Imam Ahmad : 21
حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ عَبْدِ رَبِّهِ قَالَ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ بْنُ الْوَلِيدِ قَالَ حَدَّثَنِي شَيْخٌ مِنْ قُرَيْشٍ عَنْ رَجَاءِ بْنِ حَيْوَةَ عَنْ جُنَادَةَ بْنِ أَبِي أُمَيَّةَ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ قَالَ قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حِينَ بَعَثَنِي إِلَى الشَّامِ يَا يَزِيدُ إِنَّ لَكَ قَرَابَةً عَسَيْتَ أَنْ تُؤْثِرَهُمْ بِالْإِمَارَةِ وَذَلِكَ أَكْبَرُ مَا أَخَافُ عَلَيْكَ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ وَلِيَ مِنْ أَمْرِ الْمُسْلِمِينَ شَيْئًا فَأَمَّرَ عَلَيْهِمْ أَحَدًا مُحَابَاةً فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ لَا يَقْبَلُ اللَّهُ مِنْهُ صَرْفًا وَلَا عَدْلًا حَتَّى يُدْخِلَهُ جَهَنَّمَ وَمَنْ أَعْطَى أَحَدًا حِمَى اللَّهِ فَقَدْ انْتَهَكَ فِي حِمَى اللَّهِ شَيْئًا بِغَيْرِ حَقِّهِ فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ أَوْ قَالَ تَبَرَّأَتْ مِنْهُ ذِمَّةُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ
हमनी के [यजीद बिन अब्दुरब्बीह] के बता के उ कहले कि; हमनी के [बकियाह बिन अल वालिद] के बता के उ कहले कि; हमरा के [कुरैश से एगो शेख] [राजा' बिन हैवाह] से [जुनादा बिन अबू उमैया] से [यजीद बिन अबू सुफियान] से बतवले बाड़े उ कहले; [अबू बकर] हमरा के सीरिया भेजत घरी कहले रहले; 'हे यजीद, सचमुच आपके रिश्तेदार बाड़े, हमरा उम्मीद बा कि आप नेतृत्व में ओ लोग के सबसे पहिले ना राखब, अवुरी इहे हमरा आपके सबसे जादे डर बा, काहेंकी अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले रहले; 'जे मुसलमानन के कामकाज के अगुवाई करी, फिर प्यार से केहू के ओह लोग खातिर नियुक्त करी, तब उ अल्लाह के अभिशाप ह, अवुरी अल्लाह ओकरा से ओकर फर्ज काम अवुरी नफीला के काम भी ना कबूल करीहे, जब तक कि उ ओकरा के नरक में ना डाल दिहे, अवुरी जे केहु के अल्लाह के सीमा ना दे दिहे, ओकरा बाद अल्लाह के सीमा में कवनो चीज़ के उल्लंघन ना करी, जवना के बिना ओकर अधिकार के, तब उ अल्लाह के अभिशाप बा,' चाहे उ कहता कि: 'उनुका से अलगा द।' अल्लाह के गारंटी बा'।
Imam Ahmad : 22
حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ قَالَ حَدَّثَنَا الْمَسْعُودِيُّ قَالَ حَدَّثَنِي بُكَيْرُ بْنُ الْأَخْنَسِ عَنْ رَجُلٍ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُعْطِيتُ سَبْعِينَ أَلْفًا يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ بِغَيْرِ حِسَابٍ وُجُوهُهُمْ كَالْقَمَرِ لَيْلَةَ الْبَدْرِ وَقُلُوبُهُمْ عَلَى قَلْبِ رَجُلٍ وَاحِدٍ فَاسْتَزَدْتُ رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ فَزَادَنِي مَعَ كُلِّ وَاحِدٍ سَبْعِينَ أَلْفًا قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَرَأَيْتُ أَنَّ ذَلِكَ آتٍ عَلَى أَهْلِ الْقُرَى وَمُصِيبٌ مِنْ حَافَّاتِ الْبَوَادِي
हमनी के [हसीम बिन अल कासिम] के बता के उ कहले कि; हमनी के [अल मसौदी] के बता के उ कहले कि; हमरा के [बुकाइर बिन अल अखनास] से [अबू बकर ऐश शिद्दिक] से [एक आदमी] से बतवले बाड़े उ कहले कि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'हमरा के सत्तर हजार लोग दिहल गईल, उ सभ बिना हिसाब-किताब के स्वर्ग में प्रवेश कईले, उनुकर चेहरा पूर्णिमा के रात में चाँद निहन रहे अवुरी उनुकर दिल एक आदमी के दिल से ऊपर रहे, तब हम अपना रब्ब से अवुरी मांग कईनी, एहसे उ जोड़ले, हरेक आदमी से सत्तर हजार लोग'। अबू बकर कहले कि; 'तब देखनी कि गाँव के लोग के ओर आके घाटी के बाहरी इलाका से टकरा रहल बा'।
Imam Ahmad : 23
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ عَطَاءٍ عَنْ زِيَادٍ الْجَصَّاصِ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا بَكْرٍ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ يَعْمَلْ سُوءًا يُجْزَ بِهِ فِي الدُّنْيَا
हमनी के [अब्दुल वहाब बिन 'अथो`] से [जियाद अल जशशास] से [अली बिन जैद] से [मुजाहिद] से [इब्न उमर] से बता के उ कहले; हम [अबू बकर] के कहत सुनले बानी; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि जे भी बुराई करी, अल्लाह ओकरा के दुनिया में इनाम दिहे।
Imam Ahmad : 24
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ صَالِحٍ قَالَ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي رَجُلٌ مِنْ الْأَنْصَارٍ غَيْرُ مُتَّهَمٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ يُحَدِّثُ أَنَّ رِجَالًا مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَزِنُوا عَلَيْهِ حَتَّى كَادَ بَعْضُهُمْ أَنْ يُوَسْوِسَ قَالَ عُثْمَانُ فَكُنْتُ مِنْهُمْ فَذَكَرَ مَعْنَى حَدِيثِ أَبِي الْيَمَانِ عَنْ شُعَيْبٍ
हमनी के बतवले बा [या'कुब] हमनी के [हमार पिता] [सालिह] से बतवले बाड़े उ कहले, [इब्नु शिहाब] कहले; उस्मान कहले कि, "हमरा [अंसार के बीच से एगो आदमी] के रिपोर्ट कईले बा, जवना प आरोप ना लागल रहे, कि उ [उस्मान बिन अफ्फान] के कहानी सुनावत सुनले बाड़े, कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कई गो साथी रहले, जवन कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मौत प दुखी रहले, जवना से लगभग आधा लोग बेचैन हो गईले; ‘हमहूँ ओहमें से बानी’ तब ऊ स्यूअइब से अबुल यमन के हदीस के मतलब बतवले.
Imam Ahmad : 25
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ صَالِحٍ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ بْنُ الزُّبَيْرِ أَنَّ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَخْبَرَتْهُ أَنَّ فَاطِمَةَ بِنْتَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَأَلَتْ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَقْسِمَ لَهَا مِيرَاثَهَا مِمَّا تَرَكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَيْهِ فَقَالَ لَهَا أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ فَغَضِبَتْ فَاطِمَةُ عَلَيْهَا السَّلَام فَهَجَرَتْ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَلَمْ تَزَلْ مُهَاجِرَتَهُ حَتَّى تُوُفِّيَتْ قَالَ وَعَاشَتْ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سِتَّةَ أَشْهُرٍ قَالَ وَكَانَتْ فَاطِمَةُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا تَسْأَلُ أَبَا بَكْرٍ نَصِيبَهَا مِمَّا تَرَكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ خَيْبَرَ وَفَدَكَ وَصَدَقَتِهِ بِالْمَدِينَةِ فَأَبَى أَبُو بَكْرٍ عَلَيْهَا ذَلِكَ وَقَالَ لَسْتُ تَارِكًا شَيْئًا كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعْمَلُ بِهِ إِلَّا عَمِلْتُ بِهِ وَإِنِّي أَخْشَى إِنْ تَرَكْتُ شَيْئًا مِنْ أَمْرِهِ أَنْ أَزِيغَ فَأَمَّا صَدَقَتُهُ بِالْمَدِينَةِ فَدَفَعَهَا عُمَرُ إِلَى عَلِيٍّ وَعَبَّاسٍ فَغَلَبَهُ عَلَيْهَا عَلِيٌّ وَأَمَّا خَيْبَرُ وَفَدَكُ فَأَمْسَكَهُمَا عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَالَ هُمَا صَدَقَةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَتَا لِحُقُوقِهِ الَّتِي تَعْرُوهُ وَنَوَائِبِهِ وَأَمْرُهُمَا إِلَى مَنْ وَلِيَ الْأَمْرَ قَالَ فَهُمَا عَلَى ذَلِكَ الْيَوْمَ
हमनी के [जकूब] बता के उ कहले; [सालिह] से हमनी के [हमार पिता] के बतवले बाड़े, कहले बाड़े [इब्न शिहाब]; हमरा [उर्वाह बिन अज़ जुबैर] के रिपोर्ट कइले बा कि [ऐसिया] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी उनुका के रिपोर्ट कइले बाड़ी, कि रसूलुल्लाह सल्लाह अलैहि वसाल्लम के बेटी फातिमा रसूलुल्लाह सल्लाह अलैहि वस्लाम के मौत के बाद अबू बकर से रसूलुल्लाह सल्लाह अलैहि वस्लाम के छोड़ल विरासत के बाँटे के कहले रहली 'अलैहि वसल्लम ओकरा के फै` संपत्ति के रूप में जवन अल्लाह ओकरा के देले रहले, तब [अबू बकर] ओकरा से कहले: रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले: 'हमनी के विरासत में ना मिलेला अवुरी हमनी के छोड़े वाला धन दान बन जाला', तब फातिमा नाराज हो गईली अवुरी अबू बकर से बात ना कईली, उ तब तक अयीसन करत रहली, जब तक कि उ मर ना गईली; फातिमा नबी के मौत के बाद छह महीना तक जिंदा रहली, अवुरी फातिमा अबू बकर से मदीना में रहत समय खैबर अवुरी फदक के लड़ाई से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ओर से छोड़ल गईल धन में से उनुकर हिस्सा मंगली, लेकिन अबू बकर एकरा के देवे से इनकार क देले, अवुरी उ कहले कि; 'हम अइसन आदमी ना हईं जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कइल काम के अनदेखी करेनी, उनुकर हर काम हम जरूर करब, आ हमरा चिंता बा कि अगर हम उनुका आदेश के तनी-मनी भी अनदेखी करब त हम भटक जाईब।' रहल बात उनकर दक्षिणा के जवन मदीना में रहे त उमर अली आ अब्बास के देले रहले, तब अली अवशेष पर नियंत्रण रखले रहले, जबकि खैबर आ फदक में जवन अवशेष रहे ओकरा के उमर संभालले रहले आ उ कहले रहले; 'दुनों नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के भिक्षा हवें जवन उनकर अधिकार बन गइल बा, जवन रउआँ उनका आ उनकर प्रतिनिधियन के देले बानी, आ दुनों के कामकाज उहे व्यक्ति द्वारा संभालल जाला जे कामकाज के नेतृत्व करेला' आ उ कहले; 'आ दुनु एके दिन भइल रहे'.
Imam Ahmad : 26
حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ مُوسَى وَعَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا أَنَّهَا تَمَثَّلَتْ بِهَذَا الْبَيْتِ وَأَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقْضِي وَأَبْيَضَ يُسْتَسْقَى الْغَمَامُ بِوَجْهِهِ رَبِيعُ الْيَتَامَى عِصْمَةٌ لِلْأَرَامِلِ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ذَاكَ وَاللَّهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमनी के बतावल गईल बा कि [हसन बिन मूसा] अवुरी ['अफ्फान] दुनो कहले कि; हमनी के [हम्मद बिन सलामाह] के [अली बिन जैद] से [अल कासिम बिन मुहम्मद] से [ऐसिया] से बतावल गईल बा, कि उ सयिर के इ छंद तब पढ़ले रहले जब अबू बकर केस के फैसला करत रहले; 'आ एगो सफेद बादल उनकर चेहरा भींज दिहलस, अनाथ लोग से प्यार करत आ विधवा लोग के रक्षा करत', तब [अबू बकर] कहले; 'अल्लाह के कसम, इ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रहले'।
Imam Ahmad : 27
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَخْبَرَنِي ابْنُ جُرَيْجٍ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي أَنَّ أَصْحَابَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَدْرُوا أَيْنَ يَقْبُرُونَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَنْ يُقْبَرَ نَبِيٌّ إِلَّا حَيْثُ يَمُوتُ فَأَخَّرُوا فِرَاشَهُ وَحَفَرُوا لَهُ تَحْتَ فِرَاشِهِ
हमनी के [अब्दुरज्जाक] के बता के उ कहले कि; हमरा के [इब्न जुरैज] के जानकारी देले बाड़े उ कहले; हमरा [हमार पिता] के सूचित कईले रहले, कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी लोग के पता ना रहे कि उ लोग नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहाँ दफनाईहे, एहसे [अबू बकर] कहले; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुननी कि नबी के जहाँ मरल बा ओहिजा छोड़ के ना दफनावल जाला, एहसे ऊ लोग ओकर बिछौना हटा के ओकरा बिछौना के नीचे कब्र खोद दिहल.
Imam Ahmad : 28
حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ قَالَ حَدَّثَنَا لَيْثٌ قَالَ حَدَّثَنِي يَزِيدُ بْنُ أَبِي حَبِيبٍ عَنْ أَبِي الْخَيْرِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلِّمْنِي دُعَاءً أَدْعُو بِهِ فِي صَلَاتِي قَالَ قُلْ اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ وَارْحَمْنِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
हमनी के [हज्जाज] के बता के उ कहले; हमनी के [लैट्स] बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; हमरा [यजीद बिन अबू हबीब] के [अबुल खैर] से [अब्दुल्लाह बिन अमरू बिन अल ऐश] से [अबू बकर अश शिद्दिक] से बतावल गईल बा, कि उ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहले रहले; 'हमरा के एगो अइसन दुआ सिखाईं जवना के हम अपना प्रार्थना में पढ़ सकीले!' उ जवाब दिहले: 'पढ़ीं!, अल्लाहम्मा इनी झलमतु नफसी ज़ुलमान कत्सीइरा वाला यघफिरुद्ज द्ज़ुनूबा इल्ला अंता फगफिरली मगफिरतान मिन 'इंडिका वारहमनी इनका अंतल घोफुरूर रहीम - हे अल्लाह, सचमुच हम अपना संगे बहुत अन्याय कईले बानी, अवुरी आपके छोड़ के केहु पाप के माफ नईखे करत, एहसे हमरा के माफी दिही रउरा सभे के... आ हमरा पर दया करऽ, निश्चित रूप से तू क्षमाशील हउअ, परम दयालु-'।
Imam Ahmad : 29
حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ أُسَامَةَ قَالَ أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ عَنْ قَيْسٍ قَالَ قَامَ أَبُو بَكْرٍ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ هَذِهِ الْآيَةَ { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا عَلَيْكُمْ أَنْفُسَكُمْ } حَتَّى أَتَى عَلَى آخِرِ الْآيَةِ أَلَا وَإِنَّ النَّاسَ إِذَا رَأَوْا الظَّالِمَ لَمْ يَأْخُذُوا عَلَى يَدَيْهِ أَوْشَكَ اللَّهُ أَنْ يَعُمَّهُمْ بِعِقَابِهِ أَلَا وَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّاسَ وَقَالَ مَرَّةً أُخْرَى وَإِنَّا سَمِعْنَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमनी के [हमद बिन उसामाह] के बता के उ कहले कि; [कईस से] हमनी के [इस्माइल] के जानकारी देले बा उ कहले; [अबू बकर] खड़ा होके अल्लाह के तारीफ कईले अवुरी उनुका के शुद्ध कईले फिर कहले; 'हे लोग, वाकई में, रउआ लोग ई श्लोक पढ़त बानी: 'हे विश्वास करे वाला लोग, आपन रक्षा करीं; -आयत के अंत तक-, जागरूक रहीं, सचमुच, अगर लोग कवनो अन्यायी आदमी के देखत बा, लेकिन उ लोग दुनो हाथ ना रोकत बा, त डर बा कि अल्लाह ओह सब के बराबर सजा दिहे, सावधान रहीं कि हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बानी कि: 'वास्तव में, इंसान,' एगो अवुरी मौका प उ कहले रहले; 'वास्तव में हमनी के अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बात सुनले बानी जा।
Imam Ahmad : 30
حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ قَالَ أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ هَذِهِ الْآيَةَ { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا عَلَيْكُمْ أَنْفُسَكُمْ لَا يَضُرُّكُمْ مَنْ ضَلَّ إِذَا اهْتَدَيْتُمْ } وَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّاسَ إِذَا رَأَوْا الظَّالِمَ فَلَمْ يَأْخُذُوا عَلَى يَدَيْهِ أَوْشَكَ أَنْ يَعُمَّهُمْ اللَّهُ بِعِقَابِهِ
हमनी के [यजीद बिन हारून] के बता के उ कहले कि; हमनी के [इस्माइल बिन अबू खालिद] से [कैस बिन अबू हाजिम] से [अबू बकर ऐश शिद्दिक] से जानकारी देले बाड़े उ कहले कि; 'हे लोग, तू लोग सचमुच ई श्लोक पढ़त बाड़ू: 'हे विश्वास करे वाला लोग, आपन रक्षा करीं; अगर रउरा मार्गदर्शन मिलल बा त कवनो गुमराह करे वाला आदमी रउरा के नुकसान ना चहुँपा पाई'. - -QS अल मैदाह आयत 105-, आ साँचहू हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बानी कि 'वास्तव में अगर लोग कवनो अन्यायी आदमी के देखत बा, लेकिन ओकर हाथ ना रोकत बा, त डर बा कि अल्लाह ओह सब के सजा दिहे'।
Imam Ahmad : 31
حَدَّثَنَا يَزِيدُ قَالَ أَخْبَرَنَا هَمَّامٌ عَنْ فَرْقَدٍ السَّبَخِيِّ وَعَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا مُرَّةُ الطَّيِّبُ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ سَيِّئُ الْمَلَكَةِ
हमनी के [यजीद] के बता के उ कहले कि; [फरकाद अस सबखी] से हमनी के [हम्मम] के रिपोर्ट कईले बाड़े अवुरी ['अफ्फान] दुनो कहले बाड़े; हमनी के [मुर्रा अथ थाय्यब] के [अबू बकर अश शिद्दिक] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतावल गईल बा, उ कहले कि, 'जेकर कुरूप चरित्र होखे, उ स्वर्ग में ना जाई'।
Imam Ahmad : 32
حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَخْبَرَنَا صَدَقَةُ بْنُ مُوسَى عَنْ فَرْقَدٍ السَّبَخِيِّ عَنْ مُرَّةَ الطَّيِّبِ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ خَبٌّ وَلَا بَخِيلٌ وَلَا مَنَّانٌ وَلَا سَيِّئُ الْمَلَكَةِ وَأَوَّلُ مَنْ يَدْخُلُ الْجَنَّةَ الْمَمْلُوكُ إِذَا أَطَاعَ اللَّهَ وَأَطَاعَ سَيِّدَهُ
हमनी के बतवले बाड़े [यजीद बिन हारून] हमनी के बतवले बाड़े [शदाकाह बिन मूसा] से [फरकाद अस सबाखी] से [मुर्राह अथ थाय्यब] से [अबू बकर अश सिद्दिक] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उ कहले बाड़े: 'स्वर्ग में ना घुसीहे धोखेबाज, कंजूस, अपना वरदान के फायदा उठावे वाला आदमी अवुरी जवन आदमी... के रवैया खराब बा, आ पहिला इच्छा स्वर्ग में प्रवेश करे वाला एगो गुलाम होला जे अपना प्रभु आ अपना मालिक के आज्ञाकारी होला'।
Imam Ahmad : 33
حَدَّثَنَا رَوْحٌ قَالَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ أَبِي التَّيَّاحِ عَنِ الْمُغِيرَةِ بْنِ سُبَيْعٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ حُرَيْثٍ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَفَاقَ مِنْ مَرْضَةٍ لَهُ فَخَرَجَ إِلَى النَّاسِ فَاعْتَذَرَ بِشَيْءٍ وَقَالَ مَا أَرَدْنَا إِلَّا الْخَيْرَ ثُمَّ قَالَ حَدَّثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ الدَّجَّالَ يَخْرُجُ مِنْ أَرْضٍ بِالْمَشْرِقِ يُقَالُ لَهَا خُرَاسَانُ يَتْبَعُهُ أَقْوَامٌ كَأَنَّ وُجُوهَهُمْ الْمَجَانُّ الْمُطْرَقَةُ
हमनी के [रौह] के बता के उ कहले; हमनी के [सैद बिन अबू अरूबा] से [अबू अत तयह] से [अल मुगीरा बिन सुबाई'] से ['अमरू बिन हुरैत] से बतावल गईल बा कि [अबू बकर] अपना बेमारी से ठीक हो गईले, ओकरा बाद उ लोग से मिले गईले अवुरी कवनो बात खाती माफी मंगले अवुरी कहले; 'हमनी के अच्छाई के अलावा कुछुओ ना चाहत बानी जा', तब कहलस; 'रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमनी से कहले बाड़े, कि दज्जाल धरती के पूरबी हिस्सा से प्रकट होई, जवना के खुरोसान कहल जाला, बहुत लोग उनुका पीछे-पीछे चल जईहे, उनुकर चेहरा जाली ढाल निहन होई'।
Imam Ahmad : 34
حَدَّثَنَا رَوْحٌ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُمَيْرٍ قَالَ سَمِعْتُ سُلَيْمَ بْنَ عَامِرٍ رَجُلًا مِنْ أَهْلِ حِمْصَ وَكَانَ قَدْ أَدْرَكَ أَصْحَابَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ مَرَّةً قَالَ سَمِعْتُ أَوْسَطَ الْبَجَلِيَّ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَمِعْتُهُ يَخْطُبُ النَّاسَ وَقَالَ مَرَّةً حِينَ اسْتُخْلِفَ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَامَ عَامَ الْأَوَّلِ مَقَامِي هَذَا وَبَكَى أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فَإِنَّ النَّاسَ لَمْ يُعْطَوْا بَعْدَ الْيَقِينِ شَيْئًا خَيْرًا مِنْ الْعَافِيَةِ وَعَلَيْكُمْ بِالصِّدْقِ فَإِنَّهُ فِي الْجَنَّةِ وَإِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ فَإِنَّهُ مَعَ الْفُجُورِ وَهُمَا فِي النَّارِ وَلَا تَقَاطَعُوا وَلَا تَبَاغَضُوا وَلَا تَحَاسَدُوا وَلَا تَدَابَرُوا وَكُونُوا إِخْوَانًا كَمَا أَمَرَكُمْ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ
हमनी के [रौह] के बता के उ कहले; [यजीद बिन खुमैर] से हमनी के [स्यूबाह] बता के उ कहले; हम [सुलेम बिन अमीर] के हिमशा के एगो आदमी के सुननी आ उ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी लोग से मिलल, उ कहले, अवुरी एगो अवुरी रिवायत में उ कहले; [औसत अल बजाली] के [अबू बकर ऐश शिद्दिक] से सुनले बानी, औसथ कहले; हम उनुका के आदमी के सोझा प्रचार करत सुनले रहनी,' अवुरी एगो अवुरी मौका प उ कहले; जब उनुका के खलीफा बनावल गइल त ऊ कहले कि; 'वास्तव में रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहिला साल में हमरा जगह पर खड़ा रहले,' तब अबू बकर रोवे लगले, फेर कहले; 'हम अल्लाह से माफी अवुरी मुक्ति मांगतानी, काहेंकी सचमुच इंसान के विश्वास कईला के बाद मुक्ति से निमन कुछूओ ना दिहल जाला।' ईमानदार रहीं काहे कि ऊ स्वर्ग में बा, आ झूठ बोलला से बची काहे कि झूठ बोलला का साथे बुराई भी होला, आ दुनु नरक में बाड़े.
Imam Ahmad : 35
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ يَعْنِي ابْنَ عَيَّاشٍ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ زِرٍّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ وَعُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا بَشَّرَاهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَقْرَأَ الْقُرْآنَ غَضًّا كَمَا أُنْزِلَ فَلْيَقْرَأْهُ عَلَى قِرَاءَةِ ابْنِ أُمِّ عَبْدٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ وَيَزِيدُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَنِ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلَهُ قَالَ غَضًّا أَوْ رَطْبًا
हमनी के [याह्या बिन आदम] के बता के उ कहले कि; हमनी के [अबू बकर, यानी इब्न अय्यासी] के [अशिम] से [जिरर] से [अब्दुल्लाह] से बतावल गईल बा कि [अबू बकर] अवुरी [उमर] उनुका से खुशखबरी पहुंचवले, कि अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहले कि, 'जे कुरान के सही तरीका से पढ़ल पसंद करेला, जईसे कि उतारल गईल रहे, तब ओकरा के ओइसहीं पढ़े के चाहीं जइसे इब्न उम्मी अब्द पढ़ले बाड़न. ऊ कहत बाड़न कि; हमनी के बतवले बाड़े [याह्या बिन आदम] हमनी के [अबू बकर] अवुरी [यजीद बिन अब्दुल अजीज] से [अल अमासी] से [इब्राहिम] से [अलकामा] से [उमर बिन अल खोथथब] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ऊपर के हदीस निहन बतवले बाड़े, उ कहले बाड़े कि 'नरम या कोमल'।
Imam Ahmad : 36
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ مَوْلَى بَنِي هَاشِمٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ وَسَعِيدُ بْنُ سَلَمَةَ بْنِ أَبِي الْحُسَامِ عَنْ عَمْرِو بْنِ أَبِي عَمْرٍو عَنْ أَبِي الْحُوَيْرِثِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ أَنَّ عُثْمَانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ تَمَنَّيْتُ أَنْ أَكُونَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَاذَا يُنْجِينَا مِمَّا يُلْقِي الشَّيْطَانُ فِي أَنْفُسِنَا فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَدْ سَأَلْتُهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ يُنْجِيكُمْ مِنْ ذَلِكَ أَنْ تَقُولُوا مَا أَمَرْتُ عَمِّي أَنْ يَقُولَهُ
हमनी के [अबू सईद] के बानी हाशिम के एगो पूर्व गुलाम बतवले बाड़े, हमनी के [अब्दुल अजीज बिन मुहम्मद] अवुरी [सईद बिन सलामाह बिन अबुल हुसम] से [अमरू बिन अबू अमरू] से [अबुल हुवैरिट्स] से [मुहम्मद बिन जुबैर बिन मुथइम] से बतवले बाड़े कि उस्मान कहले बाड़े; हम सपना देखले रहनी कि हम अल्लाह के रसूलुल्लाह से कुछ अइसन बात पूछ सकीले जवन हमनी के शैतान के फुसफुसाहट से बचा सकेला, एहसे [अबू बकर] कहले; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ओह बारे में पूछनी, त उ कहले कि: 'तोहरा के ओह से का बचा सकता, तू उ वाक्य कहतानी जवन हम अपना चाचा के कहे के आदेश देले रहनी लेकिन उ ना कहल चाहत रहले'।
Imam Ahmad : 37
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ يُونُسَ عَنِ الْحَسَنِ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَطَبَ النَّاسَ فَقَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ النَّاسَ لَمْ يُعْطَوْا فِي الدُّنْيَا خَيْرًا مِنْ الْيَقِينِ وَالْمُعَافَاةِ فَسَلُوهُمَا اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ
हमनी के [इस्माइल बिन इब्राहिम] के [यूनुस] से [अल हसन] से बतावल गईल बा कि [अबू बकर] लोग के सोझा प्रचार कईले, फिर उ कहले; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, हे लोग, सचमुच एह दुनिया में इंसान के भरोसा अवुरी सुरक्षा से बढ़िया कुछूओ नईखे दिहल गईल, एहसे दुनो खाती अल्लाह से मांग करीं।
Imam Ahmad : 38
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ قَالَ وَحَدَّثَنِي حُسَيْنُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عِكْرِمَةَ مَوْلَى ابْنِ عَبَّاسٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ لَمَّا أَرَادُوا أَنْ يَحْفِرُوا لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَكَانَ أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِ يَضْرَحُ كَحَفْرِ أَهْلِ مَكَّةَ وَكَانَ أَبُو طَلْحَةَ زَيْدُ بْنُ سَهْلٍ يَحْفِرُ لِأَهْلِ الْمَدِينَةِ فَكَانَ يَلْحَدُ فَدَعَا الْعَبَّاسُ رَجُلَيْنِ فَقَالَ لِأَحَدِهِمَا اذْهَبْ إِلَى أَبِي عُبَيْدَةَ وَلِلْآخَرِ اذْهَبْ إِلَى أَبِي طَلْحَةَ اللَّهُمَّ خِرْ لِرَسُولِكَ قَالَ فَوَجَدَ صَاحِبُ أَبِي طَلْحَةَ أَبَا طَلْحَةَ فَجَاءَ بِهِ فَلَحَدَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमनी के बतवले बाड़े [या'कुब बिन इब्राहिम] [इब्न इशाक] से हमनी के [हमार पिता] के बतवले बाड़े। ऊ कहत बाड़न कि; आ हमनी के [हुसैन बिन अब्दुल्लाह] के [इब्न अब्बास के पूर्व गुलाम इकरीमा] से [इब्न अब्बास] से बतवले बाड़न, ऊ कहले बाड़न; जब साथी लोग रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कब्र खोदे के चाहत रहे - त ओह लोग के लगे दू गो विकल्प रहे: - अबू उबैदा बिन अल जर्राह - अगर उ लोग कब्र बनावत रहले - जे मक्का के लोग निहन खोदत रहले, अवुरी अबू थल्हाह जैद बिन सहल जे मदीना के लोग निहन खोदत रहले, यानी कि कब्र बनावे, त अल अब्बास दु आदमी के बोलवले अवुरी ओ लोग में से एगो से कहले; 'अबू उबैदा में जा!' आ एगो दोसरा से कहलस; 'अबू तलहह के पास जाइए! हे अल्लाह, अपना रसूलुल्लाह खातिर चुनीं'। आ जाहिर बा कि अबू तल्हाह के लगे गइल आदमी उनका के खोज के तुरते ले गइल, फेर रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खातिर लहत बनवले.
Imam Ahmad : 39
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ سَعِيدٍ عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ أَخْبَرَنِي عُقْبَةُ بْنُ الْحَارِثِ قَالَ خَرَجْتُ مَعَ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مِنْ صَلَاةِ الْعَصْرِ بَعْدَ وَفَاةِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِلَيَالٍ وَعَلِيٌّ عَلَيْهِ السَّلَام يَمْشِي إِلَى جَنْبِهِ فَمَرَّ بِحَسَنِ بْنِ عَلِيٍّ يَلْعَبُ مَعَ غِلْمَانٍ فَاحْتَمَلَهُ عَلَى رَقَبَتِهِ وَهُوَ يَقُولُ وَا بِأَبِي شَبَهُ النَّبِيِّ لَيْسَ شَبِيهًا بِعَلِيِّ قَالَ وَعَلِيٌّ يَضْحَكُ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अज जुबैर] हमनी के बतवले बाड़े [उमर बिन सईद] से [इब्नु अबीमुलिका] हमरा के बतवले बाड़े [उकबाह बिन अल हरिथ] उ कहले बाड़े; हम [अबू बकर ऐश सिद्दिक] के साथे अस्र नमाज के बाद रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मरला के कुछ रात बाद बाहर निकलनी, अचानक अली उनका लगे से गुजर गईले, फिर उ हसन बिन अली के पास से गुजर गईले जवन कि बच्चा के संगे खेलत रहले, एहसे उ उनुका के अपना कंधा प लेके चल गईले, कहले कि; 'हे हमार बाबूजी, उ नबी से मिलत जुलत बाड़े अवुरी अली से मिलत जुलत नईखन'। उकबाह कहले 'आ अली हंस गईले'।
Imam Ahmad : 40
حَدَّثَنَا أَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ جَابِرٍ عَنْ عَامِرٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبْزَى عَنْ أَبِي بَكْرٍ قَالَ كُنْتُ عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَالِسًا فَجَاءَ مَاعِزُ بْنُ مَالِكٍ فَاعْتَرَفَ عِنْدَهُ مَرَّةً فَرَدَّهُ ثُمَّ جَاءَهُ فَاعْتَرَفَ عِنْدَهُ الثَّانِيَةَ فَرَدَّهُ ثُمَّ جَاءَهُ فَاعْتَرَفَ الثَّالِثَةَ فَرَدَّهُ فَقُلْتُ لَهُ إِنَّكَ إِنْ اعْتَرَفْتَ الرَّابِعَةَ رَجَمَكَ قَالَ فَاعْتَرَفَ الرَّابِعَةَ فَحَبَسَهُ ثُمَّ سَأَلَ عَنْهُ فَقَالُوا مَا نَعْلَمُ إِلَّا خَيْرًا قَالَ فَأَمَرَ بِرَجْمِهِ
हमनी के बतवले बाड़े [असवद बिन अमीर] हमनी के [इजराइल] से [जाबीर] से [अमीर] से [अब्दुररहमान बिन अबजा] से [अबू बकर] से बतवले बाड़े उ कहले; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल में बईठल रहनी, अचानक माईज बिन मलिक आके रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने कबूल कईले - कि उ व्यभिचार कईले बाड़े - पहिला बेर लेकिन उ आपन कबूलनामा से इनकार क देले, फिर उ उनुका लगे आके दूसरा बेर उनुका सोझा कबूल कईले लेकिन उ एकरा के खारिज क देले, फिर उनुका लगे आके तीसरा बेर कबूल कईले अवुरी उ मना कर दिहलस, त हम ओकरा से कहनी; अबू बकर कहले कि, 'अगर आप चउथा बेर कबूल करब त उ आपके पत्थर जरूर मार दिहे।' 'तब उ चउथा बेर कबूल कईले, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनुका के हिरासत में ले लेले, फेर उनुका बारे में पूछले, त उ लोग जवाब देले; 'हमनी के उनुका बारे में अच्छाई के अलावे कुछूओ नईखी जानत'। त अल्लाह के रसूलुल्लाह उनुका के पत्थर मारे के आदेश देले'।