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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ahmad (الامام احمد) - 26363 Hadith

Hadith

Imam Ahmad : 21

حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ عَبْدِ رَبِّهِ قَالَ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ بْنُ الْوَلِيدِ قَالَ حَدَّثَنِي شَيْخٌ مِنْ قُرَيْشٍ عَنْ رَجَاءِ بْنِ حَيْوَةَ عَنْ جُنَادَةَ بْنِ أَبِي أُمَيَّةَ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ قَالَ قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حِينَ بَعَثَنِي إِلَى الشَّامِ يَا يَزِيدُ إِنَّ لَكَ قَرَابَةً عَسَيْتَ أَنْ تُؤْثِرَهُمْ بِالْإِمَارَةِ وَذَلِكَ أَكْبَرُ مَا أَخَافُ عَلَيْكَ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ وَلِيَ مِنْ أَمْرِ الْمُسْلِمِينَ شَيْئًا فَأَمَّرَ عَلَيْهِمْ أَحَدًا مُحَابَاةً فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ لَا يَقْبَلُ اللَّهُ مِنْهُ صَرْفًا وَلَا عَدْلًا حَتَّى يُدْخِلَهُ جَهَنَّمَ وَمَنْ أَعْطَى أَحَدًا حِمَى اللَّهِ فَقَدْ انْتَهَكَ فِي حِمَى اللَّهِ شَيْئًا بِغَيْرِ حَقِّهِ فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ أَوْ قَالَ تَبَرَّأَتْ مِنْهُ ذِمَّةُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ

हमरा सब [यजीद बिन अब्दुरब्बीह] के कहला के बाद ओ कहलनि; हमरा सब [बकियाह बिन अल वालिद] के कहला के बाद ओ कहलनि; हमरा [कुरैश स एकटा शेख] [राजा' बिन हैवाह] स [जुनादा बिन अबू उमैया] स [यजीद बिन अबू सुफियन] स कहलक अछि ओ कहलक; [अबू बकर] हमरा सीरिया पठबैत काल कहलनि; 'हे यजीद, सचमुच अहाँक रिश्तेदार छथि, हमरा आशा अछि जे अहाँ हुनका नेतृत्व मे सबसँ पहिने नहि राखब, आ अहाँ सँ हमरा एहि सँ बेसी डर अछि, कारण अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि; 'जे मुसलमान के काज के नेतृत्व करै छै, तखन प्रेम के कारण ओकरा लेल ककरो नियुक्त करै छै, तखन ओ अल्लाह के अभिशाप छै, आ अल्लाह ओकरा स ओकर फर्ज कर्म आ संगहि नफीला के कर्म सेहो स्वीकार नै करत, जाबे तक ओकरा नरक में नै डालतै, आ जे कियो ककरो अल्लाह के सीमा नै दै छै, तखन बिना ओकर अधिकार के अल्लाह के सीमा के भीतर के कोनो चीज के उल्लंघन करै छै, तखन ओ अल्लाह के अभिशाप छै,' या ओ कहै छै: 'ओकरा स अलग।' अल्लाह के गारंटी'।

Hadith

Imam Ahmad : 22

حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ قَالَ حَدَّثَنَا الْمَسْعُودِيُّ قَالَ حَدَّثَنِي بُكَيْرُ بْنُ الْأَخْنَسِ عَنْ رَجُلٍ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُعْطِيتُ سَبْعِينَ أَلْفًا يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ بِغَيْرِ حِسَابٍ وُجُوهُهُمْ كَالْقَمَرِ لَيْلَةَ الْبَدْرِ وَقُلُوبُهُمْ عَلَى قَلْبِ رَجُلٍ وَاحِدٍ فَاسْتَزَدْتُ رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ فَزَادَنِي مَعَ كُلِّ وَاحِدٍ سَبْعِينَ أَلْفًا قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَرَأَيْتُ أَنَّ ذَلِكَ آتٍ عَلَى أَهْلِ الْقُرَى وَمُصِيبٌ مِنْ حَافَّاتِ الْبَوَادِي

हमरा सब [हसीम बिन अल कासिम] के कहला के बाद ओ कहलनि; हमरा लोकनि [अल मसौदी] केँ कहि क' ओ कहलनि; हमरा [बुकाइर बिन अल अखनास] [एक आदमी] स [अबू बकर ऐश शिद्दिक] स कहलक अछि ओ कहलक; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'हमरा सत्तर हजार लोक देल गेल छल, ओ सब बिना हिसाब के स्वर्ग में प्रवेश केलक, पूर्णिमा के राति में ओकर चेहरा चान के तरह छल आ ओकर दिल एक व्यक्ति के दिल सं ऊपर छल, तखन हम अपन रब्ब सं आओर मांगलहुं, ताहि लेल ओ जोड़लनि, प्रत्येक व्यक्ति के सत्तर हजार लोक'। अबू बकर कहलनि; 'तखन देखलहुँ जे गामक लोक दिस आबि घाटी सभक बाहरी इलाका मे टकरा रहल अछि' ।

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Imam Ahmad : 23

حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ عَطَاءٍ عَنْ زِيَادٍ الْجَصَّاصِ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا بَكْرٍ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ يَعْمَلْ سُوءًا يُجْزَ بِهِ فِي الدُّنْيَا

हमरा सब के [अब्दुल वहाब बिन अथो`] स [जियाद अल जशशास] स [अली बिन जैद] स [मुजाहिद] स [इब्न उमर] स कहला के बाद ओ कहलनि; हम [अबू बकर] केँ कहैत सुनलहुँ; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, जे कियो कोनो बुराई करत, अल्लाह ओकरा दुनिया मे इनाम देत’।

Hadith

Imam Ahmad : 24

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ صَالِحٍ قَالَ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي رَجُلٌ مِنْ الْأَنْصَارٍ غَيْرُ مُتَّهَمٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ يُحَدِّثُ أَنَّ رِجَالًا مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَزِنُوا عَلَيْهِ حَتَّى كَادَ بَعْضُهُمْ أَنْ يُوَسْوِسَ قَالَ عُثْمَانُ فَكُنْتُ مِنْهُمْ فَذَكَرَ مَعْنَى حَدِيثِ أَبِي الْيَمَانِ عَنْ شُعَيْبٍ

हमरा सब के कहलक अछि [या'कुब] हमरा सब के [हमर पिता] के [सालिह] स कहलक ओ कहलनि, [इब्नु शिहाब] कहलनि; उस्मान कहलनि जे, "हमरा [अंसार मे सं एकटा आदमी] के रिपोर्ट केलक अछि जेकरा पर आरोप नहि लागल छल, जे ओ [उस्मान बिन अफ्फान] के कहानी कहैत सुनने छल, जे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कईटा साथी छलाह जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मौत पर दुखी छलाह, जाहि सं लगभग आधा बेचैन भ गेलाह; 'हमहूँ हुनका सभ मे छी' तखन ओ स्यूअइब सँ अबुल यमनक हदीसक अर्थ बतौलनि ।

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Imam Ahmad : 25

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ صَالِحٍ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ بْنُ الزُّبَيْرِ أَنَّ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَخْبَرَتْهُ أَنَّ فَاطِمَةَ بِنْتَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَأَلَتْ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَقْسِمَ لَهَا مِيرَاثَهَا مِمَّا تَرَكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَيْهِ فَقَالَ لَهَا أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ فَغَضِبَتْ فَاطِمَةُ عَلَيْهَا السَّلَام فَهَجَرَتْ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَلَمْ تَزَلْ مُهَاجِرَتَهُ حَتَّى تُوُفِّيَتْ قَالَ وَعَاشَتْ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سِتَّةَ أَشْهُرٍ قَالَ وَكَانَتْ فَاطِمَةُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا تَسْأَلُ أَبَا بَكْرٍ نَصِيبَهَا مِمَّا تَرَكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ خَيْبَرَ وَفَدَكَ وَصَدَقَتِهِ بِالْمَدِينَةِ فَأَبَى أَبُو بَكْرٍ عَلَيْهَا ذَلِكَ وَقَالَ لَسْتُ تَارِكًا شَيْئًا كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعْمَلُ بِهِ إِلَّا عَمِلْتُ بِهِ وَإِنِّي أَخْشَى إِنْ تَرَكْتُ شَيْئًا مِنْ أَمْرِهِ أَنْ أَزِيغَ فَأَمَّا صَدَقَتُهُ بِالْمَدِينَةِ فَدَفَعَهَا عُمَرُ إِلَى عَلِيٍّ وَعَبَّاسٍ فَغَلَبَهُ عَلَيْهَا عَلِيٌّ وَأَمَّا خَيْبَرُ وَفَدَكُ فَأَمْسَكَهُمَا عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَالَ هُمَا صَدَقَةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَتَا لِحُقُوقِهِ الَّتِي تَعْرُوهُ وَنَوَائِبِهِ وَأَمْرُهُمَا إِلَى مَنْ وَلِيَ الْأَمْرَ قَالَ فَهُمَا عَلَى ذَلِكَ الْيَوْمَ

हमरा सभ [जा'कुब] केँ कहि क' ओ कहलनि; [सालिह] स हमरा सब के [हमर पिता] के कहने छथि, कहने छथि [इब्न शिहाब]; हमरा [उर्वाह बिन अज़ जुबैर] के रिपोर्ट केलक अछि जे [ऐसिया] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी हुनका रिपोर्ट केने छथि, जे रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वस्लाम के बेटी फातिमा रसूलुल्लाह सल्लाह अलैहि वस्लाम के मृत्यु के बाद अबू बकर स कहलखिन जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के द्वारा छोड़ल गेल विरासत के बांटल जाय 'अलैहि वसल्लम हुनका फै` संपत्ति के रूप में जे अल्लाह हुनका देलखिन, तखन [अबू बकर] हुनका कहलखिन: रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'हमरा सब के विरासत में नै भेटैत अछि आ जे धन छोड़ैत छी ओ दान बनि जाइत अछि', तखन फातिमा क्रोधित भ गेलीह आ अबू बकर स गप नहि केलनि, ओ ता धरि ई काज करैत रहलीह जाबत तक ओ मरि गेलीह, उरवाह कहलनि; फातिमा नबी के मृत्यु के बाद छह महीना तक जीवित रहलै, आरू फातिमा अबू बकर स॑ खैबर आरू फदक के युद्धऽ स॑ जे धन-दौलत सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ छोड़ी गेलऽ छेलै, ओकरा म॑ स॑ ओकरऽ हिस्सा मँगलकै आरू मदीना म॑ रहतें हुअ॑ ओकरऽ दक्षिणा, लेकिन अबू बकर न॑ ओकरा दै स॑ मना करी देलकै, आरू वू कहलकै; 'हम एहन व्यक्ति नहि छी जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा कयल गेल कोनो काज केँ अनदेखी करैत छी, हुनकर सब काज हम निश्चित रूप सँ करब, आ हमरा चिंता अछि जे जँ हम हुनकर कनिको आदेश केँ सेहो अनदेखी करब त' हम विचलित भ' जायब।' रहल बात ओकर दक्षिणा जे मदीना मे छलैक, उमर अली आ अब्बास केँ द' देने छलैक, तखन अली अवशेष पर नियंत्रण रखैत छलैक, जखन कि खैबर आ फदक मे जे अवशेष छलैक ओकरा उमर संभालने छलैक आ ओ कहलनि; 'दुनू नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दक्षिणा छै जे हुनकर अधिकार बनि गेल छैन्ह, जे अहाँ हुनका आ हुनकर प्रतिनिधि के देने छी, आ दुनू के काज ओहि व्यक्ति के द्वारा संभालल जाइत छनि जे काज के नेतृत्व करैत छथि' आ ओ कहलनि; 'आ दुनू एकहि दिन भेल'।

Hadith

Imam Ahmad : 26

حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ مُوسَى وَعَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا أَنَّهَا تَمَثَّلَتْ بِهَذَا الْبَيْتِ وَأَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقْضِي وَأَبْيَضَ يُسْتَسْقَى الْغَمَامُ بِوَجْهِهِ رَبِيعُ الْيَتَامَى عِصْمَةٌ لِلْأَرَامِلِ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ذَاكَ وَاللَّهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमरा सब के कहल गेल अछि जे [हसन बिन मूसा] आ ['अफ्फान] दुनू गोटे कहलनि; हमरा सब के [हम्मद बिन सलामाह] के [अली बिन जैद] स [अल कासिम बिन मुहम्मद] स [ऐश्याह] स कहल गेल अछि, जे ओ सिइर के ई छंद तखन पढ़ने छलाह जखन अबू बकर केस के फैसला क रहल छलाह; 'आ अनाथ सभसँ प्रेम करैत आ विधवा सभक रक्षा करैत एकटा उज्जर मेघ ओकर चेहराकेँ भीज देलक', तखन [अबू बकर] कहलनि; 'अल्लाह केरऽ कसम, ई रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम छेलै' ।

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Imam Ahmad : 27

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَخْبَرَنِي ابْنُ جُرَيْجٍ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي أَنَّ أَصْحَابَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَدْرُوا أَيْنَ يَقْبُرُونَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَنْ يُقْبَرَ نَبِيٌّ إِلَّا حَيْثُ يَمُوتُ فَأَخَّرُوا فِرَاشَهُ وَحَفَرُوا لَهُ تَحْتَ فِرَاشِهِ

हमरा सभ [अब्दुरज्जाक] केँ कहि ओ कहलनि; हमरा [इब्न जुरैज] के सूचित केने छथि ओ कहलनि; हमरा [हमर पिता] के सूचित केने छल, जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सब के पता नै छल जे ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कतय दफनाओत, ताहि लेल [अबू बकर] कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनलियैन जे नबी के जतय मरला के अलावा ओकर दफन नै होइत छैक, ताहि लेल ओ सब ओकर पलंग हटि क ओकर पलंग के नीचा कब्र खोदलकै।

Hadith

Imam Ahmad : 28

حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ قَالَ حَدَّثَنَا لَيْثٌ قَالَ حَدَّثَنِي يَزِيدُ بْنُ أَبِي حَبِيبٍ عَنْ أَبِي الْخَيْرِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلِّمْنِي دُعَاءً أَدْعُو بِهِ فِي صَلَاتِي قَالَ قُلْ اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ وَارْحَمْنِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ

हमरा सभ [हज्जाज] केँ कहि ओ कहलनि; हमरा सभकेँ [लैट्स] कहने छथि ओ कहलनि; हमरा [यजीद बिन अबू हबीब] के [अबुल खैर] स [अब्दुल्लाह बिन अमरू बिन अल ऐश] स [अबू बकर अश शिद्दिक] स कहल गेल अछि, जे ओ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलथि; 'हमरा एकटा एहन प्रार्थना सिखाउ जे हम अपन प्रार्थना मे पढ़ि सकब!' ओ उत्तर देलनि: 'पढ़ू!, अल्लाहम्मा इन्नी झलमतु नफसी झुलमान कत्सीइरा वाला यघफिरुद्ज द्ज़ुनूबा इल्ला अंता फगफिरली मघफिरातन मिन 'इंडिका वारहमनी इनका अन्तल घोफुरूर रहीम - हे अल्लाह, सचमुच हम अपना संग बहुत अन्याय केलहुं अछि, आ अहाँ के छोड़ि कियो पाप के माफ नहि करैत अछि, ताहि लेल हमरा स माफी दिअ अहाँ। आ हमरा पर दया करू, निश्चित रूप सँ अहाँ क्षमाशील छी, परम दयालु-'।

Hadith

Imam Ahmad : 29

حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ أُسَامَةَ قَالَ أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ عَنْ قَيْسٍ قَالَ قَامَ أَبُو بَكْرٍ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ هَذِهِ الْآيَةَ { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا عَلَيْكُمْ أَنْفُسَكُمْ } حَتَّى أَتَى عَلَى آخِرِ الْآيَةِ أَلَا وَإِنَّ النَّاسَ إِذَا رَأَوْا الظَّالِمَ لَمْ يَأْخُذُوا عَلَى يَدَيْهِ أَوْشَكَ اللَّهُ أَنْ يَعُمَّهُمْ بِعِقَابِهِ أَلَا وَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّاسَ وَقَالَ مَرَّةً أُخْرَى وَإِنَّا سَمِعْنَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमरा सभ [हमद बिन उसामाह] केँ कहि क’ ओ कहलनि; हमरा सभ [इस्माइल] केँ [कैस सँ] सूचित केने छथि ओ कहलनि; [अबू बकर] उठि कऽ अल्लाह के स्तुति केलनि आ हुनका शुद्ध केलनि तखन कहलनि; 'हे लोक सभ, सत्ते, अहाँ सभ ई श्लोक पढ़ैत छी: 'हे अहाँ सभ जे विश्वास करैत छी, अपन रक्षा करू; -आयत के अंत तक-, सावधान रहू, सचमुच, जौं लोक कोनो अन्यायी व्यक्ति के देखैत अछि, मुदा दुनू हाथ नहि रोकैत अछि, तखन ई आशंका अछि जे अल्लाह हुनका सब के बराबर सजा देथिन, सावधान रहू जे हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने रही: 'सत्ते, मनुष्य,' एकटा आओर अवसर पर ओ कहलनि; 'सत्ते, हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सुनलौं।'

Hadith

Imam Ahmad : 30

حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ قَالَ أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ هَذِهِ الْآيَةَ { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا عَلَيْكُمْ أَنْفُسَكُمْ لَا يَضُرُّكُمْ مَنْ ضَلَّ إِذَا اهْتَدَيْتُمْ } وَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّاسَ إِذَا رَأَوْا الظَّالِمَ فَلَمْ يَأْخُذُوا عَلَى يَدَيْهِ أَوْشَكَ أَنْ يَعُمَّهُمْ اللَّهُ بِعِقَابِهِ

हमरा सब [यजीद बिन हारून] के कहला के बाद ओ कहलनि; हमरा सब के [इस्माइल बिन अबू खालिद] के [कैस बिन अबू हाजिम] स [अबू बकर ऐश शिद्दिक] स सूचित केने छथि ओ कहलनि; 'हे लोक सभ, अहाँ सभ ई श्लोक जरूर पढ़ैत छी: 'हे अहाँ सभ जे विश् वास करैत छी, अपन रक्षा करू; यदि अहां कें मार्गदर्शन भेटल छै त कोनों भटकल व्यक्ति अहां कें नुकसान नहि पहुंचाओत'. - -QS अल मैदाह आयत 105-, आ ​​सचमुच हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने रही: 'सत्ते, जँ लोक कोनो अन्यायी व्यक्ति के देखैत अछि, मुदा ओकर हाथ नहि रोकैत अछि, तखन ई आशंका अछि जे अल्लाह ओकरा सब के सजा देत'।

Hadith

Imam Ahmad : 31

حَدَّثَنَا يَزِيدُ قَالَ أَخْبَرَنَا هَمَّامٌ عَنْ فَرْقَدٍ السَّبَخِيِّ وَعَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا مُرَّةُ الطَّيِّبُ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ سَيِّئُ الْمَلَكَةِ

हमरा सभ [यजीद] केँ कहि ओ कहलनि; [फरकाद अस सबखी] स हमरा सब [हम्मम] के रिपोर्ट केने छथि आ ['अफ्फान] दुनू गोटे कहलनि; हमरा सब के [मुर्रा अथ थाय्यब] के [अबू बकर अश शिद्दिक] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहल गेल अछि, ओ कहलनि: 'जेकरा कुरूप चरित्र होयत ओ स्वर्ग में प्रवेश नै करत'।

Hadith

Imam Ahmad : 32

حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَخْبَرَنَا صَدَقَةُ بْنُ مُوسَى عَنْ فَرْقَدٍ السَّبَخِيِّ عَنْ مُرَّةَ الطَّيِّبِ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ خَبٌّ وَلَا بَخِيلٌ وَلَا مَنَّانٌ وَلَا سَيِّئُ الْمَلَكَةِ وَأَوَّلُ مَنْ يَدْخُلُ الْجَنَّةَ الْمَمْلُوكُ إِذَا أَطَاعَ اللَّهَ وَأَطَاعَ سَيِّدَهُ

हमरा सब के कहलक अछि [यजीद बिन हारून] हमरा सब के [शदाकाह बिन मूसा] स [फरकाद अस सबाखी] स [मुर्राह अथ थाय्यब] स [अबू बकर अश सिद्दिक] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलक अछि, ओ कहलनि: 'स्वर्ग मे प्रवेश नहि करत एकटा धोखेबाज, एकटा कंजूस व्यक्ति, एकटा एहन व्यक्ति जे अपन वरदान के फायदा उठाबैत अछि आ एकटा एहन व्यक्ति जे... खराब मनोवृत्ति रखैत अछि, आ पहिल इच्छा स्वर्ग मे प्रवेश करब एकटा एहन दास अछि जे अपन प्रभु आ अपन मालिकक आज्ञाकारी अछि' |

Hadith

Imam Ahmad : 33

حَدَّثَنَا رَوْحٌ قَالَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ أَبِي التَّيَّاحِ عَنِ الْمُغِيرَةِ بْنِ سُبَيْعٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ حُرَيْثٍ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَفَاقَ مِنْ مَرْضَةٍ لَهُ فَخَرَجَ إِلَى النَّاسِ فَاعْتَذَرَ بِشَيْءٍ وَقَالَ مَا أَرَدْنَا إِلَّا الْخَيْرَ ثُمَّ قَالَ حَدَّثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ الدَّجَّالَ يَخْرُجُ مِنْ أَرْضٍ بِالْمَشْرِقِ يُقَالُ لَهَا خُرَاسَانُ يَتْبَعُهُ أَقْوَامٌ كَأَنَّ وُجُوهَهُمْ الْمَجَانُّ الْمُطْرَقَةُ

हमरा सभ केँ [रौह] कहि ओ कहलनि; हमरा सब [सैद बिन अबू अरूबा] के [अबू अत तयह] स [अल मुगीरा बिन सुबाई’] स [‘अमरू बिन हुरैत] स कहल गेल अछि जे [अबू बकर] अपन बीमारी स ठीक भ गेलाह, फेर ओ लोक स भेंट करय गेलाह आ किछु लेल माफी मंगलथि आ कहलथि; 'हमरा लोकनि नीकक अतिरिक्त किछु नहि चाहैत छी', तखन कहलनि; 'रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा सभकेँ कहने छथि, जे धरतीक पूर्वी भागसँ दज्जाल प्रकट होयत, जकरा खुरोसान कहल जाइत अछि, कतेको लोक हुनका पाछाँ चलत, हुनकर चेहरा जाली ढाल जकाँ होयत' |

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Imam Ahmad : 34

حَدَّثَنَا رَوْحٌ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُمَيْرٍ قَالَ سَمِعْتُ سُلَيْمَ بْنَ عَامِرٍ رَجُلًا مِنْ أَهْلِ حِمْصَ وَكَانَ قَدْ أَدْرَكَ أَصْحَابَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ مَرَّةً قَالَ سَمِعْتُ أَوْسَطَ الْبَجَلِيَّ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَمِعْتُهُ يَخْطُبُ النَّاسَ وَقَالَ مَرَّةً حِينَ اسْتُخْلِفَ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَامَ عَامَ الْأَوَّلِ مَقَامِي هَذَا وَبَكَى أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فَإِنَّ النَّاسَ لَمْ يُعْطَوْا بَعْدَ الْيَقِينِ شَيْئًا خَيْرًا مِنْ الْعَافِيَةِ وَعَلَيْكُمْ بِالصِّدْقِ فَإِنَّهُ فِي الْجَنَّةِ وَإِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ فَإِنَّهُ مَعَ الْفُجُورِ وَهُمَا فِي النَّارِ وَلَا تَقَاطَعُوا وَلَا تَبَاغَضُوا وَلَا تَحَاسَدُوا وَلَا تَدَابَرُوا وَكُونُوا إِخْوَانًا كَمَا أَمَرَكُمْ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ

हमरा सभ केँ [रौह] कहि ओ कहलनि; [यजीद बिन खुमैर] सँ हमरा सभ केँ [स्यू'बाह] केँ कहि ओ कहलनि; हम हिमशा के एकटा आदमी के [सुलेम बिन अमीर] के सुनलहुं आ ओ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सब स भेंट केलनि, ओ कहलनि, आ एकटा आओर रिवायत मे ओ कहलनि; [अबू बकर ऐश शिद्दिक] सँ [औसत अल बजाली] सुनलहुँ, औसथ कहलनि; हम हुनका मनुक्खक सोझाँ प्रचार करैत सुनलहुँ,’ आ दोसर अवसर पर ओ कहलनि; जखन हुनका खलीफा नियुक्त कयल गेलनि तखन ओ कहलनि; 'सत्ते, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहिल साल मे हमर जगह पर ठाढ़ छलाह,' तखन अबू बकर कानय लगलाह, फेर कहलनि; 'हम अल्लाह सँ माफी आ मुक्ति माँगैत छी, कारण वास्तव मे मनुक्ख केँ विश्वास केलाक बाद मुक्ति सँ नीक किछु नहि देल जाइत छैक।' ईमानदार रहू कियाक त ओ स्वर्ग मे अछि, आ झूठ ​​बाजबा स बचू कियाक त झूठ बाजबाक संग बुराई सेहो होइत अछि, आ दुनू नरक मे अछि।

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Imam Ahmad : 35

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ يَعْنِي ابْنَ عَيَّاشٍ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ زِرٍّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ وَعُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا بَشَّرَاهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَقْرَأَ الْقُرْآنَ غَضًّا كَمَا أُنْزِلَ فَلْيَقْرَأْهُ عَلَى قِرَاءَةِ ابْنِ أُمِّ عَبْدٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ وَيَزِيدُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَنِ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلَهُ قَالَ غَضًّا أَوْ رَطْبًا

हमरा सभ [याह्या बिन आदम] केँ कहि ओ कहलनि; हमरा सब [अबू बकर, अर्थात इब्न अय्यासी] के [अशिम] स [जिरर] स [अब्दुल्लाह] स कहल गेल अछि, जे [अबू बकर] आ [उमर] हुनका खुशखबरी पहुंचेलनि, जे अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहलनि: 'जे कुरान के सही तरीका स पढ़ना पसंद करैत अछि, जेना कि उतारल गेल छल, तखन ओकरा ओहिना पढ़बाक चाही जेना इब्न उम्मी अब्द पढ़ने छलाह | ओ कहैत छथि; हमरा सब [याह्या बिन आदम] हमरा सब के [अबू बकर] आ [यजीद बिन अब्दुल अजीज] स [अल अमासी] स [इब्राहिम] स [अलकामाह] स [उमर बिन अल खोथथब] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स ऊपर के हदीस के तरह कहलक अछि, ओ कहलनि जे 'नरम या कोमल'।

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Imam Ahmad : 36

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ مَوْلَى بَنِي هَاشِمٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ وَسَعِيدُ بْنُ سَلَمَةَ بْنِ أَبِي الْحُسَامِ عَنْ عَمْرِو بْنِ أَبِي عَمْرٍو عَنْ أَبِي الْحُوَيْرِثِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ أَنَّ عُثْمَانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ تَمَنَّيْتُ أَنْ أَكُونَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَاذَا يُنْجِينَا مِمَّا يُلْقِي الشَّيْطَانُ فِي أَنْفُسِنَا فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَدْ سَأَلْتُهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ يُنْجِيكُمْ مِنْ ذَلِكَ أَنْ تَقُولُوا مَا أَمَرْتُ عَمِّي أَنْ يَقُولَهُ

बनी हाशिम केरऽ पूर्व गुलाम [अबू सईद] क॑ बतैन॑ छै, हमरा सब क॑ [अब्दुल अजीज बिन मुहम्मद] आरू [सैद बिन सलामाह बिन अबुल हुसम] क॑ [अमरू बिन अबू अमरू] स॑ [अबुल हुवैरिट्स] स॑ [मुहम्मद बिन जुबैर बिन मुथइम] स॑ बतैन॑ छै कि उस्मान न॑ कहलकै; हम सपना में देखलहुं जे हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सं कोनो एहन बात पूछि सकैत छी जे हमरा सब के शैतान के फुसफुसाहट सं बचा सकैत अछि, तें [अबू बकर] कहलनि; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स ओहि बारे मे पूछलियैन, त ओ कहलनि: 'अहाँ के ओहि स की बचा सकैत अछि, अहाँ ओ वाक्य कहैत छी जे हम अपन काका के कहबाक आदेश देलहुं मुदा ओ नहि कहय चाहैत छलाह'।

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Imam Ahmad : 37

حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ يُونُسَ عَنِ الْحَسَنِ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَطَبَ النَّاسَ فَقَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ النَّاسَ لَمْ يُعْطَوْا فِي الدُّنْيَا خَيْرًا مِنْ الْيَقِينِ وَالْمُعَافَاةِ فَسَلُوهُمَا اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ

हमरा सब [इस्माइल बिन इब्राहिम] के [यूनुस] स [अल हसन] स कहल गेल अछि जे [अबू बकर] लोक के सामने उपदेश दैत छलाह, तखन ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, हे लोक, सचमुच एहि दुनिया मे मनुक्ख केँ विश्वास आ सुरक्षा सँ नीक किछु नहि देल गेल अछि, तेँ अल्लाह सँ दुनूक लेल माँगू।’

Hadith

Imam Ahmad : 38

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ قَالَ وَحَدَّثَنِي حُسَيْنُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عِكْرِمَةَ مَوْلَى ابْنِ عَبَّاسٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ لَمَّا أَرَادُوا أَنْ يَحْفِرُوا لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَكَانَ أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِ يَضْرَحُ كَحَفْرِ أَهْلِ مَكَّةَ وَكَانَ أَبُو طَلْحَةَ زَيْدُ بْنُ سَهْلٍ يَحْفِرُ لِأَهْلِ الْمَدِينَةِ فَكَانَ يَلْحَدُ فَدَعَا الْعَبَّاسُ رَجُلَيْنِ فَقَالَ لِأَحَدِهِمَا اذْهَبْ إِلَى أَبِي عُبَيْدَةَ وَلِلْآخَرِ اذْهَبْ إِلَى أَبِي طَلْحَةَ اللَّهُمَّ خِرْ لِرَسُولِكَ قَالَ فَوَجَدَ صَاحِبُ أَبِي طَلْحَةَ أَبَا طَلْحَةَ فَجَاءَ بِهِ فَلَحَدَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमरा सब के [या'कुब बिन इब्राहिम] हमरा सब के [हमर पिता] के [इब्न इशाक] स कहलक अछि। ओ कहैत छथि; आ हमरा सभ केँ [हुसैन बिन अब्दुल्लाह] केँ [इब्न अब्बास केर पूर्व गुलाम इकरीमा] सँ [इब्न अब्बास] सँ कहने छथि, ओ कहलनि; जखन साथी सब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कब्र खोदय चाहैत छलाह - तखन हुनका सब लग दू टा विकल्प छलनि : - अबू उबैदा बिन अल जर्राह - जं ओ कब्र बना रहल छलाह - जे मक्का के लोक जकाँ खोदने छलाह, आ अबू थल्हाह जैद बिन सहल जे मदीना के लोक जकाँ खोदने छलाह, अर्थात कब्र बनेने छलाह, तखन अल अब्बास दू आदमी के बजा क एक गोटे के कहलखिन; 'अबू उबैदा जाउ!' दोसर केँ कहलथिन। 'अबू तलहा लग जाउ! हे अल्लाह, अपन रसूलुल्लाह के लेल चुनू'। आ प्रत्यक्षतः जे व्यक्ति अबू तल्हाह के पास गेल छल ओ हुनका ताकि लेलक आ तुरंत ल गेल, फेर ओ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लेल लहत बना लेलक।

Hadith

Imam Ahmad : 39

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ سَعِيدٍ عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ أَخْبَرَنِي عُقْبَةُ بْنُ الْحَارِثِ قَالَ خَرَجْتُ مَعَ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مِنْ صَلَاةِ الْعَصْرِ بَعْدَ وَفَاةِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِلَيَالٍ وَعَلِيٌّ عَلَيْهِ السَّلَام يَمْشِي إِلَى جَنْبِهِ فَمَرَّ بِحَسَنِ بْنِ عَلِيٍّ يَلْعَبُ مَعَ غِلْمَانٍ فَاحْتَمَلَهُ عَلَى رَقَبَتِهِ وَهُوَ يَقُولُ وَا بِأَبِي شَبَهُ النَّبِيِّ لَيْسَ شَبِيهًا بِعَلِيِّ قَالَ وَعَلِيٌّ يَضْحَكُ

हमरा सब के कहलक अछि [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अज़ जुबैर] हमरा सब के [उमर बिन सईद] [इब्नु अबीमुलिका] स कहलक अछि हमरा [उकबाह बिन अल हरिथ] कहलक अछि; हम [अबू बकर ऐश सिद्दिक] के संग अस्र नमाज के बाद रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम के मृत्यु के किछु राति बाद बाहर निकललहुं, अचानक अली हुनका लग सं गुजरि गेलाह, फेर ओ हसन बिन अली के पास सं गुजरि गेलाह जे बच्चा सब सं खेलाइत छलाह, तें ओ हुनका कान्ह पर ल' गेलाह, कहैत; 'हे हमर पिताजी, ओ नबी स मिलैत जुलैत छथि आ अली स मिलैत जुलैत नहि छथि'। उकबाह कहलकै 'आ अली हँसि गेलै'।

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Imam Ahmad : 40

حَدَّثَنَا أَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ جَابِرٍ عَنْ عَامِرٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبْزَى عَنْ أَبِي بَكْرٍ قَالَ كُنْتُ عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَالِسًا فَجَاءَ مَاعِزُ بْنُ مَالِكٍ فَاعْتَرَفَ عِنْدَهُ مَرَّةً فَرَدَّهُ ثُمَّ جَاءَهُ فَاعْتَرَفَ عِنْدَهُ الثَّانِيَةَ فَرَدَّهُ ثُمَّ جَاءَهُ فَاعْتَرَفَ الثَّالِثَةَ فَرَدَّهُ فَقُلْتُ لَهُ إِنَّكَ إِنْ اعْتَرَفْتَ الرَّابِعَةَ رَجَمَكَ قَالَ فَاعْتَرَفَ الرَّابِعَةَ فَحَبَسَهُ ثُمَّ سَأَلَ عَنْهُ فَقَالُوا مَا نَعْلَمُ إِلَّا خَيْرًا قَالَ فَأَمَرَ بِرَجْمِهِ

हमरा सब के [असवद बिन अमीर] हमरा सब के [इजरायल] के [जाबीर] स [अमीर] स [अब्दुररहमान बिन अबजा] स [अबू बकर] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल में बैसल छलहुं, अचानक माईज बिन मलिक आबि रसुलुल्लाह सल्लाह अलैहि वसल्लम के समक्ष कबूल केलनि - जे ओ व्यभिचार केने छथि - पहिल बेर मुदा ओ अपन कबूलनामा के मना क देलखिन, फेर ओ हुनका लग आबि हुनका सामने दोसर बेर कबूल केलनि मुदा ओ एकरा खारिज क देलनि, फेर हुनका लग आबि तेसर बेर कबूल केलनि आ ओ मना कयलनि, तेँ हम हुनका कहलियनि; 'जँ अहाँ चारिम बेर स्वीकार करब तँ ओ अहाँकेँ पाथर मारि देत,' अबू बकर कहलनि; 'तखन ओ चारिम बेर कबूल केलनि, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका हिरासत मे लेलनि, तखन ओ हुनका बारे मे पूछलनि, तेँ ओ सभ जवाब देलनि; 'हमरा लोकनि हुनका सँ नीकता छोड़ि किछु नहि जनैत छी'। अतः अल्लाह के रसूलुल्लाह हुनका पत्थर मारय के आदेश देलखिन'।