Imam Ahmad : 41
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَيَّاشٍ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ قَالَ أَخْبَرَنِي يَزِيدُ بْنُ سَعِيدِ بْنِ ذِي عَصْوَانَ الْعَنْسِيُّ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ اللَّخْمِيِّ عَنْ رَافِعٍ الطَّائِيِّ رَفِيقِ أَبِي بَكْرٍ فِي غَزْوَةِ السُّلَاسِلِ قَالَ وَسَأَلْتُهُ عَمَّا قِيلَ مِنْ بَيْعَتِهِمْ فَقَالَ وَهُوَ يُحَدِّثُهُ عَمَّا تَكَلَّمَتْ بِهِ الْأَنْصَارُ وَمَا كَلَّمَهُمْ بِهِ وَمَا كَلَّمَ بِهِ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ الْأَنْصَارَ وَمَا ذَكَّرَهُمْ بِهِ مِنْ إِمَامَتِي إِيَّاهُمْ بِأَمْرِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي مَرَضِهِ فَبَايَعُونِي لِذَلِكَ وَقَبِلْتُهَا مِنْهُمْ وَتَخَوَّفْتُ أَنْ تَكُونَ فِتْنَةٌ تَكُونُ بَعْدَهَا رِدَّةٌ
हमसे कहिन है [अली बिन अय्यासी] हमसे कहिन हैं [अल वालिद बिन मुस्लिम] उ कहिन; हमका [यजीद बिन सईद बिन डज़ी 'अश्वन अल 'अंसी] से [अब्दुल मलिक बिन उमैर अल लखमी] से [रफी' अथ थाई] से सूचित किहिन है, जे [अबू बकर] के साथ अस सुलासिल के लड़ाई मा रहा, उ कहिन; हम उनसे उन शब्दन के बारे मा पूछेन जब उ लोग बैत लिहिन, त उ रफी' का बतावत हुए कहिन कि अंसार लोग का कहिन, अऊर उ ओनसे का कहिन, साथ ही साथ उमर बिन अल खठाब ने अंशर लोगन से का कहिन अऊर रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसलम के आदेश पर ओनके नेतृत्व के बारे मा उ ओनसे का बताइन, जब उ सिलाम बलाल रहे, तब उ इलाई के लिए सिलाम दिहिन अऊर ओनसे भी स्वीकार किहिन, अऊर मैं चिंतित रहेंव कि बदनामी होइ जवन बाद मा धर्मत्याग होइ।
Imam Ahmad : 42
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَيَّاشٍ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنِي وَحْشِيُّ بْنُ حَرْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ وَحْشِيِّ بْنِ حَرْبٍ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَقَدَ لِخَالِدِ بْنِ الْوَلِيدِ عَلَى قِتَالِ أَهْلِ الرِّدَّةِ وَقَالَ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ نِعْمَ عَبْدُ اللَّهِ وَأَخُو الْعَشِيرَةِ خَالِدُ بْنُ الْوَلِيدِ وَسَيْفٌ مِنْ سُيُوفِ اللَّهِ سَلَّهُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ عَلَى الْكُفَّارِ وَالْمُنَافِقِينَ
हमसे कहिन है [अली बिन अय्यासी] हमसे कहिन हैं [अल वालिद बिन मुस्लिम] हमसे [उनके पिता] से [अपने दादा] वह्सी बिन हरब से कहिन हैं कि [अबू बकर] ने खालिद बिन वलिद का धर्मत्यागी से लड़ै के लिए नियुक्त किहिन, फिर कहिन; दरअसल, हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'अल्लाह का सबसे अच्छा सेवक अऊर संगति करै वाला भाई खालिद बिन अल वालिद अऊर अल्लाह के तलवारन में से एक है, जेका अल्लाह काफिरन अऊर पाखंडियन पर चलावत है'।
Imam Ahmad : 43
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ يَعْنِي ابْنَ صَالِحٍ عَنْ سُلَيْمِ بْنِ عَامِرٍ الْكَلَاعِيِّ عَنْ أَوْسَطَ بْنِ عَمْرٍو قَالَ قَدِمْتُ الْمَدِينَةَ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِسَنَةٍ فَأَلْفَيْتُ أَبَا بَكْرٍ يَخْطُبُ النَّاسَ فَقَالَ قَامَ فِينَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَامَ الْأَوَّلِ فَخَنَقَتْهُ الْعَبْرَةُ ثَلَاثَ مِرَارٍ ثُمَّ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ سَلُوا اللَّهَ الْمُعَافَاةَ فَإِنَّهُ لَمْ يُؤْتَ أَحَدٌ مِثْلَ يَقِينٍ بَعْدَ مُعَافَاةٍ وَلَا أَشَدَّ مِنْ رِيبَةٍ بَعْدَ كُفْرٍ وَعَلَيْكُمْ بِالصِّدْقِ فَإِنَّهُ يَهْدِي إِلَى الْبِرِّ وَهُمَا فِي الْجَنَّةِ وَإِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ فَإِنَّهُ يَهْدِي إِلَى الْفُجُورِ وَهُمَا فِي النَّارِ
हमसे [अब्दुर्रहमान बिन महदी] हमसे [मुआविया अर्थात् इब्न सालिह] [सुलेम बिन अमीर अल कुलाई] से [औसथ बिन अमरू] से कहिन है; मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के मउत के एक साल बाद मदीना पहुँचा, फिर मैं [अबू बकर] का लोगन के सामने उपदेश देत पावा अऊर कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहिले साल हमरे सामने खड़ा भए, ई अभिव्यक्ति से उनका तीन बार घुटन महसूस भै, फिर उ कहिन 'हे लोग, अल्लाह से मोक्ष माँगौ, काहे से कि वास्तव मा मोक्ष के बाद केहू का अइसन विश्वास नाहीं दीन जात है, अऊर कफिर के बाद संदेह से ज्यादा भयानक कुछौ नाहीं है। ईमानदार रहा काहे से कि ई अच्छाई के ओर ले जात है अऊर दुनौ स्वर्ग के ओर ले जात है, अऊर झूठ बोलै से दूर रहा काहे से कि ई पाप के ओर ले जात है अऊर दुनौ नरक के ओर ले जात है'।
Imam Ahmad : 44
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُيَسَّرٍ أَبُو سَعْدٍ الصَّاغَانِيُّ الْمَكْفُوفُ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لَمَّا حَضَرَتْهُ الْوَفَاةُ قَالَ أَيُّ يَوْمٍ هَذَا قَالُوا يَوْمُ الِاثْنَيْنِ قَالَ فَإِنْ مِتُّ مِنْ لَيْلَتِي فَلَا تَنْتَظِرُوا بِي الْغَدَ فَإِنَّ أَحَبَّ الْأَيَّامِ وَاللَّيَالِي إِلَيَّ أَقْرَبُهَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन मुयसर अबू सद अश शघनी अल मकफूफ] हमसे [हिस्याम बिन उर्वाह] [अपने पिता] से [ऐस्या] से कहिन हैं उ कहिन; सचमुच, जब [अबू बकर] के मउत आई, तौ उ पूछिन; 'कौन दिन है?' लोग जवाब दिहिन; 'सोमवार' उ कहिन; 'अगर मैं आज रात मर जाउँ, तौ कल तक मोर इंतजार न करौ, काहे से कि मोर लिए सबसे अच्छा दिन अऊर रात उहै हैं जवन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सबसे करीब हैं'।
Imam Ahmad : 45
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مُرَّةَ عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ قَالَ قَامَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِعَامٍ فَقَالَ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَقَامِي عَامَ الْأَوَّلِ فَقَالَ سَلُوا اللَّهَ الْعَافِيَةَ فَإِنَّهُ لَمْ يُعْطَ عَبْدٌ شَيْئًا أَفْضَلَ مِنْ الْعَافِيَةِ وَعَلَيْكُمْ بِالصِّدْقِ وَالْبِرِّ فَإِنَّهُمَا فِي الْجَنَّةِ وَإِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ وَالْفُجُورَ فَإِنَّهُمَا فِي النَّارِ
हमका [वाकी'] [सुफयान] से बताइस है, हमका [अमरू बिन मुर्राह] का [अबू उबैदा] से कहिस है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम [अबू बकर] के मउत के एक साल बाद खड़ा होइके कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहले साल मेरे स्थान पर खड़े हुए और फिर बोले; 'अल्लाह से मोक्ष माँगौ काहे से कि सेवकन के लिए मोक्ष से बढ़िया कौनो वरदान नाहीं है, अऊर ईमानदार बनो काहे से कि ई पुण्य का ओर ले जात है अऊर दुनौ स्वर्ग का ओर ले जात है, अऊर झूठ अऊर बुराई से दूर रहौ काहे से कि दुनौ नरक का ले जात हैं'।
Imam Ahmad : 46
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ الْمُغِيرَةِ قَالَ سَمِعْتُ عَلِيَّ بْنَ رَبِيعَةَ مِنْ بَنِي أَسَدٍ يُحَدِّثُ عَنْ أَسْمَاءَ أَوْ ابْنِ أَسْمَاءَ مِنْ بَنِي فَزَارَةَ قَالَ قَالَ عَلِيٌّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ كُنْتُ إِذَا سَمِعْتُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَيْئًا نَفَعَنِي اللَّهُ بِمَا شَاءَ أَنْ يَنْفَعَنِي مِنْهُ وَحَدَّثَنِي أَبُو بَكْرٍ وَصَدَقَ أَبُو بَكْرٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مِنْ مُسْلِمٍ يُذْنِبُ ذَنْبًا ثُمَّ يَتَوَضَّأُ فَيُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ يَسْتَغْفِرُ اللَّهَ تَعَالَى لِذَلِكَ الذَّنْبِ إِلَّا غَفَرَ لَهُ وَقَرَأَ هَاتَيْنِ الْآيَتَيْنِ { وَمَنْ يَعْمَلْ سُوءًا أَوْ يَظْلِمْ نَفْسَهُ ثُمَّ يَسْتَغْفِرْ اللَّهَ يَجِدْ اللَّهَ غَفُورًا رَحِيمًا } { وَالَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً أَوْ ظَلَمُوا أَنْفُسَهُمْ } الْآيَةَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ عُثْمَانَ مِنْ آلِ أَبِي عُقَيْلٍ الثَّقَفِيِّ إِلَّا أَنَّهُ قَالَ قَالَ شُعْبَةُ وَقَرَأَ إِحْدَى هَاتَيْنِ الْآيَتَيْنِ { مَنْ يَعْمَلْ سُوءًا يُجْزَ بِهِ } { وَالَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً }
हमसे कहिस है [अब्दुर्रहमान बिन महदी] हमसे [स्युअबाह] [उस्मान बिन अल मुघिराह] से कहिस है, उ कहिन; हम [अली बिन रबीअह का बानी असद के बीच से] [असमा] से या इब्न असमा का बनी फजरा के बीच से एक कहानी सुनावत सुने रहेन, उ कहिन, [अली] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अगर कुछ सुना तो अल्लाह ने अपनी मर्जी के अनुसार मेरे लिए उपयोगी बनाया, और उन्होंने मुझसे कहा [अबू बकर] और अबू बकर सही थे, उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'यह मुसलमान नहीं है जो पाप करे और फिर वजू करे और फिर अल्लाह के लिए दो रकला के नमाज पढ़े और तब के रूप में अपने पापन के लिए माफी, लेकिन अल्लाह निश्चित रूप से ओका माफ कर देई,' फिर उ दुई आयत पढ़िन "अऊर जे भी बुराई करत है अऊर खुद से अन्याय करत है, फिर अल्लाह से माफी मांगत है, उ निश्चित रूप से अल्लाह का सबसे क्षमा करै वाला, सबसे दयालु, अऊर उ लोगन का पाएगा, जे जब उ घृणित काम करत हैं या खुद का गलत करत हैं....- -QS Ansaya -1011-11-1. [मुहम्मद बिन जाफर] हमका उ स्यूबाह बताइन है जेका उ कहिन;
Imam Ahmad : 47
حَدَّثَنَا بَهْزُ بْنُ أَسَدٍ حَدَّثَنَا سَلِيمُ بْنُ حَيَّانَ قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ يُحَدِّثُ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ عُمَرَ قَالَ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَطَبَنَا فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَامَ فِينَا عَامَ أَوَّلَ فَقَالَ أَلَا إِنَّهُ لَمْ يُقْسَمْ بَيْنَ النَّاسِ شَيْءٌ أَفْضَلُ مِنْ الْمُعَافَاةِ بَعْدَ الْيَقِينِ أَلَا إِنَّ الصِّدْقَ وَالْبِرَّ فِي الْجَنَّةِ أَلَا إِنَّ الْكَذِبَ وَالْفُجُورَ فِي النَّارِ
हमसे कहिन [बहज बिन असद] हमसे कहिन हैं [सलीम बिन हयान] उ कहिन; हम [कतादाह] का [हुमैद बिन अब्दुर्रहमान] से बतावत सुने रहेन कि [उमर] कहिन; सचमुच [अबू बकर] हमसे उपदेश दिहिन अऊर फिर कहिन; दरअसल, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहिले साल हमरे सामने खड़ा भए अऊर फिर कहिन: 'जानि लिहा कि मनुष्यन के बीच कुछौ साझा नाहीं है जवन विश्वास के बाद मुक्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण है, जानौ कि ईमानदारी अऊर अच्छाई दुनौ स्वर्ग तक जात हैं, जानौ कि झूठ अऊर बुरा काम नरक तक ले जात हैं'।
Imam Ahmad : 48
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا إِسْحَاقَ يَقُولُ سَمِعْتُ الْبَرَاءَ قَالَ لَمَّا أَقْبَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ مَكَّةَ إِلَى الْمَدِينَةِ عَطِشَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَرُّوا بِرَاعِي غَنَمٍ قَالَ أَبُو بَكْرٍ الصِّدِّيقُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَأَخَذْتُ قَدَحًا فَحَلَبْتُ فِيهِ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كُثْبَةً مِنْ لَبَنٍ فَأَتَيْتُهُ بِهِ فَشَرِبَ حَتَّى رَضِيتُ
हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन जाफर] हमसे कहिस है [स्यूबाह] उ कहिन; हम [अबू इशाक] का कहत सुने रहेन; हम [अल बार्रा'] का कहत सुने रहेन; जब रसूलल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम मक्का से मदीना जात रहें, रसूलल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम प्यासे रहे, तब उ लोग एक बकरी चरवाहे के पास से गुजरे, [अबू बकर अश शिद्दीक] कहिन; हम एक जग लिहेन फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के लिए ओमा थोड़ा दूध व्यक्त किहेन, फिर हम ओका दिहेन अऊर उ तब तक पियत रहे जब तक कि हमका राहत महसूस नाइ भै'।
Imam Ahmad : 49
حَدَّثَنَا بَهْزٌ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ حَدَّثَنَا يَعْلَى بْنُ عَطَاءٍ قَالَ سَمِعْتُ عَمْرَو بْنَ عَاصِمٍ يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُ قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَا رَسُولَ اللَّهِ عَلِّمْنِي شَيْئًا أَقُولُهُ إِذَا أَصْبَحْتُ وَإِذَا أَمْسَيْتُ وَإِذَا أَخَذْتُ مَضْجَعِي قَالَ قُلْ اللَّهُمَّ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ أَوْ قَالَ اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبَّ كُلِّ شَيْءٍ وَمَلِيكَهُ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي وَشَرِّ الشَّيْطَانِ وَشِرْكِهِ حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ قَالَ سَمِعْتُ عَمْرَو بْنَ عَاصِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ
हमसे कहिस है [बाहज़] हमसे कहिस है [या'ला बिन 'अथो'] उ कहिन; हम [अमरू बिन आशिम] का कहत सुने रहेन; हम [अबू हुरैराह] का कहत सुने रहेन; अबू बकर कहिन; 'हे अल्लाह के रसूल, मोका एक दुआ सिखावा कि मैं रोज सुबह, शाम अऊर सोवै से पहिले पढ़ सकौं'। उ जवाब दिहिन; 'पढ़ब; 'अल्लाहुम्मा फाथिरस समावति वाल 'अर्दल 'अलीमल घैबी वासी स्याहादाह' -हे अल्लाह आसमान और पृथ्वी के निर्माता जो अदृश्य और अदृश्य का सर्वज्ञ है-' या उन्होंने कहा: 'अल्लाहुम्मा 'आलीमल गहैबिया वायहाया समाअतिया वाल'आरडल रब्बा कुल्ला स्याइन वमलीकाहु, अस्यहदु अनला इलाहा इल्ला अंता 'अउडजुबिका मिन स्यार्री नफसी वा स्यारिस स्याथन वस्यिरकिही -हे अल्लाह, आकाश अऊर पृथ्वी के रचयिता जे सब चीजन का जानत है अऊर अदृश्य अऊर ओनके सब चीजन के मालिक हैं, गवाही दे कि तोहरे अलावा पूजा के लायक कौनो भगवान नाहीं है, मैं अपने अऊर शैतान अऊर ओकरे सहयोगियन के बुराई से तोहरे से शरण लेत हई-'। हमसे ['अफ्फान] कहिके उ कहिन; [या'ला बिन अथो'] से हमसे [स्यु'बाह] से संबंधित होइके उ कहिन; सुना है [अमरू बिन अशिम बिन अब्दुल्ला], फिर हदीस का जिक्र करो जो सार्थक है।
Imam Ahmad : 50
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ إِسْمَاعِيلَ قَالَ سَمِعْتُ قَيْسَ بْنَ أَبِي حَازِمٍ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ خَطَبَ فَقَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ هَذِهِ الْآيَةَ وَتَضَعُونَهَا عَلَى غَيْرِ مَا وَضَعَهَا اللَّهُ { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا عَلَيْكُمْ أَنْفُسَكُمْ لَا يَضُرُّكُمْ مَنْ ضَلَّ إِذَا اهْتَدَيْتُمْ } سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّاسَ إِذَا رَأَوْا الْمُنْكَرَ بَيْنَهُمْ فَلَمْ يُنْكِرُوهُ يُوشِكُ أَنْ يَعُمَّهُمْ اللَّهُ بِعِقَابِهِ
हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन जाफर] हमका [स्यूबाह] से [इस्माइल] कहिस है; हम [कैस बिन अबू हाजिम] का [अबू बकर अश शिद्दीक] से एक कहानी सुनावत सुनेन, कि उ एक उपदेश दिहिन अऊर फिर कहिन; हे लोग, सचमुच तुम ई आयत का पढ़त हौ, लेकिन तुम ईका अल्लाह के इरादा के अनुसार नाहीं रखत हौ; 'हे बिसवास करै वाले लोग, अपने आप से सावधान रहौ; अगर आपका मार्गदर्शन मिला है तो कोई भी गुमराह व्यक्ति आपका नुकसान नहीं पहुंचाएगा'। -QS अल मैदाह आयत 105-, हमने रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'वास्तव मा, अगर लोग अपने बीच बुराई देखत हैं अऊर फिर ओसे इनकार नाहीं करत हैं, तौ ई डर है कि अल्लाह ओन सबका बराबर आपन सजा देई'।
Imam Ahmad : 51
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ تَوْبَةَ الْعَنْبَرِيِّ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا سَوَّارٍ الْقَاضِيَ يَقُولُ عَنْ أَبِي بَرْزَةَ الْأَسْلَمِيِّ قَالَ أَغْلَظَ رَجُلٌ لِأَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ فَقَالَ أَبُو بَرْزَةَ أَلَا أَضْرِبُ عُنُقَهُ قَالَ فَانْتَهَرَهُ وَقَالَ مَا هِيَ لِأَحَدٍ بَعْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन जाफर] हमसे [स्यूबाह] बताइस है [तौबाह अल अंबारी] से उ कहिन; हम [अबू सववर अल कादली] का कहत सुने रहेन; [अबू बरजाह अल असलमी] से उ कहिन; एक आदमी [अबू बकर अस सिद्दीक] के साथ असभ्य रहा, अबू सववर ने कहा, फिर अबू बरजाह ने कहा; 'का हम ओकर गर्दन काट सकित है?' त अबू बकर ओनका डांटिन अऊर उ जवाब दिहिन; 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद केहू के साथे ई नाहीं कीन जाय'।
Imam Ahmad : 52
حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا لَيْثٌ حَدَّثَنِي عُقَيْلٌ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا أَخْبَرَتْهُ أَنَّ فَاطِمَةَ بِنْتَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرْسَلَتْ إِلَى أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ تَسْأَلُهُ مِيرَاثَهَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَيْهِ بِالْمَدِينَةِ وَفَدَكَ وَمَا بَقِيَ مِنْ خُمُسِ خَيْبَرَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ إِنَّمَا يَأْكُلُ آلُ مُحَمَّدٍ فِي هَذَا الْمَالِ وَإِنِّي وَاللَّهِ لَا أُغَيِّرُ شَيْئًا مِنْ صَدَقَةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ حَالِهَا الَّتِي كَانَتْ عَلَيْهَا فِي عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَأَعْمَلَنَّ فِيهَا بِمَا عَمِلَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَبَى أَبُو بَكْرٍ أَنْ يَدْفَعَ إِلَى فَاطِمَةَ مِنْهَا شَيْئًا فَوَجَدَتْ فَاطِمَةُ عَلَى أَبِي بَكْرٍ فِي ذَلِكَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَقَرَابَةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَحَبُّ إِلَيَّ أَنْ أَصِلَ مِنْ قَرَابَتِي وَأَمَّا الَّذِي شَجَرَ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ مِنْ هَذِهِ الْأَمْوَالِ فَإِنِّي لَمْ آلُ فِيهَا عَنْ الْحَقِّ وَلَمْ أَتْرُكْ أَمْرًا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَصْنَعُهُ فِيهَا إِلَّا صَنَعْتُهُ
हमसे कहिस है [हज्जाज बिन मुहम्मद] हमसे कहिस है [लैट्स] हमका [उकैल] से [इब्न शिहाब] से ['उर्वाह बिन जुबैर] से कहिस है पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी से, उ ओका सूचित किहिन, कि फातिमा, रसूलुल्लाह अलैहि वसल्लम के बिटिया का भेजा गा रहा, अबू बकर ऐश शिद्दीक से रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से अपनी विरासत का हिस्सा माँगत रहे कि अल्लाह ने मदीना, फदक अऊर खैबर युद्ध के शेष पांचवां हिस्सा मा उनके लिए फै` संपत्ति बनाई, तब [अबू बकर] ने जवाब दिया; दरअसल, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: 'हम विरासत में नहीं हैं, हम जो धन छोड़ते हैं वह भिक्षा के रूप में है, बस मुहम्मद का परिवार इस धन से खाता है', और वास्तव में, अल्लाह कसम, मैं कुछ भी नहीं बदलूंगा जो रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के भिक्षा है जो सिलल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय के दौरान मौजूद है शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम, अऊर मैं ओका वइसने करब जइसे रसूलल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम द्वारा कीन गा रहा। वसल्लम'। फिर अबू बकर ने फातिमा का कुछौ देय से मना कइ दिहिन, जेहिसे फातिमा का ई मामला मा अबू बकर के बारे मा बुरा लाग, तौ अबू बकर कहिन; 'उसके कसम जेकरे हाथ मा मोर आत्मा है, मैं अपने निकटतम परिवार से ज्यादा रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के करीबी रिश्तेदारन से सचमुच प्यार करत हौं, ई खजाना के बारे मा मोर अऊर आपके बीच कुछौ भी होई, मैं ई मामला मा अल हक से मुँह नहीं मोड़ब, अऊर मैं उ काम का नहीं छोड़ब जवन मैं रसूलुल्लाह का करत देखे रहेंव लेकिन करब'।
Imam Ahmad : 53
حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي زُرْعَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ رَبِيعَةَ عَنْ أَسْمَاءَ بْنِ الْحَكَمِ الْفَزَارِيِّ قَالَ سَمِعْتُ عَلِيًّا كَرَّمَ اللَّهُ وَجْهَهُ قَالَ كُنْتُ إِذَا سَمِعْتُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثًا نَفَعَنِي اللَّهُ بِهِ بِمَا شَاءَ أَنْ يَنْفَعَنِي مِنْهُ وَإِذَا حَدَّثَنِي غَيْرُهُ اسْتَحْلَفْتُهُ فَإِذَا حَلَفَ لِي صَدَّقْتُهُ وَحَدَّثَنِي أَبُو بَكْرٍ وَصَدَقَ أَبُو بَكْرٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مِنْ عَبْدٍ مُؤْمِنٍ يُذْنِبُ ذَنْبًا فَيَتَوَضَّأُ فَيُحْسِنُ الطُّهُورَ ثُمَّ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ فَيَسْتَغْفِرُ اللَّهَ تَعَالَى إِلَّا غَفَرَ اللَّهُ لَهُ ثُمَّ تَلَا { وَالَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً أَوْ ظَلَمُوا أَنْفُسَهُمْ }
हमसे कहिस है [अबू कामिल] हमसे कहिस है [अबू 'अवाना] हमसे कहिस है [उथमान बिन अबू ज़ुरअह] से [अली बिन रबिया] से [असमा' बिन अल हकाम अल फजारी] उ कहिन; हम [अली] का कहत सुने रहेन; अगर मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हदीस सुनत हउँ, तौ अल्लाह मोका ओसे फायदा देत है, जेतना उ चाहत है। अऊर अगर केहू अउर मोका बतावत है, तौ मैं ओसे कसम खावै का कहत हौं, अगर उ मोसे कसम खाई है तौ मैं पुष्टि करत हौं। दरअसल, [अबू बकर] ने मुझसे कहा है और यह सच है कि अबू बकर ने कहा है कि उन्होंने पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम को कहते सुना है: 'यह एक आदमी नहीं है जो पाप करत है और फिर वजू करत है और अपना वजू ठीक करत है, फिर वह दो रकात नमाज करत है और अल्लाह तआला से माफ माँगत है, जब तक कि अल्लाह निश्चित रूप से अपने पाप के लिए माफ नहीं करेगा। फिर उ पढ़िन 'अऊर जे लोग नीच काम करत हैं या खुद से गलत करत हैं'।
Imam Ahmad : 54
حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ بْنِ السَّبَّاقِ عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ قَالَ أَرْسَلَ إِلَيَّ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مَقْتَلَ أَهْلِ الْيَمَامَةِ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ يَا زَيْدُ بْنَ ثَابِتٍ أَنْتَ غُلَامٌ شَابٌّ عَاقِلٌ لَا نَتَّهِمُكَ قَدْ كُنْتَ تَكْتُبُ الْوَحْيَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَتَتَبَّعْ الْقُرْآنَ فَاجْمَعْهُ
हमसे कहिन [अबू कामिल] हमसे कहिन हैं [इब्राहिम बिन सद] हमसे [इब्नू शिहाब] से ['उबैद बिन अस सब्बाक] [जैद बिन थाबित] से कहिन हैं, उ कहिन; [अबू बकर] ने मुझे उस जगह भेजा जहाँ यममह के लोग लड़ रहे थे, तब अबू बकर ने कहा; 'हे जैद बिन थाबित, तुम एक समझदार जवान हौ जेहपे हमका शक नाहीं है, काहे से कि तुम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए रहस्योद्घाटन लिखे रहेव, तौ कुरान का खोजौ अऊर इकट्ठा करा'।
Imam Ahmad : 55
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا أَنَّ فَاطِمَةَ وَالْعَبَّاسَ أَتَيَا أَبَا بَكْرٍ يَلْتَمِسَانِ مِيرَاثَهُمَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُمَا حِينَئِذٍ يَطْلُبَانِ أَرْضَهُ مِنْ فَدَكَ وَسَهْمَهُ مِنْ خَيْبَرَ فَقَالَ لَهُمَا أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ وَإِنَّمَا يَأْكُلُ آلُ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي هَذَا الْمَالِ وَإِنِّي وَاللَّهِ لَا أَدَعُ أَمْرًا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَصْنَعُهُ فِيهِ إِلَّا صَنَعْتُهُ
हमसे [अब्दुर्राज्जाक] बतावा गा है [मैमर] से [अज़ जुहरी] से ['उर्वाह] से [ऐसिया] से बतावा गा है, कि फातिमा अऊर अल अब्बास अबू बकर के पास रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अपनी विरासत का हिस्सा माँग के आए रहे, उ समय उन दुइनौ से रसूलुल्लाह फदक से जमीन का हिस्सा मांगिन अऊर खैबर युद्ध से ओकर हिस्सा, यहिसे [अबू बकर] ओन दुइनौ से कहिन; दरअसल हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुने रहेन: 'हमका विरासत मा नाहीं मिला है, हमरे पीछे जवन छोड़त है ऊ भिक्षा है, बस इहै है कि मुहम्मद के परिवार ई धन से खात है'। अऊर अल्लाह के कसम, मैं उ काम का नाहीं छोड़ब जवन हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का करत देखेन, लेकिन हम निश्चित रूप से करब'।
Imam Ahmad : 56
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ دَاوُدَ حَدَّثَنَا نَافِعٌ يَعْنِي ابْنَ عُمَرَ عَنْ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ قَالَ قِيلَ لِأَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَا خَلِيفَةَ اللَّهِ فَقَالَ أَنَا خَلِيفَةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا رَاضٍ بِهِ وَأَنَا رَاضٍ بِهِ وَأَنَا رَاضٍ
हमसे कहिस है [मूसा बिन दाउद] हमसे [नाफी यानी इब्न उमर] [इब्न अबिमुलैका] से कहिस है, उ कहिन; अबू बकर से कहिन; 'हे खलीफतुल्लाह' तब [अबू बकर] ने कहा; 'मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का खलीफा हौं, अऊर मैं ई उपाधि से खुश हौं, अऊर मैं ई उपाधि से खुश हौं, अऊर मैं ई उपाधि से खुश हौं'।
Imam Ahmad : 57
حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ أَنَّ فَاطِمَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ لِأَبِي بَكْرٍ مَنْ يَرِثُكَ إِذَا مِتَّ قَالَ وَلَدِي وَأَهْلِي قَالَتْ فَمَا لَنَا لَا نَرِثُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّبِيَّ لَا يُورَثُ وَلَكِنِّي أَعُولُ مَنْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعُولُ وَأُنْفِقُ عَلَى مَنْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُنْفِقُ
हमसे ['अफ्फान] हमसे [हम्मद बिन सलामा] [मुहम्मद बिन अमरू] से [अबू सलामा] से कहिस है कि फातिमा ने अबू बकर से कहा; 'अगर तुम मर जइहौ तौ तोहार वारिस के होइ?' अबू बकर ने जवाब दिया; 'मेरा बच्चा अऊर मोर परिवार' फातिमा ने फिर पूछा; 'हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से वारिस काहे नाहीं पावत हैं?' [अबू बकर] ने जवाब दिया; 'मैंने पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'वास्तव में, पैगम्बर विरासत में नहीं मिला है,' लेकिन मैं उन लोगन का समर्थन करत हौं जे रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के आश्रित हैं अऊर उन लोगन का समर्थन करत हैं जे रसूलुल्लाह अलैहि वसल्लम द्वारा समर्थित हैं'।
Imam Ahmad : 58
حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ عُبَيْدٍ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ هِلَالٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُطَرِّفِ بْنِ الشِّخِّيرِ أَنَّهُ حَدَّثَهُمْ عَنْ أَبِي بَرْزَةَ الْأَسْلَمِيِّ أَنَّهُ قَالَ كُنَّا عِنْدَ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فِي عَمَلِهِ فَغَضِبَ عَلَى رَجُلٍ مِنْ الْمُسْلِمِينَ فَاشْتَدَّ غَضَبُهُ عَلَيْهِ جِدًّا فَلَمَّا رَأَيْتُ ذَلِكَ قُلْتُ يَا خَلِيفَةَ رَسُولِ اللَّهِ أَضْرِبُ عُنُقَهُ فَلَمَّا ذَكَرْتُ الْقَتْلَ صَرَفَ عَنْ ذَلِكَ الْحَدِيثِ أَجْمَعَ إِلَى غَيْرِ ذَلِكَ مِنْ النَّحْوِ فَلَمَّا تَفَرَّقْنَا أَرْسَلَ إِلَيَّ بَعْدَ ذَلِكَ أَبُو بَكْرٍ الصِّدِّيقُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ يَا أَبَا بَرْزَةَ مَا قُلْتَ قَالَ وَنَسِيتُ الَّذِي قُلْتُ قُلْتُ ذَكِّرْنِيهِ قَالَ أَمَا تَذْكُرُ مَا قُلْتَ قَالَ قُلْتُ لَا وَاللَّهِ قَالَ أَرَأَيْتَ حِينَ رَأَيْتَنِي غَضِبْتُ عَلَى الرَّجُلِ فَقُلْتَ أَضْرِبُ عُنُقَهُ يَا خَلِيفَةَ رَسُولِ اللَّهِ أَمَا تَذْكُرُ ذَاكَ أَوَكُنْتَ فَاعِلًا ذَاكَ قَالَ قُلْتُ نَعَمْ وَاللَّهِ وَالْآنَ إِنْ أَمَرْتَنِي فَعَلْتُ قَالَ وَيْحَكَ أَوْ وَيْلَكَ إِنَّ تِلْكَ وَاللَّهِ مَا هِيَ لِأَحَدٍ بَعْدَ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमसे कहिस है ['अफ्फान] हमसे कहिस है [यजीद बिन ज़ुराई'] हमसे [यूनुस बिन 'उबैद] से [हुमैद बिन हिलाल] से [अब्दुल्ला बिन मुथर्रिफ बिन असीखिर] से कहिस है, कि उ ओनसे [अबू बरज़ह अल असलमी] से कहिस है, उ कहिन; जब हम [अबू बकर अश सिद्दीक] के साथ उनके काम मा रहेन, तौ उ एक मुसलमान आदमी से नाराज रहे, फिर उ अउर नाराज होइ गए, जब हम स्थिति देखेन तौ हम उनसे कहेन; 'हे अल्लाह के रसूल के खलीफा, का मोका ओकर गर्दन काटै के जरूरत है?' यहिसे जब हम मार शब्द का जिक्र किहेन तौ उ बातचीत का दूसर समान बातचीत मा मोड़ दिहिन, लेकिन हमरे अलग होय के बाद अबू बकर हमका फोन किहिन अऊर पूछिन; 'हे अबू बरजाह तुम का कहे हौ?' अबू बरजाह कहिन; अऊर हम भूल गयेन कि हम का कहे रहेन, एहसे हम जवाब दिहे रहेन; 'याद कराओ' अबू बकर ने फिर से पूछा; 'का तुमका याद नाहीं है कि तुम का कहे रहेव?' हम जवाब दिहेन; 'नहीं, अल्लाह कसम' तब अबू बकर ने कहा; 'का तुम मोका एक मनई से गुस्सा करत नाहीं देखे रहेव अऊर फिर तुम कहे रहेव; 'का मोका ओकर गर्दन काटै के जरूरत है, हे खलीफा रसूलुल्लाह? 'का तुमका ई याद नाहीं है या ई तुम नाहीं किहे रहेव?' हम जवाब दिहेन; 'हाँ, ई सही है, अल्लाह के कसम अऊर अब अगर तुम मोका आदेश देब तौ मैं ई करब,' तब अबू बकर कहिन; 'हाय तोहरे ऊपर, सचमुच अइसन है, अल्लाह के कसम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद केहू का अधिकार नाहीं है'।
Imam Ahmad : 59
حَدَّثَنَا عَفَّانُ قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَتِيقٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ السِّوَاكُ مَطْهَرَةٌ لِلْفَمِ مَرْضَاةٌ لِلرَّبِّ
हमसे कहिस है ['अफ्फान] हमसे कहिस है [हम्मद बिन सलामा] उ कहिन; हमका [इब्न अबी अथिक] [अपने पिता] से बताइस है, उ कहिन; [अबू बकर अश शिद्दीक] कहिन, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'सिवाक मुँह साफ करै वाला है अऊर अल्लाह से आशीर्वादित है'।
Imam Ahmad : 60
حَدَّثَنَا عَفَّانُ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ قَالَ سَمِعْتُ عَمْرَو بْنَ عَاصِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُ قَالَ أَبُو بَكْرٍ يَا رَسُولَ اللَّهِ قُلْ لِي شَيْئًا أَقُولُهُ إِذَا أَصْبَحْتُ وَإِذَا أَمْسَيْتُ قَالَ قُلْ اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبَّ كُلِّ شَيْءٍ وَمَلِيكَهُ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي وَمِنْ شَرِّ الشَّيْطَانِ وَشِرْكِهِ وَأَمَرَهُ أَنْ يَقُولَهُ إِذَا أَصْبَحَ وَإِذَا أَمْسَى وَإِذَا أَخَذَ مَضْجَعَهُ
हमसे कहिस है ['अफ्फान] हमसे [स्यु'बाह] [या'ला बिन 'अथो`] से कहिस है, ऊ कहिस; हम [अमरू बिन अशिम बिन अब्दुल्ला] का कहत सुने रहेन; हम [अबू हुरैराह] का कहत सुने रहेन, अबू बकर कहिन; 'हे अल्लाह के रसूल कुछ ऐसा बताओ कि मैं रोज सुबह-शाम कह सकूँ!' ऊ जवाब दिहिस: 'पढ़ौ; अल्लाहुम्मा 'अलीमिल घैबी वासी स्याहदह फथिरस समावति वाल 'अर्दली रब्बा कुल्ला स्याइ`इन वा मलिकुहु, अश्हादु अनला इलाहा इल्ला अंता औउदज़ुबिका मिन स्यारी नफसी वामिन स्यारी अस्या स्याथूनी वा शिरकिही - हे अल्लाह, अदृश्य अऊर अदृश्य सृष्टिकर्ता स्वर्ग अऊर पृथ्वी, सब चीजन अऊर ओनके मालिकन के रब, मैं गवाही देत हउँ कि कौनो भगवान नाहीं है - जेका पूजा करै का अधिकार है - तोहरे अलावा, मैं आपन आत्मा के बुराई से अऊर शैतान अऊर ओकरे सहयोगियन के बुराई से तोहरे से शरण लेत हउँ। अऊर अल्लाह के रसूल ने ओनका हर सुबह, शाम अऊर सोवै के समय ई बात कहै का आदेश दिहिन'।