दोनों ही जहन्नम की ओर ले जाएंगे।"

जब तुम कोई पाप करो तो वुज़ू करने और दो रकात नमाज़ पढ़ने का पैग़म्बर का आदेश

इमाम अहमद : 46

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ الْمُغِيرَةِ قَالَ سَمِعْتُ عَلِيَّ بْنَ رَبِيعَةَ مِنْ بَنِي أَسَدٍ يُحَدِّثُ عَنْ أَسْمَاءَ أَوْ ابْنِ أَسْمَاءَ مِنْ بَنِي فَزَارَةَ قَالَ قَالَ عَلِيٌّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ كُنْتُ إِذَا سَمِعْتُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَيْئًا نَفَعَنِي اللَّهُ بِمَا شَاءَ أَنْ يَنْفَعَنِي مِنْهُ وَحَدَّثَنِي أَبُو بَكْرٍ وَصَدَقَ أَبُو بَكْرٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مِنْ مُسْلِمٍ يُذْنِبُ ذَنْبًا ثُمَّ يَتَوَضَّأُ فَيُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ يَسْتَغْفِرُ اللَّهَ تَعَالَى لِذَلِكَ الذَّنْبِ إِلَّا غَفَرَ لَهُ وَقَرَأَ هَاتَيْنِ الْآيَتَيْنِ { وَمَنْ يَعْمَلْ سُوءًا أَوْ يَظْلِمْ نَفْسَهُ ثُمَّ يَسْتَغْفِرْ اللَّهَ يَجِدْ اللَّهَ غَفُورًا رَحِيمًا } { وَالَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً أَوْ ظَلَمُوا أَنْفُسَهُمْ } الْآيَةَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ عُثْمَانَ مِنْ آلِ أَبِي عُقَيْلٍ الثَّقَفِيِّ إِلَّا أَنَّهُ قَالَ قَالَ شُعْبَةُ وَقَرَأَ إِحْدَى هَاتَيْنِ الْآيَتَيْنِ { مَنْ يَعْمَلْ سُوءًا يُجْزَ بِهِ } { وَالَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً }

हमें बताया है [अब्दुर्रहमान बिन महदी] हमें बताया है [स्यूबा] [उथमन बिन अल मुगीरा] से उन्होंने कहा; मैंने [अली बिन रबीआह को बनी असद में से] [अस्मा] या इब्न अस्मा को बनी फज़रा में से एक कहानी सुनाते हुए सुना, उन्होंने कहा, [अली] ने कहा; अगर मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) से कुछ सुना, तो अल्लाह ने अपनी मर्ज़ी से उसे मेरे लिए फायदेमंद बना दिया, और उन्होंने मुझे [अबू बक्र] बताया और अबू बक्र सही थे, उन्होंने कहा, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "ऐसा कोई मुसलमान नहीं है जो गुनाह करे और फिर वुज़ू करे और दो रकात नमाज़ पढ़े और फिर अल्लाह तआला से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगे, लेकिन अल्लाह उसे ज़रूर माफ़ कर देगा," फिर उन्होंने दो आयतें पढ़ीं। "और जो कोई बुरा काम करे और खुद पर ज़ुल्म करे, फिर अल्लाह से माफ़ी मांगे, तो वह ज़रूर अल्लाह को बहुत माफ़ करने वाला, बहुत रहम करने वाला पाएगा, और जो लोग बुरे काम करते हैं या खुद पर ज़ुल्म करते हैं....) (QS अन निसा'यात 110 - 111)। हमें बताया है [मुहम्मद बिन जाफ़र] हमें स्यू'बा बताया है जो उन्होंने कहा; मैंने अबू उकैल अत्स त्सकाफ़ी के परिवार से उस्मान को कहते सुना; शु'बा ने कहा; और उन्होंने ये दो आयतें पढ़ीं "जो कोई बुरा काम करता है, उसे उसका बदला मिलेगा," और आयत "और जो लोग बुरे काम करते हैं।"

अबू बकर ने सुरक्षा के सिद्धांत पर रसूलुल्लाह शाल्लाहु अलैहि वसल्लम के शब्दों को उद्धृत किया है

इमाम अहमद : 47

حَدَّثَنَا بَهْزُ بْنُ أَسَدٍ حَدَّثَنَا سَلِيمُ بْنُ حَيَّانَ قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ يُحَدِّثُ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ عُمَرَ قَالَ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَطَبَنَا فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَامَ فِينَا عَامَ أَوَّلَ فَقَالَ أَلَا إِنَّهُ لَمْ يُقْسَمْ بَيْنَ النَّاسِ شَيْءٌ أَفْضَلُ مِنْ الْمُعَافَاةِ بَعْدَ الْيَقِينِ أَلَا إِنَّ الصِّدْقَ وَالْبِرَّ فِي الْجَنَّةِ أَلَا إِنَّ الْكَذِبَ وَالْفُجُورَ فِي النَّارِ

हमें [बहज़ बिन असद] ने बताया है, हमें [सलीम बिन हय्यान] ने कहा; मैंने [क़तादा] को [हुमैद बिन अब्दुर्रहमान] से कहते सुना कि [उमर] ने कहा; बेशक [अबू बक्र] ने हमें उपदेश दिया और फिर कहा; वास्तव में, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहले वर्ष में हमारे सामने खड़े हुए और फिर कहा: "जान लो कि इंसानों के बीच ईमान के बाद मुक्ति से ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी साझा नहीं है, जान लो कि ईमानदारी और दयालुता दोनों स्वर्ग की ओर ले जाते हैं, जान लो कि झूठ और बुरे काम नरक की ओर ले जाएंगे।"

अबू बकर को यात्रा के दौरान रसूलल्लाह शल्लाहु अलैहि वसल्लम को पेय देने के लिए संघर्ष करना पड़ा

इमाम अहमद : 48

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا إِسْحَاقَ يَقُولُ سَمِعْتُ الْبَرَاءَ قَالَ لَمَّا أَقْبَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ مَكَّةَ إِلَى الْمَدِينَةِ عَطِشَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَرُّوا بِرَاعِي غَنَمٍ قَالَ أَبُو بَكْرٍ الصِّدِّيقُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَأَخَذْتُ قَدَحًا فَحَلَبْتُ فِيهِ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كُثْبَةً مِنْ لَبَنٍ فَأَتَيْتُهُ بِهِ فَشَرِبَ حَتَّى رَضِيتُ

हमें [मुहम्मद बिन जाफ़र] ने बताया है, हमें [स्यूबा] ने बताया है, उन्होंने कहा; मैंने [अबू इसहाक] को कहते सुना; मैंने [अल बर्रा] को कहते सुना; जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मक्का से मदीना जा रहे थे, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को प्यास लगी, तो वे एक बकरी चराने वाले के पास से गुज़रे, [अबू बकर अश सिद्दीक] ने कहा; मैंने एक जग लिया और उसमें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए थोड़ा दूध निकाला, फिर मैंने उसे दिया और उसने तब तक पिया जब तक मुझे आराम नहीं मिला।

पैगंबर के अनुसार सरकार के उपाय और दुनिया के खुलेपन का खतरा

इमाम अहमद : 49

حَدَّثَنَا بَهْزٌ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ حَدَّثَنَا يَعْلَى بْنُ عَطَاءٍ قَالَ سَمِعْتُ عَمْرَو بْنَ عَاصِمٍ يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُ قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَا رَسُولَ اللَّهِ عَلِّمْنِي شَيْئًا أَقُولُهُ إِذَا أَصْبَحْتُ وَإِذَا أَمْسَيْتُ وَإِذَا أَخَذْتُ مَضْجَعِي قَالَ قُلْ اللَّهُمَّ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ أَوْ قَالَ اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبَّ كُلِّ شَيْءٍ وَمَلِيكَهُ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي وَشَرِّ الشَّيْطَانِ وَشِرْكِهِ حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ قَالَ سَمِعْتُ عَمْرَو بْنَ عَاصِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ

हमें बताया है [बहज़] हमें बताया है [याला बिन अथो] उन्होंने कहा; मैंने ['अमरू बिन 'अशिम] को कहते सुना; मैंने [अबू हुरैरा] को कहते सुना; अबू बकर ने कहा; "अल्लाह के रसूल, मुझे एक प्रार्थना सिखाएं जिसे मैं हर सुबह, शाम और सोने से पहले पढ़ सकूं।" उन्होंने उत्तर दिया; "पढ़ो; 'अल्लाहुम्मा फातिरस समावती वल 'अर्दल 'आलिमल ग़ैबी वासी स्याहादाह' (हे अल्लाह, आकाशों और पृथ्वी के निर्माता, अदृश्य और दृश्यमान के सर्वज्ञ)" या उसने कहा: "अल्लाहुम्मा 'आलिमल ग़ैबी वासी स्याहादाह फातिरस समावती वल'अर्दल रब्बा कुल्ला स्याइन वमालिकाहु, असीहादु अनला इलाहा इल्ला अंता 'अउदज़ुबिका मिन श्यारी नफ़सी वा श्यारीस स्याथोन वासीरकिही (हे अल्लाह, आकाशों और पृथ्वी के निर्माता, अदृश्य और दृश्यमान के सर्वज्ञ, सभी चीजों के स्वामी और उनके मालिक, मैं गवाही देता हूं कि आपके अलावा कोई पूजा के योग्य नहीं है, मैं अपनी बुराई और शैतान की बुराई से आपकी शरण चाहता हूं और उसके साथियों ने)।" उसने कहा, "हमें [अफ़्फ़ान] ने बताया है; उसने हमें [याला बिन अथो] से [स्यूबा] सुनाया और कहा, मैंने [अमरू बिन अशिम बिन अब्दुल्लाह] सुना, तो वह हदीस बताओ जो मतलब वाली हो।

अबू बकर की अस्वीकृत संभावनाओं के विरुद्ध चेतावनी

इमाम अहमद : 50

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ إِسْمَاعِيلَ قَالَ سَمِعْتُ قَيْسَ بْنَ أَبِي حَازِمٍ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ خَطَبَ فَقَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ هَذِهِ الْآيَةَ وَتَضَعُونَهَا عَلَى غَيْرِ مَا وَضَعَهَا اللَّهُ { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا عَلَيْكُمْ أَنْفُسَكُمْ لَا يَضُرُّكُمْ مَنْ ضَلَّ إِذَا اهْتَدَيْتُمْ } سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّاسَ إِذَا رَأَوْا الْمُنْكَرَ بَيْنَهُمْ فَلَمْ يُنْكِرُوهُ يُوشِكُ أَنْ يَعُمَّهُمْ اللَّهُ بِعِقَابِهِ

हमें [मुहम्मद बिन जाफ़र] ने बताया है कि हमें [स्यूबा] ने [इस्माइल] से बताया है, उन्होंने कहा; मैंने [क़ैस बिन अबू हाज़िम] को [अबू बकर अश शिद्दीक] से एक कहानी सुनाते सुना, कि उन्होंने एक खुतबा दिया और फिर कहा; ऐ लोगों, तुम यह आयत तो पढ़ते हो, लेकिन तुम इसे उस तरह नहीं रखते जैसा अल्लाह चाहता था; "ऐ ईमान वालों, अपना ख्याल रखो; अगर तुम्हें रास्ता मिल गया तो कोई गुमराह तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकता।" (QS अल माइदा आयत 105), मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना: "बेशक, अगर लोग अपने बीच बुराई देखते हैं और फिर उससे इनकार नहीं करते, तो डर है कि अल्लाह उन सभी पर एक जैसा अज़ाब डालेगा।"

पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद हिंसा का प्रयोग न करने का अबू बकर का आदेश

इमाम अहमद : 51

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ تَوْبَةَ الْعَنْبَرِيِّ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا سَوَّارٍ الْقَاضِيَ يَقُولُ عَنْ أَبِي بَرْزَةَ الْأَسْلَمِيِّ قَالَ أَغْلَظَ رَجُلٌ لِأَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ فَقَالَ أَبُو بَرْزَةَ أَلَا أَضْرِبُ عُنُقَهُ قَالَ فَانْتَهَرَهُ وَقَالَ مَا هِيَ لِأَحَدٍ بَعْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

मुहम्मद बिन जाफ़र ने हमें बताया है कि स्यूबा ने तौबा अल अनबारी से कहा है कि मैंने अबू सव्वर अल कादली को कहते सुना है, अबू बरज़ाह अल असलमी से उन्होंने कहा कि एक आदमी ने अबू बकर अस सिद्दीक के साथ बुरा बर्ताव किया, अबू सव्वर ने कहा, फिर अबू बरज़ाह ने कहा कि क्या मैं उसकी गर्दन काट सकता हूँ? अबू बकर ने उसे डांटा और उसने जवाब दिया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद किसी के साथ ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।

नबी के हुक्म के मुताबिक वुज़ू के दौरान खुफ़ का मसह करने की हुक्म

इमाम अहमद : 52

حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا لَيْثٌ حَدَّثَنِي عُقَيْلٌ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا أَخْبَرَتْهُ أَنَّ فَاطِمَةَ بِنْتَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرْسَلَتْ إِلَى أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ تَسْأَلُهُ مِيرَاثَهَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَيْهِ بِالْمَدِينَةِ وَفَدَكَ وَمَا بَقِيَ مِنْ خُمُسِ خَيْبَرَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ إِنَّمَا يَأْكُلُ آلُ مُحَمَّدٍ فِي هَذَا الْمَالِ وَإِنِّي وَاللَّهِ لَا أُغَيِّرُ شَيْئًا مِنْ صَدَقَةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ حَالِهَا الَّتِي كَانَتْ عَلَيْهَا فِي عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَأَعْمَلَنَّ فِيهَا بِمَا عَمِلَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَبَى أَبُو بَكْرٍ أَنْ يَدْفَعَ إِلَى فَاطِمَةَ مِنْهَا شَيْئًا فَوَجَدَتْ فَاطِمَةُ عَلَى أَبِي بَكْرٍ فِي ذَلِكَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَقَرَابَةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَحَبُّ إِلَيَّ أَنْ أَصِلَ مِنْ قَرَابَتِي وَأَمَّا الَّذِي شَجَرَ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ مِنْ هَذِهِ الْأَمْوَالِ فَإِنِّي لَمْ آلُ فِيهَا عَنْ الْحَقِّ وَلَمْ أَتْرُكْ أَمْرًا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَصْنَعُهُ فِيهَا إِلَّا صَنَعْتُهُ

हमें [हज्जाज बिन मुहम्मद] ने बताया है हमें [लैतस] ने बताया है मुझे [उकैल] [इब्न शिहाब] से [उरवाह बिन जुबैर] से [ऐस्या] पैगंबर की पत्नी से, उसने उन्हें सूचित किया, कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बेटी फातिमा ने अबू बकर अश शिद्दीक को एक पत्र भेजा जिसमें उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अपनी विरासत का हिस्सा मांगा कि अल्लाह ने उनके लिए मदीना में फाई संपत्ति, फदक और खैबर युद्ध के शेष पांचवें हिस्से को बनाया, फिर [अबू बकर] ने उत्तर दिया; असल में, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: "हमें विरासत में कुछ नहीं मिलता, हम जो दौलत छोड़ते हैं वह खैरात है, बस मुहम्मद का परिवार इस दौलत से खाता है", और सच में, अल्लाह की कसम, मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खैरात में कुछ भी नहीं बदलूंगा जो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय से शुरू से मौजूद है, और मैं इसे वैसे ही पूरा करूंगा जैसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि ने किया था। वसल्लम।" तब अबू बकर ने फातिमा को उसमें से थोड़ा सा भी देने से मना कर दिया, जिससे फातिमा को इस मामले में अबू बकर के बारे में बुरा लगा, तो अबू बकर ने कहा; "जिसके हाथों में मेरी जान है, उसकी कसम, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के करीबी रिश्तेदार मेरे लिए मेरे परिवार के करीबी लोगों से भी ज़्यादा प्यारे हैं, जहाँ तक इस खजाने के बारे में मेरे और आपके बीच जो कुछ भी होता है, मैं इस मामले में अल हक से मुँह नहीं मोड़ूँगा, और मैं उस मामले को नहीं छोड़ूँगा जिसे मैंने अल्लाह के रसूल को करते देखा है, हालाँकि मैं इसे करूँगा।"

शुक्रवार की प्रार्थना के लिए जाने से पहले स्नान करने का महत्व

इमाम अहमद : 53

حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي زُرْعَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ رَبِيعَةَ عَنْ أَسْمَاءَ بْنِ الْحَكَمِ الْفَزَارِيِّ قَالَ سَمِعْتُ عَلِيًّا كَرَّمَ اللَّهُ وَجْهَهُ قَالَ كُنْتُ إِذَا سَمِعْتُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثًا نَفَعَنِي اللَّهُ بِهِ بِمَا شَاءَ أَنْ يَنْفَعَنِي مِنْهُ وَإِذَا حَدَّثَنِي غَيْرُهُ اسْتَحْلَفْتُهُ فَإِذَا حَلَفَ لِي صَدَّقْتُهُ وَحَدَّثَنِي أَبُو بَكْرٍ وَصَدَقَ أَبُو بَكْرٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مِنْ عَبْدٍ مُؤْمِنٍ يُذْنِبُ ذَنْبًا فَيَتَوَضَّأُ فَيُحْسِنُ الطُّهُورَ ثُمَّ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ فَيَسْتَغْفِرُ اللَّهَ تَعَالَى إِلَّا غَفَرَ اللَّهُ لَهُ ثُمَّ تَلَا { وَالَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً أَوْ ظَلَمُوا أَنْفُسَهُمْ }

हमें बताया है [अबू कामिल] हमें बताया है [अबू अवाना] हमें बताया है [उथमन बिन अबू ज़ुरा] [अली बिन रबीआ] से [अस्मा' बिन अल हकम अल फज़री] ने कहा; मैंने [अली] को कहते सुना; अगर मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कोई हदीस सुनता हूं, तो अल्लाह मुझे उससे जैसा चाहता है लाभ प्रदान करता है। और अगर कोई और मुझे इसे बताता है, तो मैं उससे कसम खाने के लिए कहता हूं, अगर उसने मुझसे कसम खाई है तो मैं इसकी पुष्टि करता हूं। वास्तव में [अबू बकर] ने मुझे बताया है और यह सच है कि अबू बकर ने कहा कि उसने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए सुना था: "ऐसा कोई आदमी नहीं है जो पाप करे और फिर वुज़ू करे और अपना वुज़ू ठीक कर ले, फिर वह दो रकअत नमाज़ पढ़े और अल्लाह तआला से क्षमा मांगे, जब तक कि अल्लाह निश्चित रूप से उसके पाप को क्षमा न कर दे।" फिर उन्होंने पढ़ा "और जो लोग बुरे काम करते हैं या खुद पर ज़ुल्म करते हैं।"

अबू बकर के आदेश पर कुरान का संग्रह

इमाम अहमद : 54

حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ بْنِ السَّبَّاقِ عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ قَالَ أَرْسَلَ إِلَيَّ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مَقْتَلَ أَهْلِ الْيَمَامَةِ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ يَا زَيْدُ بْنَ ثَابِتٍ أَنْتَ غُلَامٌ شَابٌّ عَاقِلٌ لَا نَتَّهِمُكَ قَدْ كُنْتَ تَكْتُبُ الْوَحْيَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَتَتَبَّعْ الْقُرْآنَ فَاجْمَعْهُ

हमें बताया है [अबू कामिल] हमें बताया है [इब्राहिम बिन साद] हमें बताया है [इबनू शिहाब] [उबैद बिन अस सब्बाक] से [ज़ैद बिन साबित] उसने कहा; [अबू बक्र] ने मुझे उस जगह भेजा जहाँ यमामा के लोग लड़ रहे थे, फिर अबू बक्र ने कहा; "ऐ ज़ैद बिन साबित, तुम एक समझदार नौजवान हो जिस पर हमें कोई शक नहीं है, क्योंकि तुमने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए आयतें लिखी हैं, इसलिए कुरान को खोजो और इकट्ठा करो।"

अपने एक सेवक को खुली दुनिया के खतरे के बारे में चेतावनी

इमाम अहमद : 55

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا أَنَّ فَاطِمَةَ وَالْعَبَّاسَ أَتَيَا أَبَا بَكْرٍ يَلْتَمِسَانِ مِيرَاثَهُمَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُمَا حِينَئِذٍ يَطْلُبَانِ أَرْضَهُ مِنْ فَدَكَ وَسَهْمَهُ مِنْ خَيْبَرَ فَقَالَ لَهُمَا أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ وَإِنَّمَا يَأْكُلُ آلُ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي هَذَا الْمَالِ وَإِنِّي وَاللَّهِ لَا أَدَعُ أَمْرًا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَصْنَعُهُ فِيهِ إِلَّا صَنَعْتُهُ

हमको [अब्दुर्रज्जाक] बताया गया है कि हमको [ममार] [अज़ ज़ुहरी] से [उरवाह] से [ऐस्या] से बताया गया है कि फातिमा और अल अब्बास अबू बकर के पास रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अपनी विरासत में हिस्सा मांगने आए थे, उस समय उन दोनों ने रसूलुल्लाह से फ़दक़ युद्ध से ज़मीन का हिस्सा और ख़ैबर युद्ध से उनका हिस्सा मांगा, तो [अबू बकर] ने उन दोनों से कहा; वास्तव में, मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए सुना: "हमें विरासत में नहीं मिला है, हम जो पीछे छोड़ते हैं वह खैरात है, यह सिर्फ इतना है कि मुहम्मद का परिवार इस धन से खाता है।" और अल्लाह की कसम, मैं उस चीज़ को नहीं छोड़ूंगा जो मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को करते देखा, लेकिन मैं इसे निश्चित रूप से करूंगा।

अबू बकर को खलीफतुल्लाह कहलाने से इनकार

इमाम अहमद : 56

حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ دَاوُدَ حَدَّثَنَا نَافِعٌ يَعْنِي ابْنَ عُمَرَ عَنْ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ قَالَ قِيلَ لِأَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَا خَلِيفَةَ اللَّهِ فَقَالَ أَنَا خَلِيفَةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا رَاضٍ بِهِ وَأَنَا رَاضٍ بِهِ وَأَنَا رَاضٍ

मूसा बिन दाऊद ने हमें बताया है कि नफी यानी इब्न उमर ने इब्न अबीमुलैका से कहा कि अबू बक्र से कहा, "ऐ खलीफतुल्लाह" तो अबू बक्र ने कहा, "मैं रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का खलीफा हूं, और मैं इस टाइटल से खुश हूं, और मैं इस टाइटल से खुश हूं, और मैं इस टाइटल से खुश हूं।"

पैगंबर शालल्लाहु अलैहि वसल्लम की विरासत के बारे में फातिमा और अबू बकर की बातचीत

इमाम अहमद : 57

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ أَنَّ فَاطِمَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ لِأَبِي بَكْرٍ مَنْ يَرِثُكَ إِذَا مِتَّ قَالَ وَلَدِي وَأَهْلِي قَالَتْ فَمَا لَنَا لَا نَرِثُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّبِيَّ لَا يُورَثُ وَلَكِنِّي أَعُولُ مَنْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعُولُ وَأُنْفِقُ عَلَى مَنْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُنْفِقُ

हमें [अफ़्फ़ान] ने बताया है कि हमें [हम्मद बिन सलमा] ने [मुहम्मद बिन अमरू] से [अबू सलमा] से बताया है कि फ़ातिमा ने अबू बक्र से कहा; "अगर आप मर गए तो आपका वारिस कौन होगा?" अबू बक्र ने जवाब दिया; "मेरा बच्चा और मेरा परिवार" फ़ातिमा ने फिर पूछा; "हम पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से वारिस क्यों नहीं लेते?" [अबू बक्र] ने जवाब दिया; "मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए सुना: "बेशक पैगंबर को वारिस नहीं किया जाता है," लेकिन मैं उन लोगों का समर्थन करता हूं जो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आश्रित हैं और उन लोगों का समर्थन करता हूं जिन्हें पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का समर्थन प्राप्त है।"

अबू बकर ने लोगों की गर्दन काटने से किया इनकार

इमाम अहमद : 58

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ عُبَيْدٍ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ هِلَالٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُطَرِّفِ بْنِ الشِّخِّيرِ أَنَّهُ حَدَّثَهُمْ عَنْ أَبِي بَرْزَةَ الْأَسْلَمِيِّ أَنَّهُ قَالَ كُنَّا عِنْدَ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فِي عَمَلِهِ فَغَضِبَ عَلَى رَجُلٍ مِنْ الْمُسْلِمِينَ فَاشْتَدَّ غَضَبُهُ عَلَيْهِ جِدًّا فَلَمَّا رَأَيْتُ ذَلِكَ قُلْتُ يَا خَلِيفَةَ رَسُولِ اللَّهِ أَضْرِبُ عُنُقَهُ فَلَمَّا ذَكَرْتُ الْقَتْلَ صَرَفَ عَنْ ذَلِكَ الْحَدِيثِ أَجْمَعَ إِلَى غَيْرِ ذَلِكَ مِنْ النَّحْوِ فَلَمَّا تَفَرَّقْنَا أَرْسَلَ إِلَيَّ بَعْدَ ذَلِكَ أَبُو بَكْرٍ الصِّدِّيقُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ يَا أَبَا بَرْزَةَ مَا قُلْتَ قَالَ وَنَسِيتُ الَّذِي قُلْتُ قُلْتُ ذَكِّرْنِيهِ قَالَ أَمَا تَذْكُرُ مَا قُلْتَ قَالَ قُلْتُ لَا وَاللَّهِ قَالَ أَرَأَيْتَ حِينَ رَأَيْتَنِي غَضِبْتُ عَلَى الرَّجُلِ فَقُلْتَ أَضْرِبُ عُنُقَهُ يَا خَلِيفَةَ رَسُولِ اللَّهِ أَمَا تَذْكُرُ ذَاكَ أَوَكُنْتَ فَاعِلًا ذَاكَ قَالَ قُلْتُ نَعَمْ وَاللَّهِ وَالْآنَ إِنْ أَمَرْتَنِي فَعَلْتُ قَالَ وَيْحَكَ أَوْ وَيْلَكَ إِنَّ تِلْكَ وَاللَّهِ مَا هِيَ لِأَحَدٍ بَعْدَ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमें बताया है ['अफ्फान] ने हमें बताया है [यज़ीद बिन ज़ुराई'] ने हमें बताया है [यूनुस बिन 'उबैद] ने [हुमैद बिन हिलाल] से [अब्दुल्ला बिन मुथर्रिफ़ बिन असी शेखखिर] से, कि उसने उन्हें [अबू बरज़ाह अल असलमी] से बताया, उन्होंने कहा; जब हम [अबू बकर अश सिद्दीक] के साथ उनके काम में थे, तो वह एक मुस्लिम आदमी पर गुस्सा थे, फिर वह और भी गुस्सा हो गए, जब मैंने स्थिति देखी तो मैंने उनसे कहा; "ऐ खलीफा रसूलुल्लाह, क्या मुझे उनकी गर्दन काटने की ज़रूरत है?" इसलिए जब मैंने मार शब्द का उल्लेख किया तो उन्होंने बातचीत को दूसरी तरह की बातचीत में बदल दिया, लेकिन हमारे अलग होने के बाद अबू बकर ने मुझे बुलाया और पूछा; "ऐ अबू बरज़ाह, तुमने क्या कहा है?" अबू बरज़ाह ने कहा; और मैं भूल गया कि मैंने क्या कहा था, इसलिए मैंने उत्तर दिया; "मुझे याद दिलाओ" अबू बकर ने फिर पूछा; "क्या तुम्हें याद नहीं है कि तुमने क्या कहा था?" मैंने उत्तर दिया; "नहीं, अल्लाह की कसम" तब अबू बकर ने कहा; "क्या तुमने मुझे एक आदमी पर गुस्सा होते हुए नहीं देखा और फिर तुमने कहा: 'क्या मुझे उसकी गर्दन काट देनी चाहिए, ऐ अल्लाह के रसूल के खलीफ़ा?' क्या तुम्हें यह याद नहीं है या तुमने ही ऐसा किया था?" मैंने जवाब दिया; "हाँ, यह सही है, अल्लाह की कसम और अब अगर तुम मुझे हुक्म दोगे तो मैं यह करूँगा," तब अबू बकर ने कहा; "अफ़सोस तुम पर, सच में ऐसा ही है, अल्लाह की कसम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद किसी को हक़ नहीं है।"

इस्लाम में सिवाक के सिद्धांत

इमाम अहमद : 59

حَدَّثَنَا عَفَّانُ قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَتِيقٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ السِّوَاكُ مَطْهَرَةٌ لِلْفَمِ مَرْضَاةٌ لِلرَّبِّ

हमें बताया है [अफ़्फ़ान] ने हमें बताया है [हम्मद बिन सलामा] ने कहा; हमें बताया है [इब्न अबी अतीक] ने [अपने पिता] से उन्होंने कहा; [अबू बकर अश शिद्दीक] ने कहा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "सिवाक मुंह को साफ़ करने वाला है और अल्लाह द्वारा स्वीकृत है।"

आत्म बुराई और शैतान से सुरक्षा के लिए प्रार्थना पैगंबर द्वारा अबू बकर को सिखाई गई

इमाम अहमद : 60

حَدَّثَنَا عَفَّانُ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ قَالَ سَمِعْتُ عَمْرَو بْنَ عَاصِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُ قَالَ أَبُو بَكْرٍ يَا رَسُولَ اللَّهِ قُلْ لِي شَيْئًا أَقُولُهُ إِذَا أَصْبَحْتُ وَإِذَا أَمْسَيْتُ قَالَ قُلْ اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبَّ كُلِّ شَيْءٍ وَمَلِيكَهُ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي وَمِنْ شَرِّ الشَّيْطَانِ وَشِرْكِهِ وَأَمَرَهُ أَنْ يَقُولَهُ إِذَا أَصْبَحَ وَإِذَا أَمْسَى وَإِذَا أَخَذَ مَضْجَعَهُ

हमें [अफ़्फ़ान] ने बताया है, हमें [स्यूबा] ने [या'ला बिन 'अथो`] से बताया है, उन्होंने कहा; मैंने ['अमरू बिन 'अशिम बिन अब्दुल्लाह] को कहते सुना; मैंने [अबू हुरैरा] को कहते सुना, अबू बक्र ने कहा; "अल्लाह के रसूल, मुझे कुछ ऐसा बताओ जो मैं हर सुबह और शाम कह सकूँ!" उसने जवाब दिया: "पढ़ो; अल्लाहुम्मा आलिमिल ग़ैबी वासी स्याहदा फातिरस समावती वल अर्दली रब्बा कुल्ला स्यैईं वा मालीकुहू, अस्यहदु अनला इलाहा इल्ला अन्ता अउदज़ुबिका मिन सियारी नफ़सी वामिन सियारी असी स्याइथूनी वा सिरकिही (ऐ अल्लाह जो अनदेखे और दिखने वाले को जानता है, आसमान और धरती को बनाने वाला, हर चीज़ का रब और मालिक, मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई माबूद नहीं (जिसकी इबादत की जाए), मैं अपनी रूह की बुराई और शैतान और उसके साथियों की बुराई से तेरी पनाह चाहता हूँ।" और अल्लाह के रसूल ने उसे हर सुबह, शाम और सोते समय इसे पढ़ने का हुक्म दिया।