Imam Ahmad : 341
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَاصِمٍ الْأَحْوَلِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَرْجِسَ قَالَ رَأَيْتُ الْأُصَيْلِعَ يَعْنِي عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يُقَبِّلُ الْحَجَرَ وَيَقُولُ أَمَا إِنِّي أَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ وَلَكِنْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُقَبِّلُكَ
हमरा सब के [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के ['अशिम अल अहवाल] स [अब्दुल्लाह बिन सिरजिस] स [स्यूबाह] के कहलक अछि ओ कहलनि; हम देखलौं अल उशैली' अर्थात [उमर बिन अल खथथब] कहैत काल हजर -असवाद- के चुम्मा लैत; 'सत्ते, हमरा बुझल छल जे अहाँ मात्र एकटा पाथर छी, मुदा हम देखलहुँ जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अहाँ केँ चुम्मा लैत छथि'।
Imam Ahmad : 342
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا جَمْرَةَ الضُّبَعِيَّ يُحَدِّثُ عَنْ جُوَيْرِيَةَ بْنِ قُدَامَةَ قَالَ حَجَجْتُ فَأَتَيْتُ الْمَدِينَةَ الْعَامَ الَّذِي أُصِيبَ فِيهِ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ فَخَطَبَ فَقَالَ إِنِّي رَأَيْتُ كَأَنَّ دِيكًا أَحْمَرَ نَقَرَنِي نَقْرَةً أَوْ نَقْرَتَيْنِ شُعْبَةُ الشَّاكُّ فَكَانَ مِنْ أَمْرِهِ أَنَّهُ طُعِنَ فَأُذِنَ لِلنَّاسِ عَلَيْهِ فَكَانَ أَوَّلَ مَنْ دَخَلَ عَلَيْهِ أَصْحَابُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ أَهْلُ الْمَدِينَةِ ثُمَّ أَهْلُ الشَّامِ ثُمَّ أُذِنَ لِأَهْلِ الْعِرَاقِ فَدَخَلْتُ فِيمَنْ دَخَلَ قَالَ فَكَانَ كُلَّمَا دَخَلَ عَلَيْهِ قَوْمٌ أَثْنَوْا عَلَيْهِ وَبَكَوْا قَالَ فَلَمَّا دَخَلْنَا عَلَيْهِ قَالَ وَقَدْ عَصَبَ بَطْنَهُ بِعِمَامَةٍ سَوْدَاءَ وَالدَّمُ يَسِيلُ قَالَ فَقُلْنَا أَوْصِنَا قَالَ وَمَا سَأَلَهُ الْوَصِيَّةَ أَحَدٌ غَيْرُنَا فَقَالَ عَلَيْكُمْ بِكِتَابِ اللَّهِ فَإِنَّكُمْ لَنْ تَضِلُّوا مَا اتَّبَعْتُمُوهُ فَقُلْنَا أَوْصِنَا فَقَالَ أُوصِيكُمْ بِالْمُهَاجِرِينَ فَإِنَّ النَّاسَ سَيَكْثُرُونَ وَيَقِلُّونَ وَأُوصِيكُمْ بِالْأَنْصَارِ فَإِنَّهُمْ شَعْبُ الْإِسْلَامِ الَّذِي لَجِئَ إِلَيْهِ وَأُوصِيكُمْ بِالْأَعْرَابِ فَإِنَّهُمْ أَصْلُكُمْ وَمَادَّتُكُمْ وَأُوصِيكُمْ بِأَهْلِ ذِمَّتِكُمْ فَإِنَّهُمْ عَهْدُ نَبِيِّكُمْ وَرِزْقُ عِيَالِكُمْ قُومُوا عَنِّي قَالَ فَمَا زَادَنَا عَلَى هَؤُلَاءِ الْكَلِمَاتِ قَالَ مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ قَالَ شُعْبَةُ ثُمَّ سَأَلْتُهُ بَعْدَ ذَلِكَ فَقَالَ فِي الْأَعْرَابِ وَأُوصِيكُمْ بِالْأَعْرَابِ فَإِنَّهُمْ إِخْوَانُكُمْ وَعَدُوُّ عَدُوِّكُمْ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ أَنْبَأَنَا شُعْبَةُ سَمِعْتُ أَبَا جَمْرَةَ الضُّبَعِيَّ يُحَدِّثُ عَنْ جُوَيْرِيَةَ بْنِ قُدَامَةَ قَالَ حَجَجْتُ فَأَتَيْتُ الْمَدِينَةَ الْعَامَ الَّذِي أُصِيبَ فِيهِ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ فَخَطَبَ فَقَالَ إِنِّي رَأَيْتُ كَأَنَّ دِيكًا أَحْمَرَ نَقَرَنِي نَقْرَةً أَوْ نَقْرَتَيْنِ شُعْبَةُ الشَّاكُّ قَالَ فَمَا لَبِثَ إِلَّا جُمُعَةً حَتَّى طُعِنَ فَذَكَرَ مِثْلَهُ إِلَّا أَنَّهُ قَالَ وَأُوصِيكُمْ بِأَهْلِ ذِمَّتِكُمْ فَإِنَّهُمْ ذِمَّةُ نَبِيِّكُمْ قَالَ شُعْبَةُ ثُمَّ سَأَلْتُهُ بَعْدَ ذَلِكَ فَقَالَ فِي الْأَعْرَابِ وَأُوصِيكُمْ بِالْأَعْرَابِ فَإِنَّهُمْ إِخْوَانُكُمْ وَعَدُوُّ عَدُوِّكُمْ
हमरा सब के कहने छथि [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के कहने छथि [स्यूबाह] ओ कहलनि; हम [अबू हमजाह अदल द्लुबाई] के [जुवैरिया बिन कुदामाह] स एकटा कहानी कहैत सुनलहुं ओ कहलनि; 'हम हज केलौं, तखन जाहि साल [उमर] के कोनो आपदा भेल छल हम मदीना आबि गेलहुं,' जुवैर्याह कहलनि; उमर उपदेश दैत कहलनि; 'वास्तव में हम सपना देखलहुं जेना कोनो लाल मुर्गा हमरा एक-दू चुभन सं चुभल हो' - स्यूबाह संदिग्ध बुझाइत छल - आ पता चलल जे बात ई छल जे ओकरा चाकू मारल गेलै, तखन ओ लोक के ओकरा सं भेंट करय देलक, आ जे लोक सब सं पहिने ओकरा सं भेंट केलकै, ओ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी छल, फेर मदीना के लोक, सीरिया के लोक के, आ के लोक के सेहो अनुमति देलक इराक ओकरा सं भेंट करय लेल, आ हम ओकरा सं भेंट करयवला लोक सं भेंट केलहुं,’ ओ अपन कथा आगू बजलाह; 'जे कियो हुनका देखय आयल छल, हुनकर प्रशंसा करैत छल आ कानैत छल'। ओ कहैत छथि; जखन भेंट भेल तऽ पेट मे कारी पाग लपेटल छलैक मुदा खून एखनो बहैत छलैक।' जुवैरियह कहलक; तखन हम कहलियनि; 'हमरा सभकेँ वसीयत प्रदान करू!' आ हमरा सभक अतिरिक्त कियो वसीयत नहि मँगलनि, तखन ओ कहलनि; 'अल्लाह के किताब - कुरान - के मजबूती स पकड़ू, कियाक त जाबे तक ओकर पालन करब ताबे तक भटकब नै'। तखन हम कहलियनि; 'हमरा सभकेँ वसीयत प्रदान करू!' ओ कहैत छथि; 'हम अहाँ के मुहाजिरीन के वसीयत करब, कारण लोक के संख्या बेसी भ जायत आ ओ कम भ जायत, आ हम अहाँ के अंसार के वसीयत करब, कारण ओ सब इस्लामी समुदाय अछि जाहि में इस्लाम वापस आबि जायत, आ हम अहाँ के अरब के वसीयत करब, कियाक त हम अहाँ के अहलू डीज़िमाह के वसीयत करब, कियाक त हुनका सब के अहाँक पैगम्बर के संग समझौता अछि आ अहाँक परिवार के स्रोत अछि।' रोजी-रोटी, हमरासँ उठू!' जुवैरिया कहलक; 'आ ओ हमरा सभ मे वसीयतक शब्दक अतिरिक्त किछु नहि जोड़लनि'। मुहम्मद बिन जा'फर कहलनि; शु'बाह कहलक; 'तखन हम तकर बाद हुनकासँ पुछलियनि, तेँ ओ अरबक विषयमे कहलनि; 'हम अरब के सेहो तोरा सौंपने रही, कारण ओ सभ तोहर भाइ अछि आ ओकर दुश्मन सेहो तोहर दुश्मन'। हमरा सभकेँ कहलक अछि [हज्जाज] हमरा सभकेँ कहलक अछि [स्यूबाह] हम [अबू हमजाह अदल द्लुबाई] [जुवैर्याह बिन कुदामाह]सँ कहैत सुनलहुँ जे ओ कहलनि; 'हम हज केलहुं, तखन जाहि साल उमर के दुर्भाग्य भेल छल हम मदीना आबि गेलहुं,' ओ आगू कहलनि; उमर उपदेश दैत बजलाह; 'असल मे सपना मे देखलहुँ जे एकटा लाल मुर्गा हमरा एक-दू चुभन सँ चुभ रहल अछि' -स्यू'बाह केँ संदेह बुझाइत छल-, आ शुक्र दिन धरि ओकरा चाकू मारल गेलैक। तखन ओ हदीसक जिक्र ऊपर जकाँ केलनि, सिवाय एहि बातक जे [उमर] कहलनि; 'हम अहाँक अहलु ज़ीम्माह प्रदान करैत छी, निश्चित रूप सँ हुनका सभ केँ अहाँक नबी सँ गारंटी छनि' | शु'बाह कहलक; तखन हम तकर बाद हुनकासँ पुछलियनि, तेँ ओ अरबक विषयमे उत्तर देलनि; 'आ हम अहाँ सभ अरब सभ केँ गवाही दैत छी, ओ सभ अहाँक भाइ अछि आ ओकर दुश्मन अहाँक दुश्मन'।
Imam Ahmad : 343
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ وَعَبْدُ الْوَهَّابِ عَنْ سَعِيدٍ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ شَهِدَ عِنْدِي رِجَالٌ مَرْضِيُّونَ فِيهِمْ عُمَرُ وَأَرْضَاهُمْ عِنْدِي عُمَرُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ صَلَاةٍ بَعْدَ صَلَاةِ الصُّبْحِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ وَبَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ
हमरा सब के [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के [सईद] आ [अब्दुल वहाब] के [सईद] स [कतदाह] स [अबुल अलियाह] स [इब्न अब्बास] स कहलक अछि, जे ओ कहलनि; 'हम अपन बगल में बरकत आदमी के गवाही देने छी, हुनका सब में [उमर], आ हमरा लगैत अछि जे हुनका सब में सब सं बेसी बरकत वाला उमर छथि, -ओ सब गवाही दैत छथि- जे अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) फजर के नमाज के बाद सूर्योदय तक आ असर के नमाज के बाद सूर्यास्त तक नमाज मना देने छैथ'।
Imam Ahmad : 344
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنِ الشَّعْبِيِّ عَنْ سُوَيْدِ بْنِ غَفَلَةَ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَطَبَ النَّاسَ بِالْجَابِيَةِ فَقَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ لُبْسِ الْحَرِيرِ إِلَّا مَوْضِعَ أُصْبُعَيْنِ أَوْ ثَلَاثَةٍ أَوْ أَرْبَعَةٍ وَأَشَارَ بِكَفِّهِ
हमरा सब के [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के [कतादह] स [सैद] के [सुवैद बिन गफलाह] स [एश स्या'बी] स कहलक अछि जे [उमर] जबिया में लोक के प्रवचन देलखिन तखन ओ कहलनि; 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रेशमी कपड़ा पहिरब मना क' देने छथि सिवाय मात्र दू आँगुर वा तीन आँगुर वा चारि आँगुरक आकारक, आ ओ ओकरा अपन हाथक हथेली दिस देखाबैत छथि |'
Imam Ahmad : 345
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمَيِّتُ يُعَذَّبُ فِي قَبْرِهِ بِمَا نِيحَ عَلَيْهِ
हमरा सब के [मुहम्मद बिन जाफर] हमरा सब के [कतदाह] स [सईद] स [सईद बिन अल मुसैयब] स [इब्न उमर] स [उमर] स कहलक अछि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि; 'एकटा मृत व्यक्ति के ओकर प्रति नियहाह -विलाप- के कारण ओकर कब्र में यातना देल जायत'।
Imam Ahmad : 346
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا كَهْمَسٌ عَنِ ابْنِ بُرَيْدَةَ وَيَزِيدُ بْنُ هَارُونَ حَدَّثَنَا كَهْمَسٌ عَنِ ابْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ سَمِعَ ابْنَ عُمَرَ قَالَ حَدَّثَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ بَيْنَمَا نَحْنُ ذَاتَ يَوْمٍ عِنْدَ نَبِيِّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ طَلَعَ عَلَيْنَا رَجُلٌ شَدِيدُ بَيَاضِ الثِّيَابِ شَدِيدُ سَوَادِ الشَّعَرِ لَا يُرَى قَالَ يَزِيدُ لَا نَرَى عَلَيْهِ أَثَرَ السَّفَرِ وَلَا يَعْرِفُهُ مِنَّا أَحَدٌ حَتَّى جَلَسَ إِلَى نَبِيِّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَسْنَدَ رُكْبَتَيْهِ إِلَى رُكْبَتَيْهِ وَوَضَعَ كَفَّيْهِ عَلَى فَخِذَيْهِ ثُمَّ قَالَ يَا مُحَمَّدُ أَخْبِرْنِي عَنْ الْإِسْلَامِ مَا الْإِسْلَامُ فَقَالَ الْإِسْلَامُ أَنْ تَشْهَدَ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَتُقِيمَ الصَّلَاةَ وَتُؤْتِيَ الزَّكَاةَ وَتَصُومَ رَمَضَانَ وَتَحُجَّ الْبَيْتَ إِنْ اسْتَطَعْتَ إِلَيْهِ سَبِيلًا قَالَ صَدَقْتَ قَالَ فَعَجِبْنَا لَهُ يَسْأَلُهُ وَيُصَدِّقُهُ قَالَ ثُمَّ قَالَ أَخْبِرْنِي عَنْ الْإِيمَانِ قَالَ الْإِيمَانُ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَالْقَدَرِ كُلِّهِ خَيْرِهِ وَشَرِّهِ قَالَ صَدَقْتَ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ الْإِحْسَانِ مَا الْإِحْسَانُ قَالَ يَزِيدُ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنْ لَمْ تَكُنْ تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ السَّاعَةِ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ بِهَا مِنْ السَّائِلِ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ أَمَارَاتِهَا قَالَ أَنْ تَلِدَ الْأَمَةُ رَبَّتَهَا وَأَنْ تَرَى الْحُفَاةَ الْعُرَاةَ رِعَاءَ الشَّاءِ يَتَطَاوَلُونَ فِي الْبِنَاءِ قَالَ ثُمَّ انْطَلَقَ قَالَ فَلَبِثَ مَلِيًّا قَالَ يَزِيدُ ثَلَاثًا فَقَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا عُمَرُ أَتَدْرِي مَنْ السَّائِلُ قَالَ قُلْتُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ فَإِنَّهُ جِبْرِيلُ أَتَاكُمْ يُعَلِّمُكُمْ دِينَكُمْ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ حَدَّثَنَا كَهْمَسٌ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ سَمِعَ ابْنَ عُمَرَ قَالَ حَدَّثَنَا عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كُنَّا جُلُوسًا عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ إِلَّا أَنَّهُ قَالَ وَلَا يُرَى عَلَيْهِ أَثَرُ السَّفَرِ وَقَالَ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَلَبِثْتُ ثَلَاثًا فَقَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا عُمَرُ
हमरा सब के [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के [कहमस] के [इब्न बुराइदा] स कहलक अछि। आ हमरा सभ केँ [यजीद बिन हारून] हमरा सभ केँ [कहमस] केँ [इब्न बुराइदा] सँ [याह्या बिन या'मर] सँ कहने छथि जे [इब्नु उमर] केँ कहैत सुनने छथि; हमरा [उमर बिन खथथब] केँ कहि क’ ओ कहलनि; 'एक दिन जखन हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल में छलहुं त अचानक एकटा आदमी हमरा सब के सामने आबि गेल, ओकर कपड़ा बहुत उज्जर छल आ ओकर केश बहुत कारी छल,' - [यजीद] कहलनि; - 'हमरा सभकेँ यात्रा करबाक कोनो संकेत नहि देखलहुँ आ ने कियो हुनका चिन्हैत छलहुँ ।' तखन ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने बैसि अपन ठेहुन ठेहुन पर राखि देलक, आ अपन हथेली जाँघ पर राखि देलक, तखन ओ कहलनि; 'हे मुहम्मद, इस्लाम की होइत छैक से कहू!' ओ जवाब देलनि: 'इस्लाम ई अछि जे अहाँ गवाही दैत छी जे अल्लाह के छोड़ि कोनो देवता - इबादत के योग्य - नहि छथि आ मुहम्मद अल्लाह के रसूलुल्लाह छथि, तखन नमाज करू, जकात करू, रमदलान महीना में रोजा करू आ जँ सक्षम छी त हज करू'। ओ -मनुष्य- कहलक; 'अहाँ सही कहैत छी'। ओ -उमर- कहलनि; 'त' हम सभ हुनका सँ आश्चर्यचकित भ' गेलहुँ, ओ पुछलनि मुदा फेर पुष्टि केलनि'। उमर बजलाह; तखन ओ कहलनि; 'कहू जे विश्वास की होइत छैक ?' ओ जवाब देलनि: 'ईमान ई अछि जे अहाँ अल्लाह, हुनकर फरिश्ता, हुनकर किताब, हुनकर रसूलुल्लाह, अंतिम दिन आ नीक-बुरा भाग्य पर विश्वास करैत छी'। ओ कहैत छथि; 'अहाँ ठीके कहैत छी', ओ कहलनि; 'तखन कहू इहसान की अछि ?' यजीद कहलनि; ओ जवाब देलखिन: 'अहाँ अल्लाह के एना पूजा करैत छी जेना हुनका देखैत छी आ जौं हुनका नहि देखि सकैत छी त सचमुच ओ अहाँ के देखैत छथि'। ओ कहैत छथि; 'तखन प्रलयक विषय मे कहू!' ओ उत्तर देलनि: 'पुछल जा रहल व्यक्ति केँ प्रश्नकर्ता सँ बेसी नहि बुझल छनि', ओ कहलनि; 'तखन संकेतक बात कहू!' ओ उत्तर देलनि: 'जखन कोनो दासी अपन मालिक केँ जन्म दैत अछि, जखन अहाँ देखैत छी जे नंगटे पैर - कोनो चप्पल वा जूता नहि - आ कोनो कपड़ा आ बकरी चरबाह एक दोसरा सँ भवन बनेबाक होड़ मे - बहुत वैभव मे घमंड करैत -'। उमर बजलाह; 'तखन ओ आदमी चलि गेल'। उमर बजलाह; 'बहुत दिन पहिने नहि'। यजीद कहलनि; 'तीन दिन' के बाद रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा स पूछलखिन: 'हे उमर, अहाँ के पता अछि जे प्रश्नकर्ता के अछि?' उमर जबाब देलकै; हम कहलियनि; 'अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह बेसी जनैत छथि'। ओ कहलनि: 'से त' जिब्राईल छथि, ओ अहाँक दीन -धर्मक विषय मे अहाँ केँ सिखाब' लेल आयल छलाह'।
Imam Ahmad : 347
حَدَّثَنَا بَهْزٌ قَالَ وَحَدَّثَنَا عَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا هَمَّامٌ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ أَبِي نَضْرَةَ قَالَ قُلْتُ لِجَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ إِنَّ ابْنَ الزُّبَيْرِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَنْهَى عَنْ الْمُتْعَةِ وَإِنَّ ابْنَ عَبَّاسٍ يَأْمُرُ بِهَا قَالَ فَقَالَ لِي عَلَى يَدِي جَرَى الْحَدِيثُ تَمَتَّعْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ عَفَّانُ وَمَعَ أَبِي بَكْرٍ فَلَمَّا وَلِيَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَطَبَ النَّاسَ فَقَالَ إِنَّ الْقُرْآنَ هُوَ الْقُرْآنُ وَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هُوَ الرَّسُولُ وَإِنَّهُمَا كَانَتَا مُتْعَتَانِ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِحْدَاهُمَا مُتْعَةُ الْحَجِّ وَالْأُخْرَى مُتْعَةُ النِّسَاءِ
हमरा सभ [बहज] केँ कहि ओ कहलनि; आ हमरा सभ केँ ['अफ्फान] कहि क' दुनू गोटे कहलनि; हमरा सब स [हम्मम] [अबू नदलाह] स हमरा सब स [कताद] स संबंधित केने छथि ओ कहलनि; हम [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] केँ कहलियनि; कि इब्न अज़ जुबैर मुथ'अह विवाह पर रोक लगा देलनि जखन कि इब्न अब्बास एकर आदेश देलनि, ओ -अबू नदलाह- कहलनि; तखन जाबिर बिन अब्दुल्ला हमरा गप्पक प्रवाहक अनुसार कहलनि; 'हमरा सब के एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग मुतअह विवाह भेल छल।' 'अफ्फान बाजल; 'और अबू बकर के साथ'। तखन जखन [उमर] केँ खलीफा नियुक्त कयल गेल त' ओ लोकक सोझाँ प्रवचन देलनि, ई कहैत; 'वास्तव में कुरान कुरान छै, आरू सचमुच रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वस्ल्लम रसूल छै, आरू सचमुच दू मुतअह रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के समय में घटित होलै, एक हज -हाजी तमत्तू के मुतअत छेलै- दोसरऽ महिला के मुतअत छेलै -विवाह मुत'आ-' ।
Imam Ahmad : 348
حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ أَنْبَأَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ هُبَيْرَةَ عَنْ أَبِي تَمِيمٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَوْ أَنَّكُمْ تَوَكَّلْتُمْ عَلَى اللَّهِ حَقَّ تَوَكُّلِهِ لَرَزَقَكُمْ كَمَا يَرْزُقُ الطَّيْرَ تَغْدُو خِمَاصًا وَتَرُوحُ بِطَانًا
हमरा सब के कहलक अछि [हज्जाज] हमरा सब के [इब्न लहिअह] के [अब्दुल्लाह बिन हुबैरा] स [अबू तमीम] स रिपोर्ट केने अछि जे ओ [उमर बिन अल खथथब] के कहैत सुनने छल; हम सुनलियैन जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत छथि : 'जँ अहाँ अल्लाह पर यथासंभव भरोसा राखब त' अहाँ केँ रोजी-रोटी अवश्य देल जायत, जेना चिड़ै केँ रोजी-रोटी देल जाइत छैक, ओ भोर मे खाली उड़ैत अछि आ भरल-पूरल वापस आबि जाइत अछि'।
Imam Ahmad : 349
حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ حَدَّثَنَا لَيْثٌ حَدَّثَنِي بُكَيْرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ بُسْرِ بْنِ سَعِيدٍ عَنْ ابْنِ السَّاعِدِيِّ الْمَالِكِيِّ أَنَّهُ قَالَ اسْتَعْمَلَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَلَى الصَّدَقَةِ فَلَمَّا فَرَغْتُ مِنْهَا وَأَدَّيْتُهَا إِلَيْهِ أَمَرَ لِي بِعِمَالَةٍ فَقُلْتُ لَهُ إِنَّمَا عَمِلْتُ لِلَّهِ وَأَجْرِي عَلَى اللَّهِ قَالَ خُذْ مَا أُعْطِيتَ فَإِنِّي قَدْ عَمِلْتُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَعَمَّلَنِي فَقُلْتُ مِثْلَ قَوْلِكَ فَقَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أُعْطِيتَ شَيْئًا مِنْ غَيْرِ أَنْ تَسْأَلَ فَكُلْ وَتَصَدَّقْ
हमरा सब के कहलक अछि [हज्जाज] हमरा सब के कहलक अछि [लैट्स] हमरा [बुकाइर बिन अब्दुल्लाह] के [बस्र बिन सईद] स [इब्न अस सईदी] अल मलिक स कहलक अछि जे ओ कहलक; [उमर बिन अल खथथब] हमरा जकात वसूली करय वाला के रूप में नियुक्त केलनि, हम एकरा पूरा केलाक बाद हम जकात हुनका सौंप देलियनि, तखन उमर हमरा मजदूरी लेबय के आदेश देलनि, तें हम हुनका कहलियनि; 'हम केवल अल्लाह के लेल काज करैत छी आ हमर इनाम केवल अल्लाह के तरफ सं अछि'। उमर जबाब देलकै; 'जे अहाँ के देल गेल अछि से लिय, कारण हम एकर अनुभव रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसलम के समय में केने रही, ओ हमरा -जकात वसूली के काज सौंपने छलाह- तखन हम जेना अहाँ कहने रही, तखन हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा कहलनि: 'जँ अहाँ के बिना माँगने किछु देल गेल अछि, तखन ओकरा खाउ आ भिक्षा दिअ'।'
Imam Ahmad : 350
حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ حَدَّثَنَا لَيْثٌ حَدَّثَنِي بُكَيْرٌ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ سَعِيدٍ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ هَشَشْتُ يَوْمًا فَقَبَّلْتُ وَأَنَا صَائِمٌ فَأَتَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ صَنَعْتُ الْيَوْمَ أَمْرًا عَظِيمًا قَبَّلْتُ وَأَنَا صَائِمٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرَأَيْتَ لَوْ تَمَضْمَضْتَ بِمَاءٍ وَأَنْتَ صَائِمٌ فَقُلْتُ لَا بَأْسَ بِذَلِكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَفِيمَ
हमरा सब के कहलक अछि [हज्जाज] हमरा सब के कहलक अछि [लैट्स] हमरा [बुकाइर] के [अब्दुल मलिक बिन सईद अल अंसारी] स [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] स [उमर बिन अल खथथब] स कहलक अछि जे ओ कहलक; 'एक दिन हमर इच्छा - हमर वासना - भड़कि गेल, तखन हम अपन - पत्नी - के चुम्मा लेलहुँ, भले हम रोजा रखैत रही, तें हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लग आबि कहलियनि; 'आइ हम एकटा पैघ -गलती- केलौं, उपवास रहितो अपन -पत्नी- के चुम्मा लेलौं'। रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'अपन रोजा के बादो अगर अहां अपन मुंह के पानी सं कुल्ला करब त अहां के की लगैत अछि?' हम उत्तर देलियनि; 'ठीक छै -व्रत नै तोड़ै छै-'। तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलथिन्ह : तखन समस्या कतय अछि ?
Imam Ahmad : 351
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ إِسْحَاقَ أَنْبَأَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ هُبَيْرَةَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا تَمِيمٍ الْجَيْشَانِيَّ يَقُولُ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَوْ أَنَّكُمْ كُنْتُمْ تَوَكَّلُونَ عَلَى اللَّهِ حَقَّ تَوَكُّلِهِ لَرَزَقَكُمْ كَمَا يَرْزُقُ الطَّيْرَ أَلَا تَرَوْنَ أَنَّهَا تَغْدُو خِمَاصًا وَتَرُوحُ بِطَانًا
हमरा सब के कहलक अछि [याह्या बिन इशाक] हमरा सब के कहलक अछि [इब्न लहिआह] हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुल्लाह बिन हुबैराह] ओ कहलक; हम सुनलहुँ [अबू तमीम अल जैस्यानी] कहैत छथि; हम सुनलहुँ [उमर बिन अल खथथब] कहैत छथि; हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनलहुं: 'जँ अहाँ अल्लाह पर यथासंभव भरोसा राखब त' अहाँ केँ रोजी-रोटी अवश्य देल जायत, ठीक ओहिना जेना चिड़ै केँ रोजी-रोटी देल जाइत छैक, की अहाँ ई नहि देखैत छी जे ओ भोरे खाली उड़ि क' भरल-पूरल वापस आबि जाइत अछि'।
Imam Ahmad : 352
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنِ ابْنِ يَعْمَرَ قَالَ قُلْتُ لِابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّا نُسَافِرُ فِي الْآفَاقِ فَنَلْقَى قَوْمًا يَقُولُونَ لَا قَدَرَ فَقَالَ ابْنُ عُمَرَ إِذَا لَقِيتُمُوهُمْ فَأَخْبِرُوهُمْ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ مِنْهُمْ بَرِيءٌ وَأَنَّهُمْ مِنْهُ بُرَآءُ ثَلَاثًا ثُمَّ أَنْشَأَ يُحَدِّثُ بَيْنَمَا نَحْنُ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجَاءَ رَجُلٌ فَذَكَرَ مِنْ هَيْئَتِهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ادْنُهْ فَدَنَا فَقَالَ ادْنُهْ فَدَنَا فَقَالَ ادْنُهْ فَدَنَا حَتَّى كَادَ رُكْبَتَاهُ تَمَسَّانِ رُكْبَتَيْهِ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَخْبِرْنِي مَا الْإِيمَانُ أَوْ عَنْ الْإِيمَانِ قَالَ تُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَتُؤْمِنُ بِالْقَدَرِ قَالَ سُفْيَانُ أُرَاهُ قَالَ خَيْرِهِ وَشَرِّهِ قَالَ فَمَا الْإِسْلَامُ قَالَ إِقَامُ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءُ الزَّكَاةِ وَحَجُّ الْبَيْتِ وَصِيَامُ شَهْرِ رَمَضَانَ وَغُسْلٌ مِنْ الْجَنَابَةِ كُلُّ ذَلِكَ قَالَ صَدَقْتَ صَدَقْتَ قَالَ الْقَوْمُ مَا رَأَيْنَا رَجُلًا أَشَدَّ تَوْقِيرًا لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ هَذَا كَأَنَّهُ يُعَلِّمُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَخْبِرْنِي عَنْ الْإِحْسَانِ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ أَوْ تَعْبُدَهُ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنْ لَا تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ كُلُّ ذَلِكَ نَقُولُ مَا رَأَيْنَا رَجُلًا أَشَدَّ تَوْقِيرًا لِرَسُولِ اللَّهِ مِنْ هَذَا فَيَقُولُ صَدَقْتَ صَدَقْتَ قَالَ أَخْبِرْنِي عَنْ السَّاعَةِ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ بِهَا مِنْ السَّائِلِ قَالَ فَقَالَ صَدَقْتَ قَالَ ذَلِكَ مِرَارًا مَا رَأَيْنَا رَجُلًا أَشَدَّ تَوْقِيرًا لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ هَذَا ثُمَّ وَلَّى قَالَ سُفْيَانُ فَبَلَغَنِي أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْتَمِسُوهُ فَلَمْ يَجِدُوهُ قَالَ هَذَا جِبْرِيلُ جَاءَكُمْ يُعَلِّمُكُمْ دِينَكُمْ مَا أَتَانِي فِي صُورَةٍ إِلَّا عَرَفْتُهُ غَيْرَ هَذِهِ الصُّورَةِ حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنِ ابْنِ يَعْمَرَ قَالَ سَأَلْتُ ابْنَ عُمَرَ أَوْ سَأَلَهُ رَجُلٌ إِنَّا نَسِيرُ فِي هَذِهِ الْأَرْضِ فَنَلْقَى قَوْمًا يَقُولُونَ لَا قَدَرَ فَقَالَ ابْنُ عُمَرَ إِذَا لَقِيتَ أُولَئِكَ فَأَخْبِرْهُمْ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ مِنْهُمْ بَرِيءٌ وَهُمْ مِنْهُ بُرَآءُ قَالَهَا ثَلَاثَ مَرَّاتٍ ثُمَّ أَنْشَأَ يُحَدِّثُنَا قَالَ بَيْنَا نَحْنُ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجَاءَ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَدْنُو فَقَالَ ادْنُهْ فَدَنَا رَتْوَةً ثُمَّ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَدْنُو فَقَالَ ادْنُهْ فَدَنَا رَتْوَةً ثُمَّ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَدْنُو فَقَالَ ادْنُهْ فَدَنَا رَتْوَةً حَتَّى كَادَتْ أَنْ تَمَسَّ رُكْبَتَاهُ رُكْبَةَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِيمَانُ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ
हमरा सब के [अबू नुअइम] हमरा सब के [सुफयान] के ['अलकामाह बिन मर्तसाद] स [सुलेमान बिन बुराइदा] स [इब्न या'मर] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [इब्न उमर] केँ कहलियनि; 'हम सभ धरती भरि घुमलहुँ, तखन एकटा एहन लोक भेटल जे कहने छल जे कोनो भाग्य नहि अछि' । इब्न उमर कहलनि; 'जखन अहाँ हुनका सभसँ भेंट करब तँ हुनका सभकेँ कहि दियौन जे अब्दुल्ला बिन उमर हुनका सभकेँ छोड़ि रहल छथि, आ ओ सभ हुनका सभकेँ छोड़ि रहल छथि,' तीन बेर। तखन ओ एकटा हदीस सुनौलनि; जखन हम सब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास छलहुं त अचानक एकटा आदमी आबि गेल - इब्न उमर हुनकर विशेषता के जिक्र केलनि - रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन कहलनि: 'नजदी आ जाउ!' तखन ओ आदमी नजदीक आबि गेल, तखन अल्लाह केर रसूलुल्लाह फेर कहलनि: 'नजदी आउ!' तेँ ओ आदमी नजदीक आबि गेल, जे ओकर ठेहुन लगभग एक दोसरा केँ छूबि गेलै। तखन ओ कहलनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमरा बताउ जे ईमान की होइत छैक?' आकि, 'आस्थाक विषय मे बताउ?' ओ जवाब देलनि: 'अहाँ अल्लाह, हुनकर फरिश्ता, हुनकर किताब, हुनकर रसूलुल्लाह, अंतिम दिन पर विश्वास करैत छी आ भाग्य पर विश्वास करैत छी'। सुफियन बजलाह; हमरा लागल जे ओ कहने छथि : 'नीक आ बेजाय'। ओ आदमी पुछलकै; 'इस्लाम की होइत छैक ?' ओ जवाब देलनि : 'नमाज करब, जकात करब, हज करब, रमजान मास मे रोजा करब आ जुनुब सँ स्नान करब', हुनकर सबटा जवाब पर टिप्पणी कयल गेल; 'अहाँ सही कहैत छी, सही कहैत छी'। संगी सभ कहलक; 'हमरा सब कहियो एहन आदमी के नहि देखने छी जे एहि आदमी स बेसी रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम के महिमामंडन करैत हो, लगैत अछि जे ओ रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसलम' के जनैत छथि। तखन ओ कहलनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, इहसान के बारे में बताइए!' ओ जवाब देलखिन: 'अहाँ अल्लाह के पूजा करैत छी या हुनकर इबादत करैत छी जेना हुनका देखैत छी, जौं हुनका नहि देखि सकैत छी त सचमुच ओ अहाँ के देखैत छथि'। हम सब कहैत छी; हम सब कहियो एहन आदमी के नहि देखलहुं जे एहि आदमी स बेसी रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के महिमामंडन केने होथि, तखन ओ कहलनि; 'अहाँ सही कहैत छी, सही कहैत छी'। ओ कहैत छथि; 'एपोकैलिप्सक विषय मे कहू!' ओ उत्तर देलनि: 'जे पूछल जाइत अछि, प्रश्नकर्ता सँ नीक कियो नहि जनैत अछि'। ओ कहैत छथि; तखन ओ आदमी बाजल; 'अहाँ सही कहैत छी'। ओ सदिखन एहने कहैत छलाह, आ हम सब कहियो एहन आदमी के नहि देखलहुं जे एहि आदमी स बेसी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के महिमामंडन करय, तखन ओ आदमी चलि गेल। -सुफयान कहलक; - 'तखन हमरा खबरि आयल जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'ओकरा ताकू!' मुदा हुनका सभकेँ नहि भेटलनि , ओ बजलाह : 'ई आदमी जिब्रिल अछि , अहाँक दीनक विषयमे अहाँकेँ सिखाबए लेल आयल छल , ओ हमरासँ कहियो एहन कोनो बातसँ नहि भेंट केलक जाबत हम ओकरा एहि बेरक अतिरिक्त नहि चिन्हितहुँ ' । हमरा सब के [अबू अहमद] हमरा सब के [सुफयान] के ['अलकामाह बिन मर्तसाद] स [सुलेमान बिन बुराइदा] स [इब्न या'मर] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [इब्न उमर] स पूछलियैन या ओ -इब्नू उमर- स एकटा आदमी पूछलखिन; 'सत्ते, हम एक बेर एहि धरती पर भटकलहुं आ एकटा एहन लोक सं भेंट भेल जे कहने छल जे कोनो भाग्य नहिं,' तखन इब्न उमर जवाब देलनि; 'जँ अहाँ सभसँ भेंट करब तँ कहू जे इब्न उमर हुनका सभसँ अलग भ' गेलाह, आ ओ सभ इब्न उमरसँ अलग भ' गेलाह', ओ तीन बेर कहलनि, तखन ओ हमरा सभकेँ कहलनि आ कहलनि; जखन हम सब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास छलहुं त अचानक एकटा आदमी आबि क कहलक जे हे रसूलुल्लाह, की हम नजदीक आबि सकैत छी? ओ उत्तर देलखिन: 'नजदी आउ!' तखन एक डेग नजदीक आबि गेलाह, तखन कहलनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की हम नजदीक आबि सकैत छी?' ओ उत्तर देलखिन: 'नजदी आउ!' तखन एक डेग नजदीक आबि फेर बजलाह; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की हम नजदीक आबि सकैत छी?' ओ उत्तर देलखिन: 'नजदी आउ!' तखन ओ एक डेग नजदीक आबि गेलाह जे हुनकर ठेहुन लगभग नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ठेहुन के छूबि गेलनि, तखन ओ कहलनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, ईमान की छै?' तखन इब्न उमर उपरोक्त हदीसक सार्थक उल्लेख केलनि।
Imam Ahmad : 353
حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ مُوسَى الْأَشْيَبُ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ أَبِي الْوَلِيدِ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سُرَاقَةَ الْعَدَوِيِّ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ أَظَلَّ رَأْسَ غَازٍ أَظَلَّهُ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَمَنْ جَهَّزَ غَازِيًا حَتَّى يَسْتَقِلَّ بِجَهَازِهِ كَانَ لَهُ مِثْلُ أَجْرِهِ وَمَنْ بَنَى مَسْجِدًا يُذْكَرُ فِيهِ اسْمُ اللَّهِ بَنَى اللَّهُ لَهُ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ
हमरा सब के कहलक अछि [हसन बिन मूसा अल असी-याब] हमरा सब के कहलक अछि [इब्नु लहिअह] हमरा सब के [अल वलीद बिन अबुल वालिद] के [उस्मान बिन अब्दुल्लाह बिन सूरकाह अल अदावी] स [उमर बिन अल खथथाब] स कहलक अछि ओ कहलनि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, जे कियो योद्धा के सिर के आश्रय देत, अल्लाह ओकरा कयामत के दिन आश्रय देत, जे कियो योद्धा के उपकरण तैयार करत ताकि ओकर इंतजाम भ सकय, तखन ओकरा लेल ई योद्धा के इनाम के समान अछि। आ जे कियो मस्जिद बनाओत जाहि मे अल्लाह के नाम लिखल हो, अल्लाह ओकरा लेल स्वर्ग मे घर जरूर बनौताह'।
Imam Ahmad : 354
حَدَّثَنَا عَتَّابٌ يَعْنِي ابْنَ زِيَادٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ يَعْنِي ابْنَ الْمُبَارَكِ أَنْبَأَنَا يُونُسُ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنِ السَّائِبِ بْنِ يَزِيدَ وَعُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ عَنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدٍ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ عَبْد اللَّهِ وَقَدْ بَلَغَ بِهِ أَبِي إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ فَاتَهُ شَيْءٌ مِنْ وِرْدِهِ أَوْ قَالَ مِنْ جُزْئِهِ مِنْ اللَّيْلِ فَقَرَأَهُ مَا بَيْنَ صَلَاةِ الْفَجْرِ إِلَى الظُّهْرِ فَكَأَنَّمَا قَرَأَهُ مِنْ لَيْلَتِهِ
हमरा सब के कहलक अछि [अत्ताब यानी इब्न जियाद] हमरा सब के बताने अछि [अब्दुल्लाह यानी इब्नुल मुबारक] हमरा सब के [यूनुस] के [अज जुहरी] स [अस स`इब बिन यजीद] स आ [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह] स [अब्दुररहमान बिन अब्द] स [उमर बिन अल] स कहलक अछि खथथब], -अब्दुल्ला कहलनि; हमर पिताजी एकरा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तक पहुँचा देने छथि - जे ओ कहने छलाह : 'जे कियो अपन विरिद सँ किछु छोड़ि दैत अछि,' वा ओ कहलनि: 'ओहि मे सँ किछु सँ राति मे आ फेर भोर आ मध्याह्नक नमाजक बीच पढ़ि लेत, त' जेना राति मे पढ़ि लेत'।
Imam Ahmad : 355
حَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ الْوَلِيدِ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ أَبِي مَيْسَرَةَ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ لَمَّا نَزَلَ تَحْرِيمُ الْخَمْرِ قَالَ اللَّهُمَّ بَيِّنْ لَنَا فِي الْخَمْرِ بَيَانًا شَافِيًا فَنَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ الَّتِي فِي سُورَةِ الْبَقَرَةِ { يَسْأَلُونَكَ عَنْ الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ قُلْ فِيهِمَا إِثْمٌ كَبِيرٌ } قَالَ فَدُعِيَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقُرِئَتْ عَلَيْهِ فَقَالَ اللَّهُمَّ بَيِّنْ لَنَا فِي الْخَمْرِ بَيَانًا شَافِيًا فَنَزَلَتْ الْآيَةُ الَّتِي فِي سُورَةِ النِّسَاءِ { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَقْرَبُوا الصَّلَاةَ وَأَنْتُمْ سُكَارَى } فَكَانَ مُنَادِي رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَقَامَ الصَّلَاةَ نَادَى أَنْ لَا يَقْرَبَنَّ الصَّلَاةَ سَكْرَانُ فَدُعِيَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقُرِئَتْ عَلَيْهِ فَقَالَ اللَّهُمَّ بَيِّنْ لَنَا فِي الْخَمْرِ بَيَانًا شَافِيًا فَنَزَلَتْ الْآيَةُ الَّتِي فِي الْمَائِدَةِ فَدُعِيَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقُرِئَتْ عَلَيْهِ فَلَمَّا بَلَغَ { فَهَلْ أَنْتُمْ مُنْتَهُونَ } قَالَ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ انْتَهَيْنَا انْتَهَيْنَا
हमरा सब के [खलाफ बिन अल वालिद] हमरा सब के [इजरायल] के [अबू इशक] स [अबू मैसारह] स [उमर बिन अल खथथब] स कहलक अछि ओ कहलनि; जखन खमेरक निषेध उतरि गेल तखन उमर बजलाह; ‘हे अल्लाह हमरा सब के खम्र के बात संतोषजनक व्याख्या के साथ समझाउ,’ तखन ई आयत उतरल, जे सूरह अल बकरा में अछि; ' -ओ सभ अहाँसँ शराब आ जुआक विषयमे पूछैत अछि । कहब : 'दुनू मे एकटा पैघ पाप-,' -QS अल बकाराह श्लोक 219-। अबू मैसाराह कहलनि; त उमर के बजाओल गेल आ ओकरा पढ़ल गेल आ ओ कहलक; 'हे अल्लाह, हमरा सब के खम्र के मामला संतोषजनक व्याख्या के साथ समझा दियौ,' तखन आन निसा अक्षर में आयत उतरल -हे विश्वासी लोक, नशा में धुत्त रहैत नमाज नै करू-, -QS An Nisa' आयत 43- अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के फोन करय वाला जखन नमाज कायम भेल त ओ चिचिया उठल; 'जाहि सँ नशा मे धुत्त लोक नमाज मे नहि आबय'। तेँ उमर केँ बजा क' पढ़ल गेलैन्ह, तखन ओ कहलनि; 'हे अल्लाह हमरा सब के एहि मामला में संतोषजनक व्याख्या के संग समझाउ'। त सूरह अल मैइदा के आयत नीचा उतरल, तखन उमर के बजा क पढ़ल गेल, फेर जखन ओ आयत पर पहुँचलाह - फेर रुकू - ओहि काज के करय सं - - QS अल मैइदा के आयत 91 - अबू मैसाराह कहलनि; तखन उमर बजलाह; 'हम रुकि जाइत छी, रुकि जाइत छी'।
Imam Ahmad : 356
حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنِ الْحَكَمِ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ صُبَيِّ بْنِ مَعْبَدٍ أَنَّهُ كَانَ نَصْرَانِيًّا تَغْلِبِيًّا فَأَسْلَمَ فَسَأَلَ أَيُّ الْعَمَلِ أَفْضَلُ فَقِيلَ لَهُ الْجِهَادُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فَأَرَادَ أَنْ يُجَاهِدَ فَقِيلَ لَهُ أَحَجَجْتَ قَالَ لَا فَقِيلَ لَهُ حُجَّ وَاعْتَمِرْ ثُمَّ جَاهِدْ فَأَهَلَّ بِهِمَا جَمِيعًا فَوَافَقَ زَيْدَ بْنَ صُوحَانَ وَسَلْمَانَ بْنَ رَبِيعَةَ فَقَالَا هُوَ أَضَلُّ مِنْ نَاقَتِهِ أَوْ مَا هُوَ بِأَهْدَى مِنْ جَمَلِهِ فَانْطَلَقَ إِلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَأَخْبَرَهُ بِقَوْلِهِمَا فَقَالَ هُدِيتَ لِسُنَّةِ نَبِيِّكَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ لِسُنَّةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमरा सभकेँ [अफ्फान] हमरा सभकेँ [अफ्फान] [अल हकम]सँ [अबू व`इल]सँ [शुबै बिन मा'बाद]सँ [स्यूबाह] कहलक अछि जे पहिने ओ तगलिबसँ ईसाई छलाह, तखन ओ इस्लाम स्वीकार केलनि, तखन पुछलनि; 'कोन अभ्यास बेसी जरूरी अछि ?' एना उत्तर देलनि; 'अल्लाह के रास्ते में जिहाद'। तखन ओ जिहादक लेल निकलय बला छलाह, आ हुनका कहल गेलनि; 'अहाँ कहियो हज केने छी?' ओ उत्तर देलथिन; 'एखन धरि नहि,' तखन हुनका कहल गेलनि; 'पहिने हज आ उमरा करू फेर जिहाद करू'। तखन हुनकर इरादा छलनि जे एक संग हज आ उमरा करथि, फेर जैद बिन शुहान आ सलमान बिन रबियाह सं भेंट केलनि, तें दुनू गोटे कहलनि; 'ओ अपन ऊँट सँ बेसी भटकल अछि,' वा; 'ओ अपन ऊँटसँ बेसी मार्गदर्शित नहि छथि' । अस्तु, ओ उमर लग गेलाह आ दुनू गोटेक बात कहलनि, तें [उमर] कहलनि; 'अहाँ सब के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सुन्नत के संबंध में मार्गदर्शन भेटल अछि -या- नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सुन्नत के संबंध में मार्गदर्शन भेटल अछि'।
Imam Ahmad : 357
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ هِشَامٍ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ لِلْحَجَرِ إِنَّمَا أَنْتَ حَجَرٌ وَلَوْلَا أَنِّي رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُقَبِّلُكَ مَا قَبَّلْتُكَ ثُمَّ قَبَّلَهُ
हमरा सब के [याह्या बिन सईद] के [हिशाम] स कहने छथि ओ कहलनि; हमरा [हमर पिता] केँ सूचित केने छथि जे [उमर] हाजर -असवद- केँ कहलनि; 'अहाँ त' मात्र पाथर छी, आ जँ हम रसूलुल्लाह (स.अ.व.) केँ अहाँ केँ चुम्मा लैत नहि देखितहुँ त' हम अहाँ केँ चुम्मा नहि लैतहुँ'। तखन ओ -उमर- ओकरा चुम्मा लेलक'।
Imam Ahmad : 358
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَتَى الْحَجَرَ فَقَالَ إِنِّي لَأَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ لَا تَضُرُّ وَلَا تَنْفَعُ وَلَوْلَا أَنِّي رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُقَبِّلُكَ مَا قَبَّلْتُكَ قَالَ ثُمَّ قَبَّلَهُ
हमरा सभ [वाकी'] केँ [हिस्यम] सँ [अपन पिता] सँ कहल गेल अछि जे [उमर] हाजर -असवद- लग पहुँचलाह तखन कहलनि; 'सत्ते हम जनैत छी जे अहाँ त' मात्र एकटा एहन पाथर छी जे कोनो नुकसान वा लाभ नहि द' सकैत अछि, जँ हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) केँ अहाँ केँ चुम्मा लैत नहि देखितहुँ त' हम अहाँ केँ चुम्मा नहि लैतहुँ।' ओ कहैत छथि; 'तखन उमर ओकरा चुम्मा लेलक -हाजर असवद-'।
Imam Ahmad : 359
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ الْأَعْلَى عَنْ سُوَيْدِ بْنِ غَفَلَةَ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَبَّلَهُ وَالْتَزَمَهُ ثُمَّ قَالَ رَأَيْتُ أَبَا الْقَاسِمِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِكَ حَفِيًّا يَعْنِي الْحَجَرَ
हमरा सब के [वाकी'] हमरा सब के [सुफयान] के [इब्राहिम बिन अब्दुल अ'ला] स [सुवैद बिन गफलाह] स कहलक अछि जे [उमर] हुनका चुम्मा लेलक आ पकड़ने छल -हाजर असवद-, फेर कहलक; 'हम अबुल कासिम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम -अहाँ के धीरे-धीरे चुम्मा लैत देखलहुं'। अर्थात् हाजर -असवाद-'।
Imam Ahmad : 360
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُمَرَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا جَاءَ اللَّيْلُ مِنْ هَهُنَا وَذَهَبَ النَّهَارُ مِنْ هَهُنَا فَقَدْ أَفْطَرَ الصَّائِمُ
हमरा सभकेँ [वाकी’] हमरा सभकेँ [हिस्यम बिन उर्वाह] [अपन पिता]सँ [‘अशिम बिन उमर] [अपन पिता]सँ कहलक अछि, ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे जखन एतय सं राति आबि जायत आ एतय सं दिन गायब भ जायत तखन रोजा रखनिहार के रोजा तोड़बाक समय आबि जायत।