Imam Ahmad : 361
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَثَلُ الَّذِي يَعُودُ فِي صَدَقَتِهِ كَمَثَلِ الَّذِي يَعُودُ فِي قَيْئِهِ
हमरा सब के [वाकी'] हमरा सब के [जैद बिन असलम] स [अपन पिता] स [उमर] स [हिस्यम बिन स'द] के कहलक अछि, ओ कहलनि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, जे व्यक्ति अपन दक्षिणा वापस लैत अछि ओकर दृष्टांत ओहि व्यक्ति जकाँ अछि जे अपन उल्टी वापस निगलैत अछि’।
Imam Ahmad : 362
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كَانَ أَهْلُ الْجَاهِلِيَّةِ لَا يُفِيضُونَ مِنْ جَمْعٍ حَتَّى يَقُولُوا أَشْرِقْ ثَبِيرُ كَيْمَا نُغِيرُ فَلَمَّا جَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَالَفَهُمْ فَكَانَ يَدْفَعُ مِنْ جَمْعٍ مِقْدَارَ صَلَاةِ الْمُسْفِرِينَ بِصَلَاةِ الْغَدَاةِ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ
[सुफयान] स [अबू इशक] स [अमरू बिन मैमुन] स [उमर] स हमरा सब कए [वाकी’] कहला के बाद ओ कहलनि; 'पहिने जहिलिया लोक जम'उन -मुजदालिफा- छोड़बासँ मना नहि करैत छल तेँ कहलक; 'ऊपर- त्साबीर प्रकट भेल, तेँ हम सभ तुरन्त चलि गेलहुँ'। जखन अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) आबि गेलाह त हुनका सब सं असहमत भ गेलाह आ नमाज के समय मुसफिर लोक के लेल छोड़ि देलखिन्ह - जे लोक जखन पूर्वी आकाश पहिने सं चमकैत अछि तखन नमाज पढ़ैत छथि - सूर्योदय सं पहिने भोर के नमाज के समय पर'।
Imam Ahmad : 363
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا رَبَاحُ بْنُ أَبِي مَعْرُوفٍ عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ سَمِعَ ابْنَ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ قَالَ لِي عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ الْمَيِّتَ لَيُعَذَّبُ بِبُكَاءِ أَهْلِهِ عَلَيْهِ
हमरा सभकेँ [वाकी’] हमरा सभकेँ [रबाह बिन अबू म’रूफ] [इब्न अबीमुलिका]सँ कहलक अछि जे ओ [इब्न अब्बास]केँ कहैत सुनने अछि; [उमर] हमरा कहलनि; सुनलियैन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत छथि : 'सत्ते, मृतक के यातना देल जायत, कारण ओकर परिवार ओकरा पर कानैत अछि'।
Imam Ahmad : 364
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ حَسَنِ بْنِ صَالِحٍ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ سَالِمٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَمْسَحُ عَلَى خُفَّيْهِ فِي السَّفَرِ
[हसन बिन सालिह] स [‘अशिम बिन उबैदिल्लाह] स [सलीम] स [इब्न उमर] स हमरा सब कए [वाकी’] कहला के बाद ओ कहला; [उमर] कहलनि; 'हम देखलहुँ जे रसूलुल्लाह (स.अ.व.) यात्रा पर अपन दू खुफ पोछैत छलाह -'।
Imam Ahmad : 365
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ إِسْرَائِيلَ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَتَعَوَّذُ مِنْ الْبُخْلِ وَالْجُبْنِ وَعَذَابِ الْقَبْرِ وَأَرْذَلِ الْعُمُرِ وَفِتْنَةِ الصَّدْرِ قَالَ وَكِيعٌ فِتْنَةُ الصَّدْرِ أَنْ يَمُوتَ الرَّجُلُ وَذَكَرَ وَكِيعٌ الْفِتْنَةَ لَمْ يَتُبْ مِنْهَا
हमरा सब के [वाकी’] के [इजराइल] स [अबू इशाक] स [‘अमरू बिन मैमुन] स [उमर] स कहल गेल अछि, जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नटखट, कायर, कुबर के यातना स, घृणित उम्र स आ दिल के निंदा स शरण लेलनि। वाकी' बाजल; 'हृदय के फितनाह मरै वाला छै,' आरू वाकी' में अल फितनाह के अर्थ के जिक्र छै, अर्थात पश्चाताप करै स॑ पहल॑ ।
Imam Ahmad : 366
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ الْوَلِيدِ الشَّنِّيُّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ قَالَ جَلَسَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مَجْلِسًا كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَجْلِسُهُ تَمُرُّ عَلَيْهِ الْجَنَائِزُ قَالَ فَمَرُّوا بِجِنَازَةٍ فَأَثْنَوْا خَيْرًا فَقَالَ وَجَبَتْ ثُمَّ مَرُّوا بِجِنَازَةٍ فَأَثْنَوْا خَيْرًا فَقَالَ وَجَبَتْ ثُمَّ مَرُّوا بِجِنَازَةٍ فَقَالُوا خَيْرًا فَقَالَ وَجَبَتْ ثُمَّ مَرُّوا بِجِنَازَةٍ فَقَالُوا هَذَا كَانَ أَكْذَبَ النَّاسِ فَقَالَ إِنَّ أَكْذَبَ النَّاسِ أَكْذَبُهُمْ عَلَى اللَّهِ ثُمَّ الَّذِينَ يَلُونَهُمْ مَنْ كَذَبَ عَلَى رُوحِهِ فِي جَسَدِهِ قَالَ قَالُوا أَرَأَيْتَ إِذَا شَهِدَ أَرْبَعَةٌ قَالَ وَجَبَتْ قَالُوا أَوْ ثَلَاثَةٌ قَالَ وَثَلَاثَةٌ وَجَبَتْ قَالُوا وَاثْنَيْنِ قَالَ وَجَبَتْ وَلَأَنْ أَكُونَ قُلْتُ وَاحِدًا أَحَبُّ إِلَيَّ مِنْ حُمْرِ النَّعَمِ قَالَ فَقِيلَ لِعُمَرَ هَذَا شَيْءٌ تَقُولُهُ بِرَأْيِكَ أَمْ شَيْءٌ سَمِعْتَهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا بَلْ سَمِعْتُهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमरा सभकेँ [वाकी'] हमरा सभकेँ [उमर बिन वलीद अस्य सियानी] [अब्दुल्लाह बिन बुराइदा]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; एक बेर जखन उमर ओहि जगह पर बैसल छलाह जाहि ठाम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कब्जा केने छलाह जखन हुनका अंतिम संस्कारक जुलूस सं गुजरल गेल छलनि, अब्दुल्ला कहलनि; अस्तु, जखन अंतिम संस्कारक जुलूस ओहि ठाम सं गुजरल त ओ सब हुनकर प्रशंसा दयालुता सं केलनि, [उमर] कहलनि; 'वाजीब' तखन लाशक दोसर लाश बीति गेल आ ओ सभ दयापूर्वक ओकर प्रशंसा केलक, तखन उमर कहलक; 'अनिवार्य' तखन तेसर देह गुजरि गेल आ ओ सभ कहलक; 'ई व्यक्ति सबसँ बेसी झूठ बाज' बला मनुक्ख अछि,' उमर बजलाह; 'आवश्यक'। तखन उमर बजलाह; 'सत्ते, सबसँ बेसी झूठ बाज' बला लोक ओ होइत छथि जे अल्लाह सँ बेसी झूठ बाजैत छथि, तखन हुनका बाद अगिला लोक छथि जे अपन शरीर मे आत्मा सँ झूठ बाजैत छथि'। अब्दुल्ला कहलनि; पुछै छै; 'अहाँक की लागत जँ चारि गोटे गवाही दैत रहितथि?' ओ उत्तर देलथिन; 'आवश्यक'। ओ सभ फेर पुछलखिन; 'वा तीन गोटे छथि ?' ओ उत्तर देलथिन; 'तीन गोटे सेहो अनिवार्य अछि'। ओ सभ फेर पुछलखिन; 'आ जँ दू गोटे?' ओ उत्तर देलथिन; 'ई अनिवार्य अछि, आ जँ हम एक व्यक्ति कहब त' लाल ऊँट सँ बेसी हमरा नीक लागत'। ओ कहैत छथि; तखन उमरसँ पुछलकै; 'की अहाँ जे कहैत छी से अहाँक विचार सँ निकलैत अछि वा कोनो एहन बात जे अहाँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ सुनने छी?' ओ उत्तर देलथिन; 'नहि, मुदा हम ई बात सोझे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ सुनने रही।'
Imam Ahmad : 367
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبَايَةَ بْنِ رِفَاعَةَ قَالَ بَلَغَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ سَعْدًا لَمَّا بَنَى الْقَصْرَ قَالَ انْقَطَعَ الصُّوَيْتُ فَبَعَثَ إِلَيْهِ مُحَمَّدَ بْنَ مَسْلَمَةَ فَلَمَّا قَدِمَ أَخْرَجَ زَنْدَهُ وَأَوْرَى نَارَهُ وَابْتَاعَ حَطَبًا بِدِرْهَمٍ وَقِيلَ لِسَعْدٍ إِنَّ رَجُلًا فَعَلَ كَذَا وَكَذَا فَقَالَ ذَاكَ مُحَمَّدُ بْنُ مَسْلَمَةَ فَخَرَجَ إِلَيْهِ فَحَلَفَ بِاللَّهِ مَا قَالَهُ فَقَالَ نُؤَدِّي عَنْكَ الَّذِي تَقُولُهُ وَنَفْعَلُ مَا أُمِرْنَا بِهِ فَأَحْرَقَ الْبَابَ ثُمَّ أَقْبَلَ يَعْرِضُ عَلَيْهِ أَنْ يُزَوِّدَهُ فَأَبَى فَخَرَجَ فَقَدِمَ عَلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَهَجَّرَ إِلَيْهِ فَسَارَ ذَهَابَهُ وَرُجُوعَهُ تِسْعَ عَشْرَةَ فَقَالَ لَوْلَا حُسْنُ الظَّنِّ بِكَ لَرَأَيْنَا أَنَّكَ لَمْ تُؤَدِّ عَنَّا قَالَ بَلَى أَرْسَلَ يَقْرَأُ السَّلَامَ وَيَعْتَذِرُ وَيَحْلِفُ بِاللَّهِ مَا قَالَهُ قَالَ فَهَلْ زَوَّدَكَ شَيْئًا قَالَ لَا قَالَ فَمَا مَنَعَكَ أَنْ تُزَوِّدَنِي أَنْتَ قَالَ إِنِّي كَرِهْتُ أَنْ آمُرَ لَكَ فَيَكُونَ لَكَ الْبَارِدُ وَيَكُونَ لِي الْحَارُّ وَحَوْلِي أَهْلُ الْمَدِينَةِ قَدْ قَتَلَهُمْ الْجُوعُ وَقَدْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَشْبَعُ الرَّجُلُ دُونَ جَارِهِ آخِرُ مُسْنَدِ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حَدِيثُ السَّقِيفَةِ
हमरा सभकेँ [अब्दुररहमान] हमरा सभकेँ [सुफयान] [अपन पिता]सँ ['अबयाह बिन रिफा'आह]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; खबर [उमर] तक पहुँचि गेल छल जे जखन स'द महल बना रहल छलाह तखन ओ कहलनि; 'आवाज -संचार- कट गेल अछि'। अस्तु मुहम्मद बिन मसलमाह हुनका पठौलनि, जखन ओ आबि गेलाह तखन ओ अपन बांहि निकालि आगि जरा देलनि फेर दिरहम सं जलाऊ लकड़ी कीनि लेलनि, तखन ओ स'द सं कहलनि; ‘सत्ते कियो एहन-एहन केने अछि,’ तखन ओ उत्तर देलनि; 'ओ मुहम्मद बिन मसलमाह छथि'। तखन ओ हुनका सँ भेंट करय लेल निकललाह आ अल्लाह के कसम खा लेलनि जे ओ ई बात नहि कहलनि, तखन ओ कहलनि; 'अहाँ जे कहब से -अहाँसँ- हम सभ अंजाम देब, आ जे आदेश देल गेल अछि से पूरा करब,' तेँ ओ दरबज्जा जरा देलक, फेर ओकरा दिस मुँह केलक तखन स'द रोशन देबाक प्रस्ताव देलक मुदा ओ मना क' देलक। तखन मुहम्मद बिन मसलमा उमर लग वापस चलि गेलाह, आ ओ उन्नैस दिन धरि पैदल हुनका लग वापस आबि गेलाह, तखन उमर कहलनि; 'अहाँक प्रति हमर सभक नीक विचार नहि रहैत त' हम सभ ई निष्कर्ष निकालि लैतहुँ जे अहाँ हमर सभक इच्छा पूरा नहि केलहुँ,' ओ उत्तर देलनि; 'हँ, ओ नमस्कार पठौलनि आ माफी मँगलनि आ अल्लाह सँ शपथ लेलनि जे ओ ई बात नहि कहलनि'। तखन उमर पुछलखिन; 'ओ अहाँकेँ सुसज्जित केलक?' ओ उत्तर देलथिन; 'नहि' उमर बजलाह; 'हमरा सुसज्जित करबासँ अहाँकेँ की रोकैत अछि ?' ओ उत्तर देलथिन; 'हमरा ई कहब नीक नहि लगैत अछि, अहाँ ठंढा भ' जाइत छी जखन कि हम गरम भ' जाइत छी, आ हमरा चारू कात मदीनाक लोक अछि जे भूखल मरैत अछि, भले हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) केँ कहैत सुनने रही: 'जखन ओकर पड़ोसी भूखल रहैत अछि, ककरो पेट नहि हो'।' उमर बिन अल खथथब के मुसनद स अंतिम हदीस सकीफा के बारे में हदीस अछि |
Imam Ahmad : 368
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ عِيسَى الطَّبَّاعُ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ حَدَّثَنِي ابْنُ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ أَنَّ ابْنَ عَبَّاسٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ عَوْفٍ رَجَعَ إِلَى رَحْلِهِ قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ وَكُنْتُ أُقْرِئُ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ عَوْفٍ فَوَجَدَنِي وَأَنَا أَنْتَظِرُهُ وَذَلِكَ بِمِنًى فِي آخِرِ حَجَّةٍ حَجَّهَا عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ إِنَّ رَجُلًا أَتَى عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ إِنَّ فُلَانًا يَقُولُ لَوْ قَدْ مَاتَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَايَعْتُ فُلَانًا فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنِّي قَائِمٌ الْعَشِيَّةَ فِي النَّاسِ فَمُحَذِّرُهُمْ هَؤُلَاءِ الرَّهْطَ الَّذِينَ يُرِيدُونَ أَنْ يَغْصِبُوهُمْ أَمْرَهُمْ قَالَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ فَقُلْتُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ لَا تَفْعَلْ فَإِنَّ الْمَوْسِمَ يَجْمَعُ رَعَاعَ النَّاسِ وَغَوْغَاءَهُمْ وَإِنَّهُمْ الَّذِينَ يَغْلِبُونَ عَلَى مَجْلِسِكَ إِذَا قُمْتَ فِي النَّاسِ فَأَخْشَى أَنْ تَقُولَ مَقَالَةً يَطِيرُ بِهَا أُولَئِكَ فَلَا يَعُوهَا وَلَا يَضَعُوهَا عَلَى مَوَاضِعِهَا وَلَكِنْ حَتَّى تَقْدَمَ الْمَدِينَةَ فَإِنَّهَا دَارُ الْهِجْرَةِ وَالسُّنَّةِ وَتَخْلُصَ بِعُلَمَاءِ النَّاسِ وَأَشْرَافِهِمْ فَتَقُولَ مَا قُلْتَ مُتَمَكِّنًا فَيَعُونَ مَقَالَتَكَ وَيَضَعُونَهَا مَوَاضِعَهَا فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لَئِنْ قَدِمْتُ الْمَدِينَةَ سَالِمًا صَالِحًا لَأُكَلِّمَنَّ بِهَا النَّاسَ فِي أَوَّلِ مَقَامٍ أَقُومُهُ فَلَمَّا قَدِمْنَا الْمَدِينَةَ فِي عَقِبِ ذِي الْحِجَّةِ وَكَانَ يَوْمَ الْجُمُعَةِ عَجَّلْتُ الرَّوَاحَ صَكَّةَ الْأَعْمَى فَقُلْتُ لِمَالِكٍ وَمَا صَكَّةُ الْأَعْمَى قَالَ إِنَّهُ لَا يُبَالِي أَيَّ سَاعَةٍ خَرَجَ لَا يَعْرِفُ الْحَرَّ وَالْبَرْدَ وَنَحْوَ هَذَا فَوَجَدْتُ سَعِيدَ بْنَ زَيْدٍ عِنْدَ رُكْنِ الْمِنْبَرِ الْأَيْمَنِ قَدْ سَبَقَنِي فَجَلَسْتُ حِذَاءَهُ تَحُكُّ رُكْبَتِي رُكْبَتَهُ فَلَمْ أَنْشَبْ أَنْ طَلَعَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَلَمَّا رَأَيْتُهُ قُلْتُ لَيَقُولَنَّ الْعَشِيَّةَ عَلَى هَذَا الْمِنْبَرِ مَقَالَةً مَا قَالَهَا عَلَيْهِ أَحَدٌ قَبْلَهُ قَالَ فَأَنْكَرَ سَعِيدُ بْنُ زَيْدٍ ذَلِكَ فَقَالَ مَا عَسَيْتَ أَنْ يَقُولَ مَا لَمْ يَقُلْ أَحَدٌ فَجَلَسَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَلَى الْمِنْبَرِ فَلَمَّا سَكَتَ الْمُؤَذِّنُ قَامَ فَأَثْنَى عَلَى اللَّهِ بِمَا هُوَ أَهْلُهُ ثُمَّ قَالَ أَمَّا بَعْدُ أَيُّهَا النَّاسُ فَإِنِّي قَائِلٌ مَقَالَةً قَدْ قُدِّرَ لِي أَنْ أَقُولَهَا لَا أَدْرِي لَعَلَّهَا بَيْنَ يَدَيْ أَجَلِي فَمَنْ وَعَاهَا وَعَقَلَهَا فَلْيُحَدِّثْ بِهَا حَيْثُ انْتَهَتْ بِهِ رَاحِلَتُهُ وَمَنْ لَمْ يَعِهَا فَلَا أُحِلُّ لَهُ أَنْ يَكْذِبَ عَلَيَّ إِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى بَعَثَ مُحَمَّدًا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالْحَقِّ وَأَنْزَلَ عَلَيْهِ الْكِتَابَ وَكَانَ مِمَّا أَنْزَلَ عَلَيْهِ آيَةُ الرَّجْمِ فَقَرَأْنَاهَا وَوَعَيْنَاهَا وَرَجَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَجَمْنَا بَعْدَهُ فَأَخْشَى إِنْ طَالَ بِالنَّاسِ زَمَانٌ أَنْ يَقُولَ قَائِلٌ لَا نَجِدُ آيَةَ الرَّجْمِ فِي كِتَابِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فَيَضِلُّوا بِتَرْكِ فَرِيضَةٍ قَدْ أَنْزَلَهَا اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ فَالرَّجْمُ فِي كِتَابِ اللَّهِ حَقٌّ عَلَى مَنْ زَنَى إِذَا أُحْصِنَ مِنْ الرِّجَالِ وَالنِّسَاءِ إِذَا قَامَتْ الْبَيِّنَةُ أَوْ الْحَبَلُ أَوْ الِاعْتِرَافُ أَلَا وَإِنَّا قَدْ كُنَّا نَقْرَأُ لَا تَرْغَبُوا عَنْ آبَائِكُمْ فَإِنَّ كُفْرًا بِكُمْ أَنْ تَرْغَبُوا عَنْ آبَائِكُمْ أَلَا وَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تُطْرُونِي كَمَا أُطْرِيَ عِيسَى ابْنُ مَرْيَمَ عَلَيْهِ السَّلَام فَإِنَّمَا أَنَا عَبْدُ اللَّهِ فَقُولُوا عَبْدُ اللَّهِ وَرَسُولُهُ وَقَدْ بَلَغَنِي أَنَّ قَائِلًا مِنْكُمْ يَقُولُ لَوْ قَدْ مَاتَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَايَعْتُ فُلَانًا فَلَا يَغْتَرَّنَّ امْرُؤٌ أَنْ يَقُولَ إِنَّ بَيْعَةَ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ كَانَتْ فَلْتَةً أَلَا وَإِنَّهَا كَانَتْ كَذَلِكَ أَلَا وَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ وَقَى شَرَّهَا وَلَيْسَ فِيكُمْ الْيَوْمَ مَنْ تُقْطَعُ إِلَيْهِ الْأَعْنَاقُ مِثْلُ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَلَا وَإِنَّهُ كَانَ مِنْ خَبَرِنَا حِينَ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ عَلِيًّا وَالزُّبَيْرَ وَمَنْ كَانَ مَعَهُمَا تَخَلَّفُوا فِي بَيْتِ فَاطِمَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا بِنْتِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَتَخَلَّفَتْ عَنَّا الْأَنْصَارُ بِأَجْمَعِهَا فِي سَقِيفَةِ بَنِي سَاعِدَةَ وَاجْتَمَعَ الْمُهَاجِرُونَ إِلَى أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقُلْتُ لَهُ يَا أَبَا بَكْرٍ انْطَلِقْ بِنَا إِلَى إِخْوَانِنَا مِنْ الْأَنْصَارِ فَانْطَلَقْنَا نَؤُمُّهُمْ حَتَّى لَقِيَنَا رَجُلَانِ صَالِحَانِ فَذَكَرَا لَنَا الَّذِي صَنَعَ الْقَوْمُ فَقَالَا أَيْنَ تُرِيدُونَ يَا مَعْشَرَ الْمُهَاجِرِينَ فَقُلْتُ نُرِيدُ إِخْوَانَنَا هَؤُلَاءِ مِنْ الْأَنْصَارِ فَقَالَا لَا عَلَيْكُمْ أَنْ لَا تَقْرَبُوهُمْ وَاقْضُوا أَمْرَكُمْ يَا مَعْشَرَ الْمُهَاجِرِينَ فَقُلْتُ وَاللَّهِ لَنَأْتِيَنَّهُمْ فَانْطَلَقْنَا حَتَّى جِئْنَاهُمْ فِي سَقِيفَةِ بَنِي سَاعِدَةَ فَإِذَا هُمْ مُجْتَمِعُونَ وَإِذَا بَيْنَ ظَهْرَانَيْهِمْ رَجُلٌ مُزَمَّلٌ فَقُلْتُ مَنْ هَذَا فَقَالُوا سَعْدُ بْنُ عُبَادَةَ فَقُلْتُ مَا لَهُ قَالُوا وَجِعٌ فَلَمَّا جَلَسْنَا قَامَ خَطِيبُهُمْ فَأَثْنَى عَلَى اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ بِمَا هُوَ أَهْلُهُ وَقَالَ أَمَّا بَعْدُ فَنَحْنُ أَنْصَارُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ وَكَتِيبَةُ الْإِسْلَامِ وَأَنْتُمْ يَا مَعْشَرَ الْمُهَاجِرِينَ رَهْطٌ مِنَّا وَقَدْ دَفَّتْ دَافَّةٌ مِنْكُمْ يُرِيدُونَ أَنْ يَخْزِلُونَا مِنْ أَصْلِنَا وَيَحْضُنُونَا مِنْ الْأَمْرِ فَلَمَّا سَكَتَ أَرَدْتُ أَنْ أَتَكَلَّمَ وَكُنْتُ قَدْ زَوَّرْتُ مَقَالَةً أَعْجَبَتْنِي أَرَدْتُ أَنْ أَقُولَهَا بَيْنَ يَدَيْ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَدْ كُنْتُ أُدَارِي مِنْهُ بَعْضَ الْحَدِّ وَهُوَ كَانَ أَحْلَمَ مِنِّي وَأَوْقَرَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَلَى رِسْلِكَ فَكَرِهْتُ أَنْ أُغْضِبَهُ وَكَانَ أَعْلَمَ مِنِّي وَأَوْقَرَ وَاللَّهِ مَا تَرَكَ مِنْ كَلِمَةٍ أَعْجَبَتْنِي فِي تَزْوِيرِي إِلَّا قَالَهَا فِي بَدِيهَتِهِ وَأَفْضَلَ حَتَّى سَكَتَ فَقَالَ أَمَّا بَعْدُ فَمَا ذَكَرْتُمْ مِنْ خَيْرٍ فَأَنْتُمْ أَهْلُهُ وَلَمْ تَعْرِفْ الْعَرَبُ هَذَا الْأَمْرَ إِلَّا لِهَذَا الْحَيِّ مِنْ قُرَيْشٍ هُمْ أَوْسَطُ الْعَرَبِ نَسَبًا وَدَارًا وَقَدْ رَضِيتُ لَكُمْ أَحَدَ هَذَيْنِ الرَّجُلَيْنِ أَيَّهُمَا شِئْتُمْ وَأَخَذَ بِيَدِي وَبِيَدِ أَبِي عُبَيْدَةَ بْنِ الْجَرَّاحِ فَلَمْ أَكْرَهْ مِمَّا قَالَ غَيْرَهَا وَكَانَ وَاللَّهِ أَنْ أُقَدَّمَ فَتُضْرَبَ عُنُقِي لَا يُقَرِّبُنِي ذَلِكَ إِلَى إِثْمٍ أَحَبَّ إِلَيَّ مِنْ أَنْ أَتَأَمَّرَ عَلَى قَوْمٍ فِيهِمْ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِلَّا أَنْ تَغَيَّرَ نَفْسِي عِنْدَ الْمَوْتِ فَقَالَ قَائِلٌ مِنْ الْأَنْصَارِ أَنَا جُذَيْلُهَا الْمُحَكَّكُ وَعُذَيْقُهَا الْمُرَجَّبُ مِنَّا أَمِيرٌ وَمِنْكُمْ أَمِيرٌ يَا مَعْشَرَ قُرَيْشٍ فَقُلْتُ لِمَالِكٍ مَا مَعْنَى أَنَا جُذَيْلُهَا الْمُحَكَّكُ وَعُذَيْقُهَا الْمُرَجَّبُ قَالَ كَأَنَّهُ يَقُولُ أَنَا دَاهِيَتُهَا قَالَ وَكَثُرَ اللَّغَطُ وَارْتَفَعَتْ الْأَصْوَاتُ حَتَّى خَشِيتُ الِاخْتِلَافَ فَقُلْتُ ابْسُطْ يَدَكَ يَا أَبَا بَكْرٍ فَبَسَطَ يَدَهُ فَبَايَعْتُهُ وَبَايَعَهُ الْمُهَاجِرُونَ ثُمَّ بَايَعَهُ الْأَنْصَارُ وَنَزَوْنَا عَلَى سَعْدِ بْنِ عُبَادَةَ فَقَالَ قَائِلٌ مِنْهُمْ قَتَلْتُمْ سَعْدًا فَقُلْتُ قَتَلَ اللَّهُ سَعْدًا وَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَمَا وَاللَّهِ مَا وَجَدْنَا فِيمَا حَضَرْنَا أَمْرًا هُوَ أَقْوَى مِنْ مُبَايَعَةِ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَشِينَا إِنْ فَارَقْنَا الْقَوْمَ وَلَمْ تَكُنْ بَيْعَةٌ أَنْ يُحْدِثُوا بَعْدَنَا بَيْعَةً فَإِمَّا أَنْ نُتَابِعَهُمْ عَلَى مَا لَا نَرْضَى وَإِمَّا أَنْ نُخَالِفَهُمْ فَيَكُونَ فِيهِ فَسَادٌ فَمَنْ بَايَعَ أَمِيرًا عَنْ غَيْرِ مَشُورَةِ الْمُسْلِمِينَ فَلَا بَيْعَةَ لَهُ وَلَا بَيْعَةَ لِلَّذِي بَايَعَهُ تَغِرَّةً أَنْ يُقْتَلَا قَالَ مَالِكٌ وَأَخْبَرَنِي ابْنُ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ أَنَّ الرَّجُلَيْنِ اللَّذَيْنِ لَقِيَاهُمَا عُوَيْمِرُ بْنُ سَاعِدَةَ وَمَعْنُ بْنُ عَدِيٍّ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ وَأَخْبَرَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ أَنَّ الَّذِي قَالَ أَنَا جُذَيْلُهَا الْمُحَكَّكُ وَعُذَيْقُهَا الْمُرَجَّبُ الْحُبَابُ بْنُ الْمُنْذِرِ
हमरा सब के कहलक अछि [इशक बिन ईसा अथ थब्बा'] हमरा सब के बता देने अछि [मलिक बिन अनस] हमरा [इब्नु शिहाब] के ['उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] स कहलक अछि जे [इब्नु अब्बास] हुनका सूचित केने छथि, जे [अब्दुररहमान बिन औफ] अपन गाड़ी में वापस आबि गेल छथि। इब्न अब्बास कहलनि; 'हम अब्दुररहमान बिन औफ सँ भेंट करय जा रहल छलहुँ, आ ओ हमरा सँ भेंट केलनि जखन हम हुनकर प्रतीक्षा मे छलहुँ ।' ई घटना उमर बिन अल खथथाब द्वारा करलौ गेलौ पिछला हज के मौसम मँ मीना मँ घटित होय गेलै । अब्दुररहमान कहलनि; 'सत्ते, एक आदमी उमर बिन अल खथथाब लग आबि कहलक; 'उमर मरि गेल रहितथि त हम फल्लाँक प्रति वफादारी क' लेने रहितहुँ' । उमर जबाब देलकै; 'हम एखनो जनता के बीच रहैत छी, ताहि लेल जे जनता के नेतृत्व हड़पय चाहैत छथि ओकरा चेताबैत छी'। अब्दुररहमान बिन औफ कहलनि; हम कहलियनि; 'हे अमीरुल मुकमिनिन, एहन नहि करू! कारण हज के एहि मौसम में निम्न वर्ग आ अज्ञानी हुनका सब के बीच जमा भ गेल छथि, आ वास्तव में ओ सब अहाँक मजलिस में हावी छथि, जौं अहाँ लोक के बीच ठाढ़ भ जायब त हमरा डर अछि जे अहाँ किछु एहन बात कहब जाहि पर ओ सब लापरवाह भ जायत, जाहि स ओ सब एकरा नै बुझि सकैत छथि आ नै ओ सब ओकरा ओकर जगह पर राखत, मुदा - अहाँ जे कहय जा रहल छी ताहि पर रोक लगाउ - जाबत अहाँ मदीना नै पहुंचब, सचमुच मदीना अछि हिजरा आ सुन्नत के जगह पर, आ अहाँ विद्वान आ हुनकर सम्मानित लोक के संग -ई समस्या के समाधान क सकैत छी, जाहि स अहाँ जे कहय के अछि से शान्त भ क कहि सकैत छी, तखन ओ सब अहाँक कहब बुझि ओकर जगह पर राखि सकैत छथि' | तखन उमर बजलाह; 'जँ हम मदीना सुरक्षित आ स्वस्थ पहुँचब त' हम एहि बात केँ ओहि ठामक लोक धरि अवश्य पहुँचा देब जतय हम पहिने पैर रखलहुँ'।' अस्तु, जखन धुल हिजाह मास सं पहिने मदीना पहुँचलहुं आ शुक्र दिन सं मेल खाइत छल, हम -अब्दुररहमान- तुरंत शकतुल अ'मा' गेलहुं, -हम मालिक सं पूछलहुं; 'शक्कतुल अ'मा के की मतलब छै?' ओ उत्तर देलथिन; 'मतलब ओकरा कोन समय जाय से कोनो मतलब नै छै, गर्मी छै आकि ठंढा आ एहने-एहने कोनो परवाह नै'। - तखन हमरा मंच के दहिना कात सईद बिन जैद भेटल जे हमरा स पहिने बैसल छलाह, तखन हम हुनकर ठेहुन पर ठेहुन दबाबैत हुनका सोझा बैसल रही, उमर के प्रकट भेलाक किछुए दिनक बाद, जखन हम हुनका देखलहुं त हम कहलियनि; 'आइ दुपहर मे एहि मंच पर एहन शब्द अवश्य बाजल जायत जे पहिने कियो नहि कहने हो' । अब्दुररहमान बिन औफ कहलनि; 'सैद बिन जैद हमर बात केँ नकारलनि, तखन ओ कहलनि; 'की? अहाँ हुनकासँ उम्मीद करैत छी जे ओ एहन बात कहथि जे आइ धरि कियो नहि कहने हो?' तखन उमर मंच पर बैसि गेलाह, आ मुअजीन के चुप रहला के बाद -नमाज के आह्वान समाप्त भेला के बाद-, ओ [-उमर-] ठाढ़ भ गेलाह आ अल्लाह के हुनकर योग्य स्तुति के संग स्तुति केलनि, फेर कहलनि; 'अम्मा बा'डू, हे मनुष्य, सचमुच हम एकटा एहन शब्द कहब जे हमरा कहबाक भाग्य मे लिखल अछि, हमरा नहि बुझल अछि, ई एहि लेल भ' सकैत अछि जे हमर मृत्यु हमरा सोझाँ अछि, जे कियो ओहि शब्द केँ बुझैत आ बुझैत अछि, ओकरा अपन वाहन जतय पहुँचि जाय, ओकरा कहबाक चाही। जे कियो नै बुझैत अछि, तखन हम ओकरा हमरा स झूठ नहि बाजय दैत छी, वास्तव में अल्लाह तबराका वतअला मुहम्मद के सच्चाई के संग भेजने छथि, आ ओ हुनका किताब के उतारने छथि, जे आयत हुनका पर उतारल गेल छल ओहि में पत्थरबाजी के नियम के बारे में आयत छल, तखन हम सब ओकरा पढ़लौं आ बुझलौं, फेर अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पत्थरबाजी के नियम के लागू केलनि आ हम सब सेहो हुनका बाद एकरा लागू केलौं मरि गेल। हमरा डर अछि जे बहुत दिन मे लोक कहत; 'सत्ते, हमरा लोकनि केँ पाथर मारबाक नियमक संबंध मे कोनो श्लोक नहि भेटल'। तखन कोनो फर्ज जे अल्लाह उतारने छथि से छोड़ि देल जायत। सचमुच, पत्थरबाजी के नियम अल्लाह के किताब में एकटा अधिकार छै, जे कियो व्यभिचार करै छै अगर ओकरा मुहशॉन छै - कहियो विवाहित - स्त्री आ पुरुष दुनू, जँ प्रमाण अछि, गर्भधारण वा स्वीकारोक्ति | कृपया ई जानि लिअ जे हम सभ पढ़ने छी : 'अपन पिता सभ सँ घृणा नहि करू, कारण एहि सँ अहाँ सभ काफिर भ' सकैत छी', ई ज्ञात हो जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर कहने छलाह: 'हमर पूजा ओहिना नहि करू जेना ईसा बिन मरियम केर पूजा कयल गेल छल, वास्तव मे हम मात्र एकटा नौकर छी, तेँ कहब; 'हुनकर सेवक आ दूत'। सत्ते, हमरा मोन मे आयल अछि जे अहाँ सभ मे कियो एहन अछि जे कहैत अछि; 'जँ उमर मरि जेताह तखन हम फल्लाँ सँ वफादारी करब' । ई कहि ककरो धोखा नहि देल जाय; 'सत्ते, अबू बकर के वफादारी के शपथ अचानक भेलै'। ई जानि लिअ जे सत्ते एहने भेल। ई जानि लिअ जे अल्लाह दीक्षाक बुराईक ख्याल रखने छथि, आ आइ अहाँ सभ मे एहन कियो नहि अछि जे अहाँ सभ सँ पहिने भेल हो, जकर गुणक टक्कर अबू बकर सन कियो नहि क' सकैत अछि। जानू जे रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम के मृत्यु के समय हमरा सब के पास जे खबर आयल छल ओहि में ई छल जे अली, जुबैर आ हुनका सब के संग जे लोक छल, हुनका सब के फातिमा बिंत रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्ल्लम के घर में विवाद छल, संगहि द अंसार के सब लोक के हमरा सब स त्सकिफा बनी सैइदा में विवाद भेल छल, तखन मुहाजिरीन सब के संग जमा भ गेल छल हम आ अबू बकर हुनका कहलियनि; 'हे अबू बकर, हमरा सभक संग हमर भाइ सभ, अर्थात अंसार सभ लग जाउ।' तखन हम सब गेलहुँ जाबत दू टा सालीह आदमी नहि भेटल, आ दुनू गोटे हमरा लोकनि केँ ई बात कहलनि जे लोक - अंसार - की क' रहल अछि. दुनू गोटे पुछलकै; 'हे मुहाजिरीन लोक, अहाँ कतय जा रहल छी?' हम उत्तर देलियनि; 'हमरा लोकनि अपन भाइ अर्थात अंसार लग जेबाक इच्छा रखैत छी ।' दुनू गोटे कहलनि; 'हुनका लग नहि जाउ, अपन काज तय करू हे मुहाजिरीन।' हम कहलियनि; 'अल्लाह के कसम, सचमुच हम हुनका सब लग आबि जायब'। तखन हम सभ गेलहुँ जाबत धरि त्साकिफा बनी सैइदा मे हुनका सभ सँ भेंट भेल आ ओ सभ जमा भ' गेल छल, बीच मे एकटा आदमी छल जे कम्बल पहिरने छल, हम पुछलियनि; 'ई व्यक्ति के अछि ?' ओ सभ -अंसार- उत्तर देलनि; 'स'द बिन उबादाह'। हम पुछलियनि; 'ओकरा की गलती छै?' ओ सभ उत्तर देलथिन; 'बीमार'। हमरा लोकनि बैसलाक बाद हुनका लोकनिक उपदेशक - अंसार - ठाढ़ भ' अल्लाहक योग्य स्तुतिक संग अल्लाहक स्तुति केलनि, आ कहलनि; 'अम्मा ब'दू, हम अंसारुल्लाह - अल्लाह के धर्म के सहायक - आ इस्लामी सेना छी, जखन कि अहाँ, हे मुहाजिरीन, हमरा सबहक एकटा समूह छी, वास्तव में अहाँक एकटा समूह आबि गेल अछि - धीरे-धीरे चलैत - जे हमरा सब के हमर अड्डा स काटि देत, आ हमरा सब के अपन इलाका स भगा देत'। जखन वक्ता चुप भ' गेलाह त' हम बाज' चाहैत छलहुँ आ किछु आश्चर्यजनक तैयारी क' लेने छलहुँ, अबू बकरक सोझाँ ई शब्द कह' चाहैत छलहुँ, आ हुनका पर तमसाह सँ बचय चाहैत छलहुँ, आ ओ हमरा सँ बेसी कोमल आ शांत व्यक्ति छलाह, तखन अबू बकर कहलनि; 'धीरे सं!' हमरा हुनका पर तमसाएबा स घृणा अछि, कियाक त ओ हमरा स बेसी कोमल आ शांत व्यक्ति छथि। अल्लाह के कसम, जँ ओ हमरा जे भाषण तैयार केने छी ताहि मे एकोटा वाक्य नहि छोड़ताह जे हमरा आश्चर्यचकित क' दैत अछि जाबत धरि ओ अनायास नीक नहि कहताह, तखन अंततः ओ चुप भ' जेताह. तखन बजलाह 'अम्मा बा'डू, अहाँ जे नीक बात कहलहुँ अछि, अहाँ सभ विशेषज्ञ छी । मुदा, अरब लोकनि कें ई बात कुरैश आबादी छोड़ि नहिं बुझल छलनि. ई सब अरब राष्ट्र छै जेकरऽ वंश आरू निवास सबसें मध्यम छै । "सत्ते, हम अहाँक लेल एहि दुनू गोटे मे सँ एकटा केँ आशीर्वाद देने छी, दुनू मे सँ जे अहाँ चाहैत छी," अबू बकर हमर हाथ आ अबू उबैदा बिन अल जर्राह केर हाथ पकड़ि लेलनि, जाहि सँ हम हुनका एहि सँ बेसी किछु बाज' लेल मजबूर नहि क' सकलहुँ। अल्लाह के कसम हमरा आगू आबय के चाही छल आ फेर हमर गरदनि काटि देबाक चाही छल, अर्थात हम एकरा पसंद करैत छी, कारण ई हमरा पाप के नजदीक नै आनि सकैत अछि, हमरा स बेसी जे हम एकटा लोक के नेता छी जखन कि हुनका सब में अबू बकर सेहो छथि, जाबत तक ई हमरा मरला पर हमरा नै बदलि देत। तखने अंसार मे सँ एक गोटे बाजल; 'अना जुद्जैलुहा अल मुहक्कक -हम मंगी ऊँटक लकड़ी छी जाहि सँ ओ जल्दी चलय- 'वा 'उद्जाइकुहा अल मुरोज्जाब -खजूरक गाछ जकर सहारा गाछ वा लकड़ी सँ होइत छैक कारण ओकरा आशंका होइत छैक जे ओ खसि पड़त कारण ई बहुत ऊँच आ फल भारी-, हमरा सभ सँ एकटा नेता अछि आ अहाँ सभ सँ एकटा नेता अछि, हे कुरैशक लोक'। -हम -इशाक बिन मूसा एट थब्बा'- मालिक सँ कहलक; 'अना जुदजैलुहा अल मुहक्कक वा 'उदजाइकुहा अल मुरोज्जाब' के की अर्थ छै?' मालिक उत्तर देलक; 'जेना ओ कहने छल जे हम विपत्ति छी'।- उमर बजलाह; 'अबोध आवाजक आवाज बेसी आ बेसी बढ़ैत गेल, जाहि सँ हमरा डर भेल जे विवाद भ' जेतै, तखन हम कहलियैक; 'हथ खोलू हे अबू बकर!' तखन ओ हाथ खोललनि आ हम हुनका प्रति वफादारी केलहुं, मुहाजिरीन हुनका सं वफादारी केलनि आ तखन अंसार सेहो हुनका सं वफादारी केलनि। तखन हमसब स'द बिन उबादा लग कूदि गेलहुं, आ ओहि मे सं एकटा - अंसार - कहलक 'अहाँ स'द कें मारि देलहुं', हम जवाब देलियनि; 'स'द के मारय वाला अल्लाह छलाह', उमर कहलनि; 'अल्लाह के कसम, हमरा सब के अपन मुलाकात में अबू बकर के प्रतिज्ञा स बेसी मजबूत किछु नै भेटल, हमरा सब के डर छल जे अगर ओ लोक हमरा सब स अलग भ गेल रहितथि, जखन कि वफादारी के प्रतिज्ञा एखन धरि नै छल, तखन ओ सब हमरा सब के बाद वफादारी के प्रण क लेताह।' एहि तरहेँ ई संभव अछि जे हम सभ हुनका सभक पाछाँ लागब जे हमरा सभकेँ मंजूर नहि अछि वा हुनका सभसँ विवाद नहि हो, जाहिसँ विनाश होयत। त॑ जे भी मुसलमानऽ के परामर्श के बिना कोनो नेता के प्रति वफादारी करै छै, वास्तव म॑ ओकरऽ निष्ठा अमान्य छै, आरू वफादारी करै वाला के प्रति वफादारी करै के अधिकार नै छै, ई आशंका छै कि दोनों - वफादारी करै वाला आरू वफादारी करै वाला - के हत्या होय जैतै' । मालिक बजलाह; आ उर्वाह बिन अज़ जुबैर स इब्न शिहाब क जानकारी देने छथि; कि हुनका जे दू आदमी भेटल छलनि ओ छलाह उवैमीर बिन सैइदा आ मा'न बिन आदि | इब्न शिहाब कहलनि; 'सैद बिन अल मुसैयब हमरा सूचित केने छथि जे जे व्यक्ति कहलनि; 'अना जुद्जैलुहा अल मुहक्कक वा 'उद्जाइकुहा अल मुरोज्जाब' अल हुबाब बिन अल मुंडिर अछि'।
Imam Ahmad : 369
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ عِيسَى أَخْبَرَنِي مَالِكٌ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَا أُخْبِرُكُمْ بِخَيْرِ دُورِ الْأَنْصَارِ بَنِي النَّجَّارِ ثُمَّ بَنِي عَبْدِ الْأَشْهَلِ ثُمَّ بَلْحَارِثِ بْنِ الْخَزْرَجِ ثُمَّ بَنِي سَاعِدَةَ وَقَالَ فِي كُلِّ دُورِ الْأَنْصَارِ خَيْرٌ
हमरा सब के कहलक अछि [इशक बिन ईसा] हमरा [मलिक] के [याह्या बिन सईद] स कहलक अछि जे ओ [अनस बिन मलिक] के कहैत सुनने छल; रसुलुल्लाह कहलनि: ‘जानू, हम अहाँ केँ कहैत छी जे अंसारक घर मे सबसँ नीक अछि बनी नज्जर, फेर बनी अब्दुल अस्यहल, फेर बलहारित बिन खजराज फेर बनी सईदा’, आ ओ कहलनि; 'अंसारक हर घर नीक अछि'।
Imam Ahmad : 370
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا مَالِكٌ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمُتَبَايِعَانِ بِالْخِيَارِ مَا لَمْ يَتَفَرَّقَا أَوْ يَكُونُ الْبَيْعُ خِيَارًا
हमरा सभकेँ [इशक बिन ईसा] हमरा सभकेँ [मालिक] [नाफी’]सँ [इब्न उमर]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि; 'विक्रेता आ खरीदार प्रत्येक केँ चुनबाक अधिकार छैक, जाबत धरि ओ अलग नहि भेल हो, वा खरीद-बिक्री एकटा विकल्प अछि'.
Imam Ahmad : 371
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ عِيسَى أَنْبَأَنَا مَالِكٌ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ بَيْعِ حَبَلِ الْحَبَلَةِ
हमरा सब के कहलक अछि [इशक बिन ईसा] हमरा सब के [मालिक] के [नाफी'] स [इब्न उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि; कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हबालुल हबलाह के खरीद-बिक्री पर रोक लगा देने छलाह - ऊंट के भ्रूण के खरीद-बिक्री पर जेकरा मादा मानल जाइत छल -'.
Imam Ahmad : 372
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ عِيسَى أَنْبَأَنَا مَالِكٌ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كُنَّا نَتَبَايَعُ الطَّعَامَ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَيَبْعَثُ عَلَيْنَا مَنْ يَأْمُرُنَا بِنَقْلِهِ مِنْ الْمَكَانِ الَّذِي ابْتَعْنَاهُ فِيهِ إِلَى مَكَانٍ سِوَاهُ قَبْلَ أَنْ نَبِيعَهُ
हमरा सब के कहलक अछि [इशक बिन ईसा] हमरा सब के [मालिक] के [नाफी'] स [इब्न उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय में भोजन खरीद-बिक्री के लेनदेन केलौं, तखन ओ हमरा सब लग लोक पठा देलखिन ताकि हम सब हुनकर जगह स खरीदल सामान के फेर स बेचय स पहिने दोसर जगह ल जायब'।
Imam Ahmad : 373
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ عِيسَى أَخْبَرَنَا مَالِكٌ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ ابْتَاعَ طَعَامًا فَلَا يَبِعْهُ حَتَّى يَسْتَوْفِيَهُ
हमरा सब के कहलक अछि [इशक बिन ईसा] हमरा सब के [मालिक] के [नाफी'] स [इब्न उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि; 'जे अन्न कीनत, ता धरि ओकरा पूरा नहि भेटय ता धरि बेचय नहि'।'
Imam Ahmad : 374
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ عِيسَى أَنْبَأَنَا مَالِكٌ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَعْتَقَ شِرْكًا لَهُ فِي عَبْدٍ فَكَانَ لَهُ مَا يَبْلُغُ ثَمَنَ الْعَبْدِ فَإِنَّهُ يُقَوَّمُ قِيمَةَ عَدْلٍ فَيُعْطَى شُرَكَاؤُهُ حَقَّهُمْ وَعَتَقَ عَلَيْهِ الْعَبْدَ وَإِلَّا فَقَدْ أَعْتَقَ مَا أَعْتَقَ
हमरा सब क॑ कहलऽ गेलऽ छै [इशक बिन ईसा] न॑ हमरा [मालिक] क॑ [नाफी’] स॑ [इब्न उमर] स॑ रिपोर्ट करल॑ छै कि अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि जे भी एगो दास क॑ मुक्त करी दै छै जेकरऽ संयुक्त स्वामित्व छै, त॑ ओकरा प॑ जिम्मेदारी छै कि दास केरऽ कीमत कतेक छै, तखनिये वू ओकरा बराबर बंटै छै, फेरू दोसरऽ साथी क॑ ओकरऽ अधिकार दै छै, एकरऽ बाद वू अपन दास केँ मुक्त क' दैत अछि, नहि त' ओ पहिने सँ ओहि दास सभ केँ मुक्त क' देने अछि, जकरा ओ मुक्त क' देने छल'।
Imam Ahmad : 375
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ سَعِيدٍ قَالَ قُلْتُ لِابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ رَجُلٌ لَاعَنَ امْرَأَتَهُ فَقَالَ فَرَّقَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَهُمَا وَذَكَرَ الْحَدِيثَ
[सईद] स [अय्यूब] स हमरा सब कए [सुफियन] कए कहला पर ओ कहलथि; हम [इब्न उमर] केँ कहलियनि, जे एकटा पति छथि जे अपन पत्नी सँ प्रेम करैत छलाह, तें ओ कहलनि; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह दुनू -पति-पत्नी- के अलग क देलखिन,' तखन ओ हदीस के जिक्र केलनि।
Imam Ahmad : 376
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَوْفٌ حَدَّثَنَا يَزِيدُ يَعْنِي الْفَارِسِيَّ قَالَ أَبِي أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا عَوْفٌ عَنْ يَزِيدَ قَالَ قَالَ لَنَا ابْنُ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قُلْتُ لِعُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ مَا حَمَلَكُمْ عَلَى أَنْ عَمَدْتُمْ إِلَى الْأَنْفَالِ وَهِيَ مِنْ الْمَثَانِي وَإِلَى بَرَاءَةٌ وَهِيَ مِنْ الْمِئِينَ فَقَرَنْتُمْ بَيْنَهُمَا وَلَمْ تَكْتُبُوا قَالَ ابْنُ جَعْفَرٍ بَيْنَهُمَا سَطْرًا بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ وَوَضَعْتُمُوهَا فِي السَّبْعِ الطِّوَالِ مَا حَمَلَكُمْ عَلَى ذَلِكَ قَالَ عُثْمَانُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ مِمَّا يَأْتِي عَلَيْهِ الزَّمَانُ يُنْزَلُ عَلَيْهِ مِنْ السُّوَرِ ذَوَاتِ الْعَدَدِ وَكَانَ إِذَا أُنْزِلَ عَلَيْهِ الشَّيْءُ يَدْعُو بَعْضَ مَنْ يَكْتُبُ عِنْدَهُ يَقُولُ ضَعُوا هَذَا فِي السُّورَةِ الَّتِي يُذْكَرُ فِيهَا كَذَا وَكَذَا وَيُنْزَلُ عَلَيْهِ الْآيَاتُ فَيَقُولُ ضَعُوا هَذِهِ الْآيَاتِ فِي السُّورَةِ الَّتِي يُذْكَرُ فِيهَا كَذَا وَكَذَا وَيُنْزَلُ عَلَيْهِ الْآيَةُ فَيَقُولُ ضَعُوا هَذِهِ الْآيَةَ فِي السُّورَةِ الَّتِي يُذْكَرُ فِيهَا كَذَا وَكَذَا وَكَانَتْ الْأَنْفَالُ مِنْ أَوَائِلِ مَا أُنْزِلَ بِالْمَدِينَةِ وَبَرَاءَةٌ مِنْ آخِرِ الْقُرْآنِ فَكَانَتْ قِصَّتُهَا شَبِيهًا بِقِصَّتِهَا فَقُبِضَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَمْ يُبَيِّنْ لَنَا أَنَّهَا مِنْهَا وَظَنَنْتُ أَنَّهَا مِنْهَا فَمِنْ ثَمَّ قَرَنْتُ بَيْنَهُمَا وَلَمْ أَكْتُبْ بَيْنَهُمَا سَطْرًا بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ قَالَ ابْنُ جَعْفَرٍ وَوَضَعْتُهَا فِ السَّبْعِ الطِّوَالِ
हमरा सभकेँ कहलक अछि [याह्या बिन सईद] हमरा सभकेँ कहलक अछि ['औफ] हमरा सभकेँ [यजीद अर्थात अल फरीसी] कहलक अछि। हमर पिता अहमद बिन हंबल कहने छथि; आ हमरा सभकेँ [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सभकेँ ['आउफ] [यजीद]सँ कहलक अछि जे ओ कहलनि [इब्न अब्बास] हमरा सभसँ कहलनि; हम उस्मान बिन अफ्फानसँ पुछलियनि; 'की कारण छल जे अहाँ जानि-बुझि क' सूरह अल अनफाल राखि देलहुँ भले ओ अल मत्सानी मे शामिल अछि - एकटा सूरह जकर आयत सौ सँ कम अछि - आ सूरह बर'आह - तौबाह मे - भले ई मि`इन मे शामिल अछि - एकटा एहन सूरह जाहि मे सौ आयत तक अछि - तखन अहाँ दुनू केँ मिला क' नहि लिखलहुँ' - इब्नू जा'फर कहलनि - 'आ अहाँ दुनूक बीच नहि लिखने छी।' सीमा के साथ 'बिसमिल्लाहिर रहमानीर रहीम' आ अहाँ एकरा एकटा पत्र मे राखि देलियैक जाहि मे सात टा नमहर सूरह शामिल अछि, अहाँ के ई कोन कारण बनल? ओ?' [उस्मान] कहलनि; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जखन हुनका लग कोनो समय आयल आ हुनका लग एकटा चिट्ठी उतरल जाहि मे बहुत रास आयत छल, आ जखन हुनका पर कोनो वही भेलनि त ओ कतेको लोक के बजौलनि जे हुनका बगल मे लिखैत छलाह, तखन ओ कहलनि: 'एहि मे उल्लेखित पत्र मे अहाँ लेल ई एहि तरहे आ एहि तरहे राखू,' आ जखन हुनका लग कतेको आयत उतरल त ओ कहलनि: 'ई आयत आ ई कृपा करू।' एहि मे एहि तरहें आ एहि तरहेँ उल्लेखित पत्र मे आयत,' आ जखन हुनका लग कोनो आयत उतरलनि त' ओ कहलनि: 'एहि मे उल्लेखित अक्षर मे एहि आयत केँ एहि तरहे राखू,' आ मदीना मे प्रकट भेल पहिल अक्षर मे अल अनफाल पत्र सेहो छल, जखन कि मदीना मे प्रकट भेल अंतिम अक्षर मे बर'आह -अत तौबाह- सेहो छल, आ ओकर सामग्री अल मे देल गेल सामग्री सँ मिलैत जुलैत छल अनफाल पत्र। हुनका सँ तें हम दुनू केँ मिला देलियनि आ दुनूक बीचक बाधा केँ 'बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम' सँ नहि लिखलहुँ - इब्न जा'फर कहलनि; - 'आ हम एकरा सात टा नमहर अक्षरक समूह मे राखि देलियैक'।
Imam Ahmad : 377
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ أَخْبَرَنِي أَبِي أَنَّ حُمْرَانَ أَخْبَرَهُ قَالَ تَوَضَّأَ عُثْمَانُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَلَى الْبَلَاطِ ثُمَّ قَالَ لَأُحَدِّثَنَّكُمْ حَدِيثًا سَمِعْتُهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَوْلَا آيَةٌ فِي كِتَابِ اللَّهِ مَا حَدَّثْتُكُمُوهُ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ تَوَضَّأَ فَأَحْسَنَ الْوُضُوءَ ثُمَّ دَخَلَ فَصَلَّى غُفِرَ لَهُ مَا بَيْنَهُ وَبَيْنَ الصَّلَاةِ الْأُخْرَى حَتَّى يُصَلِّيَهَا
[हिस्याम बिन उर्वाह] स हमरा सब कए [याह्या बिन सईद] कहला जे हमरा [हमर पिता] कए कहने छलाह जे [हुमरान] हुनका कहने छलाह, ओ कहलनि; [उस्मान] फर्श पर वजूद केलनि तखन ओ कहलनि; 'सत्ते हम अहाँ सभ केँ एकटा हदीस कहब जे हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ सुनने छी, जँ अल्लाह केर किताब मे कोनो आयत नहि रहैत त' बेशक हम अहाँ केँ नहि कहितहुँ, हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ कहैत सुनने रही जे: 'जे वद्दू करैत अछि आ नीक रूप मे अपन वद्लू करैत अछि आ फेर मस्जिद मे प्रवेश क' नमाज करैत अछि, ओकर पाप करैत अछि।' ओकर वुदलू आ ओकर कएल आन नमाजक बीच माफ भ' जेतै। एकरा अंजाम दियौक'।
Imam Ahmad : 378
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ مَالِكٍ حَدَّثَنِي نَافِعٌ عَنْ نُبَيْهِ بْنِ وَهْبٍ عَنْ أَبَانَ بْنِ عُثْمَانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ أَبِيهِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمُحْرِمُ لَا يَنْكِحُ وَلَا يُنْكِحُ وَلَا يَخْطُبُ
ई हमरा [याह्या बिन सईद] क॑ [मलिक] स॑ कहलऽ गेलऽ छै ई हमरा [नफी’] क॑ [नुबैह बिन वहाब] स॑ [अबन बिन उस्मान] स॑ [अपनऽ पिता] स॑ कहलऽ गेलऽ छै, पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑, हुनी कहलकै कि ‘जे लोग इहरम करी रहलऽ छै, ओकरा शादी नै करना चाहियऽ, शादी नै करना चाहियऽ आरू उपदेश नै देना चाहियऽ’ ।
Imam Ahmad : 379
حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنِ ابْنِ حَرْمَلَةَ قَالَ سَمِعْتُ سَعِيدًا يَعْنِي ابْنَ الْمُسَيَّبِ قَالَ خَرَجَ عُثْمَانُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حَاجًّا حَتَّى إِذَا كَانَ بِبَعْضِ الطَّرِيقِ قِيلَ لِعَلِيٍّ رِضْوَانُ اللَّهِ عَلَيْهِمَا إِنَّهُ قَدْ نَهَى عَنْ التَّمَتُّعِ بِالْعُمْرَةِ إِلَى الْحَجِّ فَقَالَ عَلِيٌّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لِأَصْحَابِهِ إِذَا ارْتَحَلَ فَارْتَحِلُوا فَأَهَلَّ عَلِيٌّ وَأَصْحَابُهُ بِعُمْرَةٍ فَلَمْ يُكَلِّمْهُ عُثْمَانُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فِي ذَلِكَ فَقَالَ لَهُ عَلِيٌّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَلَمْ أُخْبَرْ أَنَّكَ نَهَيْتَ عَنْ التَّمَتُّعِ بِالْعُمْرَةِ قَالَ فَقَالَ بَلَى قَالَ فَلَمْ تَسْمَعْ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَمَتَّعَ قَالَ بَلَى
[इब्न हरमाला] सँ हमरा सभ केँ [याह्या] केँ कहि ओ कहलनि; हम सुनलहुँ [सैद अर्थात इब्नुल मुसैयब] कहैत छथि; '[उस्मान बिन अफान] हज करय लेल निकललाह आ जखन ओ यात्राक बीच मे पहुँचलाह तखन अली केँ कहल गेलनि जे ओ -उस्मान- हज धरि उमरा मे तमाट्टू' केँ मना क' देने छथि, तेँ [अली] अपन साथी सभ सँ कहलनि; 'जँ ओ चलैत छथि तखन चलू, अहाँ सभ'। तखन अली आ ओकर साथी सब उमरा के मंशा शुरू केलक, आ उस्मान ओकरा ई बात नहि पहुँचेलक, तें अली ओकरा कहलक; 'हमरा ई नै कहलऽ गेलऽ छेलै कि तोहें उमरा में तमत्तू सें मना करी देलऽ छेल्हौ' -बिन अल मुसैयब न॑ कहलकै- तखनी उस्मान जवाब देलकै; 'हँ'। अली बजलाह; 'की अहाँ नहि सुनलहुँ जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तमाट्टू केलनि'?' उस्मान उत्तर देलनि; 'हँ'।
Imam Ahmad : 380
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ إِسْرَائِيلَ عَنْ عَامِرِ بْنِ شَقِيقٍ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ عُثْمَانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ ثَلَاثًا ثَلَاثًا
हमरा सब के [वाकी’] के [इजराइल] स [अमीर बिन स्याकीक] स [अबू व`इल] स [उस्मान बिन अफ्फान] स कहल गेल अछि, जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तीन बेर वजूद केलनि।