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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ahmad (الامام احمد) - 26363 Hadith

Hadith

Imam Ahmad : 21

حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ عَبْدِ رَبِّهِ قَالَ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ بْنُ الْوَلِيدِ قَالَ حَدَّثَنِي شَيْخٌ مِنْ قُرَيْشٍ عَنْ رَجَاءِ بْنِ حَيْوَةَ عَنْ جُنَادَةَ بْنِ أَبِي أُمَيَّةَ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ قَالَ قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حِينَ بَعَثَنِي إِلَى الشَّامِ يَا يَزِيدُ إِنَّ لَكَ قَرَابَةً عَسَيْتَ أَنْ تُؤْثِرَهُمْ بِالْإِمَارَةِ وَذَلِكَ أَكْبَرُ مَا أَخَافُ عَلَيْكَ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ وَلِيَ مِنْ أَمْرِ الْمُسْلِمِينَ شَيْئًا فَأَمَّرَ عَلَيْهِمْ أَحَدًا مُحَابَاةً فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ لَا يَقْبَلُ اللَّهُ مِنْهُ صَرْفًا وَلَا عَدْلًا حَتَّى يُدْخِلَهُ جَهَنَّمَ وَمَنْ أَعْطَى أَحَدًا حِمَى اللَّهِ فَقَدْ انْتَهَكَ فِي حِمَى اللَّهِ شَيْئًا بِغَيْرِ حَقِّهِ فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ أَوْ قَالَ تَبَرَّأَتْ مِنْهُ ذِمَّةُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ

हमसे [यजीद बिन अब्दुरर्ब्बीह] बताय के बाद उ कहिन; हमसे [बकियाह बिन अल वालिद] बताय के बाद उ कहिन; मोका [कुरैश से एक शेख] [राजा' बिन हैवाह] से [जुनादाह बिन अबू उमैया] से [यजीद बिन अबू सुफियान] से कहिन है, उ कहिन; [अबू बकर] ने मुझे सीरिया भेजते समय कहा; 'हे यजीद, वास्तव मा आपके रिश्तेदार हैं, हम आशा करत हई कि आप ओनका नेतृत्व मा प्राथमिकता न देब, अऊर यही से हम आपके बारे मा सबसे ज्यादा डरत हई, काहे से कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन; 'जो कोई मुसलमानन के कामकाज का नेतृत्व करत है, फिर प्यार से उनके लिए केहू का नियुक्त करत है, तब उ अल्लाह से अभिशाप है, अऊर अल्लाह ओकरे फर्जी कामन अऊर नफिला कामन का भी ओसे स्वीकार नाहीं करिहैं, जब तक कि उ ओका नरक मा न डाल दे, अऊर जे केहू का अल्लाह के सीमा देत है, फिर अल्लाह के सीमा के भीतर कुछौ उल्लंघन करत है, तब उ अल्लाह से अधिकार है, या उ कहत है: 'उनके अलावा अल्लाह के गारंटी'।

Hadith

Imam Ahmad : 22

حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ قَالَ حَدَّثَنَا الْمَسْعُودِيُّ قَالَ حَدَّثَنِي بُكَيْرُ بْنُ الْأَخْنَسِ عَنْ رَجُلٍ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُعْطِيتُ سَبْعِينَ أَلْفًا يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ بِغَيْرِ حِسَابٍ وُجُوهُهُمْ كَالْقَمَرِ لَيْلَةَ الْبَدْرِ وَقُلُوبُهُمْ عَلَى قَلْبِ رَجُلٍ وَاحِدٍ فَاسْتَزَدْتُ رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ فَزَادَنِي مَعَ كُلِّ وَاحِدٍ سَبْعِينَ أَلْفًا قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَرَأَيْتُ أَنَّ ذَلِكَ آتٍ عَلَى أَهْلِ الْقُرَى وَمُصِيبٌ مِنْ حَافَّاتِ الْبَوَادِي

हमसे [हसीम बिन अल कासिम] बताय के बाद उ कहिन; हमसे [अल मसूदी] बताइके उ कहिन; [बुकैर बिन अल अखनास] से [एक आदमी] से [अबू बकर अश शिद्दीक] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मुझे सत्तर हजार लोग दिए गए, वे सब बिना हिसाब के स्वर्ग में प्रवेश कर गए, उनके चेहरे पूर्णिमा के रात में चाँद के तरह रहे और उनके दिल एक व्यक्ति के दिल से ऊपर रहे, फिर मैंने अपने रब्ब से और मांगा, तो उन्होंने जोड़ा, हर व्यक्ति को सत्तर हजार लोग'। अबू बकर कहिन; 'तब हम देखेन कि ई गांव वालेन के तरफ आवत है अऊर घाटियन के बाहरी इलाका मा टकरात है'।

Hadith

Imam Ahmad : 23

حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ عَطَاءٍ عَنْ زِيَادٍ الْجَصَّاصِ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا بَكْرٍ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ يَعْمَلْ سُوءًا يُجْزَ بِهِ فِي الدُّنْيَا

हमका [अब्दुल वहाब बिन 'अथो`] से [जियाद अल जश्शास] से [अली बिन जैद] से [मुजाहिद] से [इब्न उमर] से कहिके उ कहिन; हम [अबू बकर] का कहत सुने रहेन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: 'जो कोई बुराई करेगा, अल्लाह उसे दुनिया में इनाम देगा'।

Hadith

Imam Ahmad : 24

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ صَالِحٍ قَالَ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي رَجُلٌ مِنْ الْأَنْصَارٍ غَيْرُ مُتَّهَمٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ يُحَدِّثُ أَنَّ رِجَالًا مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَزِنُوا عَلَيْهِ حَتَّى كَادَ بَعْضُهُمْ أَنْ يُوَسْوِسَ قَالَ عُثْمَانُ فَكُنْتُ مِنْهُمْ فَذَكَرَ مَعْنَى حَدِيثِ أَبِي الْيَمَانِ عَنْ شُعَيْبٍ

हमसे कहिन है [याकूब] हमसे [मेरे पिता] से कहिन है [सलीह] उ कहिन, [इब्नू शिहाब] कहिन; "मुझे [अंसार से एक आदमी] बताइस है, जेकरे ऊपर आरोप नाहीं लगावा गा रहा, कि उ [उस्मान बिन अफ्फान] का कहानी सुनावत सुने रहे, कि पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कई साथी रहे, जे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मरय पर दुखी रहे, जेहिसे कि ओनमा से लगभग आधा चिंतित होइ गए," उमानथ ने कहा; 'मैं भी ओनमा से हउँ' फिर उन्होंने स्यूअइब से अबुल यमन के हदीस का अर्थ बतावा।

Hadith

Imam Ahmad : 25

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ صَالِحٍ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ بْنُ الزُّبَيْرِ أَنَّ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَخْبَرَتْهُ أَنَّ فَاطِمَةَ بِنْتَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَأَلَتْ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَقْسِمَ لَهَا مِيرَاثَهَا مِمَّا تَرَكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَيْهِ فَقَالَ لَهَا أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ فَغَضِبَتْ فَاطِمَةُ عَلَيْهَا السَّلَام فَهَجَرَتْ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَلَمْ تَزَلْ مُهَاجِرَتَهُ حَتَّى تُوُفِّيَتْ قَالَ وَعَاشَتْ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سِتَّةَ أَشْهُرٍ قَالَ وَكَانَتْ فَاطِمَةُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا تَسْأَلُ أَبَا بَكْرٍ نَصِيبَهَا مِمَّا تَرَكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ خَيْبَرَ وَفَدَكَ وَصَدَقَتِهِ بِالْمَدِينَةِ فَأَبَى أَبُو بَكْرٍ عَلَيْهَا ذَلِكَ وَقَالَ لَسْتُ تَارِكًا شَيْئًا كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعْمَلُ بِهِ إِلَّا عَمِلْتُ بِهِ وَإِنِّي أَخْشَى إِنْ تَرَكْتُ شَيْئًا مِنْ أَمْرِهِ أَنْ أَزِيغَ فَأَمَّا صَدَقَتُهُ بِالْمَدِينَةِ فَدَفَعَهَا عُمَرُ إِلَى عَلِيٍّ وَعَبَّاسٍ فَغَلَبَهُ عَلَيْهَا عَلِيٌّ وَأَمَّا خَيْبَرُ وَفَدَكُ فَأَمْسَكَهُمَا عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَالَ هُمَا صَدَقَةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَتَا لِحُقُوقِهِ الَّتِي تَعْرُوهُ وَنَوَائِبِهِ وَأَمْرُهُمَا إِلَى مَنْ وَلِيَ الْأَمْرَ قَالَ فَهُمَا عَلَى ذَلِكَ الْيَوْمَ

हमसे [जकूब] कहिके उ कहिन; हमका [मेरे पिता] का [सलीह] से बताइस है, [इब्न शिहाब] कहिस है; मोका ['उर्वाह बिन अज़ जुबैर] सूचित किहिन है कि [ऐस्याह] पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी ओनका बताइन कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के बिटिया फातिमा रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के मउत के बाद अबू बकर से कहिन कि रसूलुल्लाह द्वारा छोड़े गए सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का वितरित करैं अलैहि वसल्लम ओनका फाई` संपत्ति के रूप मा जेका अल्लाह ओनका दिहिन, तब [अबू बकर] ओनसे कहिन: रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'हम विरासत मा नाहीं हैं अऊर हम जवन धन छोड़ित है ऊ दान बन जात है', तब फातिमा नाराज होइ गइन अऊर अबू बकर से बात नाहीं किहिन, उ उरवा तब तक करत रहीं, तब तक उरवा कहिन; पैगम्बर के मृत्यु के बाद फातिमा छह महीना तक जीवित रहीं, अऊर फातिमा अबू बकर से मदीना मा रहते हुए खैबर अऊर फदक के युद्धन से रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम द्वारा छोड़ी गई धन अऊर उनके भिक्षा मा उनकर हिस्सा माँगिन, लेकिन अबू बकर ने ई देय से मना कर दिहिन, अऊर उ कहिन; 'मैं अइसन मनई नाहीं हउँ जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम द्वारा कीन गा कुछ अइसन काम का अनदेखा कर दे, उ जवन कुछौ किहिन, उ हम निश्चित रूप से करब, अऊर हमका चिंता है कि अगर हम उनके आदेशन का थोड़ा सा भी अनदेखा करब, त हम विचलित होइ जइब'। रही बात उनके भिक्षा के जवन मदीना मा रहीं, उमर ओनका अली अऊर अब्बास का दिहिन रहैं, तब अली अवशेषन का नियंत्रित करत रहें, जबकि खैबर अऊर फदक मा अवशेषन का उमर संभालत रहें अऊर उ कहिन; 'दुनो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के भिक्षा हैं, जवन उनकर अधिकार बन गए हैं, जेका आप ओनके अऊर ओनके प्रतिनिधियन का दिहिन हैं, अऊर दुइनौ के कामकाज उ व्यक्ति द्वारा संभाला जात है जे कामकाज का नेतृत्व करत है' अऊर उ कहिन; 'अऊर दुनौ एकै दिन मा भवा'।

Hadith

Imam Ahmad : 26

حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ مُوسَى وَعَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا أَنَّهَا تَمَثَّلَتْ بِهَذَا الْبَيْتِ وَأَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقْضِي وَأَبْيَضَ يُسْتَسْقَى الْغَمَامُ بِوَجْهِهِ رَبِيعُ الْيَتَامَى عِصْمَةٌ لِلْأَرَامِلِ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ذَاكَ وَاللَّهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमका बतावा गा है कि [हसन बिन मूसा] अऊर [अफ्फान] दुइनौ कहिन; हमका [हम्मद बिन सलामा] से [अली बिन जैद] से [अल कासिम बिन मुहम्मद] से [ऐसिया] से बतावा गा है कि जब अबू बकर मामला का फैसला करत रहें तौ उ सीयर का ई छंद पढ़िन; 'अऊर एक सफेद बादल ओनके चेहरा का भिगो दिहिस, अनाथन से प्यार करत अऊर विधवाओं के रक्षा करत रहा', तब [अबू बकर] कहिन; 'अल्लाह के कसम, ई रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है'।

Hadith

Imam Ahmad : 27

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَخْبَرَنِي ابْنُ جُرَيْجٍ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي أَنَّ أَصْحَابَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَدْرُوا أَيْنَ يَقْبُرُونَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَنْ يُقْبَرَ نَبِيٌّ إِلَّا حَيْثُ يَمُوتُ فَأَخَّرُوا فِرَاشَهُ وَحَفَرُوا لَهُ تَحْتَ فِرَاشِهِ

हमका [अब्दुर्राज्जाक] बताय के बाद उ कहिन; मोका [इब्न जुरैज] सूचित किहिन है, उ कहिन; मोका [मेरे पिता] का सूचित किहिन रहा, कि पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियन का पता नाहीं रहा कि उ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहाँ दफनाइहैं, यहिसे [अबू बकर] कहिन; हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'नबी का दफनावा नाहीं जात सिवाय वहिके जहाँ उ मर जात है,' यहिसे उइ ओकर बिस्तर हटा दिहिन अऊर ओकरे बिस्तर के नीचे ओकरे लिए एक कब्र खोद दिहिन।

Hadith

Imam Ahmad : 28

حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ قَالَ حَدَّثَنَا لَيْثٌ قَالَ حَدَّثَنِي يَزِيدُ بْنُ أَبِي حَبِيبٍ عَنْ أَبِي الْخَيْرِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلِّمْنِي دُعَاءً أَدْعُو بِهِ فِي صَلَاتِي قَالَ قُلْ اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ وَارْحَمْنِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ

हमसे [हज्जाज] कहिके उ कहिन; हमसे [लैट्स] कहिन है, उ कहिन; ई मोका [यजीद बिन अबू हबीब] से [अबुल खैर] से [अब्दुल्ला बिन अमरू बिन अल ऐश] से [अबू बकर ऐश शिद्दीक] से बतावा गा है, कि उ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन; 'मुझे एक प्रार्थना सिखाओ कि मैं अपनी प्रार्थना में पढ़ सकूँ!' उन्होंने जवाब दिया: 'पढ़ो!, अल्लाहुम्मा इन्नी जलामतु नफसी झुलमान कत्सीरा वाला यघफिरुद्ज़ ज़ुनुउबा इल्ला अन्ता फघफिरली मगफिरतन मिन 'इंडिका वारहमनी इन्नाका अन्तल घोफूर रहीम - हे अल्लाह, वास्तव में मैंने अपने आप के साथ बहुत अन्याय किया है, सिवाय आपके लिए कोई पाप, तो तोहसे मोका क्षमा प्रदान करा। अऊर मोरे ऊपर दया करौ, निश्चित रूप से तुम क्षमा करै वाले, परम दयालु हौ-'।

Hadith

Imam Ahmad : 29

حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ أُسَامَةَ قَالَ أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ عَنْ قَيْسٍ قَالَ قَامَ أَبُو بَكْرٍ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ هَذِهِ الْآيَةَ { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا عَلَيْكُمْ أَنْفُسَكُمْ } حَتَّى أَتَى عَلَى آخِرِ الْآيَةِ أَلَا وَإِنَّ النَّاسَ إِذَا رَأَوْا الظَّالِمَ لَمْ يَأْخُذُوا عَلَى يَدَيْهِ أَوْشَكَ اللَّهُ أَنْ يَعُمَّهُمْ بِعِقَابِهِ أَلَا وَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّاسَ وَقَالَ مَرَّةً أُخْرَى وَإِنَّا سَمِعْنَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमसे [हम्मद बिन उसामा] कहिके उ कहिन; हमका [इस्माइल] का [कैस से] सूचित किहिन है, उ कहिन; [अबू बकर] खड़ा होइके अल्लाह के स्तुति किहिन अऊर ओनका शुद्ध किहिन फिर कहिन; 'हे लोग, सचमुच, तुम ई श्लोक पढ़त हौ: 'हे तुम जे बिसवास करत हौ, खुद का रखौ; -आयत के अंत तक-, जानौ, सचमुच, अगर लोग एक अन्यायी व्यक्ति का देखत हैं, लेकिन उ ओकर हाथ नाहीं रोकत हैं, तौ ई डर है कि अल्लाह ओन सबका बराबर सजा देई, जानौ कि सचमुच हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'वास्तव मा, मनुष्य,' एक अउर मौका पर उ कहिन; 'वास्तव में हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सुना है'।

Hadith

Imam Ahmad : 30

حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ قَالَ أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ هَذِهِ الْآيَةَ { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا عَلَيْكُمْ أَنْفُسَكُمْ لَا يَضُرُّكُمْ مَنْ ضَلَّ إِذَا اهْتَدَيْتُمْ } وَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّاسَ إِذَا رَأَوْا الظَّالِمَ فَلَمْ يَأْخُذُوا عَلَى يَدَيْهِ أَوْشَكَ أَنْ يَعُمَّهُمْ اللَّهُ بِعِقَابِهِ

हमका [यजीद बिन हारून] बताय के बाद उ कहिन; हमका [इस्माइल बिन अबू खालिद] का [कैस बिन अबू हाजिम] से [अबू बकर अश शिद्दीक] से सूचित किहिन है, उ कहिन; 'हे लोग, निस्चय ही तुम ई श्लोक पढ़त हौ: 'हे तुम जे बिसवास करत हौ, खुद का रखौ; अगर आपका मार्गदर्शन मिला है तो कोई गुमराह व्यक्ति नहीं है जो आपका नुकसान पहुंचाए'। - -QS अल मैदाह आयत 105-, अऊर वास्तव मा हम पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'वास्तव मा, अगर लोग एक अन्यायी का देखत हैं, लेकिन उ ओकर हाथ नाहीं रोकत हैं, तौ डर है कि अल्लाह ओन सबका सजा देई'।

Hadith

Imam Ahmad : 31

حَدَّثَنَا يَزِيدُ قَالَ أَخْبَرَنَا هَمَّامٌ عَنْ فَرْقَدٍ السَّبَخِيِّ وَعَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا مُرَّةُ الطَّيِّبُ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ سَيِّئُ الْمَلَكَةِ

हमसे [यजीद] कहिके उ कहिन; हमका [हम्मम] से [फरकद अस सबखी] अऊर [अफ्फान] दुइनौ कहिन; हमका [मुर्रा अथ थायिब] [अबू बकर अश शिद्दीक] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतावा गा है, उ कहिन: 'जेकर चरित्र बदसूरत है, उ स्वर्ग मा नाहीं जाई'।

Hadith

Imam Ahmad : 32

حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَخْبَرَنَا صَدَقَةُ بْنُ مُوسَى عَنْ فَرْقَدٍ السَّبَخِيِّ عَنْ مُرَّةَ الطَّيِّبِ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ خَبٌّ وَلَا بَخِيلٌ وَلَا مَنَّانٌ وَلَا سَيِّئُ الْمَلَكَةِ وَأَوَّلُ مَنْ يَدْخُلُ الْجَنَّةَ الْمَمْلُوكُ إِذَا أَطَاعَ اللَّهَ وَأَطَاعَ سَيِّدَهُ

हमसे कहिन है [यजीद बिन हारून] हमसे कहिन है [शदाकाह बिन मूसा] से [फरकाद अस सबखी] से [मुर्रा अथ थायिब] से [अबू बकर अश सिद्दीक] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उ कहिन: 'स्वर्ग मा प्रवेश नाहीं करिहैं एक धोखेबाज, एक अइसन व्यक्ति जे आपन व्यक्ति अऊर वरदान लेत है एक बुरा रवैया है, अऊर पहिला इच्छा स्वर्ग मा प्रवेश करै वाला एक दास है जउन अपने प्रभु अऊर अपने स्वामी के आज्ञाकारी है'।

Hadith

Imam Ahmad : 33

حَدَّثَنَا رَوْحٌ قَالَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ أَبِي التَّيَّاحِ عَنِ الْمُغِيرَةِ بْنِ سُبَيْعٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ حُرَيْثٍ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَفَاقَ مِنْ مَرْضَةٍ لَهُ فَخَرَجَ إِلَى النَّاسِ فَاعْتَذَرَ بِشَيْءٍ وَقَالَ مَا أَرَدْنَا إِلَّا الْخَيْرَ ثُمَّ قَالَ حَدَّثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ الدَّجَّالَ يَخْرُجُ مِنْ أَرْضٍ بِالْمَشْرِقِ يُقَالُ لَهَا خُرَاسَانُ يَتْبَعُهُ أَقْوَامٌ كَأَنَّ وُجُوهَهُمْ الْمَجَانُّ الْمُطْرَقَةُ

हमसे [रौह] कहिके उ कहिन; हमका [सैद बिन अबू अरुबाह] से [अबू अत तैया] से [अल मुघिराह बिन सुबाई'] से [अमरू बिन हुरैत्स] से बतावा गा है कि [अबू बकर] अपनी बीमारी से ठीक होइ गए, फिर उ लोगन से मिले गए अऊर कुछ के लिए माफी मांगिन अऊर कहिन; 'हम अच्छाई के अलावा कुछौ नाहीं चाहित है', फिर कहिन; 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमसे कहा है, कि दज्जल धरती के पूरुब भाग से प्रकट होई, जेका खुरोसान कहा जात है, बहुत लोग ओकरे पीछे चलिहैं, ओनके चेहरा जाली ढाल के तरह होइहैं'।

Hadith

Imam Ahmad : 34

حَدَّثَنَا رَوْحٌ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُمَيْرٍ قَالَ سَمِعْتُ سُلَيْمَ بْنَ عَامِرٍ رَجُلًا مِنْ أَهْلِ حِمْصَ وَكَانَ قَدْ أَدْرَكَ أَصْحَابَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ مَرَّةً قَالَ سَمِعْتُ أَوْسَطَ الْبَجَلِيَّ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَمِعْتُهُ يَخْطُبُ النَّاسَ وَقَالَ مَرَّةً حِينَ اسْتُخْلِفَ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَامَ عَامَ الْأَوَّلِ مَقَامِي هَذَا وَبَكَى أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فَإِنَّ النَّاسَ لَمْ يُعْطَوْا بَعْدَ الْيَقِينِ شَيْئًا خَيْرًا مِنْ الْعَافِيَةِ وَعَلَيْكُمْ بِالصِّدْقِ فَإِنَّهُ فِي الْجَنَّةِ وَإِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ فَإِنَّهُ مَعَ الْفُجُورِ وَهُمَا فِي النَّارِ وَلَا تَقَاطَعُوا وَلَا تَبَاغَضُوا وَلَا تَحَاسَدُوا وَلَا تَدَابَرُوا وَكُونُوا إِخْوَانًا كَمَا أَمَرَكُمْ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ

हमसे [रौह] कहिके उ कहिन; हमका [यजीद बिन खुमैर] से [स्यूबाह] बताय के बाद उ कहिन; हम [सुलेम बिन अमीर] का हिमशा के एक मनई का सुनेन अऊर उ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियन से मिले, उ कहिन, अऊर एक अउर कथन मा उ कहिन; हम [अबू बकर अश शिद्दीक] से [औसथ अल बजाली] सुनेन, औसथ कहिन; हम ओका मनइन के सामने प्रचार करत सुने रहेन,' अऊर एक अउर मौका पर उ कहिन; जब उनका खलीफा नियुक्त कीन गा रहा, तौ उ कहिन; 'वास्तव में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहले साल मेरे स्थान पर खड़े रहे,' तब अबू बकर रोए, फिर बोले; 'मैं अल्लाह से माफी अऊर मुक्ति माँगत हउँ, काहे से कि वास्तव मा मनुष्यन का विश्वास करै के बाद मुक्ति से बढ़िया कुछौ नाहीं दीन जात है। ईमानदार रहा काहे से कि उ स्वर्ग मा है, अऊर झूठ बोलै से बचे काहे से कि झूठ बोलै से बुराई होत है, अऊर दुनौ नरक मा हैं।

Hadith

Imam Ahmad : 35

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ يَعْنِي ابْنَ عَيَّاشٍ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ زِرٍّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ وَعُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا بَشَّرَاهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَقْرَأَ الْقُرْآنَ غَضًّا كَمَا أُنْزِلَ فَلْيَقْرَأْهُ عَلَى قِرَاءَةِ ابْنِ أُمِّ عَبْدٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ وَيَزِيدُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَنِ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلَهُ قَالَ غَضًّا أَوْ رَطْبًا

हमसे [यह्या बिन आदम] कहिके उ कहिन; हमसे [अबू बकर, यानी इब्न अय्यासी] से [अशिम] से [जिर्र] से [अब्दुल्लाह] से बतावा गा है कि [अबू बकर] अऊर [उमर] ने ओनके पास अच्छी खबर पहुँचाई, कि रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जे कुरान का सही ढंग से पढ़ै का पसंद करत है, वइसे ही ओका वजह से पढ़ा जाय, तब ओका वजह से पढ़ा जाय'। ई जइसे इब्न उम्मी अब्द पढ़िन'। ऊ कहत है; हमसे [यह्या बिन आदम] हमसे [अबू बकर] अऊर [यजीद बिन अब्दुल अजीज] से [अल अमासी] से [इब्राहिम] से ['अलकामा] से [उमर बिन अल खोथब] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन है जइसे कि ऊपर के हदीस, उ कहिन 'नरम' या कोमल।

Hadith

Imam Ahmad : 36

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ مَوْلَى بَنِي هَاشِمٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ وَسَعِيدُ بْنُ سَلَمَةَ بْنِ أَبِي الْحُسَامِ عَنْ عَمْرِو بْنِ أَبِي عَمْرٍو عَنْ أَبِي الْحُوَيْرِثِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ أَنَّ عُثْمَانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ تَمَنَّيْتُ أَنْ أَكُونَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَاذَا يُنْجِينَا مِمَّا يُلْقِي الشَّيْطَانُ فِي أَنْفُسِنَا فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَدْ سَأَلْتُهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ يُنْجِيكُمْ مِنْ ذَلِكَ أَنْ تَقُولُوا مَا أَمَرْتُ عَمِّي أَنْ يَقُولَهُ

हमसे [अबू सैद] बानी हाशिम के एक पूर्व गुलाम, हमसे [अब्दुल अजीज बिन मुहम्मद] अऊर [सैद बिन सलामा बिन अबुल हुसम] से [अमरू बिन अबू अमरू] से [अबुल हुवैरिट्स] से [मुहम्मद बिन जुबैर बिन मुथिम] से कहिन है कि उथमान कहिन; हम सपना देखेन कि हम अल्लाह के रसूल से कुछ अइसन चीज के बारे मा पूछ सकित है जवन हमका शैतान के फुसफुसाहट से बचा सकत है, एहसे [अबू बकर] कहिन; हम पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से वहिके बारे मा पूछेन, तौ उ कहिन: 'तुमका वहिसे का बचा सकत है, तुम उ वाक्य कहौ जेका हम अपने चाचा का कहै का आदेश दिहे रहेन लेकिन उ कहै का नाहीं चाहत रहे'।

Hadith

Imam Ahmad : 37

حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ يُونُسَ عَنِ الْحَسَنِ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَطَبَ النَّاسَ فَقَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ النَّاسَ لَمْ يُعْطَوْا فِي الدُّنْيَا خَيْرًا مِنْ الْيَقِينِ وَالْمُعَافَاةِ فَسَلُوهُمَا اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ

हमका [इस्माइल बिन इब्राहिम] से [यूनुस] से [अल हसन] से बतावा गा है कि [अबू बकर लोगन के सामने] उपदेश दिहिन, फिर उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'हे लोग, वाकई ई दुनिया मा मनुष्यन का आत्मविश्वास अऊर सुरक्षा से बढ़िया कुछौ नाहीं दीन जात है, एहसे अल्लाह से दुइनौ के लिए माँगौ।'

Hadith

Imam Ahmad : 38

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ قَالَ وَحَدَّثَنِي حُسَيْنُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عِكْرِمَةَ مَوْلَى ابْنِ عَبَّاسٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ لَمَّا أَرَادُوا أَنْ يَحْفِرُوا لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَكَانَ أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِ يَضْرَحُ كَحَفْرِ أَهْلِ مَكَّةَ وَكَانَ أَبُو طَلْحَةَ زَيْدُ بْنُ سَهْلٍ يَحْفِرُ لِأَهْلِ الْمَدِينَةِ فَكَانَ يَلْحَدُ فَدَعَا الْعَبَّاسُ رَجُلَيْنِ فَقَالَ لِأَحَدِهِمَا اذْهَبْ إِلَى أَبِي عُبَيْدَةَ وَلِلْآخَرِ اذْهَبْ إِلَى أَبِي طَلْحَةَ اللَّهُمَّ خِرْ لِرَسُولِكَ قَالَ فَوَجَدَ صَاحِبُ أَبِي طَلْحَةَ أَبَا طَلْحَةَ فَجَاءَ بِهِ فَلَحَدَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमका [याकूब बिन इब्राहिम] बताइस है [इब्न इशाक] से हमका [मेरे पिता] बताइस है। ऊ कहत है; अऊर हमका [हुसैन बिन अब्दुल्ला] से [इब्न अब्बास के पूर्व गुलाम इकरीमा] से [इब्न अब्बास] से कहिन है, उ कहिन; जब साथी रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के कब्र खोदै चाहत रहें - तौ उनके पास दुई विकल्प रहे: - अबू उबैदा बिन अल जर्राह - अगर उ कब्र बनावत रहें - जे मक्का के लोगन के तरह खोदत रहें, अऊर अबू थल्हा जैद बिन साहल जे मदीना के लोगन के तरह खोदत रहें, अर्थात् कब्र बनावत रहें, तब अल्बास ने उनमें से एक का बोलावा अऊर ओनसे कहिन; 'अबू उबैदा के पास जा!' अउर दूसर से कहिस; 'अबू तल्हा के पास जा! हे अल्लाह, अपने रसूल के लिए चुनौ'। अऊर जाहिर तौर पर अबू तल्हा के पास गवा व्यक्ति ओका पावा अऊर तुरंत ओका लइ गवा, फिर उ रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के लिए लहत बनाइस'।

Hadith

Imam Ahmad : 39

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ سَعِيدٍ عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ أَخْبَرَنِي عُقْبَةُ بْنُ الْحَارِثِ قَالَ خَرَجْتُ مَعَ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مِنْ صَلَاةِ الْعَصْرِ بَعْدَ وَفَاةِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِلَيَالٍ وَعَلِيٌّ عَلَيْهِ السَّلَام يَمْشِي إِلَى جَنْبِهِ فَمَرَّ بِحَسَنِ بْنِ عَلِيٍّ يَلْعَبُ مَعَ غِلْمَانٍ فَاحْتَمَلَهُ عَلَى رَقَبَتِهِ وَهُوَ يَقُولُ وَا بِأَبِي شَبَهُ النَّبِيِّ لَيْسَ شَبِيهًا بِعَلِيِّ قَالَ وَعَلِيٌّ يَضْحَكُ

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अज जुबैर] हमसे कहिन है [उमर बिन सैद] से [इब्नू अबिमुलैका] ने हमसे कहा है [उकबा बिन अल हरिथ] उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के मरे के कुछ रात बाद हम [अबू बकर अश सिद्दीक] के साथे असर के नमाज के बाद बाहर गयेन, अचानक अली उनके पास से गुजरिन, फिर उ हसन बिन अली के पास से गुजरिन जे बच्चन के साथे खेलत रहें, फिर उनका अपने कंधन पर उठाइन, अऊर कहिन; 'हे मोर पिता, ऊ पैगम्बर से मिलत जुलत है अऊर अली से मिलत जुलत नाहीं है'। उकबा कहिन 'अऊर अली हँसिन'।

Hadith

Imam Ahmad : 40

حَدَّثَنَا أَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ جَابِرٍ عَنْ عَامِرٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبْزَى عَنْ أَبِي بَكْرٍ قَالَ كُنْتُ عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَالِسًا فَجَاءَ مَاعِزُ بْنُ مَالِكٍ فَاعْتَرَفَ عِنْدَهُ مَرَّةً فَرَدَّهُ ثُمَّ جَاءَهُ فَاعْتَرَفَ عِنْدَهُ الثَّانِيَةَ فَرَدَّهُ ثُمَّ جَاءَهُ فَاعْتَرَفَ الثَّالِثَةَ فَرَدَّهُ فَقُلْتُ لَهُ إِنَّكَ إِنْ اعْتَرَفْتَ الرَّابِعَةَ رَجَمَكَ قَالَ فَاعْتَرَفَ الرَّابِعَةَ فَحَبَسَهُ ثُمَّ سَأَلَ عَنْهُ فَقَالُوا مَا نَعْلَمُ إِلَّا خَيْرًا قَالَ فَأَمَرَ بِرَجْمِهِ

हमसे [असवाद बिन अमीर] हमसे [इजरायल] से [जाबिर] से [अमीर] से [अब्दुर्रहमान बिन अब्ज़ा] से [अबू बकर] से कहिन है, उ कहिन; मैं पैगम्बर शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के बगल मा बैठा रहा, अचानक माइज़ बिन मलिक आए अऊर रसूलल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के सामने कबूल किहिन - कि उ व्यभिचार किहिन - पहली बार लेकिन उ आपन कबूलनामा से इनकार किहिन, फिर उ उनके पास आए अऊर उनके सामने दूसरी बार कबूल किहिन लेकिन उ मना कर दिहिन, फिर उ तीसरी बार कबूल किहिन अऊर उ मना कइ दिहिस, तौ हम ओसे कहेन; 'अगर तुम चौथी बार कबूल करब त उ निश्चित रूप से तुमका पत्थर मार देई,' अबू बकर कहिन; 'फिर उ चौथी बार कबूल किहिन तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओनका हिरासत मा लिहिन, फिर ओनके बारे मा पूछिन, तौ उइ जवाब दिहिन; 'हम अच्छाई के अलावा ओकरे बारे मा कुछौ नाहीं जानित'। यहिसे अल्लाह के रसूल ओनका पत्थरबाजी करै का आदेश दिहिन'।